Correct Answer: (d) माइटोकॉण्ड्रिया अपना प्रोटीन स्वयं बनाने में सक्षम नहीं होते हैं।
Solution:- माइटोकॉण्ड्रिया का अपना डीएनए तथा राइबोसोम होता है
- जो अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विशिष्ट प्रोटीन का उत्पादन करने में सक्षम होते हैं।
- इसलिए माइटोकॉण्ड्रिया को अर्ध-स्वायत्त अंगक के रूप में भी जाना जाता है।
- माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना
- जो इन्हें अर्द्ध-स्वायत्त बनाते हैं। ये कोशिका द्रव्य में तैरते रहते हैं
- सक्रिय कोशिकाओं में संख्या अधिक होती है।
- सामान्य कथन और उनका विश्लेषण
- सही कथन 1: माइटोकॉन्ड्रिया सूक्ष्मदर्शी में विशेष रंगाई के बिना आसानी से दिखाई नहीं देते।
- यह सत्य है क्योंकि उनकी संरचना पारदर्शी होती है।
- सही कथन 2: कोशिका की क्रियाएँ माइटोकॉन्ड्रिया की संख्या निर्धारित करती हैं।
- सक्रिय कोशिकाएँ जैसे मांसपेशियाँ अधिक माइटोकॉन्ड्रिया रखती हैं।
- सही कथन 3: माइटोकॉन्ड्रिया का विभाजन विखंडन द्वारा होता है।
- ये बाइनरी फिशन से वृद्धि और विभाजित होते हैं।
- गलत कथन
- कोशिका का पावर हाऊस माइटोकॉन्ड्रिया में डीएनए, आरएनए, राइबोसोम एवं एंजाइम होते हैं
- अतः यह कोशिका के बाहर भी जीवित रह सकता है—यह कथन गलत है।
- माइटोकॉन्ड्रिया में ये घटक होते हैं
- लेकिन ये कोशिका के बाहर स्वतंत्र रूप से जीवित नहीं रह सकते
- क्योंकि उनकी अनुवांशिक सामग्री मेजबान कोशिका पर निर्भर होती है
- बिना कोशिका भित्ति या पूर्ण चयापचय वे मर जाते हैं।
- अतिरिक्त तथ्य
- माइटोकॉन्ड्रिया एटीपी उत्पादन के लिए ऑक्सीडेटिव फॉस्फोराइलेशन करते हैं
- एंडोसिम्बायोटिक सिद्धांत के अनुसार प्राचीन बैक्टीरिया से उत्पन्न हुए।
- ये पौधों, जंतुओं और कवक कोशिकाओं में पाए जाते हैं।