कोशिका (जीव विज्ञान) (भाग-II)

Total Questions: 30

1. कोशिका भित्ति का प्रमुख कार्य क्या है? [MTS (T-I) 09 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) यह कोशिका को आकार और दृढ़ता प्रदान करती है
Solution:
  • कोशिका भित्ति (Cell Wall) पादप कोशिकाओं, कवक कोशिकाओं और जीवाणु कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली के बाहर पाई जाने वाली एक कठोर और अर्ध-पारगम्य परत है। इसका प्रमुख कार्य है:
  • कोशिका को निश्चित आकार प्रदान करना: यह कोशिका को एक विशिष्ट, स्थिर आकार बनाए रखने में मदद करती है।
  • दृढ़ता और यांत्रिक सहारा प्रदान करना: यह कोशिका को यांत्रिक तनाव, जैसे कि आंतरिक दबाव या बाहरी बलों से बचाती है।
  • अत्यधिक जल अवशोषण से सुरक्षा: यह कोशिका को फटने से बचाती है
  • जब यह अत्यधिक जल अवशोषित करती है।
  • पदार्थों की आवाजाही में मदद करना: यह कुछ पदार्थों को कोशिका में प्रवेश करने या बाहर निकलने की अनुमति देती है,
  • हालांकि कोशिका झिल्ली की तुलना में कम चुनिंदा होती है।
  • प्रमुख कार्य
    • कोशिका भित्ति कोशिका को निश्चित आकृति प्रदान करती है
    • आंतरिक नाजुक भागों जैसे प्लाज्मा झिल्ली और कोशिकांगों को यांत्रिक चोट
    • पर्यावरणीय तनाव तथा जैविक खतरों से बचाती है।
    • यह पादप कोशिकाओं में स्फीति (turgidity) बनाए रखती है
    • आसमाटिक दबाव सहन करने में मदद करती है तथा पेक्टिन के माध्यम से समीपवर्ती कोशिकाओं को बांधे रखती है।
    • इसके अतिरिक्त, यह चयनात्मक रूप से अणुओं को छानती है
    • जिससे पोषक तत्वों का प्रवेश-निकास नियंत्रित रहता है।​​
  • अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाएँ
    • यह पौधों को गुरुत्वाकर्षण के विपरीत सीधा खड़ा रहने में सहायता देती है
    • कोशिका विभाजन और वृद्धि के दौरान फैलाव को नियंत्रित करती है।
    • प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं (जैसे बैक्टीरिया) में यह आकार बनाए रखने
    • लाइसिस से बचावकोशिका भित्ति कोशिका का एक कठोर बाहरी आवरण है
    • जो मुख्य रूप से पादप कोशिकाओं, कवक, शैवाल और बैक्टीरिया में पाई जाती है।
    • इसका प्रमुख कार्य कोशिका को निश्चित आकार, कठोरता और सुरक्षा प्रदान करना है।​
  • संरचना
    • कोशिका भित्ति मुख्य रूप से सेल्यूलोज, हेमीसेल्यूलोज, पेक्टिन और लिग्निन जैसे पदार्थों से बनी होती है।
    • इसमें मध्य पटलिका, प्राथमिक भित्ति और द्वितीयक भित्ति जैसी परतें होती हैं
    • जो कोशिकाओं को मजबूती देती हैं। पेक्टिन वाली मध्य पटलिका समीपवर्ती कोशिकाओं को जोड़ती है।​​
  • प्रमुख कार्य
    • कोशिका भित्ति कोशिका को निश्चित आकृति प्रदान करती है
    • उसके नाजुक आंतरिक भागों जैसे कोशिका झिल्ली, नाभिक व अन्य कोशिकांगों की सुरक्षा करती है।
    • यह पादप कोशिकाओं में स्फीति (turgidity) बनाए रखती है
    • जिससे पौधा गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध खड़ा रहता है।
    • साथ ही, यह यांत्रिक तनाव, आसमाटिक दबाव और पर्यावरणीय खतरों से रक्षा करती है।​​
  • अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाएँ
    • यह कोशिका के अंदर-बाहर पदार्थों के प्रवाह को नियंत्रित करने में छनन (filtration) का कार्य करती है।
    • पेक्टिन के माध्यम से आस-पास की कोशिकाओं को बांधे रखती है, जिससे ऊतक मजबूत बनते हैं।
    • बैक्टीरिया और कवक में यह आकार बनाए रखने के अलावा रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती है।​​
  • पादपों में विशेष भूमिका
    • पादप कोशिकाओं में कोशिका भित्ति वृद्धि, फैलाव और संरचनात्मक सहारा देने में सहायक होती है।
    • यह लिग्निन की उपस्थिति से लकड़ी को कठोर बनाती है और पौधों को यांत्रिक शक्ति देती है।
    • जंतु कोशिकाओं में इसकी अनुपस्थिति के कारण वे नरम रहती हैं।​​

2. एंटोनी वान ल्यूवेनहॉक ने ....... में एकल-कोशिका वाले जीवन रूपों की खोज की थी। [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 1674
Solution:
  • एंटोनी वान ल्यूवेनहॉक (Antonie van Leeuwenhoek) एक डच वैज्ञानिक और स्व-शिक्षित माइक्रोस्कोपिस्ट थे।
  • उन्होंने 1674 में अपने स्वयं के बनाए गए शक्तिशाली सूक्ष्मदर्शी का उपयोग करके तालाब के पानी में एकल-कोशिका वाले जीव रूपों (जिन्हें उन्होंने "एनिमलक्यूल्स" कहा) का पहली बार अवलोकन किया।
  • इन जीवों में जीवाणु और प्रोटोजोआ शामिल थे। उन्हें अक्सर "सूक्ष्म जीव विज्ञान के जनक" के रूप में जाना जाता है।
  • रॉबर्ट हुक ने 1665 में मृत कॉर्क कोशिकाओं की खोज की थी, लेकिन ल्यूवेनहॉक ने जीवित कोशिकाओं की खोज की।
  • ल्यूवेनहॉक का जीवन परिचय
    • उन्होंने स्वयं उच्च गुणवत्ता वाले एकल-लेंस सूक्ष्मदर्शी बनाए
    • जो उस समय के यंत्रों से कहीं अधिक शक्तिशाली (270x तक आवर्धन) थे।
    • रॉबर्ट हुक द्वारा 1665 में कोशिकाओं की खोज के बाद, ल्यूवेनहॉक ने जीवित कोशिकाओं और सूक्ष्म जीवों का विस्तृत अध्ययन किया।​
  • एकल-कोशिका जीवन रूपों की खोज
    • 1674 में ल्यूवेनहॉक ने तालाब के पानी में स्पाइरोगाइरा शैवाल की कोशिकाओं और अन्य एककोशिकीय जीवों को देखा
    • जिन्हें उन्होंने "एनिमलक्यूल्स" (छोटे जानवर) कहा। इनमें प्रोटोजोआ, बैक्टीरिया और मुक्त-जीवित कोशिकाएँ शामिल थीं
    • जो स्वतंत्र रूप से गतिशील थीं।
    • उन्होंने दांतों की प्लाक, वर्षा जल और मल जैसे नमूनों से भी ऐसे जीव खोजे, जो जीवन के सरलतम रूप थे।​
  • वैज्ञानिक योगदान
    • ल्यूवेनहॉक को सूक्ष्मजीव विज्ञान का जनक माना जाता है
    • क्योंकि उन्होंने जीवाणुओं, शुक्राणुओं (1677), रक्त कोशिकाओं और रक्त वाहिकाओं का पहला वर्णन किया।
    • उनकी 500 से अधिक पत्र रॉयल सोसाइटी को भेजे गए, जिन्होंने स्वतः उत्पत्ति सिद्धांत को चुनौती दी।
    • उन्होंने चींटियों, घोंघों और मछलियों के विकास का भी अध्ययन किया।​
  • महत्व और विरासत
    • यह खोज ने कोशिका सिद्धांत की नींव रखी और आधुनिक जीवविज्ञान को जन्म दिया।
    • एकल-कोशिकीय जीव पृथ्वी के सबसे प्राचीन जीवन रूप हैं
    • जो जल, मिट्टी और अन्य जीवों में पाए जाते हैं। ल्यूवेनहॉक की खोजों ने बैसिलरी और प्रोटोजोआलॉजी को स्थापित किया
    • जो आज भी चिकित्सा और पर्यावरण विज्ञान में उपयोगी हैं।

3. एंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉक को 17वीं शताब्दी के अंत में की गई किस खोज के लिए जाना जाता है? [CHSL (T-I) 07 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) जीवाणु और प्रोटोजोआ का अवलोकन
Solution:
  • 17वीं शताब्दी के अंत में डच जीव वैज्ञानिक एंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉक ने सूक्ष्मदर्शी की खोज की थी
  • जिसकी सहायता से जीवाणु और प्रोटोजोआ का अवलोकन किया जाता है।
  • प्रारंभिक जीवन
    • एंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉक का जन्म 24 अक्टूबर 1632 को नीदरलैंड के डेल्फ़्ट शहर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था।
    • वे मूल रूप से एक कपड़ा व्यापारी और सर्वेक्षक थे, लेकिन वैज्ञानिक जिज्ञासा ने उन्हें सूक्ष्मदर्शी बनाने के लिए प्रेरित किया।
    • उन्होंने सैकड़ों सूक्ष्मदर्शी बनाए, जो 270 गुना तक बढ़ा सकते थे
    • उस समय के यौगिक सूक्ष्मदर्शियों से कहीं बेहतर थे।​
  • प्रमुख खोज
    • 1670 के दशक के अंत और 1680 के दशक में ल्यूवेनहॉक ने दांतों की प्लाक, मल, मूत्र और तालाब के पानी के नमूनों में जीवाणु (जिन्हें उन्होंने "एनिमलक्यूल्स" कहा) देखे।
    • 1674 में उन्होंने स्पाइरोगाइरा शैवाल जैसी स्वतंत्र कोशिकाओं का अवलोकन किया
    • जो सूक्ष्म जीव विज्ञान की नींव बनी।
    • उन्होंने रक्त कोशिकाएं, शुक्राणु, मांसपेशी फाइबर और कीड़ों की आंतरिक संरचनाएं भी खोजीं।​
  • तकनीकी योगदान
    • ल्यूवेनहॉक ने सूक्ष्मदर्शी का आविष्कार नहीं किया—यह पहले से था—लेकिन उन्होंने इसे इतना परिष्कृत किया
    • यह व्यावहारिक वैज्ञानिक उपकरण बन गया। उनके लेंस छोटे गोलाकार कांच के गोले थे
    • जो सटीक पॉलिश से बने। रॉयल सोसाइटी को भेजे पत्रों में उन्होंने विस्तृत चित्र और वर्णन दिए
    • जो 1680 के दशक तक प्रकाशित हुए।​
  • वैज्ञानिक प्रभाव
    • उनकी खोजों ने जीव विज्ञान को नई दिशा दी और उन्हें "सूक्ष्म जीव विज्ञान के जनक" बनाया।
    • हालांकि शुरुआत में संदेह हुआ, लेकिन 1683 तक रॉयल सोसाइटी ने उनकी प्रामाणिकता स्वीकार की।
    • उनकी मृत्यु 26 अगस्त 1723 को हुई, लेकिन उनकी खोजें आधुनिक माइक्रोबायोलॉजी की आधारशिला बनीं।​

4. माइटोकॉण्ड्रिया ....... में नहीं पाया जाता है। [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) जीवाणु
Solution:
  • माइटोकॉण्ड्रिया जीवाणु में नहीं पाया जाता है। माइटोकॉण्ड्रिया यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाया जाता है।
  • यह प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में उपस्थित नहीं होता है।
  • जीवाणु में प्रोकैरियोटिक कोशिका पाया जाता है। माइटोकॉण्ड्रिया को कोशिका का पॉवर हाउस कहा जाता है।
  • माइटोकॉन्ड्रिया की अनुपस्थिति
    • जीवाणु प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ हैं
    • जिनमें झिल्ली-बद्ध अंगक (organelles) जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, क्लोरोप्लास्ट या न्यूक्लियस नहीं होते।
    • इन कोशिकाओं में प्लाज्मा झिल्ली पर ही श्वसन क्रिया होती है
    • जबकि यूकेरियोटिक कोशिकाओं (जैसे पादप, जंतु कोशिकाएँ) में माइटोकॉन्ड्रिया वायवीय श्वसन द्वारा ATP उत्पन्न करता है।​
  • माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना
    • माइटोकॉन्ड्रिया एक दोहरी झिल्ली वाली संरचना है
    • बाहरी झिल्ली चिकनी और भीतरी झिल्ली क्रिस्टे (shelves) में मुड़ी हुई होती है।
    • मैट्रिक्स में माइटोकॉन्ड्रियल DNA, राइबोसोम और एंजाइम होते हैं
    • जो इसे अर्ध-स्वायत्त बनाते हैं। बाहरी झिल्ली हटाने पर इसे माइटोप्लास्ट कहते हैं।​
  • कार्य और महत्व
    • यह कोशिका का 'पावरहाउस' है, जहाँ Krebs चक्र और इलेक्ट्रॉन ट्रांसपोर्ट चेन से ग्लूकोज का ऑक्सीकरण होता है
    • जिससे ATP, CO₂ और H₂O बनता है।
    • यह कैल्शियम विनियमन, हार्मोन संश्लेषण और वसा चयापचय में भी सहायक है।
    • माइटोकॉन्ड्रिया की उत्पत्ति अंतर्सहजीवी सिद्धांत से जुड़ी है
    • जहाँ प्राचीन बैक्टीरिया ने यूकेरियोटिक कोशिका में प्रवेश किया।​
  • अन्य उदाहरण और अपवाद
    • कुछ परजीवी जैसे रिकेट्सिया में सीमित माइटोकॉन्ड्रिया-जैसे गुण हो सकते हैं
    • लेकिन शुद्ध जीवाणुओं (जैसे ई. कोलाई) में पूर्णतः अनुपस्थित।
    • यूकेरियोटिक कोशिकाओं में संख्या ऊर्जा मांग पर निर्भर करती है
    • मांसपेशी कोशिकाओं में हजारों, परिपक्व RBC में शून्य (लेकिन RBC अपवादस्वरूप हैं)।​

5. ग्लाइकोपरत को आप क्या कहते हैं, जब यह जीवाणु के कोशिका आवरण में एक शिथिल आच्छद की तरह होती है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) अवपंक परत
Solution:
  • ग्लाइकोपरत, जब जीवाणु के कोशिका आवरण में एक शिथिल आच्छद की तरह होती है
  • तो उसे अवपंक परत कहते हैं। यह प्रोटीमोग्लाइकेन्स, ग्लाइकोप्रोटीन एवं ग्लाइकोलिपिड्स से बनी होती है।
  • यह अवपंक जीवाणुओं को ढके रहता है। यह सतहों के प्रति आसंजन को बढ़ाता है।
  • ग्लाइकोकैलिक्स की संरचना
    • जो मुख्यतः पॉलीसैकेराइड्स, ग्लाइकोप्रोटीन और कभी-कभी प्रोटीन से बनी होती है।
    • यह कोशिका झिल्ली को सुरक्षा प्रदान करती है और विभिन्न रूपों में पाई जाती है।
    • विभिन्न जीवाणुओं में इसकी मोटाई और घनत्व भिन्न होता है - कुछ में यह बहुत पतली और शिथिल होती है।​
  • अवपंक पर्त का स्वरूप
    • अवपंक पर्त ग्लाइकोकैलिक्स का वह रूप है
    • जब यह ढीली, विसरित और म्यूसिलेज जैसी चिपचिपी परत के रूप में होती है।
    • यह कोशिका को हल्के से ढकती है लेकिन आसानी से धुल सकती है
    • अलग हो जाती है। यह संपुटिका (कैप्सूल) से कम संगठित होती है
    • सूक्ष्मदर्शी में नेगेटिव स्टेनिंग से कम स्पष्ट दिखाई देती है।​
  • कार्य और महत्व
    • अवपंक पर्त जीवाणु को पर्यावरणीय तनावों से बचाती है। यह निर्जलीकरण रोकती है
    • फागोसाइटोसिस (श्वेत रक्त कोशिकाओं द्वारा निगलना) से बचाव करती है
    • एंटीबायोटिक्स के प्रभाव को कम करती है।
    • यह सतहों पर आसंजन (जैसे दांतों पर प्लाक) और बायोफिल्म निर्माण में सहायक होती है।
    • जीवाणु समुदायों को एकत्रित रखकर प्रतिरक्षा प्रणाली से रक्षा प्रदान करती है।​
  • कोशिका आवरण में स्थिति
    • जीवाणु कोशिका आवरण बाहर से अंदर: ग्लाइकोकैलिक्स (अवपंक पर्त/कैप्सूल) → कोशिका भित्ति (पेप्टिडोग्लाइकन आधारित) → कोशिका झिल्ली।
    • ग्राम-पॉजिटिव जीवाणुओं में यह अधिक प्रमुख होती है
    • जबकि ग्राम-नेगेटिव में बाह्य झिल्ली के बाहर।
    • यह परत जीवाणु के अस्तित्व, संक्रमण क्षमता और पर्यावरण अनुकूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।​​

6. ई. गोर्टर और एफ. ग्रैंडल ने किस वर्ष में वसा (लिपिड) के सतह क्षेत्रफल की जांच करके एक बड़ी सफलता हासिल की और निष्कर्ष निकाला कि कोशिकाओं को घेर रही वसा सतह दो परतों वाली होनी चाहिए? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 1925
Solution:
  • ई. गोर्टर (E. Gorter) और एफ. ग्रैंडल (F. Grendel) ने 1925 में अपनी प्रसिद्ध परिकल्पना प्रस्तुत की कि कोशिका झिल्ली एक लिपिड द्विपरत (lipid bilayer) से बनी होती है।
  • उन्होंने लाल रक्त कोशिकाओं से लिपिड निकाला और देखा कि इन लिपिडों का सतह क्षेत्रफल कोशिकाओं के कुल सतह क्षेत्रफल का लगभग दोगुना था।
  • इस अवलोकन से उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि कोशिका झिल्ली को घेरने वाली लिपिड सतह दो परतों वाली होनी चाहिए।
  • यह कोशिका झिल्ली के संरचनात्मक मॉडल को समझने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था।
  • प्रयोग की पृष्ठभूमि
    • लिपिड को पेट्रोलियम ईथर में घोलकर लैंगमुइर-ब्लॉडगेट ट्रफ का उपयोग करके पानी की सतह पर एक अणुसतह (मोनोलेयर) के रूप में फैलाया गया।​
  • विधि और मापन
    • प्रयोग की मुख्य विधि लैंगमुइर द्रोणिका (Langmuir trough) पर आधारित थी
    • जिसमें लिपिड मोनोलेयर को नियंत्रित दाब पर संपीड़ित करके उसके क्षेत्रफल का मापन किया गया।
    • उन्होंने पाया कि निकाले गए लिपिड मोनोलेयर का कुल क्षेत्रफल कोशिका सतह क्षेत्रफल का लगभग दोगुना (2:1 अनुपात) था।
    • इससे उन्होंने अनुमान लगाया कि कोशिका झिल्ली में लिपिड एकल परत की बजाय दोहरी परत (बाइलेयर) में व्यवस्थित होते हैं
    • जहां हाइड्रोफिलिक (जलप्रिय) सिर बाहरी और आंतरिक जलीय माध्यम की ओर तथा हाइड्रोफोबिक (जलविरोधी) पूंछें अंदर की ओर होती हैं।​
  • निष्कर्षों का महत्व
    • यह खोज कोशिका झिल्ली के मॉडल को समझने में क्रांतिकारी साबित हुई
    • क्योंकि इससे पहले ओवरटन और लैंगमुइर जैसे वैज्ञानिकों ने लिपिड मोनोलेयर की अवधारणा प्रस्तुत की थी
    • लेकिन गोर्टर-ग्रेंडेल ने इसे बाइलेयर के रूप में प्रमाणित किया। हालांकि, उनके प्रयोग में कुछ त्रुटियां थीं
    • जैसे लिपिड निष्कर्षण की अपूर्णता और क्षेत्रफल मापन में दाब संबंधी गलतियां, फिर भी यह सिंगर-निकोल्सन के फ्लूइड मोज़ेक मॉडल (1972) की नींव बनी।​
  • सीमाएं और बाद के विकास
    • गोर्टर-ग्रेंडेल मॉडल में प्रोटीन की भूमिका को नजरअंदाज किया गया था
    • जिसे बाद में डावसन-डैनियली मॉडल (1935) ने प्रोटीन-लिपिड-प्रोटीन सैंडविच के रूप में सुधारा।
    • इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी और अन्य तकनीकों ने इसकी पुष्टि की, लेकिन मूल बाइलेयर अवधारणा आज भी मान्य है।​

7. सही कथन का चयन कीजिए। [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) पशु कोशिकाओं में राइबोसोम, सूत्र कणिकाएं और लयनकाय पाए जाते हैं।
Solution:
  • पशु कोशिकाओं में राइबोसोम, सूत्र कणिकाएं एवं लयनकाय पाए जाते हैं।
  • राइबोसोम पशु कोशिकाओं सहित सभी कोशिकाओं में पाए जाते हैं।
  • यह कोशिका में प्रोटीन संश्लेषण हेतु आवश्यक है। माइटोकॉण्ड्रिया ATP के रूप में ऊर्जा का उत्पादन करता है
  • जिसके कारण इसे कोशिका का पॉवर हाउस कहते हैं।
  • लाइसोसोम (लयनकाय) अपशिष्ट पदार्थों को तोड़ने हेतु जिम्मेदार होते हैं।
  • सही कथन का चयन कीजिए" एक सामान्य वाक्यांश है
  • जो भारतीय प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे NEET, JEE, CTET, UPSC या राज्य स्तरीय परीक्षाओं में बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) में उपयोग होता है। इसमें चार विकल्प (A, B, C, D) दिए जाते हैं
  • जिनमें से एक या अधिक को सही ठहराना होता है।
  • यह प्रश्न जीवविज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिकी, पर्यावरण विज्ञान या हिंदी साहित्य जैसे विषयों पर आधारित हो सकते हैं।
  • सामान्य उदाहरण
    • जीवविज्ञान से: निम्नलिखित में से सही कथन चुनें—
    • A. सभी कशेरुकी रज्जुकी होती हैं (सही, क्योंकि कशेरुकियों में नोटोकॉर्ड होता है)।
    • B. सभी प्रोटोकॉर्डेट कपालीय होते हैं (गलत)।
    • रसायन से: ठोस का द्रव बिना गैस बनना ऊर्ध्वपातन कहलाता है (सही कथन)।
  • विश्लेषण विधि
    • प्रत्येक विकल्प को अलग-अलग जांचें।
    • वैज्ञानिक तथ्यों या साहित्यिक नियमों से मिलाएं।
    • केवल प्रमाणित सही वाले चुनें।

8. पादप कोशिकाओं का सबसे बाहरी आवरण क्या कहलाता है? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) कोशिका भित्ति
Solution:
  • पादप कोशिकाओं में, कोशिका झिल्ली के बाहर एक अतिरिक्त, कठोर और सुरक्षात्मक परत होती है
  • जिसे कोशिका भित्ति (Cell Wall) कहा जाता है। यह मुख्य रूप से सेल्यूलोज से बनी होती है
  • कोशिका को आकार, यांत्रिक सहारा और सुरक्षा प्रदान करती है।
  • जंतु कोशिकाओं में कोशिका भित्ति नहीं होती है, उनकी सबसे बाहरी परत कोशिका झिल्ली होती है।
  • कोशिका भित्ति की संरचना
    • प्राथमिक कोशिका भित्ति (पतली और लचीली), मध्य लामेला (दो पड़ोसी कोशिकाओं को जोड़ने वाली चिपचिपी परत) तथा द्वितीयक कोशिका भित्ति (मोटी और कठोर, जो कुछ कोशिकाओं में विकसित होती है।
    • प्राथमिक भित्ति युवा कोशिकाओं में पाई जाती है
    • कोशिका के बढ़ने में सहायता करती है
    • जबकि द्वितीयक भित्ति परिपक्व कोशिकाओं को अतिरिक्त मजबूती देती है।
    • इसमें लिग्निन जैसे पदार्थ भी हो सकते हैं जो इसे और कठोर बनाते हैं।​
  • कोशिका भित्ति के कार्य
    • यह पादप कोशिका को यांत्रिक सहारा प्रदान करती है, जिससे पौधे सीधे खड़े रह सकें।
    • यह कोशिका को पर्यावरणीय तनाव, रोगाणुओं और जल हानि से बचाती है
    • आकार बनाए रखने में मदद करती है।
    • छिद्रों के माध्यम से जल, पोषक तत्वों और गैसों का आदान-प्रदान भी संभव होता है।​
  • पादप और जंतु कोशिका में अंतर
    • जंतु कोशिकाओं में कोशिका भित्ति का अभाव होता है
    • इसलिए वे कोशिका झिल्ली (Plasma Membrane) से ही ढकी रहती हैं
    • जो लचीली होती है। पादप कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली भित्ति के अंदर स्थित रहती है।
    • यह भेद पादपों को कठोरता देता है, जबकि जंतु कोशिकाएँ नरम बनी रहती हैं।​

9. कोशिका झिल्ली के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

I. झिल्ली इसके दोनों ओर मौजूद कुछ अणुओं के लिए चुनिंदा रूप से पारगम्य होती है।

II. पानी भी इस झिल्ली से होकर निम्न में से उच्च सांद्रता में जा सकता है।

Correct Answer: (d) केवल I
Solution:
  • कोशिका झिल्ली पतली, लचीली अवरोध है, जो कोशिका के अंदरूनी भाग को उसके बाहरी वातावरण से अलग करती है।
  • यह चयनात्मक रूप से पारगम्य है; अर्थात यह कुछ पदार्थों को कोशिका से गुजरने की अनुमति देती है
  • जबकि कुछ पदार्थों को कोशिका में प्रवेश करने से रोकती है।
  • पानी परासरण नामक प्रक्रिया के द्वारा कोशिका झिल्ली के पार जा सकता है
  • परंतु यह सदैव उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर जाता है। इस प्रकार कथन II गलत है।
  • संरचना
    •  जिसमें हाइड्रोफिलिक (जलप्रिय) सिरे बाहर की ओर और हाइड्रोफोबिक (जलविरोधी) पूंछें अंदर की ओर होती हैं।
    • प्रोटीन इस द्विपरत में अंतर्निहित या संलग्न रहते हैं
    • जबकि कार्बोहाइड्रेट ग्लाइकोप्रोटीन या ग्लाइकोलिपिड के रूप में मौजूद होते हैं।
    • खोलेस्टेरॉल झिल्ली की तरलता को नियंत्रित करता है।​
  • कार्य
    • यह झिल्ली पदार्थों के प्रवेश-निकास को नियंत्रित करती है
    • कोशिका को आकार प्रदान करती है और कोशिका विभाजन, संकेन्द्रण आदि में सहायक होती है।
    • यह चयनात्मक पारगम्य होने के कारण केवल विशिष्ट पदार्थों को गुजरने देती है।
    • कोशिका संचार और एंजाइम गतिविधियों में भी भूमिका निभाती है।​​
  • सामान्य कथनों का विश्लेषण
    • कई स्रोतों में दिए गए कथनों में से सही हैं: कोशिका झिल्ली कोशिका की बाहरी परत होती है
    • (सही), यह पूर्ण पारगम्य नहीं बल्कि चयनात्मक पारगम्य है
    • यह पदार्थों की गति नियंत्रित करती है (सही)। अतः केवल क तथा ग सही हैं।​
  • मॉडल और विशेषताएं
    • फ्लूड मोज़ेक मॉडल (सिंगर और निकोल्सन, 1972) के अनुसार, झिल्ली तरल होती है
    • जिसमें प्रोटीन मोज़ेक की तरह बिखरे रहते हैं। यह लचीली, पुनर्योजी और जीवित संरचना है।​

10. कौन-सी कोशिकाएं, जिन्हें न्यूरित्मा कोशिकाएं भी कहा जाता है, पी.एन.एस. (PNS) में मुख्य ग्लियल कोशिकाएं हैं और न्यूरॉन्स के अस्तित्व और कार्यों में एक आवश्यक भूमिका निभाती हैं? [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) श्वान कोशिकाएं
Solution:
  • श्वान कोशिकाएं (Schwann cells)
    •  ये परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System - PNS) में एक प्रकार की ग्लियल कोशिकाएं (glial cells) हैं।
    • इन्हें न्यूरित्मा कोशिकाएं (neurilemma cells) भी कहा जाता है।
    • इनका प्राथमिक कार्य न्यूरॉन्स के एक्सॉन (axon) के चारों ओरb बनाना है।
    • माइलिन आवरण एक इन्सुलेटिंग परत है जो तंत्रिका आवेगों के तेजी से संचरण में मदद करती है।
    • श्वान कोशिकाएं क्षतिग्रस्त एक्सॉन की मरम्मत और पुनर्जनन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • संरचना और स्थान
    • प्रत्येक श्वान कोशिका एकल अक्षतंतु खंड को लपेटकर माइलिन शीथ बनाती है
    • जो न्यूरिलेम्मा (neurilemma) नामक बाहरी परत भी प्रदान करती है।
    • ये कोशिकाएँ लंबी, ट्यूब जैसी संरचना वाली होती हैं
    • माइलिन की कई परतें बनाकर विद्युत इन्सुलेशन पैदा करती हैं।​
  • मुख्य कार्य
    • माइलिननेशन: श्वान कोशिकाएँ माइलिन शीथ बनाती हैं
    • जो तंत्रिका आवेगों को तेजी से संचालित करने में मदद करती है (सॉल्टेटरी चालन)।​
    • न्यूरॉन पोषण और सहायता: ये न्यूरॉन्स को पोषक तत्व पहुँचाती हैं
    • क्षतिग्रस्त तंत्रिकाओं की मरम्मत में सहायक होती हैं।​
    • पुनर्जनन: PNS में क्षति पर न्यूरिलेम्मा बैंड्स ऑफ बüngner बनाकर अक्षतंतु पुनरावृत्ति को निर्देशित करती हैं।​
  • PNS बनाम CNS में अंतर
    • PNS में श्वान कोशिकाएँ एक अक्षतंतु खंड को माइलिनेट करती हैं
    • जबकि CNS में ओलिगोडेंड्रोसाइट्स कई अक्षतंतुओं को माइलिनेट करती हैं।
    • उपग्रह कोशिकाएँ (satellite cells) भी PNS में होती है
    • लेकिन ये गैंग्लिया में न्यूरॉन सोमाटा को घेरती हैं, न कि माइलिन बनाती हैं।​
  • न्यूरॉन्स के लिए महत्व
    • श्वान कोशिकाएँ न्यूरॉन्स के चयापचय को नियंत्रित करती हैं, मैक्रोफेज की तरह कार्य करके मलबा साफ करती हैं
    • विकास कारकों का स्राव करती हैं। इनकी अनुपस्थिति में PNS में तंत्रिका संचालन धीमा हो जाता है
    • जैसे डिमाइलिनेशन रोगों (गिलेन-बारे सिंड्रोम) में।​