क्रांतिकारी गतिविधियां (आधुनिक भारतीय इतिहास)

Total Questions: 25

21. 1910 में मध्य भारत में ....... विद्रोह शुरू हो गया था। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) बस्तर
Solution:
  • 1910 में मध्य भारत (वर्तमान छत्तीसगढ़) के बस्तर क्षेत्र में बस्तर विद्रोह (जिसे भूमकाल विद्रोह भी कहा जाता है) शुरू हुआ था।
  • यह विद्रोह ब्रिटिश सरकार की औपनिवेशिक वन नीतियों के खिलाफ था, जिन्होंने आदिवासियों के उनके वन संसाधनों पर पारंपरिक अधिकारों को छीन लिया था
  • बड़े पैमाने पर वन क्षेत्रों को आरक्षित घोषित कर दिया था। इस विद्रोह का नेतृत्व गुंडा धुर ने किया था।
  •  यह विद्रोह ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ आदिवासियों का एक महत्वपूर्ण सशस्त्र संघर्ष था, जो उनके जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए हुआ था।
  • भूमकाल का अर्थ 'भूकंप' होता है, जो इस विद्रोह की तीव्रता और ब्रिटिश प्रशासन को हिलाने वाली शक्ति को दर्शाता है।
  • इस विद्रोह की प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं: अक्टूबर 1909 में राजमाता स्वर्ण कुंवर के नेतृत्व में आदिवासियों को दशहरे के दिन विद्रोह के लिए प्रेरित किया गया।
  • जनवरी 1910 में गुप्त सम्मेलन के बाद फरवरी 1910 में पूरे बस्तर क्षेत्र में विद्रोह फैल गया। 7 फरवरी 1910 को गुण्डा धुर के नेतृत्व में विद्रोहियों ने बाजार लूटा, सरकारी इमारतों में आग लगाई और ब्रिटिश अधिकारियों से लड़ाई की।
  • अंग्रेजों ने इस विद्रोह को दबाने के लिए भारी सेना भेजी और मार्च 1910 से दमन शुरू किया। विद्रोह के दौरान कई संघर्ष हुए, जिनमें 16 फरवरी को इंद्रवती तट पर और 25 फरवरी को डाफनागर में अंग्रेजों के साथ भयंकर युद्ध हुए।
  • अंततः विद्रोह दबा दिया गया, और गुण्डा धुर सहित कई नेताओं को गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी गई।
  • भूमकाल विद्रोह के कारण मुख्य रूप से ब्रिटिश सरकार की नीतियां थीं, जिसने आदिवासी समुदायों के पारंपरिक अधिकारों को हटाया और आर्थिक शोषण बढ़ाया।
  • ब्रिटिश प्रशासन के नए नियमों ने गोंड और मारिया जनजातियों का सामाजिक और सांस्कृतिक विनाश किया, जिससे आदिवासियों में रोष पैदा हुआ।
  • इस विद्रोह ने आदिवासी जागरूकता को बढ़ावा दिया और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाया।
  • इस विद्रोह के प्रमुख नेता गुण्डा धुर थे, जो नेतानार गांव के जमींदार थे और उन्होंने आदिवासियों को एकजुट कर ब्रिटिशों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ा।
  • अन्य नेताओं में डेबरीधुर, कुँवर बहादुर सिंह और बाला प्रसाद शामिल थे। अंग्रेजों ने इस विद्रोह को दबाने के लिए कड़ी कार्रवाई की, लेकिन यह बस्तर में आदिवासियों के अधिकारों के संघर्ष का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।
  • 1910 का भूमकाल विद्रोह मध्य भारत में बस्तर क्षेत्र में ब्रिटिश शासन के खिलाफ हुआ एक महत्वपूर्ण आदिवासी विद्रोह था
  • जो उनकी सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता की लड़ाई को दर्शाता है। यह विद्रोह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के आदिवासी आंदोलनों के इतिहास में एक खास स्थान रखता है
  • इसका प्रभाव छत्तीसगढ़ के इतिहास में आज भी याद किया जाता है। इस विद्रोह से आदिवासियों की राजनीतिक और सामाजिक चेतना में वृद्धि हुई।​​

22. वेल्लोर में सिपाही विद्रोह किस वर्ष हुआ था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) 1806 ईस्वी
Solution:
  • वेल्लोर में सिपाही विद्रोह 1806 ईस्वी में हुआ था। यह विद्रोह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ भारतीय सिपाहियों द्वारा किया गया एक प्रारंभिक और महत्वपूर्ण विद्रोह था।
  • विद्रोह का मुख्य कारण सिपाहियों को दिए गए नए ड्रेस कोड से जुड़ा था, जिसमें धार्मिक प्रतीकों को पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
  • यह 1857 के महान विद्रोह से लगभग पचास साल पहले हुआ था।
  • जो 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से लगभग 51 साल पहले हुआ था। इस विद्रोह में वेल्लोर किले पर सिपाहियों ने कब्जा कर लिया और लगभग 200 ब्रिटिश सैनिकों को मार डाला या घायल कर दिया।
  • विद्रोह के दौरान विद्रोहियों ने किले पर मैसूर सल्तनत का झंडा फहरा दिया और टीपू सुल्तान के बेटे फतेह हैदर को राजा घोषित कर दिया।
  • यह विद्रोह ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीय सिपाहियों पर बढ़ाए गए धार्मिक और सैन्य अनुशासन के कठोर नियमों के कारण उठा।
  • खासकर ब्रिटिश प्रशासन ने सिपाहियों के धर्म और पोशाक से जुड़े नियमों में हस्तक्षेप किया, जिससे उनका गुस्सा उजागर हुआ।
  • विद्रोह को अंग्रेजी सेना ने आर्कोट के घुड़सवारों और तोपखाने की मदद से दबा दिया। विद्रोह के दौरान कई सिपाही और ब्रिटिश अधिकारी मारे गए
  • जिसमें किले के कमांडर कर्नल सेंट जॉन फंचोर्ट भी शामिल थे। विरोध खत्म करने के बाद लगभग 100 से अधिक भारतीय सैनिकों को फांसी दी गई या गोली मार दी गई।
  • वेल्लोर विद्रोह भारतीय सिपाहियों द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ पहला बड़ा सैन्य विद्रोह था, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव को हिला दिया।
  • यह विद्रोह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक संदर्भ में महत्वपूर्ण समझा जाता है, क्योंकि इसने ब्रिटिशों को भारतीय सैनिकों की असंतुष्टि और उनके विरोध की गंभीरता का एहसास कराया।
  • इसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने सिपाहियों के धार्मिक और सांस्कृतिक मामलों में हेरफेर कम कर दिया।​​

23. सोहन सिंह भकना और हरदयाल मुख्य रूप से निम्नलिखित में से किस संगठन से जुड़े थे? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) गदर पार्टी
Solution:
  • सोहन सिंह भकना और लाला हरदयाल (विकल्प में हरदयाल का नाम सैयद अहमद लिखा है, जबकि सही संस्थापक हरदयाल थे) मुख्य रूप से गदर पार्टी से जुड़े थे।
  • इस संगठन की स्थापना 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में हुई थी। यह एक क्रांतिकारी संगठन था
  • जिसका उद्देश्य सशस्त्र विद्रोह के माध्यम से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना और भारतीय स्वतंत्रता प्राप्त करना था।
  • यह उत्तरी अमेरिका में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के बीच काफी लोकप्रिय था।
  • सोहन सिंह भकना और लाला हरदयाल मुख्य रूप से "गढ़र पार्टी" से जुड़े थे।
  • इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन को भारत से हटाना था। सोहन सिंह भकना इस पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष थे
  • जबकि लाला हरदयाल इसके सह-संस्थापक और विचारक थे। यह पार्टी मुख्य रूप से पंजाब के पूर्व सैनिकों और किसानों द्वारा गठित थी
  • जिनका उद्देश्य भारत की आज़ादी के लिए क्रांतिकारी गतिविधियों को संगठित करना था। पार्टी ने अपना पहला समाचार पत्र "गढ़र" भी नवंबर 1913 में प्रकाशित किया था, जिसके माध्यम से वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाते थे।
  • गढ़र पार्टी का मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को में था और यह पार्टी धार्मिक, क्षेत्रीय मतभेदों को छोड़ कर एकता और धर्मनिरपेक्षता पर आधारित स्वतंत्र भारत का स्वप्न देखती थी।
  • इस पार्टी ने भारत की आजादी के लिए एक क्रांतिकारी आंदोलन को जन्म दिया था जो आगे चलकर देश के आजादी संग्राम में महत्वपूर्ण रहा.​​
  • इस प्रकार, सोहन सिंह भकना और लाला हरदयाल का मुख्य संगठन गढ़र पार्टी ही था, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

24. "इंडिया हाउस" एक क्रांतिकारी संगठन, श्यामजी कृष्ण वर्मा द्वारा भारतीय राष्ट्रवाद के प्रसार के लिए ....... में स्थापित किया गया था। [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) लंदन
Solution:
  • इंडिया हाउस" एक क्रांतिकारी संगठन था जिसे श्यामजी कृष्ण वर्मा ने 1905 में लंदन में स्थापित किया था।
  • यह संगठन भारतीय छात्रों के लिए एक छात्रावास और भारतीय राष्ट्रवाद के प्रचार के लिए एक केंद्र के रूप में कार्य करता था।
  • वी. डी. सावरकर और मदन लाल ढींगरा जैसे कई प्रमुख भारतीय क्रांतिकारी इससे जुड़े थे।
  • इंडिया हाउस का मुख्यालय उत्तरी लंदन के हाईगेट क्षेत्र में क्रॉमवेल एवेन्यू पर था।
  • यह संस्था ब्रिटिश भारत के विरुद्ध भारतीय राष्ट्रवाद के प्रसार, स्वतंत्रता आंदोलन के समर्थन और विदेशी धरती पर भारतीय छात्रों तथा क्रांतिकारियों को संगठित करने का महत्वपूर्ण केंद्र था।
  • श्यामजी कृष्ण वर्मा एक भारतीय देशभक्त, वकील और पत्रकार थे जिन्होंने इस स्थान को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का शक्तिपीठ बनाया।
  • इंडिया हाउस न केवल छात्रावास था, बल्कि इसने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को पत्रकारिता, विद्वत्तापूर्ण संवाद और राजनैतिक सक्रियता के माध्यम से आगे बढ़ाया।
  • श्यामजी कृष्ण वर्मा ने "द इंडियन सोशियोलॉजिस्ट" नामक एक पत्रिका भी शुरू की जो पूरे यूरोप में भारतीय राष्ट्रवादी विचारों का प्रचार करती थी।
  • इस संगठन से जुड़े कई प्रमुख क्रांतिकारी जैसे मदन लाल ढींगरा, लाला हरदयाल, वीर सावरकर, मैडम भीकाजी रुस्तम कामा हे
  • जिन्होंने भारत की आज़ादी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • इंडिया हाउस ने भारत की ब्रिटिश सरकार के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
  • जिससे ब्रिटिश अधिकारियों का ध्यान इस संस्था की ओर गया और अंततः अंग्रेज़ सरकार ने इसके विरुद्ध कार्रवाई की।
  • संक्षेप में, इंडिया हाउस एक अनौपचारिक, लेकिन अत्यंत प्रभावशाली भारतीय राष्ट्रवादी संगठन था
  • जिसकी स्थापना 1905 में श्यामजी कृष्ण वर्मा ने लंदन में की थी, और यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण केन्द्र रहा

25. किस देश के अधिकारियों ने भारतीयों को ले जा रहे जहाज कामागाटामारू को प्रवेश की अनुमति देने से इनकार कर दिया ? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) कनाडा
Solution:
  • कामागाटामारू एक जापानी जहाज था जिस पर बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासियों को ले जाया जा रहा था।
  • कनाडा के अधिकारियों ने 1914 में इस जहाज को वैंकूवर बंदरगाह में प्रवेश करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
  • यह घटना कनाडा की एशियाई विरोधी अप्रवासी नीतियों का प्रतीक थी और इसने विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच ब्रिटिश शासन के खिलाफ आक्रोश को बढ़ावा दिया।
  • जिनमें से अधिकांश सिख थे। कनाडा की सरकार ने उस समय सख्त और भेदभावपूर्ण आव्रजन कानून लागू किए हुए थे
  • जिसके चलते जहाज के यात्रियों को कनाडा में उतरने की अनुमति नहीं दी गई। कनाडाई प्रशासन ने यह तर्क दिया कि ऐसे लोगों को ही प्रवेश मिलेगा जो समुद्र में रुके बिना सीधे कनाडा के तट पर आए हों
  • जबकि कामागाटामारू जहाज ने सिंगापुर में भी ठहराव किया था, इसलिए उसे प्रवेश नहीं दिया गया।
  • इसके परिणामस्वरूप, जहाज को दो महीने तक वैंकूवर के तट पर ही खड़ा रहना पड़ा और अंततः उसे वापस भारत भेज दिया गया
  • इस ऐतिहासिक घटना से भारतीय प्रवासियों में गहरा आक्रोश और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन तथा कनाडाई नस्लभेदपूर्ण नीतियों के खिलाफ विरोध भड़का।
  • यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अमृतसर हत्याकांड के बाद की एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है और इसे नस्लभेद तथा साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है।
  • इस घटना ने कनाडा में भारतीयों के खिलाफ भेदभावपूर्ण नियमों को उजागर किया और बाद में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में इस घटना के लिए भारतीय जनता से माफी भी मांगी।
  • यह मामला गदर पार्टी के गठन और भारतीयों के विदेश में स्वतन्त्रता संग्राम को प्रेरित करने वाला एक बड़ा मोड़ था।
  • इस प्रकार, कामागाटामारू जहाज को कनाडा के अधिकारियों ने भारतीयों को लाने के लिए प्रवेश परमिट देने से मना किया था, जिससे यह घटना इतिहास में प्रमुख स्थान