Correct Answer: (b) 1 जनवरी, 1997
Solution:- डकवर्थ लुईस फॉर्मूला (D/L), जिसका उपयोग वर्षा या अन्य रुकावटों के कारण बाधित एकदिवसीय मैचों में लक्ष्य स्कोर को संशोधित करने के लिए किया जाता है
- पहली बार 1 जनवरी, 1997 को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में आधिकारिक तौर पर इस्तेमाल किया गया था। इस गणितीय प्रणाली का आविष्कार फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुईस ने किया था।
- DLS का विकास
- फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुईस ने 1990 के दशक में इस फॉर्मूले को विकसित किया, जो सांख्यिकीय मॉडल पर आधारित है।
- 1992 विश्व कप सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका को इंग्लैंड के खिलाफ एक गेंद पर 22 रन बनाने का असंभव लक्ष्य मिला था
- जिसके बाद पुराने 'लोवेस्ट स्कोरिंग ओवर' नियम की खामियां उजागर हुईं। इस घटना ने DLS को जन्म दिया
- जो बल्लेबाजों की संसाधनों (विकेट और ओवर) की कमी को वैज्ञानिक रूप से समायोजित करता है। आईसीसी ने इसे आधिकारिक रूप से 1999 विश्व कप से अपनाया।
- पहला आधिकारिक उपयोग
- अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में DLS का पहला प्रयोग जनवरी 1997 में जिम्बाब्वे और इंग्लैंड के बीच दूसरे वनडे में हुआ।
- बारिश से प्रभावित इस मैच में जिम्बाब्वे ने DLS के तहत संशोधित लक्ष्य हासिल कर 7 रन से जीत दर्ज की।
- यह मैच हरारे (जिम्बाब्वे) में खेला गया था, जहां इंग्लैंड पहले बल्लेबाजी कर 272/7 बनाया, लेकिन बारिश के बाद जिम्बाब्वे को 43 ओवर में 191 रन का लक्ष्य मिला।
- कैसे काम करता है DLS
- DLS दो मुख्य संसाधनों—ओवर और विकेट—पर आधारित है। यह एक गणितीय तालिका का उपयोग करता है जो बताती है
- पूरे मैच में कितने रन संभव हैं। यदि बारिश से संसाधन कम हों, तो लक्ष्य उसी अनुपात में कम किया जाता है।
- उदाहरण: 50 ओवर के मैच में 300 रन का औसत लक्ष्य हो
- तो 40 ओवर में 8 विकेट बचे होने पर लक्ष्य लगभग 240-250 हो सकता है।
- 2015 में स्टीव स्टर्न ने इसे अपडेट किया, जिसे DLS-Stern कहा जाता है।
- महत्वपूर्ण घटनाएं
- 1999 विश्व कप: पहला प्रमुख टूर्नामेंट जहां DLS पूर्ण रूप से लागू हुआ।
- आईसीसी मान्यता: 1999 में आधिकारिक, 2001 में सभी वनडे में अनिवार्य।
- टी20 में उपयोग: 2007 से आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय टी20 में भी लागू, लेकिन ओवर कम होने पर समायोजन।
- विवाद और सुधार
- DLS को कई बार विवादास्पद माना गया, जैसे 2009 चैंपियंस ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया बनाम वेस्टइंडीज।
- हालांकि, यह पुराने नियमों से कहीं बेहतर साबित हुआ। अब डिजिटल ऐप्स से तुरंत गणना होती है।
- फ्रैंक डकवर्थ का 2024 में निधन हुआ, लेकिन उनका योगदान अमर है।