खनिज संसाधन (भारत का भूगोल)

Total Questions: 19

1. भारत में सबसे पुराना एल्युमीनियम रिफाइनरी संयंत्र कौन-सा है? [CHSL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) मुरी एल्युमिना संयंत्र
Solution:
  • भारत में सबसे पुराना एल्युमीनियम रिफाइनरी संयंत्र मुरी एल्युमिना संयंत्र है।
  • मुरी वर्क्स ऑफ हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड भारत की पहली एल्युमिना रिफाइनरी है
  • जो 1948 में तत्कालीन भारतीय एल्युमीनियम कंपनी (INDAL) द्वारा शुरू की गई थी।
  • स्थापना और इतिहास
    • मुरी ऐलुमिना संयंत्र भारत की पहली एलुमिना रिफाइनरी के रूप में जाना जाता है
    • जिसकी शुरुआत स्वर्णरेखा नदी के तट पर हुई। 2005 में हिंडाल्को ने INDAL का अधिग्रहण कर लिया
    • जिसके बाद इसे हिंडाल्को के मुरी वर्क्स के रूप में एकीकृत किया गया।
    • पहले एल्युमीनियम उद्योग की शुरुआत 1937 में पश्चिम बंगाल के जयनगर (जे.के. नगर) में हुई थी
    • लेकिन वह मुख्य रूप से स्मेल्टिंग पर केंद्रित था, जबकि मुरी रिफाइनरी एलुमिना उत्पादन के लिए पहली थी।​
  • उत्पादन क्षमता और उत्पाद
    • संयंत्र की वर्तमान क्षमता 450 किलो टन प्रति वर्ष (KTPA) है, जो मानक और विशेष ग्रेड के एलुमिना तथा एलुमिना-हाइड्रेट का उत्पादन करता है।
    • कुल क्षेत्रफल 334.2 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें संयंत्र और आवासीय कॉलोनी शामिल हैं।
    • यह बॉक्साइट से एलुमिना रिफाइनिंग पर केंद्रित है और भारतीय एल्युमीनियम उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।​
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • स्थान: रांची से 65 किमी दूर, झारखंड।
    • मालिक: हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड (INDAL का उत्तराधिकारी)।
    • अन्य प्रारंभिक संयंत्र जैसे अलवाये (केरल, 1938) और हीराकुड़ (ओडिशा) बाद में स्थापित हुए, लेकिन मुरी सबसे पुराना रिफाइनरी है।​

2. सीमेंट में मौजूद सिलिका की अनुमानित मात्रा ....... होती है। [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) 17% और 25% के बीच
Solution:
  • सीमेंट में मुख्य रूप से सिलिका और एल्युमिना के साथ चूना मिलाया जाता है। सीमेंट में सिलिका का अनुमानित प्रतिशत 17-25 प्रतिशत के बीच होता है।
  • जो मुख्य रूप से पोर्टलैंड सीमेंट की रासायनिक संरचना का हिस्सा है। यह सिलिका सीमेंट को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करती है
  • क्योंकि यह ट्राइकैल्शियम सिलिकेट (C₃S) और डाइकैल्शियम सिलिकेट (C₂S) जैसे यौगिकों का निर्माण करती है।​
  • सीमेंट की रासायनिक संरचना
    • पोर्टलैंड सीमेंट, जो निर्माण में सबसे अधिक उपयोग होता है, विभिन्न ऑक्साइडों से मिलकर बनता है।
    • चूना (CaO) 62-65% होता है, जो बाइंडिंग प्रदान करता है, जबकि सिलिका 17-25% के साथ संरचनात्मक मजबूती देती है।
    • एल्यूमिना (Al₂O₃) 3-8%, लौह ऑक्साइड (Fe₂O₃) 3-4%, जिप्सम (CaSO₄) 3-4% और मैग्नेशिया (MgO) 1-3% अन्य प्रमुख घटक हैं।​
  • सिलिका की भूमिका और प्रभाव
    • सिलिका सीमेंट क्लिंकर के उत्पादन में मिट्टी या रेत से प्राप्त होती है और उच्च तापमान (लगभग 1450°C) पर क्लिंकर बनने में सहायक होती है।
    • यह सीमेंट की सेटिंग समय को नियंत्रित करती है—अधिक सिलिका होने पर मजबूती बढ़ती है लेकिन सेटिंग धीमी हो जाती है।
    • कम सिलिका से सीमेंट कमजोर हो सकता है, जबकि अधिक से फ्लैश सेटिंग का खतरा रहता है।​
  • उत्पादन प्रक्रिया में सिलिका
    • सीमेंट निर्माण में चूना पत्थर, मिट्टी (सिलिका स्रोत) और अन्य सामग्रियों को पीसकर कच्चा भोजन बनाया जाता है
    • फिर रोटरी किल्न में पकाया जाता है। सिलिका बॉक्साइट या फ्लाई ऐश से भी पूरक रूप से जोड़ी जा सकती है।
    • भारतीय मानकों (BIS IS 269) के अनुसार, सिलिका का यह स्तर गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।​

3. भारत में लौह और इस्पात उद्योगों का सर्वाधिक संकेंद्रण किस क्षेत्र में है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) छोटा नागपुर का पठार
Solution:
  • भारत के झारखंड, पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा राज्यों में खनिज संसाधनों के सबसे महत्वपूर्ण भंडार पाए जाते हैं।
  • छोटा नागपुर का पठार इसी क्षेत्र में अवस्थित है। इस पठार में लौह और इस्पात उद्योगों का सर्वाधिक संकेंद्रण पाया जाता है।
  • कारण
    • इस क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले हेमेटाइट लौह अयस्क के विशाल भंडार नोआमुंडी, गुआ, कोल्हान जैसे स्थानों पर उपलब्ध हैं
    • जो उद्योग की आधारशिला हैं। साथ ही, दामोदर घाटी में कोयला भंडार प्रचुर मात्रा में हैं
    • जो कोकिंग कोल के रूप में इस्पात उत्पादन के लिए आवश्यक है।
    • सस्ता श्रम, जल स्रोतों की उपलब्धता (जैसे स्वर्णरेखा, दामोदर नदियाँ) और अच्छा परिवहन नेटवर्क (रेल, सड़क) ने इसे आदर्श बनाया है।​
  • प्रमुख संयंत्र
    • जमशेदपुर (टाटा स्टील): 1907 में स्थापित, झारखंड में स्वर्णरेखा-खरकाई नदियों के संगम पर; निजी क्षेत्र का प्रथम प्रमुख संयंत्र।
    • बोकारो: सार्वजनिक क्षेत्र का विशाल संयंत्र, झारखंड में।
    • भिलाई: छत्तीसगढ़ में, रूस सहायता से स्थापित।
    • राउरकेला: ओडिशा में, जर्मनी सहयोग से।
    • दुर्गापुर और बर्नपुर: पश्चिम बंगाल में।​
  • अन्य क्षेत्रों से तुलना
    • दक्षिण भारत में विशाखापट्टनम, भद्रावती जैसे केंद्र हैं, लेकिन छोटा नागपुर में 70% से अधिक उत्पादन केंद्रित है।
    • मालवा या दक्कन पठार में संकेंद्रण कम है क्योंकि कच्चा माल दूर है।
    • यह संकेंद्रण वजन-ह्रास वाले कच्चे माल (लौह अयस्क, कोयला) के निकट स्थापना के सिद्धांत पर आधारित है।

4. छत्तीसगढ़ की बैलाडीला पर्वत श्रेणी निम्नलिखित में से किस खनिज के लिए प्रसिद्ध है? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (III-पाती), CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) लौह अयस्क
Solution:
  • छत्तीसगढ़ की बैलाडीला पर्वत श्रेणी लौह अयस्क खनिज के लिए प्रसिद्ध है।
  • छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित बैलाडीला खान से उत्तम कोटि के हेमेटाइट और मैग्नेटाइट लौह अयस्क का उत्पादन होता है।
  • बैलाडीला खान भारत में सबसे बड़ी मशीनीकृत खान है।
  • भौगोलिक स्थिति
    • बैलाडीला पर्वत श्रेणी पूर्वी घाट से लगभग 200 किलोमीटर पश्चिम में दक्कन पठार पर फैली हुई है
    • जो बस्तर क्षेत्र का हिस्सा है। इसका नाम 'बैल की पीठ' जैसी आकृति के कारण पड़ा। यह क्षेत्र घने जंगलों और दुर्गम इलाकों से घिरा है
    • लेकिन खनिज संपदा के कारण राष्ट्रीय महत्व का है।​
  • खनिज भंडार और उत्पादन
    • यहां 1.2 बिलियन टन से अधिक लौह अयस्क भंडार हैं, जिनमें लौह सामग्री 65% से अधिक होती है।
    • राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) द्वारा संचालित 14 प्रमुख खदानें (जैसे डिपॉजिट-5, 10, 14) प्रतिवर्ष औसतन 25 मिलियन टन उत्पादन करती हैं।
    • यह अयस्क भारत के इस्पात उद्योग की रीढ़ है और जापान, चीन जैसे देशों को निर्यात होता है।​
  • प्रमुख खदानें
    • डिपॉजिट-14 (बैलाडीला-4): 1968 से चालू, उच्च उत्पादन क्षमता वाली।
    • डिपॉजिट-5 और 10: निर्यात केंद्रित।
    • अन्य: डिपॉजिट-11A, 11C, जिनमें से कुछ पर्यावरण मुद्दों के कारण विवादित।​
  • आर्थिक महत्व
    • बैलाडीला छत्तीसगढ़ को भारत का 'खनिज हृदय' बनाता है
    • जो भिलाई इस्पात संयंत्र को कच्चा माल उपलब्ध कराता है।
    • हालांकि, खनन से वन destruction, आदिवासी विस्थापन और पर्यावरण क्षति जैसे मुद्दे उठे हैं।​

5. निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य भारत में लिग्नाइट कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) तमिलनाडु
Solution:
  • तमिलनाडु राज्य लिग्नाइट कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक है।
  • इंडियन मिनिरल्स ईयरबुक, 2021 के अनुसार, भारत में लिग्नाइट कोयले के कुल भंडार का सर्वाधिक हिस्सा तमिलनाडु (79.3 प्रतिशत) के पास है।
  • लिग्नाइट को निकृष्ट कोटि के कोयले की श्रेणी में रखा जाता है।
  • 'नैवेली' तमिलनाडु में है, जो लिग्नाइट भंडार के लिए प्रसिद्ध है।
  • लिग्नाइट कोयला क्या है?
    • लिग्नाइट कोयला, जिसे भूरा कोयला भी कहा जाता है, कोयले की सबसे निचली श्रेणी का ईंधन है
    • जिसमें उच्च नमी और कम ऊष्मा मूल्य होता है। यह मुख्य रूप से बिजली उत्पादन के लिए उपयोग किया जाता है।
    • भारत के कुल लिग्नाइट भंडार का बड़ा हिस्सा तमिलनाडु, राजस्थान, गुजरात और जम्मू-कश्मीर में स्थित है, लेकिन उत्पादन में तमिलनाडु का वर्चस्व है।​
  • तमिलनाडु का योगदान
    • तमिलनाडु देश के लिग्नाइट उत्पादन का लगभग 50% योगदान देता है
    • विशेष रूप से नेवेली क्षेत्र से जहां भारत की सबसे बड़ी लिग्नाइट खदानें हैं।
    • नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन (NLC) यहां प्रमुख खनन और बिजली उत्पादन संचालित करता है।
    • 2019 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में देश के 79% लिग्नाइट भंडार (लगभग 36,230 मिलियन टन) हैं।​
  • भंडार और खनन
    • तमिलनाडु में लिग्नाइट के सबसे बड़े भंडार हैं, लगभग 36,230 मिलियन टन, मुख्यतः नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित।
    • गुजरात में कच्छ और सौराष्ट्र बेसिन में घने भंडार हैं, जहां गुजरात खनिज विकास निगम (GMDC) सक्रिय है
    • जैसे सूरखा और राजपardi खदानें। तमिलनाडु का फोकस बिजली उत्पादन पर है
    • जबकि गुजरात में पर्यावरण मंजूरी के साथ क्षमता विस्तार हो रहा है।​
  • उपयोग और परियोजनाएं
    • दोनों राज्य लिग्नाइट से बिजली और अन्य ईंधन बनाते हैं; तमिलनाडु में NLC की लिग्नाइट-से-मेथनॉल परियोजना 2027 तक पूरी होगी।
    • गुजरात में खनन विस्तार पर जोर है। तमिलनाडु का उत्पादन स्थिर रूप से अधिक है।​

6. ....... के भंडार मुख्यतः तमिलनाडु के नैवेली में स्थित हैं। [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) लिग्नाइट
Solution:
  • तमिलनाडु राज्य लिग्नाइट कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक है।
  • इंडियन मिनिरल्स ईयरबुक, 2021 के अनुसार, भारत में लिग्नाइट कोयले के कुल भंडार का सर्वाधिक हिस्सा तमिलनाडु (79.3 प्रतिशत) के पास है।
  • लिग्नाइट को निकृष्ट कोटि के कोयले की श्रेणी में रखा जाता है। 'नैवेली' तमिलनाडु में है, जो लिग्नाइट भंडार के लिए प्रसिद्ध है।
  • लिग्नाइट के भंडार
    • लिग्नाइट के मुख्य भंडार तमिलनाडु के नैवेली (नेवेली) में स्थित हैं।
    • यह भारत के सबसे बड़े लिग्नाइट भंडारों में से एक है, जो ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है।​
  • नैवेली का स्थान और महत्व
    • नैवेली तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में स्थित एक औद्योगिक शहर है। यहां लिग्नाइट खदानें देश की सबसे बड़ी हैं
    • जिनका उपयोग मुख्य रूप से थर्मल पावर प्लांट्स में बिजली उत्पादन के लिए होता है।
    • नैवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन (NLCIL), जो एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है
    • इन खदानों का संचालन करता है और लगभग 6,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन करता है।​
  • लिग्नाइट की विशेषताएं
    • लिग्नाइट कोयले का सबसे निम्न श्रेणी का प्रकार है, जिसमें कार्बन की मात्रा कम (लगभग 40-60%) और नमी अधिक होती है।
    • इसकी मोटाई नैवेली में 10-12 मीटर तक पाई जाती है, जो इसे खनन के लिए उपयुक्त बनाती है।
    • तमिलनाडु भारत में लिग्नाइट का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।​
  • आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव
    • ये भंडार स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, हजारों लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।
    • हालांकि, खनन से पर्यावरणीय चिंताएं जैसे भूमि अधिग्रहण और प्रदूषण जुड़ी हैं। NLCIL अन्य राज्यों में भी परियोजनाएं चला रहा है।​

7. इंडियन मिनरल्स ईयरबुक, 2020 के अनुसार, भारत में मैंगनीज का सर्वाधिक उत्पादन किस राज्य में होता है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) मध्य प्रदेश
Solution:
  • इंडियन मिनरल्स ईयरबुक, 2020 के अनुसार, भारत में मैंगनीज अयस्क का सबसे अधिक उत्पादन मध्य प्रदेश में होता है।
  • मैंगनीज अयस्क एक महत्वपूर्ण खनिज है, जिसका उपयोग स्टील और अन्य मिश्र धातुओं के उत्पादन/निर्माण में किया जाता है।
  • इंडियन मिनरल्स ईयरबुक, 2022 के अनुसार, वर्ष 2021-22 में भी भारत में मैंगनीज अयस्क का सबसे अधिक उत्पादन मध्य प्रदेश में हुआ है।
  • सही उत्तर: मध्य प्रदेश
    • इंडियन मिनरल्स ईयरबुक 2020 से संबंधित प्रश्नों के मानकीकृत उत्तरों में स्पष्ट रूप से लिखा है
    • भारत में मैंगनीज का सर्वाधिक उत्पादन करने वाला राज्य मध्य प्रदेश है।
    • इन स्रोतों के अनुसार 2019–20 के वर्ष में मैंगनीज अयस्क के कुल राष्ट्रीय उत्पादन में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी सबसे अधिक दर्ज की गई है।​
  • उत्पादन के आँकड़े और स्थान
    • प्रतियोगी परीक्षा सामग्री में दिए विवरण के अनुसार मध्य प्रदेश ने 2019–20 में लगभग 5,528 हज़ार टन (5.528 मिलियन टन) मैंगनीज अयस्क का उत्पादन किया
    • जो उस वर्ष भारत में किसी भी राज्य द्वारा किया गया सबसे अधिक उत्पादन था।
    • इन्हीं आँकड़ों के आधार पर मध्य प्रदेश को 2020 की वर्षपुस्तक के संदर्भ में मैंगनीज उत्पादन में प्रथम स्थान पर माना जाता है
    • जबकि कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्य इसके बाद के स्थानों पर आते हैं।​
  • अन्य प्रमुख मैंगनीज उत्पादक राज्य
    • इंडियन मिनरल्स ईयरबुक से व्युत्पन्न संक्षेपों और प्रश्न–उत्तर मंचों पर उपलब्ध विश्लेषण के अनुसार, मैंगनीज उत्पादन में मध्य प्रदेश के बाद प्रमुख राज्य हैं
    • कर्नाटक, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश। इन राज्यों में भी महत्त्वपूर्ण खनन गतिविधियाँ चलती हैं
    • लेकिन कुल उत्पादन और हिस्सेदारी के मामले में 2019–20 के वर्ष के लिए मध्य प्रदेश इन सब से आगे रहा।​
  • खनन और उपयोग का महत्व
    • मैंगनीज मुख्य रूप से इस्पात (स्टील) उद्योग में मिश्रधातु (ferroalloys जैसे फ़ेरोमैंगनीज, सिलिकोमैंगनीज) के रूप में प्रयोग किया जाता है
    • जिससे इस्पात की मज़बूती, कठोरता और टिकाऊपन बढ़ता है।
    • इसके अतिरिक्त मैंगनीज का उपयोग एल्यूमिनियम उद्योग, बैटरी निर्माण और कुछ रासायनिक उद्योगों में भी होता है
    • इसलिए बड़े स्तर पर मैंगनीज उत्पादन किसी राज्य के औद्योगिक और आर्थिक महत्व को बढ़ा देता है।

8. भारत का निम्नलिखित में से कौन-सा क्षेत्र खनिजों का भंडार है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) छोटा नागपुर
Solution:
  • भारत का छोटा नागपुर का पठार खनिजों का भंडार है।
  • भारतीय खनिज वर्षपुस्तक (Indian Minerals Yearbook) 2020 के अनुसार
  • भारत में मैंगनीज अयस्क (Manganese Ore) का सर्वाधिक उत्पादन मध्य प्रदेश राज्य में होता है।
  • विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्नों के आधिकारिक हल और खनन से जुड़े स्रोत यही बताते हैं
  • 2019–20 के आँकड़ों के आधार पर मैंगनीज उत्पादन में मध्य प्रदेश शीर्ष स्थान पर है।​
  • सही उत्तर: मध्य प्रदेश
    • इंडियन मिनरल्स ईयरबुक 2020 से संबंधित प्रश्नों के मानकीकृत उत्तरों में स्पष्ट रूप से लिखा है
    • भारत में मैंगनीज का सर्वाधिक उत्पादन करने वाला राज्य मध्य प्रदेश है।
    • इन स्रोतों के अनुसार 2019–20 के वर्ष में मैंगनीज अयस्क के कुल राष्ट्रीय उत्पादन में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी सबसे अधिक दर्ज की गई है।​
  • उत्पादन के आँकड़े और स्थान
    • प्रतियोगी परीक्षा सामग्री में दिए विवरण के अनुसार मध्य प्रदेश ने 2019–20 में लगभग 5,528 हज़ार टन (5.528 मिलियन टन) मैंगनीज अयस्क का उत्पादन किया
    • जो उस वर्ष भारत में किसी भी राज्य द्वारा किया गया सबसे अधिक उत्पादन था।
    • इन्हीं आँकड़ों के आधार पर मध्य प्रदेश को 2020 की वर्षपुस्तक के संदर्भ में मैंगनीज उत्पादन में प्रथम स्थान पर माना जाता है
    • जबकि कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्य इसके बाद के स्थानों पर आते हैं।​
  • अन्य प्रमुख मैंगनीज उत्पादक राज्य
    • इंडियन मिनरल्स ईयरबुक से व्युत्पन्न संक्षेपों और प्रश्न–उत्तर मंचों पर उपलब्ध विश्लेषण के अनुसार, मैंगनीज उत्पादन में मध्य प्रदेश के बाद प्रमुख राज्य हैं
    • कर्नाटक, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश। इन राज्यों में भी महत्त्वपूर्ण खनन गतिविधियाँ चलती हैं
    • लेकिन कुल उत्पादन और हिस्सेदारी के मामले में 2019–20 के वर्ष के लिए मध्य प्रदेश इन सब से आगे रहा।​
  • खनन और उपयोग का महत्व
    • मैंगनीज मुख्य रूप से इस्पात (स्टील) उद्योग में मिश्रधातु (ferroalloys जैसे फ़ेरोमैंगनीज, सिलिकोमैंगनीज) के रूप में प्रयोग किया जाता है
    • जिससे इस्पात की मज़बूती, कठोरता और टिकाऊपन बढ़ता है।
    • इसके अतिरिक्त मैंगनीज का उपयोग एल्यूमिनियम उद्योग, बैटरी निर्माण और कुछ रासायनिक उद्योगों में भी होता है
    • इसलिए बड़े स्तर पर मैंगनीज उत्पादन किसी राज्य के औद्योगिक और आर्थिक महत्व को बढ़ा देता है।

9. निम्नलिखित में से भारत के किस क्षेत्र में उच्च कोटि के लौह अयस्क के भंडार हैं? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) उत्तरी ओडिशा
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में उत्तरी ओडिशा क्षेत्र में उच्च कोटि के लौह अयस्क के भंडार हैं।
  • इंडियन मिनरल्स ईयरबुक, 2022 के अनुसार, भारत में लौह अयस्क (हेमेटाइट) के कुल संसाधन / भंडार में शीर्ष 5 राज्य क्रमशः ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक तथा गोवा हैं।
  • भारत में उच्च कोटि के लौह अयस्क (मुख्यतः हेमेटाइट, जिसमें 65% से अधिक लौह सामग्री होती है) के प्रमुख भंडार छोटानागपुर पठार के उत्तरी ओडिशा और झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र में पाए जाते हैं।
  • ये क्षेत्र प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर "उच्च श्रेणी के लौह अयस्क" के लिए पूछे जाते हैं
  • जहाँ नोआमुंडी, गुआ और बादाम पहाड़ी जैसी खदानें विश्वस्तरीय गुणवत्ता प्रदान करती हैं।​
  • उच्च कोटि लौह अयस्क क्या है?
    • उच्च कोटि का लौह अयस्क वह होता है जिसमें लौह (Fe) की मात्रा 65% से अधिक हो, जैसे हेमेटाइट (Fe2O3) का उच्च ग्रेड रूप।
    • भारत में कुल लौह संसाधनों में से लगभग 22,000 मिलियन टन हेमेटाइट संसाधन हैं
    • जिनमें उच्च गुणवत्ता वाले भंडार ओडिशा (केंद्रझर, मयूरभंज), झारखंड (सिंहभूमि) और छत्तीसगढ़ (बैलाडीला) में केंद्रित हैं।
    • मैग्नेटाइट भी उच्च लौह युक्त होता है, लेकिन हेमेटाइट अधिक प्रचुर और उपयोगी है।​
  • प्रमुख क्षेत्र और राज्य
    • भारत के लौह अयस्क भंडार प्रायद्वीपीय पठार में असमान रूप से वितरित हैं, जहाँ कर्नाटक सबसे बड़ा भंडार रखता है
    • लेकिन उच्च कोटि के लिए उत्तरी ओडिशा-झारखंड बेल्ट प्रसिद्ध है।​
    • ओडिशा: सबसे बड़ा उत्पादक (53% हिस्सा), केंद्रझर, मयूरभंज, सुंदरगढ़ में जाजंग, ग्वाली खदानें उच्च हेमेटाइट प्रदान करती हैं।​
    • झारखंड: सिंहभूमि में नोआमुंडी और गुआ खदानें उच्च ग्रेड हेमेटाइट के लिए जानी जाती हैं।​
    • छत्तीसगढ़: बैलाडीला (दंतेवाड़ा) में उच्च गुणवत्ता वाले भंडार, NMDC द्वारा संचालित।​
    • कर्नाटक: बेल्लारी-होस्पेट क्षेत्र में सबसे बड़ा कुल भंडार, लेकिन उत्पादन ओडिशा से कम।​
  • उत्पादन और महत्व
    • 2021-22 में भारत ने 204 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादित किया
    • जिसमें ओडिशा (109 मिलियन टन), छत्तीसगढ़ (15.84%), कर्नाटक (16.62%) और झारखंड (10.14%) प्रमुख हैं।
    • ये उच्च कोटि भंडार इस्पात उद्योग (TISCO, SAIL) के लिए महत्वपूर्ण हैं
    • जो बुनियादी ढांचे, ऑटोमोबाइल और मशीनरी के लिए आवश्यक हैं। छोटानागपुर पठार इन्हें "खनिज हृदय" बनाता है।​

10. ....... भारत में 2019-20 के दौरान कुल उत्पादन का 33% मैंगनीज अयस्क का अग्रणी उत्पादक राज्य था। [CHSL (T-I) 09 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) मध्य प्रदेश
Solution:
  • इंडियन मिनरल्स ईयरबुक, 2020 के अनुसार, वर्ष 2019-20 (P) में मैंगनीज अयस्क का सर्वाधिक उत्पादन मध्य प्रदेश (33 प्रतिशत) में हुआ था।
  • इंडियन मिनरल्स ईयरबुक, 2022 के अनुसार, भारत में शीर्ष तीन मैंगनीज अयस्क उत्पादक राज्य इस प्रकार हैं
  • मध्य प्रदेश (31.50 प्रतिशत), महाराष्ट्र (27 प्रतिशत) तथा ओडिशा (19 प्रतिशत)।
  • उत्पादन आंकड़े
    • मध्य प्रदेश ने 2019-20 में 5,528 हजार टन मैंगनीज का उत्पादन किया, जो भारत का सबसे अधिक था।
    • महाराष्ट्र ने कुल उत्पादन का 25% जबकि ओडिशा ने 18% योगदान दिया।
    • कर्नाटक और आंध्र प्रदेश ने संयुक्त रूप से लगभग 11% उत्पादन किया।​
  • अन्य प्रमुख राज्य
    • मध्य प्रदेश के बाद महाराष्ट्र (25%) दूसरा स्थान रखता है।
    • ओडिशा (18%), कर्नाटक और आंध्र प्रदेश अन्य महत्वपूर्ण उत्पादक हैं।​
    • मैंगनीज उत्पादन मुख्य रूप से धारवाड़ प्रणाली से जुड़े क्षेत्रों में होता है।​
  • मैंगनीज का महत्व
    • मैंगनीज एक कठोर, भंगुर खनिज है जो धातुकर्म उद्योग में 85% उपयोग होता है।
    • भारत रूस और दक्षिण अफ्रीका के बाद विश्व में तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है
    • फिर भी आयात पर निर्भर रहता है। यह स्टील निर्माण और शुष्क बैटरी में आवश्यक है।​