खनिज संसाधन (भारत का भूगोल)

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11. निम्नलिखित में से कौन-सी तांबे की एक खुली खदान (open pit mine) है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) मलंजखंड
Solution:
  • मलंजखंड तांबे की एक खुली खदान है। यह मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में स्थित है।
  • भारत में तांबा धारवाड़ शिलाओं के रंध्रों में पाया जाता है।
  • खदान का विवरण
    • मलाजखंड को "कॉपर सिटी" भी कहा जाता है क्योंकि यह भारत की सबसे बड़ी तांबे की खुली खदानों में से एक है।
    • इसकी खोज 1969 में हुई और उत्पादन 1982 से शुरू हुआ, जो देश के कुल तांबे उत्पादन का लगभग 52% योगदान देती है।
    • ओपन-पिट विधि से सतही खनिज निकाले जाते हैं, जो बड़े पैमाने पर कुशल है।​
  • अन्य तांबा खदानें
    • भारत की अन्य प्रमुख तांबा खदानें खेतड़ी (राजस्थान) और सिंहभूम (झारखंड) हैं
    • लेकिन ये मुख्यतः भूमिगत या मिश्रित विधियों का उपयोग करती हैं।
    • मलाजखंड की ओपन-पिट प्रकृति इसे विशिष्ट बनाती है, जहां विशाल गड्ढों से अयस्क निकाला जाता है।​
  • तांबे का उपयोग
    • तांबा विद्युत तारों, केबल्स, मिश्र धातुओं और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर पैनलों में उपयोग होता है।
    • भारत तांबे के लिए आयात पर निर्भर है, लेकिन मलाजखंड जैसे खदानें उत्पादन बढ़ाने में सहायक हैं।
    • यह धातु निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों के लिए आवश्यक है।​

12. भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (2021-2022) के अनुसार, भारत का कौन-सा प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा उत्पादक है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) असम
Solution:
  • भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2021-22 में भारत का असम राज्य प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।
  • असम में 3371.5 MMSCM, राजस्थान में 2618.8 MMSCM, त्रिपुरा में 1530.8 MMSCM, गुजरात में 1017.3 MMSCM
  • तमिलनाडु राज्य में 1066.5 MMSCM तथा आंध्र प्रदेश राज्य में 808.6 MMSCM प्राकृतिक गैस का उत्पादन हुआ।
  • भारत में अधिकांश प्राकृति गैस का उत्पादन अपतटीय क्षेत्र से होता है।
  • उत्पादन योगदान
    • मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, असम भारत के कुल प्राकृतिक गैस उत्पादन में लगभग 53% का योगदान देता है।
    • राज्य में डिगबोई, सिलचर और अन्य क्षेत्रों से प्रमुख उत्पादन होता है
    • जो देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।​
  • अन्य प्रमुख राज्य
    • महाराष्ट्र दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जहां मुंबई हाई जैसे अपतटीय क्षेत्रों से गैस निकाली जाती है।
    • गुजरात और आंध्र प्रदेश भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, लेकिन असम का हिस्सा सबसे अधिक रहता है।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • असम में प्राकृतिक गैस के भंडार देश के कुल का लगभग 13% हैं
    • और यह 8.3 MMSMCD (मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर पर डे) उत्पादन करता है।
    • मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्टों में असम की प्राथमिकता स्पष्ट है, हालांकि पेट्रोलियम उत्पादन में राजस्थान अग्रणी है।​

13. मध्य प्रदेश का कौन-सा जिला तांबे का अग्रणी उत्पादक है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) बालाघाट
Solution:
  • मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला तांबे का अग्रणी उत्पादक जिला है।
  • ताम्र अयस्क उत्पादन के भारत में तीन महत्वपूर्ण जिले झुंझुनू (राजस्थान), बालाघाट (मध्य प्रदेश) एवं पूर्वी सिंहभूम (झारखंड) हैं।
  • प्रमुख खदान और उत्पादन
    • बालाघाट जिला मध्य प्रदेश में तांबे का सबसे बड़ा उत्पादक है
    • जहां मलांजखंड कॉपर प्रोजेक्ट स्थित है।
    • यह भारत की सबसे बड़ी तांबे की खदान है
    • जो हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) द्वारा संचालित होती है।
    • मलांजखंड खदान देश के तांबे भंडार का लगभग 70% रखती है
    • HCL के कुल उत्पादन में 80% योगदान देती है।​
  • अन्य खदानें
    • बालाघाट में मलांजखंड के अलावा शीतलपानी, गिधरी ढोरली, जट्टा और गढ़ी डोंगरी जैसी अन्य तांबे की खदानें भी सक्रिय हैं।
    • इन खदानों से भारत के कुल तांबे उत्पादन का 40% से अधिक हिस्सा आता है।
    • जिले को "तांबे का शहर" भी कहा जाता है
    • क्योंकि यहां से देश के 52% तांबे का उत्पादन होता है।​
  • अन्य जिलों की तुलना
    • मध्य प्रदेश भारत का सबसे बड़ा तांबा उत्पादक राज्य है
    • जो देश के कुल उत्पादन का 46-62% हिस्सा देता है।
    • बालाघाट का योगदान राज्य के कुल तांबा उत्पादन में सबसे अधिक है।​

14. निम्न में से कौन-सा भारत में एक प्रमुख लौह अयस्क पेटी नहीं है? [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) हरियाणा-राजस्थान
Solution:
  • भारत में लौह अयस्क उत्पादन के चार प्रमुख क्षेत्र हैं-
  • पूर्वी भारत - झारखंड एवं ओडिशा
  • मध्य भारत - मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़
  • प्रायद्वीपीय भारत - जिसमें कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र
  • अन्य क्षेत्र - आंध्र प्रदेश, केरल, गुजरात, पश्चिम बंगाल आदि हैं।
  • इस प्रकार दिए गए विकल्पों में हरियाणा व राजस्थान नहीं हैं।
  • भारत में तीन प्रमुख लौह अयस्क पेटियाँ (Iron Ore Belts) मानी जाती हैं
  • उड़ीसा–झारखंड पट्टी, दुर्ग–बस्तर–चंद्रपुर पट्टी और बेल्लारी–चित्रदुर्ग–चिकमगलूर–तुमकुर पट्टी।​
  • भारत की तीन प्रमुख लौह अयस्क पेटियाँ
  • उड़ीसा–झारखंड लौह अयस्क पट्टी
    • यह पट्टी झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र से उड़ीसा (ओडिशा) के मयूरभंज, क्योंझर आदि जिलों तक फैली है।
    • यहां बादाम पहाड़, किरिबुरू, गुरु महिसानी जैसी खदानों में उच्च श्रेणी का हेमेटाइट लौह अयस्क पाया जाता है।​
  • दुर्ग–बस्तर–चंद्रपुर लौह अयस्क पट्टी
    यह पट्टी मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में फैली है।
    • इसमें बैलाडीला (दंतेवाड़ा, बस्तर), डल्लीराजहारा (दुर्ग) तथा चंद्रपुर क्षेत्र की खदानें शामिल हैं
    • जो उच्च गुणवत्ता के हेमेटाइट लौह अयस्क के लिए प्रसिद्ध हैं।​
  • बेल्लारी–चित्रदुर्ग–चिकमगलूर–तुमकुर लौह अयस्क पट्टी
    • यह पट्टी कर्नाटक राज्य में है और इसमें बेल्लारी, चित्रदुर्ग, चिकमगलूर तथा तुमकुर जिलों की खदानें आती हैं।
    • इसी पट्टी क्षेत्र में स्थित कुद्रेमुख लौह अयस्क भंडार को विश्व के बड़े लौह अयस्क भंडारों में गिना जाता है।​
  • परीक्षाप्रश्न के संदर्भ में
    • सामान्यत: प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाने वाला प्रश्न इस प्रकार होता है:
    • “निम्न में से कौन‑सा भारत में एक प्रमुख लौह अयस्क पेटी नहीं है?” तो ऊपर बताई गई तीनों पट्टियाँ –
    • उड़ीसा–झारखंड पट्टी
    • दुर्ग–बस्तर–चंद्रपुर पट्टी
    • बेल्लारी–चित्रदुर्ग–चिकमगलूर–तुमकुर पट्टी
    • प्रमुख लौह अयस्क पेटियाँ हैं, अतः जो विकल्प इनमें से किसी एक से मेल नहीं खाता (जैसे कोई कोयला पट्टी, अभ्रक पट्टी, बॉक्साइट पट्टी या कोई मनगढ़ंत/भौगोलिक रूप से असंबंधित नाम) वही “प्रमुख लौह अयस्क पेटी नहीं” माना जाएगा।

15. निम्नलिखित में से भारत के किस क्षेत्र में अधिकांश लोहा तथा इस्पात उद्योग संकेंद्रित हैं? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) छोटा नागपुर का पठार
Solution:
  • भारत में छोटा नागपुर के पठार में खनिज संसाधनों के सबसे बड़े भंडार पाए जाते हैं।
  • इस क्षेत्र में अधिकांश लोहा तथा इस्पात उद्योग संकेंद्रित हैं।
  • भारत के जिस क्षेत्र में अधिकांश लोहा तथा इस्पात उद्योग संकेंद्रित हैं
  • वह है छोटानागपुर पठार​
  • यह क्षेत्र मुख्यतः झारखंड में स्थित है तथा इसके आसपास छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ हिस्से भी आते हैं।​
  • छोटानागपुर पठार का भौगोलिक फैलाव
    • छोटानागपुर पठार पूर्वी भारत में स्थित है और यह झारखंड के बड़े हिस्से के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और बिहार के सीमावर्ती भागों तक फैला है।​
    • यह क्षेत्र प्राचीन चट्टानों, पठारी सतहों और खनिज सम्पदा के लिए जाना जाता है, जो भारी उद्योगों के लिए आदर्श आधार बनाती है।​
  • इस्पात उद्योगों का संकेंद्रण क्यों?
    • इस क्षेत्र में उच्च दर्जे के हेमेटाइट लौह-अयस्क के प्रचुर भंडार पाए जाते हैं, जैसे नोआमुंडी, गुवा, कोल्हान आदि क्षेत्र।​
    • इसके अतिरिक्त, कोयला, चूना पत्थर और अन्य सहायक खनिज भी निकटवर्ती क्षेत्रों (बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा) में उपलब्ध हैं
    • जिससे कच्चा माल सस्ता और सुगम हो जाता है।​
    • यहाँ पर सस्ता व प्रचुर श्रमबल, विकसित रेल-सड़क परिवहन, विद्युत की उपलब्धता तथा पूर्वी भारत के बड़े बाज़ारों (कोलकाता आदि) की निकटता भी उद्योगों के संकेंद्रण को बढ़ावा देती है।​
    • नदियों और समतल पठारी सतहों के कारण बड़े-बड़े संयंत्रों की स्थापना के लिए उपयुक्त स्थल आसानी से मिल जाते हैं।​
  • प्रमुख लोहा-इस्पात केंद्र (छोटानागपुर क्षेत्र में)
    • जमशेदपुर (टाटा स्टील/TISCO, झारखंड) – भारत का सबसे पुराना व महत्वपूर्ण निजी क्षेत्र का इस्पात संयंत्र, 1907 में साकची (अब जमशेदपुर) में स्थापित हुआ।​
    • बोकारो स्टील प्लांट (झारखंड) – सार्वजनिक क्षेत्र का विशाल एकीकृत इस्पात संयंत्र, छोटानागपुर क्षेत्र के प्रमुख केन्द्रों में से एक।​
    • राउरकेला स्टील प्लांट (ओडिशा) – जर्मन सहयोग से स्थापित प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र का इस्पात संयंत्र, लौह-अयस्क और कोयले के निकट स्थित।​
    • भिलाई स्टील प्लांट (छत्तीसगढ़) – रूस (पूर्व सोवियत संघ) के सहयोग से स्थापित, रेल पटरियों व भारी इस्पात के लिए प्रसिद्ध।​
    • दुर्गापुर और बर्नपुर (पश्चिम बंगाल) – दमदर घाटी क्षेत्र में स्थित बड़े इस्पात केंद्र, जो कोयला क्षेत्रों के निकट हैं।​
  • अन्य क्षेत्र, पर मुख्य नहीं
    • भद्रावती और विजयनगर (कर्नाटक)​
    • विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)​
    • सलेम (तमिलनाडु)​
  • परीक्षा के लिए निष्कर्ष बिंदु
    • प्रश्न: “भारत के किस क्षेत्र में अधिकांश लोहा तथा इस्पात उद्योग संकेंद्रित हैं
    • उत्तर: छोटानागपुर पठार क्षेत्र।​
    • कारण याद रखने लायक: प्रचुर लौह-अयस्क, कोयला, चूना पत्थर; सस्ता श्रम; अच्छा परिवहन; बड़ा बाज़ार
    • सरकारी-सांस्थानिक सहयोग, जिससे यह क्षेत्र भारत का प्रमुख इस्पात पट्टी (Iron-Steel Belt) बन गया है।​

16. प्रमाणित कोयला भंडार (कोयला मंत्रालय, भारत सरकार, 2018 तक की प्राप्त जानकारी के अनुसार) के संदर्भ में निम्नलिखित राज्यों के अवरोही क्रम में सही क्रम ....... है। [Phase-XI 28 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल
Solution:
  • प्रमाणित कोयला भंडार (कोयला मंत्रालय, भारत सरकार 2018 तक की प्राप्त जानकारी के अनुसार) के संदर्भ में राज्यों के अवरोही क्रम क्रमशः इस प्रकार हैं
  • झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल। 1 अप्रैल, 2021 तक की स्थिति के अनुसार, प्रमाणित कोयला भंडार की दृष्टि से शीर्ष चार राज्य क्रमशः इस प्रकार है
  • झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ तथा पश्चिम बंगाल । (स्रोत-इंडियन मिनरल्स ईयरबुक, 2021)
  • प्रमाणित कोयला भंडारों का अवरोही क्रम (2018 तक)
    • कोयला मंत्रालय के आंकड़ों के आधार पर भारत के कुल प्रमाणित कोयला भंडार लगभग 319 बिलियन टन हैं
    • जिनमें से अधिकांश गोंडवाना कोयला क्षेत्रों (गोंडwana Coalfields) में केंद्रित हैं। अवरोही क्रम इस प्रकार है:
    • झारखंड: सबसे अधिक भंडार (लगभग 26% कुल का), धनबाद, बोकारो, गिरिडीह आदि क्षेत्रों में।​
    • ओडिशा: दूसरे स्थान पर (लगभग 24-25%), तालचेर, अंगुल, इब वेली प्रमुख।​
    • छत्तीसगढ़: तीसरे स्थान पर (लगभग 15-20%), कोरबा, रायगढ़, कोरिया क्षेत्र।​
    • पश्चिम बंगाल: चौथे स्थान पर (लगभग 10-12%), रानीगंज, झरिया (आंशिक रूप से साझा)।​
    • मध्य प्रदेश: पांचवें स्थान पर (लगभग 9-10%), सिंगरौली, शहडोल, सोन घाटी।​
    • यह क्रम प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC आदि) में मानक माना जाता है
    • क्योंकि ये राज्य गोंडवाना सुपरग्रुप की प्राचीन संरचनाओं पर आधारित हैं।​
  • भंडारों के वितरण के कारण
    • भूवैज्ञानिक कारण: अधिकांश भंडार गोंडवाना युग (200-300 मिलियन वर्ष पुराने) के हैं
    • जो पूर्वी और मध्य भारत के डांगो-क्षेत्रों (Dangri Belts) में पाए जाते हैं। झारखंड-ओडिशा पट्टी सबसे समृद्ध।​
    • गुणवत्ता: ककिंग कोयला (Coking Coal) झारखंड-बंगाल में अधिक, थर्मल कोयला (Thermal) छत्तीसगढ़-ओडिशा में।​
    • उत्पादन vs भंडार: भंडार के क्रम में झारखंड-ओडिशा शीर्ष हैं, लेकिन उत्पादन में छत्तीसगढ़-ओडिशा आगे (2025 तक ओडिशा सबसे बड़ा उत्पादक)।​
  • अन्य महत्वपूर्ण राज्य (निम्न क्रम)
    • तेलंगाना (सिंगरेनी क्षेत्र): ~7-8%
    • महाराष्ट्र (चंदा-वर्धा): ~5%
    • आंध्र प्रदेश (सिंगरेनी साझा): सीमित
    • ये शीर्ष 5 की तुलना में कम हैं।​
  • परीक्षा उपयोगिता
    • प्रश्न अक्सर MCQ रूप में आते हैं, जहां विकल्पों में झारखंड > ओडिशा > छत्तीसगढ़ > प.बंगाल > म.प्र. सही होता है।
    • 2018 के बाद आंकड़े थोड़े बदले (ओडिशा कभी-कभी शीर्ष), लेकिन मंत्रालय के प्रमाणित डेटा के लिए यही मानक क्रम है।
    • सिंगरौली जैसे क्षेत्र सीमावर्ती होने से कभी विवादित लगते हैं।

17. निम्नलिखित में से किस राज्य में 2020 की स्थिति के अनुसार, भारत में सोने के अयस्क का सबसे बड़ा भंडार है? [CHSL (T-I) 09 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) बिहार
Solution:
  • बिहार राज्य में 2020 की स्थिति के अनुसार, सोने के अयस्क का सबसे बड़ा भंडार है।
  • इसके बाद राजस्थान, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश तथा झारखंड हैं।
  • स्वर्ण अयस्क के शेष भंडार छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में स्थित हैं।
  • भंडार का आंकड़ा
    • राष्ट्रीय खनिज सूची के अनुसार, 2015 तक के आंकड़ों (जो 2020 तक प्रासंगिक बने रहे) में देश का कुल स्वर्ण अयस्क भंडार 501.83 मिलियन टन था
    • जिसमें से बिहार में 44% यानी लगभग 222.8 मिलियन टन संसाधन हैं।
    • जमुई जिले के सोनो प्रखंड, खासकर करमटिया क्षेत्र में यह भंडार मुख्य रूप से स्थित है।
    • इसमें से 1.722 मिलियन टन को रिजर्व श्रेणी में वर्गीकृत किया गया था।​
  • अन्य राज्यों से तुलना
    • बिहार के बाद राजस्थान (25%), कर्नाटक (21%), पश्चिम बंगाल (3%), आंध्र प्रदेश (3%) और झारखंड (2%) में भंडार हैं।
    • शेष संसाधन छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में बंटे हैं।
    • कर्नाटक उत्पादन में अग्रणी है, लेकिन भंडार के मामले में बिहार शीर्ष पर है।​
  • खनन की वर्तमान स्थिति
    • बिहार में भंडार होने के बावजूद बड़े पैमाने पर खनन अभी शुरू नहीं हुआ
    • मुख्य कारण बुनियादी ढांचे की कमी और नियामक प्रक्रियाएं हैं। GSI के आंकड़े संसाधनों पर आधारित हैं
    • जो भविष्य के उत्पादन की संभावना दर्शाते हैं। इससे बिहार की अर्थव्यवस्था में क्रांति आ सकती है।​

18. इंडियन मिनरल्स ईयर बुक, 2020 के अनुसार, चूना पत्थर उत्पादन में भारत के किस राज्य की हिस्सेदारी सबसे अधिक है? [SSC ऑनलाइन CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) राजस्थान
Solution:
  • इंडियन मिनरल्स ईयर बुक, 2020 के अनुसार, भारत में चूना पत्थर उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 20% है।
  • इंडियन मिनरल्स ईयरबुक, 2022 के अनुसार, वर्ष 2021-22 (P) में भारत के तीन शीर्ष चूना पत्थर उत्पादक राज्य क्रमशः इस प्रकार हैं
  • राजस्थान (22%), मध्य प्रदेश (13%) तथा आंध्र प्रदेश (13%)।
  • राजस्थान इंडियन मिनरल्स ईयर बुक 2020 के अनुसार भारत में चूना पत्थर उत्पादन में सबसे अधिक हिस्सेदारी रखने वाला राज्य है।​
  • उत्पादन हिस्सेदारी
    • इस ईयर बुक में 2019-20 वित्तीय वर्ष के आंकड़ों के आधार पर राजस्थान का चूना पत्थर उत्पादन देश के कुल उत्पादन का लगभग 29% है।
    • कुल उत्पादन 359 मिलियन टन रहा, जिसमें से राजस्थान ने प्रमुख योगदान दिया। अन्य राज्य जैसे छत्तीसगढ़ (17%) और मध्य प्रदेश (13%) पीछे रहे।​
  • प्रमुख उत्पादक खदानें
    • ईयर बुक के अनुसार, 30 खदानें जिनका उत्पादन 3 मिलियन टन से अधिक था, उन्होंने कुल उत्पादन का 42% दिया।
    • राजस्थान में 10 प्रमुख उत्पादकों ने लगभग 54% कुल उत्पादन में योगदान किया।
    • 97% उत्पादन सीमेंट ग्रेड का था, जो मुख्य रूप से सीमेंट उद्योग के लिए उपयोग होता है।​
  • अन्य राज्यों की स्थिति
    • छत्तीसगढ़ दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है (17%)।
    • मध्य प्रदेश का हिस्सा 13% है।
    • आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात और तमिलनाडु भी महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हैं।​
  • संसाधन वितरण
    • कुल संसाधनों में कर्नाटक (27%) अग्रणी है, उसके बाद राजस्थान (12%)।
    • चूना पत्थर मुख्यतः कैल्शियम कार्बोनेट से बना अवसादी चट्टान है, जो सीमेंट (75%), स्टील (16%) और रसायन उद्योगों में उपयोग होता है।
    • 659 रिपोर्टिंग माइनों से उत्पादन हुआ।​

19. निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य भारत में कोयले का उत्पादन नहीं करता है? [MTS (T-I) 13 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) गुजरात
Solution:
  • कोयला मुख्यतः हाइड्रोकार्बन से निर्मित एक ठोस संस्तरित शिला है। भारत के पास कोयले का प्रचुर भंडार है।
  • इंडियन मिनिरल्स ईयरबुक, 2021 के अनुसार, मात्रा की दृष्टि से वर्ष 2020-21 (P) में भारत के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य क्रमशः इस प्रकार हैं
  • छत्तीसगढ़ (22.12%), ओडिशा (21.53%), मध्य प्रदेश (18.51%), झारखंड (16.66%), तेलंगाना (7.35%), महाराष्ट्र (6.62%), प. बंगाल (4.83%) तथा उत्तर प्रदेश (2.38%)।
  • गुजरात राज्य में कोयले का उत्पादन नहीं होता है।
  • केरल भारत में कोयले का उत्पादन करने वाले राज्यों में शामिल नहीं है।
  • यह राज्य दक्षिण भारत में स्थित है और इसकी भूगर्भीय संरचना में कोयला भंडार अनुपस्थित हैं।​
  • प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य
    • भारत का कोयला उत्पादन मुख्य रूप से गोंडवाना संरचनाओं वाले राज्यों से होता है।
    • झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ शीर्ष उत्पादक हैं, जो कुल उत्पादन का अधिकांश हिस्सा प्रदान करते करते हैं।
    • वित्त वर्ष 2025 में कुल उत्पादन 1 बिलियन टन से अधिक पहुंचा, जिसमें कोल इंडिया लिमिटेड का 74% योगदान रहा।​
  • कोयला भंडार वितरण
    • झारखंड: सबसे अधिक भंडार (लगभग 26%) और उत्पादन।
    • ओडिशा: दूसरा प्रमुख राज्य, उच्च गुणवत्ता वाले कोयले के लिए जाना जाता है।
    • छत्तीसगढ़: तीसरा स्थान, कैप्टिव खदानों से बढ़ती उत्पादन।
    • पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, तेलंगाना: अन्य महत्वपूर्ण उत्पादक।
    • केरल, तमिलनाडु, पंजाब जैसे राज्य कोयला उत्पादन से वंचित हैं।​
  • उत्पादन आंकड़े (2025)
    • अप्रैल 2025 में कुल उत्पादन 81.57 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष से 3.63% अधिक था।
    • कैप्टिव खदानों से 26.6% वृद्धि दर्ज हुई। कोयला मुख्यतः बिजली उत्पादन (82% डिस्पैच) के लिए उपयोग होता है।​