Correct Answer: (a) प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध
Solution:- सालबाई की संधि पर 1782 में हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1775-1782) का अंत हुआ।
- इस संधि ने अंग्रेजों और मराठों के बीच बीस वर्षों तक शांति स्थापित की।
- प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध:
- यह युद्ध ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठा साम्राज्य के बीच लड़ा गया था।
- इससे यथास्थिति बहाल हो गई, जिसमें अंग्रेजों ने साल्सेट और ब्रोच पर नियंत्रण बरकरार रखा, जबकि मराठों ने उन अन्य क्षेत्रों पर पुनः नियंत्रण प्राप्त कर लिया जिन्हें उन्होंने खो दिया था।
- द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध:
- यह युद्ध 1803 और 1805 के बीच हुआ था।
- बेसिन की संधि (1802) और बाद में सुरजी-अंजनगांव की संधि (1803) महत्वपूर्ण संधियाँ थीं, न कि सालबाई की संधि।
- तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध:
- यह युद्ध 1817 से 1818 तक चला।
- पूना की संधि (1817) और अन्य संधियों ने इस संघर्ष को समाप्त कर दिया, जिससे मराठा साम्राज्य का पूर्ण विघटन हो गया।
- प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध क्या था:
- प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध 1775 में शुरू हुआ था, जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठा साम्राज्य के बीच सत्ता संघर्ष हुआ।
- इस युद्ध में दोनों पक्षों के बीच कई लड़ाइयां और विवाद चले, जिसमें मराठों ने भी ब्रिटिशों के खिलाफ कड़ी लड़ाई लड़ी।
- युद्ध का दबाव इतना बढ़ा कि युद्ध को समाप्त करने के लिए सालबाई की संधि हुई।
- सालबाई की संधि के प्रमुख परिणाम
- ब्रिटिश और मराठा दोनों ने अपने-अपने क्षेत्रों में यथास्थिति बना ली।
- अंग्रेजों ने मराठों के साथ बिना अतिरिक्त क्षेत्रीय विस्तार के समझौता किया।
- इस संधि ने अंग्रेजों को टीपू सुल्तान जैसे अन्य शत्रुओं से निपटने का मौका दिया क्योंकि मराठों के साथ युद्ध विराम हो गया।
- मराठों के राघोबा को ब्रिटिश पेंशन देना स्वीकार करना पड़ा, और राघोबा का ब्रिटिश समर्थन बंद हो गया।
- मैसूर के हैदरअली, जो अंग्रेजों के विरोधी थे, को मराठों का सहयोग बंद करना पड़ा।
- संधि का महत्व
- सालबाई की संधि ने भारत में अंग्रेजों के लिए एक महत्वपूर्ण घड़ी साबित हुई क्योंकि इसके बाद 20 वर्ष तक मराठों और अंग्रेजों में स्थिरता रही। इससे अंग्रेजों को दक्षिण भारत में अपनी स्थिति
- मजबूत करने, मैसूर जैसे अन्य शत्रुओं से मुकाबला करने का मौका मिला। यह संधि भारत में ब्रिटिश प्रभाव को स्थापित करने का एक मील का पत्थर भी थी।
- इस प्रकार, सालबाई की संधि ने प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध का अंत किया और दोनों पक्षों के बीच स्थायी शांति स्थापित की, जो अगले कई दशकों तक कायम रही.