Solution:सरल आवर्त गति करने वाला पिण्ड जब अपनी मध्यमान स्थिति से गुजरता है, तो-(i) उस पर कोई बल कार्य नहीं करता है।
(ii) उसका त्वरण शून्य होता है।
(iii) वेग अधिकतम होता है।
(iv) गतिज ऊर्जा अधिकतम होती है।
(v) स्थितिज ऊर्जा शून्य होती है।
जब पिण्ड गति के अंतः बिंदुओं (चरम स्थिति) पर पहुंचता है, तो-
(i) उसका त्वरण अधिकतम होता है।
(ii) उस पर कार्य करने वाला प्रत्यानयन बल अधिकतम होता है।
(iii) गतिज ऊर्जा शून्य होती है।
(iv) स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है।
(v) वेग शून्य होता है।
साथ ही हर आवर्तन में गोलक दो बार किसी एक निर्दिष्ट वेग को प्राप्त करता है। इसके अतिरिक्त सामान्य परिस्थितियों में सामान्य दोलक का दोलन-आयाम (वायु प्रतिरोध आदि कारणों से) समय के साथ-साथ कम होता जाता है। इस प्रकार कथन 1, 2 और 4 सही हैं, जबकि कथन 3 सही नहीं है।