गुरुत्व के अधीन गति-(भौतिक विज्ञान)

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31. लोलक की कालावधि (Time-period)- [47th B.P.S.C. (Pre) 2005]

Correct Answer: (b) लंबाई के ऊपर निर्भर करती है।
Solution:

लोलक की कालावधि (आवर्तकाल) वह समय होता है जो लोलक को एक पूर्ण दोलन करने में लगता है। एक साधारण लोलक के आवर्तकाल () का सूत्र निम्न है:

जहाँ:

  • लोलक की प्रभावी लंबाई है (निलंबन बिंदु से लोलक के गुरुत्व केंद्र तक की दूरी)।
  • गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण है।

इस सूत्र से स्पष्ट है कि लोलक का आवर्तकाल:

  • लंबाई () पर निर्भर करता है: लंबाई बढ़ने पर आवर्तकाल बढ़ता है।
  • गुरुत्वाकर्षण () पर निर्भर करता है: बढ़ने पर आवर्तकाल घटता है।

32. लोलक घड़ियां गर्मियों में सुस्त हो जाती हैं, क्योंकि [U.P.P.C.S. (Pre) 2012 U.P.P.C.S. (Pre) 1994]

Correct Answer: (c) लोलक की लंबाई बढ़ जाती है।
Solution:

लोलक की कालावधि (आवर्तकाल) वह समय होता है जो लोलक को एक पूर्ण दोलन करने में लगता है। एक साधारण लोलक के आवर्तकाल () का सूत्र निम्न है:

जहाँ:

  • लोलक की प्रभावी लंबाई है (निलंबन बिंदु से लोलक के गुरुत्व केंद्र तक की दूरी)।
  • गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण है।

इस सूत्र से स्पष्ट है कि लोलक का आवर्तकाल:

  • लंबाई () पर निर्भर करता है: लंबाई बढ़ने पर आवर्तकाल बढ़ता है।
  • गुरुत्वाकर्षण () पर निर्भर करता है: बढ़ने पर आवर्तकाल घटता है।

गर्मियों में तापमान बढ़ने के कारण लोलक घड़ियों में उपयोग की जाने वाली धातु की छड़ (जिससे लोलक जुड़ा होता है) थर्मल विस्तार (thermal expansion) के कारण थोड़ी फैल जाती है। इससे लोलक की प्रभावी लंबाई () बढ़ जाती है

जैसा कि हमने सूत्र () में देखा, लोलक का आवर्तकाल उसकी लंबाई के वर्गमूल के समानुपाती होता है। यानी, यदि लंबाई () बढ़ती है, तो आवर्तकाल () भी बढ़ता है।

जब आवर्तकाल बढ़ता है, तो लोलक को एक पूरा दोलन करने में अधिक समय लगता है। इसका मतलब है कि घड़ी की टिक-टिक धीमी हो जाती है, और घड़ी सुस्त (slow) हो जाती है, यानी वह सही समय से पीछे हो जाती है।

33. एक लड़की झूले पर बैठी स्थिति में झूला झूल रही है। उस लड़की के खड़े हो जाने पर प्रदोल आवर्तकाल [I.A.S. (Pre) 1997]

Correct Answer: (a) कम हो जाएगा।
Solution:लड़की झूले पर बैठी स्थिति में झूला झूल रही है। उस लड़की के खड़े हो जाने पर लोलक की प्रभावी लंबाई कम हो जाएगी और फलस्वरूप उसका प्रदोल आवर्तकाल कम हो जाएगा।

34. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए- [I.A.S. (pre) 2001]

एक सामान्य दोलक का दोलन चल रहा है। ऐसे में-

1. जब गोला माध्य स्थान से गुजरता है, त्वरण शून्य होता

2.हर आवर्तन में गोलक दो बार किसी एक निर्दिष्ट वेग को प्राप्त करता है।

3. दोलन के दौरान जब गोला चरम स्थिति पर पहुंचता है, उसके गति और त्वरण दोनों शून्य होते हैं।

4. सामान्य दोलक का दोलन-आयाम समय के साथ-साथ कम होता जाता है।

इन कथनों में से कौन-कौन से सही हैं?

Correct Answer: (c) 1, 2 और 4
Solution:सरल आवर्त गति करने वाला पिण्ड जब अपनी मध्यमान स्थिति से गुजरता है, तो-

(i) उस पर कोई बल कार्य नहीं करता है।

(ii) उसका त्वरण शून्य होता है।

(iii) वेग अधिकतम होता है।

(iv) गतिज ऊर्जा अधिकतम होती है।

(v) स्थितिज ऊर्जा शून्य होती है।

जब पिण्ड गति के अंतः बिंदुओं (चरम स्थिति) पर पहुंचता है, तो-

(i) उसका त्वरण अधिकतम होता है।

(ii) उस पर कार्य करने वाला प्रत्यानयन बल अधिकतम होता है।

(iii) गतिज ऊर्जा शून्य होती है।

(iv) स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है।

(v) वेग शून्य होता है।

साथ ही हर आवर्तन में गोलक दो बार किसी एक निर्दिष्ट वेग को प्राप्त करता है। इसके अतिरिक्त सामान्य परिस्थितियों में सामान्य दोलक का दोलन-आयाम (वायु प्रतिरोध आदि कारणों से) समय के साथ-साथ कम होता जाता है। इस प्रकार कथन 1, 2 और 4 सही हैं, जबकि कथन 3 सही नहीं है।

35. पेंडुलम घड़ी तीव्र गति से चल सकती है- [R.A.S./R.T.S. (pre) 1997]

Correct Answer: (b) शीतकाल में
Solution:पेंडुलम घड़ी शीतकाल में तेजी से चलती है, क्योंकि इसका आवर्त पथ तथा आवर्तकाल घट जाता है, जबकि ग्रीष्मकाल में इसका आवर्त पथ तथा आवर्तकाल बढ़ जाता है, जिसके फलस्वरूप पेंडुलम घड़ी ग्रीष्मकाल में धीरे चलती है और वह सुस्त हो जाती है।

36. पृथ्वी का पलायन वेग है- [R.A.S./R.T.S. (Pre) 1993]

Correct Answer: (d) 11.2 किमी./सेकंड
Solution:पलायन वेग, वह न्यूनतम वेग है, जिससे किसी पिण्ड को ऊपर की और फेंके जाने पर वह पृथ्वी के गुरुच्चीय क्षेत्र को पार कर जाता है तथा पृथ्वी पर वापस नहीं आता। पृथ्वी का पलायन वेग 11.2 किमी. / सेकंड है।

37. अगर किसी वस्तु को 8 किमी. प्रति सेकंड के वेग से अंतरिक्ष में फेंका जाए, तो क्या होगा? [R.A.S./R.T.S. (Pre) 1992]

Correct Answer: (b) वह वापस पृथ्वी पर आ गिरेगी
Solution:किसी वस्तु को 8 किमी. से. के वेग से अंतरिक्ष में फेंके जाने पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण वह वस्तु वापस पृथ्वी पर आ गिरेगी, क्योंकि पृथ्वी का पलायन वेग 11.2 किमी. / सेकंड है।

38. चन्द्रमा पर वायुमंडल नहीं होने का क्या कारण है? [U.P. P.C.S. (Mains) 2012]

Correct Answer: (d) इस पर गैस अणुओं का पलायन वेग उनके वर्ग माध्य मूल वेग से कम होता है।
Solution:चन्द्रमा पर वायुमंडल नहीं पाया जाता। वायुमंडल अनेक गैसों का मिश्रण है। चन्द्रमा पर पलायन वेग का मान लगभग 2.4 किमी./से. है तथा धरती पर पलायन वेग 11.2 किमी./से. है। चन्द्रमा पर पलायन वेग से गैस के अणुओं का वेग ज्यादा होने के कारण वे वहां से पलायन कर जाते हैं, इसी कारण चन्द्रमा पर वायुमंडल संभव नहीं है।

39. नीचे दो वाक्यांश दिए हैं:

कथन (A): अंतरिक्ष में मोमबत्ती जलाने पर ज्वाला उत्पन्न नहीं होती।

कथन (R): ज्वाला का अस्तित्व गुरुत्वीयकर्षण के कारण होता है।

उपर्युक्त के संदर्भ में निम्न में से कौन एक सही है?

कूट :

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
Solution:नासा ने अपने प्रयोगों के पश्चात यह स्पष्ट किया है कि मोमबत्ती की ज्वाला के निर्माण में गुरुत्वीयकर्षण की अप्रत्यक्ष भूमिका होती है। अंतरिक्षयान में अतिसूक्ष्म गुरुत्वीय अवस्था (Microgravity) की स्थिति में मोमबत्ती को जलाने पर ज्याला तो उत्पन्न हो सकती है, परंतु वास्तविक निर्वात (अंतरिक्ष) में यह संभव नहीं है। वस्तुतः मोमबत्ती की ज्वाला की टिमटिमाने की आवृत्ति गुरुत्वीय त्वरण के मोमबत्ती के व्यास से अनुपात के वर्गमूल के समानुपाती होती है तथा अंतरिक्ष में गुरुत्वीय बल के अभाव के कारण यह शून्य होती है। इस प्रकार विकल्प (a) अभीष्ट उत्तर होगा।

40. भारहीनता की अवस्था में एक मोमबत्ती की ज्वाला का आकार हो जाएगा- [R.A.S./R.T.S. (Pre) 2005]

Correct Answer: (c) गोलाकार
Solution:अतिसूक्ष्म गुरुत्वीय अवस्था (Microgravity) या भारहीनता की अवस्था में किसी मोमबत्ती की ज्वाला का आकार गोलाकार हो जाएगा।