गुरूत्व के अधीन गति (भौतिक विज्ञान)

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1. निम्नलिखित में से कौन-सा भौतिक सिद्धांत रॉकेट इंजन, जेट इंजन और अपस्फीति वाले गुब्बारों द्वारा पैदा होने वाले प्रणोद की व्याख्या करता है? [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) न्यूटन के गति के नियम
Solution:
  • न्यूटन के गति का नियम वह भौतिक सिद्धांत है
  • जो रॉकेट इंजन, जेट इंजन और अपस्फीति वाले गुब्बारों द्वारा पैदा होने वाले प्रणोद की व्याख्या करता है।
  • एक रॉकेट इंजन और जेट इंजन एक प्रकार का प्रतिक्रिया इंजन है
  • जो तेजी से चलने वाली जेट का निस्सरण करता है, जो जेट नोदन द्वारा प्रणोद उत्पन्न करता है।
  • मुख्य सिद्धांत
    •  दोनों सिद्धांत प्रणोदन प्रणालियों में गैसों या हवा को पीछे धकेलने से वाहन को आगे की ओर बल प्राप्त होने की व्याख्या करते हैं।
  • रॉकेट इंजन में व्याख्या
    • रॉकेट में ईंधन जलने से गैसें उच्च वेग से नोजल के माध्यम से पीछे की ओर निकलती हैं
    • जिसका संवेग mv (द्रव्यमान × वेग) पीछे की दिशा में होता है।
    • प्रतिक्रिया के रूप में रॉकेट को आगे की दिशा में बराबर संवेग मिलता है
    • जिससे प्रणोद उत्पन्न होता है। यह अंतरिक्ष में भी कार्य करता है
    • क्योंकि रॉकेट अपना ऑक्सीडेंट स्वयं ले जाता है।
    • उदाहरण: स्पेसएक्स फाल्कन रॉकेट इसी सिद्धांत पर उड़ान भरता है।
  • जेट इंजन में व्याख्या
    • जेट इंजन वायु को संपीड़ित करता है, ईंधन मिलाकर जलाता है
    • निकास गैसों को पीछे धकेलता है। बाहरी हवा से ऑक्सीजन लेने के कारण यह वायुमंडल में ही कार्य करता है।
    • संवेग संरक्षण से जेट आगे बढ़ता है—फैन ब्लेड हवा को तेजी से पीछे फेंकते हैं
    • प्रतिक्रिया बल विमान को धकेलता है। टर्बोजेट, टर्बोफैन आदि सभी इसी पर आधारित हैं।
  • अपस्फीति वाले गुब्बारे में व्याख्या
    • गुब्बारे से हवा तेजी से बाहर निकलती है (पीछे की दिशा में संवेग), जिससे गुब्बारा विपरीत दिशा में उछलता है।
    • यह सरल उदाहरण है जहां कोई बाहरी बल न होने पर कुल संवेग शून्य रहता है
    • हवा का संवेग और गुब्बारे का संवेग बराबर-विपरीत।
    • बच्चों के खिलौने से लेकर वैज्ञानिक प्रदर्शनों तक यही सिद्धांत लागू होता है।
  • गणितीय आधार
    • मान लीजिए रॉकेट/जेट का द्रव्यमान M, वेग V है।
    • गैस का द्रव्यमान dm (नकारात्मक क्योंकि घट रहा है)
    • गैस वेग u (रॉकेट के सापेक्ष पीछे)। संवेग संरक्षण:
    • MdVdt=u(−dmdt)
    • यह ट्सiolkovsky रॉकेट समीकरण का आधार है, जो प्रणोद F=u⋅m˙ देता है।

2. जब एक पत्थर ऊपर की ओर फेंका जाता है, तो किस प्रकार का ऊर्जा रूपांतरण होगा? [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) गतिज ऊर्जा गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में बदल जाएगी
Solution:
  • ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार, जब एक पत्थर ऊपर की ओर फेंका जाता है
  • तो गतिज ऊर्जा गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में रूपांतरित हो जाएगी।
  • प्रारंभिक अवस्था
    • पत्थर फेंके जाने के ठीक बाद उसका वेग अधिकतम होता है, इसलिए गतिज ऊर्जा KE=12mv2 अधिकतम होती है
    • जबकि स्थितिज ऊर्जा शून्य या न्यूनतम (जमीन को संदर्भ मानकर) होती है।
    • जैसे ही पत्थर ऊपर चढ़ता है, गुरुत्वाकर्षण बल उसके वेग को कम करता है, जिससे गतिज ऊर्जा घटती जाती है।
  • आरोहण के दौरान परिवर्तन
    • ऊपर जाते समय स्थितिज ऊर्जा PE=mgh बढ़ती जाती है
    • क्योंकि ऊंचाई h बढ़ रही होती है। गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग स्थिर रहता है
    • KE+PE=निरंतर。 उदाहरणस्वरूप, यदि प्रारंभिक वेग u है
    • तो अधिकतम ऊंचाई h=u22g पर पहुंचने पर वेग शून्य हो जाता है।
  • उच्चतम बिंदु
    • सर्वोच्च बिंदु पर पत्थर का वेग शून्य हो जाता है, इसलिए गतिज ऊर्जा शून्य हो जाती है
    • सारी प्रारंभिक गतिज ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है।
    • यह ऊर्जा रूपांतरण का पूर्ण बिंदु है, जहां PEmax⁡=12mu2
  • अवरोहण चरण
    • नीचे गिरते समय विपरीत रूपांतरण होता है: स्थितिज ऊर्जा पुनः गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।
    • यदि कोई ऊर्जा हानि न हो, तो पत्थर मूल वेग u के समान वेग से जमीन पर पहुंचेगा।
    • वास्तविकता में वायु प्रतिरोध के कारण कुछ ऊर्जा गर्मी में परिवर्तित हो सकती है।

3. हेनरी कैवेंडिश ने पृथ्वी के द्रव्यमान और घनत्व के साथ गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक के मापन का वर्णन कब किया था? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) जून 1798
Solution:
  • हेनरी कैवेंडिश ने पृथ्वी के द्रव्यमान और घनत्व के साथ गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक के मापन का वर्णन जून, 1798 में किया था।
  • गुरुत्वाकर्षण नियतांक एक भौतिक नियतांक है
  • जिसे 'G' के चिह्न से दर्शाया जाता है। इसका मान 6.67 x 10⁻¹¹ Nm/kg) है।
  • प्रयोग का समय और प्रकाशन
    • कैवेंडिश ने वास्तविक प्रयोग 1797-1798 के दौरान क्लैप्टन, लंदन में अपने निजी प्रयोगशाला में किए।
    • परिणामों का विस्तृत वर्णन "Experiments to Determine the Density of the Earth" शीर्षक वाले 57 पृष्ठों के पेपर में जून 1798 में प्रकाशित हुआ।
    • यह पहला प्रयोग था जिसमें प्रयोगशाला में द्रव्यमानों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल को मापा गया।
  • प्रयोग की विधि
    • उन्होंने जॉर्जियन मासन्स के डिज़ाइन पर आधारित टॉर्शन बैलेंस का उपयोग किया।
    • इसमें एक क्षैतिज लकड़ी की छड़ के सिरों पर दो छोटी सीसे की गेंदें (लगभग 0.73 किग्रा प्रत्येक) लगी थीं
    • जो दो फिक्स्ड बड़ी सीसे की गेंदों (158 किग्रा प्रत्येक) के गुरुत्वाकर्षण से घूमती थीं।
    • टॉर्शन फाइबर के ट्विस्ट से गुरुत्वाकर्षण बल मापा गया।
    • उन्होंने कंपन अवधि और कोणीय विस्थापन का उपयोग कर आकर्षण की गणना की।
  • प्राप्त परिणाम
    • कैवेंडिश ने पृथ्वी का औसत घनत्व पानी के घनत्व से 5.48 गुना अधिक (लगभग 5.48 g/cm³) पाया।
    • इससे G का अप्रत्यक्ष मान 6.754×10−11 N⋅m2/kg2 निकला
    • जो आधुनिक मान 6.67430×10−11 के बहुत करीब था।
    • पृथ्वी का द्रव्यमान उन्होंने लगभग 5.974×1024 किग्रा अनुमानित किया।
  • ऐतिहासिक महत्व
    • यह प्रयोग न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम को छोटे पैमाने पर सत्यापित करने वाला पहला था।
    • उनके परिणाम एक सदी तक सर्वश्रेष्ठ रहे।
    • बाद में सर जॉन हेनरी पॉयंटिंग ने डेटा पुनर्विश्लेषण कर घनत्व 5.448 बताया। कैवेंडिश को "पृथ्वी को तौलने" का श्रेय मिला।

4. निम्नलिखित में से कौन गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का उदाहरण है? [CHSL (T-I) 15 अप्रैल, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) बांध के पीछे स्थित पानी
Solution:
  • पृथ्वी के गुरुत्वीय बल या गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में स्थित वस्तु में गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा पाई जाती है।
  • बांध के पीछे स्थित जल ऊंचाई पर स्थित होता है। अतः इसमें गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा पाई जाती है।
  • सूत्र और परिभाषा
    • गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का सूत्र U=mgh है
    • जहाँ m पिंड का द्रव्यमान, g गुरुत्वीय त्वरण (लगभग 9.8 m/s2) और h पृथ्वी सतह से ऊँचाई है।
    • सामान्यतः बांध के पीछे जमा पानी इसका प्रमुख उदाहरण है
    • क्योंकि यह ऊँचाई पर होता है और प्रवाह के दौरान गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है।
    • दो द्रव्यमानों के बीच यह U=−GMmr रूप में व्यक्त होती है।
  • प्रमुख उदाहरण
    • बांध का पानी: जलविद्युत बांध में संग्रहीत जल ऊँचाई के कारण उच्च गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा रखता है
    • जो टरबाइन घुमाकर विद्युत उत्पन्न करता है।
    • पर्वत पर रखा पत्थर: ऊँचाई बढ़ने से इसकी स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है
    • गिरने पर यह गतिज ऊर्जा बन जाती है।
    • मंगलसूत्र लटकता हुआ: घड़ी में लोलक ऊपरी स्थिति में अधिक ऊर्जा रखता है।
  • अन्य विकल्पों से अंतर
    • यदि विकल्पों में हवा का बहना (गतिज ऊर्जा), स्प्रिंग का संपीड़न (लचकदार स्थितिज ऊर्जा) या घूमता पहिया (गतिज ऊर्जा) दिए हों
    • तो वे गुरुत्वीय नहीं हैं। केवल ऊँचाई-आधारित उदाहरण ही सही हैं।

5. निम्नलिखित में से कौन-सा वैज्ञानिक सिद्धांत मुख्यतः पनबिजली उत्पादन में प्रयुक्त होता है? [JE इलेक्ट्रिकल परीक्षा 24 मार्च, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा का विद्युत ऊर्जा में रूपांतरण।
Solution:
  • पनबिजली (Hydroelectric) उत्पादन का प्रमुख वैज्ञानिक सिद्धांत मुख्यतः गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा (U= mgh) का विद्युत ऊर्जा में रूपांतरण है।
  • जलविद्युत संयंत्र में ऊंचाई (h) का मान बढ़ने पर स्थितिज ऊर्जा के मान में वृद्धि होती है
  • जिसके फलस्वरूप अधिक विद्युत ऊर्जा में रूपांतरण किया जा सकता है।
  • सिद्धांत का आधार
    • जब गेट खोले जाते हैं, तो पानी तेजी से नीचे गिरता है
    • जिससे इसकी गतिज ऊर्जा (KE=12mv2) बढ़ जाती है।
    • यह गतिज ऊर्जा टरबाइन की ब्लेड्स को घुमाती है
    • जो यांत्रिक ऊर्जा पैदा करती है।
  • उत्पादन प्रक्रिया
  • प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से होती है:
    • जलाशय से जल प्रवाह: पेनस्टॉक पाइपों के माध्यम से उच्च दाब वाला पानी टरबाइन तक पहुँचता है।
    • टरबाइन संचालन: फ्रांसिस, पेल्टन या कपलान प्रकार की टरबाइन जल की गतिज ऊर्जा से घूमती है, जो जनरेटर को शक्ति प्रदान करती है।
    • जनरेटर द्वारा विद्युत उत्पादन: यांत्रिक घूर्णन विद्युतचुंबकीय प्रेरण (फैराडे का नियम) के सिद्धांत पर विद्युत धारा उत्पन्न करता है।
    • यह प्रक्रिया लगभग 90% तक कुशल होती है, क्योंकि ऊर्जा हानि न्यूनतम रहती है।
  • प्रमुख घटक
    • बांध: जल को ऊँचाई पर संग्रहीत करता है, स्थितिज ऊर्जा बढ़ाता है।
    • पावर हाउस: टरबाइन और जनरेटर समाहित।
    • ट्रांसफॉर्मर: उत्पादित कम वोल्टेज को उच्च वोल्टेज ग्रिड के लिए उपयुक्त बनाता है।
    • भारत में कोयना (1920 MW), भाखड़ा नंगल और टिहरी जैसे संयंत्र इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं
  • लाभ व अन्य तथ्य
    • यह नवीकरणीय स्रोत होने से प्रदूषण-मुक्त है
    • जल चक्र पर निर्भर रहता है। हालांकि, पर्यावरणीय प्रभाव जैसे विस्थापन और जलीय पारिस्थितिकी पर असर पड़ सकता है।
    • विश्व स्तर पर थ्री गॉर्जेस बांध (चीन) सबसे बड़ा उदाहरण है।

6. निम्नलिखित में से कौन-सा गति के तीसरे नियम का एक अनुप्रयोग नहीं है? [CHSL (T-I) 15 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) क्रिकेट के खेल में कैच लपकने के लिए क्षेत्ररक्षक गेंद के साथ अपने हाथों को धीरे-धीरे पीछे की ओर खींचता है।
Solution:
  • क्रिकेट के खेल में कैच लपकने के लिए क्षेत्ररक्षक गेंद के साथ अपने हाथों को धीरे-धीरे पीछे की ओर खींचता है।
  • यह संवेग परिवर्तन का उदाहरण है। यह उदाहरण गति के तीसरे नियम से संबंधित नहीं है।
  • यह नियम दो विभिन्न वस्तुओं या निकायों के बीच बलों की परस्पर क्रिया को दर्शाता है। प्रश्न में विकल्पों का उल्लेख नहीं है
  • लेकिन सामान्यतः ऐसे बहुविकल्पीय प्रश्नों में गति के तीसरे नियम के अनुप्रयोगों में रॉकेट का प्रक्षेपण, नाव का आगे बढ़ना, तोप का मु recoil, तैराकी आदि आते हैं
  • जबकि गेंद का उछलना या बस में झटका लगना पहले या दूसरे नियम से संबंधित होता है।
  • तीसरे नियम का कथन
    • न्यूटन के गति के तीसरे नियम के अनुसार, यदि कोई वस्तु A दूसरी वस्तु B पर बल लगाती है
    • तो वस्तु B भी वस्तु A पर उतने ही परिमाण का लेकिन विपरीत दिशा का बल लगाती है। गणितीय रूप से, F⃗AB=−F⃗BA
    • , जहाँ F⃗AB वस्तु A द्वारा B पर लगाया गया बल है।
    • यह बल हमेशा दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं, इसलिए ये एक-दूसरे को रद्द नहीं करते।
  • प्रमुख अनुप्रयोग
  • गति के तीसरे नियम के अनुप्रयोग वे हैं जहाँ स्पष्ट रूप से क्रिया-प्रतिक्रिया के जोड़े दिखाई देते हैं:
    • रॉकेट का प्रक्षेपण: रॉकेट गैसों को पीछे की ओर तेजी से निकालता है
    • (क्रिया), गैसें रॉकेट पर आगे की ओर प्रतिक्रिया बल लगाती हैं, जिससे रॉकेट आगे बढ़ता है।
    • तोप और गोला: तोप गोले को आगे धकेलती है, गोला तोप पर पीछे की ओर प्रतिक्रिया बल लगाता है, जिससे तोप recoil लेती है।
    • तैराकी या नाव: तैराक पानी को पीछे धकेलता है, पानी तैराक को आगे धकेलता है। इसी तरह, नाव वाला पानी को पीछे धकेलता है।
    • उड़ान भरना: पक्षी पंखों से हवा को नीचे धकेलते हैं, हवा ऊपर प्रतिक्रिया बल लगाती है।
    • ये सभी उदाहरण दो अलग निकायों के बीच बलों के जोड़े दिखाते हैं।
  • गैर-अनुप्रयोग उदाहरण
  • निम्नलिखित तीसरे नियम के नहीं हैं, क्योंकि ये पहले या दूसरे नियम पर आधारित हैं:
    • फील्डर का हाथ पीछे खींचना: गेंद को पकड़ते समय हाथ पीछे खींचना गति के दूसरे नियम (F=ma) का अनुप्रयोग है
    • जहाँ बल को समय बढ़ाकर त्वरण कम किया जाता है। यह क्रिया-प्रतिक्रिया जोड़ा नहीं दर्शाता।
    • बस शुरू होने पर पीछे झटका: यात्री का झटका लगना पहले नियम (जड़त्व) का उदाहरण है, न कि तीसरे का।
    • गेंद का बार-बार उछलना: यह ऊर्जा हानि और दूसरे नियम से संबंधित है, न कि शुद्ध क्रिया-प्रतिक्रिया से।
    • यदि प्रश्न में यही विकल्प हैं, तो फील्डर का हाथ पीछे खींचना तीसरे नियम का अनुप्रयोग नहीं है।
  • नियम की व्याख्या और भ्रम
    • कई बार भ्रम होता है क्योंकि क्रिया-प्रतिक्रिया बल अलग वस्तुओं पर लगते हैं
    • जैसे ट्रक को धक्का देने पर व्यक्ति पीछे हट जाता है लेकिन ट्रक नहीं (द्रव्यमान भिन्न होने से त्वरण अलग)।
    • यह दूसरे नियम से जुड़ता है, लेकिन मूल जोड़ा तीसरे से है।
    • वास्तविक जीवन में यह नियम उड़ान, गति, प्रक्षेपण यंत्रों में आधारभूत है।

7. न्यूटन के गति के प्रथम नियम को ....... भी कहते हैं। [MTS (T-I) 03 मई, 2023 (III-पाली), CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) जड़ता का नियम
Solution:
  • न्यूटन के गति के प्रथम नियम को जड़ता का नियम (Law of Inertia) भी कहते हैं।
  • नियम का कथन
    • न्यूटन का प्रथम गति नियम इस प्रकार है: "प्रत्येक वस्तु अपनी विराम अवस्था या सरल रेखा में एकसमान गति की अवस्था तब तक बनाए रखती है
    • जब तक कि उस पर कोई बाहरी असंतुलित बल न लगे।" यह दो भागों में विभक्त है
    • पहला, विराम में रहने वाली वस्तु विराम ही बनी रहती है
    • दूसरा, एकसमान वेग से चल रही वस्तु उसी वेग से चलती रहती है।
  • जड़त्व की अवधारणा
    • जड़त्व वह गुण है जो वस्तु को अपनी गति अवस्था (विराम या एकसमान गति) में परिवर्तन से बचाता है।
    • वस्तु का द्रव्यमान जितना अधिक होता है, उसका जड़त्व उतना ही अधिक होता है।
    • गैलीलियो ने सबसे पहले इस सिद्धांत को प्रतिपादित किया था, जिसे न्यूटन ने अपने नियम में शामिल किया।
  • दैनिक जीवन के उदाहरण
    • बस अचानक रुकने पर यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं
    • क्योंकि उनका शरीर गति की अवस्था बनाए रखना चाहता है।
    • मेज पर रखी पुस्तक तब तक स्थिर रहती है जब तक हाथ से धकेली न जाए।
    • अंतरिक्ष में उपग्रह बिना ईंधन के एकसमान गति से चक्कर लगाते रहते हैं।
  • अन्य नाम और महत्व
    • इस नियम को गैलीलियो का नियम या गति के जड़त्व का नियम भी कहा जाता है।
    • यह बल की परिभाषा देता है—बल वह है
    • जो वस्तु की गति अवस्था में परिवर्तन लाता है। न्यूटन के अन्य नियमों का आधार भी यही है।

8. न्यूटन का निम्नलिखित में से कौन-सा नियम बल की परिणामात्मक परिभाषा देता है? [CGL (T-I) 12 अप्रैल, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) गति का दूसरा नियम
Solution:
  • न्यूटन के गति का दूसरा नियम, गति के प्रथम नियम के विपरीत, वस्तुओं के व्यवहार से संबंधित है
  • जिसके लिए सभी उपस्थित बल असंतुलित हैं। गति का दूसरा नियम अधिक परिणामात्मक है
  • बल से जुड़ी स्थितियों को ज्ञात करने के लिए उपयोग किया जाता है।
  • सही विकल्प कौन‑सा है?
    • प्रश्न: “न्यूटन का निम्नलिखित में से कौन‑सा नियम बल की परिणामात्मक (मात्रात्मक) परिभाषा देता है?”
    • उत्तर: न्यूटन का द्वितीय गति नियम बल की परिणामात्मक (quantitative) परिभाषा प्रदान करता है।
  • ‘परिणामात्मक / मात्रात्मक’ का अर्थ
    • गुणात्मक (Qualitative) परिभाषा: केवल गुण या प्रभाव बताती है, संख्यात्मक मान नहीं देती।
    • न्यूटन का प्रथम नियम यह बताता है
    • बल न हो तो वस्तु की गति की अवस्था नहीं बदलेगी, इससे केवल बल की आवश्यकता का पता चलता है, न कि उसका परिमाण
    • परिणामात्मक / मात्रात्मक (Quantitative) परिभाषा: बल का संख्यात्मक मान किस तरह निकलेगा, यह स्पष्ट संबंध देती है
    • (सूत्र के रूप में)। यह काम न्यूटन के द्वितीय नियम से होता है।
  • न्यूटन का प्रथम नियम और बल
    • प्रथम नियम: “कोई पिंड जब तक विरामावस्था में है या सरल रेखा में समान वेग से चल रहा है
    • तब तक उसी अवस्था में बना रहता है, जब तक उस पर कोई बाह्य असंतुलित बल कार्य न करे।”
    • यदि परिणामी बल F=0 हो तो त्वरण a=0 होगा (वस्तु की गति की अवस्था नहीं बदलेगी)।
    • इस कारण कहा जाता है कि प्रथम नियम बल की गुणात्मक परिभाषा देता है
    • जड़त्व (inertia) की अवधारणा बताता है, पर यह नहीं बताता कि बल कितना है
  • न्यूटन का द्वितीय नियम: बल की परिणामात्मक परिभाषा
  • न्यूटन का द्वितीय नियम कहता है:
    • किसी पिंड के संवेग (momentum) में परिवर्तन की दर उस पर लगाए गए बल के समानुपाती होती है
    • यह परिवर्तन उसी दिशा में होता है जिस दिशा में बल लगाया गया है।
    • यदि द्रव्यमान m नियत हो तो संवेग p=mv और नियम को सरल रूप में लिखा जाता है:
    • F=ma
    • F: बल
    • m: द्रव्यमान
    • a: बल की दिशा में उत्पन्न त्वरण
    • किसी वस्तु का द्रव्यमान m और उत्पन्न त्वरण a नाप कर बल का संख्यात्मक मान निकाला जा सकता है।
    • इसलिए कहा जाता है कि “न्यूटन का द्वितीय नियम बल को परिमाणात्मक रूप से परिभाषित करता है।”
  • न्यूटन का तृतीय नियम और बल
    • तृतीय नियम: “हर क्रिया के लिए बराबर परंतु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है।”
    • यह बताता है कि बल हमेशा युग्म में होते हैं (action–reaction pair) और एकाकी बल नहीं होता
    • यह भी बल का परिमाण निकालने का नियम नहीं है
  • बार‑बार परीक्षाओं में पूछे जाने वाले बिंदु
    • प्रथम नियम: बल की गुणात्मक परिभाषा (force is needed to change state of motion), साथ ही जड़त्व की अवधारणा।
    • द्वितीय नियम: बल की परिणामात्मक / मात्रात्मक परिभाषा, सूत्र F=ma देता है
    • बल की SI इकाई न्यूटन (N) भी इसी से परिभाषित होती है (1 N वह बल है जो 1 kg द्रव्यमान को 1 m/s² का त्वरण दे)।
    • तृतीय नियम: क्रिया‑प्रतिक्रिया का नियम; बलों का युग्म, परिमाण समान, दिशा विपरीत।

9. रॉकेट प्रणोदन प्रौद्योगिकी निम्नलिखित में से किस वैज्ञानिक सिद्धांत पर कार्य करती है? [JE सिविल परीक्षा 23 मार्च, 2021 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) न्यूटन के गति के नियम पर
Solution:
  • रॉकेट प्रणोदन प्रौद्योगिकी न्यूटन के गति के तीसरे नियम पर आधारित है।
  • न्यूटन के इस नियम को क्रिया तथा प्रतिक्रिया का नियम भी कहा जाता है।
  • वस्तुतः यह संवेग संरक्षण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
  • रॉकेट प्रणोदन का मूल सिद्धांत
    • "हर क्रिया की प्रतिक्रिया बराबर और विपरीत दिशा में होती है।"
    • रॉकेट इंजन ईंधन को जलाकर उच्च वेग वाली गैसों को नोजल से पीछे की ओर (पश्च दिशा) निष्कासित करता है।
    • ये गैसें रॉकेट पर क्रिया बल लगाती हैं (पीछे की ओर), जिसके जवाब में रॉकेट पर प्रतिक्रिया बल (आगे की ओर) उत्पन्न होता है।
    • यही प्रतिक्रिया बल रॉकेट को अंतरिक्ष में त्वरित करता है।
  • संवेग संरक्षण का सिद्धांत
    • बंद प्रणाली (रॉकेट + ईंधन + निकलने वाली गैसें) में कुल संवेग सदैव संरक्षित रहता है।
    • प्रारंभ में रॉकेट स्थिर होता है (p=0)। जब गैसें वेग ve से पीछे निकलती हैं
    • (pgas=−dm⋅ve), तो रॉकेट का संवेग dp=+dm⋅ve हो जाता है।
    • रॉकेट का वेग v निम्न सूत्र से बढ़ता है (ट्सiolkovsky रॉकेट समीकरण):
    • Δv=veln⁡(m0mf)
    • जहाँ ve: निष्कासन वेग, m0: प्रारंभिक द्रव्यमान, mf: अंतिम द्रव्यमान।
  • रॉकेट इंजन का कार्यप्रणाली
    • ईंधन जलन: लिक्विड हाइड्रोजन/ऑक्सीजन या ठोस प्रणोदक जलते हैं, उच्च दाब उत्पन्न करते हैं।
    • नोजल से निष्कासन: गैसें सोनिक/सुपरसोनिक वेग से बाहर निकलती हैं (क्रिया)।
    • रॉकेट का त्वरण: प्रतिक्रिया बल से रॉकेट आगे बढ़ता है।
    • अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न्यून होने से निरंतर गति बढ़ती रहती है।
    • उदाहरण: ISRO चंद्रयान-3 रॉकेट ने इसी सिद्धांत से LVM3 द्वारा चंद्रमा तक पहुँचाया।
  • व्यावहारिक उदाहरण और परीक्षा बिंदु
    • परीक्षा में पूछा जाता है: "रॉकेट प्रणोदन किस सिद्धांत पर?" – उत्तर: न्यूटन का तृतीय नियम या संवेग संरक्षण।
    • अंतरिक्ष में विशेषता: कोई बाहरी वायु प्रतिरोध न होने से थ्रस्ट पूरी तरह प्रभावी।
    • सीमाएँ: ईंधन द्रव्यमान अधिक होने से Δv सीमित; मल्टी-स्टेज रॉकेट इस समस्या का समाधान।