जनसंख्या एवं नगरीकरण (भारत का भूगोल) (भाग-II)

Total Questions: 42

1. भारत में पहली असमकालिक (non-synchronous) जनगणना कब हुई थी ? [MTS (T-I) 15 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) सन् 1872
Solution:
  • भारत की पहली असमकालिक (Non-Synchronous) जनगणना 1872 ई. में हुई थी।
  • जबकि 1881 ई. से प्रत्येक 10 वर्ष के अंतराल पर जनगणना होती है।
  • वर्ष 2021 में Covid-19 के कारण जनगणना का कार्य रोक दिया गया था।
  • विस्तार विवरण
    •  जिसे “भारतीय जनगणना के पिता” के रूप में उद्धृत करने वाले स्रोतों ने सामान्यतः
    • इस प्रयास को पहली असमकालिक जनगणना के रूप में मान्यता दी है
    • 1872 की असमकालिक जनगणना का दायरा: यह ब्रिटिश राज के तहत थी और राज्य-सीमा के बाहर कुछ हिस्से शामिल नहीं थे
    • डेटा में जनसंख्या, धर्म, जाति, साक्षरता आदि प्रमुख विषय थे.​
    • पहली तुल्यकालिक जनगणना: 17 फरवरी 1881 को शुरू होकर पूरे ब्रिटिश भारत को कवर किया गया और इसे डब्ल्यू.सी
    • प्लावन (Registrar General, India) के अधीन कराया गया था
    • इसे आधुनिक, समान-अवधारणा वाली जनगणना के प्रारम्भ के रूप में माना जाता है.​
    • भारत में जनगणना का क्रम: तब से हर दस साल में जनगणना होती चली आई है
    • 1951 स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना है, जबकि 2011 तक यह 15वीं जनगणना थी.​
  • महत्वपूर्ण बिंदु
    • असमकालिक बनाम तुल्यकालिक: 1872 की असमकालिक पहल देश की पहली व्यापक जनगणना मानी जाती है
    • जबकि 1881 की तुल्यकालिक जनगणना पहली पूर्ण-देशीय एकीकृत (all-India) जनगणना है.​
    • संदर्भ और इतिहास: कई इतिहासिक समालोचनाओं में 1872 और 1881 की घटनाओं को क्रमशः
    • असमकालिक और तुल्यकालिक जनगणना के रूप में चिन्हित किया गया है
    • यह जानकारी सामान्य शैक्षणिक स्रोतों में भी मिलती है.​
  • ध्यान दें
    • कुछ स्रोतों में समय-रेखा में तात्पर्य भिन्न हो सकता है
    • मानक इतिहास-नोट्स के अनुसार असमकालिक पहली जनगणना 1872 और तुल्यकालिक पहली जनगणना 1881 है.​

2. किस वर्ष से भारत में जनगणना हर दस वर्ष में होने वाली एक नियमित प्रक्रिया बन गई है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22, 23 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) 1881
Solution:
  • भारत की पहली असमकालिक (Non-Synchronous) जनगणना 1872 ई. में हुई थी।
  • जबकि 1881 ई. से प्रत्येक 10 वर्ष के अंतराल पर जनगणना होती है।
  • वर्ष 2021 में Covid-19 के कारण जनगणना का कार्य रोक दिया गया था।
  • भारत में जनगणना का ऐतिहासिक और वैधानिक पृष्ठभूमि
    • आज की दशकीय आदत: 1881 के बाद से प्रत्येक दशक में जनगणना की जाती रही है।
    • इसका आयोजन भारतीय जनगणना अधिनियम तथा भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के नेतृत्व में होता है
    • केंद्र सरकार के अधीन गृह मंत्रालय के अंतर्गत आका गया है। [उद्धरण आवश्यक होने पर देखें: नीति दस्तावेज़ और आधिकारिक पोर्टल]।
    • स्वतंत्रता के बाद के चरण: स्वतंत्रता के पश्चात पहली जनगणना 1951 में सम्पन्न हुई थी
    • हालांकि 1881 के बाद दशकीय क्रम बना रहा।
    • यह संकेत करता है कि दशकीय चक्र की परंपरा स्वतंत्र INDIA में भी पूर्ववत जारी रही।
    • [उद्धरण आवश्यक होने पर देखें: विकसनशील इतिहास/आधिकारिक संकलन]।
  • प्रमुख तिथियाँ और क्रम
    • 1881: पहली समकालीन/पूर्ण जनगणना (ब्रिटिश काल)।
    • 1901, 1911, 1921, 1931, 1941: पूर्व-स्वतंत्र भारत के दशकों के भीतर भी गणना होती रही, परंपरा दशकों में जारी रही।
    • 1951: स्वतंत्रता के बाद पहली जनगणना।
    • 1961, 1971, 1981, 1991, 2001, 2011: दशकीय चक्र के अनुसार क्रमबद्ध जनगणनाएं।
    • 2021 (16वीं जनगणना): कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हुआ और उसके बाद के वर्ष सीमा-निर्धारण के अनुसार कदम उठाए जा रहे थे
    • फिर भी मूल धारणा यही है कि दशकीय अंतराल पर ही जनगणना आयोजित की जाए, हालांकि वास्तविक तिथियाँ महामारी के कारण प्रभावित रहीं।
  • डिज़ाइन और महत्व
    • उद्देश्य: जनसंख्या आकार, वितरण, सामाजिक-आर्थिक संकेतक आदि का व्यवस्थित आकलन ताकि नीति-निर्माण, संसाधन आवंटन और विकास कार्यक्रम बेहतर ढंग से संचालित हो सकें।
    • [उद्धरण आवश्यक होने पर देखें: आधिकारिक दस्तावेज/जनगणना नीति]।
    • कानूनी ढांचा: भारत में जनगणना एक आवश्यक कार्य है और उसे कानूनी/नैतिक समर्थन मिलता है
    • भले ही दशकीय आवृत्ति के बारे में विशिष्ट संविधानी प्रावधान संहिताबद्ध रूप से स्पष्ट न हो; परंपरा दशकवार समान रूप से जारी है।
    • [उद्धरण आवश्यक होने पर देखें: भारतीय जनगणना अधिनियम/नीति विश्लेषण]।
  • संक्षेप में
    • कौन सा वर्ष से: 1881 से भारत की जनगणना दश बार-बार हर दस साल में होने लगी
    • स्वतंत्रता के बाद भी यह क्रम जारी रहा और 2011 तक 15 बार जनगणना हो चुकी है।
    • [उद्धरण आवश्यक होने पर देखें: संबंधित इतिहास/नीति स्रोत]।

3. भारत की जनगणना 2011 के अनुसार, उन राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों की सही जोड़ी की पहचान कीजिए जिन्होंने उच्चतम साक्षरता दर दर्ज की है। [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (1-पाली)]

Correct Answer: (a) केरल और लक्षद्वीप
Solution:
  • जनगणना 2011 के अनुसार, सर्वाधिक साक्षरता दर वाला राज्य केरल (94.0 प्रतिशत) है
  • जबकि सर्वाधिक साक्षरता दर वाला केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप (91.8 प्रतिशत) है।
  • अतः सर्वाधिक साक्षरता दर वाला राज्य और केंद्रशासित प्रदेश की जोड़ी केरल और लक्षद्वीप होगा।
  • विस्तृत विवरण
  • राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए उच्चतम साक्षरता दर
    • सर्वाधिक साक्षरता दर वाला राज्य: केरल (~94%) [कंटेंट के अनुसार 2011 की जनगणना]।
    • सर्वाधिक साक्षरता दर वाला केंद्र शासित प्रदेश: लक्षद्वीप (~91%) [कंटेंट के अनुसार 2011 की जनगणना]।
  • अन्य शीर्ष स्थान
    • केरल के अलावा अन्य उच्च साक्षरता वाले राज्य अक्सर मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश की सूची में आते हैं
    • अधिकांश विश्लेषण इसी क्रम में केरल को शीर्ष पर दर्शाते हैं।
  • देशभर की स्थिति
    • भारत की कुल साक्षरता दर 2011 में लगभग 74% थी, जो राज्यों/केंद्र शासित क्षेत्रों के भीतर विविधताएं दिखाती है।
    • केरल का यह प्रदर्शन देश के शीर्ष स्तर के करीब था
    • जबकि बिहार जैसी जगहों पर साक्षरता दर नीचे रही [2011 जनगणना के सामान्य निष्कर्ष]।
  • पुरुष बनाम महिला साक्षरता
    • सामान्य प्रवृत्ति के अनुसार पुरुष साक्षरता दर महिला साक्षरता दर से ऊँची थी; केरल में भी यह अंतर अपेक्षाकृत कम नहीं था
    • लेकिन उच्च overall दर के कारण कुल मिलाकर उच्च थी।
  • क्यों यह महत्वपूर्ण है
    • साक्षरता दर शिक्षा-नीति, सामाजिक-उन्नयन और आर्थिक विकास से सीधे जुड़ी माप है
    • केन्द्र शासित क्षेत्र लक्षद्वीप में उच्च साक्षरता दिखना इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण है, भले ही भौगोलिक आकार छोटा हो।
  • उद्धरण/स्रोतों के लिए नोट
    • 2011 की जनगणना के अनुसार केरल की साक्षरता दर लगभग 94% और लक्षद्वीप की लगभग 91% बताई जाती है
    • जो कि उच्चतम क्रम के दावे सत्यापित करते हैं [सार्वजनिक पाठ्य सामग्री और GK स्रोत]।
    • भारत की कुल साक्षरता दर 2011 में लगभग 74% थी
    • जिसे विभिन्न स्रोतों ने संकलित किया है [जनगणना सारांश]।

4. भारत में, सूक्ष्म वित्त संस्थान मुख्य रूप से जनसंख्या के किस वर्ग को लक्षित करते हैं? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) कम आय वाले व्यक्ति और छोटे व्यवसाय
Solution:
  • सूक्ष्म वित्त का मतलब है उपभोक्ताओं तथा स्व-नियोजित व्यक्तियों सहित निम्न आर्य वर्ग के ग्राहकों को वित्तीय सेवाएं मुहैया कराना।
  • भारत में सूक्ष्म वित्त संस्थान मुख्य रूप से जनसंख्या के कम आय वाले व्यक्ति और छोटे व्यवसाय वर्ग को लक्षित करते हैं।
  • परिचय और परिदृश्य
    • MFI का मूल उद्देश्य ऐसा समूह है जिसे पारंपरिक बैंकों तक पहुँच सीमित या नहीं मिलती—खासकर निम्न आय वाले लोग और छोटे व्यवसाय
    • यह grupp अक्सर स्वयं सहायता समूह (SHG), NGO साझेदारियों, सहकारी संस्थाओं जैसे मॉडल के जरिए काम करते हैं.​
    • इन संस्थाओं के माध्यम से ऋण सुविधा, बचत खातों, बीमा उत्पादों और कभी-कभी आवास/शिक्षा आदि के लिए छोटे-छोटे वित्तीय उपाय उपलब्ध कराए जाते हैं.​
  • लक्षित वर्ग – स्पष्ट विभाजन
    • निम्न आय वाले व्यक्तियों (low-income individuals): वे लोग जिनकी आय दैनंदिन जीवन-यापन के लिए पर्याप्त नहीं होती और आर्थिक अस्थिरता का जोखिम रहता है।
    • MFI इन्हें छोटे ऋण देकर आय-सृजन के अवसर बनाते हैं जैसे दूरस्थ स्थानों पर छोटे व्यवसाय शुरू करना/विस्तार करना, कृषि आधारित गतिविधियाँ, रोजगार-उन्मुख प्रयोग आदि.​
    • छोटे व्यवसाय (micro and small enterprises): जिन्हें कदम-कदम पर पूंजी निवेश की जरूरत होती है
    • ताकि वे अपने व्यवसाय को शुरू कर सकें या विस्तार कर सकें। MFI इन व्यवसायों के लिए लचीले ऋण के विकल्प देते हैं
    • ताकि ऋण चुकाने में आसानी हो और वित्तीय स्थिरता बने.​
  • सेवाओं की प्रकृति
    • ऋण: Micro-loans जो छोटे पूँजी निवेश और working capital के लिए दिए जाते हैं; चुकौती अवधि अक्सर छोटी और मासिक किस्तों में होती है.​
    • बचत: सूक्ष्म बचत खातों के माध्यम से वित्तीय आचरण विकसित करने में सहायता; बचत से आपातकालीन स्थिति के लिए पूंजी सुरक्षा की दिशा में कदम बढ़ता है.​
    • बीमा: कम आय वाले व्यक्तियों के लिए किफायती सूक्ष्म बीमा योजनाएं; जोखिम प्रबंधन के लिए सरल और सस्ती कवरेज प्रदान की जाती है.​
    • संवर्धित सेवाएं: कभी-कभी शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास आदि से जुड़ी छोटे-छोटे वित्तीय समाधान भी प्रस्तावित होते हैं ताकि आय-स्तर में स्थायित्व आ सके.​
  • नीति-परिदृश्य और विनियमन
    • RBI भारत में MFIs के विनियमन के प्रमुख प्राधिकरण हैं; यह सुनिश्चित करता है
    • संस्थान ग्राहक-हित में काम करें, उचित ब्याज दरें और लचीलापन रखें, और ऋण-निवेशन/वसूली मानकों का पालन करें.​
    • NABARD, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) आदि के साथ संयुक्त रूप से ग्रामीण वित्तीय सेवाओं के वितरण में भूमिका निभाते हैं
    • MFIs का मुख्य चर्चित दायरा सपोर्टिंग-इनफ्रास्ट्रक्चर बनना है.​
  • प्रभाव और चुनौतियाँ
    • प्रभाव: वित्तीय समावेशन बढ़ती है, गरीबी उन्मूलन में मदद मिलती है
    • छोटे व्यवसायों के माध्यम से रोजगार सृजन होता है.​
    • चुनौतियाँ: ब्याज दरों की पारदर्शिता, ऋण-चुकान की समयबद्धता, डिफॉल्ट-रेट के प्रबंधन, और प्रतिभूतियों/सापेक्ष जोखिमों का नियंत्रण; यह सब MFIs के संचालन के लिए नित्य-चुनौती बनाते हैं.​
  • तुलना (एक-संदर्भ तालिका)
    • लक्षित समूह: निम्न आय वाले व्यक्ति vs छोटे व्यवसाय (micro-entrepreneurs)
    • उत्पाद प्रकार: ऋण, बचत, बीमा बनाम पूरक सेवाएँ
    • उद्देश्य: आय संवर्धन और वित्तीय समावेशन बनाम जोखिम-प्रबंधन और ऋण-चुकान की संरचना

5. भारत की जनगणना 2011 के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या कितनी थी ? (लगभग) [MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 121 करोड़
Solution:
  • जनगणना 2011 के अनुसार, भारत की कुल जनसंख्या 1210854977 थी।
  • संपूर्ण आंकड़े (2011 के अनुसार)
    • कुल जनसंख्या: 1,210,854,977 (लगभग 1.21 अरब)​
    • पुरुष: लगभग 623,724,248
    • महिलाएँ: लगभग 586,469,174
    • स्त्री-पुरुष अनुपात: लगभग 943 महिलाएँ प्रति 1000 पुरुष (आमतौर पर समान रहते आंकी गई प्रतिशत के अनुसार)
    • घनत्व: देशभर में औसतन करीब 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी (राज्यों के अनुसार भिन्नता रहती है)
  • संदर्भित प्रमुख बिंदु
    • 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 1.2108 बिलियन के आसपास थी
    • पुरुष-आबादी 623.7 मिलियन जबकि महिला-आबादी 586.5 मिलियन थी.​
    • दशक 2001–2011 के बीच कुल वृद्धि लगभग 18 करोड़ (लगभग 181 मिलियन) दर्ज की गई
    • जो 2001 की जनगणना में 1.0287 बिलियन के मुकाबले बढ़ोतरी है.​
    • 2011 के अनुसार देश का जनसंख्या घनत्व औसतन 382 व्यक्ति/किमी² था; राज्यवार भिन्नता अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है
    • (उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र आदि में यह अलग-अलग आँकड़े दिखाते हैं).​
  • अतिरिक्त विवरण (संक्षेप)
    • 2011 की जनगणना भारत की 15वीं जनगणना है
    • जिसमें जनसंख्या-वृद्धि की वार्षिक दर सामान्यतः 1.2–1.6% के आसपास रहीं, और प्रमुख चिंताएँ जैसे सामाजिक-आर्थिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक अनुपात आदि प्रमुख नीतिगत चर्चा में बने रहे.​
    • केंद्र-राज्य स्तर पर विभिन्न विश्लेषण और संख्याएँ उपलब्ध रहती हैं
    • उपरोक्त आंकड़े भारतीय सार्वजनिक स्रोतों जैसे विकिपीडिया, Jagran Josh आदि में व्यापक रूप से उद्धृत हैं.​

6. भारत की जनगणना के 2011 के अनुसार, दूसरे सबसे अधिक लिंगानुपात वाला राज्य कौन-सा है? [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) तमिलनाडु
Solution:
  • जनगणना 2011 के अनुसार, सर्वाधिक लिंगानुपात वाले शीर्ष 5 राज्य हैं
  • केरल (1084), तमिलनाडु (996), संयुक्त आंध्र प्रदेश (993), छत्तीसगढ़ (991) तथा मेघालय (989)।
  • शीर्ष राज्यों की रैंकिंग
    • 2011 जनगणना में राज्यों के लिंगानुपात (महिलाएं प्रति 1000 पुरुष) इस प्रकार थे:
    • केरल: 1084​
    • तमिलनाडु: 996​
    • आंध्र प्रदेश: 993​
    • छत्तीसगढ़: 991​
    • मेघालय: 989​
  • विस्तृत संदर्भ
    • तमिलनाडु का लिंगानुपात दक्षिण भारत के राज्यों में प्रमुख था
    • जो शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक जागरूकता के कारण बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है।
    • यह 2001 के 986 से सुधार था, लेकिन राष्ट्रीय औसत 943 से ऊपर रहा।
    • केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी (1037) को राज्यों से अलग रखा जाता है।​
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • लिंगानुपात में सुधार के बावजूद, हरियाणा (877) सबसे निचला था।​
    • ये आंकड़े नीति निर्माण जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को प्रभावित करने वाले थे।
    • राज्यवार भिन्नताएं सांस्कृतिक और आर्थिक कारकों पर निर्भर करती हैं।​

7. भारत की जनगणना 2011 के अनुसार निम्नलिखित में से किस राज्य की जनसंख्या सबसे कम है? [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (II-पाली), MTS (T-I) 17 मई, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 01 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) सिक्किम
Solution:
  • जनगणना 2011 के अनुसार, भारत में न्यूनतम जनसंख्या वाले 3 राज्य हैं
  • सिक्किम (610577), मिजोरम (1097206) तथा अरुणाचल प्रदेश (1383727)।
  • अतः स्पष्ट है कि सिक्किम की जनसंख्या सबसे कम है।
  • विस्तार:
    • 2011 की जनगणना के अनुसार सिक्किम की कुल आबादी लगभग 6 लाख 10 हजार के आसपास थी
    • जो किसी राज्य के भीतर सबसे कम थी. यह तथ्य सिक्किम को भारत के राज्यों में सबसे छोटा जनसंख्या वाला राज्य बनाता है।​
    • यदि केंद्रशासित प्रदेशों/अन्य क्षेत्रों की बात करें, तो लक्षद्वीप सबसे कम आबादी वाला केंद्रशासित प्रदेश माना गया, जिसका आंकड़ा 64,000 के आसपास था
    • यह भारत के राज्यों की तुलना में ज़्यादा छोटा नहीं है, बल्कि केंद्रीय क्षेत्रों में अधिक छोटा है.​
    • अन्य स्रोतों में भी यही निष्कर्ष बार-बार मिलता है
    • सिक्किम ने 2011 की जनगणना के अनुसार सबसे कम राज्य-स्तरीय आबादी दर्शायी थी.​
  • ध्यान दें:
    • सिक्किम के अलावा महान विवरणों में यह भी कहा गया है
    • मेघालय, मणिपुर आदि जैसे राज्य 2011 के दशक में जनसंख्या वृद्धि के हिसाब से अन्य कारणों से अलग प्रवृत्ति दिखाते हैं
    • कुल राज्य-स्तर पर सबसे कम आबादी सिक्किम ही मानी गई.​
    • यदि आप केंद्रशासित प्रदेशों की तुलना भी चाहें तो लक्षद्वीप सबसे कम आबादी वाला क्षेत्र है, लेकिन यह राज्य नहीं है.​

8. भारत की जनगणना 2011 के अनुसार, महिला साक्षरता दर ....... दर्ज की गई थी। [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (I-पाली), MTS (T-I) 14 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (e) इनमें से कोई नहीं
Solution:
  • जनगणना 2011 के अनुसार, भारत की साक्षरता दर 73.0 प्रतिशत थी, जिसमें पुरुष साक्षरता दर 80.9 प्रतिशत तथा महिला साक्षरता दर 64.6 प्रतिशत थी।
  • महिला साक्षरता दर क्या है
    • परिभाषा: 7 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं में वे प्रतिशत जो पढ़ और समझ सकें це ( literate) माना जाता है।
  • 2011 की जनगणना के प्रमुख बिंदु
    • कुल साक्षरता दर: 74.04% (पुरुष 82.14%, महिला 65.46%).​
    • सबसे ऊँची महिला साक्षरता: केरल केन्द्रीय स्तर पर उच्चतम (लगभग 92% से ऊपर के आसपास बताया गया).​
    • सबसे कम महिला साक्षरता दर: राजस्थान (लगभग 52–53% के आसपास).​
    • इस अवधि में ग्रामीण बनाम शहरी अंतर भी बना रहा, पर urban areas में महिला साक्षरता में सुधार के संकेत दिखे हैं.​
  • व्याख्या और संभावित विश्लेषण
    • 1951 से 2011 तक भारत में साक्षरता में तेज वृद्धि देखी गई है।
    • 1951 में कुल साक्षरता लगभग 18% थी, जबकि 2011 तक यह 74% के करीब पहुँच गई
    • जिसमें पुरुषों की तुलना में महिलाओं की साक्षरता कम रही, पर gap धीरे-धीरे घट रहा था.​
    • 2011 के आंकड़े इस समय महिला शिक्षा के लिए राष्ट्रीय नीतिगत प्रगति के बावजूद rural-urban और राज्य-वार विविधताओं को दर्शाते हैं।
    • केरल जैसे राज्यों ने महिला साक्षरता में उल्लेखनीय प्रगति की, जबकि बिहार, राजस्थान आदि राज्यों में कमी/अंतर बना रहा.​
  • युक्तियाँ/सूचनाएँ
    • यदि आप एक विस्तृत राज्य-वार ब्रेकअप, वर्ष-वार ट्रेंड और ग्रामीण-शहरी विभाजन भी चाहें, तो राज्यवार तालिका और वर्ष के अनुसार परिवर्तन देखें।
    • यह अक्सर आधिकारिक संसाधनों (केंद्रीय स्टेट ब्यूरो) और व्यापक संकलन संकलनों में मिलता है.​
    • ध्यान दें कि कुछ स्रोत 65.46% को 65.5% के रूप में भी उद्धृत करते हैं
    • अंतर सिर्फ rounding का हो सकता है, पर मूल जनगणना तालिका में 65.46% ही स्पष्ट रूप से दर्ज है.​
  • क्यों यह मायने रखता है
    • महिला साक्षरता दर में सुधार सीधे सामाजिक-आर्थिक विकास, स्वास्थ्य, बेटी-बचाओ और समान अवसरों की दिशा में संकेत देती है।
    • उच्च साक्षरता से रोजगार अवसर, शासन-नीति के बेहतर अनुपालन और सामाजिक परिवर्तन की दिशा मजबूत होती है.​
  • संदर्भ (उद्धरण के साथ)
    • 2011 की जनगणना के अनुसार देश की कुल साक्षरता 74.04%, पुरुष 82.14%, महिला 65.46% है.​
    • केरल में 2011 में उच्चतम महिला साक्षरता (लगभग 92% से ऊपर) दर्ज की गई
    • राजस्थान में महिला साक्षरता comparatively कम रही (लगभग 52–53%).​
    • समग्र प्रवृत्ति और ऐतिहासिक संदर्भ: 1951 में 18.33% से 2011 तक वृद्धि; इस दौरान महिलाओं की साक्षरता में gap कमी की दिशा में सुधार दिखा.​

9. भारत की जनगणना 2011 के अनुसार, किस केंद्रशासित प्रदेश में सबसे कम जनसंख्या वृद्धि दर दर्ज की गई? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) लक्षद्वीप
Solution:
  • जनगणना 2011 के अनुसार, न्यूनतम दशकीय वृद्धि दर वाले केंद्रशासित प्रदेश हैं
  • लक्षद्वीप (6.3 प्रतिशत), अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह (6.9 प्रतिशत) तथा चंडीगढ़ (17.2 प्रतिशत)।
  • केंद्रशासित प्रदेशों में सबसे कम वृद्धि दर
    • नागालैंड: जनसंख्या वृद्धि दर -0.58% (नकारात्मक वृद्धि) उदाहरण सहित स्पष्ट तुलना के साथ यह सर्वोच्च कमी दर्शाने वाला केंद्रशासित प्रदेश रहा है
    • केरल: 2011 में लगभग 4.91% वृद्धि दर के साथ केंद्रशासित प्रदेशों में नागालैंड के बाद सबसे कम वृद्धि मानी गई थी ।​
    • अन्य केंद्रशासित प्रदेशों में वृद्धि दरें इससे अधिक रहीं, अतः नागालैंड स्पष्ट रूप से सबसे कम वृद्धि दिखाने वाला क्षेत्र रहा ।​
  • महत्वपूर्ण बिंदु और परिप्रेक्ष्य
    • नागालैंड की नकारात्मक वृद्धि दर 0.58% के बराबर थी, जो दिखाती है
    • वहाँ जनसंख्या घटती रही या जन्मदर बनाम মৃত্যुदर में असमानता के कारण उम्मीद से कम रही ।​
    • समान समय में दादरा और नगर हवेली जैसे क्षेत्र में सबसे अधिक दशकीय वृद्धि दर दर्ज की गई
    • जो केंद्रशासित क्षेत्र के भीतर अलग-अलग पैटर्न दिखाता है (यह नोट नागालैंड जैसी जगहों से अलग एक व्यापक निष्कर्ष देता है) ।​
  • यदि चाहें तो:
    • मैं 2011 की पूरी राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सूची में से प्रत्येक क्षेत्र की वृद्धि दर एक सारणी में दे सकता हूँ ताकि तुलना आसान हो जाए।
    • या आप चाहें तो अन्य स्रोतों से वैकल्पिक संदर्भ/ग्राफ भी जोड़ दूँ ताकि आप डेटा को साफ-साफ विज़ुअल रूप में देख सकें।
  • उद्धरण
    • नागालैंड के बारे में स्पष्ट नकारात्मक वृद्धि दर और केरल की तुलना सहित विवरण 2011 की जनगणना के संदर्भ में दिया गया है.​

10. भारत की जनगणना 2011 के अनुसार निम्नलिखित में से किस राज्य की साक्षरता दर सबसे कम है? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) त्रिपुरा
Solution:
  • जनगणना 2011 के अनुसार, सर्वाधिक साक्षरता दर वाले शीर्ष 5 राज्य हैं
  • केरल (94.0 प्रतिशत), मिजोरम (91.3 प्रतिशत), गोवा (88.7 प्रतिशत), त्रिपुरा (87.2 प्रतिशत) तथा हिमाचल प्रदेश (82.8 प्रतिशत)। अतः स्पष्ट है
  • प्रश्नगत विकल्पों में सबसे कम साक्षरता दर त्रिपुरा की है।
  • साक्षरता दर विवरण
    • बिहार में पुरुष साक्षरता दर 71.2% और महिला साक्षरता दर 51.5% रही, जो लिंग असमानता को भी दर्शाती है।
    • केरल सबसे अधिक साक्षरता वाला राज्य था 93.91% के साथ
    • जबकि बिहार की कम दर गरीबी, कम स्कूलों की उपलब्धता और सामाजिक कारकों से जुड़ी थी।​
  • कारण और प्रभाव
    • बिहार की कम साक्षरता के मुख्य कारणों में खराब शैक्षिक बुनियादी ढांचा, उच्च गरीबी स्तर और बाल श्रम शामिल हैं।
    • इससे आर्थिक विकास प्रभावित होता है
    • क्योंकि साक्षरता स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक प्रगति से जुड़ी है।
    • जनगणना 2011 के बाद सरकार ने साक्षर भारत अभियान जैसे कार्यक्रम चलाए
    • लेकिन बिहार अभी भी चुनौतियों का सामना कर रहा है।