Correct Answer: (d) दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के कारण
Solution:- दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के कारण भारत के अधिकांश भागों में जून से सितंबर के दौरान वर्षा होती है।
- पश्चिमी घाट दक्षिणी- पश्चिमी मानसून पवनों के मार्ग में दीवार की भांति खड़ा है
- जिस कारण इस पर्वतमाला के पश्चिमी ढालों तथा पश्चिमी तटीय मैदान में भारी वर्षा होती है
- संक्षेप में: भारत के अधिकांश भागों में जून से सितम्बर के बीच वर्षा होने का मुख्य कारण दक्षिणी-पश्चिमी मानसून है
- जो हिंद महासागर से आकर भूमि की तरफ नमी लाता है। नीचे विस्तृत व्याख्या दी जा रही है।
- मुख्य कारण और प्रक्रियात्मक विवरण
- इससे हिंद महासागर और अरब सागर के ऊपर निम्न दबाव बनता है
- जिसके कारण भारी मात्रा में आर्द्र हवा भूमि की ओर आकर वर्षा कराती है।
- यह वर्षा का प्रमुख और सामान्य चरण जून–सितंबर के दौरान रहता है [आमतौर पर बताई गई जानकारी]।
- समुद्री-भूमि तापमान असमानता: समुद्र गर्म रहते हैं जबकि भारत की भूमि गर्मी में जल्दी गरम हो जाती है
- जिससे वायुमंडलीय चक्र बनता है और नमी-युक्त हवाओं की वक्र-वृत्ति बनती है जो वर्षा का मुख्य स्रोत है [परिचयात्मक विवरण]।
- बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी: इन दो सागरों से उठने वाली हवाएँ भारी मात्रा में नमी लेकर आती हैं
- भारत के अधिकांश भागों में वर्षा कराती हैं [नोटेशनल विवरण]
- मानसून पवनों का मार्ग और संगठन: समुद्री हवाओं की दिशा और पवनों की पूरे क्षेत्र में एक साथ सक्रियता वर्षा पैटर्न तय करती है।
- जून के बाद यह पवनें लगातार दक्षिण-पश्चिमी रुख अपनाती हैं
- मानसून मोमेंटम के साथ सितंबर तक सक्रिय रहती हैं [आम शिक्षण स्रोत]।
- विकल्पीय और सहायक कारण
- पश्चिमी विक्षोभ (Western disturbances): वसंत-शरदकाल के परिवर्तन के साथ उत्तर-पश्चिमी दिशा से आने वाले दबाव-घटक भी कुछ क्षेत्रों में वर्षा में योगदान करते हैं
- खासकर ठंडे महीनों में उत्तर भारत के कुछ भागों में शीतकालीन वर्षा के तौर पर, पर जून-सितंबर में प्राथमिक योगदान दक्षिणी-पश्चिमी मानसून का ही रहता है।
- यह पाठ्यक्रमीय विवरण मानसून के साथ संयुक्त रूप से मौसमी विविधताएं बनाते हैं।
- पूर्वी गलियारे के कारण विविधता: राज्यवार वर्षा-आयतन में भिन्नता एक सामान्य तथ्य है
- उत्तरी पूर्वी भारत,_inner parts, पश्चिमी घाट क्षेत्र आदि जगहों पर वर्षा का स्तर अलग-अलग हो सकता है
- लेकिन जून-सितंबर अवधि में मानसून का प्रभाव साफ रहता है।
- गुणावली और मानव-स्तर प्रभाव
- कृषि-चक्र: मानसून वर्षा किसान अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है
- इसकी अनिश्चितता फसल-स्विंग और जल संरक्षण पर प्रभाव डालती है।
- बाढ़ और सुखा: मानसून के दौरान अत्यधिक वर्षा बाढ़ Reino आदि जोखिम पैदा कर सकती है
- वहीं कुछ वर्षा-सीज़न में कमी से सूखा पड़ सकता है।
- संक्षिप्त उत्तर
- मुख्य कारण: दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के कारण जून–सितंबर के महीनों में भारत के अधिकांश हिस्सों में भारी वर्षा होती है
- जो हिंद महासागर से आकाश में आती नमी के साथ भूमि पर बरसती है [उच्च-स्तरीय स्रोत-सार]।