जलवायु (भारत का भूगोल)

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11. किसी स्थान पर तापमान, आर्द्रता, वर्षा, वायु वेग आदि के संदर्भ में वायुमंडल की प्रतिदिन की परिस्थिति उस स्थान का/की ....... कहलाती है। [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) मौसम
Solution:
  • किसी स्थान पर तापमान, आर्द्रता, वर्षा, वायु की गति आदि के आधार पर वायुमंडल का दिन-प्रतिदिन की स्थिति को उस स्थान का मौसम कहा जाता है।
  •  मौसम वायुमंडल की क्षणिक और परिवर्तनशील अवस्था को दर्शाता है
  • जो दैनिक या अल्पकालिक आधार पर मापा जाता है।​
  • मौसम की परिभाषा
    • मौसम किसी निश्चित स्थान पर तापमान, आर्द्रता, वर्षा, वायु की गति और दिशा, बादल घनत्व, दाब तथा दृश्यता जैसे मौसम तत्वों की दैनिक स्थिति का वर्णन करता है।
    • यह वायुमंडल की निचली परत, विशेष रूप से क्षोभमंडल (ट्रोपोस्फीयर) में होने वाली प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है।
    • उदाहरणस्वरूप, एक ही स्थान पर सुबह धूप हो सकती है
    • शाम को वर्षा हो सकती है, जो मौसम की परिवर्तनशीलता को दिखाता है।​
  • मौसम तत्व
  • मौसम को मापने वाले प्रमुख तत्व निम्नलिखित हैं:
    • तापमान: हवा का तापमान, जो थर्मामीटर से मापा जाता है।
    • आर्द्रता: वायु में जलवाष्प की मात्रा, सापेक्ष आर्द्रता के रूप में व्यक्त।
    • वर्षा: वर्षा, बर्फबारी या ओलावृष्टि की मात्रा।
    • वायु वेग और दिशा: हवा की गति (किलोमीटर प्रति घंटा में) और दिशा (उत्तर, दक्षिण आदि)।
    • वायुदाब: वायु का दाब, जो मौसम प्रणालियों को प्रभावित करता है।
    • ये तत्व मौसम विभाग द्वारा स्टेशन से मापे जाते हैं।​
  • मौसम बनाम जलवायु
    • मौसम अल्पकालिक (दिन-प्रति-दिन) होता है, जबकि जलवायु दीर्घकालिक (30 वर्ष या अधिक) औसत स्थिति है।
    • उदाहरण के लिए, दिल्ली में दिसंबर में ठंडा मौसम हो सकता है, लेकिन जलवायु गर्म और शुष्क है।
    • मौसम अप्रत्याशित होता है, जलवायु पूर्वानुमान योग्य।​
  • मौसम का महत्व
    • मौसम कृषि, परिवहन, उड़ानें और दैनिक जीवन को प्रभावित करता है।
    • मौसम पूर्वानुमान रडार, उपग्रह और कंप्यूटर मॉडल से किया जाता है।
    • भारत में भारतीय मौसम विभाग (IMD) दैनिक बुलेटिन जारी करता है।​

12. भारत के उत्तरी भाग में ग्रीष्मकाल.................. में होती है। [MTS (T-I) 15 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) वायु दाब में कमी
Solution:
  • देश के उत्तरी भाग में, ग्रीष्मकाल में तापमान में वृद्धि होती है तथा वायुदाब में कमी आती है।
  • मई के अंत में, उत्तर-पश्चिम में थार के रेगिस्तान से लेकर पूर्व एवं दक्षिण-पूर्व में पटना तथा छोटा नागपुर पठार तक एक कम दाब का लंबवत क्षेत्र बन जाता है।
  • पवन का परिसंचरण इस गर्त के चारों ओर प्रारंभ होता है।
  •  यह ऋतु उत्तरी भारत में अत्यधिक गर्मी, लू और धूल भरी आंधियों से चिह्नित होती है
  • जो कृषि, स्वास्थ्य और दैनिक जीवन को प्रभावित करती है।​
  • ग्रीष्मकाल की अवधि
    • भारत के उत्तरी भाग, जैसे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में ग्रीष्म ऋतु मुख्य रूप से मार्च से मई तक रहती है।
    • मार्च में तापमान धीरे-धीरे बढ़ना शुरू होता है, अप्रैल में चरम पर पहुंचता है
    • मई में सबसे अधिक गर्मी पड़ती है, जहां तापमान 45-48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।
    • दक्षिण की ओर जाने पर समुद्री प्रभाव से तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है।​
  • विशेषताएं और मौसम तत्व
    • तापमान: उत्तरी मैदानों में मई सबसे गर्म महीना होता है
    • जहां थार मरुस्थल क्षेत्र में न्यूनतम वायुदाब बनता है।
    • लू: उत्तर-पश्चिमी भारत में दिन के समय चलने वाली गर्म और शुष्क पवनें लू कहलाती हैं
    • जो पंजाब, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आम हैं।
    • आंधियां: शाम को धूल भरी आंधियां आती हैं
    • जो कभी-कभी वर्षा या ओलावृष्टि लाती हैं, जिससे तापमान अस्थायी रूप से कम होता है।
    • वायुदाब: उत्तरी भारत न्यूनतम दाब क्षेत्र बन जाता है, जो मानसून के आगमन का संकेत देता है।​
  • कारण और प्रभाव
    • सूर्य के कर्क रेखा की ओर बढ़ने से उत्तरी गोलार्ध में तापमान बढ़ता है।
    • हिमालय की बाधा से शुष्क महाद्वीपीय जलवायु बनती है। यह ऋतु फसल बोने को प्रभावित करती है, गर्मीजनित बीमारियां बढ़ाती है
    • जल संकट पैदा करती है। कभी-कभी मई के अंत में मानसून पूर्व वर्षा होती है।​
  • क्षेत्रीय भिन्नता
    • उत्तर-पश्चिमी भाग सबसे गर्म होते हैं, जबकि पूर्वी उत्तर भारत में नमी अधिक रहती है।
    • हिमालयी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत ठंडा रहता है। भारतीय मौसम विभाग इस दौरान लू अलर्ट जारी करता है।​

13. भारत की जलवायु का वर्णन करने के लिए प्रयुक्त सामान्य शब्द क्या है? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) उष्णकटिबंधीय मानसून
Solution:
  • भारत एक उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु वाला देश है।
  • हालांकि भारत उष्ण एवं उपोष्ण दोनों कटिबंधों में स्थित है।
  • अतः इस प्रश्न का निकटतम उत्तर विकल्प (b) होगा।
  • भारत की जलवायु का सामान्य वर्णन
    • मानसून जलवायु का प्रकार: भारत की जलवायु मुख्यतः उष्णकटिबंधीय मानसून जलवायु है
    • जिसमें गर्म और आर्द्र वर्षा अधिकांश भागों में मानसून के दौरान होती है और शेष वर्ष में तेज ऊष्ण गर्मी या शुष्क मौसम चलता है।
    • यह वर्णन मानसून-चक्र के कारण देश के उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक जलवायु में व्यापक भिन्नता बनाता है.​
    • क्षेत्रीय विविधता: भारत एक विशाल देश है जिसमें ऊँचाई, अक्षांश, समुद्र से दूरी, और भू-आकृतियाँ जलवायु की विविधता निर्धारित करते हैं।
    • मध्यम ऊंचाई वाले उत्तर-पूर्वी क्षेत्र और पश्चिमी तट के कुछ भागों में उच्च आर्द्रता और तापमान स्थायित्व के साथ उपोष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु जैसी स्थितियाँ पाई जाती हैं
    • जबकि उत्तर-पश्चिम के रेगिस्तानी क्षेत्र Rajasthan में गर्मी और कम वर्षा अधिक प्रमुख हैं.​
    • चार ऋतुओं की सामान्य संरचना: भारत में मुख्य रूप से चार ऋतुएं मानी जाती हैं
    • गर्मी (ग्रीष्म), बरसात (मानसून), ठंडी ठंडी शीत ऋतु (शीत), और कुछ स्थानों पर पड़ने वाला पाला या ऊष्ण गर्मी की लहरें।
    • मानसून के समय वर्षा अधिक होती है और बाकी समय तापमान में उतार-चढ़ाव रहता है.​
    • मानसून का प्रभाव: मानसून हवाएं देश की जीवन-रेखा मानी जाती हैं
    • क्योंकि वर्षा का लगभग दो-तिहाई हिस्सा मानसून सीजन में गिरता है।
    • इसका प्रभाव कृषि, जल संसाधन और नागरिक जीवन पर गहरा होता है.​
    • तापमान और बारिश में असमानता: उत्तर भारत में शीत ऋतु में ठंड अधिक होती है
    • जब हिमालयी क्षेत्रों में बर्फीली स्थितियाँ बनती हैं; वहीं दक्षिणी भागों में गर्मी और उच्च आर्द्रता रहती है।
    • गर्मियों में उच्च तापमान और गर्मी की लहरें सामान्य हैं, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड अधिक होती है.​
    • आंतरिक भूमिका: महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा जैसे पश्चिमी तट के क्षेत्रों में उच्च आर्द्रता और असंगत वर्षा के साथ उपोष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु के तत्व मिलते हैं
    • जबकि रेगिस्तानी क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी और कम वर्षा प्रमुख है.​
  • टिप्पणीउद्धरण
    • भारत की जलवायु अक्सर मानसून के प्रभाव में बताई जाती है
    • विविध क्षेत्रीय विशेषताओं के कारण भिन्न-भिन्न जलवायु प्रकार दिखाती है.​
    • जलवायु-वार्ता में चार ऋतुओं और मानसून का प्रमुख योगदान स्पष्ट किया गया है, जिसमें क्षेत्रीय भिन्नता भी शामिल है.​

14. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक भारत की जलवायु को प्रभावित नहीं करता है? [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) देशांतर
Solution:
  • देशांतर किसी स्थान विशेष की जलवायु को प्रभावित नहीं करते हैं।
  • भारत की जलवायु को अक्षांश, ऊंचाई और वायु दाब तथा पवन जैसे कारक प्रभावित करते हैं।
  • संघर्ष-पूर्ण प्रश्न का सीधा उत्तर: भारत की जलवायु को प्रभावित नहीं करने वाला कारक कोई स्पष्ट एक-लाइन उत्तर नहीं है
  • क्योंकि अधिकांश प्रमुख कारक मिलकर जलवायु बनाते हैं।
  • फिर भी सामान्य तौर पर निम्न बातों पर विचार किया जाता है
  • किसी कारक की कमी या अंशहीनता से जलवायु पर असर पड़ सकता है
  • परंतु निम्न में से किस कारक को मान्यताप्राप्त मानना गलत होगा
  • यह ताजा वैज्ञानिक साहित्य में स्पष्ट नहीं है। नीचे विस्तार से समझाया गया है।
  • प्रमुख जलवायु-निर्धारक कारक
    • अक्षांश (latitude): उपमहाद्वीप की विशालता के कारण तापमान और वर्षा के पैटर्न निर्धारित होते हैं।
    • स्थलाकृति और ऊँचाई (relief and altitude): हिमालय, पठार, पहाड़ियाँ आदि तापमान/आर्द्रता पर विशेष प्रभाव डालते हैं।
    • जल वितरण (distribution of land and sea): समुद्री प्रभाव और समुद्री उपस्थिति से आर्द्रता तथा वर्षा में परिवर्तन होता है।
    • हवाएं और वायुदाब (winds and pressure systems): पश्चिमी हवाओं, मानसून और अन्य वायु-घटकों से वर्षा वितरण प्रभावित होती है।
    • मानसून (monsoon): देश की प्रमुख वर्षा-वाटिका माने जाते हैं।
    • जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चर (climate change drivers): मानव-निर्मित उत्सर्जन और जलवायु-अनुकूलन के उपाय।
  • असंबद्ध या कम प्रभावित कारक का विचार (संकेताक्षर)
    • स्थानीय urban heat island (यूज़रन-हीट) प्रभाव कुछ शहरों में तापमान बढ़ा सकता है
    • यह संपूर्ण भारत की जलवायु के लिए एक विशिष्ट “कारक” के रूप में नहीं बल्कि पृथक स्थानों पर प्रभाव डालता है।
    • कुछ स्थानीय कारण जैसे छोटे जलाशयों का निर्माण या स्थानीय वन आच्छादन में कमी सीधे तौर पर क्षेत्रीय जलवायु को प्रभावित करते हैं
    • इनका प्रभाव क्षेत्र-विशिष्ट और स्तर-वार मात्रा में होता है
    • पूरे उपमहाद्वीप की जलवायु पर एक एकीकृत कारक के रूप में नहीं देखा जाता।
  • निष्कर्ष
    • भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक विविध हैं और इनमें से एक भी सही “यह कारक प्रभावित नहीं करता” कहना कठिन है।
    • सभी उल्लेखित प्रमुख कारक क्षेत्रीय और व्यापक दोनों स्तरों पर प्रभाव डालते हैं।
    • यदि आपका उद्देश्य परीक्षा या पाठ्यक्रम के अनुसार एक स्पष्ट विकल्प चुनना है
    • तो सामान्य उत्तर यह होगा कि “किसी एक कारक को भारत की जलवायु को प्रभावित नहीं करता” कहना गलत होगा; सभी प्रमुख कारक मिलकर जलवायु बनाते हैं।
    • यदि चाहें, इस विषय पर मैं आपके लिए एक स्पष्ट बहु-वरुणताल (outline) बना सकता हूँ
    • जिसमें प्रत्येक कारक का क्षेत्रीय प्रभाव, तापन-मौसम, और उदाहरण शामिल हों, ताकि उत्तर स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया जा सके।

15. भारत में मानसून निवर्तन किस महीने के दौरान होता है? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) अक्टूबर और नवंबर
Solution:
  • भारत में मानसून के पहुंचने को 'मानसून का आगमन' और भारत से मानसून के वापस लौटने को 'मानसून का निवर्तन' कहा जाता है।
  • मानसून जून के प्रथम सपताह में भारत में प्रवेश करता है
  • अक्टूबर तथा नवंबर तक यह संपूर्ण भारत से वापस लौट जाता है।
  • मानसून निवर्तन, यानी मानसून मौसम के अंत की वापसी, भारत में सामान्यतः अक्टूबर से नवंबर के दौरान शुरू होता है
  • उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्वी हिस्सों तक धीरे-धीरे फैलता है
  • पूरी देश से लौटने में आम तौर पर अक्टूबर के मध्य से नवंबर तक का समय लगता है
  • दिसंबर तक अधिकांश भाग मानसून से मुक्त हो जाते हैं.​
  • परिभाषा: मानसून निवर्तन वह अवधि है जब दक्षिण-पश्चिम मानसून हवाएँ कमजोर होती हैं
  • भारत के अधिकांश भागों में वर्षा घटकर शुष्क मौसम शुरू हो जाता है.​
  • समय-रेखा: उत्तर-पश्चिम भारत से शुरू होकर उत्तर, पश्चिम और पूर्वी भारत के अधिकतर भागों तक प्रचलित मानसून घटित होता है
  • समुद्री तटों से inland तक स्थिति क्रमिक रूप से शिथिल होती है.​
  • क्षेत्रीय पैटर्न: केरल के तट से शुरू होकर देश के बाकी हिस्सों में धीरे-धीरे फीका पड़ता है
  • आख़िर में जनवरी-फरवरी तक भी कुछ क्षेत्रों में हल्की वर्षा हो सकती है, लेकिन सामान्यतः दिसंबर में समाप्त माना जाता है.​
  • आयाम और संदर्भ
    • औसत अवधि: आम तौर पर 3–4 महीनों के भीतर पूरा निवर्तन हो जाता है
    • लेकिन यह क्षेत्रीय विविधताओं के कारण अलग-अलग वर्ष में थोड़ा बढ़ या घट सकता है.​
    • IMD के प्रासंगिक संदर्भ: निवर्तन के साथ-साथ मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अद्यतन तिथियाँ और क्षेत्रीय व्यवहार प्रभावित होते हैं
    • वर्षों में संशोधन भी देखे गए हैं.​

16. निम्नलिखित में से क्या भारतीय मानसून को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) पश्चिमी विक्षोभ
Solution:
  • पश्चिमी विक्षोभ भारतीय मानसून को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाता है।
  • जबकि जेट धारा, तिब्बत का पठार तथा अंतः/अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र भारतीय मानसून को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • भूमि-समुद्र तापमान का अंतर
    • गर्मी के मौसम में भारतीय उपमहाद्वीप भूमि समुद्री तापमान से तेज़ी से गर्म होता है
    • जिससे भूमि पर कम दबाव बनता है और दक्षिण-पश्चिम मानसून हवाएँ तेजी से प्रवेश करती हैं।
    • यह फ्रेम मानसून के प्रारम्भ और उसका वितरण तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है.​
  • अंतर-उष्णकटिबंधीय चर (ITCZ) और जलवायु दाब-तंत्र
    • उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र ITCZ के स्वरुप और مكان से मानसून के प्रवेश-वाद्य निर्धारित होते हैं
    • ITCZ के स्थान के कारण वर्षा का क्षेत्रीय वितरण भिन्न होता है.​
  • बंगाल की खाड़ी और अरब सागर की भूमिका
    • बंगाल की खाड़ी से आने वाला जलवाष्प-समृद्ध मानसून बंगाल दक्षिण-पूर्व से आगे भारत के पूर्वी हिस्सों तक वर्षा लाता है
    • अरब सागर के ऊपर से उठती नम हवाओं का मार्ग-निर्माण भी वर्षा के क्षेत्रीय पैटर्न को प्रभावित करता है.​
  • स्थलाकृति (स्थलाकृति)
    • पश्चिमी घाट, हिमालय आदि ऊँचे पर्वतीय द्रोण और ऊँचाई संबंधी अवरोध मानसून के वितरण और तीव्रता को बदलते हैं
    • ऊँचे पहाड़ हवा के आरोहण को बढ़ाकर वर्षा बढ़ाते हैं, विशेषकर दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम में.​
  • महासागरीय प्रवाह-मानक (ENSO, Niño/La Niña)
    • ENSO स्थिति (El Niño–Southern Oscillation) मानसून वर्षा के समय-चक्र और उनके वितरण पर व्यापक प्रभाव डालती है
    • कई वर्ष ENSO-स्थितियाँ भारतीय मानसून की प्रचुर/कम वर्षा में बदलाव लाती हैं.​
  • स्थानीय तापमान-वातावरणीय शर्तें (local atmospheric conditions)
    • स्थानीय भू-आवृत्ति, तापमान-वातावरणीय गरज, मृदा-आर्द्रता आदि भी मानसून की मौसमी तीव्रता और वर्षा के वितरण में योगदान करते हैं
    • ये कारक संयुक्त रूप से कुल मिलाकर प्रभाव डालते हैं.​
  • क्या कहना चाहिएसबसे महत्वपूर्ण कारक”?
    • व्यवहारिक दृष्टिकोण से भूमि-समुद्र तापमान के तापमान का अंतर वह प्रारम्भिक संकेतक है
    • जो मानसून के प्रवेश को प्रोत्साहित करता है। पर वास्तविक वर्षा का वितरण क्षेत्रवार और वर्ष-वार भिन्न होता है
    • क्योंकि ITCZ का स्थान, ENSO की अवस्था और भू-आवर्धन संरचना जैसे कई कारक एक साथ काम करते हैं।
    • इसलिए एकसाथ कहें तो मानसून के आकार को निर्धारित करने में बहु-कारक (multi-factor) मॉडल अधिक सटीक हैं
    • इनमें भूमि-समुद्र तापमान अंतर को अक्सर केंद्रीय भूमिका दी जाती है, जबकि अन्य कारक उसे समर्थित करते हैं.​
  • उद्धरण (मुख्य बिंदु-संरचना के साथ)
    • भूमि-समुद्र तापमान अंतर मानसून प्रवेश-प्रेरक बनता है और वर्षा के क्षेत्रीय वितरण को प्रभावित करता है.​
    • ITCZ और जलवायु दाब-तंत्र मानसून के वर्षा स्थान और तीव्रता को निर्देशित करते हैं.​
    • बंगाल की खाड़ी और अरब सागर की शाखाएं वर्षा के क्षेत्रीय वितरण पर निर्णायक प्रभाव डालती हैं.​
    • स्थलाकृति मानसून के वितरण और तीव्रता को मजबूत करती है, खासकर दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान.​

17. भारत के अधिकांश भागों में जून से सितंबर के दौरान वर्षा क्यों होती है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के कारण
Solution:
  • दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के कारण भारत के अधिकांश भागों में जून से सितंबर के दौरान वर्षा होती है।
  • पश्चिमी घाट दक्षिणी- पश्चिमी मानसून पवनों के मार्ग में दीवार की भांति खड़ा है
  • जिस कारण इस पर्वतमाला के पश्चिमी ढालों तथा पश्चिमी तटीय मैदान में भारी वर्षा होती है
  • संक्षेप में: भारत के अधिकांश भागों में जून से सितम्बर के बीच वर्षा होने का मुख्य कारण दक्षिणी-पश्चिमी मानसून है
  • जो हिंद महासागर से आकर भूमि की तरफ नमी लाता है। नीचे विस्तृत व्याख्या दी जा रही है।
  • मुख्य कारण और प्रक्रियात्मक विवरण
    • इससे हिंद महासागर और अरब सागर के ऊपर निम्न दबाव बनता है
    • जिसके कारण भारी मात्रा में आर्द्र हवा भूमि की ओर आकर वर्षा कराती है।
    • यह वर्षा का प्रमुख और सामान्य चरण जून–सितंबर के दौरान रहता है [आमतौर पर बताई गई जानकारी]।
    • समुद्री-भूमि तापमान असमानता: समुद्र गर्म रहते हैं जबकि भारत की भूमि गर्मी में जल्दी गरम हो जाती है
    • जिससे वायुमंडलीय चक्र बनता है और नमी-युक्त हवाओं की वक्र-वृत्ति बनती है जो वर्षा का मुख्य स्रोत है [परिचयात्मक विवरण]।
    • बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी: इन दो सागरों से उठने वाली हवाएँ भारी मात्रा में नमी लेकर आती हैं
    • भारत के अधिकांश भागों में वर्षा कराती हैं [नोटेशनल विवरण]
    • मानसून पवनों का मार्ग और संगठन: समुद्री हवाओं की दिशा और पवनों की पूरे क्षेत्र में एक साथ सक्रियता वर्षा पैटर्न तय करती है।
    • जून के बाद यह पवनें लगातार दक्षिण-पश्चिमी रुख अपनाती हैं
    • मानसून मोमेंटम के साथ सितंबर तक सक्रिय रहती हैं [आम शिक्षण स्रोत]।
  • विकल्पीय और सहायक कारण
    • पश्चिमी विक्षोभ (Western disturbances): वसंत-शरदकाल के परिवर्तन के साथ उत्तर-पश्चिमी दिशा से आने वाले दबाव-घटक भी कुछ क्षेत्रों में वर्षा में योगदान करते हैं
    • खासकर ठंडे महीनों में उत्तर भारत के कुछ भागों में शीतकालीन वर्षा के तौर पर, पर जून-सितंबर में प्राथमिक योगदान दक्षिणी-पश्चिमी मानसून का ही रहता है।
    • यह पाठ्यक्रमीय विवरण मानसून के साथ संयुक्त रूप से मौसमी विविधताएं बनाते हैं।
    • पूर्वी गलियारे के कारण विविधता: राज्यवार वर्षा-आयतन में भिन्नता एक सामान्य तथ्य है
    • उत्तरी पूर्वी भारत,_inner parts, पश्चिमी घाट क्षेत्र आदि जगहों पर वर्षा का स्तर अलग-अलग हो सकता है
    • लेकिन जून-सितंबर अवधि में मानसून का प्रभाव साफ रहता है।
  • गुणावली और मानव-स्तर प्रभाव
    • कृषि-चक्र: मानसून वर्षा किसान अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है
    • इसकी अनिश्चितता फसल-स्विंग और जल संरक्षण पर प्रभाव डालती है।
    • बाढ़ और सुखा: मानसून के दौरान अत्यधिक वर्षा बाढ़ Reino आदि जोखिम पैदा कर सकती है
    • वहीं कुछ वर्षा-सीज़न में कमी से सूखा पड़ सकता है।
  • संक्षिप्त उत्तर
    • मुख्य कारण: दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के कारण जून–सितंबर के महीनों में भारत के अधिकांश हिस्सों में भारी वर्षा होती है
    • जो हिंद महासागर से आकाश में आती नमी के साथ भूमि पर बरसती है [उच्च-स्तरीय स्रोत-सार]।

18. वर्षा को ....... नामक एक यंत्र द्वारा मापा जाता है। [MTS (T-I) 17 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) वर्षामापी
Solution:
  • वर्षा मापने के यंत्र का उपयोग वर्षा की मात्रा को मापने के लिए किया जाता है। इसे वर्षामापी (Rain gauge) कहा जाता है
  • वर्षामापी क्या है?
    • वर्षामापी एक सरल यांत्रिक उपकरण है जो किसी निश्चित क्षेत्र में गिरने वाली वर्षा के जल की मात्रा को मिलीमीटर या इंच में मापता है।
    • यह खुले स्थान पर स्थापित किया जाता है और वर्षा जल को एकत्रित कर उसकी गहराई नापता है।
    • भारतीय मौसम विभाग (IMD) जैसे संगठन इसका उपयोग मानसून ट्रैकिंग और जलवायु डेटा संग्रह के लिए करते हैं ।​
  • कार्यप्रणाली
    • वर्षामापी में एक चौड़े मुंह वाला फनल (कीप) होता है
    • जो वर्षा जल को एक संकीर्ण मापक सिलेंडर में निर्देशित करता है।
    • फनल का क्षेत्रफल मापक ट्यूब से 10 गुना बड़ा होता है
    • जिससे जल की मात्रा को 0.1 मिमी तक सटीक मापा जा सके।
    • बारिश रुकने पर जल स्तर पढ़ा जाता है और इसे दैनिक/मासिक डेटा में दर्ज किया जाता है।
    • आधुनिक संस्करणों में स्वचालित सेंसर डेटा को रीयल-टाइम भेजते हैं।​
  • भारत में उपयोग
  • भारत में IMD 7000+ स्टेशनों पर मानक रेनगेज लगाता है, जो जून-सितंबर मानसून वर्षा (जैसा पिछले प्रश्न में चर्चा) को ट्रैक करते हैं।
  • ये डेटा बाढ़ पूर्वानुमान, कृषि योजना और जल संसाधन प्रबंधन में सहायक हैं।
  • रडार सिस्टम जैसे डोपलर मौसम रडार अतिरिक्त सटीकता प्रदान करते हैं ।​
  • महत्व और सीमाएं
  • वर्षामापी कृषि, आपदा प्रबंधन और जलवायु अध्ययन के लिए आवश्यक हैं, लेकिन हवा/बर्फ में कम सटीक होते हैं।
  • रखरखाव जरूरी है ताकि पत्तियां या धूल फनल न रोकें ।
  • आधुनिक तकनीक ने मैनुअल मापन को स्वचालित बना दिया है।​

19. केरल और कर्नाटक में पूर्व-मानसून वर्षा को ....... के रूप में जाना जाता है। [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) आम्र वर्षा
Solution:
  • मानसून से पहले होने वाली वर्षा जो केरल और कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में सामान्य घटनाएं हैं, उन्हें आम्र वर्षा के रूप में जाना जाता है।
  • आम्र वर्षा क्या है?
    • आम्र वर्षा दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों, विशेष रूप से केरल और कर्नाटक में मार्च से मई तक होने वाली प्री-मानसून बारिश को कहते हैं।
    • ये वर्षा आम के फलों को पकाने में सहायक होती हैं, इसलिए इसका नाम "आम्र" (आम) वर्षा पड़ा।
    • बंगाल की खाड़ी में विकसित निम्न दाब के क्षेत्र या आंधियों के कारण ये गरज-चमक के साथ होती हैं, जो कभी हल्की तो कभी भारी बारिश लाती हैं।​
  • समयावधि और विशेषताएं
    • ये वर्षा ग्रीष्म ऋतु के अंत में आती हैं और मानसून के आगमन से ठीक पहले होती हैं।
    • केरल-कर्नाटक तट पर ये एक सामान्य घटना हैं
    • जो अप्रैल की बारिश या ग्रीष्म वर्षा के नाम से भी जानी जाती हैं।
    • इनकी तीव्रता के कारण पेड़ों से कच्चे आम गिर जाते हैं
    • जो किसानों के लिए फायदेमंद साबित होती है।​
  • कृषि महत्व
    • केरल और कर्नाटक में आम्र वर्षा न केवल आम की फसल को पकाने में मदद करती है
    • बल्कि कॉफी, चाय और अन्य नकदी फसलों के लिए भी लाभदायक होती है।
    • ये वर्षा मिट्टी की नमी बनाए रखती हैं और गर्मी की तपिश से राहत देती हैं।
    • स्थानीय अर्थव्यवस्था में इनका योगदान महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये फसलों की गुणवत्ता सुधारती हैं।​
  • अन्य क्षेत्रों से तुलना
    • ये तुलना दर्शाती है कि दक्षिण भारत में पूर्व-मानसून वर्षा कृषि-उन्मुख होती है
    • जबकि अन्य क्षेत्रों में मौसमी प्रभाव प्रमुख होते हैं।​

20. भारत का निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य दक्षिण पश्चिम मानसून से वर्षा प्राप्त करने वाला पहला राज्य है? [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) केरल
Solution:
  • दक्षिण-पश्चिम मानसून से सर्वप्रथम केरल में वर्षा होती है।
  • भारत में यह वर्षा मानसून के आगमन का प्रतीक है।
  • संक्षिप्त उत्तर: केरल वह पहला राज्य है
  • जिसे दक्षिण-पश्चिम मानसून सबसे पहले заход करता है और वर्षा प्राप्त होती है।
  • विस्तृत विवरण:
    • कारण और प्रवाह: दक्षिण-पश्चिम मानसून की अरब सागर शाखा भारत के तटीय प्रदेशों में प्रवेश करती है
    • जिसकी प्रारम्भिक प्रभावी सीमा पश्चिमी घाट के किनारों से शुरू होकर केरल तक पहुँचती है।
    • इसके कारण केरल में जून-जुलाई के आसपास वर्षा की शुरुआत होती है
    • धीरे-धीरे देश के अन्य भागों तक फैलती है।
    • इस कारण केरल को भारत का पहला मानसून-प्राप्त राज्य बताया जाता है [संदर्भ: सामान्य ज्यalog्राफी/मानसून संरचना]।
    • स्थलाकृति का प्रभाव: केरल की पश्चिमी घाटी का ऊंचा और आर्द्र इलाका मानसून की सभी शाखाओं को अवरोधित करते हुए
    • अरब सागर शाखा की पहली वर्षा के लिए मार्ग बनाता है
    • जिससे केरल में वर्षा सबसे पहले होती है
    • फिर देश के उत्तर और पूर्वी हिस्सों में इसका प्रभाव बढ़ता है [संदर्भ: मानसून के मार्ग और पश्चिमी घाट की भूमिका]।
    • मानसून के प्रकार में योगदान: दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत के अधिकांश हिस्सों में वर्षा लाता है
    • परंतु शुरुआती दाब-गठनों और हवाओं के मानचित्र के अनुसार केरल में इसकी पहली बौछारें सबसे पहले पड़ती हैं
    • जो कि इसके समुद्री-तटीय स्थिति और गतिशील मौसमी चक्र के कारण है [संदर्भ: दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआती प्रवृत्ति]।
  • महत्वपूर्ण बिंदु:
    • केरल के अलावा कुछ वर्षों में अरब सागर शाखा के प्रभाव के कारण तटीय कर्नाटक के कुछ भागों में भी समय से पहले वर्षा हो सकती है
    • सामान्यतः माना गया मानक निष्कर्ष यही है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सबसे पहले केरल में प्रवेश करता है
    • वर्षा देता है [संदर्भ: शिक्षण संसाधन और सामान्य मानसून-विवरण]।