जलवायु (भारत का भूगोल)

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21. ....... की दक्षिणी श्रेणियों में स्थित मॉसिनराम में विश्व की सर्वाधिक औसत वर्षा होती है। [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) खासी पहाड़ियों
Solution:
  • भारत में सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाले क्षेत्रों में पश्चिमी घाट, पूर्वी हिमालय तथा मेघालय हैं।
  • इन क्षेत्रों में 250 सेमी. से अधिक वार्षिक वर्षा होती है।
  • चेरापूंजी और मॉसिनराम जैसे सर्वाधिक वर्षा वाले स्थान भी मेघालय राज्य में ही स्थित हैं।
  • यह (मॉसिनराम) खासी पहाड़ियों का हिस्सा है।
  • स्थान और भौगोलिक स्थिति
    • मॉसिनराम पूर्वी खासी हिल्स जिले में चेरापूंजी (Cherrapunji) से लगभग 16 किलोमीटर पश्चिम में स्थित एक छोटा सा गांव है।
    • यह खासी पहाड़ियों के पवनमुखी (windward) भाग पर है, जहां ऊंचाई लगभग 1,400 मीटर है
    • जो ओरोग्राफिक वर्षा (पर्वतीय वर्षा) को बढ़ावा देती है।
    • बंगाल की खाड़ी से उठने वाली मानसूनी हवाएं यहां पहुंचकर पहाड़ियों से टकराती हैं
    • ठंडी होकर वाष्पीकृत जल को वर्षा के रूप में गिराती हैं।​
  • वर्षा की मात्रा और रिकॉर्ड
    • यहां जून से सितंबर तक मानसून ऋतु में 90% से अधिक वर्षा होती है
    • जिसमें कभी-कभी प्रतिदिन 24 घंटे बारिश जारी रहती है।
    • 1985 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार, एक वर्ष में 26,000 मिलीमीटर (1,023 इंच) वर्षा दर्ज की गई
    • जो अब तक का सबसे अधिक रिकॉर्ड है।
    • औसतन 11,871-11,872 मिमी वर्षा के साथ यह चेरापूंजी (जो कभी सबसे गीला स्थान था) से भी आगे है।​
  • कारण और जलवायु
    • दक्षिणी खासी श्रेणियां मानसून हवाओं का बाधक बनती हैं, जिससे नमी संकेंद्रित हो जाती है।
    • सर्दियों में (दिसंबर-फरवरी) शुष्क मौसम रहता है, जहां मासिक वर्षा 1 इंच से कम होती है
    • लेकिन बाकी समय कोहरा और धुंध आम है।
    • स्थानीय लोग घास से बने ध्वनिरोधी घर बनाते हैं ताकि तेज बारिश की आवाज से बच सकें।​
  • प्रभाव और विशेषताएं
    • अधिक वर्षा से भूस्खलन, बाढ़ और सड़क अवरुद्ध होना आम है
    • लेकिन यह घने जंगलों, जैव विविधता और कंदों पर आधारित स्थानीय संस्कृति को समृद्ध करता है।
    • पर्यटक मॉसिनराम की रहस्यमयी सुंदरता के लिए आते हैं
    • हालांकि पहुंच मुश्किल होती है।
    • यह उपोष्णकटिबंधीय उच्चभूमि जलवायु का उदाहरण है।​

22. भारत के निम्नलिखित में से किन राज्यों में अक्टूबर से दिसंबर के दौरान पूर्वोत्तर मानसून के कारण वर्षा होती है? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश
Solution:
  • तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश राज्य में पूर्वोत्तर मानसून के कारण अक्टूबर से दिसंबर के दौरान वर्षा होती है।
  • उत्तर- पूर्वी मानसून से तमिलनाडु की कुल वर्षा का लगभग 40-50 प्रतिशत (लगभग 48 प्रतिशत) प्राप्त होता है।
  • पूर्वोत्तर मानसून क्या है
    • पूर्वोत्तर मानसून, जिसे शीतकालीन मानसून भी कहा जाता है
    • मानसूनों के चौतरफा परिवर्तन के दौरान दक्षिण भारत तक पहुँचकर अक्टूबर–दिसंबर महीनों में वर्षा कराता है.​
  • भागीदारी वाले राज्य
    • तमिलनाडु: इस अवधि में तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में वर्षा दर्ज की जाती है
    • यह असामान्य लेकिन सामान्य प्रवृत्ति है कि इस समय दक्षिणी भारत के कुछ क्षेत्र वर्षा प्राप्त करें.​
    • केरल: केरल में भी अक्टूबर–दिसंबर के दौरान पूर्वोत्तर मानसून की वर्षा देखने को मिलती है; यह क्षेत्रीय जलवायु की वजह से संभव है.​
    • आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश में इस अवधि में कुछ स्थानों पर वर्षा हो सकती है
    • दक्षिणी भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून का असर होने से यह संभव होता है.​
  • क्यों होती है यह वर्षा
    • बंगाल की खाड़ी शाखा के कारण दक्षिणी भारत तक पूर्वोत्तर मानसून की शाखा पहुँचती है
    • जिससे तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के कुछ हिस्सों में वर्षा होती है.​
  • अन्य राज्यों की स्थिति
    • अक्टूबर–दिसंबर में उत्तर भारत के कई हिस्सों में पूर्वोत्तर मानसून से वर्षा नहीं होती
    • वहीं दक्षिणी राज्यों के कुछ भागों में वर्षा के लिए मुख्य स्रोत पूर्वोत्तर मानसून नहीं बल्कि दक्षिण-पश्चिम मानसून या ऊष्मीय गतिविधियाँ हो सकती हैं.​
  • सावधानियाँ और भिन्नताएं
    • पूर्वोत्तर मानसून के कारण वर्षा थोड़ी मात्रा में और अनियमित हो सकती है
    • यह हर वर्ष समान नहीं होती और क्षेत्रीय जलवायु विशेषताओं पर निर्भर करती है.​

23. भारत के पश्चिमी तटों पर गर्मियों के दौरान काफी मात्रा में वर्षा (substantial rainfall) का मुख्य कारण क्या है? [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) पश्चिमी घाट
Solution:
  • भारत के पश्चिमी तटों पर गर्मियों के दौरान काफी मात्रा में वर्षा का मुख्य कारण पश्चिमी घाट है।
  • पश्चिमी घाट दक्षिणी- पश्चिमी मानसून पवनों के मार्ग में दीवार की भांति खड़ा है।
  • पूर्वभूमिका
    • मानसून से जुड़ी वर्षा वितरण में सबसे महत्वपूर्ण घटक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून है
    • जो जून-सितंबर के बीच अरब सागर से भारतीय उपमहाद्वीप की ओर नमी लेकर आता है और भारत भर में अधिकांश वर्षा का स्रोत बनता है.​
  • पश्चिमी तट की भौगोलिक स्थिति
    • पश्चिमी तट के साथ लंबी और ऊँची पश्चिमी घाट पर्वत श्रृंखला समानांतर चलती है
    • यह समुद्री हवाओं के प्रचलन को रोककर या मोड़कर अनुकूल ऊँचाई पर नमी को ऊँचे स्थानों पर धकेलती है, जिससे अत्यधिक वर्षा होती है.​
  • वर्षा का दर्पण: पश्चिमी घाट का प्रभाव
    • जब दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तेज होता है, तो अरब सागर से आने वाली नमी पश्चिमी घाट पर चढ़ती है
    • ऊँचाई के कारण यह नमी ठंडी होकरCondense होती है और भारी वर्षा होती है—इसी घटना को पर्वतीय वर्षा याographicsrainfall कहा जाता है.​
    • यह प्रभाव मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और केरल के तटीय किनारों पर स्पष्ट रूप से देखा जाता है
    • जहाँ मानसून की बारिश असाधारण तीव्रता से होती है.​
  • मौसम विज्ञानीय कारण
    • पर्वतीय बाधा: पश्चिमी घाट की ऊँचाई और लगभग निरंतर तटरेखा हवाओं के ऊपर उठने और कॉन्डेन्सेशन को बढ़ावा देती है, जिससे वर्षा अधिक होती है.​
    • नमी का स्रोत: मॉनसून से आ रहा तरल जलवाष्पयुक्त वायु समूह अरब सागर से दोहराकर पश्चिमी घाट में प्रवेश करता है
    • जिसे ऊँचाई के कारण क्लाइड होता है और भारी वर्षा बन जाती है.​
  • अन्य उल्लेखनीय बिंदु
    • पश्चिमी तट पर गर्मियों की आयी वर्षा स्थानीय विविधताओं के कारण स्थान-विशिष्ट भिन्न हो सकती है
    • कुछ जगहों पर वर्षा अधिक और कुछ पर कम होती है, पर कुल मिलाकर प्रभावशाली मात्रा यही मुख्य कारण बताई जाती है.​
    • पश्चिमी घाट के संरक्षणीय और जैव विविधता के कारण यह क्षेत्र यूनेस्को जैसे संस्थाओं द्वारा भी मान्यता प्राप्त है
    • जो इस पर्वतीय बाधा के वैश्विक महत्त्व को दर्शाता है.​
  • तुलना और संकल्प
    • दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का प्रभाव पश्चिमी तट पर अत्यधिक बारिश देता है
    • जबकि पूर्वी तट पर बारिश की मात्रा बंगाल की खाड़ी से आने वाले सिस्टम और डेल्टा-क्षेत्रों के कारण होती है
    • इस प्रकार पश्चिमी तट पर भारी वर्षा का प्रमुख कारण पश्चिमी घाट की बाधा है.​
    • घटक: पश्चिमी घाट बाधा
    • प्रभाव: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की नमी का तटीय क्षेत्रों तक अधिक असर
    • वर्षा प्रकार: पर्वतीय/ओरोग्राफिक rainfall
    • क्षेत्र: महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल (तटीय हिस्से)
    • अन्य योगदान: मानसून का सामान्य दायरा और स्थानीय राहत ऊर्जा

24. भारत का कौन-सा राज्य प्रसिद्ध तूफान 'काल बैसाखी' से संबंधित है? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) पश्चिम बंगाल
Solution:
  • पश्चिम बंगाल में गरज के साथ तेज आंधी और भारी बारिश होती है जिसे 'काल बैसाखी' के नाम से जाना जाता है।
  • काल बैसाखी का संबंध मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल से है।
  • यह एक प्रसिद्ध मौसमी तूफान है जो गर्मियों में पूर्वी भारत को प्रभावित करता है।​
  • उत्पत्ति और नाम
    • काल बैसाखी को नॉरवेस्टर्स (Nor'westers) भी कहा जाता है।
    • बैसाख मास (अप्रैल-मई) में आने के कारण इसका नाम पड़ा।
    • यह पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रचलित होता है, लेकिन पश्चिम बंगाल से सबसे अधिक जुड़ा है।​
  • मौसम और विशेषताएं
    • यह मार्च के अंत से मई तक पूर्व-मानसून तूफान के रूप में आता है।
    • तेज आंधी (40-150 किमी/घंटा), गरज-चमक, भारी बारिश और कभी ओलावृष्टि होती है।
    • भूमि गर्म होने से क्यूम्यलोनिम्बस बादल बनते हैं।​
  • प्रभाव क्षेत्र
    • मुख्य राज्य: पश्चिम बंगाल (जूट-धान फसलों को लाभ, लेकिन तबाही भी)।
    • अन्य प्रभावित: बिहार (हालिया घटनाओं में 60+ मौतें, जैसे 2025 अप्रैल), असम, झारखंड, ओडिशा, बांग्लादेश।​
    • यह फसलों को राहत देता है, पर पेड़ उखड़ना, बिजली गिरना, संपत्ति नुकसान आम।​
  • हालिया उदाहरण
    • 2025 में बिहार के 20 जिलों (पटना, नालंदा, गया) में काल बैसाखी से भारी तबाही: 80+ मौतें, फसल बर्बाद। बंगाल में भी वार्षिक घटना।​

25. भारत में, शीत ऋतु के दौरान वायु के जेट प्रवाह की ऊंचाई कितनी होती है? [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 9-13 किमी.
Solution:
  • शीत ऋतु में भारत का मौसम मध्य एवं पश्चिम एशिया में वायुदाब के वितरण से प्रभावित होता है।
  • इस समय हिमालय के उत्तर में तिब्बत पर उच्च वायुदाब केंद्र स्थापित हो जाता है।
  • इस उच्च वायुदाब केंद्र के दक्षिण में भारतीय उपमहाद्वीप की ओर निम्न स्तर पर धरातल के साथ-साथ पवनों का प्रवाह प्रारंभ हो जाता है।
  • भारत में, शीत ऋतु के दौरान वायु के जेट प्रवाह की ऊंचाई लगभग 9-13 किमी. के मध्य होती है।
  • जबकि कुछ स्रोत इसे 9–13 किमी तक भी दर्शाते हैं। यह ऊँचाई वास्तविक रूप से ऊर्ध्वाधर जेट धाराओं की सामान्य ऊँचाई सीमा है
  • जो ठंडे मौसम में भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर-पार्श्व में महसूस होती है.​
  • संलग्न बिंदु और स्पष्टीकरण
    • जेट धाराएँ क्या हैं: जेट धाराएँ पृथ्वी के क्षोभमंडल के ऊपरी भागों में बहुत तेज़ हवाएँ होती हैं
    • जो सामान्यतः 7–12 किमी से ऊपर की ऊँचाई पर प्रवाहित होती हैं
    • शीतकाल में इनके मार्ग और ऊँचाई भारत की सीमा के भीतर या उसके पास भी आ जाते हैं.​
    • भारत की शीतकालीन परिस्थितियाँ: शीत ऋतु में तिब्बती पठार और हिमालय क्षेत्र उच्च दाब से चलने वाली ठंडी वायु को नीचे की ओर धकेलते हैं
    • पश्चिमी हवाओं के जेट प्रवाह को भारतीय क्षेत्र के भीतर या उसके नजदीक लेकर आते हैं
    • जिससे ठंडे मौसम की पश्चिमी वर्षा और शीतकालीन प्रवाह बनते हैं.​
    • ऊँचाई के भिन्न स्रोत: कुछ शिक्षण सामग्री 11.3–12.9 किमी (7–8 मील) जैसी रेंज का उल्लेख करती हैं
    • जबकि अन्य 11–13 किमी तक की रेंज देती हैं; यह विविध स्रोतों के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है
    • लेकिन सामान्यतः 11–13 किमी के आसपास की सीमा को मानक माना जाता है.​
  • ताफ़ती संक्षेप
    • औसत ऊँचाई: लगभग 11–13 किमी (7–8 मील) के आसपास शीत ऋतु में भारत के आस-पास जेट धाराएँ प्रवाहित होती हैं.​
    • कारण: हिमालय–तिब्बती पठार के कारण ऊपरी वायुमंडलीय दबाव बनना, और पश्चिमी/उत्तर-पश्चिमी हवाओं के प्रवाह में बदलाव.​
    • प्रभाव: शीतकालीन वर्षा, ठंडी हवा के प्रवाह और कुछ क्षेत्रों में मौसम संबंधी चरम स्थितियाँ (जैसे ठंडी लहरें) उत्पन्न हो सकती हैं.​

26. भारत में, सर्दी के महीनों के दौरान पश्चिम और उत्तर-पश्चिम से भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश करने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवात, कहां से उत्पन्न होते हैं? [CHSL (T-I) 08 जून, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) भूमध्य सागर के ऊपर
Solution:
  • भारत में, सर्दी के महीनों के दौरान पश्चिम और उत्तर-पश्चिम से भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश करने वाला
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात, भूमध्य सागर के ऊपर से उत्पन्न होता है। उत्तर-पश्चिम भारत में पश्चिमी विक्षोभों के कारण शीतकाल में वर्षा होती है।
  • उत्पत्ति के स्थान
    • ये चक्रवात प्राथमिक रूप से भूमध्य सागर के पश्चिमी भाग में, विशेषकर कैस्पियन सागर के निकट या उसके आसपास के क्षेत्रों से जन्म लेते हैं।
    • कैस्पियन सागर क्षेत्र में उच्च दाब प्रणाली और ठंडी वायु के संयोजन से ये विकसित होते हैं
    • फिर पूर्व की ओर बढ़ते हुए मध्य पूर्व के देशों से गुजरते हैं । भूमध्य सागर से उत्पन्न ये प्रणालियाँ अतिरिक्त-उष्णकटिबंधीय प्रकृति की होती हैं
    • जो शीतकाल में जेट स्ट्रीम के प्रभाव से भारत की ओर निर्देशित हो जाती हैं ।​
  • गति पथ और प्रवेश बिंदु
    • चक्रवात ईरान और अफगानिस्तान के ऊपर से होते हुए पाकिस्तान में प्रवेश करते हैं
    • फिर उत्तर-पश्चिम भारत (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान) के रास्ते गंगा के मैदानी क्षेत्रों तक पहुँचते हैं।
    • ये प्रायः ऊपरी वायुमंडल (लगभग 11-13 किमी ऊँचाई) में जेट धाराओं के साथ यात्रा करते हैं
    • जो शीत ऋतु में दक्षिण की ओर खिसक जाती हैं । कुछ मामलों में ये तुर्कमेनिस्तान या मध्य एशिया के अन्य भागों से भी प्रभावित हो सकते हैं
    • लेकिन मुख्य स्रोत भूमध्य सागर ही रहता है ।​
  • प्रभावित क्षेत्र और मौसमीय योगदान
    • पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश: हल्की वर्षा और ठंडी लहरें ।​
    • हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड: भारी बर्फबारी और पहाड़ी वर्षा ।​
    • गंगा मैदान और उत्तर-पूर्व: कभी-कभी फैलाव के कारण अतिरिक्त वर्षा ।​
      ये चक्रवात भारत की शीतकालीन वर्षा (औसतन 20-50 मिमी) का प्रमुख स्रोत हैं
    • जो रबी फसलों के लिए लाभकारी सिद्ध होते हैं ।​
  • विशेषताएँ और कारण
    • शीत ऋतु में तिब्बत और हिमालय के ऊपर उच्च दाब बनने से जेट स्ट्रीम दक्षिण की ओर खिसकती है
    • जो इन चक्रवातों को भारत के ऊपर लाती है। ये कमजोर होते हैं (उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की तुलना में), लेकिन नमी युक्त पश्चिमी हवाओं से वर्षा उत्पन्न करते हैं।
    • फरवरी तक इनकी आवृत्ति घट जाती है ।​

27. निम्नलिखित में से किसे विश्व के सबसे आर्द्र स्थान के रूप में जाना जाता है? [CGL (T-I) 05 दिसंबर, 2022 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) मॉसिनराम
Solution:
  • विश्व का सबसे अधिक आर्द्र स्थान भारत में स्थित मॉसिनराम है। यह मेघालय के पूर्वी खासी पहाड़ी जिले में अवस्थित है।
  • मौसिनराम: विश्व का सबसे आर्द्र स्थान?
    • स्थान और प्रसिद्धि: मौसिनराम पूर्वोत्तर भारत, मेघालय राज्य के शिलोंग जिले की खासी पहाड़ियों में स्थित एक गाँव है।
    • इसे विश्व के सबसे आर्द्र स्थान के रूप में व्यापक रूप से उद्धृत किया जाता है
    • क्योंकि यहाँ वर्षभर भारी वर्षा दर्ज होती है, खासकर मानसून के दौरान.​
    • औसत वर्षा: इस क्षेत्र की औसत वार्षिक वर्षा लगभग 11,000 से 12,000 मिमी के आसपास बताई जाती है
    • जो इसे वैश्विक मानचित्र पर अत्यंत आर्द्र बनाती है.​
    • मौसमी कारण: बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम आर्द्र हवा जब पश्चिम की दिशा से ऊँचाई के कारण चढ़ती है
    • जिससे मौसिनराम में असाधारण वर्षा होती है.​
    • पर्यावरणीय प्रभाव: अत्यधिक वर्षा के कारण घनोद जंगल, नदियाँ, और जैव विविधता यहाँ विशिष्ट हो जाती है
    • किन्तु बुनियादी अवसंरचना और जीवनयापन पर भी दबाव रहता है।
  • वैकल्पिक दावे और अन्य स्थान
    • विश्व के कुछ दावों में अन्य स्थान भी आर्द्रता के लिए उद्धृत होते हैं
    • जैसे कुछ स्रोत कहते हैं कि मेघालय के अलावा बांग्लादेश या दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य क्षेत्र भी अत्यधिक वर्षा दर्ज करते हैं
    • विश्व स्तर पर मानक संदर्भों में मौसिनराम को सबसे आर्द्र स्थान के रूप में उद्धृत किया जाता है.​
    • यह तथ्य समय-समय पर मौसम विज्ञान के अपडेटों पर निर्भर कर सकता है
    • क्योंकि औसत वर्षा के मापन और स्थानों के क्रम में थोड़ा उतार-चढ़ाव हो सकता है.​
  • आगे पढ़ने के सुझाव
    • मौसिनराम के बारे में विश्व मौसम विज्ञान से जुड़ी आधिकारिक रिपोर्टें और मेघालय राज्य सरकार के जलवायु-से संबंधित पन्ने देखें ताकि नवीनतम डेटा और क्षेत्रीय प्रवृत्ति समझ में आ सके.​
    • आर्द्रता के वैश्विक रेटिंग्स के लिए UNESCO/विश्व मौसम संगठन जैसे संस्थानों के पुनर्मूल्यांकन और स्वीकृत आंकड़े भी उपयोगी होते हैं.​

28. निम्नलिखित में से किस भारतीय राज्य में उत्तर-पूर्वी मानसून के कारण अक्टूबर और नवंबर के दौरान वर्षा होती है? [CGL (T-I) 13 दिसंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) तमिलनाडु
Solution:
  • तमिलनाडु राज्य में उत्तर-पूर्वी मानसून के कारण अक्टूबर और नवंबर के दौरान वर्षा होती है।
  • उत्तर-पूर्वी मानसून से तमिलनाडु की कुल वर्षा का लगभग 50-60 प्रतिशत प्राप्त होता है।
  • संक्षिप्त उत्तर: उत्तर-पूर्वी मानसून के कारण अक्टूबर और नवंबर के महीनों में बारिश ठीक उसी उत्तरी-पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में होती है
  • जिनमें तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल क्षेत्र शामिल हैं; इन क्षेत्रों में यह मानसून अवधि के दौरान वर्षा का योगदान देता है.​
  • उत्तर-वर्षा के कारण और क्षेत्र
    • अवधारणा: भारत में मानसून दो प्रमुख शाखाओं से संचालित होता है
    • दक्षिण-पश्चिम मानसून और उत्तर-पूर्वी मानसून। उत्तर-पूर्वी मानसून खासकर अक्टूबर से दिसंबर के बीच दक्षिणी भारत के कुछ भागों में बारिश लेकर आता है.​
    • प्रमुख क्षेत्र: तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल क्षेत्र (पुडुचेरी प्रशासनिक निकाय क्षेत्र के साथ) में उत्तर-पूर्वी मानसून के कारण वर्षा होती है।
    • यह क्षेत्र दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी भारत में दीर्घकालीन मानसून वर्षा पैटर्न से अलग एक अलग मौसमी रिक्ति में बारिश प्राप्त करता है.​
    • मौसम पैटर्न: दक्षिण-पश्चिम मानसून के समाप्त होने के बाद उत्तर-पूर्वी मानसून सक्रिय होता है
    • जिससे अक्टूबर-नवंबर के दौरान वहाँ वर्षा में वृद्धि देखी जाती है; तमिलनाडु में यह विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है.​​
  • वर्षा का महत्व
    • कृषि और जल-संरक्षण: अक्टूबर-नवंबर में उत्तर-पूर्वी मानसून से वर्षा होने से क्षेत्र की कृषि गतिविधियाँ और जल-स्तर संतुलित रहते हैं
    • खासकर सूखे पक्षों में वर्षा का एक मौसमी स्रोत बनता है.​
    • आयाम और परिवर्तन: यह वर्षा सामान्यतः दक्षिणी भारत के कुछ प्रभागों में साल-दर-साल थोड़ा भिन्न हो सकती है
    • मुख्यतः तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल क्षेत्र इसे प्रमुख स्रोत मानते हैं.​
  • संदिग्ध या वैकल्पिक दावे
    • भारत के अन्य हिस्सों में भी उत्तर-पूर्वी मानसून के प्रभाव से बारिश होती है
    • अक्टूबर-नवंबर के बीच सबसे प्रबल और निरंतर बारिश वाले क्षेत्र वे ही तीन-区域 हैं जो ऊपर बताए गए हैं.​
    • मौसम-पूर्वानुमान और क्षेत्रीय जल-विज्ञान क्रमवार परिवर्तन दिखा सकता है
    • अतः नवीनतम रिपोर्टों के लिए स्थानीय मौसम विभाग के अद्यतन देखें.​

29. भारत में 'महावट' (Mahawat) क्या है? [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) सर्दी के मौसम के दौरान चक्रवाती वर्षा
Solution:
  • पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में चक्रवाती विक्षोभों के कारण सर्दियों में वर्षा, जिसे स्थानीय तौर पर 'महावट' कहा जाता है
  • कुल मात्रा कम होती है, लेकिन ये रबी की फसल के लिए महत्वपूर्ण होती है।
  • मौसमीय अर्थ
    • महावट वह वर्षा है जो वर्षा ऋतु के बाद आने वाले ठंडे महीनों में होती है
    • माघ-फाल्गुन के आसपास का समय और उससे जुड़ी जाड़े की झड़ी को दर्शाती है।
    • यह शब्द खासकर उत्तर-पश्चिम भारत और मराठी/Hindi भाषिक क्षेत्रों में प्रचलित है.​
    • हिंदी शब्दभेद के अनुसार महावट ठंडे मौसम में होने वाली वर्षा को सूचित करता है
    • इसका उपयोग साल के ऐसे समय का वर्णन करने के लिए होता है जब मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और नम रहता है.​
  • वैचारिक और ऐतिहासिक संदर्भ
    • महावत/महावट जैसी ध्वनियों के उत्तर-भारतीय क्षेत्रीय प्रयोगों में ऋतु-वर्षा के भीतर होने वाले मौसमी परिवर्तन महत्वपूर्ण मानी जाते हैं
    • कुछ डिक्शनरी-उद्धरण इन्हीं अर्थों को स्पष्ट करते हैं.​
    • यह शब्द कभी-कभी लोक-भाषा और साहित्यिक पाठों में मौसम-विशिष्ट उपमा या भावनात्मक प्रतीक के तौर पर भी दिख सकता है
    • पर सरकारी/प्रमाणिक स्रोतों में मुख्य अर्थ मौसम से जुड़ा होता है.​
  • विविधता और भ्रम
    • कुछ प्रयुक्तियाँ महावट को एक स्थानीय समुदाय-चिह्न या जातीय-समूह के नाम से भी जोड़ती हैं
    • सामान्य ज्ञान में यह अधिकतर “शीतकालीन वर्षा” के अर्थ में ही आता है
    • ऐतिहासिक/सांस्कृतिक संदर्भ में क्षेत्रीय विविधताएं देखी जा सकती हैं.​
  • शब्दावली का उपयोग
    • महावट शब्द के हिंदी-उच्चारण/स्त्रीलिंग संस्करण भी मिलते हैं
    • इसे संदर्भ के अनुसार वाक्य में ढाला जाता है—जैसे “महावट पड़ती है” या “महावट की वर्षा” आदि.​
  • अगर चाहें, कुछ विशिष्ट संदर्भ भी तलाश कर दूंजैसे:
    • महावट से जुड़े क्षेत्रीय भिन्नांत (उदा. महाराष्ट्र/पश्चिम उत्तर भारत)
    • महावत/महावट के साहित्यिक प्रयोग और कविताओं में इसका प्रतीकात्मक प्रयोग
    • आधुनिक मौसम-विज्ञान में शीतकालीन वर्षा के समकालीन अर्थ और पूर्वानुमान
    • महावट के हिंदी अर्थ और वर्षा-समय के वर्णन के लिए शब्दकोश/हिंदी डिक्शनरी स्रोत.​
    • महावट विषय पर क्षेत्रीय संदर्भ और मौसम-उल्लेख के लिए मराठी/हिंदी पन्ने.​

30. निम्नलिखित में से किस स्थान पर मानसून के मौसम के दौरान सबसे कम वर्षा होती है? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) लेह
Solution:
  • भारत में सबसे कम वर्षा प्राप्त करने वाला स्थान लेह है। यहां पर औसत वार्षिक वर्षा लगभग 50 मिमी. (वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार 63.8 मिमी.) है।
  • कम वर्षा के प्रमुख क्षेत्र
    • पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब के कुछ हिस्से, हरियाणा आदि उत्तरी मैदान के आंतरिक भागों में सामान्यतः औसतन 50–100 सेमी वर्षा या उससे कम हो सकती है [उच्च-स्थायित्व स्रोतों के अनुसार]।
    • यह क्षेत्र मानसून के आर्द्र-पानी स्रोत से दूर होने, और पश्चिमी तट से दूरी के कारण समय-समय पर सूखा की स्थितियों से प्रभावित रहता है.​
    • दक्कन पठार के आंतरिक हिस्से और गुजरात का कुछ भाग भी कम वर्षा दर्ज करते हैं, क्योंकि यहाँ मेघों की आर्द्रता कम पहुंचती है
    • पूर्वी घाट की बारिश का प्रभाव सीमित रहता है.​
    • लद्दाख-लद्दाख के मरुस्थलीय और शुष्क ऊँचे क्षेत्र भी मानसून के दौरान निम्न या न के बराबर वर्षा प्राप्त करते हैं
    • क्योंकि ऊँचाई के कारण गर्म हवा की मात्रा और नमी कम रहती है
    • मानसून की बारिश के लिए उपयुक्त वायुरेखा नहीं बनती है.​
  • मानसून की बारिश पर प्रभाव डालने वाले मुख्य कारक
    • भू-आकृति और ऊँचाई: पठार, पलों जैसे दक्कन पठार और पश्चिमी घाट की स्थिति बारिश के वितरण को सीधे प्रभावित करती है
    • ऊँची चोटियों के पीछे पड़ी बारिश कम हो सकती है और “वृष्टि छाया” क्षेत्र बन जाते हैं.​
    • मानसून की शाखाओं का वितरण: अरब सागर शाखा और बंगाल की खाड़ी शाखा की पहुँच क्षेत्रीय रूप से अलग-अलग क्षेत्रों में वर्षा की मात्रा निर्धारित करती है
    • आंतरिक क्षेत्रों में शाखाओं का कमजोर होना वर्षा को घटाता है.​
    • पर्वतीय छाया क्षेत्र: पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढलान पर भारी वर्षा, जबकि पूर्वी ढलान और आंतरिक क्षेत्र में कमी संभव है
    • अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में भी छाया प्रभाव रहता है.​
  • जलवायु-मानसून की विविधता का तात्पर्य
    • दक्षिण-पश्चिम मानसून के साथ हैवी वर्षा किन क्षेत्रों में होती है, यह क्षेत्र-विशिष्ट है
    • केरल और पश्चिमी घाट के कुछ हिस्सों में अधिक वर्षा जबकि पूर्वी मध्य भारत में कमी रहती है
    • उत्तर पश्चिमी मैदानों में भी कम वर्षा पाई जाती है.​
    • कुछ वर्षों में मानसून मजबूत हो तो उत्तर-पूर्व और बिहार-जमिस्तान जैसे क्षेत्र अधिक वर्षा पाते हैं
    • पर सामान्य रूप से उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी तटों के आसपास व्यापक वर्षा होती है; आंतरिक पश्चिमी भागों में कमी रहती है.​
  • तटवर्ती और आंतरिक अंतर
    • तटीय क्षेत्र, विशेषकर केरल, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल के पास, मानसून के दौरान भारी वर्षा प्राप्त करते हैं
    • वहीं आंतरिक दक्कन के कुछ हिस्सों और पंजाब-हरियाणा के दक्षिणी भागों में कमी देखने को मिलती है.​
    • राजस्थान, गुजरात के कुछ भाग और दक्कन के पश्चिमी हिस्से में कम वर्षा की सामान्य प्रवृत्ति रहती है
    • यह क्षेत्र मानसून की बारिश से कम प्रभावित रहने के कारण सूखा-जैसी स्थितियाँ भी देख सकते हैं.​
  • निष्कर्ष
    • मानसून के दौरान “सबसे कम वर्षा” वाला क्षेत्र अक्सर उत्तर-पश्चिमी और आंतरिक पश्चिमी भारत, दक्कन पठार के आंतरिक भाग, और पंजाब-हरियाणा के दक्षिणी भागों में पाया जाता है
    • यह क्षेत्र भू-आकृति, बारिश-छाया क्षेत्र, और मानसून शाखाओं के वितरण के कारण कम वर्षा का सामना करता है.​
  • संदर्भ
    • पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब-हरियाणा के दक्षिणी भागों में कम वर्षा होने के तथ्य: सार्वजनिक GK लेखन स्रोतों में वर्णित है.​
    • दक्कन पठार और पश्चिमी घाट की वर्षा वितरण पर जानकारी: Jagran Josh और TestBook से समेकित रूप से प्रयुक्त है.​
    • मानसून शाखाओं के प्रभाव, वायुदाब, और छाया क्षेत्र की व्याख्या: TestBook के हिंदी संदर्भ और IMD/स्थानीय विशेषज्ञ स्रोतों में स्पष्ट है.​