जलवायु (भारत का भूगोल)

Total Questions: 45

31. निम्नलिखित में से कौन-सा वह कारक नहीं है, जिससे भारत में वर्षा होती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) प्रतिचक्रवात
Solution:
  • प्रतिचक्रवात वह कारक नहीं है, जिससे भारत में वर्षा होती है। अतः सही उत्तर विकल्प (c) होगा। पार्वतिकी चक्रवात तथा संवहनीय कारक वर्षा में सहायक होते हैं।
  • जब धरातल पर उठती गर्म एवं आर्द्र वायु की एडियाबेटिक ताप पतन दर आस- पास की वायु के ताप पतन दर से कम हो
  • तो वायु अस्थिर होकर निरंतर ऊपर उठकर ठंडी हो जाती है तथा ओसांक के बाद संघनन प्रारंभ हो जाता है।
  • जब संघनन हिमांक के ऊपर संपन्न होता है, तो जल सीकरों का तथा हिमांक से नीचे हिम सीकरों का निर्माण होता है।
  • इनका आकार धीरे-धीरे बढ़ता जाता है तथा अधिक मात्रा में हो जाने पर इनके समूह बादल की रचना करते हैं।
  • संक्षिप्त उत्तर
    • भारतीय वर्षा के प्रमुख कारणों में ऊष्णकटिबंधीय मानसून प्रणाली, पर्वतीय प्रभाव, वायुदाबीय प्रणालियाँ और अक्षांश/ऊँचाई आदि प्रमुख कारक होते हैं।
    • इनमें से “देश का सतही क्षेत्रफल” सीधे तौर पर वर्षा के वितरण या मात्रा को निर्धारित नहीं करता।
    • अतः यह वह कारक है जो भारत में वर्षा को निर्धारित करने वाले कारकों में से नहीं है।
  • विस्तृत विवरण
    • मानसून की घटनाएँ: दक्षिण-पश्चिम मानसून जून–सितंबर में भारी वर्षा लाती है; उत्तर-पूर्व मानसून अक्टूबर–दिसंबर में कुछ क्षेत्रीय वर्षा दे सकता है।
    • यह मानसून प्रणालियाँ जलवायु चक्र के प्रमुख चालक होती हैं। यह तथ्य विश्वसनीय श्रोतों के अनुसार मानसून के सालाना वितरण के आधार को दर्शाता है.​
    • पर्वत श्रृंखलाओं का प्रभाव: हिमालयन क्षेत्र और दक्षिणी-पूर्वी उच्च पठार/पर्वतीय भू-आकृति हवाओं के मार्ग और वर्षा के वर्षा-घनत्व को प्रभावित करते हैं।
    • ऊँचाई के साथ तापमान गिरना और हवाओं का मार्ग बदलना वर्षा की मात्रा पर प्रभाव डालता है.​
    • वायुदाब और पश्चिमी विक्षोभ: उत्तरी भारत में मानसून के बाहर शीतकालीन महीनों में पश्चिमी विक्षोभ और निम्न-तबीयत दबाव प्रणालियाँ वर्षा ला सकती हैं
    • खासकर उत्तर-पश्चिमी भारत में। इसका मुख्य भूमिका तापमान, आर्द्रता और बादलों के निर्माण में होती है.​
    • अक्षांश और तापमान वितरण: भारत की उष्णकटिबंधीय भू-स्थितियाँ वर्षा के वितरण पर व्यापक असर डालती हैं
    • तापमान और आर्द्रता के बीच संतृप्ति संभव बनाती हैं जिससे वर्षा के पैटर्न बनते हैं.​
    • ऊँचाई/स्थलाकृति के कारण मौसमी विविधता: पर्वत-मैदान की विविधता से क्षेत्रीय वर्षा में भिन्नताएं आती हैं
    • कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा होती है तो कुछ क्षेत्रों में सूखा रहता है।
    • यह भू-आकृति मानसून के साथ मिलकर वर्षा के वितरण को निर्धारित करती है.​
  • कौन-सा कारक नहीं है (क्यों यह गलत विकल्प है)
    • “देश का सतही क्षेत्रफल” या सतह क्षेत्र: यह तर्कक रूप से वर्षा के कारणों या वितरण का निर्धारण नहीं करता।
    • सूचित स्रोतों के अनुसार भारित कारक, जलवायु एवं मानसून से जुड़े तत्व ही वर्षा के पैटर्न तय करते हैं
    • इस कारण यह विकल्प सामान्यतः इस प्रश्न में गलत विकल्प रहता है.​
  • नोट्स और संदर्भ
    • भारत में वर्षा के वितरण और मानसून के प्रकारों के बारे में आधिकारिक शिक्षण/ज्ञान-विज्ञान स्रोतों के अनुसार:
    • दक्षिण-पश्चिम मानसून का बड़ा योगदान है, जो कुल वर्षा का एक प्रमुख भाग देता है.​
    • उत्तर-पूर्व मानसून और पश्चिमी विक्षोभ/चक्रवाती वर्षा भी महत्त्वपूर्ण हैं और क्षेत्रीय विविधता बनाते हैं.​
    • पर्वतीय भू-आकृति और अक्षांश/ऊँचाई का प्रभाव वर्षा के पैटर्न पर निर्णायक है, न कि सतह क्षेत्र का आकार.​एकाधिक स्रोतों में मानसून-वर्षा के प्रकारों और क्षेत्रीय वितरण पर चर्चा मिलती है, जो इस प्रश्न के उत्तर को समर्थित करते हैं.​

32. मूसलाधार बारिश किसी भी मात्रा में बारिश होती है, जिसे विशेष रूप से भारी माना जाता है। तदनुसार निम्नलिखित में से किस भारतीय क्षेत्र में अक्टूबर और नवंबर के दौरान इस प्रकार की वर्षा होती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) दक्षिण-पूर्व कर्नाटक
Solution:
  • दक्षिण-पूर्व कर्नाटक में अक्टूबर और नवंबर माह के दौरान मूसलाधार वर्षा होती है।
  • भारत में अक्टूबर-नवंबर में लौटते मानसून (उत्तर-पूर्वी मानसून) से 65-75 सेमी. तक वर्षा होती है
  • जो आंतरिक भागों की तरफ घटती जाती है।
  • संकेतित प्रश्न में अक्टूबर–नवंबर के दौरान मूसलाधार बारिश कहाँ होती है
  • इसका सही उत्तर दक्षिण–पूर्वी तटीय क्षेत्र (खासकर दक्षिण-पूर्व कर्नाटक) है
  • जहाँ लौटते मानसून के मौसमी प्रभाव और ऊन क्षेत्रों के कारण अक्टूबर–नवंबर में अत्यधिक वर्षा देखी जाती है.​
  • मूसलाधार बारिश की परिभाषा: ऐसी वर्षा जिसे विशेष रूप से भारी माना जाता हो और सामान्य से अधिक पानी गिरता हो.​
  • भारत के क्षेत्रीय पैटर्न: दक्षिण-पूर्व कर्नाटक में मानसून के पुनः सक्रिय होने या लौटते समय अत्यंत भारी वर्षा संभव होती है
  • यह एक प्रमुख क्षेत्रीय केंद्र है जहां अक्टूबर–नवंबर में ऐसी बारिश रिकॉर्ड की जाती है.​
  • अन्य क्षेत्रीय संदर्भ: अक्टूबर–नवंबर के दौरान पश्चिमी विक्षोभ, दक्षिण-पश्चिम मानसून के परिहार के बावजूद कुछ अन्य क्षेत्रों में भी अत्यधिक वर्षा की घटनाएं समाचारों में दर्ज होती रहती हैं
  • परंतु “मूसलाधार बारिश” के सापेक्षिक केंद्र विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व कर्नाटक को संकेतित किया गया है.​
  • सही क्षेत्र: दक्षिण-पूर्व कर्नाटक (करणाटक के कुछ हिस्से) अक्टूबर–नवंबर के दौरान मूसलाधार वर्षा की घटनाओं के लिए जाना जाता है.​
  • यदि चाहें, इस विषय पर मैं आपको एक उपयोगी संदर्भ सूची, क्षेत्रीय वर्षा पैटर्न का क्रमबद्ध सार
  • अक्टूबर–नवंबर के दौरान मूसलाधार वर्षा से जुड़ी सामान्य मौसम-कारक (जैसे मानसून का प्रवाह, पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवाती तंत्र) का विस्तृत परिचय दे सकता हूँ।
  • साथ ही आप चाहें तो यह जानकारी एक संक्षिप्त सवाल-उत्तर फॉर्मैट में भी प्रस्तुत कर सकता हूं।

33. निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में वर्ष में सर्वाधिक वर्षा होती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) शिलांग
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में, शिलांग क्षेत्र में वर्ष में सर्वाधिक वर्षा होती है।
  • मॉसिनराम भारत के मेघालय राज्य के पूर्व खासी हिल्स जिले में स्थित है।
  • यह क्षेत्र मेघालय की राजधानी शिलांग से लगभग 55 किमी. की दूरी पर स्थित है।
  • यह भारत का सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान है। अतः विकल्प (d) सही उत्तर होगा।
  • मुख्य क्षेत्रीय तथ्य
    • मौसिनराम में औसत वार्षिक वर्षा लगभग 11,000 से 12,000 मिलीमीटर के आसपास दर्ज होती है
    • जिसे विश्व रिकॉर्ड्स में भी ऊँचा माना गया है
    • यह क्षेत्र बंगाल की खाड़ी से आने वाले मानसूनी तूफानों और मौसिनराम के ऊँचे पहाड़ी मॉडल के कारण अत्यंत भारी वर्षा प्राप्त करता है.​
    • चेरापूंजी (Meghalaya) भी वर्षा के बेहद उच्च स्तर के लिए जाना जाता है
    • यहाँ वर्षा मात्रा हर साल लगभग 11,000 मिमी के आसपास मापी जाती है
    • कई वर्षों में यह मौसिनराम के बराबर या उससे भी आगे जा सकती है.​
  • वैधानिक/शैक्षणिक संदर्भ
    • दक्षिण पश्चिम मानसून दक्षिण पूर्व एशिया महाद्वीप में वर्षा का मुख्य स्रोत है
    • भारत में कुल वर्षा का बड़ा हिस्सा इसी मानसून से आता है
    • खासकर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जहां सबसे अधिक वर्षा दर्ज होती है.​
    • भारत के कुछ पूर्वोत्तर राज्यों, खासकर असम, मेघालय और मिजोरम, ऊँचे पर्वतीय ढांचे के कारण अत्यधिक वर्षा का अनुभव करते हैं
    • मौसिनराम इनमें से सबसे अधिक प्रसिद्ध स्थान में से एक है.​
  • मुख्य बिंदु तुलना
    • स्थान: मौसिनराम, मेघालय बनाम चेरापूंजी, मेघालय
    • वार्षिक वर्षा: दोनों लगभग 11,000–12,000 मिमी के आसपास (वर्षों के अनुसार परिवर्तन)​
    • वैश्विक स्थिति: विश्व के सबसे अधिक वर्षा वाले स्थानों में गिना जाता है; चेरापूंजी भी तेजी से उच्च वर्षा रिकॉर्ड करता है​
    • कुछ स्रोतों में चेरापूंजी को विश्व के सबसे अधिक वर्षा वाले स्थान के रूप में भी उद्धरित किया गया है
    • जबकि मौसिनराम को लगातार सबसे अधिक औसत वर्षा के लिए मान्यता प्राप्त है.​
    • भारतीय मानसून प्रणालियाँ बार-बार वर्षा के वितरण में भारी वैरिएशन दिखाती हैं
    • लेकिन दक्षिण पश्चिम मानसून क्षेत्रीय रूप से वर्षा का सर्वाधिक योगदान देता है.​

34. शीत ऋतु के दौरान भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों में वर्षा होने में कौन-सा कारक योगदान देता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) पश्चिमी विक्षोभ
Solution:
  • पश्चिमी विक्षोभ भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों में सर्दियों (शीत ऋतु) के दौरान वर्षा के लिए जिम्मेदार है।
  • यह वर्षा, इन क्षेत्रों में बोई जाने वाली रबी की फसलों की वृद्धि में सहायक होती है।
  • पश्चिमी विक्षोभ क्या है
    •  जो मध्य अक्षांशों में विकसित होते हैं। ये शीतकाल में भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों तक पहुँचकर वर्षा का कारण बनते हैं
    • [उच्च-स्तर के शैक्षणिक स्रोतों के अनुसार]। इसे एक प्रमुख वर्षा-कारक के रूप में समझना चाहिए ।​
  • मौसम-वैज्ञानिक प्रक्रिया
    • ठंडे उत्तर-पश्चिमी हवाओं के साथ नमी भरे पश्चिमी विक्षोभ का उभरना, फिर हिमालय पर टकराकर उठे हुए تغ़یر के कारण आर्द्रता फंसती है।
    • इसके परिणामस्वरूप पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर आदि मैदानी क्षेत्रों में धुँधली रातें, बादल और कभी-कभी हल्की से मध्यम वर्षा होती है ।​
    • कुछ वर्षों में यह वर्षा हिमपात के रूप में भी देखी जाती है
    • विशेषकर ऊँचे इलाकों में। यह घटना शीतकाल के समय जनवरी-february के आस-पास अधिक स्पष्ट रहती है ।​
  • क्षेत्रीय विस्तार
    • उत्तर-पश्चिमी भारत के पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के 일부 भागों और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में शीतकाल में पश्चिमी विक्षोभ का सीधा प्रभाव दिखता है ।​
    • पंजाब-हरियाणा-राजस्थान की समतल भू-आकृति में पश्चिमी विक्षोभ से आए बादलों की उपलब्धी बारिश हेतु प्रेरक बनती है
    • जबकि हिमालय के कारण हिमपात भी संभव होता है ।​
  • अन्य सहायक तथ्यों
    • मॉडरेट-निगमित शीतकालीन वर्षा मानसून के विरुद्ध एक अस्थायी और स्थानीय पैटर्न है
    • जो मुख्यतः पश्चिमी विक्षोभों की आवृत्ति और ऊंचाई/आर्द्रता पर निर्भर रहता है
    • शीतकालीन वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण नहीं होती; यह मानसून के बाहर की घटनाओं से नियंत्रित होती है
    • जिनमें पश्चिमी विक्षोभ एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं ।​
    • मौसमीय संस्करणों के अनुसार वर्षा का वितरण वर्षों में भिन्न होता है
    • पश्चिमी विक्षोभ ही शीतकाल में उत्तर-पश्चिम भारत के प्रमुख वर्षा-कारक হিসেবে मान्यता प्राप्त है ।​

35. निम्नलिखित में से किस ऋतु में पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तरी राज्यों में वर्षा होती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) शीत ऋतु
Solution:
  • पश्चिमी विक्षोभ भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों में सर्दियों (शीत ऋतु) के दौरान वर्षा के लिए जिम्मेदार है।
  • यह वर्षा, इन क्षेत्रों में बोई जाने वाली रबी की फसलों की वृद्धि में सहायक होती है।
  • उत्पत्ति और मार्ग
    • WD भूमध्यसागर के निकट विकसित होता है और यूरोप, पश्चिमी एशिया के क्षेत्र से होता हुआ उत्तर भारत की ओर बढ़ता है।
    • यह ठंडे हवा के साथ मौसमी चक्रवाती गतिविधि बनाकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर आदि क्षेत्रों में वर्षा या हिमपात करवाता है।​
  • मौसमीय प्रभाव
    • सर्दियों में WD आर्द्र हवा को लाते हैं, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा या हिमपात हो सकता है
    • मैदानों में आर्द्रता बढ़कर बादलों की घनीचता बनती है। इससे तापमान की रात में गिरावट और दिन में आंशिक ऊष्मा बनती है।​
  • कृषि और जलवायु पर प्रभाव
    • WD से पहाड़ी राज्यों में सेब जैसी ऋतु फल की फसल और मैदानी भागों की रबी फसलें लाभान्वित होती हैं
    • क्योंकि वर्षा की उपलब्धता और मेघाच्छादन खेतों के लिए आवश्यक नमी प्रदान करती है।​
  • क्या WD शीतकाल में केवल उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करता है?
    • WD का प्रभाव मुख्यतः शीतकाल में उत्तर-पश्चिम भारत पर केंद्रित रहता है
    • जबकि वर्षा का अधिकांश भाग उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में हिमपात के रूप में दर्ज होता है।
    • गर्मियों के दौरान भी कुछ स्थितियों में उत्तर भारत के मानसूनपूर्व समय में योगदान देता है
    • परन्तु मुख्य वर्षा का स्रोत शीतकाल में WD ही माना जाता है।​
  • संभावित सामान्य प्रश्न
  • WD से सर्दियों में कौन सा क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित होता है?
    • जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब-हरियाणा क्षेत्र WD से बारम्बार प्रभावित होते हैं
    • हिमपात और बादल-छाये मौसम के कारण ये क्षेत्र अधिक वर्षा या हिमपात अनुभव करते हैं।​
  • WD के कारण कृषि पर क्या प्रभाव पड़ते हैं?
    • रबी फसलों के लिए उपयुक्त नमी मिलती है
    • aपहाड़ी क्षेत्रों में सेब व आदि के लिए लाभकारी वर्षा होती है
    • वहीं कभी-कभी अत्यधिक वर्षा भूस्खलन या फसल क्षति का कारण बन सकती है।​
  • उपयोगी नोट
    • पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव क्षेत्र, तीव्रता और अवधि के आधार पर भिन्न-भिन्न हो सकता है
    • मौसम पूर्वानुमान और कृषि योजनाओं के लिए स्थानीय मौसम विभाग के वर्तमान अलर्ट्स देखना उचित रहता है।​

36. निम्नलिखित में से कौन-सा गलत मिलान किया गया है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) पर्वतीय जलवायु - उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड
Solution:
  • पर्वतीय जलवायु हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और उत्तरी पश्चिमी हिमालय (लद्दाख और कश्मीर को छोड़कर) में पाए जाते हैं।
  • पर्वतीय भागों में ऊंचाई के साथ तापमान तथा वायुदाब में सामान्यतः कमी होती जाती है और सूर्यातप एवं विकिरण की गहनता में वृद्धि होती है।
  • सवाल का उद्देश्य
    • निम्नलिखित में से कौन-सा गलत मिलान किया गया है? यानी दिए गए दावों/जोड़ों में से ऐसा मिलान जो सही नहीं है। [प्रश्न स्पष्टता]
    • WD (पश्चिमी विक्षोभ) से जुड़ी सामान्य समझ
    • WD भूमध्यसागर-आधारित मौसमी प्रणालियाँ हैं जो उत्तर-पश्चिम भारत में शीतकालीन वर्षा लाती हैं।
    • यह तथ्य कई स्रोतों में बराबर बताया गया है, जैसे कि Drishti IAS और Testbook के हिंदी पन्ने में WD के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में सर्दियों की वर्षा होना दर्शाया गया है [उद्धरण][उद्धरण].
  • संभव गलत मिलान के प्रकार
    • क्षेत्रीय प्राथमिकता: WD s winter rainfall को पंजाब, हरियाणा, पंजाब-हरियाणा क्षेत्र आदि तक सीमित बताता है
    • यदि विकल्प में Kashmir को WD के कारण वर्षा का मुख्य क्षेत्र बताया गया है और अन्य क्षेत्र नहीं, तो यह गलत मिलान हो सकता है [उद्धरण].​
    • समय-सीमा: WD मुख्यतः सर्दियों में वर्षा कराता है; अगर विकल्प में WD के कारण गर्मियों/मानसून के समय वर्षा का उल्लेख है, तो वह गलत मिलान होगा [उद्धरण].​
    • मात्रा/तरलता: WD से वर्षा के आकलन में क्षेत्र-विशिष्ट मात्रा का असंगत दावा (जैसे WD द्वारा भारत में कुल वार्षिक वर्षा के 50% होते हैं) गलत होगा
    • बड़े समरी स्रोतों में WD का सामान्य योगदान 5–10% के आसपास बताया जा सकता है, इसलिए ऐसे दावे गलत मिलान होंगे.​
  • सामान्य गलत मिलान के संकेत
    • “पश्चिमी विक्षोभ से वर्षा केवल जम्मू-कश्मीर में ही होती है” या “WD पूरी उत्तर-पश्चिम भारत को पूरी सर्दियों में वर्षा देता है” जैसे व्यापक और असत्य दावे।
    • “WD केवल गर्मी के मौसम में प्रभाव डालता है” जैसे मौसमी पलटाव के बिना स्पष्ट गलतियाँ।
    • “WD पानी सीधे भूमध्य सागर से भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुंचता है और हर बार भारी वर्षा लाता है” जैसी अतितीव्र या सामान्यीकृत धारणा।
  • सुझावगलत मिलान की जाँच कैसे करें
    • क्षेत्र: WD के प्रमुख प्रभावित क्षेत्र पहाड़ी और मैदानी उत्तर-पश्चिम क्षेत्र (पंजाब-हरियाणा-राजस्थान के कुछ भाग, जम्मू-कश्मीर, हिमालयी क्षेत्र) होते हैं
    • अगर विकल्प किसी एक क्षेत्र को WD के कारण वर्षा के लिए अव्यवस्थित तौर पर अनन्य बताता है, तो उसे सत्यापित करें। संदर्भ: Drishti IAS, Testbook स्रोत.​
    • समय: WD के कारण वर्षा ठंडी ऋतु में होती है; गर्मी/मानसून के समय इसेapat से अलग करें। संदर्भ: Drishti IAS, Testbook.​
    • मात्रा: WD के योगदान का सामान्य सीमा 5–10% के आसपास बताई जाती है; बहुत उच्च आंकड़े गलत होंगे.​

37. भारतीय मानसून की 'बंगाल की खाड़ी की शाखा' और 'अरब सागर शाखा' का विलय कहां पर होता है? [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) गंगा के मैदान के उत्तर-पश्चिमी भाग
Solution:
  • भारतीय मानूसन की 'बंगाल की खाड़ी की शाखा' और 'अरब सागर शाखा' का विलय गंगा के मैदान के उत्तर-पश्चिमी भाग पर होता है।
  • कन्याकुमारी समुद्र तट बंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर और अरब सागर का संगम बिंदु है। इस स्थान को केप कोमोरिन के नाम से भी जाना जाता है।
  • मानसून शाखाओं का परिचय
    • अरब सागर शाखा: दक्षिण-पश्चिमी मानसून का पश्चिमी तट पर प्रवेश कर वर्षा लाती है
    • यह बंगाल की खाड़ी शाखा की तुलना में अक्सर अधिक शक्तिशाली मानी जाती है और भारतीय पश्चिमी तट के साथ जुड़ी होती है।
    • बंगाल की खाड़ी शाखा: पूर्वी तट पर प्रभाव डालती है और मानसून के दौरान पूर्वोत्तर भारत व बांग्लादेश क्षेत्र में भी वर्षा साधारणीकरण करती है।
  • विलय कहाँ होता है
    • दोनों शाखाओं का विलय गंगा के मैदान के उत्तर-पश्चिम भाग में होता है, जिसे सिन्धु-गंगा का मैदान या उत्तरी मैदान कहा जाता है।
    • यहाँ इन शाखाओं के जल-विकास, मौसमी दबावों और गंगा-यमुना सभ्यता के क्षेत्रों में भारी वर्षा का केंद्र बनता है।​
    • यह स्थान हिमालय के पूर्वी भाग से भी प्रभावी रूप से जुड़ा रहता है
    • क्योंकि गंगा-यमुना नदी प्रणाली के जलोढ़ निक्षेप और मैदानों में मानसून के पानी की प्रवाह-गतिशीलता इस विलय के आसपास संचालित होती है।​
  • कारण और प्रभाव
    • बंगाल की खाड़ी शाखा और अरब सागर शाखा मिलकर उत्तर-पश्चिमी मैदानों में भारी वर्षा प्रदान करती हैं
    • जो खेती-बाड़ी और कृषिगत जलवायु पर बड़े प्रभाव डालती है।​
    • दक्षिण पश्चिम मॉनसून के आधुनिक मॉडल के अनुसार, इन दोनों शाखाओं की संयुक्त भूमिका मौसम-चक्र के एक प्रमुख घटक के रूप में मानी जाती है।​
  • अक्सर पूछे जाने वाले बिंदु (संक्षेप में)
    • विलय का सही क्षेत्र: गंगा के मैदान का उत्तर-पश्चिम हिस्सा (उत्तरी मैदान).​
    • दायरे का भूगोल: पश्चिमी तट सेन-पूर्वी तट तक फैला, लेकिन विलय स्थान उत्तर-पश्चिमी गंगा मैदान में है.​
    • दक्कन Plateau/कोरमंडल तट जैसी जगहें सामान्यतः इन दो शाखाओं के विलय स्थान नहीं मानी जातीं; वहां दक्षिण पश्चिम मानसून और कोरोमंडल क्षेत्र की मौसमी संरचनाएं अलग हैं.​
    • बंगाल की खाड़ी शाखा और अरब सागर शाखा का विलय क्षेत्र और गंगा के मैदान की भूमिका पर विवरण.​
    • इन शाखाओं के मानसून-प्रवाह और क्षेत्रीय प्रभावों की व्याख्या.​

38. काल बैसाखी (Norwesters) ....... में शाम के समय आने वाला एक भयानक तूफान है। [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) बंगाल और असम
Solution:
  • काल बैसाखी बंगाल और असम में शाम के समय आने वाला एक भयानक तूफान है।
  • यह एक प्रकार की मानसून पूर्व तड़ित झंझा है।
  • उत्पत्ति और समय
    • यह अप्रैल से जून (बैसाख महीना) तक, विशेषकर मार्च से मानसून तक अधिक सक्रिय रहता है।
    • उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली नम हवा और ऊंचे तापमान के कारण यह तूफान बनता है।​
  • विशेषताएं
    • हवा की गति 55-80 किमी/घंटा सामान्य होती है, लेकिन कभी 140 किमी/घंटा से अधिक पहुंच जाती है, जो तूफानी शक्ति प्रदान करती है।
    • काले चाप जैसे बादल इसका पहला संकेत होते हैं, उसके बाद तेज झोंके, मूसलाधार वर्षा, ओलावृष्टि और बिजली-कड़कड़ाहट आती है।
    • शाम या रात में अधिक प्रभावी, कभी बवंडर भी उत्पन्न करता है।​
  • प्रभावित क्षेत्र
    • यह तूफान पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा, बांग्लादेश, छत्तीसगढ़ और पूर्वी भारत के गंगा मैदानों को प्रभावित करता है।
    • असम में 'टी शावर' के नाम से जाना जाता है। उत्तरी बंगाल (जलपाईगुड़ी, कूचबिहार) में रात्रि में अधिक होता है।​
  • लाभ और हानि
  • लाभ:
    • जूट, चावल, चाय, आउस धान और सब्जियों के लिए आवश्यक वर्षा प्रदान करता है।
    • ग्रीष्म की तपिश से राहत देता है।
  • हानि:
    • तेज हवाओं से घर-खेती नष्ट, बिजली गिरने से मौतें (जैसे 1977 में 10 मरे, 1993 में 57 मरे)।
    • ओलावृष्टि से फसल क्षति, बाढ़ और बवंडर।​
  • ऐतिहासिक उदाहरण
    • 1977 में पूर्वी मेदिनीपुर में टॉरनेडो से 10 मौतें। 1993 में मुर्शिदाबाद में 57 की मौत और हजारों बेघर।
    • 1998 में मेदिनीपुर में 26 गांव प्रभावित। बांग्लादेश में भी विनाशकारी।​​

39. कम-से-कम ....... वर्ष की अवधि के दौरान किसी स्थान के मौसम की अवस्थाओं तथा विविधताओं की औसत परिस्थिति वहां की जलवायु कहलाती है। [CGL (T-I) 03 दिसंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 30
Solution:
  • प्रश्नानुसार, कम-से-कम 30 वर्ष की अवधि के दौरान किसी स्थान के मौसम की अवस्थाओं तथा विविधताओं की औसत परिस्थिति वहां की जलवायु कहलाती है।
  • जलवायु किसी क्षेत्र में लंबे समय की दैनिक मौसमी दशाओं का माध्य है
  • जिसे तापमान, वर्षण, वायुदाब, पवनों एवं आर्द्रता द्वारा व्यक्त किया जाता है।
  • यह दीर्घकालिक मौसम पैटर्न का प्रतिनिधित्व करती है, जो तापमान, वर्षा, आर्द्रता और वायुदाब जैसे तत्वों पर आधारित होता है।
  • मौसम क्षणिक होता है, जबकि जलवायु स्थायी विशेषताओं को दर्शाती है।​
  • परिभाषा और मानक अवधि
    • जलवायु को विश्व मौसम संगठन (WMO) के अनुसार कम से कम 30 वर्ष (सामान्यतः 30-40 वर्ष) के मौसम डेटा के औसत से परिभाषित किया जाता है।
    • यह मौसम के प्रमुख तत्वों—तापमान, वर्षा, हवा का दबाव, आर्द्रता और सौर विकिरण—की दीर्घावधि औसतन स्थिति है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि किसी क्षेत्र में 30 वर्षों तक औसत तापमान 25°C और वार्षिक वर्षा 1000 मिमी रहती है, तो यही उसकी जलवायु होगी।​​
  • जलवायु के घटक
    • तापमान: औसत अधिकतम/न्यूनतम और वार्षिक उतार-चढ़ाव।
    • वर्षा: प्रकार (मानसून, शीतकालीन), मात्रा और वितरण।
    • आर्द्रता और वायुदाब: नमी का स्तर और दबाव प्रणालियाँ।
    • पवन: दिशा, गति और मानसून प्रभाव।
    • ये घटक क्षेत्र की जलवायु को उष्णकटिबंधीय, समशीतोष्ण या शीतोष्ण जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत करते हैं।​
  • जलवायु का महत्व
    • जलवायु कृषि, अर्थव्यवस्था और जीवनशैली को प्रभावित करती है
    • जैसे भारत की मानसूनी जलवायु चावल उत्पादन के लिए आवश्यक है।
    • जलवायु परिवर्तन से इसमें बदलाव आ रहे हैं, जो बाढ़ या सूखे बढ़ा सकता है।
    • दीर्घावधि डेटा से पूर्वानुमान संभव होता है।​

40. 'मानसून' के संबंध में निम्न में से कौन-सा कथन सही है? [C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 'मानसून' शब्द अरबी शब्द से लिया गया है और यह एक वर्ष के दौरान हवा की दिशा में मौसमी उलटफेर को व्यक्त करता है।
Solution:
  • मानसून शब्द अरबी भाषा के 'मौसिम' शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है मौसम।
  • यह एक वर्ष के दौरान हवा की दिशा में मौसमी उलटफेर को व्यक्त करता है।
  • (संक्षिप्त परिभाषा)
    • मानसून एक मौसमी परिवर्तन है जिसमें दक्षिण-पश्चिम, गर्म और नम हवाओं का बड़े पैमाने पर आना-ना-ना और वर्षा के मौसम की तेज़ ड्राइविंग होती है
    • भारत-उपमहाद्वीप के संदर्भ में यह जून से सितंबर तक भारी वर्षा लाने वाला मौसम होता है ।​​
  • कौन-से कथन सही/गलत हों (प्रमुख बिंदु)
  • भारत के प्रत्येक क्षेत्र में जून से सितंबर तक मानसूनी वर्षा होना (ग़लत/statements ambiguity)
    • यह कथन सामान्यीकृत है और अधिकांश भाग में मानक मानसून के मौसम पर लागू होता है
    • हिमालयी उत्तरी तलहटी, प्रायद्वीपीय दक्षिणी तटों और कुछ शुष्क क्षेत्रों में वर्षा का वितरण भिन्न हो सकता है।
    • वास्तविकता यह है कि अधिकांश क्षेत्र इस अवधि में मानसून वर्षा पाते हैं, पर कुछ क्षेत्रों में असामान्य वर्षा, देरी या कम वर्षा भी हो सकती है।
    • अतः यह कथन पूर्णतः सत्य नहीं कहा जा सकता; इसे परिस्थितिजन्य मानक के रूप में देखा जाना चाहिए ।​
  • मानसून हवाओं के दिशा-परिवर्तन से जुड़ी जलवायवीय घटना है
    • यह सही है। मानसून नामक घटना मौसमों के दौरान हवाओं की दिशा में परिवर्तन और उसके साथ आर्द्रता/वर्षा की आवक को दर्शाती है
    • इसे तापीय-मैदानों के अंतर और ITCZ के मूवमेंट से भी समझा जाता है ।​
  • आधुनिक और सबसे मान्य मानसून उत्पत्ति सिद्धांत जेट-स्ट्रीम/ITCZ आदि से जुड़ा है
    • हाँ, आधुनिक शिक्षण में मानसून उत्पत्ति के लिए TEM में ITCZ के उत्तर-दक्षिण मूवमेंट के साथ पश्चिमी और पूर्वी जेट स्ट्रीम के व्यवहार को प्रमुख कारण माना जाता है
    • तापीय अंतर, हिन्द महासागर के ऊष्ण जल और भूमि-पहाड़ों के प्रभाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।​
  • संक्षेप में निष्कर्ष
    • मानसून एक मल्टी-फैक्टर, क्षेत्र-विशिष्ट प्राकृतिक व्यवस्था है; जून-सितंबर में अधिकांश क्षेत्रों में वर्षा होती है, लेकिन यह एकदम सार्वभौम सत्य नहीं है
    • क्योंकि कुछ जगहों पर वर्षा भिन्न हो सकती है ।​​
    • हवाओं की दिशा-परिवर्तन, जलवाष्प की मात्रा और ITCZ का स्थानीय पथ मानसून वर्षा के प्रमुख निर्धारक हैं; यह तथ्य सही है ।​
    • आधुनिक उत्पत्ति-थियोरीज में जेट स्ट्रीम, ITCZ और तापीय असमानता सभी मिलकर मानसून के वर्षा पैटर्न बनाते हैं; इस बात को मानना सही है ।​