जलवायु (भारत का भूगोल)

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41. इसके आने के समय सामान्य वर्षा अचानक से बढ़ जाती है और कई दिनों तक लगातार जारी रहती है। इसे मानसून के ....... के रूप में जाना जाता है और यह मानसून पूर्व वर्षा नहीं होती है। [C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) प्रस्फोट
Solution:
  • इसके आगमन के समय सामान्य वर्षा में अचानक वृद्धि हो जाती है तथा लगातार कई दिनों तक यह जारी रहती है।
  • इसे मानूसन प्रस्फोट (फटना) कहते हैं तथा इसे मानसून-पूर्व बौछारों से पृथक किया जा सकता है।
  • मानसून तेजी की परिभाषा
    • मानसून तेजी तब होती है जब दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाएं अचानक सक्रिय होकर सामान्य वर्षा से कहीं अधिक तीव्रता वाली वर्षा लाती हैं
    • जो कई दिनों तक बिना रुके जारी रहती है। यह प्रक्रिया आमतौर पर केरल तट पर जून के पहले सप्ताह में शुरू होती है और उत्तर की ओर बढ़ती जाती है।
    • उदाहरणस्वरूप, केरल में 1 जून के आसपास तेजी आती है, जबकि दिल्ली तक पहुंचने में 1 जुलाई तक लग जाता है।​
  • उत्पत्ति और विशेषताएं
    • यह तेजी ITCZ (Inter Tropical Convergence Zone) के उत्तर की ओर खिसकने और अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी की शाखाओं के एकीकरण से उत्पन्न होती है।
  • विशेषताएं निम्न हैं:
    • अचानक वर्षा वृद्धि: सामान्य 5-10 मिमी प्रतिदिन से बढ़कर 50-100 मिमी या अधिक हो जाती है।
    • लगातारता: 3-7 दिनों तक बिना ठहराव के मूसलाधार वर्षा।
    • क्षेत्रीय प्रगति: दक्षिण से उत्तर की ओर, हिमालय की तलहटी में अधिक तीव्र।
      यह मानसून पूर्व वर्षा (Pre-Monsoon Showers) से भिन्न है, जो मई-जून में स्थानीय कुहरा या चक्रवातों से आती है और अनियमित होती है।​
  • महत्व और प्रभाव
    • मानसून तेजी कृषि के लिए वरदान है, क्योंकि यह खरीफ फसलों की बुआई संभव बनाती है और जलाशय भरती है।
    • हालांकि, अत्यधिक होने पर बाढ़ का कारण बनती है। भारत मौसम विभाग (IMD) इसकी निगरानी मानसून मिशन के तहत करता है।
    • ऐतिहासिक रूप से, 2024 में सामान्य से अधिक तेजी दर्ज की गई।​

42. यदि ताहिती (Tahiti) में दाब का अंतर ऋणात्मक हो तो क्या होगा ? [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) औसत से कम और देर से मानसून
Solution:
  • यदि ताहिती में दाब का अंतर ऋणात्मक है, तो इसका अर्थ होगा-औसत से कम तथा विलंब से आने वाला मानसून।
  • दाब अंतर का वैज्ञानिक आधार
    • दाब अंतर की गणना डार्विन (ऑस्ट्रेलिया) और ताहिती के बीच औसत समुद्री स्तर दाब के अंतर से की जाती है।
    • ऋणात्मक अंतर तब होता है जब ताहिती में दाब असामान्य रूप से कम हो जाता है, जो वॉकर परिसंचरण को बाधित करता है।
    • इससे पूर्वी प्रशांत में गर्म जल की परत ऊपर आ जाती है, जबकि पश्चिमी प्रशांत में ठंडा जल नीचे चला जाता है, जिसे एल नीनो कहा जाता है।​
  • मानसून पर प्रभाव
    • ऋणात्मक दाब अंतर के कारण भारतीय उपमहाद्वीप में मानसून की तीव्रता औसत से कम रहती है
    • यह सामान्य समय से देरी से आता है। इससे दक्षिण एशिया में कम वर्षा होती है, जिसके परिणामस्वरूप सूखा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है
    • कृषि उत्पादन प्रभावित होता है। उदाहरणस्वरूप, अल नीनो वर्षों में जैसे 2015 में भारत में मानसून वर्षा 14% कम रही थी।​
  • वैश्विक जलवायु प्रभाव
    • यह स्थिति केवल भारत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी असामान्य मौसम पैदा करती है।
    • पूर्वी प्रशांत में कम दाब ट्रॉपिकल चक्रवातों को बढ़ावा देता है
    • जबकि पश्चिमी प्रशांत में सूखे की स्थिति बनती है।
    • ENSO चक्र का यह चरण वैश्विक तापमान में वृद्धि भी करता है।​
  • पूर्वानुमान और निगरानी
    • मानसून पूर्वानुमान के लिए भारतीय मौसम विभाग (IMD) SOI का उपयोग करता है
    • जहां ऋणात्मक मान (-1.0 या इससे कम) कमजोर मानसून का संकेत देते हैं।
    • जलवायु वैज्ञानिक समुद्री सतह तापमान (SST) और दाब पैटर्न की निगरानी करते हैं
    • ताकि 3-6 महीने पहले चेतावनी जारी की जा सके।
    • नीना (धनात्मक SOI) के विपरीत, यह स्थिति मानसून को शीघ्र और प्रबल नहीं बनाती।​

43. कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार, कौन-सा अक्षर कोड कर्क रेखा के दक्षिण में प्रायद्वीपीय भारत के बड़े हिस्से में पाए जाने वाले शुष्क सर्दियों के मौसम के साथ उष्णकटिबंधीय जलवायु को दर्शाता है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) Aw
Solution:Aw (उष्णकटिबंधीय सवाना तुल्य) अक्षर कोड कर्क रेखा के दक्षिण में प्रायद्वीपीय भारत के बड़े हिस्से में पाए जाने वाले शुष्क सर्दियों के मौसम के साथ उष्णकटिबंधीय जलवायु को दर्शाता है।
  • कोपेन क्लासिफिकेशन का संकल्पना
    • यह जलवायु को बड़े अक्षरों से वर्गीकृत करता है: A (उष्णकटिबंधीय), B (शुष्क), C (मध्य-उष्णकटिबंधीय), D (उच्च मध्यम अक्षांश), E (धर्मी ठंडा), plus H (उच्चारण/अनुसूचित)।
    • छोटे अक्षर मौसम की विशेषताओं को सूचित करते हैं, जैसे f (कोई शुष्क मौसम नहीं), m (मानसून प्रकार), w (गर्मी-शुष्क सर्दी-वर्ष के साथ), s (शीतकालीन शुष्क) आदि।
    • इस प्रणाली के अनुसार Aw का मतलब उष्णकटिबंधीय सवाना जलवायु है जिसमें गर्मी में बारिश और शुष्क अंतराल होता है।
    • Aw प्रायः गर्म, वर्षा का वितरण मानसून से जुड़ा होता है और गर्मियों में वर्षा अधिक होती है जबकि सर्दियाँ शुष्क होती हैं।
    • यह सबसे अधिक भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिण-पूर्वी हिस्से, दक्षिणी राज्यों सहित प्रायद्वीपीय भारत के बड़े हिस्से में पाया जाता है।
    • [उद्धरण: सामान्य पाठ्यपुस्तक समीक्षा/vikram आदि स्रोतों में यही व्याख्या मानी जाती है
    • यह अवधारणा कोपेन классификации के मानक मानदंडों के अनुसार स्थापित है]।
  • उत्तर-पूर्व और बंगाल के पूर्व भाग बनाम प्रायद्वीपीय भारत
    • बंगाल-पूर्वोत्तर क्षेत्र में भी As प्रकार (उष्णकटिबंधीय आर्द्र) अधिक सामान्य है
    • परंतु प्रायद्वीपीय भारत के बड़े हिस्से में Aw प्रकार प्रमुख है, जहां श winters शुष्क रहते हैं
    • गर्मियों में भारी वर्षा होती है। [उद्धरण: आमतौर पर भारत के जलवायु क्षेत्रों के कोपेन वर्गीकरण के विवरण में यही विभाजन बताया जाता है]।
  • व्यवहारिक खासियत
    • तापमान: औसत उच्च तापमान सामान्यतः 30°C से ऊपर रहता है, गर्मी में अक्सर 40°C के करीब भी पहुँच सकता है।
    • वर्षा वितरण: मानसून के दौरान वर्षा का सबसे बड़ा अंश, बाकी महीनों में वर्षा कम या शुष्क होता है।
    • वनस्पति और कृषि: वर्षा का प्रत्यक्ष प्रभाव crops पर पड़ता है; रबी फसलों की तुलना में खरीफ फसलें अधिक समुचित मौसम में उगती हैं।
  • चयनित विकल्पों के संदर्भ में
    • Aw: उष्णकटिबंधीय सवाना जलवायु, प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश हिस्सों में बहुलता से पाई जाने वाली जलवायु—यह वही अनुभाग है
    • जो आपके वर्णन के अनुसार दक्षिण में कर्क रेखा के नीचे स्थित बड़े भूभाग में दिखती है।
    • अन्य कोपेन अक्षर जैसे Amw, As, आदि विशेष क्षेत्रों या मौसम-स्थलों के लिए होते हैं
    • आपके सवाल के दक्षिणी भारत के उल्लेख के साथ सीधे Aw का मिलान सबसे उपयुक्त है।
  • क्या यह उत्तर पूरी तरह स्पष्ट है?
    • हाँ, अनुरूप दक्षिणी भारत के बड़े भागों में पाए जाने वाले शुष्क सर्दियों के साथ उष्णकटिबंधीय जलवायु का वर्णन Aw प्रकार से मेल खाता है।

44. कोपेन की योजना के अनुसार भारत में किस प्रकार की जलवायु को 'Cwg' से निरूपित किया जाता है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) शुष्क शीत के साथ मानसून
Solution:
  • भारत में शुष्क शीत के साथ मानसूनी जलवायु को Cwg के रूप में निरूपित किया जाता है।
  • Cwg जलवायु: शुष्क सर्दियों के साथ मानसून प्रकार (dry winter with monsoon). भारत के उत्तर-गंगा क्षेत्र के मैदानों में यह क्लाइमेट पाया जाता है.​
  • Cwg का तात्पर्य: गर्म गर्मियों में उच्च तापमान और मानसून के साथ बारिश होती है, जबकि सर्दियाँ शुष्क और ठंडी-आर्द्र नहीं होतीं
  • यह समशीतोष्ण जलवायु का एक उपवर्ग है जिसमें सर्दियों में वर्षा न्यून रहती है.​
  • भौगोलिक वितरण: उत्तर प्रदेश, बिहार के कुछ भाग, गंगा के मैदानों के अधिकांश क्षेत्र Cwg के अंतर्गत आते हैं
  • साथ ही पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में भी इसका संकेत मिल सकता है.​
  • तत्त्व और परिभाषाएँ
    • कोपेन जलवायु वर्गीकरण: क्लाइमेट के नामकरण में पहला अक्षर मुख्य क्लाइमेट प्रकार को दर्शाता है
    • (A, B, C, D, E), दूसरे अक्षर से मौसमी पैटर्न की दिशा/विशेषता स्पष्ट होती है; CWg में C = समशीतोष्ण, w = शुष्क सर्दियाँ, g = गर्म गर्मियाँ/गर्मियाँ। इस प्रकार CWg एक मिश्रित क्लाइमेट है जिसमें गर्मियों का वर्षा अधिकतर होती है जबकि सर्दियाँ शुष्क होती हैं.​
    • वैशिष्टय: CWg प्रकार गंगाजमिन मैदानों में विशेष प्रचलित है और गर्मियों में तापमान 40°C जैसे उच्च तक जा सकता है
    • जबकि सर्दियाँ शुष्क और हल्की गर्मी के साथ 27°C तक गिर सकती हैं; यह स्थानीय मौसमी चक्र को परिभाषित करता है.​
  • स्थान-आधारित तुलना (संक्षेप)
    • उत्तर प्रदेश और बिहार के गंगा बेसिन: शामिल क्षेत्र Cwg के अंतर्गत आते हैं; उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से और बिहार के मैदान CWg क्लाइमेट के संकेत दिखाते हैं.​
    • अन्य क्षेत्रों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, आदि) में CWg जैसा क्लाइमेट नहीं होता; वहाँ अन्य Köppen प्रकार देखने को मिलते हैं, जैसे Et (टунд्रा) आदि.​
  • संभावित गलतफहमाओं के स्पष्टीकरण
    • कई स्रोत CWg को “शुष्क शीत ऋतु वाला मानसून प्रकार” के रूप में वर्णित करते हैं
    • यह उच्च-स्तरीय संक्षेप है जो सर्दी में वर्षा कम और गर्मियों में मानसून वर्षा से जुड़ा होता है.​
    • कुछ प्रश्न-उत्तर सूचीकरण non-निशचित रूप से CWg को “शुष्क गर्मियों के साथ मानसून प्रकार” भी दर्शाते हैं
    • सच यह है कि CWg मुख्य विशेषता शुष्क सर्दियाँ है, जबकि गर्मियों में मानसून वर्षा होती है
    • स्रोतों में यह व्याख्या थोड़ा भिन्न हो सकती है पर मूल विचार वही है.​
  • उद्धरण और स्रोत
    • CWg की परिभाषा और गंगा के मैदानों में विस्तार: Testbook/IK-sourced सार; CWg शुष्क सर्दियों के साथ मानसून प्रकार के रूप में वर्णित है.​
    • उत्तर प्रदेश/Bihar में CWg का वितरण: Testbook entries और योग्यता प्रश्नों के अनुसार राज्य/मैदानी भाग CWg के रूप में आते हैं.​

45. भारत में मानसून का अनुमानित आगमन कौन-से महीने में होता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) जून के आरंभ में
Solution:
  • भारत में मानसून का अनुमानित आगमन जून के आरंभ में होता है। भारत में मानसून का आगमन सर्वप्रथम केरल राज्य में होता है।
  • भारत में अधिकांश वर्षा दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के द्वारा होती है|
  • मानसून आगमन का समय
    • दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत के दक्षिणी छोर, जैसे केरल, में जून के पहले सप्ताह तक पहुँच जाता है
    • जबकि उत्तर भारत जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार में जून के अंत या जुलाई के प्रारंभ तक पहुँचता है
    • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) सामान्यतः 1 जून को केरल में आगमन की तिथि मानता है
    • हालाँकि वर्षा की तीव्रता के आधार पर इसमें ±8 दिनों का भिन्नता हो सकती है. 2025 में यह सामान्य से पूर्व आया, लेकिन सामान्य पैटर्न जून का प्रारंभ ही है.​
  • क्षेत्रीय विविधताएँ
    • केरल और तमिलनाडु: जून के पहले सप्ताह में आगमन, अरब सागर शाखा के कारण.​
    • मुंबई और पश्चिमी घाट: जून के मध्य तक.​
    • उत्तर भारत (दिल्ली, UP, बिहार): जून अंत या जुलाई प्रारंभ, बंगाल की खाड़ी शाखा से.​
    • उत्तर-पूर्व: जून के अंत में.​
    • मानसून की प्रगति धीमी होती है क्योंकि यह हिंद महासागर से नमी ग्रहण कर उत्तर की ओर बढ़ता है.​
  • कारण और प्रक्रिया
    • ग्रीष्म में भारतीय भूमि तेजी से गर्म होकर निम्न दाब क्षेत्र बनाती है, जबकि हिंद महासागर में उच्च दाब रहता है
    • जिससे दक्षिण-पश्चिमी हवाएँ उलट जाती हैं. यह मौसमी उलटाव जून में चरम पर पहुँचता है
    • जिससे वर्षा प्रारंभ होती है। अवधि लगभग 100-120 दिन की होती है, जून से सितंबर मध्य तक.​
  • आर्थिक और कृषि महत्व
    • मानसून भारत की 50% से अधिक वर्षा प्रदान करता है, जो खरीफ फसलों (धान, मक्का, कपास) के लिए आधार है
    • विलंब या कमजोरी से सूखा पड़ता है, जबकि सामान्य आगमन राहत देता है. वापसी अक्टूबर-नवंबर में होती है
    • जिसके बाद उत्तर-पूर्वी मानसून तमिलनाडु को प्रभावित करता है.​