जीवाणु जनित रोग (रोग एवं उपचार)

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11. इनमें से कौन विषाणु जनित रोग नहीं है? [R.O/A.R.O. (Mains) Exam. 2017]

Correct Answer: (d) क्षय रोग
Solution:पोलियो एक संक्रामक रोग है, जो पोलियोमेलाइटिस विषाणु द्वारा होता है। रेबीज एवं खसरा भी विषाणु जन्य रोग हैं, जबकि तपेदिक या क्षय रोग एक संक्रामक रोग है, जिसका कारण माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु है।

12. निम्नलिखित प्रतिसूक्ष्मजीवी ओषधियों में से कौन-सी यक्ष्मा और कुष्ठ दोनों की चिकित्सा के लिए उपयुक्त है? [I.A.S. (Pre) 1995]

Correct Answer: (b) P-एमिनोसैलिसिलिक एसिड
Solution:P-एमिनोसैलिसिलिक एसिड (P-Aminosalicylic Acid) नामक प्रतिसूक्ष्म जीवी ओषधि यक्ष्मा (T.B.) तथा कुष्ठ रोग जैसे जीवाणुजन्य (Bacterial) रोगों की चिकित्सा के लिए उपयुक्त है।

13. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, आज के समय में सर्वाधिक संख्या में लोगों के प्राण लेने वाला रोग है- [I.A.S. (Pre) 1996]

Correct Answer: (b) यक्ष्मा (T.B.)
Solution:यक्ष्मा (तपेदिक या क्षय रोग) एक संक्रामक रोग है, जिसका कारक माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु है। इस रोग में मनुष्य का फेफड़ा (Lungs) प्रभावित होता है। इसमें रोगी को ज्वर, लगातार खांसी, खून के साथ बलगम का आना, सांस फूलना इत्यादि लक्षण प्रदर्शित होते हैं। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 4-5 लाख मृत्यु तपेदिक के कारण होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) के अनुसार, आधुनिक समय में यह रोग सर्वाधिक मनुष्यों की मृत्यु का कारण है तथा भारत में भी इसका प्रकोप काफी अधिक है। यह आनुवंशिक रोग नहीं है।

14. प्रतिवर्ष 5 लाख भारतीय एक रोग से मरते हैं। इसकी पहचान करें- [40th B.P.S.C. (Pre) 1995]

Correct Answer: (d) क्षय रोग
Solution:यक्ष्मा (तपेदिक या क्षय रोग) एक संक्रामक रोग है, जिसका कारक माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु है। इस रोग में मनुष्य का फेफड़ा (Lungs) प्रभावित होता है। इसमें रोगी को ज्वर, लगातार खांसी, खून के साथ बलगम का आना, सांस फूलना इत्यादि लक्षण प्रदर्शित होते हैं। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 4-5 लाख मृत्यु तपेदिक के कारण होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) के अनुसार, आधुनिक समय में यह रोग सर्वाधिक मनुष्यों की मृत्यु का कारण है तथा भारत में भी इसका प्रकोप काफी अधिक है। यह आनुवंशिक रोग नहीं है।

15. निम्न में, कौन-सा रोग जीवाणुओं से उत्पन्न होता है? [Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006 U.P.P.C.S. (Mains) 2010]

Correct Answer: (a) तपेदिक
Solution:यक्ष्मा (तपेदिक या क्षय रोग) एक संक्रामक रोग है, जिसका कारक माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु है। इस रोग में मनुष्य का फेफड़ा (Lungs) प्रभावित होता है। इसमें रोगी को ज्वर, लगातार खांसी, खून के साथ बलगम का आना, सांस फूलना इत्यादि लक्षण प्रदर्शित होते हैं। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 4-5 लाख मृत्यु तपेदिक के कारण होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) के अनुसार, आधुनिक समय में यह रोग सर्वाधिक मनुष्यों की मृत्यु का कारण है तथा भारत में भी इसका प्रकोप काफी अधिक है। यह आनुवंशिक रोग नहीं है।

16. तपेदिक रोग का कारण है, एक- [U.P.P.C.S. (Mains) 2004]

Correct Answer: (a) जीवाणु
Solution:यक्ष्मा (तपेदिक या क्षय रोग) एक संक्रामक रोग है, जिसका कारक माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु है। इस रोग में मनुष्य का फेफड़ा (Lungs) प्रभावित होता है। इसमें रोगी को ज्वर, लगातार खांसी, खून के साथ बलगम का आना, सांस फूलना इत्यादि लक्षण प्रदर्शित होते हैं। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 4-5 लाख मृत्यु तपेदिक के कारण होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) के अनुसार, आधुनिक समय में यह रोग सर्वाधिक मनुष्यों की मृत्यु का कारण है तथा भारत में भी इसका प्रकोप काफी अधिक है। यह आनुवंशिक रोग नहीं है।

17. निम्नलिखित में से कौन सही सुमेलित नहीं है? [U.P.R.O./A.R.O.(Pre) 2016]

Correct Answer: (b) आनुवंशिक रोग - क्षयरोग
Solution:यक्ष्मा (तपेदिक या क्षय रोग) एक संक्रामक रोग है, जिसका कारक माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु है। इस रोग में मनुष्य का फेफड़ा (Lungs) प्रभावित होता है। इसमें रोगी को ज्वर, लगातार खांसी, खून के साथ बलगम का आना, सांस फूलना इत्यादि लक्षण प्रदर्शित होते हैं। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 4-5 लाख मृत्यु तपेदिक के कारण होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) के अनुसार, आधुनिक समय में यह रोग सर्वाधिक मनुष्यों की मृत्यु का कारण है तथा भारत में भी इसका प्रकोप काफी अधिक है। यह आनुवंशिक रोग नहीं है।

18. क्षय रोग (टीबी) के परीक्षण हेतु विशिष्ट परीक्षण है- [U.P. Lower Sub. (Mains) 2015]

Correct Answer: (d) मैटॉक्स का परीक्षण
Solution:तपेदिक के संक्रमण के परीक्षण हेतु टीबी रक्त परीक्षण (TB Blood Test) किया जाता है, इसे ही 'मैंटॉक्स ट्यूबर क्यूलिन त्वचा परीक्षण' कहते है। इस परीक्षण में हाथ के निचले हिस्से की त्वचा में ट्यूबर क्यूलिन नामक तरल की अल्प मात्रा इंजेक्शन के रूप में लगाई जाती है। इंजेक्शन लगाने के 48-72 घंटे बाद हाथ पर इसके प्रभावों (Reaction) का अध्ययन किया जाता है।

19. बी. सी. जी. वैक्सीन का इस्तेमाल किसकी रोकथाम के लिए किया जाता है? [66 B.P.S.C. (Pre) (Re. Exam) 2020]

Correct Answer: (c) क्षयरोग
Solution:बी. सी. जी. (वैसिलस काल्मेट ग्यूरीन) का टीका तपेदिक या राजयक्ष्मा (टी. बी.) के बचाव के लिए शिशु के जन्म के तुरंत बाद लगाया जाना चाहिए। यह टीका यदि जन्म के तुरंत बाद न लगाया गया हो. तो शिशु के जन्म से 12 माह के अंदर तक दिया जा सकता है, किंतु जन्म के बाद जितनी अवधि व्यतीत होती जाएगी प्रभाविता उतनी ही कम होती जाएगी। जन्म के 12 माह के बाद बी. सी. जी. टीका लगाने का कोई फायदा नहीं है।

20. बी. सी. जी. का टीका निम्न में से किसमें लगाया जाता है? [U.P.P.C.S. (Pre) 1990]

Correct Answer: (d) यक्ष्मा (T.B.)
Solution:बी. सी. जी. (वैसिलस काल्मेट ग्यूरीन) का टीका तपेदिक या राजयक्ष्मा (टी. बी.) के बचाव के लिए शिशु के जन्म के तुरंत बाद लगाया जाना चाहिए। यह टीका यदि जन्म के तुरंत बाद न लगाया गया हो. तो शिशु के जन्म से 12 माह के अंदर तक दिया जा सकता है, किंतु जन्म के बाद जितनी अवधि व्यतीत होती जाएगी प्रभाविता उतनी ही कम होती जाएगी। जन्म के 12 माह के बाद बी. सी. जी. टीका लगाने का कोई फायदा नहीं है।