जीवाणु जनित रोग (रोग एवं उपचार)

Total Questions: 41

31. निम्न सभी बीमारियों का कारण 'वायरस' होता है, सिवाय एक को छोड़ कर, जो है [U.P. Lower Sub. (Pre) 2008]

Correct Answer: (d) आंत्र-ज्वर
Solution:गलसुआ या कण्डमाला रोग विकट विषाणुजनित बीमारी है, जो पैरोटिड ग्रंथि को कष्टदायक रूप से बड़ा कर देती है। पीलिया तथा इंफ्लुएंजा भी विषाणुजनित रोग है। आंत्र-ज्वर सैल्मोनेला टॉइफी नामक जीवाणु से होता है।

32. निम्नलिखित में से कौन प्रतिजैविक ओषधि है? [B.P.S.C. (Pre) Exam, 2016]

Correct Answer: (e) उपरोक्त में से कोई नहीं/ उपरोक्त में से एक से अधिक
Solution:क्लोरेम्फेनीकॉल (Chloramphenicol) एक प्रतिजैविक (Antibiotic) ओषधि है, जिसका उपयोग बैक्टीरियल इंफेक्शन के उपचार में किया जाता है। सल्फागुआनिडीन एक प्रकार का सल्फोनामाइड प्रतिजैविक (Sulfonamide Antibiotic) है, जो जीवाणुरोधी एजेंट (Antibacterial agent) के रूप में कार्य करता है।

33. निम्नलिखित में से एंटीबायोटिक है- [63rd B.P.S.C. (Pre) 2017]

Correct Answer: (e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/ उपर्युक्त में से एक से अधिक
Solution:उपर्युक्त विकल्पों में पेनिसिलिन तथा सल्फाडायाजीन एंटीबायोटिक हैं। एंटीबायोटिक का उपयोग बैक्टीरिया जनित रोगों के उपचार के लिए किया जाता है। अतः अभीष्ट उत्तर (e) उपर्युक्त में से एक से अधिक सही हैं।

34. एंटीबायोटिक दवा का उदाहरण है - [66th B.P.S.C. (Pre) (Re. Exam) 2020]

Correct Answer: (d) पेनिसिलिन
Solution:एंटिबायोटिक दवा का प्रयोग जीवाणुजन्य (Bacterial) रोगों के उपचार में किया जाता है। प्रश्नगत विकल्पों में पेनिसिलिन एंटिबायोटिक दवा है। इसे पेनिसिलियम नोटेटम नामक (Penicillium chrysogenum) कवकों से प्राप्त किया जाता है।

35. निम्न में ब्रॉड स्पेक्ट्रम ओषधि है- [R.A.S./R.T.S. (Pre) 1999]

Correct Answer: (a) क्लोरेम्फेनीकॉल
Solution:ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक ऐसी ओषधियों का समूह है, जो जीवाणु जनित विभिन्न प्रकार के रोगों के प्रति प्रभावी होती है। ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक, नैरो स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक के विपरीत ग्राम-पॉजिटिव और ग्राम-निगेटिव दोनों प्रकार के जीवाणुओं के विरुद्ध प्रभावी होती है। क्लोरेम्फेनीकॉल (Chloramphenicol), जिसे क्लोरोनाइट्रोमाइसिन (Chloronitromycin) के नाम से भी जाना जाता है, एक ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक है।

36. निम्न द्वारा होने वाली बीमारियों के लिए सल्फा दवाड्यां किसके लिए कारगर है? [R.A.S./R.T.S. (Pre) 1996]

Correct Answer: (a) जीवाणु
Solution:जीवाणुओं (Bacteria) द्वारा होने वाली बीमारियों के लिए सल्फा दवाइयों (Sulpha Drugs) का प्रयोग किया जाता है। यह संश्लिष्ट दवाओं का एक समूह है, जिसके अंतर्गत सल्फोनामाइड, सल्फामेराजाइन, सल्फाडायजिन इत्यादि हैं। प्रॉन्टोसिल (Prontosil), सिबाजोल (Cibazole) आदि सल्फोनामाइड दवाओं के प्रकार हैं। सर्वप्रथम सल्फाड्रग्स 'प्रॉन्टोसिल' की खोज वर्ष 1932 में की गई थी।

37. सल्फा ड्रग, निम्नलिखित में से, किस प्रकार की औषधि है? [U.P.P.C.S. (Pre) 2022]

Correct Answer: (b) प्रतिजीवाणुक
Solution:जीवाणुओं (Bacteria) द्वारा होने वाली बीमारियों के लिए सल्फा दवाइयों (Sulpha Drugs) का प्रयोग किया जाता है। यह संश्लिष्ट दवाओं का एक समूह है, जिसके अंतर्गत सल्फोनामाइड, सल्फामेराजाइन, सल्फाडायजिन इत्यादि हैं। प्रॉन्टोसिल (Prontosil), सिबाजोल (Cibazole) आदि सल्फोनामाइड दवाओं के प्रकार हैं। सर्वप्रथम सल्फाड्रग्स 'प्रॉन्टोसिल' की खोज वर्ष 1932 में की गई थी।

38. निम्नलिखित में से कौन-सा एक सल्फा ओषधि है ? [U.P.P.C.S. (Mains) 2017]

Correct Answer: (c) सिबाजोल
Solution:जीवाणुओं (Bacteria) द्वारा होने वाली बीमारियों के लिए सल्फा दवाइयों (Sulpha Drugs) का प्रयोग किया जाता है। यह संश्लिष्ट दवाओं का एक समूह है, जिसके अंतर्गत सल्फोनामाइड, सल्फामेराजाइन, सल्फाडायजिन इत्यादि हैं। प्रॉन्टोसिल (Prontosil), सिबाजोल (Cibazole) आदि सल्फोनामाइड दवाओं के प्रकार हैं। सर्वप्रथम सल्फाड्रग्स 'प्रॉन्टोसिल' की खोज वर्ष 1932 में की गई थी।

39. निम्नलिखित में से कौन-से, भारत में सूक्ष्मजैविक रोगजनकों में बहु-ओषध प्रतिरोध के होने के कारण हैं? [I.A.S. (Pre) 2019]

1. कुछ व्यक्तियों में आनुवंशिक पूर्ववृत्ति (जेनेटिक प्रीडिस्पोजीशन) का होना

2. रोगों के उपचार के लिए प्रतिजैविकों (एंटिबॉयोटिक्स) की गलत खुराकें लेना

3. पशुधन फार्मिंग में प्रतिजैविकों का इस्तेमाल करना

4. कुछ व्यक्तियों में चिरकालिक रोगों की बहुलता होना

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

Correct Answer: (b) केवल 2 और 3
Solution:भारत में सूक्ष्मजैविक रोगजनकों (Microbial Pathogens) में बहु-ओषध प्रतिरोध (Multi-drug resistance) उत्पन्न होने के प्रमुख कारण है-

(i) सूक्ष्मजैविकों में उत्परिवर्तन (Mutation), जीन हस्तांतरण, प्रतिरोधी जीनों के विकास आदि के माध्यम से होने वाले परिवर्तन।

(ii) गलत रोग-निदान, जिसके कारण रोगी को चिकित्सक कभी-कभी अनावश्यक सूक्ष्मजीवरोधी ओषधियां दे देते हैं।

(iii) रोगी द्वारा उपचार के लिए प्रतिजैविकों का कोर्स पूरा नहीं करना या उनकी गलत खुराके लेना, बगैर डॉक्टरी सलाह के दवाएं लेना।

(iv) पशुधन फार्मिंग में प्रतिजैविकों का बढ़ता प्रयोगा

(v) फॉर्मास्युटिकल उद्योग एवं अस्पतालों के अशोधित कचरे द्वारा पर्यावरणीय संदूषण।

40. सुमेलित कीजिए- [U.P. P.C.S. (Pre) 1999]

सूची-I

सूची-II 

(A) वायु द्वारा

(1) टिटेनस

(B) पानी द्वारा

(2) टी. बी.

(C) संपर्क द्वारा

(3) कॉलरा (हैजा)

(D) घाव द्वारा

(4) सिफलिस

 

ABCD
(a)1234
(b)2341
(c)3412
(d)4123
Correct Answer: (b)
Solution:सुमेलित क्रम इस प्रकार है:

सूची-I

सूची-II 

(A) वायु द्वारा

(1)  टी. बी.

(B) पानी द्वारा

(2) कॉलरा (हैजा)

(C) संपर्क द्वारा

(3) सिफलिस

(D) घाव द्वारा

(4) टिटेनस