ज्वार-भाटा (विश्व का भूगोल)

Total Questions: 6

1. कौन-सा नियम यह बताता है कि ज्वार-भाटा के लिए चंद्रमा और सूर्य की स्थितियां जिम्मेदार हैं? [MTS (T-I) 20 अक्टूबर, 2021 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) गुरुत्वाकर्षण का नियम
Solution:
  • ज्वार-भाटा की उत्पत्ति सूर्य एवं चंद्रमा के आकर्षण बल तथा पृथ्वी पर उत्पन्न होने वाले दो बलों अभिकेंद्रीय बल/केंद्रोन्मुख बल एवं अपकेंद्रीय बल/केंद्रोपसारित बल के परिणामी बल के फलस्वरूप होती है।
  • अतः गुरुत्वाकर्षण का नियम यह बताता है
  • ज्वार-भाटा के लिए चंद्रमा और सूर्य की स्थितियां जिम्मेदार हैं।
  • परिभाषा और प्रमुख विचार
    •  जब गुरुत्वाकर्षण बल विपरीत दिशा में होते हैं या जब प्रभाव कम होता है.​
    • सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण से महासागरों में दो उभार बनते हैं
    • इन उभारों के कारण ज्वार-भाटा के पैटर्न बनते हैं
    • चंद्रमा पृथ्वी के पास होने के कारण इसका प्रभाव सूर्य की तुलना में अधिक प्रमुख माना जाता है
    • किंतु सूर्य की विशाल गुरुत्वाकर्षण शक्ति भी योगदान देता है, विशेषकर जब तीनों पथ में संरेखित होते हैं.​
  • स्पष्ट नियम और घटनाक्रम
    • वसंत ज्वार (Spring tide) तब होता है जब सूर्य-चंद्रमा- पृथ्वी एक रेखा में होते हैं
    • इसे उच्च ज्वार और नीच ज्वार के असामान्य उच्च स्तर के साथ देखा जाता है
    • क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बलों का संयुक्त प्रभाव अधिक होता है.​
    • नरम/नीच ज्वार (Neap tide) तब आते हैं जब सूर्य-चंद्रमा- पृथ्वी त्रिकोणीय कोण पर होते हैं
    • (90 डिग्री के आसपास), जिससे गुरुत्वाकर्षण बल एक दूसरे के विरुद्ध चलाते हैं और ऊँचाई में कमी होती है.​
  • सूत्र और प्राकृतिक कारण
    • ज्वार-भाटा का मूल कारण पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के बीच के गुरुत्वीय आकर्षण का पृथ्वी के जलस्तर पर प्रभाव है
    • चंद्रमा का प्रभाव पृथ्वी के सबसे निकट होने की वजह से अधिक स्पष्ट होता है
    • जबकि सूर्य की विशाल दूरी के बावजूद उसका प्रभाव भी परिणामस्वरूप निर्णायक होता है.​
    • चंद्रमा के दो उभार पृथ्वी के ऊपर-नीचे दोनों तरफ बनाते हैं
    • पृथ्वी का स्वतः घूमना इन उभारों को गतिशील बनाता है और ज्वार-भाटा चक्र को नियमित करता है.​
  • संक्षिप्त वर्णन—طالب/पाठ्य संदर्भ
    • ज्वार-भाटा विज्ञान के अनुसार, महासागरों में जल स्तर का यह नियमित उतार-चढ़ाव गुरुत्वाकर्षण बलों के सीधे-सीधे संरेखण और उनके विपरीत प्रभाव से निर्धारित होता है.​
    • पूर्णिमा/अमावस्या के दिनों में संरेखण अधिक मजबूत होता है
    • जिससे जल स्तर अधिक ऊँचा उठता है
    • (स्प्रिंग टाइड) और अन्य स्थितियों में ऊँचाई कम होती है (नेप टाइड).​
  • ध्यान दें
    • ऊपर दिए गए तथ्य प्रामाणिक स्रोतों से संकलित हैं
    • ज्वार-भाटा के नियम के बारे में एक विस्तृत, स्पष्ट चित्र प्रस्तुत करते हैं
    • ताकि किसी पाठ्य-पूरक या परीक्षा-उन्मुख संदर्भ में सही व्याख्या मिल सके.​

2. किस ज्वार-भाटा की ऊंचाई में विभिन्नता होती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) मिश्रित ज्वार-भाटा
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में मिश्रित ज्वार-भाटा की ऊंचाई में विभिन्नता पाई जती है।
  • ज्वार-भाटा की उत्पत्ति सूर्य एवं चंद्रमा के आकर्षण बल तथा पृथ्वी पर उत्पन्न होने वाले अभिकेंद्रीय तथा अपकेंद्रीय बल के परिणामी बल के फलस्वरूप होती है।
  • हम क्या समझते हैं
    • ज्वार-भाटा समुद्र सतह के ऊँचाई में समय-समय पर होने वाले बढ़ोतरी (ज्वार) और घटने (भाटा) को कहते हैं।
    • यह मुख्यतः चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बलों के पृथ्वी पर पड़ने से उत्पन्न होता है ।​
  • मुख्य प्रकार और कौन–कौन से कारक प्रभावित करते हैं
    • वृहत (स्प्रिंग) ज्वार: जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में होते हैं
    • तब गुरुत्वाकर्षण बल एकीकृत होकर समुद्री जल को अधिक ऊँचाई तक उठाते हैं। यह समय सामान्य से अधिक ऊँचाई देता है ।​
    • लघु (न्यूटन/नॉर्मल) ज्वार: जब चंद्रमा और सूर्य पृथ्वी के विरुद्ध कोण पर होते हैं
    • (चंद्रमा के प्रथम/चतुर्थांश के समय), गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे के विरुद्ध आकर ऊँचाई कम कर देते हैं, जिससे ऊँचाई घट जाती है ।​
    • दैनिक ज्वार-भाटा पैटर्न: कुछCoastlines पर एक दिन में एक उच्च और एक निम्न ज्वार होता है
    • जबकि अन्य जगहों पर औसत या दो उच्च-दो निम्न ज्वार होते हैं।
    • टाइड के प्रकार-आधारित विविधता तटरेखा और जल-स्तर की प्रवाह-रेखा पर निर्भर करती है ।​
    • तटरेखा की भौतिक संरचना: समुद्र तट की आकृति (कुँआ, खाड़ी, मुख-रेखा, गहराई) तथा पवन-प्रवाह (ड्रिप) जल-प्रवाह को प्रभावित करते हैं
    • जिससे वही पानी की ऊँचाई बनती है जिसे स्थानीय रूप से ऊँचाई भिन्नता कहा जाता है ।​
    • ग्रहणीय प्रभाव: सूर्य की दूरी और चंद्रमा की कक्षीय स्थिति भी ऊँचाई पर थोड़ा बहुत प्रभाव डालती है; कुछ दिनों में ऊँचाई और भी बढ़ सकती है या घट सकती है ।​
    • माह और चंद्र-स्थिति: पूर्णिमा और अमावस्या के दिन उच्च ज्वार अधिक रहते हैं
    • क्योंकि सूर्य-चंद्रमा-पृथ्वी तीनों एक सीधी रेखा में होते हैं; इसे वृहद ज्वार कहा जाता है ।​
  • ज्वार-भाटा के प्रकार (संक्षिप्त)
    • उच्च ज्वार (हाई टाइड): ऊँचाई अधिकतम होती है; सामान्यतः पूर्णिमा/अमावस्या के समय अधिकतम ऊँचाई मिलती है ।​
    • निम्न ज्वार (लो-टाइड): ऊँचाई कम होती है; सूर्य-चंद्रमा-अंतर से ऊँचाई घटती है ।​
    • मिश्रित ज्वार: कुछ तटरेखाओं पर ऊँचाई में विविधता अधिक होती है
    • कई बार उच्च-निम्न के अन्तर में बड़ा स्प्लिट दिख सकता है
    • यह तट-रेखा और जल-आवृत्ति के विशेष संयोजन से उभरता है ।​
  • समुद्री जल ऊँचाई में अंतर के वास्तविक प्रभाव
    • ऊँचाई में भिन्नता से तटीय क्षेत्रों में बाढ़ के जोखिम, समुद्री जल-स्तर के दैनिक बदलाव, मत्स्य पालन और नौवहन की रणनीतियाँ प्रभावित होती हैं ।​
    • द्वीपों और खारे पानी वाले क्षेत्रों में टाइड-मैपिंग के जरिए गतिविधियाँ योजनाबद्ध की जाती हैं
    • ताकि नावों के आना-जाना या किनारे पर गतिविधियाँ सुरक्षित रहें ।​
  • क्यों यह जानकारी उपयोगी है
    • समुद्री संरक्षक तटीय विकास और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी भविष्य-भविष्यवाणियाँ करते समय ज्वार-भाटा की ऊँचाई विविधता एक प्रमुख इनपुट मानी जाती है ।

3. जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में होते हैं, तो ज्वार की ऊंचाई अधिक होगी। इन ज्वारों को क्या कहते हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) बृहत ज्वार
Solution:
  • जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में होते हैं, तो ज्वार की ऊंचाई अधिक होगी। इन ज्वारों को बृहत (Spring) ज्वार कहते हैं।
  • स्पष्ट उत्तर
    • स्प्रिंग ज्वार: सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में होने पर पैदा होता है
    • इस स्थिति में गुरुत्वाकर्षण बल संयुक्त होकर समुद्र के जल को अधिक मात्रा में आकर्षित करता है
    • जिससे उच्च ज्वार और निम्न ज्वार दोनों की स्थिति अधिक चरम होती है.​
  • मुख्य बिंदु
    • समय: स्प्रिंग ज्वार पूर्णिमा या अमावस्या के दिनों में होता है, जब चंद्रमा और सूर्य पृथ्वी के समान दिशा में रहते हैं.​
    • प्रभाव: चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बलों का योग जल स्तर को ऊँचा उठाता है
    • उच्चतम ऊँचाई और निम्नतम गहराई एक ही दिन में देखने को मिल सकती है.​
    • विपरीत स्थिति: जब सूर्य और चंद्रमा एक-दूसरे के Perpendicular (90°) कोण पर होते हैं
    • तो गुरुत्वाकर्षण प्रत्यक्षतः कुछ-कुछArrest होता है और लघु ज्वार (नीप ज्वार) आता है
    • इसे जब चंद्रमा की पहली/अ derden तिमाही में होता है, कहा जाता है, तो स्प्रिंग-ज्वार नहीं बल्कि नीप-ज्वार होता है.​
  • आउटपुट में ज्वार-भाटा के प्रकार
    • स्प्रिंग ज्वार (Spring Tide): पूर्णिमा/अमावस्या के दौरान जब सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी लगभग एक लाइन में हों
    • उच्च ज्वार अधिक ऊँचा और निम्न ज्वार भी अधिक निम्न हाइट पर आता है.​
    • नीप ज्वार (Neap Tide): जब सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के समकोण पर होते हैं
    • गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे के विरुद्ध आंशिक रूप से टकराते हैं, λόγω से ज्वार की ऊँचाई में कमी होती है.​
  • और जानकारी
    • स्प्रिंग ज्वार का नाम “स्प्रिंग” यहाँ पानी केpring-सी उठने से नहीं, बल्कि गुरुत्वाकर्षण बलों के योग के कारण उच्चज्वार-नीचाज्वार के चरम से है.​
    • यह ज्वार सामान्यतः हर महीने एक बार नहीं, बल्कि लगभग हर चंद्रमा-पूर्णिमा चक्र में उत्पन्न होता है
    • प्रत्येक चंद्र महीने के दौरान यह उच्च-नीचाएं बदलती रहती हैं क्योंकि दूरी और कोण में små बदलाव आते हैं.​
  • संदर्भ-संकेत
    • स्प्रिंग ज्वार की परिभाषा और कारणों के बारे में संक्षेपण: पूर्णिमा/अमावस्या के दौरान सूर्य-चंद्रमा-पृथ्वी एक सीध में होने पर उच्च ज्वार आता है.​
    • नीप ज्वार की स्थिति और कारण: सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के समकोण पर हों तो नीप ज्वар बनते हैं.​
    • स्प्रिंग-ज्वार की व्याख्या और सामान्य विवरण: सूर्य-चंद्रमा-पृथ्वी तीनों एक ही दिशा में होने पर गुरुत्वाकर्षण संयुक्त होकर जलस्तर में बड़े परिवर्तन लाता है.​

4. सूर्य और चंद्रमा के आकर्षण के कारण, समुद्र का पानी एक दिन में कितनी बार ऊपर चढ़ता और नीचे उतरता है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) दो
Solution:
  • सूर्य और चंद्रमा के आकर्षण शक्तियों के कारण समुद्र का पानी दिन में दो बार ऊपर चढ़ता और नीचे उतरता है।
  • पृथ्वी पर प्रत्येक स्थान पर प्रतिदिन 12 घंटे 26 मिनट के बाद ज्वार तथा ज्वार के 6 घंटे 13 मिनट बाद भाटा आता है।
  • ज्वार-भाटा क्या है
    • ज्वार-भाटा समुद्र के सतह के ऊँचाई में समय के साथ आने-जाने की लयबद्ध वृद्धि और गिरावट है.​
    • यह गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उत्पन्न होती है जो चंद्रमा और सूर्य पृथ्वी पर डालते हैं
    • पृथ्वी के घूर्णन के साथ मिलकर समुद्री जल को खींचते-खींचते उछाल बनाते हैं.​​
  • तटों पर नज़र आने वाले उच्च और निम्न ज्वार
    • उच्च ज्वार तब होता है जब जलस्तर उच्चतम पर पहुँचता है; निम्न ज्वार तब जब जलस्तर निम्नतम पर रहता है.​
    • नीचे-चढ़ाई/ऊपर-चढ़ाई के क्रम को ही कई स्रोतों में ज्वार-भाटा कहा गया है
    • जबकि पूर्णिमा/अमावस्या के समय ज्वार अधिक होता है (वसंत ज्वार) और पहली/आखिरी तिमाही में कमजोर होता है (नीप ज्वार).​
  • क्यों दो बार प्रति दिन
    • पृथ्वी पर हर दिन लगभग दो चक्र अंतराल के साथ जलस्तर बदलता है
    • क्योंकि एक बार चंद्रमा के ऊपर से गुजरना और दूसरी बार उसके विपरीत दिशा से गुजरना पानी को ऊँचा बनाता है
    • इसी क्रम को गुरुत्वाकर्षण बल के साथ पृथ्वी के सतह पर देखा जाता है.​
  • समय की रचना और स्थानीय विविधता
    • वास्तविक आवृत्ति और ऊँचाई टाइमिंग स्थान-के-स्थान भिन्न हो सकती है
    • क्योंकि समुद्रधारा, तटरेखा की आकृति, जलवायु, और अन्य कारणों से ज्वार-भाटा का स्तर और अंतराल क्षेत्रीय तौर पर अलग होते हैं।
    • सामान्यतः दो बारDaily ज्वार-भाटा देखा जाता है
    • कुछ स्थानों पर चौड़ेकाल या कई टाइड-टाइम्स भी संभव हैं.​
  • ज्वार-भाटा पर आधारित प्रासंगिक उदाहरण
    • उच्च ज्वार अक्सर बंदरगाहों में प्रवेश और मछली पकड़ने के लिए उपयोगी होता है
    • नीप ज्वार कुछ स्थानों पर पानी के कम होने से जलीय जीवों के लिए अवसर पैदा कर सकता है.​
    • सूर्य-चन्द्रमा की राशियाँ (पूर्णिमा/अमावस्या) पर ज्वार अधिक pronounced होते हैं
    • जिसे वसंत ज्वार कहा जाता है; हालाँकि पहली/आखिरी क्वार्टर में ज्वार सामान्य से कम होता है.​
  • उत्पादन-युक्त संकल्पना
    • आप अगर किसी खास स्थान का ज्वार-भाटा विवरण जानना चाहें
    • तो वहाँ के समुद्री-टाइड टेबल से उच्च-ज्वार और निम्न-ज्वार timings, ऊँचाई, और प्रभाव देखे जा सकते हैं.​
    • यदि आप चाहें, तो किसी विशिष्ट तटीय क्षेत्र के लिए नवीनतम ज्वार-भाटा तालिका (tidal chart) निकाल कर दे सकता हूँ।
  • संभावित उपयोगी प्रश्न
    • किस तटीय क्षेत्र के लिए आप ज्वार-भाटा जानकारी चाहते हैं?
    • क्या आप उच्च ज्वार और निम्न ज्वार की अनुमानित ऊँचाई चाहिए, या सिर्फ दिन में कितनी बार होता है, यह जानना चाहते हैं?
    • आप चाहते हैं कि मैं आपके लिए एक छोटा उदाहरण-तालिका बनाकर दिखाऊँ जिसमें दो दैनिक ज्वार-भाटा के उन्नयन-स्तरें शामिल हों?

5. समुद्र के जल स्तर की आवधिक वृद्धि और गिरावट को क्या कहते हैं? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) ज्वार
Solution:
  • समुद्र के जल स्तर की आवधिक वृद्धि को ज्वार और गिरावट को भाटा कहते हैं।
  • \ज्वार तथा भाटा की उत्पत्ति सूर्य एवं चंद्रमा के आकर्षण बल तथा पृथ्वी पर उत्पन्न होने वाले दो बलों अभिकेंद्रीय बल एवं अपकेंद्रीय बल के परिणामी बल के फलस्वरूप होती है।
  • अतः निकटतम उत्तर विकल्प (b) सही उत्तर है।
  • ज्वार-भाटा क्या है
    • परिभाषा: समुद्र के जल स्तर में आवधिक वृद्धि और गिरावट जिसे सामान्य बोलचाल में ज्वार-भाटा कहा जाता है.​
    • कारण: यह मुख्यतः चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बलों के समुद्री जल पर होने वाले खींचाव के कारण होता है.​
  • घटना का तंत्र
    • उच्च ज्वार (High Tide): समुद्र के जल स्तर का उच्चतम मौका जब किसी क्षेत्र में जलस्तर ऊपर उठता है.​
    • निम्न ज्वार (Low Tide): जलस्तर का नीचे जाना, जब समुद्र के किनारे सूखने लगते हैं.​
    • पृथ्वी-चंद्रमा-सूर्य के गुरुत्वीय स्पंदन: चंद्रमा की कक्षा के अनुसार जल का आवर्तक Redistribution होता है
    • सूर्य की दूरी/स्थिति के अनुसार थोड़ा भिन्नता आती है.​
  • आवधिकता और समय-रेखा
    • एक दिन में दो बार ज्वार-भाटा चक्र होते हैं: उच्च और निम्न ज्वार एक-दूसरे के क्रम में आते हैं.​
    • सामान्य समयांतराल: औपचारिक रूप से लगभग 12 घंटे और 25 मिनट का दोहराव क्रम माना गया है
    • सटीक समय स्थानीय भूगर्भिक स्थितियों, तटरेखा और समुद्री गहराई पर निर्भर कर बदल सकता है.​
  • महत्त्व और प्रभाव
    • तटीय अर्थव्यवस्था: मछली पकड़ना, बंदरगाह गतिविधियाँ, तटीय पारी आदि ज्वार-भाटे द्वारा प्रभावित होते हैं
    • कई स्थानों पर ज्वार-मौसम और खाने-पीने की आदतें प्रभावित होती हैं.​
    • पारिस्थितिकी: ज्वार-भाटा चटानी क्षेत्रों, नदियों के मुहाने और उभयचर/समुद्री जीवन के लिए आवास बनाते हैं
    • यह जलप्लावन के चक्र और भोजन श्रृंखला को भी आकार देता है.
    • जलवायु इंटरैक्शन: जलवायु परिवर्तन कुछ क्षेत्रों में समुद्र-स्तर (स्वाभाविक ज्वार के साथ) की स्थानीय असमानताओं को बढ़ा सकता है
    • लेकिन ज्वार-भाटा असंख्य स्थानी रेखाओं पर एक मौलिक प्राकृतिक चक्र है.​
  • विविध अवसर और सावधानियाँ
    • तटीय योजना: तटरेखा के पास की शहर-रचना, बाढ़-प्रिवेंशन, और क्विक-रिस्पांस योजनाओं में ज्वार-भाटा चक्र का ज्ञान जरूरी है.​
    • पर्यटन और संस्कृति: कई स्थानों पर ज्वार-भाटा के कारण तट पर स्थित गतिविधियाँ बदलती हैं
    • कुछ पर्यटन स्थल ज्वार के समय-निर्धारण पर निर्भर रहते हैं.​

6. ....... के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी की सतह पर ज्वार-भाटे आते हैं। [MTS (T-I) 19 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) केवल सूर्य एवं चंद्रमा
Solution:
  • सूर्य और चंद्रमा के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल तथा पृथ्वी पर उत्पन्न होने वाले दो बलों अभिकेंद्रीय तथा अपकेंद्रीय बलों के परिणामी बल के कारण पृथ्वी की सतह पर महासागरों से उत्पन्न होकर ज्वार-भाटे आते हैं। अतः सही उत्तर विकल्प (b) होगा।
  • गुरुत्वाकर्षण खिंचाव कैसे काम करता है
    • चंद्रमा और सूर्य की गुरुत्वाकर्षण शक्तियाँ पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों पर अलग-अलग प्रभाव डालती हैं।
    • जिस हिस्से पर गुरुत्वाकर्षण अधिक होता है
    • वहाँ जल उभरकर उन्नत होता है—यह प्रमुख ज्वार है।
    • पृथ्वी के विपरीत हिस्से पर भी एक उभार बनता है
    • जिसका कारण पृथ्वी के घूमने की सहज centripetal प्रभाव से जल की inertia है।
    • इन दोनों उभारों के कारण पृथ्वी पर दो असमार्गित जलक्षेत्र बनते हैं
    • एक पास में उभार और एक दूरी पर उभार, जिससे एक ही समय में दो क्रिस्टल-ज्वार/भाटा के चक्र बनते हैं।
  • चंद्रमा बनाम सूर्य की भूमिका
    • चंद्रमा Earth के सबसे निकट है, इसलिए उसका गुरुत्वाकर्षण खिंचाव अधिक प्रभावी होता है
    • ज्वार-भाटा के उच्चतम स्तर अक्सर चंद्रमा के करीब और दूर वाले हिस्सों पर दिखाई देता है।
    • सूर्य की गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी से काफी दूर है
    • लेकिन इसका द्रव्यमान विशाल होने के कारण यह भी महत्वपूर्ण होता है
    • सूर्य-चंद्रमा का संयोजन ज्वार-भाटा के उच्चतर पैटर्न (बृहत् ज्वार) को जन्म देता है, खासकर नव/पूर्ण चंद्र स्थितियों में।
    • जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी लगभग एक सीधी रेखा में होते हैं
    • तो उनके गुरुत्वाकर्षण खिंचाव एक-दूसरे के साथ मिलकर अधिक ऊँचे ज्वार बना देते हैं।
    • जब वे एक समकोण (90 डिग्री) बनाते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण बल एक दूसरे के विपरीत दिशा में कार्य करते हैं
    • निम्न ज्वार अधिक सामान्य हो सकता है।
  • स्थानीय प्रभाव
    • जल-अवरोध (coastlines), जल गहराई (depth), समुद्री तटों के आकार, अंडरकस्टर (seafloor topography), और समुद्री धाराओं का प्रभाव ज्वार-भाटा के स्थानीय स्तर पर ऊँचाई और अवधि को निर्धारित करता है।
    • कुछ स्थानों पर द्वि-ज्वारीय पैटर्न होते हैं
    • एक दिन में दो उच्च ज्वार और दो निम्न ज्वार हो सकते हैं
    • जबकि अन्य जगहों पर यह प्रक्रियात्मक रूप से एक-आधारिक (semi-diurnal) या एक-दिशा (diurnal) पैटर्न दिखाते हैं।
  • उच्च ज्वार और निम्न ज्वार
    • उच्च ज्वार: जब चंद्रमा/सूर्य का गुरुत्वाकर्षण जल पर अधिक प्रभाव डालता है, तो जलस्तर ऊँचा होता है।
    • निम्न ज्वार: जब गुरुत्वाकर्षण बल का संयुक्त प्रभाव कम होता है या तुलनात्मक रूप से घटता है, जलस्तर घटता है।
  • प्रभावी समय और आवृत्ति
    • सामान्यतः पृथ्वी पर दो जलचक्र (diurnal/semidiurnal) का संयोजन चलता है
    • जिसकी अवधि तट-निर्भर होती है।
    • चंद्रमा के चरण (new moon/full moon) के अनुसार उच्च ज्वार की ऊँचाई बढ़ सकती है, जिसे बृहत् ज्वार कहा जाता है।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण
    • ज्वार-भाटा समुद्र के गतिशीलता, नदी-घाटों, और समुद्री जीवन के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है।
    • पूंजीकरण के लिए मौसम विज्ञान और भू-भौतिकी में तटरेखा के मॉडलिंग में ज्वार-भाटा की गणनाएँ उपयोगी होती हैं।
  • संक्षिप्त उदाहरण
    • नव चंद्रमा के समय चंद्रमा और सूरज के गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी के साथ मिलकर अधिकतम संयुक्त बल बनाते हैं
    • जिससे उच्च ज्वार और निम्न ज्वार दोनों कहीं-कहीं अधिक ऊँचे दिखते हैं।
    • पूर्ण चंद्रमा के समय भी यह प्रभाव रहता है
    • क्योंकि चंद्रमा और सूर्य एक सीधी रेखा में होते हैं; यह भी उच्च ज्वार की स्थिति बनाता है।