Solution:सुल्तान गयासुद्दीन बलबन (1266-1287 ई.) ने दिल्ली सल्तनत में नौरोज (पारंपरिक फारसी नव वर्ष उत्सव) मनाने की प्रथा प्रारंभ की। यह प्रथा उसके राजत्व के ईरानी सिद्धांत का हिस्सा थी।बलबन ने यह भव्य उत्सव इसलिए अपनाया ताकि सुल्तान की प्रतिष्ठा को दैवीय सम्मान और भव्यता मिल सके, जिससे दरबार में कठोर अनुशासन स्थापित हो सके और आम जनता में सुल्तान का आतंक कायम रहे।
- दिल्ली सल्तनत (फ़ारसी:) मध्यकालीन भारत का एक सल्तनत था, जिसका राज भारतीय उपमहाद्वीप के प्रमुख भाग में था। ये पाँच वंश थे-
- गुलाम वंश (1206 - 1290), ख़िलजी वंश (1290- 1320), तुग़लक़ वंश (1320 - 1414), सैयद वंश (1414 - 1451), तथा लोदी वंश (1451 - 1526)। इनमें से पहले चार वंश मूल रूप से तुर्क थे और आखरी अफगान था।
- मुहम्मद ग़ौरी का गुलाम क़ुतुबुद्दीन ऐबक, गुलाम वंश का पहला सुल्तान था। ऐबक का साम्राज्य पूरे उत्तर भारत तक फैला था।
- इसके बाद ख़िलजी वंश ने मध्य भारत पर कब्ज़ा किया लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप को संगठित करने में नाकाम रहा।
- इसने भारतीय-इस्लामिक वास्तुकला के उदय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।दिल्ली सल्तनत मुस्लिम इतिहास के कुछ कालखंडों में है जहां किसी महिला ने सत्ता संभाली।
- 1526 में मुगल सल्तनत द्वारा इस साम्राज्य का अंत हुआ।