परमाणु संरचना (रसायन विज्ञान)

Total Questions: 26

1. 1932 में कौन-सा संख्यात्मक पैमाना पेश किया गया था, जिसमें फ्लुओरिन की विद्युत ऋणात्मकता 4.0 निर्धारित की थी? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) पॉलिंग स्केल
Solution:
  • 1932 में पॉलिंग स्केल (एक संख्यात्मक मान) की सहायता से यह ज्ञात किया गया
  • फ्लोरीन की विद्युत ऋणात्मकता 4.0 थी।
  • पॉलिंग स्केल एक विमाहीन राशि की माप प्रदान करती थी।
  • पॉलिंग स्केल को X, प्रतीक से प्रदर्शित किया जाता है।
  • यह पैमाना रासायनिक बंधों में इलेक्ट्रॉनों को परमाणु नाभिक की ओर आकर्षित करने की प्रवृत्ति को मापता है
  • जो रसायन विज्ञान में सबसे व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
  • विकास और इतिहास
    • लिनस पॉलिंग ने 1932 में अपनी पुस्तक "The Nature of the Chemical Bond" में इस पैमाने को औपचारिक रूप दिया
    • हालांकि कुछ स्रोतों में प्रारंभिक कार्य 1930 के दशक की शुरुआत से जुड़ा बताते हैं।
    • पॉलिंग ने बंध ऊर्जा (bond energies) के अंतर का उपयोग करके तत्वों की विद्युत ऋणात्मकता की गणना
    • जहां फ्लुओरिन को सबसे अधिक ऋणात्मक तत्व मानकर 4.0 का सांकेतिक मान दिया गया।
    • यह पैमाना आयामहीन है, अर्थात इसका कोई SI मात्रक नहीं है
    • मूल रूप से सहसंयोजक बंधों पर आधारित है।
  • गणना विधि
    • पॉलिंग पैमाने पर दो तत्व A और B के बीच सहसंयोजक बंध ऊर्जा D(A−B) को उनके होमोन्यूक्लियर बंध ऊर्जाओं D(A−A) और D(B−B) से तुलना करके Δ (डेल्टा) निकाला जाता है:
    • फिर, विद्युत ऋणात्मकता का अंतर ∣χA−χB∣=Δ/96.49 (किलो कैलोरी प्रति मोल में) से प्राप्त होता है। फ्लुओरिन को 4.0 (या परिष्कृत मान 3.98) मानकर अन्य तत्वों के मान निर्धारित किए जाते हैं
    • जैसे ऑक्सीजन 3.44, नाइट्रोजन 3.04, कार्बन 2.55, हाइड्रोजन 2.20 और सीज़ियम 0.79।
  • महत्वपूर्ण विशेषताएं
    • आवर्त प्रवृत्ति: विद्युत ऋणात्मकता आवर्त सारणी में बाएं से दाएं (प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने से) और नीचे से ऊपर (परमाणु त्रिज्या घटने से) बढ़ती है।
    • फ्लुओरिन की प्रधानता: फ्लुओरिन सबसे अधिक ऋणात्मक (4.0) होने से अधिकांश बंध ध्रुवीय बनाता है
    • जबकि फ्रांसियम सबसे कम (लगभग 0.7) है।
    • उपयोग: यह पैमाना बंध प्रकार (सहसंयोजक, आयनिक, ध्रुवीय) की भविष्यवाणी, अणु आकार और अभिक्रियाशीलता समझने में सहायक है।

2. 1940 के दशक में आणविक ज्यामिति और संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बीच संबंध का विचार सबसे पहले किसने प्रस्तुत किया था? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) सिजविक और पॉवले
Solution:
  • 1940 के दशक में आणविक ज्यामिति और संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बीच संबंध का विचार सर्वप्रथम सिजविक और पॉवेल (Sidgwick and Powell) ने प्रस्तुत किया था।
  • इस विचार को सब VSEPR (वैलेंस शेल इलेक्ट्रॉन पेयर रिपल्सन) के नाम से जाना जाता है।
  • नेविल सिडगविक और हर्बर्ट पॉवेल ने सबसे पहले प्रस्तुत किया यह विचार।
    •  उन्होंने 1940 में अपने कार्य में सुझाव दिया
    • केंद्रीय परमाणु के आसपास इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या और व्यवस्था अणु के आकार को निर्धारित करती है
    • जो इलेक्ट्रॉन युग्मों के आपसी प्रतिकर्षण पर आधारित था।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • इससे पहले, 1939 में जापानी रसायनशास्त्री रयुतारो त्सुचिडा (Ryutaro Tsuchida) ने भी आणविक ज्यामिति और संयोजक इलेक्ट्रॉन युग्मों के बीच सहसंबंध का सुझाव दिया था
    • लेकिन सिडगविक-पॉवेल का योगदान 1940 के दशक में पश्चिमी रसायनशास्त्र में इसकी नींव माना जाता है।
    • उनका मॉडल सरल था और मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉन जोड़ों की संख्या पर केंद्रित था
    • बिना जटिल गणनाओं के। यह विचार बाद में वैलेंस शेल इलेक्ट्रॉन पेयर रेपल्शन (VSEPR) सिद्धांत का आधार बना।
  • VSEPR सिद्धांत का विकास
    • 1957 में, रोनाल्ड जे. गिलेस्पी (Ronald J. Gillespie) और रोनाल्ड साइक्स न्योहोम (Ronald S. Nyholm) ने इस विचार को विस्तारित किया
    • जिसे गिलेस्पी-न्योहोम मॉडल या VSEPR कहा जाता है।
    • VSEPR मॉडल में, केंद्रीय परमाणु के संयोजकता कोश में बंध युग्म (bonding pairs) और एकाकी युग्म (lone pairs) के प्रतिकर्षण को क्रमबद्ध किया गया
    • एकाकी-एकाकी > एकाकी-बंध > बंध-बंध।
    • इससे अणुओं जैसे H2O (वक्र), NH3 (त्रिभुजाकार पिरामिड) और BF3 (त्रिभुजाकार समतल) की ज्यामिति की सटीक भविष्यवाणी संभव हुई।
  • महत्वपूर्ण योगदान और प्रभाव
    • सिडगविक-पॉवेल का 1940 का कार्य X-रे क्रिस्टलोग्राफी डेटा पर आधारित था
    • जो दिखाता था कि इलेक्ट्रॉन संख्या ज्यामिति को नियंत्रित करती है।
    • यह क्वांटम यांत्रिकी से पहले का सरल मॉडल था, जो छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी साबित हुआ।
    • आज VSEPR रसायनशास्त्र की पाठ्यपुस्तकों में मूलभूत है
    • जो 2 से 7 इलेक्ट्रॉन युग्मों तक की ज्यामितियों (रैखिक, त्रिभुजाकार, द्विपिरामिडीय आदि) की व्याख्या करता है।
    • इसकी सरलता ने कार्बनिक और अकार्बनिक रसायन में क्रांति ला दी।

3. ऑक्सीजन का परमाणु क्रमांक ....... है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (I-पाली), CGL (T-I) 18 अप्रैल, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 8
Solution:
  • ऑक्सीजन का परमाणु क्रमांक 8 है।
  • परमाणु क्रमांक का अर्थ
    • परमाणु क्रमांक किसी तत्व के नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या को दर्शाता है
    • जो ऑक्सीजन के मामले में 8 है।
    • इससे तत्व की पहचान और रासायनिक गुण निर्धारित होते हैं।
    • ऑक्सीजन में मध्यम परमाणु भार लगभग 16 u होता है
    • जिसमें 8 प्रोटॉन और 8 न्यूट्रॉन सामान्यतः पाए जाते हैं।
  • इलेक्ट्रॉन विन्यास
    • ऑक्सीजन का इलेक्ट्रॉन विन्यास 1s22s22p4 है
    • जिसमें कुल 8 इलेक्ट्रॉन वितरित होते हैं। पहले कोश (K) में 2 इलेक्ट्रॉन, दूसरे कोश (L) में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
    • यह विन्यास इसे अभिक्रियाशील बनाता है, क्योंकि बाहरी कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  • भौतिक गुण
    • ऑक्सीजन एक रंगहीन, गंधरहित और स्वादहीन गैस है
    • जो सामान्य तापमान पर O₂ के रूप में द्विपरमाणुक अवस्था में रहती है।
    • यह चैल्कोजन समूह (समूह 16) का हिस्सा है और पृथ्वी के वायुमंडल का लगभग 21% बनाती है।
    • जीवन के लिए आवश्यक, यह श्वसन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • रासायनिक महत्व
    • ऑक्सीजन अत्यधिक अभिक्रियाशील अधातु है, जो ज्वलन को समर्थन देती है
    • अधिकांश तत्वों के साथ संयोजन बनाती है। इसके तीन स्थिर समस्थानिक हैं
    • O-16 (सबसे प्रचुर), O-17 और O-18। पृथ्वी की पपड़ी में द्रव्यमान के आधार पर यह सबसे प्रचुर तत्व है।

4. निम्नलिखित में से किस तत्व का परमाणु क्रमांक सबसे अधिक है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) सोना
Solution:
  • लोहा (Fe) का परमाणु क्रमांक 26, तांबा (Cu) का 29, चांदी (Ag) का 47 तथा सोना (Au) का 79 है।
  • अतः स्पष्ट है कि सबसे अधिक परमाणु क्रमांक सोना का है।
  • परमाणु क्रमांक की परिभाषा
    • परमाणु क्रमांक (Z) किसी तत्व के नाभिक में प्रोटॉनों की कुल संख्या को दर्शाता है
    • जो तत्वों को एक-दूसरे से अलग करता है।
    • आवर्त सारणी में तत्वों को क्रमबद्ध रूप से Z के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित किया गया है
    • इसलिए Z=118 वाला तत्व सबसे अंतिम ज्ञात तत्व है।
    • वर्तमान में 118 तत्वों को आधिकारिक मान्यता प्राप्त है।
  • ओगनेसॉन के गुण
    • ओगनेसॉन नोबल गैस समूह (समूह 18) का तत्व है
    • लेकिन इसका व्यवहार अन्य नोबल गैसों से भिन्न होने की संभावना है
    • क्योंकि भारी परमाणु के कारण यह संभवतः एक ठोस या तरल हो सकता है।
    • इसका सबसे स्थिर समस्थानिक Og-294 है
    • जिसका अर्ध-आयुकाल मात्र 0.7 मिलीसेकंड है।
    • यह रूस के वैज्ञानिक यूरी ओगनेसियन के सम्मान में नामित है।
  • प्राकृतिक बनाम सिंथेटिक तत्व
    • प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्वों में सबसे अधिक परमाणु क्रमांक यूरेनियम (U, Z=92) का है
    • जो पृथ्वी की परत में दुर्लभ मात्रा में विद्यमान है। Z=93 से ऊपर के तत्व ट्रांसयूरेनियम श्रेणी के हैं
    • कण त्वरक जैसे प्रयोगों द्वारा संश्लेषित किए जाते हैं।
    • Oganesson 2006 में रशियन वैज्ञानिकों द्वारा खोजा गया था।
  • आवर्त सारणी का विस्तार
    • 118 तत्वों के बाद Z=119 और Z=120 वाले तत्वों की खोज जारी है
    • लेकिन अभी तक स्थिर रूप नहीं बनाए जा सके।
    • ये तत्व रिलेटिविस्टिक प्रभावों के कारण अप्रत्याशित गुण प्रदर्शित करते हैं
    • जैसे अपेक्षित इलेक्ट्रॉन विन्यास में विचलन।

5. आवर्त सारणी में उस 87वें तत्व का क्या नाम है, जिसकी कोई ज्ञात जैविक भूमिका नहीं है, क्योंकि इसका आधा जीवन काल केवल 22 मिनट का है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) फ्रैंशियम
Solution:
  • फ्रैंशियम की खोज मॉग्र्युराइट पेरी (Marguerite Peroy) के द्वारा की गई थी।
  • यह S ब्लॉक का तत्व है। फ्रैंशियम (Fr) एक अत्यधिक रेडियोधर्मी धातु है।
  • इसका परमाणु क्रमांक 87 है। यह अपनी रेडियोधर्मिता के कारण विषैला होता है।
  • इसका अर्ध आयुकाल केवल 22 मिनट है।
  • खोज और इतिहास
    • फ्रांसियम की खोज 1939 में फ्रांसीसी रसायनशास्त्री मार्गुएराइट पेरी ने पेरिस विश्वविद्यालय में की थी।
    • उन्होंने यूरेनियम खनिज से इस तत्व को रेडियोएक्टिव क्षय श्रृंखला के माध्यम से अलग किया।
    • इसका नाम फ्रांस देश के सम्मान में रखा गया, और यह क्षारीय धातुओं का सबसे भारी तत्व है।
  • गुणधर्म
    • फ्रांसियम एक चांदी जैसी चमक वाली मुलायम धातु है
    • जो हवा में तुरंत ऑक्सीडित हो जाती है। इसका परमाणु विन्यास [Rn] 7s¹ है
    • जो इसे समूह 1 (क्षारीय धातु) में रखता है। इसका गलनांक लगभग 27°C और क्वथनांक 677°C अनुमानित है
    • लेकिन रेडियोधर्मिता के कारण सटीक मापन कठिन है।
    • पृथ्वी की सतह पर यह अत्यंत दुर्लभ है, मात्र 20-30 ग्राम कुल मात्रा में मौजूद।
  • रेडियोधर्मिता और अस्थिरता
    • फ्रांसियम के सभी समस्थानिक कृत्रिम या क्षय उत्पाद हैं
    • प्राकृतिक रूप से यह एक्टिनियम श्रृंखला में थोड़ी मात्रा में बनता है।
    • सबसे लंबे आधा-आयुकाल वाला ²²³Fr अल्फा क्षय से विकीर्ण करता है
    • जिससे इसकी मात्रा तेजी से घट जाती है।
    • इस कारण जैविक प्रणालियों में इसका कोई स्थायी प्रभाव या भूमिका नहीं है
  • अन्य तथ्य
    • यह तत्व प्रयोगशालाओं में कण त्वरक द्वारा संश्लेषित किया जाता है
    • लेकिन व्यावहारिक उपयोग सीमित है।
    • अन्य भारी क्षारीय धातुओं जैसे सीजियम से तुलना में फ्रांसियम अधिक अभिक्रियाशील माना जाता है।

6. समूह 13 के किस तत्व की परमाणु संख्या 113 है और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Rn] 5f¹⁴6d¹⁰7s²7p¹ है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) निहोनियम
Solution:
  • समूह 13 के निहोनियम तत्व की परमाणु संख्या 113 है
  • इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Rn] 5f¹⁴6d¹⁰7s²7p¹ है।
  • निहोनियम का रासायनिक प्रतीक Nh है। यह अत्यधिक रेडियोधर्मी तत्व है।
  • खोज और नामकरण
    • निहोनियम की खोज 2004 में जापान के RIKEN संस्थान के वैज्ञानिकों, कोशिभी मोरिता की टीम ने की।
    • उन्होंने कैल्शियम-48 आयनों को जिंक-70 लक्ष्य पर टकराकर इसे पहली बार बनाया।
    • 2016 में IUPAC ने इसे आधिकारिक नाम "निहोनियम" दिया
    • जो जापान (निहोन) के सम्मान में है। इससे पहले इसे अनअनट्रियम (Uut) कहा जाता था।
  • भौतिक और रासायनिक गुण
    • निहोनियम एक संक्रमण धातु माना जाता है, लेकिन समूह 13 के कारण p-ब्लॉक तत्व है।
    • इसका अनुमानित घनत्व 16 g/cm³ है, और यह संभवतः चांदी-श्वेत रंग का हो।
    • सबसे स्थिर समस्थानिक ²⁸⁶Nh का आधा जीवनकाल मात्र 9.5 सेकंड है
    • जो अल्फा क्षय द्वारा विघटित होता है।
    • रिलेटिविस्टिक प्रभावों के कारण इसकी रासायनिक अभिक्रियाशीलता अप्रत्याशित हो सकती है
    • जैसे 7s इलेक्ट्रॉनों की स्थिरता।
  • समूह 13 में स्थान
    • समूह 13 के अन्य तत्व (बोरॉन, एल्यूमीनियम, गैलियम, इंडियम, थैलियम) धातु या धातुक हैं
    • लेकिन निहोनियम सुपरहेवी होने से अत्यंत अस्थिर है।
    • इस समूह के तत्वों में ns² np¹ विन्यास सामान्य है
    • जो निहोनियम पर भी लागू होता है। हालांकि, भारी तत्वों में इनर्ट-पेयर प्रभाव बढ़ता है
    • जिससे +1 ऑक्सीकरण अवस्था प्रमुख हो सकती है।
  • अन्य तथ्य
    • निहोनियम का उत्पादन अत्यंत कठिन है; अब तक मात्र कुछ परमाणु बनाए गए हैं।
    • इसका कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं है
    • लेकिन यह परमाणु भौतिकी और रिलेटिविस्टिक रसायनशास्त्र के अध्ययन में महत्वपूर्ण है।
    • भविष्य में और अधिक समस्थानिकों की जांच से इसके गुण स्पष्ट हो सकते हैं।

7. निम्नलिखित में से कौन एक परमाणुक (monoatomic) है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) हीलियम
Solution:
  • हीलियम का परमाणु क्रमांक 2 है। यह एक परमाणुक (Monoatomic) है।
  • हीलियम एक अक्रिय गैस है। हीलियम का प्रतीक He है।
  • यह एक रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन, गैर- विषैली, निष्क्रिय गैस है।
  • एक परमाणुक तत्व क्या हैं?
    • एक परमाणुक तत्व या अणु वह होता है जिसमें केवल एक ही परमाणु मौजूद होता है
    • बिना किसी सहसंयोजक बंधन (covalent bond) के। नोबल गैसें पूर्णतः octet rule को पूरा करती हैं
    • इसलिए ये अकेले ही स्थिर रहती हैं और अन्य तत्वों से आसानी से प्रतिक्रिया नहीं करतीं।
    • हीलियम में केवल duet rule लागू होता है (2 इलेक्ट्रॉन), लेकिन बाकी में 8 valence इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  • नोबल गैसों की सूची
    • मानक स्थितियों में नोबल गैसें गैसीय रूप में एक परमाणुक होती हैं:
    • हीलियम (He)
    • नियॉन (Ne)
    • आर्गन (Ar)
    • क्रिप्टॉन (Kr)
    • ज़ेनॉन (Xe)
    • रेडॉन (Rn)
    • ओगनेसन (Og) सैद्धांतिक रूप से एक परमाणुक हो सकता है, लेकिन यह ठोस हो सकता है
  • अन्य तत्व क्यों नहीं हैं एक परमाणुक?
    • हाइड्र्रोजन (H₂), ऑक्सीजन (O₂), नाइट्रोजन (N₂), क्लोरीन (Cl₂) आदि द्विपरमाणुक (diatomic) होते हैं
    • क्योंकि वे स्थिरता के लिए जोड़ी बनाते हैं। ओजोन (O₃) त्रिपरमाणुक है।
    • धातुएँ जालक संरचना (lattice) में रहती हैं। केवल नोबल गैसें अकेले स्थिर हैं।
  • रासायनिक गुणधर्म
    • ये गैसें रासायनिक रूप से निष्क्रिय (inert) होती हैं
    • लेकिन उच्च दाब या विशेष परिस्थितियों में ज़ेनॉन और क्रिप्टॉन यौगिक बना सकते हैं
    • (जैसे XeF₂)। हीलियम सबसे हल्का है और गुब्बारों में भरा जाता है। रेडॉन रेडियोएक्टिव है।

8. तीसरे कक्ष या M-कोश में अधिकतम कितने इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) 18
Solution:
  • तीसरे कक्ष या M कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या
  • = 2n² = 2 x 3² =2×9=18
  • जहां n = कोश की संख्या
  • कोश क्या होते हैं?
    • परमाणु में इलेक्ट्रॉन विभिन्न ऊर्जा स्तरों या कोशों में व्यवस्थित होते हैं
    • जिन्हें K, L, M, N आदि नाम दिए जाते हैं। M-कोश तीसरा ऊर्जा स्तर है
    • जिसका मुख्य क्वांटम संख्या n=3 है ।
    • प्रत्येक कोश में इलेक्ट्रॉन Pauli अपवर्जन सिद्धांत और Hund नियमों का पालन करते हुए भरते हैं।
  • इलेक्ट्रॉन क्षमता का सूत्र
    • किसी कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2n2 सूत्र से निकाली जाती है
    • जहाँ n कोश संख्या है। M-कोश के लिए n=3
    •  इसलिए अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 2×32=2×9=18
    • यह सूत्र बोहर मॉडल पर आधारित है और क्वांटम यांत्रिकी से व्युत्पन्न है।
  • M-कोश की संरचना
    • M-कोश में तीन उपकोश होते हैं: 3s, 3p और 3d।
    • 3s उपकोश: अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन।
    • 3p उपकोश: अधिकतम 6 इलेक्ट्रॉन।
    • 3d उपकोश: अधिकतम 10 इलेक्ट्रॉन।
    • कुल: 2 + 6 + 10 = 18 इलेक्ट्रॉन ।
    • प्रत्येक उपकोश में कक्षक (orbitals) होते हैं
    • जहाँ s=1, p=3, d=5 कक्षक, और प्रत्येक कक्षक में 2 इलेक्ट्रॉन (उभयकालिक) भरते हैं।
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • किस्मियम (atomic number 76) में M-कोश लगभग 18 इलेक्ट्रॉन से भर जाता है।
    • हालांकि, octet नियम के कारण अधिकांश तत्वों में M-कोश आंशिक रूप से भरा रहता है
    • यह वितरण रासायनिक गुणों को निर्धारित करता है।

9. बोरियम की परमाणु संख्या क्या है, जिसका नाम क्वांटम सिद्धांत के संस्थापकों में से एक भौतिक विज्ञानी नील्स बोर के नाम पर रखा गया है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 107
Solution:
  • बोरियम की परमाणु संख्या 107 है
  • जिसका नाम क्वांटम सिद्धांत के संस्थापकों में से एक भौतिक विज्ञानी नील्स बोर के नाम पर रखा गया है
  • बोरियम को Bh प्रतीक से प्रदर्शित किया जाता है। इसका सबसे स्थायी समस्थानिक 270 Bh है।
  • बोहरियम का परिचय
    • बोहरियम एक सिंथेटिक सुपरहैवी तत्व है जिसका रासायनिक प्रतीक Bh है।
    • यह ट्रांजिशन धातुओं के समूह 7 और आवर्त 7 में स्थित है। 1981 में जर्मन वैज्ञानिकों की टीम ने इसे पहली बार GSI
    • हेल्महोल्ट्ज़ सेंटर फॉर हेवी आयन रिसर्च में बेरियम-209 और क्रोमियम-54 के संलयन से संश्लेषित किया
    • यह तत्व प्राकृतिक रूप से पृथ्वी पर नहीं मिलता और अत्यधिक रेडियोधर्मी है
    • जिसका सबसे स्थिर आइसोटोप 270Bh का अर्ध-आयु मात्र 61 सेकंड है।
  • नामकरण का इतिहास
    • बोहरियम का नाम नील्स बोह्र (1885-1962) के नाम पर पड़ा
    • जो क्वांटम यांत्रिकी के जनक माने जाते हैं।
    • बोह्र ने 1913 में परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया, जिसमें इलेक्ट्रॉन निश्चित कक्षाओं में घूमते हैं।
    • सोवियत वैज्ञानिकों ने इसे पहले नील्सबोहrium नाम दिया
    • लेकिन IUPAC ने 1997 में बोहरियम नाम स्वीकृत किया
    • यह नामकरण ट्रांसयुरेनियम तत्वों की परंपरा का हिस्सा है, जहाँ वैज्ञानिकों को सम्मानित किया जाता है।
  • भौतिक और रासायनिक गुण
    • बोहरियम का अनुमानित घनत्व 37.3 g/cm³ है
    • जो सुपरहैवी तत्वों में सबसे अधिक है।
    • इसका इलेक्ट्रॉन विन्यास [Rn] 5f¹⁴ 6d⁵ 7s² माना जाता है, जो रेनियम से समानता रखता है।
    • रिलेटिविस्टिक प्रभावों के कारण इसके गुण अपेक्षित रूप से भिन्न हो सकते हैं
    • जैसे कम स्थिरता और संक्षिप्त रासायनिक बंधन
    • प्रयोगों में इसके ऑक्सोहैलाइड यौगिकों की पुष्टि हुई है।
  • उत्पादन और उपयोग
    • बोहरियम को केवल कण त्वरक में भारी आयनों के संलयन से बनाया जाता है।
    • इसका उत्पादन दर अत्यंत कम (एक परमाणु प्रति सप्ताह) है।
    • वर्तमान में इसका कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं है
    • यह केवल वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए है
    • विशेषकर परमाणु स्टेबिलिटी सीमा (आइलैंड ऑफ स्टेबिलिटी) की जांच के लिए
    • भविष्य में सुपरहैवी तत्वों के अध्ययन से नई भौतिकी समझ मिल सकती है।

10. Cu का सही इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्या है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) [Ar]]3d¹⁰ 4s¹
Solution:
  • कॉपर (Cu) का परमाणु क्रमांक 29 है
  • इसका सही इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अपेक्षित क्रम से भिन्न होता है, जो इसे विशेष बनाता है।
  • यह विन्यास आर्गन (Ar) के कोर के बाद आता है
  • जिसमें कुल 29 इलेक्ट्रॉन वितरित होते हैं।
  • अपेक्षित बनाम वास्तविक
    • आउफबाउ सिद्धांत के अनुसार, अपेक्षित विन्यास [\ceAr]3d94s2 होना चाहिए
    • क्योंकि 4s कक्षक 3d से पहले भरता है।
    • हालांकि, वास्तविकता में एक इलेक्ट्रॉन 4s से 3d कक्षक में चला जाता है
    • जिससे 3d पूर्णतः भरा (3d10) हो जाता है।
    • यह स्थिरता पूरी तरह भरे d-उपकक्षक के कारण होती है
    • जो अधिक विनिमय ऊर्जा प्रदान करता है।
  • कारण विस्तार से
    • पूर्ण भरा 3d10 विन्यास अधिक स्थिर होता है
    • क्योंकि इसमें सभी पाँच d-उपकक्षक (प्रत्येक में 2 इलेक्ट्रॉन) समानुपाती रूप से भरे होते हैं।
    • 4s और 3d के बीच ऊर्जा अंतर न्यूनतम होने से इलेक्ट्रॉन आसानी से संक्रमण करता है।
    • हुंड का नियम और अधिकतम स्पिन बहुलता भी पूर्ण भरे कक्षकों को प्राथमिकता देते हैं
    • जो कॉपर को कम प्रतिक्रियाशील बनाता है।
  • आयनों के विन्यास
    • Cu⁺ आयन में 4s से इलेक्ट्रॉन निकलता है
    • अतः [\ceAr]3d10 (कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं)।
    • Cu²⁺ में एक और इलेक्ट्रॉन निकलकर [\ceAr]3d9 बनता है
    • जिसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता है।
    • ये विन्यास धातु के रंग, चुंबकीय गुणों और रासायनिक व्यवहार को प्रभावित करते हैं।