परमाणु संरचना (रसायन विज्ञान)

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11. निम्नलिखित में से कौन-सा CH₃OH के एक मोल में परमाणुओं की संख्या को सही से दर्शाता है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 3.6 × 10²⁴
Solution:
  • CH₃OH (मेथनॉल) के एक मोल में परमाणुओं की कुल संख्या 3.6×1024 होती है।
  • यह मूल रूप से एवोगैड्रो संख्या और एक अणु में मौजूद परमाणुओं की संख्या के गुणनफल से प्राप्त होती है।
  • CH₃OH का आणविक सूत्र
    • CH₃OH में एक कार्बन (C) परमाणु, चार हाइड्रोजन (H) परमाणु (तीन CH₃ समूह में और एक OH समूह में)
    • एक ऑक्सीजन (O) परमाणु होता है। इस प्रकार, एक अणु में कुल 6 परमाणु होते हैं।
    • एक मोल CH₃OH में एवोगैड्रो संख्या (NA=6.02×1023) अणु होते हैं।इसलिए, कुल परमाणुओं की संख्या =
    • 6×6.02×1023=3.612×1024
    • जिसे सामान्यतः 3.6×1024 लिखा जाता है।
  • गणना का चरणबद्ध तरीका
    • परमाणुओं की संख्या निकालने के लिए निम्नलिखित चरण अपनाएँ:
    • CH₃OH के एक अणु में परमाणुओं की संख्या गिनें: C = 1, H = 4 (3+1), O = 1 → कुल 6।
    • एक मोल में अणुओं की संख्या = 6.02×1023
    • कुल परमाणु = 6×6.02×1023=3.6×1024 (लगभग मान लेकर)।
    • यह गणना रसायन विज्ञान की मूल अवधारणा 'मोल संकल्पना' पर आधारित है
  • अन्य विकल्पों का विश्लेषण
    • प्रश्न में विकल्प संभवतः इस प्रकार हो सकते हैं (मानक प्रश्नों के आधार पर):
    • 6.02×1023: यह एक मोल में अणुओं की संख्या है, परमाणुओं की नहीं।
    • 6: यह एक अणु में परमाणुओं की संख्या है, एक मोल की नहीं।
    • 12×1023 या अन्य: गलत गुणनफल या भ्रमित गणना।
    • केवल 3.6×1024 ही सही है
    • क्योंकि यह परमाणुओं को ध्यान में रखता है।
  • अतिरिक्त तथ्य
    • मेथनॉल का मोलर द्रव्यमान 32 g/mol होता है (C=12, H=1×4, O=16)
    • लेकिन परमाणु गणना द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती।
    • यह अवधारणा किसी भी यौगिक पर लागू होती है
    • जैसे H₂O में 3 परमाणु → 1.8×1024

12. 4f कक्षक में उपस्थित एक इलेक्ट्रॉन के लिए चार क्वांटम संख्याएं कौन-सी हैं? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) n = 4, 1 = 3, m = +1, s = +¹/²
Solution:
  • 4f उपकोश में 7 ऑर्बिटल्स होते हैं और यह अधिकतम 14 इलेक्ट्रॉन धारण कर सकता है।
  • 4f उपकोश के लिए, उसमें उपस्थित एक इलेक्ट्रॉन के लिए चार क्वांटम संख्याएं निम्न हो सकती हैं-
  • क्वांटम संख्याओं का परिचय
    • चार क्वांटम संख्याएँ परमाणु कक्षीय सिद्धांत (क्वांटम यांत्रिकी) पर आधारित हैं
    • जो इलेक्ट्रॉन को तीन आयामी तरंग के रूप में वर्णित करती हैं।
    • मुख्य क्वांटम संख्या (n) ऊर्जा स्तर बताती है
    • अज़ीमुथल (l) कक्षक के आकार को, चुंबकीय (m_l) अभिविन्यास को तथा स्पिन (s) इलेक्ट्रॉन के घूर्णन को।
    • 4f कक्षक चौथे मुख्य स्तर (n=4) का f प्रकार (l=3) है
    • जिसमें 14 इलेक्ट्रॉन समा सकते हैं।
  • प्रत्येक क्वांटम संख्या का विस्तृत विवरण
    • मुख्य क्वांटम संख्या (n): 4f के लिए n = 4। यह इलेक्ट्रॉन के सबसे बाहरी गोले को दर्शाता है।
    • n का मान 1, 2, 3, ... अनंत तक हो सकता है। n=4 से ऊर्जा स्तर चौथा (N गोला) होता है।
    • अज़ीमुथल क्वांटम संख्या (l): f कक्षक के लिए l = 3। l का मान 0 से (n-1) तक होता है
    • 0=s, 1=p, 2=d, 3=f। l=3 जटिल लोब आकार (7 अभिविन्यास) वाला f कक्षक बनाता है।
    • चुंबकीय क्वांटम संख्या (m_l): l=3 के लिए m_l = -3, -2, -1, 0, +1, +2, +3 (कुल 7 संभावनाएँ)।
    • एक इलेक्ट्रॉन के लिए उदाहरणस्वरूप m_l = +1 लिया जाता है, जो धनात्मक z-अक्ष की ओर अभिविन्यास दर्शाता है
    • स्पिन क्वांटम संख्या (s): ±1/2। सामान्यतः प्रथम इलेक्ट्रॉन के लिए s = +½ (ऊपर की ओर स्पिन)।
    • यह पॉलीज अपवर्जन नियम के अनुसार भरे जाते हैं
  • 4f कक्षक की विशेषताएँ
    • 4f कक्षक में कुल 14 इलेक्ट्रॉन (2(2l+1)=14)।
    • उदाहरण: लैंथेनॉन तत्वों में 4f भरे जाते हैं। गणना: n=4 से 4 उपकोश (s, p, d, f), f में 7 m_l मान।
    • एक विशिष्ट इलेक्ट्रॉन: (4, 3, +1, +1/2)। अन्य संयोजन
    • जैसे (4, 3, -2, -1/2) भी वैध हैं, पर प्रश्न में मानक सेट दिया जाता है।

13. निम्नलिखित में से कौन-सा अत्यधिक विद्युत धनात्मक तत्व है, जो एक स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए आसानी से एक इलेक्ट्रॉन का त्याग कर देता है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) Na
Solution:
  • सोडियम एक अत्यधिक विद्युत धनात्मक तत्व है
  • जो एक स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए आसानी से एक इलेक्ट्रॉन का त्याग कर देता है।
  • सोडियम का परमाणु क्रमांक 11 है, सोडियम को Na से प्रदर्शित किया जाता है।
  • विद्युत धनात्मकता क्या है?
    • विद्युत धनात्मकता तत्वों की वह प्रवृत्ति है जिसमें वे इलेक्ट्रॉन दान करके धनायन (केटियन) बनाते हैं।
    • धातुएँ, विशेष रूप से क्षार धातुएँ (समूह 1) और क्षारीय मृदा धातुएँ (समूह 2), अत्यधिक विद्युत धनात्मक होती हैं
    • क्योंकि उनके बाह्यतम कोश (वेलेंस शेल) में 1 या 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
    • ये इलेक्ट्रॉन निकटतम नोबल गैस के स्थायी विन्यास (जैसे 2, 8, 8...) को प्राप्त करने के लिए आसानी से त्याग दिए जाते हैं
    • जिससे परमाणु में प्रोटॉन की संख्या इलेक्ट्रॉनों से अधिक हो जाती है और धनात्मक आवेश उत्पन्न होता है।
  • सोडियम का उदाहरण
    • सोडियम (Na) का परमाणु क्रमांक 11 है
    • इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s2,2s2,2p6,3s1 या K-2, L-8, M-1 है।
    • यह अपने 3s कोश के एक इलेक्ट्रॉन को त्यागकर निऑन (Ne) का स्थायी विन्यास 1s2,2s2,2p6 प्राप्त कर लेता है
    • जिससे Na+ आयन बनता है। सोडियम की पहली आयनन ऊर्जा कम (लगभग 496 kJ/mol) होती है
    • जो इलेक्ट्रॉन त्याग को आसान बनाती है।
  • अन्य विकल्पों से तुलना
    • प्रश्न में संभावित विकल्प जैसे Cl (क्लोरीन), O (ऑक्सीजन), N (नाइट्रोजन) विद्युत ऋणात्मक हैं
    • क्योंकि ये इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके स्थायी विन्यास प्राप्त करती हैं।
    • सोडियम की तुलना में ये इलेक्ट्रॉन त्यागने के बजाय स्वीकार करने की प्रवृत्ति रखती हैं।
    • Cs (सीज़ियम) सबसे अधिक धनात्मक है
    • लेकिन सामान्य प्रश्नों में Na ही "अत्यधिक" के रूप में चुना जाता है।
  • आवर्त सारणी में प्रवृत्ति
    • आवर्त सारणी में विद्युत धनात्मकता बाएँ से दाएँ घटती है
    • ऊपर से नीचे बढ़ती है। क्षार धातुओं (Li, Na, K, Rb, Cs, Fr) में यह सबसे अधिक होती है
    • जहाँ Na संतुलित उदाहरण है। बड़े परमाणु आकार के कारण नाभिक का आकर्षण कम होता है
    • जिससे इलेक्ट्रॉन त्याग सरल हो जाता है।

14. समूह 17 के किस तत्व के क्रमशः 75.77% और 24.23% की औसत प्रचुरता के साथ 35 और 37 amu द्रव्यमान के दो समस्थानिक होते हैं? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) क्लोरीन
Solution:
  • समूह 17 के क्लोरीन तत्व के क्रमशः 75.77% और 24.23% की औसत प्रचुरता के साथ 35 amu और 37 amu द्रव्यमान के दो समस्थानिक हो सकते हैं।
  • समस्थानिकों का विवरण
    • (35×0.7577)+(37×0.2423)=26.5195+8.9651=35.4846≈35.5 amu
    • यह क्लोरीन की आवर्त सारणी में सूचीबद्ध औसत द्रव्यमान से मेल खाता है।
  • समूह 17 में अन्य तत्वों से तुलना
    • समूह 17 (हैलोजन) के अन्य तत्वों के समस्थानिक अलग होते हैं
    • फ्लोरीन मुख्यतः 19F (लगभग 100%), ब्रोमीन के 79Br (50.7%) और 81Br (49.3%), आयोडीन के 127I (प्रमुख)।
    • केवल क्लोरीन ही 35-37 amu वाले समस्थानिकों के साथ इन विशिष्ट प्रचुरताओं को दर्शाता है।
  • महत्वपूर्ण गुण
    • क्लोरीन एक हरा-पीला गैस है जो जल में घुलकर हाइपोक्लोरस अम्ल बनाती है
    • जल शुद्धिकरण, रसायनों तथा PVC निर्माण में उपयोग होता है।
    • इसके समस्थानिक गुणधर्म समान होते हैं
    • लेकिन द्रव्यमान भिन्नता NMR स्पेक्ट्रोस्कोपी में उपयोगी सिद्ध होती है।

15. निम्नलिखित में से किसे 'आधुनिक परमाणु सिद्धांत का जनक' माना जाता है? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2021 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) जॉन डाल्टन
Solution:
  • 'आधुनिक परमाणु सिद्धांत का जनक' जॉन डाल्टन को माना जाता है।
  • ऑटो हैन (Otto Hahn) एक जर्मन रसायनज्ञ थे
  • जिन्हें नाभिकीय विखंडन (Nuclear fission) की खोज का श्रेय दिया जाता है
  • जिसके कारण परमाणु बम जैसा विनाशक हथियार बनाना संभव हुआ।
  • रॉबर्ट बॉयल को प्रथम आधुनिक रसायनज्ञ माना जाता है।
  • इन्होंने गैसीय नियम दिया था, जिसे 'बॉयल का नियम' भी कहते हैं।
  • विलार्ड गिब्स (Willard Gibbs) अमेरिकी वैज्ञानिक थे
  • जिन्होंने ऊष्मा गतिकी (Thermodynamics) संबंधी समीकरण दिए थे।
  • जॉन डाल्टन को 'आधुनिक परमाणु सिद्धांत का जनक' माना जाता है।
    • उन्होंने 1808 में अपना परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया, जो रसायन विज्ञान की नींव रखने वाला पहला वैज्ञानिक मॉडल था।
    • यह सिद्धांत द्रव्यमान संरक्षण के नियम और स्थिर अनुपात के नियम पर आधारित था
    • जिसमें सभी पदार्थ अविभाज्य परमाणुओं से बने बताए गए।
  • सिद्धांत के मुख्य बिंदु
    • डाल्टन के अनुसार, सभी तत्वों के परमाणु समान आकार, द्रव्यमान और गुणों वाले होते हैं
    • जबकि यौगिकों के परमाणु निश्चित अनुपात में संयुक्त होते हैं।
    • परमाणु न तो बनाए जा सकते हैं और न ही नष्ट, तथा रासायनिक अभिक्रियाओं में केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं।
    • यह मॉडल प्राचीन दार्शनिक विचारों से अलग था क्योंकि यह प्रयोगों पर आधारित था।
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • जॉन डाल्टन एक अंग्रेजी रसायनज्ञ और भौतिकशास्त्री थे
    • जिन्होंने 1803 में परमाणु सिद्धांत की रूपरेखा बनाई।
    • उनके कार्य ने बाद में मेंडेलीव के आवर्त सारणी और अन्य विकासों को प्रेरित किया।
    • हालांकि प्राचीन भारत में आचार्य कणाद ने परमाणु की अवधारणा दी
    • लेकिन आधुनिक सिद्धांत डाल्टन का ही माना जाता है।
  • महत्व और सीमाएँ
    • डाल्टन का सिद्धांत रसायनशास्त्र को मात्रात्मक आधार प्रदान करने वाला पहला प्रयास था।
    • बाद में इसकी सीमाएँ सामने आईं, जैसे परमाणु की अविभाज्यता
    • लेकिन इसने आधुनिक विज्ञान की दिशा निर्धारित की।
    • आज भी इसे रसायन विज्ञान के पाठ्यक्रम का मूल माना जाता है।

16. क्रोमियम का परमाणु क्रमांक कितना होता है? [MTS (T-I) 08 जुलाई, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) 24
Solution:
  • क्रोमियम (Cr) का परमाणु क्रमांक 24 होता है।
  • इसके अलावा स्कैंडियम (Sc) का परमाणु क्रमांक 21, पोटैशियम (K) का परमाणु क्रमांक 19 और ऑर्गन (Ar) का परमाणु क्रमांक 18 होता है।
  • गुण और विशेषताएँ
    • क्रोमियम एक चमकीला धात्विक तत्व है जो स्टेनलेस स्टील के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाता है
    • क्योंकि यह जंग प्रतिरोधी गुण प्रदान करता है।
    • इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अपवादस्वरूप [Ar] 3d⁵ 4s¹ है, न कि अपेक्षित [Ar] 3d⁴ 4s², जो स्थिरता के लिए होता है।
    • परमाणु द्रव्यमान लगभग 51.996 u है
    • यह प्रोटॉन की संख्या (24) के आधार पर परिभाषित होता है।
  • उपयोग और महत्व
    • क्रोमियम का उपयोग धातु कोटिंग, रंगों, लेपन और मिश्र धातुओं में होता है
    • विशेष रूप से स्टेनलेस स्टील में 10-20% तक मिलाया जाता है।
    • यह ऑक्सीकरण अवस्थाओं +2, +3, +6 प्रदर्शित करता है
    • जिसमें +3 सबसे स्थिर है। औद्योगिक रूप से क्रोमाइट अयस्क (FeCr₂O₄) से निकाला जाता है।
  • रासायनिक संरचना
    • नाभिक में 24 प्रोटॉन और सामान्यतः 28 न्यूट्रॉन होते हैं
    • (आइसोटोप ⁵²Cr सबसे प्रचुर), जिससे द्रव्यमान संख्या 52 बनती है।
    • गलनांक 1907°C और क्वथनांक 2671°C है, तथा घनत्व 7.19 g/cm³।
    • क्रोमियम विषाक्त हो सकता है यदि उच्च मात्रा में ग्रहण किया जाए।

17. निम्न में से किस तत्व का परमाणु क्रमांक 87 है? [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) फ्रैंशियम
Solution:
  • फ्रैंशियम की खोज वर्ष 1939 में मॉर्च्यूराइट पेरी (Marguerite Peroy) के द्वारा की गई थी।
  • यह S ब्लॉक का तत्व है। फ्रैंशियम (Fr) एक अत्यधिक रेडियोधर्मी धातु है। इसका परमाणु क्रमांक 87 है।
  • भौतिक गुण
    • फ्रांसियम का परमाणु द्रव्यमान लगभग 223 u है। इसका गलनांक 27°C और क्वथनांक 677°C है।
    • यह चांदी जैसा चमकीला धातु है
    • लेकिन इसकी अत्यधिक रेडियोधर्मकता के कारण इसे सामान्य स्थितियों में देखना कठिन है।
    • इसके सबसे स्थिर समस्थानिक फ्रांसियम-223 की अर्ध-आयु मात्रा 22 मिनट है।
  • रासायनिक गुण
    • फ्रांसियम समूह 1 (IA) का तत्व है, इसलिए यह अत्यधिक प्रतिक्रियाशील क्षार धातु है।
    • यह दूसरा सबसे विद्युत धनात्मक तत्व है (सीजियम के बाद)।
    • पानी के साथ यह तीव्र प्रतिक्रिया करता है, हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता है
    • गर्मी निकलती है। इसके इलेक्ट्रॉन विन्यास [Rn] 7s¹ है।
  • उत्पादन और उपलब्धता
    • फ्रांसियम को प्राकृतिक रूप से बहुत कम मात्रा (लगभग 20-30 ग्राम पृथ्वी पर) मिलता है।
    • इसे मुख्यतः रेडियम पर न्यूट्रॉन बमबारी या थोरियम पर प्रोटॉन बमबारी से कृत्रिम रूप से बनाया जाता है।
    • यह दूसरा सबसे दुर्लभ प्राकृतिक तत्व है।

18. अर्जेंटिक की संयोजकता ....... होती है। [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) +2
Solution:
  • अर्जेंटिक की संयोजकता +2 होती है, जिसका अर्थ है
  • यह +2 आवेश वाला धनायन बनाने के लिए दो इलेक्ट्रॉन का त्याग कर सकता है।
  • अर्जेंटिक नाम लैटिन शब्द अर्जेंटम से लिया गया है
  • जिसका अर्थ चांदी होता है। Ag⁺² , अर्जेंटिक का प्रतीक है।
  • अर्जेंटिक क्या है?
    • अर्जेंटिक शब्द लैटिन शब्द "अर्जेंटम" से लिया गया है
    • जिसका अर्थ चांदी होता है। यह चांदी के +2 ऑक्सीकरण राज्य को संदर्भित करता है
    • जैसे Ag²⁺ आयन। यह अवस्था चांदी के सामान्य +1 राज्य (अर्जेंटस) से भिन्न है और कुछ यौगिकों में पाई जाती है ।
  • संयोजकता का अर्थ
    • संयोजकता एक परमाणु की अन्य परमाणुओं से बंधन बनाने की क्षमता है
    • जो वैलेंस इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करती है।
    • अर्जेंटिक के मामले में, +2 संयोजकता का अर्थ है कि Ag²⁺ आयन दो इलेक्ट्रॉन खोकर दो बंधन बना सकता है।
    • यह इलेक्ट्रोवैलेंसी का उदाहरण है ।
  • रासायनिक उदाहरण
    • अर्जेंटिक क्लोराइड (AgCl₂) या अर्जेंटिक फ्लोराइड जैसे यौगिकों में यह संयोजकता दिखाई देती है।
    • ये यौगिक अस्थिर होते हैं और मजबूत लिगैंड्स के साथ स्थिर हो सकते हैं।
    • चांदी का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Kr] 4d¹⁰ 5s¹ है, जहां +2 अवस्था में 4d⁸ विन्यास बनता है ।

19. लीथियम नाभिक में कितने प्रोटॉन होते हैं? [CGL (T-I) 18 अप्रैल, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 3
Solution:
  • लीथियम (Li) का परमाणु क्रमांक 3 होता है। अतः लीथियम नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या 3 (तीन) होती है
  • इसका परमाणु द्रव्यमान 7 (सात) होता है। लीथियम प्रबल अपचायक होता है।
  • इसका गलनांक एवं क्वथनांक अन्य क्षार धातुओं की तुलना में अधिक है।
  • इसका प्रयोग वर्तमान में मोबाइल बैटरी के निर्माण में होता है।
  • लीथियम की मूलभूत संरचना
    • लीथियम (Li) आवर्त सारणी का तीसरा तत्व है
    • जिसका परमाणु क्रमांक Z = 3 होता है। नाभिकीय संरचना के अनुसार, प्रोटॉनों की संख्या हमेशा Z के बराबर होती है
    • इसलिए लीथियम नाभिक में ठीक 3 प्रोटॉन मौजूद होते हैं।
    • इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [He] 2s¹ होने से न्यूट्रॉन की संख्या समस्थानिक पर निर्भर करती है
    • लेकिन प्रोटॉन संख्या स्थिर रहती है।
  • समस्थानिकों में प्रोटॉन
    • लीथियम के मुख्य समस्थानिक ^6Li और ^7Li दोनों में ही 3 प्रोटॉन होते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, ^7_3Li में नाभिकीय संकेत से नीचे का अंक (3) प्रोटॉनों को दर्शाता है
    • जबकि ऊपरी अंक (7) द्रव्यमान संख्या (प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) को।
    • इस प्रकार ^7Li में 3 प्रोटॉन और 4 न्यूट्रॉन होते हैं।
  • नाभिकीय गुणधर्म
    • प्रोटॉन धनावेशित कण होते हैं जो नाभिक को स्थिरता प्रदान करते हैं।
    • लीथियम के नाभिक में 3 प्रोटॉनों के कारण कुल धनात्मक आवेश +3e होता है
    • जो परमाणु के बाहरी इलेक्ट्रॉनों द्वारा संतुलित होता है।
    • यह संरचना लीथियम को क्षारीय धातु बनाती है।

20. निम्नलिखित में से कौन-सी O₃ की सही लुईस संरचना है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) D
Solution:
  • ओजोन (O₃ ) की लुईस संरचना निम्न है-
  • लुईस संरचना को इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना के रूप में भी जाना जाता है
  • जिनमें किसी अणु के परमाणुओं के मध्य आबंधों एवं एकाकी युग्मों को दर्शाया जाता है।
  • वैलेंस इलेक्ट्रॉनों की गणना
    • O₃ में तीन ऑक्सीजन परमाणु हैं, प्रत्येक के पास 6 वैलेंस इलेक्ट्रॉन होते हैं
    • इसलिए कुल वैलेंस इलेक्ट्रॉन = 6 × 3 = 18।
    • लुईस संरचना बनाने के लिए सबसे कम इलेक्ट्रोनेगेटिव परमाणु (यहाँ सभी ऑक्सीजन समान हैं
    • इसलिए एक को केंद्र में रखें) को बीच में रखा जाता है।
    • बाहरी परमाणुओं पर पहले ऑक्टेट पूरा करें, फिर केंद्रीय परमाणु के लिए डबल बॉन्ड बनाएँ।
  • चरणबद्ध निर्माण प्रक्रिया
    • लुईस संरचना बनाने के चरण इस प्रकार हैं:
    • एक ऑक्सीजन को केंद्र में रखें: O (केंद्रीय)।
    • दो बाहरी ऑक्सीजन जोड़ें: O–O–O।
    • प्रत्येक बंधन के लिए 2 इलेक्ट्रॉन दें (कुल 4 इलेक्ट्रॉन दो एकल बंधनों में), शेष 14 इलेक्ट्रॉनों को लोन पेयर्स में वितरित करें।
    • बाहरी O पर 6 इलेक्ट्रॉन (3 लोन पेयर्स) और केंद्रीय O पर ऑक्टेट पूरा करने हेतु एक बंधन को डबल बनाएँ: O=O–O या O–O=O।
  • रेजोनेंस संरचनाएँ
    • O₃ की दो मुख्य रेजोनेंस संरचनाएँ हैं:
    • पहली: बाएँ O के साथ डबल बॉन्ड (O=O–O), फॉर्मल चार्ज: केंद्रीय O (+1), बाएँ O (-1), दाएँ O (0)।
    • दूसरी: दाएँ O के साथ डबल बॉन्ड (O–O=O), फॉर्मल चार्ज: केंद्रीय O (+1), दाएँ O (-1), बाएँ O (0)।
    • वास्तविक संरचना इन दोनों का औसत है, जिसमें बंधन क्रम 1.5 होता है।
  • फॉर्मल चार्ज की गणना
    • फॉर्मल चार्ज = वैलेंस इलेक्ट्रॉन – (लोन पेयर्स इलेक्ट्रॉन + ½ बॉन्डिंग इलेक्ट्रॉन)।
    • डबल बॉन्ड वाला बाहरी O: 6 – (4 + ½×4) = 6 – 6 = 0? गलत उदाहरण
    • सही: डबल बॉन्ड O पर 6 लोन + 4 बॉन्डिंग → FC = -1 नहीं, संरचना अनुसार:
    • केंद्रीय O: 6 – (4 + ½×6) = +1।
    • सिंगल बॉन्ड O: 6 – (6 + ½×2) = -1।
    • डबल बॉन्ड O: 6 – (4 + ½×4) = 0।
    • सभी संरचनाएँ न्यूट्रल होती हैं क्योंकि चार्ज रद्द हो जाते हैं।
    • सही O₃ लुईस संरचना वह है जिसमें एक डबल और एक सिंगल बॉन्ड हो
    • प्रत्येक O पर लोन पेयर्स के साथ (कुल 18 इलेक्ट्रॉन), न कि तीन सिंगल बॉन्ड या तीन डबल बॉन्ड वाली।
    • विकल्पों में (d) O–O=O जैसी वाली सही होती है
    • क्योंकि यह ऑक्टेट नियम और न्यूनतम फॉर्मल चार्ज संतुष्ट करती है।
    • गलत विकल्प: सममित तीन सिंगल बॉन्ड (केंद्रीय O पर अधूरे इलेक्ट्रॉन) या चार्ज असंतुलित।