परमाणु संरचना (रसायन विज्ञान)

Total Questions: 26

21. एक तत्व के समस्थानिकों में ....... होते/होती हैं। [CHSL (T-I) 22 मार्च, 2018 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) न्यूट्रॉनों की भिन्न-भिन्न संख्या
Solution:
  • किसी तत्व के समस्थानिकों (Isotopes) में प्रोटॉनों की संख्या समान होती है
  • अर्थात इनके परमाणु क्रमांक समान होते हैं, लेकिन न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न-भिन्न होती है।
  • अतः समस्थानिकों की द्रव्यमान संख्या भिन्न-भिन्न होती है।
  • परिभाषा
    • समस्थानिक वे परमाणु हैं जिनका रासायनिक व्यवहार समान होता है
    • क्योंकि उनके इलेक्ट्रॉनों की संख्या एकसमान रहती है
    • लेकिन भौतिक गुण जैसे द्रव्यमान भिन्न होते हैं। उदाहरणस्वरूप, हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं
    • प्रोटियम (11H), ड्यूटीरियम (12H) और ट्रिटियम (13H), जहाँ प्रोटॉन एक ही है
    • लेकिन न्यूट्रॉन क्रमशः 0, 1 और 2 होते हैं।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • प्रोटॉन संख्या समान: सभी समस्थानिकों का परमाणु क्रमांक (Z) एकसमान होता है, जो तत्व की पहचान निर्धारित करता है।
    • न्यूट्रॉन संख्या भिन्न: द्रव्यमान संख्या (A = Z + N) अलग होने से न्यूट्रॉन (N) की संख्या भिन्न रहती है।
    • इलेक्ट्रॉन संख्या समान: बाह्य कोष समान होने से रासायनिक गुण एक जैसे रहते हैं।
  • उदाहरण
    • कार्बन के समस्थानिक 612C और 614C में 6 प्रोटॉन समान हैं
    • लेकिन न्यूट्रॉन क्रमशः 6 और 8 हैं। यूरेनियम-235 और यूरेनियम-238 परमाणु रिएक्टरों में उपयोग होते हैं
    • क्योंकि उनके न्यूट्रॉन भिन्न हैं। समस्थानिक प्राकृतिक मिश्रण में पाए जाते हैं और चिकित्सा, ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हैं।

22. समभारकों में ....... होता है। [CHSL (T-I) 11 जनवरी, 2017 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) समान भार संख्याएं, किंतु विभिन्न परमाणु संख्याएं
Solution:
  • समभारकों (Isobars) की द्रव्यमान संख्या बराबर होती, परंतु परमाणु संख्याएं भिन्न होती हैं।
  • जैसे- ₁₈Ar⁴⁰, ₁₉K⁴⁰ तथा ₂₀Ca⁴⁰ तीन अलग-अलग तत्व ऑर्गन, पोटैशियम तथा कैल्शियम है
  • जिनके भिन्न-भिन्न परमाणु क्रमांक क्रमशः 18, 19 एवं 20 हैं
  • जबकि इन सभी की द्रव्यमान संख्या 40 है। अतः Ar, K तथा Ca समभारिक (Isobar) हैं।
  • परिभाषा
    • समभारक (Isobars) वे परमाणु हैं जो अलग-अलग तत्वों के होते हैं
    • लेकिन उनकी द्रव्यमान संख्या एक जैसी होती है।
    • उदाहरण के लिए, आर्गन (1840Ar), पोटैशियम (1940K) और कैल्शियम (2040Ca) के परमाणु समभारक हैं
    • क्योंकि सभी की द्रव्यमान संख्या 40 है, परंतु परमाणु क्रमांक क्रमशः 18, 19 और 20 है।
    • इससे न्यूट्रॉनों की संख्या भी भिन्न हो जाती है
    • क्योंकि न्यूट्रॉन संख्या = द्रव्यमान संख्या - परमाणु क्रमांक।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • द्रव्यमान संख्या समान: A = Z + N एकसमान रहती है।
    • परमाणु क्रमांक भिन्न: Z अलग होने से तत्व अलग होते हैं।
    • रासायनिक गुण भिन्न: इलेक्ट्रॉन विन्यास अलग होने से रासायनिक व्यवहार समान नहीं होता।
    • भौतिक गुण भिन्न: द्रव्यमान समान होने पर भी गुणांक भिन्न रहते हैं।
  • उदाहरण
    • कार्बन-14 (614C) और नाइट्रोजन-14 (714N) समभारक हैं
    • द्रव्यमान संख्या 14 समान, लेकिन Z क्रमशः 6 और 7। समभारक प्रकृति में कम पाए जाते हैं
    • बीटा क्षय जैसी प्रक्रियाओं से उत्पन्न होते हैं।
    • ये नाभिकीय भौतिकी, डेटिंग (जैसे C-14) और ऊर्जा उत्पादन में उपयोगी हैं।
    • समस्थानिकों से विपरीत, समभारकों का रासायनिक उपयोग सीमित है क्योंकि वे अलग तत्व हैं।

23. 1955 में खोजे गए, एक धात्विक रेडियोधर्मी परायूरेनियम तत्व का नाम क्या है, जिसका एक्टिनाइड श्रृंखला में परमाणु क्रमांक 101 है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) मेंडेलीवियम
Solution:
  • वर्ष 1955 में खोजे गए, एक धात्विक रेडियोधर्मी परायूरेनियम (Transuranium) तत्व का नाम मेंडेलीवियम है।
  • इसका एक्टिनॉइड श्रृंखला में परमाणु क्रमांक 101 है।
  • मेंडलीवियम एक रासायनिक तत्व है, जिसका प्रतीक Md है।
  • खोज और इतिहास
    • जिसका नेतृत्व अल्बर्ट घियोर्सो ने किया।
    • इस तत्व को आइंस्टीनियम पर अल्फा कणों का प्रहार करके बनाया गया।
    • इसका नाम रूसी रसायनशास्त्री दिमित्री मेंडेलीव के सम्मान में रखा गया, जिन्होंने आवर्त सारणी विकसित की।
  • गुण और विशेषताएँ
    • यह एक सिंथेटिक तत्व है, जो प्रकृति में नहीं मिलता और केवल प्रयोगशालाओं में ही उत्पन्न किया जा सकता है।
    • मेंडेलीवियम अत्यधिक रेडियोधर्मी है, जिसका आधा जीवनकाल बहुत कम होता है।
    • यह धात्विक प्रकृति का है और एक्टिनाइड श्रृंखला में f-ब्लॉक तत्व के रूप में वर्गीकृत है।
  • अन्य संबंधित तत्व
    • नोबेलियम (परमाणु क्रमांक 102): 1958 में खोजा गया, अल्फ्रेड नोबेल के नाम पर।
    • सीबोर्गियम (परमाणु क्रमांक 106): ग्लेन टी. सीबोर्ग के नाम पर नामित।
      ये सभी ट्रांसयूरेनियम तत्व कृत्रिम हैं

24. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रत्यय तब प्रयुक्त होता है जब CHO समूह किसी वलय या तंत्र के कार्बन परमाणु या विषम परमाणु (हेटरोएटम) से जुड़ा होता है? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) कार्बल्डिहाइड
Solution:
  • कार्बल्डिहाइड एक एल्डिहाइड है, जो किसी अन्य कार्बन रिंग (एल्डिहाइड) से जुड़ा समूह होता है।
  • अतः जब CHO समूह किसी वलय (Ring) या तंत्र के कार्बन परमाणु या विषम परमाणु से जुड़ा होता है
  • तो उसे कार्बल्डिहाइड कहा जाता है।
  • नामकरण नियम
    • आइसोट्रोपिक यूपीएसी नामकरण में, सीधी श्रृंखला वाले एल्डिहाइड यौगिकों के लिए प्रत्यय "-al" का उपयोग होता है
    • जैसे कि फॉर्मेल्डिहाइड या एसीटेल्डिहाइड।
    • लेकिन जब -CHO समूह चक्रीय यौगिक (जैसे बेंजीन वलय) या हेटरोसाइक्लिक तंत्र (जैसे फुरान या पाइरिडीन) के कार्बन या विषम परमाणु से सीधे जुड़ा होता है, तो "-कार्बाल्डिहाइड" प्रत्यय लगाया जाता है।
    • यह नियम चक्रीय संरचना की प्रधानता को बनाए रखते हुए एल्डिहाइड कार्यमय समूह को इंगित करता है।
  • उदाहरण
    • बेंजेल्डिहाइड (C6H5CHO) का नाम बेंजीनकार्बाल्डिहाइड होता है।
    • फुरान-2-कार्बाल्डिहाइड, जहां -CHO फुरान वलय के हेटरोएटम (ऑक्सीजन) के निकट कार्बन से जुड़ा है।
    • ये उदाहरण दर्शाते हैं कि प्रत्यय वलय की संख्यात्मक स्थिति के साथ जोड़ा जाता है।
  • अन्य प्रत्ययों से अंतर
    • एमाइड (-CONH2): अमाइड समूह के लिए।
    • हैलाइड: हैलोजन जैसे -Cl, -Br के लिए।
    • नाइट्राइल (-CN): नाइट्राइल समूह के लिए।
    • ये भ्रमित न हों, क्योंकि -CHO विशेष रूप से एल्डिहाइड के लिए आरक्षित है

25. 1808 में, निम्नलिखित में से किसके कार्यों ने दो या दो से अधिक विभिन्न प्रकार के परमाणुओं के संयोजन से यौगिकों के बनने की भौतिक तस्वीर प्रस्तुत की? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) जॉन डाल्टन
Solution:
  • 1808 ई. में जॉन डाल्टन के कार्यों ने दो या दो से अधिक विभिन्न प्रकार के परमाणु के संयोजन से यौगिकों के बनने की भौतिक तस्वीर प्रस्तुत की।
  • डाल्टन का परमाणु सिद्धांत
    • जॉन डाल्टन, एक अंग्रेजी रसायनज्ञ और भौतिक विज्ञानी
    • 1808 में "A New System of Chemical Philosophy" नामक पुस्तक में अपना परमाणु सिद्धांत प्रकाशित किया।
    • इस सिद्धांत ने पहली बार वैज्ञानिक आधार पर परमाणुओं को छोटे, अविभाज्य कणों के रूप में चित्रित किया
    • जो भिन्न तत्वों के परमाणु छोटी पूर्णांक संख्याओं (जैसे 1:1, 1:2) के अनुपात में संयोजित होकर यौगिक बनाते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, जल (H₂O) में हाइड्रोजन के दो परमाणु और ऑक्सीजन का एक परमाणु इस तरह संयुक्त होते हैं
    • जो रासायनिक संयोजन के नियमों (जैसे स्थिर अनुपात का नियम) को समझाता है।
  • सिद्धांत के प्रमुख बिंदु
    • सभी पदार्थ परमाणुओं से बने होते हैं, जो आगे विभाजित नहीं हो सकते।
    • एक तत्व के सभी परमाणुओं का द्रव्यमान और गुण समान होते हैं, लेकिन भिन्न तत्वों के परमाणु भिन्न होते हैं।
    • रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणु नष्ट या सृजित नहीं होते, केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं।
  • ऐतिहासिक महत्व
    • इससे पहले प्राचीन दार्शनिक विचार थे
    • लेकिन डाल्टन ने प्रयोगों (जैसे गैसों का व्यवहार और परमाणु भार मापन) पर आधारित ठोस मॉडल दिया
    • जिसने आधुनिक रसायन विज्ञान की नींव रखी।
    • यह लावोज़िए के संयोजन नियमों को भौतिक व्याख्या प्रदान करता था।
    • बाद के वैज्ञानिकों जैसे थॉमसन (1897, इलेक्ट्रॉन) और बोहर (1913) ने इसे आगे विकसित किया।

26. 19वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में, किसने खोज की कि प्रत्येक रासायनिक तत्व एक अद्वितीय प्रकार के परमाणु से बना होता है और वे परमाणु अपने द्रव्यमान के अनुसार भिन्न होते हैं? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) जॉन डाल्टन
Solution:
  • 19वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में, जॉन डॉल्टन ने खोज की कि प्रत्येक रासायनिक तत्व एक अद्वितीय प्रकार के परमाणु से बना होता है
  • वे परमाणु अपने द्रव्यमान के अनुसार भिन्न होते हैं।
  • डाल्टन का परमाणु सिद्धांत
    • जॉन डाल्टन ने 1808 में "A New System of Chemical Philosophy" में अपना सिद्धांत प्रकाशित किया
    •  इस सिद्धांत के अनुसार, एक तत्व के सभी परमाणु आकार, द्रव्यमान और गुणों में समान होते हैं
    • जबकि भिन्न तत्वों के परमाणु इनमें भिन्न होते हैं।
    • यह खोज लावोज़िएर के द्रव्यमान संरक्षण नियम और प्राउस्ट के निश्चित अनुपात नियम को भौतिक व्याख्या प्रदान करती थी।
  • सिद्धांत के मुख्य बिंदु
    • सभी पदार्थ अविभाज्य परमाणुओं से बने होते हैं।
    • एक ही तत्व के परमाणुओं का द्रव्यमान समान होता है
    • लेकिन विभिन्न तत्वों के परमाणु द्रव्यमान के आधार पर भिन्न पहचाने जाते हैं (जैसे हाइड्रोजन का परमाणु भार सबसे कम)।
    • परमाणु रासायनिक अभिक्रियाओं में नष्ट या सृजित नहीं होते, केवल पुनर्संयोजित होते हैं।
  • ऐतिहासिक संदर्भ और प्रभाव
    • डाल्टन के प्रयोग गैसों के दबाव-आयतन संबंधों और रासायनिक संयोजनों पर आधारित थे
    • जिन्होंने प्राचीन ग्रीक विचारों को वैज्ञानिक आधार दिया।
    • इससे रसायन विज्ञान में परमाणु भार तालिकाओं की शुरुआत हुई
    • जो बाद में मेंडेलीव के आवर्त सारणी (1869) की नींव बनी।
    • हालांकि सिद्धांत में कुछ सीमाएं थीं (जैसे परमाणु अविभाज्य नहीं होते)
    • फिर भी इसने आधुनिक परमाणु मॉडल की आधारशिला रखी।