पादप जनन (पादप कार्यिकी)

Total Questions: 20

1. पौधों में अर्धसूत्री विभाजन के अध्ययन के लिए सबसे उपयुक्त भाग होगा- [M.P.P.C.S. (Pre) Exam. 2017]

Correct Answer: (c) परागकोश
Solution:पौधों में अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के अध्ययन के लिए उपर्युक्त विकल्पों में सबसे उपयुक्त भाग परागकोश (Anthers) है। इसमें अर्धसूत्री विभाजन के बाद परागकणों का निर्माण होता है, जो वास्तव में अपरिपक्व (Immature) नर युग्मकोदभिद् (Male gametophyte) हैं। प्रजनन के लिए पौधों पर पुष्प उत्पन्न होते हैं। पुंकेसर (Stamens) नर जननांग तथा अंडप (Carpels) मादा जननांग के रूप में होते हैं। पुंकेसर में पुतंतु व परागकोश होता है तथा अंडप में अंडाशय (Ovary), वर्तिका (Style) एवं वर्तिकाग्र (Stigma) होते हैं।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन पौधों के कायिक प्रवर्धन के संबंध में सही है/हैं? [I.A.S. (Pre) 2014]

1. कायिक प्रवर्धन क्लोनीय जनसंख्या को उत्पन्न करता है।

2. कायिक प्रवर्धन विषाणुओं का निष्प्रभावन करने में सहायक है।

3. कायिक प्रवर्धन वर्ष के अधिकतर भाग में चल सकता है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

Correct Answer: (c) केवल 1 और 3
Solution:पौधे के कायिक भागों यथा-जड़, स्तंभ एवं पत्तों द्वारा जनन, जिसमें लैंगिक अंग क्रियात्मक भाग नहीं होते, 'कायिक प्रवर्धन' (Vegetative Propagation) कहलाता है। कायिक जनन का मुख्य लाभ यह है कि इससे कोई भी क्षेत्र बड़ी शीघ्रता से एक जाति विशेष द्वारा आच्छादित हो जाता है, परंतु यह जनन विधि जाति श्रृंखला की दूरस्थ वृद्धि में सहायक नहीं है, क्योंकि कायिक अंग उतनी दूरी तक नहीं वितरित हो पाते जितने कि बीज। कायिक जनन द्वारा उत्पन्न संतति जनकरूपेण (Genetically) पैतृक समान होती है और उसमें कोई भिन्नता या नए गुण और ओज नहीं आ पाते।

कायिक जनन विषाणुओं का प्रसार करने में सहायक है, अतः कथन (2) सत्य नहीं है।

कायिक प्रवर्धन वर्ष के अधिकतर भाग में चल सकता है, अतः कथन (3) सत्य है।

3. पौधों में गूटी लगाने का कार्य किस उद्देश्य की पूर्ति हेतु किया जाता है? [U.P. R.O./A.R.O. (Pre) 2021]

Correct Answer: (b) वानस्पतिक प्रसारण के लिए
Solution:पौधों में गूटी लगाना कृत्रिम कायिक प्रवर्धन की एक तकनीक है, जो वानस्पतिक प्रसारण हेतु किया जाता है। इसमें मूल पौधे से जुड़े रहने के दौरान हवाई तनों में जड़ों को विकसित होने दिया जाता है। वर्षा ऋतु में इसका इस्तेमाल नींबू, संतरा, अमरूद एवं लीची आदि के विकास हेतु किया जाता है।

4. भारत में गन्ने की खेती में वर्तमान प्रवृत्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: [I.A.S. (Pre) 2020]

1. जब 'बड चिप सैटलिंग्स (bud chip settlings) को नर्सरी में उगाकर मुख्य कृषि भूमि में प्रतिरोपित किया जाता है, तब बीज सामग्री में बड़ी बचत होती है।

2. जब सैट्स का सीधे रोपण किया जाता है, तब एक-कलिका (single-budded) सैट्स का अंकुरण प्रतिशत कई-कलिका (many budded) सैट्स की तुलना में बेहतर होता है।

3. खराब मौसम की दशा में यदि सैट्स का सीधे रोपण होता है, तब एक-कलिका सैट्स का जीवित बचना बड़े सैट्स की तुलना में बेहतर होता है।

4. गन्ने की खेती, ऊतक संवर्धन से तैयार की गई सैटलिंग से की जा सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

 

Correct Answer: (c) केवल । और 4
Solution:गन्ने की उत्पादन लागत घटाने हेतु बड चिप प्रौद्योगिकी आर्थिक दृष्टि से सुविधाजनक विकल्प है। गन्ने की खेती, ऊतक संवर्धन से तैयार की गई सैटलिंग से की जा सकती है। वर्तमान में गन्ने की खेती में पारंपरिक विधि के विपरीत आधुनिक उन्नत विधि का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें कलिका चिप गन्ना बीज का उपयोग होता है। इस विधि के अंतर्गत कलिका चिप्स का प्रस्फुटन (90 प्रतिशत) तथा गुणन क्षमता (1:60) बहुत अधिक होता है, जबकि पारंपरिक विधि का प्रस्फुटन (30-35 प्रतिशत) तथा गुणन क्षमता (1: 10) अपेक्षाकृत कम होता है। 'बड चिप सैटलिंग' को नर्सरी में उगाकर मुख्य कृषि भूमि में प्रतिरोपित किया जाता है, जिससे लगभग 80 प्रतिशत गन्ना बीज की बचत होती है।

5. फसल चक्र के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही हैं। [U.P. R.O./A.R.O. (Pre) 2021]

1. गहरी जड़ों वाली फसलों के बाद उसी तरह की फसलें उगानी चाहिए।

2. फलीदार फसल के बाद बिना फली वाली फसल लेनी चाहिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर का चयन कीजिए-

कूट-

Correct Answer: (b) केवल 2
Solution:फसल चक्र में किसी खेत में अलग-अलग ऋतुओं में प्रत्येक वर्ष अलग-अलग प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। इसका फायदा यह होता है कि खेत में उपस्थित सभी पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग किया जा सके। ध्यातव्य है कि प्रत्येक फसल की पोषक आवश्यकताएं भिन्न-भिन्न होती है तथा अलग-अलग फसलों को उगाने से खेत की मृदा को उपयोग में लाए गए पोषक तत्वों को पुनः प्राप्त करने में समय एवं अवसर प्राप्त हो जाता है। उदाहरणार्थ फलीदार, लेग्यूम या दालों वाली फसलों के उगाने से राइजोवियम के कारण नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है, जो अगली बिना फली वाली कृषि हेतु मृदा को अतिरिक्त नाइट्रोजन प्रदान करती है। अतः विकल्प (b) सही है।

6. क्लोनल वरण का प्रयोग किया जाता है: [U.P.P.C.S. (Mains) 2009]

Correct Answer: (d) आलू में
Solution:क्लोनल वरण उच्म गुणवत्ता के बीजी का उत्पादन करने की एक निधि है। आलू के उत्पादन में यह विधि प्रयुक्त होती है।

7. धूण किसमें मिलता है? [53rdto55th B.P.S.C. (Pre) 2011]

Correct Answer: (c) बीज
Solution:

पौधों में भ्रूण, बीज में मिलता है। अंकुरण प्रक्रिया के फलस्वरूप भ्रूण, बीज से बाहर आता है।

8. मां पौधे की भांति पौधा मिलता है- [39th B.P.S.C. (Pre) 1994]

Correct Answer: (b) तना काट से
Solution:कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation), प्रजनन की एक अलैंगिक विधि है। इसमें गए पौधे किसी भी जनन अंग की सहायता के बिना, पुराने पौधों के भागों (जैसे तना, जड़ एवं पत्तियां) से प्राप्त किए जाते है। तना काट (Stem Cutting), दाब लगाना (Layering) तथा कलम बांधना (Grafting) आदि इसकी पारंपरिक विधियां हैं। अलैगिक जनन द्वारा उत्पन्न नए पौधे अपने जनक (Parent) के आकारिकीय तथा आनुवंशिकी रूप से समरूप होते हैं। इसके विपरीत लैंगिक जनन (बीजों से) द्वारा उत्पन्न पौधों में विभिन्नताएं पाई जाती है।

9. तना काट आमतौर से किसके प्रवर्धन के लिए प्रयोग किया जाता है [39th B.P.S.C. (Pre) 1994]

Correct Answer: (b) गन्ना
Solution:गन्ना (Sugarcane) कुल-प्रेमिनी (Family-Gramineae) के अंतर्गत आता है, जिसका तना काट आमतौर से कायिक प्रवर्धन (Vegetative propagation) के लिए प्रयुक्त किया जाता है। इसका तना ठोस (Solid) एवं संधिबंद्ध (Jointed) होता है, जिसमे पर्व (Nodes) तथा पर्व संधियां (Internodes) पाई जाती हैं।

10. निम्नलिखित पादपों पर विचार कीजिए: [I.A.S. (Pre) 2002]

1. बोगेनविलिया 2. कार्नेशन 3. कोको 4. अंगूर

इनमें से कौन-कौन से पादप स्तंभ कर्तन द्वारा प्रवर्धित किए जाते हैं?

Correct Answer: (d) 1, 2, 3 और 4
Solution:बोगेनविलिया, कार्नेशन, गुलाब तथा अंगूर में स्तंभ कर्तन द्वारा प्रवर्धन होता है, जबकि कोको (Coco) में स्तंभ कर्तन द्वारा प्रवर्धन के साथ ही बीजों (Seeds) द्वारा प्रवर्धन भी होता है। इसके बीजों को सर्वप्रथम नर्सरी में उगाते हैं, तत्पश्चात इन नवजात पौधों को मृदा में चार फीट की दूरी पर प्रत्यारोपित (Transplant) कर देते हैं।