पाषाण काल

Total Questions: 48

21. निम्नलिखित में से किन स्थानों से मध्यपाषाण काल में पशुपालन के प्रमाण मिलते हैं? [U.P.P.C.S. (Pre) 2018]

Correct Answer: (c) बागोर
Solution:

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में कोठारी नदी के किनारे स्थित बागोर भारतीय प्रागैतिहासिक इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। यह न केवल भारत का सबसे बड़ा मध्यपाषाणकालीन स्थल है, बल्कि यहाँ से प्राप्त साक्ष्य मानव विकास के एक बड़े बदलाव को दर्शाते हैं। बागोर से प्राप्त हड्डियाँ और अवशेष इस बात की पुष्टि करते हैं कि यहाँ के निवासियों ने शिकार के साथ-साथ पशुपालन (विशेषकर भेड़ और बकरी) की शुरुआत कर दी थी। यहाँ के उत्खनन में पत्थर के सूक्ष्म औजारों के साथ-साथ तांबे के कुछ उपकरण और अंत्येष्टि (समाधान) के साक्ष्य भी मिले हैं, जो यह बताते हैं कि यह स्थल मध्यपाषाण काल से लेकर लौह युग तक निरंतर बसा हुआ था।

22. निम्नलिखित में से किसको चालकोलिथिक युग भी कहा जाता है? [44th B.P.S.C. (Pre) 2000]

Correct Answer: (c) ताम्रपाषाण युग
Solution:

चालकोलिथिक युग मानव सभ्यता के विकास का वह महत्वपूर्ण चरण है जिसे हम ताम्रपाषाण युग के नाम से जानते हैं। यह नवपाषाण काल के अंत में शुरू हुआ जब मनुष्य ने पहली बार किसी धातु का उपयोग करना सीखा और वह धातु तांबा थी। इस युग की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि लोग पत्थर के सूक्ष्म औजारों (Microliths) के साथ-साथ तांबे की कुल्हाड़ियों और चाकुओं का प्रयोग करने लगे थे। भारत में आहड़ (राजस्थान), कायथा (मध्य प्रदेश) और जोर्वे (महाराष्ट्र) जैसी संस्कृतियाँ चालकोलिथिक युग के प्रमुख उदाहरण हैं। इन बस्तियों के लोग आमतौर पर ग्रामीण थे और वे विशिष्ट प्रकार के 'लाल और काले मृदभांड' (Black and Red Ware) बनाने में कुशल थे।

23. आहड़ सभ्यता के बारे में निम्न कथनों पर विचार कीजिए- [R.AS./R.T.S. (Pre) 2021]

1. आहड़वासी तांबा गलाना जानते थे।
2. ये लोग चावल से परिचित नहीं थे।
3. धातु का काम आहड़वासियों की अर्थव्यवस्था का एक साधन था।
4. यहां से काले लाल रंग के मृद्भांड मिले हैं, जिन पर सामान्यतः सफेद रंग से ज्यामितीय आकृतियां उकेरी गई हैं। सही विकल्प का चयन कीजिए-

Correct Answer: (a) 1, 3 एवं 4 सही हैं।
Solution:

आहड़ दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान में स्थित एक प्रमुख ताम्रपाषाणिक संस्कृरि स्थल है। आहड़ संस्कृति के लोग मूलतः कृषक एवं पशुपालक थे। गेहूं, जौ तथा चावल से परिचित थे। आहड़ का एक अन्य नाम 'तांबवती' (तांबा वाला स्थान) भी मिलता है, जिससे सूचित होता है कि यहां तांब बहुतायत में उपलब्ध था। यहां के निवासी तांबे को गलाकर मनचाही वस्तुएं तैयार करते थे। धातु का काम आहड़‌वासियों की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख साधन था। यहां से काले-लाल रंग के मृ‌द्भांड की प्राप्ति हुई है, जिन पर सामान्यतः सफेद रंग से ज्यामितीय आकृतियां उकेरी गई हैं। इस प्रकार विकल्प (a) सही उत्तर है।

24. निम्न में से किस एक पुरास्थल से पाषाण संस्कृति से लेकर हड़प्पा सभ्यता तक के सांस्कृतिक अवशेष प्राप्त हुए है? [U.P.P.C.S. (Pre) 2008]

Correct Answer: (b) मेहगढ़
Solution:

पाषाण संस्कृति (नवपाषाण काल) से लेकर हड़प्पा सभ्यता तक के सांस्कृतिक अवशेष पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित मेहरगढ़ (Mehrgarh) पुरास्थल से प्राप्त हुए हैं। यह बोलन दर्रे के निकट स्थित है और भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे पुराने कृषि आधारित नवपाषाण स्थलों में से एक है, जो पाषाण काल से सिंधु घाटी सभ्यता के विकास को दर्शाता है।

25. नवदाटोली का उत्खनन किसने किया था? [U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 2009]

Correct Answer: (c) एच.डी. सांकलिया ने
Solution:

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में स्थित नवदाटोली का ऐतिहासिक महत्व इसके विस्तृत उत्खनन के कारण है, जिसे प्रसिद्ध पुरातत्वविद हसमुख धीरजलाल सांकलिया (H.D. Sankalia) के मार्गदर्शन में संपन्न किया गया था। यह स्थल ताम्रपाषाण काल की 'मालवा संस्कृति' का प्रतिनिधित्व करता है। खुदाई के दौरान यहाँ से मिट्टी के बने चौकोर और गोल घरों के अवशेष मिले हैं, जिनकी दीवारें बांस और मिट्टी (Wattle and Daub) की बनी होती थीं। नवदाटोली की सबसे खास बात यहाँ से मिले विभिन्न प्रकार के अनाज (जैसे गेहूँ, अलसी, मसूर, मूँग और चना) के प्रचुर साक्ष्य हैं, जो यह दर्शाते हैं कि यहाँ के लोग कृषि तकनीक में अत्यंत उन्नत थे। इसके अलावा, यहाँ से प्राप्त सुंदर चित्रित मृदभांड (बर्तन) उस समय की कलात्मक दक्षता का प्रमाण देते हैं।

26. नवदाटोली किस राज्य में अवस्थित है? [U.P.P.C.S. (Mains) 2009]

Correct Answer: (d) मध्य प्रदेश
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें ।

27. वृहत्पाषाण स्मारकों की पहचान की गई है- [U.P.P.C.S. (Mains) 2005]

Correct Answer: (b) मृतक को दफनाने के स्थान के रूप में
Solution:

नवपाषाण युगीन दक्षिण भारत में शवों को विभिन्न प्रकार की समाधियों में दफनाने की परंपरा विद्यमान थी। इन समाधियों को जो विशाल पाषाण खंडों से निर्मित हैं, वृहत्पाषाण या मेगालिथ (Megalith) के नाम से जाना जाता है। इनके विभिन्न प्रकार हैं; जैसे सिस्ट समाधि, पिट सर्किल, कैर्न-सर्किल, डोल्मेन, अंब्रेला-स्टोन, हुड-स्टोन, कंदराएं, मेहिर।

28. 'राख का टीला' निम्नलिखित किस नवपाषाणिक स्थल से संबंधित है? [U.P.P.C.S. (Mains) 2009]

Correct Answer: (b) संगनकल्लू
Solution:

दक्षिण भारत के नवपाषाणकालीन स्थलों, विशेषकर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के क्षेत्रों में 'राख के टीले' (Ash Mounds) एक विशिष्ट पुरातात्विक विशेषता के रूप में पाए गए हैं। इनमें संगलनकल्लू, पिकलीहल, और कुपगल जैसे स्थल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। पुरातत्वविदों का मानना है कि ये टीले उन स्थानों पर बने जहाँ चरवाहा समुदाय अपने पशुओं (गाय-बैल) को बाड़ों में रखते थे। लंबे समय तक वहां एकत्रित हुए गोबर और घास-फूस के ढेरों को संभवतः किसी उत्सव या विशेष अवसर पर जला दिया जाता था, जिससे कालांतर में ये राख के बड़े टीलों में तब्दील हो गए। इन टीलों के उत्खनन से उस काल के पशुपालन आधारित समाज और उनकी अर्थव्यवस्था के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्राप्त होती है।

29. 'भीमबेटका' किसके लिए प्रसिद्ध है? [M.P.P.C.S. (Spl.) (Pre) 2004]

Correct Answer: (a) गुफाओं के शैल चित्र
Solution:

भीमबेटका (मध्य प्रदेश) मुख्य रूप से अपनी प्रागैतिहासिक शैल-चित्रकला (Prehistoric Rock Paintings) और शैलाश्रयों (Rock Shelters) के लिए प्रसिद्ध है, जो आदिमानव द्वारा बनाए गए हैं। यह 30,000 साल से अधिक पुरानी गुफाओं का समूह है, जो मानव जीवन के शुरुआती संकेतों और पाषाण काल ​​के जीवन को दर्शाता है, और इसे 2003 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।

30. निम्न में से कौन-सा स्थल प्रागैतिहासिक चित्रकला के लिए प्रसिद्ध है? [Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Mains) 2007 U.P.P.C.S. (Mains) 2011]

Correct Answer: (b) भीमबेटका
Solution:

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित भीमबेटका की गुफाएं भारतीय प्रागैतिहासिक चित्रकला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण पेश करती हैं। इन गुफाओं और शैलाश्रयों (Rock Shelters) में मानव द्वारा बनाए गए ये चित्र पुरापाषाण काल से लेकर मध्यपाषाण काल तक के हैं। चित्रकला में मुख्य रूप से हरे और गहरे लाल रंगों का प्रयोग किया गया है, जो प्राकृतिक खनिजों से तैयार किए गए थे। डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर द्वारा खोजी गई ये गुफाएं हमें उस समय के आदिमानव के सामाजिक जीवन, उनकी धार्मिक मान्यताओं और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध की झलक देती हैं। भीमबेटका के अलावा अजंता या बाघ की गुफाएं भी प्रसिद्ध हैं, लेकिन वे प्रागैतिहासिक न होकर ऐतिहासिक काल (गुप्त काल आदि) की चित्रकला के लिए जानी जाती हैं।