Correct Answer: (a) भरतनाट्यम की प्रारंभिक नृत्य शैली का संरक्षक होना
Solution:- आर. मुथुकन्नमल विरालीमलाई मुरुगन मंदिर में देवता की सेवा करने वाली 32 देवदासियों में एकमात्र जीवित व्यक्ति और 'सादिर नर्तकी' को वर्ष 2022 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- वह भरतनाट्यम की प्रारंभिक नृत्य शैली के संरक्षकों में से एक थीं।
- सादिर नृत्य का संरक्षण
- सादिर को भरतनाट्यम का पूर्ववर्ती माना जाता है, जो मूल रूप से तमिलनाडु के मंदिरों में देवदासी परंपरा के तहत भक्ति भाव से प्रस्तुत किया जाता था।
- उन्होंने देवदासी प्रथा के क्षय के बाद भी इस नृत्य को जीवित रखा, जिसमें जटिल पैरों के काम, मुद्राएं, नेत्र अभिनय और हिंदू पौराणिक कथाओं पर आधारित अभिनय प्रमुख हैं।
- उनके आजीवन समर्पण ने इस लगभग विलुप्त हो चुके नृत्य को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- भरतनाट्यम से संबंध
- सादिर को 20वीं शताब्दी में अधिक संहिताबद्ध रूप भरतनाट्यम के रूप में विकसित किया गया
- लेकिन मुथुकन्नमल ने इसके मूल स्वरूप को संरक्षित रखा। वह भरतनाट्यम के प्रारंभिक नृत्य रूप की जीवित संरक्षक के रूप में जानी जाती हैं।
- यह नृत्य कर्नाटक संगीत के साथ प्रस्तुत होता है, जिसमें स्थिर धड़, मुड़े घुटने और अभिनय प्रधानता होती है।
- उनके प्रयासों से भावी पीढ़ियां इस विरासत से जुड़ सकीं।
- पद्मश्री पुरस्कार का महत्व
- पद्मश्री भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो कला, साहित्य, सामाजिक सेवा आदि क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान के लिए गणतंत्र दिवस पर घोषित होता है।
- 2022 में उन्हें कला क्षेत्र में सादिर नृत्य के प्रति योगदान के लिए यह पुरस्कार मिला, जो राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है।
- यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि दक्षिण भारत की मंदिर संस्कृति और नृत्य परंपरा को राष्ट्रीय मान्यता दिलाने वाला कदम है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- देवदासी प्रथा में महिलाओं को मंदिरों को समर्पित कर सादिर सिखाया जाता था, लेकिन 20वीं शताब्दी के सामाजिक सुधारों से यह प्रथा समाप्त हुई।
- मुथुकन्नमल जैसे कलाकारों ने इसे मुख्यधारा में लाने के पुनरुद्धार प्रयासों को बढ़ावा दिया।
- आज सादिर को शास्त्रीय नृत्य के रूप में पुनर्स्थापित करने के प्रयास जारी हैं, जिसमें उनकी भूमिका केंद्रीय है।