पुरस्कार (अद्यतन सामान्य ज्ञान) भाग-I

Total Questions: 30

11. सचिन तेंदुलकर को "भारत रत्न पुरस्कार" किस वर्ष मिला था? [MTS (T-I) 17 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) 2014
Solution:
  • सचिन तेंदुलकर को वर्ष 2014 में भारत रत्न पुरस्कार मिला था। भारत रत्न, भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है
  • जो मानव प्रयत्न के किसी भी क्षेत्र में की गई सर्वोत्कृष्ट स्तर के निष्पादन के सम्मान के फलस्वरूप दिया जाता है।
  • पुरस्कार घोषणा
    • भारत रत्न की घोषणा नवंबर 2013 में सचिन के अंतिम टेस्ट मैच के तुरंत बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने की थी।
    • यह पुरस्कार 4 फरवरी 2014 को राष्ट्रपती भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा प्रदान किया गया।
  • भारत रत्न का महत्व
    • भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जिसकी स्थापना 2 जनवरी 1954 को हुई।
    • यह कला, साहित्य, विज्ञान, खेल या सार्वजनिक सेवा में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है।
    • जाति, लिंग या पेशे की परवाह किए बिना प्रदान किया जाता है। अब तक 48 व्यक्तियों को यह मिल चुका है।​
  • सचिन का योगदान
    • सचिन तेंदुलकर, जिन्हें "क्रिकेट के भगवान" कहा जाता है
    • ने 24 वर्षों के करियर में 200 टेस्ट और 463 वनडे खेले। उन्होंने 100 अंतरराष्ट्रीय शतक बनाए, जो विश्व रिकॉर्ड है।
    • उनके प्रदर्शन ने क्रिकेट को भारत में लोकप्रिय बनाया।
    • इससे पहले उन्हें अर्जुन (1994), राजीव गांधी खेल रत्न (1997), पद्म श्री (1998) और पद्म विभूषण (2008) मिले।
  • अन्य विवरण
    • यह सम्मान उनके 2013 में संन्यास लेने के बाद आया। समारोह में सचिन भावुक दिखे।​
    • पुरस्कार में मानक पात्र, सनद और सर्टिफिकेट शामिल होता है।
    • सचिन इसे क्रिकेट के माध्यम से देश सेवा का सम्मान मानते हैं।

12. साहित्य में 2022 का नोबेल पुरस्कार किसे मिला? [MTS (T-I) 15 मई, 2023 (II-पाली), MTS (T-I) 15 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) एनी एरनॉक्स
Solution:
  • साहित्य में वर्ष 2022 का नोबेल पुरस्कार फ्रांसीसी लेखक "एनी एरनॉक्स" को "उस साहस और नैदानिक तीक्ष्णता जिसके साथ वह व्यक्तिगत स्मृति व्यवस्थाओं और सामूहिक प्रतिबंधों को उजागर करती हैं
  •  2023 का नोबल साहित्य पुरस्कार जॉन फॉसे को उनके अभिनव नाटकों और गद्य के लिए दिया गया।
  • पुरस्कार घोषणा
    • यह पुरस्कार 6 अक्टूबर 2022 को स्वीडिश अकादमी द्वारा घोषित किया गया।
    • एर्नाक्स को सम्मानित करने का कारण "उस साहस और नैदानिक सूक्ष्मता के लिए जिसके साथ उन्होंने व्यक्तिगत स्मृति की जड़ों, परायापन और सामूहिक प्रतिबंधों का खुलासा किया" था।
    • वह सोलहवीं फ्रांसीसी लेखिका और पहली फ्रांसीसी महिला विजेता बनीं, साथ ही कुल सत्रहवीं महिला प्राप्तकर्ता।
  • ऐनी एर्नाक्स का जीवन परिचय
    • ऐनी एर्नाक्स का जन्म 1 अप्रैल 1940 को नॉर्मंडी, फ्रांस के एक मजदूर वर्गीय परिवार में हुआ।
    • वह नॉर्मंडी की 82 वर्षीय लेखिका हैं, जिन्होंने अपनी स्व-जीवनीपरक रचनाओं से अंतरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित की।
    • उनके कार्य सामाजिक असमानता, वर्ग, लिंगभेद, यौनिकता और व्यक्तिगत अनुभवों पर केंद्रित हैं, जो फ्रांस में दशकों से स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा रहे हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ
    • एर्नाक्स ने 20 से अधिक पुस्तकें लिखीं, जिनमें स्व-जीवनीपरक उपन्यास प्रमुख हैं।
    • Cleaned Out और A Frozen Woman: यौनिकता, सामाजिक असमानता और वर्ग पर आधारित।​
    • A Man’s Place और Shame: उनके निजी जीवन की गहराइयों का अन्वेषण।​
    • Getting Lost (2022): एक रूसी राजनयिक के साथ गुप्त संबंध की डायरी।​
      उनकी रचनाएँ व्यक्तिगत स्मृति को सामूहिक संदर्भों से जोड़ती हैं।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • 2022 में अन्य दावेदारों में मार्गरेट एटवुड, हारुकी मुराकामी, सलमान रुश्दी आदि शामिल थे।
    • पिछले वर्ष (2021) अब्दुलरजाक गुरनाह को उपनिवेशवाद पर कार्यों के लिए पुरस्कार मिला था।
    • पुरस्कार राशि लगभग 1 करोड़ स्वीडिश क्रोना (11 मिलियन SEK) होती है।
  • प्रभाव और महत्व
    • एर्नाक्स के कार्यों ने साहित्य में व्यक्तिगत और सामाजिक बाधाओं को चुनौती दी, विशेषकर महिलाओं के अनुभवों को।
    • यह पुरस्कार फ्रांस की साहित्यिक परंपरा को मजबूत करता है।​

13. गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम को वर्ष 1998 में निम्नलिखित में से कौन-सा पुरस्कार मिला था? [MTS (T-I) 15 मई, 2023 (II-पाली), MTS (T-I) 15 जून, 2023 (II- पाली), CGL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) पद्म भूषण
Solution:
  • वेम्पति चिन्ना सत्यम कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्य के नर्तक और गुरु थे, जिन्हें शास्त्रीय नृत्य कुचिपुड़ी में निपुड़ता प्राप्त थी।
  • भारत सरकार द्वारा उन्हें वर्ष 1998 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उनका निधन 29 जुलाई, 2012 को हुआ।
  • गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम को वर्ष 1998 में पद्म भूषण पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
  • गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम का परिचय
    • गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम एक प्रसिद्ध कुचिपुड़ी नृत्य विशेषज्ञ थे
    • जिन्होंने आंध्र प्रदेश के कुचिपुड़ी गांव में जन्म लिया था। उन्होंने कुचिपुड़ी नृत्य को न केवल भारत बल्कि विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाया
    • जिसमें उनकी कोरियोग्राफी और नृत्य शैली की काव्यात्मक सुंदरता, लालित्य तथा जटिल पदकौतुक प्रमुख थे।
    • उन्होंने 150 से अधिक एकल नृत्य रचनाएं और 15 नृत्य-नाटक तैयार किए, जो हिंदू पौराणिक कथाओं और शास्त्रीय साहित्य पर आधारित थे।
  • पद्म भूषण पुरस्कार की जानकारी
    • पद्म भूषण भारत गणराज्य का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो भारत रत्न और पद्म विभूषण के बाद आता है।
    • यह किसी भी क्षेत्र में राष्ट्र की उच्च सेवा के लिए दिया जाता है।
    • 1998 में गुरु जी को उनके कुचिपुड़ी नृत्य के प्रति आजीवन समर्पण के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।
    • यह पुरस्कार गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित किए जाते हैं।
  • उनके योगदान और उपलब्धियां
    • उन्होंने मद्रास (अब चेन्नई) में कुचिपुड़ी कला अकादमी की स्थापना की, जो 6 फरवरी 1963 को हुई।
    • यह संस्था कुचिपुड़ी को व्यवस्थित रूप से सिखाने और फैलाने का प्रमुख केंद्र बनी।
    • उन्हें अन्य पुरस्कार भी मिले, जैसे संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, तमिलनाडु सरकार का कलाईमामणि, मध्य प्रदेश का कालिदास पुरस्कार, तथा "बॉम्बे के संगीत पीठ" और तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के अस्थाना नाट्याचार्य जैसे खिताब।
    • उनकी शैली शास्त्रीय सिद्धांतों का पालन करते हुए भी अभिनव थी, जिसने कुचिपुड़ी को अधिक सुलभ बनाया।
  • पुरस्कार विकल्पों की तुलना
    • गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम का निधन 29 मई 2012 को हुआ, लेकिन उनकी कला आज भी कुचिपुड़ी की दुनिया में जीवित है।
    • यह पुरस्कार उनके योगदान का प्रमाण है कि कैसे एक कलाकार ने पारंपरिक नृत्य को वैश्विक पटल पर स्थापित किया।

14. कालिदास सम्मान ....... की सरकार द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाने वाला एक प्रतिष्ठित कला पुरस्कार है। [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) मध्य प्रदेश
Solution:
  • भारत में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाने वाला कालिदास सम्मान एक कला पुरस्कार है।
  • इस पुरस्कार का नाम प्राचीन भारत के प्रसिद्ध संस्कृत लेखक कालिदास के नाम पर रखा गया है। कालिदास सम्मान पहली बार 1980 में प्रदान किया गया था।
  • पुरस्कार का इतिहास
    • यह सम्मान 1980 में स्थापित किया गया था और प्राचीन संस्कृत कवि कालिदास के नाम पर रखा गया है।
    • शुरू में यह क्रमिक रूप से दिया जाता था, लेकिन 1986-87 से हर वर्ष चार अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदान किया जाने लगा।
    • पहले प्राप्तकर्ताओं में सेम्मंगुडी श्रीनिवास अय्यर और मल्लिकार्जुन मंसूर शामिल थे।
  • सम्मानित क्षेत्र
    • कालिदास सम्मान चार प्रमुख कला क्षेत्रों को कवर करता है:
    • शास्त्रीय संगीत
    • शास्त्रीय नृत्य
    • रंगमंच
    • दृश्य कला (रूपंकर कलाएं, जैसे चित्रकला और मूर्तिकला)
    • ये क्षेत्र भारतीय कला परंपराओं की समृद्धि को दर्शाते हैं।
  • पुरस्कार की राशि और रूप
    • प्रत्येक विजेता को एक लाख रुपये की नकद राशि, एक बैज और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।
    • यह सम्मान सृजनात्मकता, उत्कृष्टता और दीर्घकालिक कला साधना पर आधारित होता है।
  • चयन प्रक्रिया
    • चयन एक निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया से होता है।
    • संस्कृति विभाग कलाकारों, विशेषज्ञों, रसिकों और संगठनों से नामांकन आमंत्रित करता है।
    • फिर विशेषज्ञ चयन समिति नामों की जांच कर अंतिम निर्णय लेती है
    • जो शासन के लिए बाध्यकारी होता है। यह प्रक्रिया राष्ट्रीय मानदंडों पर आधारित है।​
  • महत्व और प्रभाव
    • यह पुरस्कार कला जगत में उच्च आदर्श स्थापित करता है और उभरते कलाकारों को प्रेरित करता है।
    • मध्य प्रदेश सरकार के माध्यम से यह राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है
    • जो कला साधना को सम्मानित करने का माध्यम बनता है।
    • हाल के वर्षों में भी विभिन्न कलाकारों को यह सम्मान मिलता रहा है।

15. शास्त्रीय नृत्य के राष्ट्रीय पुरस्कार को ....... कहा जाता है। [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) अभिनंदन सरोजा पुरस्कार
Solution:
  • शास्त्रीय नृत्य के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कार दिए जाते हैं, जैसे-राष्ट्रीय नृत्य शिरोमणि पुरस्कार, अभिनंदन सरोजा राष्ट्रीय पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार आदि।
  • अभिनंदन सरोजा पुरस्कार भारत के पारंपरिक शास्त्रीय नृत्य रूपों को संरक्षित करने में योगदान देने वाले नर्तकों को दिया जाता है।
  • यह पुरस्कार राष्ट्रीय भारतीय शास्त्रीय नृत्य संस्थान द्वारा दिया जाता है।
  • पुरस्कार का नाम और महत्व
    • अभिनंदन सरोजा पुरस्कार राष्ट्रीय भारतीय शास्त्रीय नृत्य संस्थान (National Institute of Indian Classical Dance) द्वारा प्रदान किया जाता है।
    • इसका नाम प्रसिद्ध नृत्यांगना सरोजा वैद्यनाथन के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने शास्त्रीय नृत्य को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • यह पुरस्कार नर्तकों को उनकी कला के संरक्षण, संवर्धन और नवाचार के लिए सम्मानित करता है।
  • संस्थान और उद्देश्य
    • यह पुरस्कार विशेष रूप से भारतीय शास्त्रीय नृत्य रूपों जैसे भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, कथकली, कुचिपुड़ी, मणिपुरी और मोहिनीअट्टम के क्षेत्र में उत्कृष्टता को मान्यता देता है।
    • संस्थान शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपराओं को संरक्षित करने और युवा कलाकारों को प्रोत्साहित करने का कार्य करता है।
    • पुरस्कार समारोह प्रतिवर्ष आयोजित होता है, जिसमें सांस्कृतिक हस्तियां भाग लेती हैं।
  • प्राप्तकर्ता और उदाहरण
    • कई प्रमुख नर्तकों को यह पुरस्कार मिल चुका है, जैसे अपर्णा सातीसन (2021), जिन्हें भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
    • यह पुरस्कार नृत्य के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मानों में से एक माना जाता है और प्राप्तकर्ता वैश्विक स्तर पर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।
    • अन्य पुरस्कार जैसे पद्म विभूषण या संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से अलग, यह विशुद्ध रूप से शास्त्रीय नृत्य पर केंद्रित है।
  • अन्य संबंधित पुरस्कार
    • भारत में शास्त्रीय नृत्य से जुड़े अन्य सम्मान भी हैं, जैसे राष्ट्रीय कालिदास सम्मान (शास्त्रीय नृत्य), जिसमें रूक्मिणी देवी अरुंडेल (1983-84) और पं. बिरजू महाराज (1986-87) जैसे कलाकार शामिल हैं।
    • हालांकि, अभिनंदन सरोजा पुरस्कार विशेष रूप से राष्ट्रीय शास्त्रीय नृत्य के लिए जाना जाता है।
    • ये पुरस्कार नृत्य की विरासत को जीवंत रखने में सहायक हैं।

16. सिख साहित्य के अनुसार, गुरु नानक देव की जयंती भारतीय चंद्र माह के ....... की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) कार्तिक
Solution:
  • गुरुपर्व का उत्सव, जिसे प्रकाश उत्सव भी कहा जाता है
  • पहले सिख गुरु, गुरु नानक के जन्म का सम्मान करता है। यह कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ईस्वी में कार्तिक पूर्णिमा के दिन वर्तमान पाकिस्तान के ननकाना साहिब में हुआ था।
    • सिख परंपरा और ग्रंथों जैसे गुरु ग्रंथ साहिब में इस तिथि को कार्तिक मास की पूर्णिमा के रूप में ही दर्ज किया गया है
    • जो हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर-नवंबर में पड़ती है।
    • यह तिथि सिख साहित्य में गुरुपर्व या प्रकाश उत्सव के रूप में वर्णित है, जो उनके जन्मोत्सव का प्रतीक है।
  • सिख साहित्य में संदर्भ
    • सिख साहित्य, विशेष रूप से जनमसाखियां और गुरु ग्रंथ साहिब के भट्ट वकीयां जैसे भागों में गुरु नानक के जन्म को कार्तिक सुदी 15 (पूर्णिमा) बताया गया है।
    • विकिपीडिया और अन्य स्रोतों के अनुसार, यह चंद्र माह कार्तिक का पूर्णिमा तिथि ही है, न कि कोई अन्य मास जैसे माघ, आषाढ़ या पौष।
    • सिख पंचमी पर्वों की परंपरा इसी चंद्र कैलेंडर पर आधारित है, जो नानकशाही संवत से जुड़ी हुई है।
  • उत्सव की परंपराएं
    • गुरु नानक जयंती से पूर्व अखंड पाठ का आयोजन किया जाता है
    • जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब का निरंतर पाठ होता है। मुख्य दिन प्रभात फेरियां निकाली जाती हैं
    • शबद कीर्तन होते हैं, और लंगर में सभी को भोजन वितरित किया जाता है
    • जो समानता का प्रतीक है। विश्व भर के गुरुद्वारों में विशेष सजावट और जुलूस आयोजित होते हैं।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • ग्रेगोरियन तिथि: आमतौर पर नवंबर में, जैसे 2025 में 5 नवंबर को मनाई गई।
    • गुरु नानक के उपदेश: एक ईश्वर, नाम जपना, किरत करनी और वंड छकना—ये सिख साहित्य के मूल सिद्धांत हैं।​
    • कार्तिक पूर्णिमा का हिंदू-सिख संबंध: यह हिंदू त्योहारों से जुड़ी होने के बावजूद सिखों के लिए विशुद्ध गुरुपर्व है।​

17. देवदासी राष्ट्रीय पुरस्कार, ....... राज्य में तीर्थ केंद्र में आयोजित नृत्य उत्सव में दिया जाता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22, 23 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) ओडिशा
Solution:
  • देवदासी राष्ट्रीय पुरस्कार 'ओडिशा' राज्य में तीर्थ केंद्र में आयोजित नृत्य उत्सव में दिया जाता है।
  • पुरस्कार का स्थान
    • यह पुरस्कार ओडिशा के पुरी शहर में हर साल आयोजित देवदासी राष्ट्रीय नृत्य उत्सव के दौरान दिया जाता है।
    • पुरी, जगन्नाथ मंदिर के लिए विख्यात एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जो चार धामों में से एक है।
    • यह उत्सव सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखने का माध्यम बनता है और देशभर से कलाकारों को आकर्षित करता है।​
  • इतिहास और महत्व
    • देवदासी राष्ट्रीय पुरस्कार नृत्य क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्तियों को सम्मानित करने के लिए स्थापित किया गया है।
    • "देवदासी" शब्द प्राचीन परंपरा से लिया गया है, जहां मंदिरों में सेवा करने वाली महिलाएं शास्त्रीय नृत्य और संगीत में निपुण होती थीं।
    • यह उत्सव उस विरासत को संरक्षित करता है, हालांकि आधुनिक संदर्भ में यह सामाजिक सुधारों के बाद सकारात्मक रूप से विकसित हुआ है।
    • उत्सव ओडिसी नृत्य की सुंदरता, तरलता और अभिव्यक्ति को बढ़ावा देता है।​
  • ओडिसी नृत्य का संबंध
    • ओडिसी भारत के आठ शास्त्रीय नृत्य रूपों में से एक है, जिसकी जड़ें ओडिशा से जुड़ी हैं।
    • इसमें सिर, धड़ और कमर के जटिल आंदोलन प्रमुख होते हैं, जो वैष्णव भक्ति और धार्मिक कथाओं को दर्शाते हैं।
    • पुरस्कार मुख्य रूप से ओडिसी में उत्कृष्टता को मान्यता देता है, लेकिन अन्य शास्त्रीय रूपों को भी प्रोत्साहित करता है।​
  • पुरस्कार विजेता उदाहरण
    • 2016 में यह पुरस्कार कथक नृत्यांगना प्रेरणा देशपांडे को प्रदान किया गया था। वे कथक की ताल, अनुग्रह और रचनात्मकता में माहिर हैं
    • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन के लिए जानी जाती हैं। हाल के वर्षों में भी विभिन्न कलाकारों को यह सम्मान मिला है, जो नृत्य की विविधता को दर्शाता है।​
  • पुरी का सांस्कृतिक महत्व
    • पुरी न केवल धार्मिक केंद्र है, बल्कि रथ यात्रा जैसे उत्सवों के कारण सांस्कृतिक हृदय स्थल भी है।
    • देवदासी उत्सव यहां पारंपरिक कलाओं को आधुनिक मंच प्रदान करता है
    • जिससे युवा पीढ़ी जुड़ सके। यह कार्यक्रम पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण दोनों को बढ़ावा देता है।​
  • अन्य संबंधित जानकारी
    • यह उत्सव अन्य नृत्य महोत्सवों जैसे निशागंधी (केरल) से भिन्न है, जो क्षेत्रीय विशेषताओं पर केंद्रित हैं।
    • हाल ही में 19वें देवदासी राष्ट्रीय नृत्य उत्सव (भुवनेश्वर या पुरी से जुड़े) में पराशमणि देवदासी राष्ट्रीय पुरस्कार जैसे अन्य सम्मान भी दिए गए।
    • कुल मिलाकर, यह पुरस्कार भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्धि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

18. निम्नलिखित में से दिल्ली में जन्मे भरतनाट्यम नर्तकियों/नर्तकों में से किसे वर्ष 2021 के लिए नृत्य पेरुंज्योति पुरस्कार प्राप्त हुआ? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 03 दिसंबर, 2023 (III-पाली]

Correct Answer: (c) गीता चंद्रन
Solution:
  • दिल्ली में जन्मी भरतनाट्यम नर्तकी 'गीता चंद्रन' को वर्ष 2021 के लिए नृत्य पेरुंज्योति पुरस्कार प्राप्त हुआ।
  • पुरस्कार विजेता
    • गीता चंद्रन को वर्ष 2021 के नृत्य पेरुंज्योति पुरस्कार से सम्मानित किया गया
    • जो दिल्ली आधारित भरतनाट्यम नर्तकियों/नर्तकों में से एकमात्र प्राप्तकर्ता हैं।
    • यह पुरस्कार भारतीय शास्त्रीय नृत्य में उनके योगदान को मान्यता देता है।
  • जीता चंद्रन का जीवन परिचय
    • गीता चंद्रन एक प्रमुख भरतनाट्यम नर्तकी हैं, जो दिल्ली से जुड़ी हुई हैं।
    • उन्होंने कर्नाटक संगीत का प्रशिक्षण लिया और भरतनाट्यम में नवोन्मेषी एवं समकालीन दृष्टिकोण अपनाने के लिए जानी जाती हैं।
    • वे थिएटर, नृत्य, शिक्षा, वीडियोग्राफी और फिल्मों में भी सक्रिय रहीं हैं।
  • उपलब्धियाँ और योगदान
    • उन्हें शास्त्रीय नृत्य क्षेत्र में कई पुरस्कार मिले हैं, जिसमें 2021 का नृत्य पेरुंज्योति पुरस्कार प्रमुख है।
    • गीता चंद्रन ने भरतनाट्यम को आधुनिक संदर्भों से जोड़कर इसे वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाया।
    • उनका जन्म दिल्ली में हुआ, जो उन्हें इस प्रश्न के संदर्भ में सटीक बनाता है
    • जबकि अन्य विकल्प जैसे लक्ष्मी विश्वनाथन, पंडित बिरजू महाराज (कथक नर्तक) या चित्रा विश्वेश्वरन (चेन्नई आधारित, नृत्य कलानिधि 2021 प्राप्त) अलग हैं।
  • अन्य संदर्भ पुरस्कार
    • नृत्य पेरुंज्योति पुरस्कार नृत्य क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए दिया जाता है
    • हालांकि अन्य पुरस्कार जैसे नृत्य कलानिधि (चित्रा विश्वेश्वरन को 2021 में) या अभिनंदन सरोजा (अपर्णा सतीसन को) अलग हैं।
    • गीता चंद्रन का यह पुरस्कार उनके दिल्ली से जुड़ाव और भरतनाट्यम विशेषज्ञता को रेखांकित करता है।

19. पद्म भूषण 2022 पुरस्कार से सम्मानित ....... एक हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीतकार हैं। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) राशिद खान
Solution:
  • भारतीय शास्त्रीय संगीतकार राशिद खान को वर्ष 2022 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। उन्हें वर्ष 2006 में पद्मश्री और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला।
  • प्रारंभिक जीवन
    • उस्ताद रशीद खान का जन्म 1975 में बड़ाबाजार, बनारस घराने के एक संगीतमय परिवार में हुआ था।
    • वे उस्ताद नजर खान के पोते और उस्ताद इनायत खान के पुत्र थे, जिनसे उन्होंने बचपन से ही संगीत की बारीकियां सीखीं।
    • मात्र 11 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला मंचीय प्रदर्शन किया, जो उनकी प्रतिभा का प्रारंभिक प्रमाण था।
  • संगीत यात्रा
    • रशीद खान रामपुर सहास घराने से जुड़े हैं और खयाल, ठुमरी तथा तराना गायकी में निपुण हैं।
    • उन्होंने परंपरागत हिंदुस्तानी संगीत को आधुनिक संगीत के साथ जोड़कर नई पीढ़ी को आकर्षित किया।
    • उनके गायन में भावपूर्णता और तकनीकी कुशलता का अनूठा संगम दिखता है
    • जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है। वे विश्व भर में सैकड़ों मंचों पर प्रस्तुति दे चुके हैं।
  • प्रमुख उपलब्धियाँ
    • पद्म भूषण (2022): भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में योगदान के लिए।
    • अन्य पुरस्कार: पद्म श्री (2006), संगीत कलाकार सम्मान, तथा कई राज्य स्तर के पुरस्कार।
    • उन्होंने फिल्मों जैसे 'सावरिया' में भी अपनी आवाज दी, जिससे शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय बनाने में मदद मिली।
    • उनकी कला ने बनारस घराने की विरासत को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।​
  • हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में योगदान
    • हिंदुस्तानी संगीत उत्तरी भारत की समृद्ध परंपरा है, जिसमें राग, ताल और स्वरों का जटिल जाल बुनता है।
    • रशीद खान ने इसे वैश्विक पटल पर ले जाकर युवाओं को जोड़ा।
    • उनके शिष्यों में कई उभरते कलाकार हैं जो उनकी शैली को आगे बढ़ा रहे हैं।​
  • विरासत
    • उस्ताद रशीद खान ने संगीत जगत को अमूल्य धरोहर दी।
    • उनकी रिकॉर्डिंग्स और प्रदर्शन आज भी संगीत प्रेमियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
    • पद्म भूषण ने उनकी कला को औपचारिक मान्यता प्रदान की।​

20. मध्य प्रदेश के राय लोक-नृत्य के प्रदर्शन के लिए निम्नलिखित में से किसने 2022 में पद्मश्री प्राप्त किया? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) राम सहाय पाण्डेय
Solution:
  • मध्य प्रदेश के 'राय लोक नृत्य' के प्रदर्शन के लिए राम सहाय पाण्डेय को वर्ष 2022 में पद्मश्री प्राप्त हुआ
  • प्रारंभिक जीवन
    • उस्ताद रशीद खान का जन्म 1975 में बड़ाबाजार, बनारस घराने के एक संगीतमय परिवार में हुआ था।
    • वे उस्ताद नजर खान के पोते और उस्ताद इनायत खान के पुत्र थे
    • जिनसे उन्होंने बचपन से ही संगीत की बारीकियां सीखीं।
    • मात्र 11 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला मंचीय प्रदर्शन किया, जो उनकी प्रतिभा का प्रारंभिक प्रमाण था।
  • संगीत यात्रा
    • रशीद खान रामपुर सहास घराने से जुड़े हैं और खयाल, ठुमरी तथा तराना गायकी में निपुण हैं।
    • उन्होंने परंपरागत हिंदुस्तानी संगीत को आधुनिक संगीत के साथ जोड़कर नई पीढ़ी को आकर्षित किया।
    • उनके गायन में भावपूर्णता और तकनीकी कुशलता का अनूठा संगम दिखता है
    • जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है। वे विश्व भर में सैकड़ों मंचों पर प्रस्तुति दे चुके हैं।
  • प्रमुख उपलब्धियाँ
    • पद्म भूषण (2022): भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में योगदान के लिए।
    • अन्य पुरस्कार: पद्म श्री (2006), संगीत कलाकार सम्मान, तथा कई राज्य स्तर के पुरस्कार।
    • उन्होंने फिल्मों जैसे 'सावरिया' में भी अपनी आवाज दी, जिससे शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय बनाने में मदद मिली।
    • उनकी कला ने बनारस घराने की विरासत को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।​
  • हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में योगदान
    • हिंदुस्तानी संगीत उत्तरी भारत की समृद्ध परंपरा है, जिसमें राग, ताल और स्वरों का जटिल जाल बुनता है।
    • रशीद खान ने इसे वैश्विक पटल पर ले जाकर युवाओं को जोड़ा।
    • उनके शिष्यों में कई उभरते कलाकार हैं जो उनकी शैली को आगे बढ़ा रहे हैं।​
  • विरासत
    • उस्ताद रशीद खान ने संगीत जगत को अमूल्य धरोहर दी।
    • उनकी रिकॉर्डिंग्स और प्रदर्शन आज भी संगीत प्रेमियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
    • पद्म भूषण ने उनकी कला को औपचारिक मान्यता प्रदान की।​