पुरस्कार (परम्परागत सामान्य ज्ञान)

साहित्य अकादमी पुरस्कार

Total Questions: 36

1. साहित्य अकादमी पुरस्कार का प्रारम्भ कब से हुआ? [UPSI Exam, 21-दिसम्बर, 2017 (प्रथम पाली)]

Correct Answer: (c) 1954
Solution:
  • साहित्य अकादमी पुरस्कार का प्रारम्भ वर्ष 1954 से हुआ। वर्ष 2019 के लिए हिन्दी भाषा में नन्द किशोर आचार्य को उनकी कविता 'छीलते हुए अपने को' यह पुरस्कार दिया गया।
  • वर्ष 2020 का हिन्दी साहित्य अकादमी पुरस्कार 'टोकरी में दिगन्तः थेरीगाथा' (कविता) कृति के लिए अनामिका को प्रदान किया गया है।
  • पूरा विवरण:
  • इतिहास और उद्देश
    • यह पुरस्कार हर साल भारत की मान्यता प्राप्त प्रमुख भाषाओं में प्रकाशित सर्वोत्कृष्ट साहित्यिक कृति को प्रदान किया जाता है
    • इसमें हिंदी, अंग्रेजी सहित 24 भाषाओं की चयन प्रक्रिया शामिल है.
  • भाषाओं की संरचना
    • 8वीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं के अलावा संस्थागत रूप से राजस्थानी और अंग्रेज़ी सहित कुल 24 भाषाओं में पुरस्कार दिया गया है
    • इसका उद्देश्य भाषा-आधारित विविध साहित्यिक पहचान को बढ़ावा देना है.
  • पुरुस्कारिक संरचना और राशि
    • पुरस्कार में विजेताओं को नकद पुरस्कार (वर्ष के अनुसार वृद्धि के साथ 1 लाख रुपए तक) और एक ताम्रपत्र/पत्निका दी जाती है
    • आरंभिक अवधि में राशि 5,000 रुपए थी और क्रमशः वर्षों में बढ़ाकर 10,000, 25,000, 40,000, 50,000 और आखिरकार 1 लाख रुपए तक पहुँचाई गई.
    • यह वृद्धि क्रमशः 1983, 1988, 2001, 2003, और 2009 जैसे वर्षों में हुई है. इसके साथ पुरस्कार के प्रतीक के रूप में ताम्रपत्र भी दिया जाता है.
  • पहले और प्रमुख विजेताओं की झलक
    • हिंदी वर्ग में पहले विजेता माखनलाल चतुर्वेदी थे (1955), अंग्रेज़ी वर्ग में आर. के. नारायण पहले विजेता थे
    • (1960). समय के साथ अन्य भाषाओं के लिए भी अनेक प्रतिष्ठित लेखक सम्मानित हुए.
    • 2019 जैसे नवीन वर्षों में भी कई प्रमुख रचनाकारों को यह सम्मान मिला रहा है, जो भारतीय साहित्य की विविधता को दर्शाता है.
  • महत्व और प्रभाव
    • साहित्य अकादमी पुरस्कार भारतीय साहित्यिक परिदृश्य में एक प्रतिनिधि और उच्च सम्मान माना जाता है
    • यह लेखन को संरक्षण, प्रोत्साहन और मान्यता देता है, ताकि लेखक नए रुझानों के साथ आगे बढ़ सकें.
  • विंध्य-सीमा और अपेक्षित जानकारी
    • सूचना के अनुसार 1954–1955 के बीच के शुरुआती वर्षों में पुरस्कार-निर्धारण प्रक्रिया और भाषाई चयन की वास्तविक प्रथा में परिवर्तन होते रहे
    • वर्तमान समय में यह वार्षिक रूप से 24 भाषाओं के लिए दिया जाता है.

2. माखन लाल चतुर्वेदीजी को किस वर्ष साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला? [रेडियो ऑपरेटर (उ.प्र. पुलिस) परीक्षा, 2024]

Correct Answer: (c) विकल्पों में से कोई नहीं
Solution:
  • माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि हैं।
  • इन्हें 1955 ई. का साहित्य अकादमी पुरस्कार 'हिमतरंगिनी' काव्यकृति हेतु प्रदान किया गया था।
  • विशेष विवरण:
    • पुरस्कार की स्थिति: हिंदी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार
    • जिसे 1955 में पहली बार दिया गया था (साहित्य अकादमी की स्थापना 1954 में हुई थी) .
    • चुनी गई रचना: हिमतरंगिणी, जो उनका प्रमुख काव्य-संग्रह है
    • जिसे 1949 में प्रकाशित माना जाता है; पुरस्कार उसी रचना के लिए दिया गया .
    • प्रतिष्ठा और संदर्भ: चतुर्वेदीजी हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि माने जाते हैं
    • उन्हें हिमतरंगिणी के लिए पुरस्कार मिलना उस युग की हिंदी-काव्यिक परंपरा में एक महत्त्वपूर्ण घटना मानी जाती है .
  • पूरा संदर्भ:
    • हिमतरंगिणी पर साहित्य अकादमी पुरस्कार 1955 में मिला (यह रचना-आधार पर पहला पुरस्कार भी माना जाता है).
    • चतुर्वेदीजी को हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिये अनेक सम्मान मिले
    • जिनमें देव पुरस्कार (1943) और पद्म भूषण (1963) शामिल हैं
    • इन बातों से उनकी समग्र विद्वत्ता और प्रतिष्ठा का पैमाना समझ में आता है.​

3. माखनलाल चतुर्वेदी को उनकी किस रचना पर 'साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है? [UPSI Exam, 20-दिसम्बर, 2017 (तृतीय पाली)]

Correct Answer: (b) हिमतरंगिनी
Solution:
  • वर्ष 1955 में माखनलाल चतुर्वेदी को "हिमतरंगिनी" काव्य संग्रह के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • हिन्दी में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वाले वे प्रथम व्यक्ति थे।
  • विस्तार:
    • हिमतरंगिनी: यह उनकी कविता-सम्पदा है जिसे हिंदी कविता में महत्त्वपूर्ण माना जाता है
    • इस काव्य-संग्रह के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया। [cite 1955 पुरस्कार संदर्भ]
    • पुरस्कार इतिहास: साहित्य अकादमी की स्थापना 1954 में हुई थी
    • जो हिन्दी साहित्य के लिए उल्लेखनीय घटना है। [cite विक्षेपण/हिंदी साहित्य इतिहास स्रोत]
    • अन्य संदर्भ: माखनलाल चतुर्वेदी का उद्देश्यपूर्ण कार्य और उनके अन्य कृतियाँ भी हिन्दी साहित्य में प्रसिद्ध हैं
    • अकादमी पुरस्कार हिमतरंगिनी के लिए ही मुख्य रूप से माना जाता है। [cite हिंदी साहित्य प्रोफाइल]

4. वर्ष 2016 का साहित्य अकादमी पुरस्कार किस रचनाकार को दिया गया? [UPSSSC सम्मि. अवर अधीनस्थ सेवा (सा.च.) परीक्षा 2019 (III) UPSI Exam, 15-दिसम्बर, 2017 (द्वितीय पाली)]

Correct Answer: (d) नासिरा शर्मा
Solution:
  • वर्ष 2016 का हिन्दी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार नासिरा शर्मा को उनके उपन्यास 'पारिजात' के लिए प्रदान किया गया।
  • वर्ष 2017 का हिन्दी के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार रमेश कुन्तल मेघ को उनकी रचना 'विश्वमिथकसरित्सागर' और वर्ष 2018 का हिन्दी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार चित्रा मुद्गल को उनके उपन्यास 'नाला सोपारा : पोस्ट बॉक्स नं. 203' को प्रदान किया गया।
  • वर्ष 2019 में 'छीलते हुए अपने को' (कविता) कृति के लिए नन्दकिशोर आचार्य को तथा वर्ष 2020 का साहित्य अकादमी पुरस्कार अनामिका को 'टोकरी में दिगन्तः थेरीगाथा' हिन्दी (कविता) के लिए प्रदान किया गया है।
  • वर्ष 2021 का साहित्य अकादमी पुरस्कार दया प्रकाश सिन्हा को 'सम्राट अशोक' नाटक हेतु तथा वर्ष 2022 का साहित्य अकादमी पुरस्कार बद्रीनारायण को तुमड़ी के शब्द काव्य-संग्रह हेतु दिया गया।
  • वर्ष 2023 का साहित्य अकादमी पुरस्कार हिन्दी के लिए संजीव को 'मुझे पहचानो' उपन्यास हेतु प्रदान किया गया है।
  • विस्तार विवरण:
    • साहित्य अकादमी पुरस्कार हर वर्ष भारतीय लेखकों के लिए दिया जाने वाला एक प्रमुख सम्मान है, जो साहित्य के कई क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता है.​
    • पारिजात का विषय और शैली साहित्यिक समुदाय में व्यापक चर्चा का केंद्र रहा है, और पुरस्कार मिलने से उनकी रचना को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली.​
  • स्रोत आपके संदर्भ के लिए:
    • हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेताओं की सूची और 2016 के विजेता पर जानकारी:.​
    • साहित्य अकादमी पुरस्कार की संरचना और वर्षानुसार विजेता सूची:.​
    • 2016 के पुरस्कार पुरस्कार विवरण (पुरस्कार कारण, रचना): समय के अनुरूप संसाधनों में पाया गया उल्लेख: (आर्काइव संदर्भ भी उपलब्ध है)।​

5. ' तुमड़ी के शब्द' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार किस रचनाकार को दिया गया ? [UPP, 23 अगस्त, 2024-I]

Correct Answer: (c) बद्री नारायण
Solution:
  • 'तुमड़ी के शब्द' बद्री नारायण द्वारा रचित कविता संग्रह है, जिसके लिए इन्हें वर्ष 2022 का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • वर्ष 2023 का साहित्य अकादमी हिन्दी पुरस्कार 'मुझे पहचानो' उपन्यास हेतु संजीव को प्रदान किया गया।
  • दया प्रकाश सिन्हा को 'सम्राट अशोक' नाटक हेतु वर्ष 2021 का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया था।
  • विस्तृत विवरण:
    • पुरस्कार का विषय: साहित्य अकादमी पुरस्कार हिंदी भाषा के लिए एक वार्षिक साहित्यिक मान्यता है
    • जिसे सामान्यत: लेखकों, कवियों, अनुवादकों आदि की उल्लेखनीय साहित्यिक योगदान के लिए दिया जाता है।
    • बद्री नारायण इसी वर्ष अपनी कविता-संग्रह तुमड़ी के शब्द के लिए पुरस्कार के लिए चयनित हुए थे .
    • रचनाकार: बद्री नारायण हिंदी के वरिष्ठ कवि, साहित्यिक आलोचक और पत्रकार हैं
    • उन्होंने कई प्रमुख पुस्तकों और कविता-संग्रहों के साथ हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में योगदान दिया है .
    • साहित्य अकादमी पुरस्कार 2022 की घोषणा: अकादमी के घोषणा-पत्र के अनुसार 2022 के विजेताओं में हिंदी भाषा के कविताओं के विभिन्न संग्रह चुने गए थे
    • बद्री नारायण का चयन हिंदी काव्य के लिए किया गया था .
    • तुमड़ी के शब्द: यह बद्री नारायण का कविता-संग्रह है जिसमें लोक-परंपरा, इतिहास और समकालीनता का मिश्रण मिलता है
    • कविता में प्रेम, मानवता, अहिंसा व सार्वभौमिक बंधुत्व जैसे मानवीय मूल्यों को प्रमुखता मिलती है .
    • पुरस्कार की मान्यता: साहित्य अकादमी पुरस्कार के अंतर्गत कविता-संग्रह के रूप में चयनित karya के लिए यह सम्मान दिया गया
    • 2022 की अनुष्ठात्मक सूची के अनुसार यह हिंदी भाषा के लिए एक उच्चस्तरीय मान्यता है .
  • यदि आप चाहें, मैं:
    • पुरस्कार विजेता सूची के विस्तृत वर्षवार सार को संक्षेप में दे सकता हूँ।
    • बद्री नारायण के अन्य प्रमुख कार्यों और उनके आलोचनात्मक प्रभाव पर संक्षिप्त विश्लेषण दे सकता हूँ।
    • तुमड़ी के शब्द के भीतर प्रमुख কবिताओं या विषयों का छोटा उद्धरण-आधारित अवलोकन कर सकता हूँ (उद्धरण नहीं दे सकता तो संक्षिप्त सार दे दूँगा)।

6. 'मुक्तिबोध' के लिए जैनेन्द्र कुमार को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था? [UPP, 31 अगस्त, 2024 Shift-I UPSI Exam, 12 दिसम्बर, 2017 (द्वितीय पाली)]

Correct Answer: (c) साहित्य अकादमी पुरस्कार
Solution:
  • 'मुक्तिबोध' जैनेन्द्र कुमार द्वारा रचित उपन्यास है।
  • इस उपन्यास रचना हेतु इन्हें 1966 ई. का हिन्दी भाषा में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया है।
  • नोट : मुक्तिबोध हिन्दी साहित्य के एक कवि/लेखक का उपनाम भी है।
  • पुरस्कार का विवरण
    • साहित्य अकादमी पुरस्कार भारत के प्रमुख साहित्यिक सम्मानों में से एक है
    • जो विभिन्न भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों के लिए दिया जाता है।
    • मुक्तिबोध' एक मनोवैज्ञानिक उपन्यास है
    • जिसमें जैनेन्द्र कुमार ने मानवीय संघर्ष, आत्ममुक्ति और आंतरिक द्वंद्व को गहराई से चित्रित किया है।
    • इस कृति के लिए उन्हें 1966 में यह सम्मान मिला, जो हिंदी साहित्य में उनके योगदान को रेखांकित करता है।
  • जैनेन्द्र कुमार का संक्षिप्त परिचय
    • जैनेन्द्र कुमार (1905-1988) हिंदी साहित्य के प्रमुख मनोविश्लेषणात्मक उपन्यासकार और निबंधकार थे।
    • उन्होंने 'परख', 'सुनीता', 'त्यागपत्र' जैसी अन्य रचनाएँ भी लिखीं।
    • इसके अलावा, उन्हें 1971 में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया।

7. सन् 1973 में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त 'आलोक पर्व' किसकी रचना है? [UPSI Exam, 01-जुलाई, 2018 (तृतीय पाली)]

Correct Answer: (a) हजारी प्रसाद द्विवेदी
Solution:
  • 'आलोक पर्व' हिन्दी के विख्यात साहित्यकार हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित निबन्ध संग्रह है।
  • इस कृति पर इन्हें वर्ष 1973 का साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • शिव मंगल सिंह 'सुमन' को 'मिट्टी की बारात' (काव्य-संग्रह) के लिए वर्ष 1974 का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया था।
  • लेखक परिचय
    • हजारीप्रसाद द्विवेदी (1907-1979) हिंदी के प्रमुख निबंधकार, आलोचक और विद्वान थे।
    • वे हिंदी, संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी भाषाओं के जानकार थे तथा शांतिनिकेतन से जुड़े रहे।
    • उनके अन्य प्रमुख निबंध-संग्रहों में अशोक के फूल, कल्पलता, कुटज आदि शामिल हैं।
  • रचना विवरण
    • 'आलोक पर्व' एक निबंध-संग्रह है जिसमें भारतीय धर्म, दर्शन, संस्कृति और साहित्य पर गहन चिंतन है।
    • द्विवेदी जी ने इसमें अपनी संकोचहीन अभिव्यक्ति दी है
    • जो विवेकपूर्ण और प्रेरक है। यह संग्रह राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ।
  • पुरस्कार संदर्भ
    • साहित्य अकादमी ने 1973 में हिंदी के लिए यह पुरस्कार 'आलोक पर्व' को दिया
    • जो द्विवेदी की साहित्यिक उपलब्धि का प्रमाण है। कुछ स्रोतों में भवानी प्रसाद मिश्र का उल्लेख गलत है
    • किंतु विकिपीडिया और अन्य प्रमाणिक स्थलों पर हजारीप्रसाद द्विवेदी ही सही लेखक हैं।

8. भगवतीचरण वर्मा को किस कृति पर साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया? [रेडियो ऑपरेटर (उ.प्र.पुलिस) परीक्षा, 2024]

Correct Answer: (d) भूले-बिसरे चित्र
Solution:
  • भगवतीचरण वर्मा को 1961 ई. का साहित्य अकादमी पुरस्कार 'भूले-बिसरे चित्र' उपन्यास हेतु दिया गया था।
  • वह फिर नहीं आई, टेढ़े-मेढ़े रास्ते तथा पतन इन्हीं की कृतियाँ हैं।
  • पुरस्कार का विवरण
    • यह पुरस्कार 1961 में हिंदी साहित्य की श्रेणी में प्रदान किया गया।
    • भूले बिसरे चित्र उनका बृहत्तम और सर्वाधिक सफल उपन्यास है
    • जो 1959 में प्रकाशित हुआ। इसमें भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के तीन युगों की पृष्ठभूमि पर तीन पीढ़ियों का मार्मिक चित्रण किया गया है, जिसमें अनुभूति और संवेदना की कलात्मक सत्यता प्रमुख है।
  • लेखक का संक्षिप्त जीवन परिचय
    • भगवतीचरण वर्मा का जन्म 30 अगस्त 1903 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के सफीपुर में हुआ था।
    • उन्होंने उपन्यास, कहानियाँ, कविताएँ, निबंध, एकांकी और नाटक लिखे।
    • उनकी अन्य प्रमुख कृतियाँ चित्रलेखा (जिस पर दो फिल्में बनीं), टेढ़े-मेढ़े रास्ते, आखिरी दाँव, अपने खिलौने और प्रायश्चित हैं। चित्रलेखा में पाप-पुण्य जैसे दार्शनिक प्रश्नों पर गहन चिंतन है।
  • साहित्यिक योगदान
    • उनकी रचनाओं में दार्शनिकता, कौतूहल, विशिष्ट चरित्र-चित्रण, हास्य-व्यंग्य और सरस भाषा-शैली की विशेषताएँ हैं।
    • कहानियों से हिंदी कहानी-धारा को समृद्ध किया, निबंधों में साहित्य विधाओं और सामाजिक समस्याओं पर विचार किया।
    • नाटकों में समाज की गंभीर समस्याओं पर हास्य के माध्यम से टिप्पणी की।
    • काव्य में 'भैंसागाड़ी' जैसी रचना प्रगतिवादी मानववाद को दर्शाती है।​
  • अन्य सम्मान
    • पद्म भूषण (1971)।
    • राज्यसभा की मानद सदस्यता (1978)।
    • वाचस्पति उपाधि (1969)।​
  • निधन
    • 5 अक्टूबर 1981 को दिल्ली में उनका निधन हो गया।
    • उनकी रचनाएँ आज भी हिंदी साहित्य की अमर धरोहर हैं।

9. निम्न में से कौन-सी कृति सन् 1963 में साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता 'अमृत राय' की है? [UPSI Exam, 15-दिसम्बर, 2017 (प्रथम पाली)]

Correct Answer: (a) प्रेमचन्दः कलम का सिपाही
Solution:
  • 'प्रेमचन्द : कलम का सिपाही' हिन्दी के विख्यात साहित्यकार अमृत राय द्वारा रचित प्रेमचन्द की जीवनी है
  • जिसके लिए उन्हें 1963 ई. का साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • कलम का सिपाही
    • अमृत राय की वह कृति जो 1963 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हुई, 'कलम का सिपाही' है।
    • यह प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार प्रेमचंद की आधिकारिक जीवनी है, जिसे उनके छोटे पुत्र अमृत राय ने लिखा।​
  • अमृत राय का परिचय
    • अमृत राय (1921-1996) हिंदी साहित्य के बहुमुखी लेखक थे
    • जो कहानी, उपन्यास, नाटक, अनुवाद, आलोचना और जीवनी विधा में सक्रिय रहे।
    • वे प्रेमचंद के पुत्र होने के साथ-साथ स्वतंत्र रूप से अपनी पहचान बना चुके थे।
    • उन्होंने अंग्रेजी, बांग्ला और हिंदी पर समान अधिकार रखा तथा रवींद्रनाथ टैगोर, शेक्सपियर, हावर्ड फास्ट जैसे विश्व लेखकों के कार्यों का हिंदी अनुवाद किया।​​
    • उनकी अन्य प्रमुख रचनाएँ включают उपन्यास जैसे 'बीज', 'नागफनी का देश', 'जंगल', 'धुआँ'; कहानी संग्रह जैसे 'कस्बे का एक दिन', 'गीली मिट्टी', 'सरगम'; नाटक जैसे 'चिन्दियों की एक झालर', 'शताब्दी'; तथा आलोचना ग्रंथ जैसे 'नई समीक्षा', 'विचारधारा और साहित्य'।
    • उन्होंने प्रेमचंद की अप्रकाशित रचनाओं को संकलित कर प्रकाशित भी किया।​​
  • 'कलम का सिपाही' के बारे में
    • यह जीवनी 1950 के दशक में लिखी गई तथा 1963 में हिंदी भाषा में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त की।
    • पुस्तक प्रेमचंद (1880-1936) के जीवन, संघर्षों, साहित्यिक यात्रा और सामाजिक योगदान को विस्तार से चित्रित करती है।
    • प्रेमचंद की मृत्यु के समय अमृत राय मात्र 15 वर्ष के थे
    • फिर भी उन्होंने पिता के दस्तावेजों, पत्रों, साक्षात्कारों और व्यक्तिगत स्मृतियों के आधार पर यह जीवनी रची।​
    • पुस्तक प्रेमचंद को 'कलम का सिपाही' कहकर उनके लेखन को सामाजिक क्रांति का हथियार बताती है।
    • यह न केवल जीवनी है, बल्कि हिंदी साहित्य के विकास और प्रगतिशील आंदोलन का दस्तावेज भी है।
    • कई स्रोतों में इसे "प्रेमचंद: कलम का सिपाही" के रूप में भी उल्लेखित किया गया है।​
  • पुरस्कार और महत्व
    • 1963 का साहित्य अकादमी पुरस्कार इस कृति के लिए ही दिया गया
    • जो अमृत राय को हिंदी साहित्य में सर्वोच्च सम्मान प्रदान करता है।
    • इसके अलावा उन्हें 1971 में सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, अनुवाद के लिए भारत सरकार का पुरस्कार तथा उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का भारत भारती पुरस्कार मिला।
    • यह पुरस्कार जीवनी विधा में उनकी उत्कृष्टता को प्रमाणित करता है।​​
  • अन्य संदर्भ
    • प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UP SI, REET में यह प्रश्न बारंबार पूछा जाता है
    • जहाँ विकल्पों में अन्य रचनाएँ हो सकती हैं, किंतु सही उत्तर यही है।
    • अमृत राय का निधन 14 अगस्त 1996 को प्रयागराज में हुआ।​

10. निम्नलिखित में से किसको 'साहित्य अकादमी' पुरस्कार मिला है? [UPSSSC ग्राम पंचायत अधिकारी पुनर्परीक्षा, 2016]

Correct Answer: (a) नामवर सिंह
Solution:
  • वर्ष 1971 में नामवर सिंह को उनकी साहित्यिक आलोचना कृति 'कविता के नये प्रतिमान' के लिए हिन्दी भाषा का 'साहित्य अकादमी' पुरस्कार मिला।
  • पुरस्कार का स्वरूप
    • साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रत्येक भाषा में एक-एक कृति को दिया जाता है
    • जिसमें कविता, उपन्यास, कहानी संग्रह, निबंध, नाटक आदि विधाएँ शामिल होती हैं।
    • पुरस्कार राशि वर्तमान में 1 लाख रुपये है
    • साथ ही एक शाल, प्रशस्ति पत्र और ताम्र पत्रिका प्रदान की जाती है।
    • यह पुरस्कार पिछले 5 वर्षों में प्रकाशित कृतियों के लिए होता है।
  • हालिया विजेता (2024 तक)
    • 2024 में नेपाली भाषा में युवा बराल को 'छिचिमिरा' (कहानी संग्रह) के लिए पुरस्कार मिला।
    • असमिया में समीर तांती को 'फरिंगबोर बटोर कथा जने' (कविता) और 2023 में प्रणवज्योति डेका को 'श्रेष्ठ गल्प' (कहानी संग्रह) प्राप्त हुआ।
    • हिंदी में उदाहरणस्वरूप, 1996 में केशवचंद्र दाश को 'ईशा' (कविता संकलन) मिला।
    • नेपाली साहित्य में लंबी सूची है, जैसे 2023 में युद्धवीर राणा को 'नेपाली लोकसाहित्य र लोकसंस्कृतिको परिचय' (निबंध)।​
  • हिंदी भाषा के प्रमुख विजेता
    • हिंदी में कुछ उल्लेखनीय विजेता इस प्रकार हैं:
    • 1995: रसिक बिहारी जोशी को 'श्रीराधापंचशती' (काव्य)।
    • 1994: राधावल्लभ त्रिपाठी को 'संधानम्' (कविता संग्रह)।
    • 1993: जग्गु वकुलभूषण को 'जयंतिका' (गद्य गल्प)।
    • 1992: हरिनारायण दीक्षित को 'भीष्मचरितम्' (महाकाव्य)।
    • पूर्ण सूची साहित्य अकादमी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है, जहाँ 1955 से सभी वर्षों के विजेता दर्ज हैं।​
  • अन्य भाषाओं के उदाहरण
    • डोगरी: ज्ञान सिंह पगोच जैसे लेखक पुरस्कृत।
    • कुल 24 भाषाएँ: अंगिका, भोटिया, बोडो, डोगरी, मैथिली आदि शामिल।
    • 2026 तक युवा पुरस्कार के लिए नामांकन चल रहे हैं, लेकिन मुख्य पुरस्कार की 2025-26 घोषणा बाकी है।
  • ऐतिहासिक महत्व
    • यह पुरस्कार भारतीय साहित्य को प्रोत्साहित करने का प्रमुख माध्यम है।
    • 1955 से अब तक हजारों लेखक सम्मानित हो चुके हैं।
    • विकिपीडिया और आधिकारिक साइट पर विस्तृत वर्षानुसार सूची उपलब्ध है।