पुरस्कार (परम्परागत सामान्य ज्ञान)

साहित्य अकादमी पुरस्कार

Total Questions: 36

11. जिस कृति के लिए कवि नागार्जुन को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला, वह किस भाषा में रचित है? [UPSI Exam, 16-दिसम्बर, 2017 (प्रथम पाली)]

Correct Answer: (a) मैथिली
Solution:
  • 'बाबा' के नाम से प्रसिद्ध कवि नागार्जुन का वास्तविक नाम वैद्यनाथ मिश्र था। ये प्रगतिवादी विचार धारा के कवि थे।
  • इन्हें 'पत्रहीन नग्न गाछ' (मैथिली कविता संग्रह) के लिए वर्ष 1968 का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • कृति का नाम और भाषा
    • कवि नागार्जुन को साहित्य अकादमी पुरस्कार उनकी मैथिली भाषा की कृति 'पत्रहीन नग्न गाछ' (Patraheen Nagna Gachh) के लिए मिला था।
    • यह पुरस्कार 1969 में प्रदान किया गया था
    • यह कविता-संग्रह उनकी मातृभाषा मैथिली में रचित है, जिसमें छंदबद्ध और छंदमुक्त दोनों शैलियाँ शामिल हैं ।
  • नागार्जुन का संक्षिप्त परिचय
    • नागार्जुन (जन्म: 30 जून 1911, मृत्यु: 5 नवंबर 1998) बिहार के दरभंगा के पास तारापुर गाँव के निवासी थे।
    • वे हिंदी, मैथिली, संस्कृत और बांग्ला भाषाओं में रचनाएँ करते थे, लेकिन मैथिली उनकी मूल भाषा थी
    • जिसमें वे 'यात्री' छद्म नाम से लिखते थे । उनकी रचनाएँ जनवादी, प्रगतिशील और लोकभाषा-प्रधान हैं, जो गरीबों, मज़दूरों और सामाजिक शोषण पर केंद्रित हैं ।​
  • पुरस्कार का वर्ष और महत्व
    • साहित्य अकादमी ने 1969 में 'पत्रहीन नग्न गाछ' को मैथिली में सर्वश्रेष्ठ कृति मानकर पुरस्कार दिया
    • यह संग्रह नवीन भावबोध की शुरुआत करता है, जिसमें बोलचाल की जीवंत भाषा और संस्कृत परंपरा का मिश्रण है
    • नागार्जुन को अन्य सम्मान भी मिले, जैसे भारत-भारती पुरस्कार, मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार और साहित्य अकादमी फेलोशिप (1994) ।
  • कृति की विशेषताएँ

    • 'पत्रहीन नग्न गाछ' मैथिली कविताओं का महत्वपूर्ण संग्रह है, जो प्रकृति, ग्रामीण जीवन और सामाजिक यथार्थ को चित्रित करता है।
    • इसमें 'चित्रा' के बाद की रचनाएँ शामिल हैं, जो यात्री रचनावली का हिस्सा बनीं ।
    • कृति की भाषा सरल, रवान और लोक-उन्मुख है, जो नागार्जुन की सत्यवादिता को दर्शाती है
    • यह पुरस्कार उनकी मैथिली साहित्य में योगदान को मान्यता देता है।

12. सन् 1974 में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त शिवमंगल सिंह सुमन की रचना 'मिट्टी की बारात' किस विधा की कृति है? [UPSI Exam, 01-जुलाई, 2018 (तृतीय पाली)]

Correct Answer: (d) काव्य
Solution:
  • 'मिट्टी की बारात' हिन्दी के विख्यात साहित्यकार शिवमंगल सिंह 'सुमन' द्वारा रचित एक काव्य-संग्रह है। इस कृति पर इन्हें वर्ष 1974 में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
  • विधा और प्रकार
    • यह कृति हिंदी साहित्य में कविता संग्रह (Poetry Collection) की विधा की है। विशेष रूप से, इसे ओजस्वी काव्य के उदाहरण के रूप में जाना जाता है
    • जिसमें प्रगतिशील विचार, सामाजिक विद्रोह और जीवन की विराटता का चित्रण है।
    • कुछ स्रोत इसे 'शोकगीत' का प्रमुख उदाहरण भी मानते हैं, जो निराला की 'सरोज-स्मृति' के बाद दूसरा सबसे प्रसिद्ध है।
  • पुरस्कार और मान्यता
    • सन् 1974 में शिवमंगल सिंह सुमन को इसी कृति के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।
    • इसके अलावा, इसे सोवियतलैंड नेहरू पुरस्कार भी मिला, जो इसकी साहित्यिक महत्ता को दर्शाता है।
    • यह पुरस्कार हिंदी कविता के क्षेत्र में उनकी उपलब्धि का प्रतीक है।
  • रचना की पृष्ठभूमि
    • शिवमंगल सिंह सुमन हिंदी के ओजस्वी कवि थे, जिन्होंने प्रशासनिक सेवा के बावजूद साहित्य सृजन जारी रखा।
    • इस संग्रह में कविताएँ जीवन की जड़-चेतन संबंधों, सौरमंडल की विजय, सामाजिक जर्जरता और प्रकृति के प्रतीकों से ओतप्रोत हैं। कवि स्वयं इसे कविता के बदलते आयामों का प्रयास बताते हैं।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • विषय-वस्तु: सामाजिक असमानता, विद्रोह (जैसे 'शिकारी बाज' की छवि), प्रकृति का आह्वान (फसलें, बौछार, घटाएँ) और व्यक्तिगत संवेदना।​
    • शैली: ओजपूर्ण भाषा, प्रतीकात्मकता और गहन भावुकता; उदाहरणस्वरूप, "मैं और किसी से नहीं, स्वयं से वंचित हूँ" जैसी पंक्तियाँ।​
    • प्रकाशन: राजकमल प्रकाशन से 2004 में पुनर्मुद्रित (मूल 1970 के दशक); लगभग 156 पृष्ठ।​
  • साहित्यिक महत्व
    • यह संग्रह हिंदी कविता को नई ऊँचाइयों पर ले जाता है, जहाँ कवि प्रशासनिक एकरसता के बीच रचनात्मकता बनाए रखते हैं।
    • समकालीन हिंदी साहित्य में यह प्रगतिवादी धारा का प्रतिनिधित्व करता है
    • जो पाठकों को सामाजिक चेतना जगाता है। कविता कोश और विकिपीडिया जैसे स्रोत इसे सुमन की सर्वश्रेष्ठ कृतियों में गिनाते हैं।

13. वर्ष 2005 में हिन्दी साहित्य के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार किसने जीता? [रेडियो ऑपरेटर (उ.प्र. पुलिस) परीक्षा, 2024]

Correct Answer: (b) मनोहर श्याम जोशी
Solution:
  • वर्ष 2005 का हिन्दी साहित्य अकादमी पुरस्कार 'मनोहर श्याम जोशी को' 'क्याप' उपन्यास हेतु दिया गया।
  • पुरस्कार का संदर्भ
    • साहित्य अकादमी भारत की प्रमुख साहित्यिक संस्था है, जो 1954 में स्थापित हुई और 22 भाषाओं में रचनाकारों को सम्मानित करती है।
    • हिंदी में यह पुरस्कार 1955 से शुरू हुए, जहां पहले विजेता माखनलाल चतुर्वेदी थे।
    • 2005 का पुरस्कार जोशी जी को उनकी रचना क्याप के लिए मिला
    • जो सामाजिक विसंगतियों और आधुनिक जीवन की विडंबनाओं पर आधारित एक महत्वपूर्ण उपन्यास है।​
  • मनोहर श्याम जोशी का परिचय
    • मनोहर श्याम जोशी (1932-2008) हिंदी साहित्य के प्रमुख उपन्यासकार, नाटककार और पत्रकार थे।
    • वे कुँवरलाल चतुर्वेदी, रचना जैसी पत्रिकाओं से जुड़े रहे तथा दूरदर्शन के लिए मालगुड़ी डेज़ जैसे धारावाहिकों के लेखन में योगदान दिया।
    • उनकी रचनाएँ व्यंग्य, समाजवाद और मानवीय संबंधों पर केंद्रित होती थीं।
    • क्याप उनके परिपक्व कार्यों में से एक है, जो 2005 में अकादमी पुरस्कार जीतकर उनके योगदान को मान्यता दिलाई।
  • क्याप उपन्यास का विवरण
    • क्याप एक समकालीन उपन्यास है जो शहरी मध्यमवर्गीय जीवन, पूँजीवाद की मार और पारिवारिक विघटन को चित्रित करता है।
    • इसमें 'क्याप' शब्द कंप्यूटर/कॉर्पोरेट जगत के संदर्भ में प्रयुक्त होता है, जो पात्रों के जीवन की जटिलताओं को दर्शाता है।
    • यह रचना व्यंग्यात्मक शैली में लिखी गई है और हिंदी साहित्य में आधुनिकता के नए आयाम जोड़ती है। पुरस्कार की घोषणा के बाद इसे व्यापक सराहना मिली।​
  • आसपास के वर्षों के विजेता
    • 2004: वीरेन डंगवाल को दुश्चक्र में स्रष्टा (कविता-संग्रह) के लिए।
    • 2003: कमलेश्वर को कितने पाकिस्तान (उपन्यास) के लिए।​
    • 2006: अगला पुरस्कार अन्य लेखक को मिला, लेकिन 2005 स्पष्ट रूप से जोशी जी का रहा।

14. वर्ष 2022 में किसे सम्पूर्ण साहित्य के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ? [रेडियो ऑपरेटर (उ.प्र. पुलिस) परीक्षा, 2024]

Correct Answer: (a) दामोदर मौजो
Solution:
  • वर्ष 2022 में दामोदर मौजो को सम्पूर्ण साहित्य के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • ये कोंकणी भाषा के साहित्यकार हैं। भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार की सूची-
  • पुरस्कार की पृष्ठभूमि
    • ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है
    • जो भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा संविधान की आठवीं अनुसूची की भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों या सम्पूर्ण साहित्यिक योगदान के लिए दिया जाता है।
    • 1961 में शुरू हुआ यह पुरस्कार हर दो वर्ष में दो या अधिक विजेताओं को प्रदान किया जाता है।
    • 2022 में यह दामोदर मौउजो को कोंकणी भाषा में उनके लघु कथाओं, उपन्यासों और आलोचनात्मक कार्यों के लिए मिला
    • साथ ही असमिया लेखक नीलमणि फूकन को भी संयुक्त रूप से सम्मानित किया गया।
  • दामोदर मौउजो का जीवन परिचय
    • दामोदर मौउजो का जन्म 1944 में गोवा में हुआ। वे एक प्रमुख कोंकणी लेखक हैं
    • जिन्होंने करीब 50 वर्षों के साहित्यिक सफर में छह कहानी संग्रह, चार उपन्यास, दो आत्मकथाएँ, निबंध और बाल साहित्य रचा।
    • उनकी पहली कहानी संग्रह 1971 में 'गैंथन' प्रकाशित हुई।
    • वे गोवा के सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों, मानवीय संवेदनाओं और गोवा की संस्कृति को अपनी रचनाओं में जीवंत करते हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ और उपलब्धियाँ
    • उनके उपन्यास 'कार्मेलिन' (1983) के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला, जो कोंकणी साहित्य में मील का पत्थर है।
    • अन्य उल्लेखनीय कृतियाँ हैं 'सुनामी साइमन' (2011 के लिए विमला वी. पाई विश्व कोंकणी साहित्य पुरस्कार), 'टेरेसाज मैन एंड अदर स्टोरीज फ्रॉम गोवा'।
    • वे ज्ञानपीठ पाने वाले दूसरे कोंकणी लेखक हैं
    • इससे पहले 2006 में रवींद्र केलेकर को यह सम्मान मिला। पुरस्कार में 11 लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र और बाणस्थамб प्रतिमा शामिल है।
  • पुरस्कार का महत्व
    • यह पुरस्कार कोंकणी जैसे छोटी भाषा के साहित्य को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है।
    • दामोदर मौउजो की रचनाएँ गोवा की स्थानीयता को वैश्विक स्तर पर ले जाती हैं
    • जैसे पुर्तगाली उपनिवेशवाद और आधुनिक चुनौतियाँ। 2022 का यह चयन भाषाई विविधता को दर्शाता है।

15. 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' किस भाषा से सम्बन्धित है? [UPP, 25 Aug, 2024 II-Shift UPSSSC ग्राम पंचायत अधिकारी पुनर्परीक्षा, 2016]

Correct Answer: (d) संविधान की आठवीं अनुसूची की सभी भाषाओं से
Solution:
  • 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' का सम्बन्ध संविधान की आठवीं अनुसूची की सभी (22) भाषाओं से है।
  • यह भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है और प्रतिवर्ष संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लिखित भारतीय भाषाओं के किसी विख्यात साहित्यकार को प्रदान किया जाता है।
  • वर्ष 2018 का 54वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार अँग्रेज़ी के प्रख्यात लेखक एवं उपन्यासकार अमिताव घोष को प्रदान किया गया।
  • नोट: अँग्रेजी भाषा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं है
  • फिर भी अपवाद स्वरूप वर्ष 2018 में अँग्रेज़ी साहित्य हेतु पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है।
  • विस्तृत जानकारी
  • भाषाओं के चयन और नियम
    • पुरस्कार सिर्फ एक भाषा के लेखक को नहीं देता; चयन समिति आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से किसी भी भाषा के लेखक को मान्यता दे सकती है .
    • भाषा-वार विविधता सुनिश्चित करने के लिए कुछ वर्षों में भाषा-रोटेशन नियम जैसे विचार भी चर्चा में आते रहे हैं ताकि विभिन्न भाषाओं को बराबर अवसर मिले ।
  • भाषा-वार रेकॉर्ड और डेटा
    • अब तक हिन्दी, कन्नड़, बंगाली, मलयालम, उड़िया, उर्दू, गुजराती, असमिया, मराठी, तेलुगू, पंजाबी, तमिल आदि भाषाओं के लेखकों ने ज्ञानपीठ जीता है
    • कुछ भाषाओं के लेखकों ने इसे एक से अधिक बार पाया है (उदा. हिन्दी और कन्नड़ कई बार विजेता रहे हैं) ।
    • पहली बार 1965 में जी. शंकर कुरुप को मलयालम साहित्य के लिए पुरस्कार मिला था; विभिन्न वर्षों में विभिन्न भाषाओं के लेखकWinner रहे हैं ।
  • पुरस्कार‑आदर्श और राशि
    • पुरस्कार में एक प्रशस्तिपत्र, वाग्देवी की कांस्य मूर्ति और निर्धारित राशि शामिल होती है
    • (भारतीय रुपये के प्रकार और राशि समय के अनुसार बदलती रहती है; अभी के लिए 11 लाख रुपये जैसी जानकारी प्रचलित है) ।
    • यह पुरस्कार केवल जीवित भारतीय नागरिकों के लिए है
    • पूर्व-निर्धारण प्रक्रिया के तहत चयन किया जाता है
    • जिसमें भाषा चयन समिति और निर्णायक बोर्ड की सिफारिशें शामिल होती हैं ।
  • आधुनिक संदर्भ और विवाद
    • कुछ बार अंग्रेजी सहित नई भाषाओं के लेखकों को भी पुरस्कार मिला है, जो भाषा-विविधता के महत्व को रेखांकित करता है ।
    • मीडिया और शिक्षण संदर्भों में ज्ञानपीठ पुरस्कार की सूची और भाषा-वार वितरण के बारे में अक्सर चर्चा रहती है
    • पाठक यह समझ सकें कि भारतीय साहित्य कैसे बहुभाषी विविधता को समेटता है ।
  • उद्धरण और स्रोत
    • ज्ञानपीठ पुरस्कार से जुड़ी आधिकारिक जानकारी और भाषाओं के प्रवृत्ति पर विवरण: पुस्तक-प्रलेखन/विकि पृष्ठ और श्रोतों के संकलन ।
    • भाषाओं के लिए विजेता सूचियाँ और भाषा-रोटेशन के बारे में विश्लेषण: विकलांग स्रोतों और शिक्षण-स्रोतों का संयोजन ।

16. 1982 को भारतीय साहित्य में अतुलनीय योगदान के लिए महादेवी वर्मा को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था? [रेडियो ऑपरेटर (उ. प्र. पुलिस), परीक्षा, 2024 UPSI Exam, 16-दिसम्बर, 2017 (प्रथम पाली)]

Correct Answer: (a) ज्ञानपीठ
Solution:
  • वर्ष 1982 का ज्ञानपीठ पुरस्कार छायावादी कवयित्री महादेवी वर्मा को 'यामा' काव्यकृति हेतु दिया गया था ।
  • पुरस्कार का विवरण
    • ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है, जिसे भारतीया ज्ञानपीठ द्वारा प्रदान किया जाता है।
    • 1982 में महादेवी वर्मा को यह पुरस्कार 20वें ज्ञानपीठ पुरस्कार के रूप में मिला, जब वे हिंदी साहित्य की प्रमुख कवयित्री के रूप में पहचानी गईं।
    • यामा संग्रह में उनके प्रारंभिक चार काव्य-संग्रह—नीहार (1930), रश्मि (1932), नीरजा (1934) और सांध्यगीत (1936)—संकलित हैं
    • जो प्रकृति, प्रेम, करुणा और स्त्री-वेदना जैसे विषयों पर आधारित हैं।​
    • यह पुरस्कार 27 अप्रैल 1982 को घोषित हुआ, जो भारतीय साहित्य में उनके अतुलनीय योगदान को मान्यता देता है।​
  • महादेवी वर्मा का साहित्यिक परिचय
    • महादेवी वर्मा (26 मार्च 1907 - 11 सितंबर 1987) हिंदी के छायावादी युग की चार प्रमुख कवयित्रियों में से एक हैं, जिन्हें 'आधुनिक मीरा' भी कहा जाता है।
    • उनकी रचनाएँ रहस्यवाद, प्रकृति-चित्रण और सामाजिक सुधार पर केंद्रित हैं; उन्होंने नारी-मुक्ति और दलित-उत्थान पर भी गहन निबंध लिखे।​
    • अन्य प्रमुख रचनाएँ: दीपशिखा (1942), नई बस्ती (कहानी-संग्रह), अतीत के चलचित्र (आत्मकथा)।​
  • अन्य सम्मान
    • 1956: पद्म भूषण
    • 1979: साहित्य अकादमी फेलोशिप
    • 1988: पद्म विभूषण (मरणोपरांत)
  • ज्ञानपीठ पुरस्कार संदर्भ
    • ज्ञानपीठ विजेताओं में महादेवी 20वीं प्राप्तकर्ता थीं
    • जिनसे पूर्व सुमित्रानंदन पंत (1968), रामधारी सिंह 'दिनकर' (1972) और अज्ञेय (1978) जैसे हिंदी साहित्यकार सम्मानित हो चुके थे।​
    • यह पुरस्कार साहित्य में जीवनकालीन उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है
    • जिसमें सम्मान राशि (वर्तमान में 11 लाख रुपये) और प्रशस्ति-पत्र शामिल होता है।​
  • यामा का महत्व
    • यामा में वियोग, विरह और आध्यात्मिक खोज की भावुक अभिव्यक्ति है, जो छायावाद की कोमलता को दर्शाती है।​
    • इसकी भाषा सरल却 गहन है, जिसमें प्रतीकात्मकता प्रमुख है—जैसे यामा (मृत्यु/नियंता) जीवन के दुखों का प्रतीक।
    • यह संग्रह 1936 में प्रकाशित हुआ, लेकिन 1982 में ज्ञानपीठ ने इसे हिंदी काव्य का अमर गान माना।

17. महादेवी वर्मा को किस पुस्तक पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था? [UPSSSC राजस्व निरीक्षक परीक्षा, 2016]

Correct Answer: (d) यामा
Solution:
  • महादेवी वर्मा को 'यामा' काव्य संकलन के लिए भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' प्रदान किया गया।
  • उनकी अन्य रचनाएँ हैं-नीरजा, रश्मि, नीहार, स्मृति की रेखाएँ आदि।
  • जिसमें उनका प्रमुख चार कविता-संग्रह — नीहार, नीरजा, रश्मि और सांध्यगीत शामिल हैं।
  • यह पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है
  • साहित्यिक उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। महादेवी वर्मा को इस समर्पित कृति के कारण ज्ञानपीठ से सम्मानित किया गया था.
  • यामा एक कविता-संग्रह है जिसमें महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाओं का संकलन है; यह उनकी छायावादी काव्य परंपरा के शिखर में माना जाता है.​
  • ज्ञानपीठ पुरस्कार 1982 में यह कृति के लिए घोषित किया गया था, और उसी वर्ष यह भारतीय साहित्य में एक मील का पत्थर बना.​
  • महादेवी वर्मा हिन्दी साहित्य की 유명 छायावादी कवयित्रियों में से एक मानी जाती हैं, जिन्हें आधुनिक मीरा के समान माना गया है.​

18. राष्ट्रवादी कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' को 'उर्वशी' के लिए 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' किस वर्ष प्रदान किया गया? [UP- TET Exam Ist Paper (I-V), 2016]

Correct Answer: (b) 1972 ई. में
Solution:
  • राष्ट्रवादी कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' को काव्यकृति 'उर्वशी' के लिए 1972 ई. का ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया था।
  • हिन्दी भाषा में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने वाले ये दूसरे व्यक्ति हैं।
  • इनसे पूर्व 1968 ई. का ज्ञानपीठ पुरस्कार सुमित्रानन्दन पन्त को 'चिदम्बरा' कृति के लिए प्रदान किया गया था।
  • विस्तृत विवरण
  • पुरस्कार वर्ष: 1972
    • कृति: उर्वशी (खंड-काव्य)
    • पुरस्कार संस्था: भारतीय ज्ञानपीठ न्यास
    • पुरस्कार की राशि और प्रमाणपत्र: ज्ञानपीठ पुरस्कार सामान्यतः एक नगद राशि (तथाकथित पुरस्कार राशि) के साथ प्रशस्तिपत्र और वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा प्रदान करता है
    • वर्ष-वार विवरण में यह धारणीय रूप से समाहित रहता है.
    • दिनकर का योगदान: दिनकर को उर्वशी के माध्यम से राष्ट्रवाद, मानवता और प्रेम के विचारों को समाहित करने वाली काव्य-परंपरा में विशिष्ट स्थान मिला
    • इसके कारण उन्हें ज्ञानपीठ के लिए चुना गया था.
  • संदर्भ और अतिरिक्त जानकारी
    • उर्वशी ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होने वाले प्रमुख भारतीय कवियों में से एक है; ज्ञानपीठ इस रचना के लिए अच्छा-खासा प्रभावशाली चयन माना जाता है ।​
    • दिनकर को अन्य सम्मान भी मिले, जैसे पद्म भूषण, लेकिन यहाँ लक्षित तथ्य उर्वशी के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार का वर्ष है जो 1972 है ।​
    • उपलब्ध शिक्षण-स्रोतों के अनुसार 1972 वर्ष को ही सही उत्तर माना गया है; कुछ क्विज़-प्रश्नों में यही विकल्प लक्ष्य कर दिया जाता है.

19. अज्ञेय जी को किस कृति पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला है? [UPSI Exam, 21-दिसम्बर, 2017 (तृतीय पाली)]

Correct Answer: (c) कितनी नावों में कितनी बार
Solution:
  • वर्ष 1978 का ज्ञानपीठ पुरस्कार अज्ञेय जी को 'कितनी नावों में कितनी बार' काव्य संग्रह के लिए, दिया गया ।
  • विस्तार
  • पुरस्कार का मूल तथ्य
    • भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय साहित्य के सर्वोच्च सम्मानों में से एक है
    • जो विविध भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए दिया जाता है
    • अज्ञेय को 1979 में यह सम्मान उनकी प्रसिद्ध कृति “कितनी नावों में कितनी बार” के लिए प्रदान किया गया.
  • अन्य संदर्भ और पुष्टि
    • अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन) के जीवन और कृतित्व के पन्नों में यह पुरस्कार-मुकाम स्पष्ट रूप से दर्ज मिलता है
    • 1964 में साहित्य अकादमी पुरस्कार उनके “आँगन के पार द्वार” के लिए और 1979 में ज्ञानपीठ पुरस्कार उनकी कविताओं/कृतियों के लिए.
  • प्रमुख कृतियाँ और उनके उल्लेख
    • “कितनी नावों में कितनी बार” (1978-1979 के आस-पास प्रकाशित कविताओं का संग्रह) इस पुरस्कार के लिए सर्वाधिक उल्लेखित कृति मानी जाती है
    • यह संग्रह अज्ञेय की प्रयोगधर्मिता और आधुनिक हिंदी कविता की दिशा-निर्देशन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना गया है.
  • संदर्भों की सावधानी
    • हिंदी साहित्य के इतिहास में अज्ञेय के दो अत्यंत उल्लेखनीय पुरस्कार – साहित्य अकादमी पुरस्कार (1964) और ज्ञानपीठ पुरस्कार (1979) – बार-बार उद्धृत होते हैं
    • विशिष्ट वर्ष और कृति की पुष्टि विभिन्न स्रोतों में एकमत है
    • ऊपर दिए गए स्रोतों के आधार पर इन्हीं दो प्रमुख उपलब्धियों को भाषा-कार्यक्षेत्र में मान्यता प्राप्त है.
  • फर्टिलिकल नोट्स
    • यदि आप चाहें, तो मैं इन स्रोतों के सीधे पृष्ठों से उद्धरण-शब्द लेकर एक संक्षिप्त उद्धरण-सार भी दे सकता/सकती हूँ ताकि आप कहीं भी संदर्भ दे सकें.
  • उद्धरण (संदर्भ)
    • अज्ञेय की रचनाओं और पुरस्कारों के इतिहास का संकलन दिखाने वाले स्रोत: प्रोफाइल/अज्ञेय के जीवन परिचय (1964 साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1979 ज्ञानपीठ पुरस्कार के उल्लेख).​
    • समकक्ष संदर्भों में “आँगन के पार द्वार” (1964) और “कितनी नावों में कितनी बार” (1979) के ज्ञानपीठ पुरस्कार के उल्लेख.

20. ज्ञानपीठ पुरस्कार किस क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करने पर दिया जाता है? [U.K.TET Exam Ist Paper (I-V), 2015]

Correct Answer: (d) साहित्य
Solution:
  • ज्ञानपीठ पुरस्कार, भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा भारतीय साहित्य के लिए प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है।
  • भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त कुल 22 भाषाओं में से किसी सर्वोत्कृष्ट रचना के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
  • 22 भाषााओं के अतिरिक्त अँग्रेज़ी भाषा में भी इसे 2018 ई. में प्रदान किया जा चुका है।
  • क्षेत्र क्या है: यह पुरस्कार मुख्यतः साहित्य (लिटरेचर) क्षेत्र के लिए है
  • लेखक की रचनात्मक कृति या समग्र साहित्यिक योगदान के मानक पर चुने जाते हैं।
  • साक्ष्य के अनुसार सही उत्तर यही है कि यह “साहित्य” के लिए दिया जाता है.​​
  • भाषा विविधता: चयन भारतीय संविधान की आठवीं सूची में शामिल 22 भाषाओं में से किसी एक में लिखे गए साहित्यिक कार्यों के आधार पर किया जाता है
  • साथ ही कभी-कभी अंग्रेजी भी शामिल हो सकती है; यह देशीय साहित्य की विविधता और उत्कृष्टता को मान्यता देता है.
  • मानक योग्यता: पुरस्कार केवल जीवित भारतीय नागरिकों को दिया जाता है
  • उनके प्रकाशित साहित्यिक कार्यों या समग्र योगदान पर विचार किया जाता है; मरणोत्तर प्रदान नहीं किया जाता है.
  • पुरस्कार की संरचना: विजेता को मानक नकद राशि, प्रशस्तिपत्र और वाग्देवी (सरस्वती) की कांस्य प्रतिमा दी जाती है
  • समय-समय पर राशि में परिवर्तन होता रहता है, लेकिन प्रमुख तत्व यह हैं.
  • इतिहास और दृष्टांत: ज्ञानपीठ की स्थापना 1961 में की गई थी और पहले पुरस्कार 1965 में दिया गया था
  • यह हिंदी के अलावा विभिन्न भारतीय भाषाओं के लेखकों को सम्मान देता है ताकि उनकी रचनात्मक संपदा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिले.
  • विजेताओं का घेरे: यह पुरस्कार हर साल एक लेखक को सम्मानित करता है जिसने अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो
  • कई बार चयनित लेखक एक से अधिक भाषाओं में लिखा हुआ होता है या उनकी समग्र साहित्यिक यात्रा प्रभावशाली मानी जाती है.
  • विचारणीय बिंदु: चयन प्रक्रिया पदावली, समीक्षा समितियाँ और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के आधार पर किया जाता है
  • यह पुरस्कार भारत की साहित्यिक परंपरा की विविधता और नवीनतम रचनात्मकता को साथ लेकर चलता है.
  • उपयोगी नोट्स/उद्धरण शैली
    • ज्ञानपीठ पुरस्कार साहित्य के क्षेत्र के लिए दिया जाता है.
    • यह भारतीय ज्ञानपीठ न्यास का सर्वोच्च literary पुरस्कार है
    • 1961 में स्थापित और 22 आधिकारिक भाषाओं में से किसी एक में लिखे लेखकों को सम्मानित किया जाता है.
    • विजेता को नकद धनराशि, प्रशस्तिपत्र और एक कांस्य प्रतिमा दी जाती है.