पुस्तकें (परम्परागत सामान्य ज्ञान)

Total Questions: 43

41. 'मैटर्स ऑफ डिस्क्रीशन' भारत के किस पूर्व प्रधानमंत्री की आत्मकथा है? [C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) इंद्र कुमार गुजराल
Solution:
  • 'मैटर्स ऑफ डिस्क्रीशन एन ऑटोबायोग्राफी' (Matter of Discretion: An Autobiography) भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल की आत्मकथा है।
  • विस्तार से:
    • ब्रिटिश-भारतीय राजनेता और diplomat IK गुजराल के जीवन-काल की घटनाओं, निर्णय-प्रक्रियाओं और विदेश नीति के अनुभवों पर केंद्रित एक आत्मकथा है।
    • गुजराल ने अप्रैल 1997 से मार्च 1998 के बीच भारत के 12वें प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया
    • जिन्हें अक्सर भारतीय राजनीति के विविध पक्षों के समेकित दृष्टिकोण के लिए याद किया जाता है।
    • इस किताब में उनके निजी जीवन, राजनीतिक संघर्ष, विदेश नीति के निर्णय और नेतृत्व के मूल्यों पर चर्चा है।
    • [उद्धरण के लिए: आई.के. गुजराल की आत्मकथा के संदर्भ में सामान्य स्रोतों से यह जानकारी पुष्ट की जाती है]
    • उपरोक्त जानकारी के आधार पर, प्रश्न पूछा गया था: “मैटर्स ऑफ डिस्क्रीशन भारत के किस पूर्व प्रधानमंत्री की आत्मकथा है
    • इसका स्पष्ट उत्तर IK गुजराल है। यह स्पष्ट रूप से किताब के शीर्षक और लेखक की पंक्ति से जुड़ता है कि यह गुजराल की आत्मकथा है। [उद्धरण के लिए: संबंधित संदर्भ स्रोत]
  • अगर आप चाहें, मैं इस विषय पर 추가 जानकारी दे सकता/सकती हूँ, जैसे:
    • IK गुजराल का संक्षिप्त जीवन-चरित्र और प्रधानमंत्रित्व काल के प्रमुख चरण
    • Matters of Discretion: An Autobiography के मुख्य विषय और पुस्तक-नोट्स
    • उसी दौर की अन्य भारतीय प्रधानमंत्रियों की आत्मकथाएं और उनके केंद्रीय विषय

42. रससुंदरी देवी की आत्मकथा का नाम क्या है? [C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) आमार जीबन
Solution:
  • 'आमार जीबन' (बांग्ला भाषा), रससुंदरी देवी की आत्मकथा का नाम है।
  • यह हमें 19वीं सदी के भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति के बारे में बताता है।
  • जीवन परिचय
    • रससुंदरी देवी का जन्म 1809-1810 में पश्चिमी बांग्लादेश के पबना जिले के पोताजिया गाँव में एक ग्रामीण जमींदार परिवार में हुआ था।
    • उनके पिता की मृत्यु बचपन में ही हो गई, इसलिए उनकी विधवा माँ ने उनका पालन-पोषण किया।
    • 12 वर्ष की आयु में उनकी शादी फरीदपुर के रामदिया गाँव के नीलमणि रॉय से हुई, जो एक संपन्न परिवार से थे।​
    • उस समय बंगाल के ग्रामीण समाज में महिलाओं की शिक्षा निषिद्ध थी और पढ़ी-लिखी महिला को शापित माना जाता था।
    • फिर भी रससुंदरी ने घरेलू कार्यों के बीच छिप-छिपकर स्वयं को पढ़ना-लिखना सिखाया।
    • 26 वर्ष की आयु तक उन्होंने यह कला अर्जित कर ली। उन्होंने 12 बच्चों को जन्म दिया
    • जिनमें से 7 की sớm मृत्यु हो गई। 59 वर्ष की आयु में पति की मृत्यु के बाद उन्होंने लेखन पर ध्यान केंद्रित किया।​
  • आत्मकथा की रचना और प्रकाशन
    • अमर जीवन का पहला भाग 1868-1876 के आसपास लिखा गया और 1876 में प्रकाशित हुआ।
    • पूरा कार्य दो भागों में विभाजित है—पहले भाग में 16 रचनाएँ और दूसरे में 15, जो 1906 तक प्रकाशित हो चुका था।
    • यह शुद्ध बांग्ला में लिखी गई है और 19वीं सदी के ग्रामीण बंगाल के समाज, विशेषकर महिलाओं की दयनीय स्थिति को चित्रित करती है।
    • रससुंदरी ने प्रत्येक रचना की शुरुआत में वैष्णव देवता दयामाधव को समर्पित भक्ति कविताएँ लिखीं।
    • उन्होंने ईश्वरीय कृपा के साथ-साथ अपनी मेहनत और संघर्ष को भी उजागर किया।
    • 88 वर्ष की आयु तक जीवित रहते हुए उन्होंने दूसरा भाग पूरा किया। यह आत्मकथा न केवल व्यक्तिगत जीवनवृत्तांत है
    • बल्कि सामाजिक सुधारों की पूर्व संध्या पर महिलाओं की स्वतंत्रता की प्रतीक है।
  • महत्व और विरासत
    • अमर जीवन भारतीय साहित्य में मील का पत्थर है क्योंकि यह पहली भारतीय महिला द्वारा लिखी गई प्रकाशित आत्मकथा है।
    • यह विधवा हो चुकी महिलाओं, बाल विवाह, घरेलू दासता और शिक्षा के अभाव जैसी समस्याओं को उजागर करती है।
    • रससुंदरी ने साक्षरता प्राप्त कर स्वयं को पति-पुत्रों से स्वतंत्र पहचान दी, जो उस युग में क्रांतिकारी था।
    • उनकी रचना ने बाद के लेखिकाओं को प्रेरित किया और बंगाली साहित्य में महिला-केंद्रित लेखन की नींव रखी।
    • यह ग्रामीण बंगाल की बदलती दुनिया का सजीव चित्रण भी प्रस्तुत करती है।​

43. 'आई एम नो मसीहा', अभिनेता ....... की आत्मकथा है। [C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) सोनू सूद
Solution:
  • 'आई एम नो मसीहा' (I AM NO MESSIAH) अभिनेता सोनू सूद की आत्मकथा है।
  • पुस्तक का परिचय
    • यह किताब सोनू सूद द्वारा लिखी गई है, जिसमें मीना अय्यर ने सह-लेखन किया।
    • पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा प्रकाशित, यह हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है।
    • दिसंबर 2020 में लॉन्च हुई, पुस्तक पहला व्यक्ति में लिखी गई है, जो उनके भावनात्मक संघर्षों और चुनौतियों को उजागर करती है।
  • पृष्ठभूमि और प्रेरणा
    • कोविड लॉकडाउन (2020) में सोनू सूद ने हजारों प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने में मदद की, जिससे उन्हें 'मसीहा' कहा जाने लगा।
    • किताब का शीर्षक इसी पर व्यंग्य करता है—सोनू कहते हैं, "लोग मुझे मसीहा कहते हैं
    • लेकिन मैं कोई मसीहा नहीं हूं। मैं बस वही करता हूं जो मेरा दिल कहता है।
    • यह उनके मानवीय दृष्टिकोण और सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाता है।​
  • मुख्य सामग्री
    • लॉकडाउन के दौरान बसें, ट्रेनें और हवाई जहाजों की व्यवस्था करके मजदूरों को घर भेजना।
    • आर्थिक संकट, भूख और बेघर मजदूरों की दर्दनाक कहानियां।
    • प्रशासनिक बाधाएं, भावनात्मक थकान और व्यक्तिगत बलिदान।
    • प्रवासियों के प्रति उनकी करुणा और भविष्य के लिए संदेश।​
    • पुस्तक में सोनू के अनकहे अनुभव हैं, जैसे एक मजदूर का परिवार खोना या लंबी यात्राओं की थकान।
  • रिलीज और स्वागत
    • 11 नवंबर 2020 को किताब का कवर जारी हुआ, और दिसंबर मध्य तक बाजार में आई।
    • लॉन्च पर राजकुमार राव और अपारशक्ति खुराना जैसे सितारों ने समर्थन किया।
    • सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जहां सोनू ने वीडियो शेयर कर इसे प्रचारित किया।​
  • सोनू सूद का संक्षिप्त परिचय
    • सोनू सूद (जन्म 30 जुलाई 1973, नागपुर) तेलुगु, तमिल, हिंदी सिनेमा में सक्रिय हैं।
    • फिल्में जैसे 'दबंग', 'रामायण' (हनुमान), 'मॉर्गनिया' से प्रसिद्ध। कोविड के अलावा, वे शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए दान देते हैं।​
  • महत्व
    • यह पुस्तक न केवल आत्मकथा है, बल्कि सामाजिक जागरूकता का दस्तावेज। यह दिखाती है
    • एक व्यक्ति बदलाव ला सकता है, बिना 'मसीहा' बने। कई प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे SSC CPO) में इससे प्रश्न पूछे गए।