पृथ्वी (विश्व का भूगोल)

Total Questions: 23

1. सूर्य ग्रहण कब होता है? [स्नातक स्तरीय (T-I) 9 सितंबर, 2016 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच में होता है।
Solution:
  • सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) की स्थिति तब होती है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है
  • जिससे सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाता। यह स्थिति केवल प्रतिपदा (New moon Day) या अमावस्या को ही होती है।
  • संक्षिप्त उत्तर
    • केवल अमावस्या के दिन होता है, क्योंकि तब चंद्रमा पृथ्वी-रेखा के साथ उस स्थान पर स्थित रहता है जो सूर्य के सामने आ सकता है।
  • प्रकार
    • आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse): चंद्रमा सूर्य के कुछ हिस्से को कवर करता है, सूर्य का एक भाग दृश्य रहता है।
    • पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse): चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढक लेता है
    • उस समय सूर्य की बाहरी परत (कोरोना) ही दिखाई देती है; यह एक छोटे क्षेत्र से देखे जाने पर ही दिखाई देता है।
    • वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse): चंद्रमा सूर्य की केंद्रavag में थोड़ा छोटा होता है, सूर्य का एक ग्लो-रिंग निकल कर दिखता है।
  • कैसे और क्यों होता है
    • सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी सीधी रेखा में आकर संरेखित होते हैं।
    • चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी के कक्षीय तल से थोड़ा सा झुकी होती है, इसलिए हर अमावस्या पर ग्रहण नहीं बन पाता।
    • ग्रहण का कारण सूर्य की रोशनी चंद्रमा की परछाई—अम्ब्रा (Umbra) या पेंटाकुल (Penumbra)—पर पृथ्वी तक पहुँचना है।
    • पूर्ण सूर्य ग्रहण के लिए अंबर-रेखा ठीक-ठीक संरेखित होनी चाहिए, और चंद्रमा का आकार सूर्य से बड़ा लगना चाहिए ताकि पूरी सूर्य-छाया आ जाए।
  • ग्रहण के समय-सीमाएं
    • एक साल में लगभग 2–5 सूर्य ग्रहण हो सकते हैं, पर इनमें से अधिकतर आंशिक होते हैं और पूर्ण नहीं होते।
    • पूर्ण सूर्य ग्रहण पृथ्वी के सिर्फ बहुत छोटे क्षेत्रों में ही दिखाई देता है
    • आम तौर पर किसी-न-किसी क्षेत्र के भीतर चौड़ाई कई सैकड़ों किलोमीटर से अधिक नहीं होती।
  • भारत/संयुक्त क्षेत्र में देखने योग्यता
    • यह निर्भर करता है कि सूर्य ग्रहण कहाँ और कब हो रहा है; केंद्रीय भाग (कोरोना) केवल उन क्षेत्रों से ही दिखाई देता है
    • जो सीधे अंबरछायायुक्त मार्ग के भीतर हों। आम तौर पर भारत में सभी ग्रहण नहीं दिखते, और कई ग्रहण दूसरे महाद्वीपों में अधिक स्पष्ट होते हैं।
    • यह हर ग्रहण के साथ बदलता है।
    • ग्रहण देखने के लिए उचित सुरक्षा उपाय जरूरी होते हैं (सुरक्षित ग्रहण चश्मे, पिंस/िशारे-स्रोतों से देखना आदि)।
  • इतिहास और विज्ञान में महत्व
    • सूर्य ग्रहण ने ऐतिहासिक दौर में विज्ञान और खगोलशास्त्र के विकास में अहम भूमिका निभाई है
    • जैसे सूर्य का Corona-प्रकाश और गुरुत्वाकर्षण-विकर्षण जैसी खोजों को पुष्ट करने में।
    • आधुनिक समय में खासकर शोध और शिक्षा के लिए ग्रहण मंदिर-केन्द्रित कार्यक्रम आयोजित होते हैं
    • ताकि सुरक्षा के साथ लोग ग्रहण का अनुभव कर सकें।
  • सुरक्षा सुझाव
    • कभी भी खुले आकाश में बिना उचित Solar Viewing glasses के सूर्य को न देखें।
    • ग्रहण के दौरान छोटे बच्चों को भी खिड़की से भी सुरक्षित दूरी बनाए रखना चाहिए।
    • चश्मे के साथ या दूसरों के सुरक्षित तरीकों के बिना सूर्य की सीधी रोशनी न देखना चाहिए।

2. पृथ्वी की सतह पर चट्टानों का टूटना कहलाता है- [MTS (T-I) 17 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) अपक्षय
Solution:
  • अपक्षय वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पृथ्वी की सतह पर मौजूद चट्टानों में टूट-फूट होती है।
  • मुख्य उत्तर
    • अअलग-अलग आकार के तलछट और रेत-रेती जैसी सामग्री बनती हैं।
    • इसके साथ ही कभी-कभी चट्टानें घटते-घटते क्षरण (erosion) के जरिए स्थानांतरित भी होती हैं।
    • अधिक सरल शब्दों में: चट्टानें टूटती हैं (अपक्षय) और फिर वे पानी, हवा, बर्फ आदि से बहकर कहीं और गिरती हैं
    • (क्षरण/अपदारण) [cite: जानकारियाँ भू-शास्त्रीय संदर्भों से संकलित हैं]।
  • विस्तृत विवरण
  • क्या है अपक्षय
    • परिभाषा: अपक्षय पृथ्वी की सतह पर चट्टानों और खनिजों को टूटना या भंग होना है
    • जो सूक्ष्म से लेकर बड़े टुकड़ों तक हो सकता है। यह सतह-उन्मुख प्रक्रिया है
    • सतह से आगे गहराई में कम होता है।
    • यह मुख्य रूप से जल, तापमान चक्र (थर-गरम), अम्लीय जलवायु, लवण, पौधेद्वारा उत्पादित जैविक क्रियाओं आदि से प्रेरित होती है।
    • चट्टानें कितनी जल्दी टूटेंगी, इसका हिसाब उनके कठोरता, बनावट और स्थित चट्टान के प्रकार पर निर्भर करता है.​
    • प्रमुख कारक: पानी/फव्वारे, बर्फ/तूफान, तापमान में परिवर्तन, अम्लीय पानी, पौधों के जड़ें, जीव-जन्तु के कारक और ऊष्मा-चालित बदलाव।
    • इनमें से हर कारक चट्टान की सतह पर छोटे-छोटे टुकड़े निकाल देता है और सतह बढ़ती-घटती रहती है.​
  • अपक्षय बनाम क्षरण
    • अपक्षय एक प्रारम्भिक चरण है। टूटे हुए टुकड़े धीरे-धीरे सतह के नीचे/किनारे से आगे-पीछे बहते हैं या जमा होते हैं
    • जिससे क्षरण (erosion) प्रक्रिया शुरू होती है।
    • क्षरण पानी, हवा या ग्लेशियर जैसी एजेंटों द्वारा इन टुकड़ों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लेकर जाता है, जिससे नया सतह-भूमि बनती है ।​
    • दोनों प्रक्रियाएं मिलकर भूगर्भीय परिदृश्य को समय के साथ बदलती रहती हैं।
    • सतह से तलछट बनना, फिर उनका परिवहन और अंततः निक्षेपण—ये क्रमशः चट्टानों के पुनः संगठित चक्र का हिस्सा हैं (शैल चक्र) ।​
  • शैल चक्र (संदर्भ)
    • शैल चक्र एक गतिशील प्रक्रिया है जिसमें चट्टानें अपक्षय, क्षरण, परिवहन, निक्षेपण और अगली चट्टान के निर्माण तक विविध अवस्थाओं से गुजरती हैं।
    • इस चक्र के माध्यम से चट्टानें समय के साथ अलग-अलग प्रकार की चट्टानों में बदलती हैं (जैसेign: संदर्भ NCERT/शैल चक्र नोट्स) ।​
    • प्रक्रियाओं के संयोजन से चट्टानें अलग-अलग स्थितियों में क्रिस्टलीकरण, कायापलट (metamorphism), तलछट-निर्माण आदि बना सकती हैं
    • जिससे भूगर्भीय परिदृश्य निरन्तर पुनर्निर्मित होता है ।​
  • सतह-स्थिति और विविधताएं
    • चट्टानें किसी भी प्रकार की हो सकती हैं—ज्वालामुखी चट्टानें, श्वेत पथरी, चूना पत्थर, मिट्टी आदि—पर इनके टूटने की दर और प्रकार सतह के मौसम, जलवायु, दाब और अनुक्रम पर निर्भर करती है।
    • कुछ चट्टानें जलवायु के कारण जल्दी टूटती हैं जबकि कुछ कठोरता के कारण धीमी होती हैं ।​
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • यदि किसी पहाड़ी क्षेत्र में वर्षाकाल में भारी वर्षा होती है, तो चट्टानों पर पानी जमा होकर सूक्ष्म दरारें बढ़ाती है
    • जड़ें चट्टानें भेदती हैं, और बड़े टुकड़े टूट जाते हैं—यही अपक्षय का एक सामान्य दृश्य है।
    • इसके बाद छोटे-छोटे टुकड़े बहकर नदी में पहुंचते हैं और नदी तलछट बनाती है, जो क्षरण द्वारा आगे तक transport होती है ।​
  • क्या यह जानकारी आपके प्रश्न के अनुरूप है?
    • यदि चाहें, तो इस विषय पर एक हिंदी-भूगोल नोट्स-स्टाइल संपूर्ण लेख बना सकता हूँ जिसमें:
    • परिचय और परिभाषा
    • प्रमुख प्रकार (फिजिकल/फिजिकल-केमिकल) अपक्षय
    • चट्टान-तलछट बनना और शैल चक्र का संक्षेप
    • क्षेत्रीय उदाहरण और चित्रण
    • परीक्षा-उन्मुख बिंदु (क्वेश्चन-आउटलाइन)

3. मेंटल का ऊपरी भाग कहलाता है- [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) लिथोस्फीयर
Solution:
  • क्रस्ट और मेंटल के सबसे ऊपरी हिस्से को लिथोस्फीयर कहा जाता है। इसकी मोटाई लगभग 10-200 किमी. तक होती है।
  • मस्तिष्क का ऊपरी भाग: क्या कहलाता है
    • अग्र मस्तिष्क (forebrain) वह भाग है जो मस्तिष्क के सबसे ऊपरी और बड़े हिस्से के रूप में जाना जाता है।
    • अक्सर इसे मिथ्या-सीमा के रूप में भी वर्णित किया जाता है क्योंकि यह अन्य भागों (मध्य मस्तिष्क, पश्च मस्तिष्क) से अग्रभाग में स्थित होता है।​​
    • अग्र मस्तिष्क के भीतर प्रमुख संरचनाओं में सेरेब्रल कॉर्टेक्स (cerebral cortex) और डाइएन्सेफलन जैसे भाग आते हैं।
    • सेरेब्रल कॉर्टेक्स को मानव बुद्धि, स्मृति, भाषा और संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं का केंद्र माना जाता है।​​
  • संरचना और उपभाग
    • अग्र मस्तिष्क का प्रमुख भाग: प्रोमास्टिक (प्रमस्तिष्क) और डाइएन्सेफलॉन (डायनसेफैलॉन) मिलकर बना हुआ होता है
    • जो कि स्मृति, प्राण-क्रिया नियंत्रण, लक्ष्य-निर्धारण आदि में भूमिका निभाते हैं।​​
    • सेरेब्रल कॉर्टेक्स के क्षेत्र विभाजन (लैटेरल लोडेड फ्रंटल, पैराइटल, ओसीपिटल, टेम्पोरल लोब आदि) उच्च संज्ञानात्मक क्षमताओं के लिए जिम्मेदार होते हैं
    • जैसे निर्णय लेना, समस्या सुलझाना, योजना बनाना, और भाषात्मक कार्य।​​
  • भूमिका और कार्य
    • स्मृति निर्माण और प्रबंध: अग्र मस्तिष्क के क्षेत्र स्मृतियों के निर्माण, संचित ज्ञान के पुनर्संरचना और दीर्घकालिक स्मृति बनाने में केंद्रीय हैं।​
    • योजना बनाना और कार्य-योजना: उच्चस्तरीय निर्णय-निर्माण, योजना बनाना और निष्पादन में अग्र मस्तिष्क का अग्रणी प्रभाव रहता है।​
    • संज्ञानात्मक क्षमताओं का नियंत्रण: ध्यान, सोच-विचार की गति, बुद्धिमत्ता और भाषा-संयोजन जैसी क्षमताएं अग्र मस्तिष्क के कॉर्टेक्स से संचालित होती हैं।​
  • क्यों इसे ऊपरी भाग कहा जाता है
    • मस्तिष्क के ऊपरी भाग को वह भाग माना जाता है जो प्राकृतिक रूप से अन्य भागों (जैसे लिथो-स्तर के नीचे स्थित मिड/हिंड ब्रेन) के ऊपर स्थित है
    • व्यापक, उन्नत कार्यों के लिए प्रमुख भूमिका निभाता है।
    • यह विभाजन प्रायः संरचनात्मक और कार्य-आधारित वर्गीकरण के तौर पर स्थिर रूप से प्रस्तुत किया जाता है।​​
  • संक्षेप तुलना (अगर चाहें)
    • अग्र मस्तिष्क (forebrain): उच्चस्तरीय संज्ञानात्मक कार्य, स्मृति, योजना और भाषा; सेरेब्रल कॉर्टेक्स प्रमुख हिस्सा।
    • मध्य मस्तिष्क (midbrain): दृश्य, ऑडियो संकेतों की पहचान और संचार का हिस्सा।
    • पश्च मस्तिष्क (hindbrain): संतुलन, द्वितीयक गतिशील नियंत्रण और जीवन के बुनियादी कार्यों की निगरानी।

4. मोहोरोविकिक (मोहो) असंबद्धता ....... को अलग करती है। [MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (III-पाली), CHSL (T-I) 19 मार्च, 2020 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) पृथ्वी का पर्पटी और मेंटल
Solution:
  • मोहो असंबद्धता पृथ्वी की पर्पटी और मेंटल को अलग करता है।
  • पृथ्वी की परतों के मध्य पाया जाने वाला एक ऐसा संक्रमण क्षेत्र जहां पर दो परतों की विशेषताएं एक साथ पाई जाती हैं।
  • पृथ्वी के आंतरिक भाग में पांच असंबद्धताएं पाई जाती हैं।
  • जिसमें पर्पटी तथा मेंटल को एक दूसरे से अलग करने वाली सीमा को 'मोहो असंबद्धता' कहते हैं।
  • मुख्य बिंदु
    • Moho discontinuity क्या है: यह वह सीमा है जहां पृथ्वी की ऊपरी भू-पर्पटी (crust) और निचली भू-पर्पटी/मेंटल (mantle) के बीच में भूकंपीय तरंगों की गति में अचानक परिवर्तन आता है।
    • खोजकर्ता और इतिहास: इसका नाम क्रोएशियाई भू-भौतिकशास्त्री Андрейो (आंद्रेज) मोहोरोवीचिक के नाम पर रखा गया
    • जिन्होंने 1909 में इसका अवलोकन किया। यह जानकारी भूकंपीय तरंग गतियों में स्पष्ट बदलाव से स्पष्ट होता है.​
    • कहाँ पाया जाता है: Moho पृथ्वी की crust और mantle के बीच स्थित होता है
    • गहराई के साथ उसकी स्थिति स्थान-विशिष्ट रूप से भिन्न होती है
    • (सामान्यतः पृथ्वी के विभिन्न क्षेत्रों में ~5 से 70 किमी से अधिक गहराई तक crust की मोटाई पर निर्भर करता है).​
    • तरंग गति का परिवर्तन: Moho के पास, भूकंपीय तरंगों की वेग crust से mantle में जाने पर अक्सर तेज़ी से बढ़ती है
    • क्योंकि mantle की घनत्व और संरचना crust से भिन्न होती है। यह परिवर्तन तरंग-गति में स्पष्ट छलक दिखाता है.​
  • गहरा विवरण
    • प्रकार और कमी: Moho Discontinuity crust (ऊपरी और निचली crust) के बीच पाया जाता है
    • स्रोतों में Mantle Crust boundary के रूप में भी उल्लेख होता है
    • मानक भू-विज्ञान में यह खासकर crust और mantle के बीच का अन्तर है.​
    • संरचनात्मक संकेतक: Moho से गुजरते हुए P- और S- तरंगों के समय-क्रम (arrival times) में अचानक बदलाव देखा जाता है
    • जो कि पृथ्वी के आंतरिक संरचना में परिवर्तन का संकेत है.​
    • तुलना: Mohorovičić discontinuity crust और mantle के बीच एक अलग प्रकार की असंबद्धता है
    • जबकि कभी-कभी crust के भीतर upper vs lower crust के बीच भी असंबद्धताएं पाई जाती हैं
    • जो अलग-discotinuities हैं (जैसे crust-crust boundaries).​
  • टिप्पणियां/उद्धरण
    • Mohorovičić discontinuity का मूल नाम Moho है
    • इसका अस्तित्व और उसका स्थान भू-विज्ञान में एक मानक अवधारणा है.​
    • Moho की खोज 1909 में हुई, और यह पृथ्वी की आंतरिक संरचना समझने में प्रमुख भूमिका निभाती है.

5. पृथ्वी की पर्पटी में मौजूद सातवीं सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली धातु का नाम क्या है, जिसका नाम मध्ययुगीन लैटिन शब्द 'केलियम' (Kalium) से लिया गया है? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) पोटैशियम
Solution:
  • पृथ्वी की पर्पटी में मौजूद सातवीं सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली धातु का नाम पोटैशियम है।
  • पोटैशियम लैटिन शब्द केलियम से लिया गया है।
  • पृकृति की पर्पटी और धातुओं की आवृत्ति
    •  इसके बाद एल्यूमीनियम (~8%) आता है, जो इसे पर्पटी में सबसे प्रचुर मात्रा की धातु बनाता है.​
    • एल्यूमीनियम का स्थान पर्पटी में तीसरे तत्व के रूप में अन्य धातुओं के साथ मिलकर होता है
    • यह पृथ्वी की पर्पटी में सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली धातु है, जबकि समग्र तत्वों में यह 8% के आसपास रहता है.​
  • Kalium का इतिहास और लैटिन नाम
    • Kalium (Kalium) लैटिन नाम से संबद्ध तत्व potassium है, जिसका ऐतिहासिक नाम Kalium था
    • आधुनिक जीवनचर्या में इस तत्व को potassium के रूप में जाना जाता है.​
    • potassium का परमाणु क्रमांक 19 है और इसका प्रतीक K है; इसका मूल नाम Kalium था
    • जिसे बाद में सामान्य नाम potassium में अनुवर्तित किया गया.​
  • आपके प्रश्न का पूरा उत्तर
    • तत्व: एल्यूमीनियम (Al)
    • पृथ्वी की पर्पटी में उसकी प्रचुर मात्रा: लगभग 8% w/w (Earth's crust, by weight).​
    • नामिक इतिहास: Kalium लैटिन नाम से लिया गया है, जो potassium के लिए था
    • यही लैटिन नाम अब potassium के लिए नहीं उपयोग किया जाता, पर इतिहास में Kalium नाम उपयोग होता था.​
    • संक्षेप में: एल्यूमीनियम पृथ्वी की पर्पटी में सातवीं सबसे प्रचुर मात्रा वाला धातु नहीं बल्कि तीसरे स्थान पर है
  • यहाँ स्पष्टता के लिए एक संक्षेपिक पुष्टि चाहिए:
    • पर्पटी में सबसे प्रचुर तत्व ऑक्सीजन है, दूसरा सिलिकॉन, तीसरे एल्यूमीनियम है
    • इसलिए एल्यूमीनियम पृथ्वी की पर्पटी में सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली धातु के रूप में पहचाना जाता है.​
    • Kalium लैटिन नाम potassium के लिए है; यह आपके प्रश्न में “Kalium” से नाम लिया गया मध्ययुगीन लैटिन शब्द से जुड़ा है
    • जिसका वर्तमान तत्व potassium है.​
  • नोट और स्रोत
    • पृथ्वी की पर्पटी में एल्यूमीनियम का प्रतिशत और क्रम: एल्यूमीनियम लगभग 8% होने के कारण पर्पटी में सबसे अधिक प्रचुर धातु माना जाता है
    • जबकि सबसे अधिक तत्व ऑक्सीजन और सिलिकॉन होते हैं.​
    • Kalium/ potassium इतिहास: लैटिन नाम Kalium से लिया गया; modern नाम potassium है
    • आयुध-प्रश्न में Kalium का संदर्भ potassium के लिए ही है.​

6. भूपर्पटी को क्रोड से अलग करने वाली पृथ्वी की परत को क्या कहा जाता है? [CHSL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) मेंटल
Solution:
  • भूपर्पटी को क्रोड से अलग करने वाली पृथ्वी की परत को मेंटल कहा जाता है।
  • भूपर्पटी—परिचय
    • भूपर्पटी पृथ्वी की सतह पर सबसे ऊपर की परत है और यह पतली लेकिन ठोस चट्टानी परत होती है।
    • यह महाद्वीपीय और समुद्री क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न ठोस चट्टानों से बनी होती है।
    • महाद्वीपीय भूपर्पटी अधिक कम घनी होती है (लगभग 2.7 g/cm³ औसत घनत्व) जबकि समुद्री भूपर्पटी अधिक घनी होती है
    • (लगभग 3.0 g/cm³ औसत घनत्व) और औसतन पतली होती है, लगभग 5 से 10 किलोमीटर मोटी होती है। [उद्धरण: भूपर्पटी के सामान्य गुण]
    • भूपर्पटी के नीचे मैंटल (magma/मध्य-स्तर) है
    • लेकिन भूपर्पटी को क्रोड से अलग करने वाली सीमा असंगत (discontinuity) के क्षण-क्षण परतें नहीं, बल्कि सामान्यत: भू-आयु के परिवर्तन के कारण अलग-अलग परतें मानी जाती हैं।
    • पृथ्वी की आंतरिक संरचना में भूपर्पटी के नीचे प्रवार (upper mantle) आता है
    • फिर बाह्य क्रोड (outer core) और आंतरिक क्रोड (inner core) का क्रम रहता है।
    • परतों के बीच के संक्रमण क्षेत्र असांतत्य कहलाते हैं
    • जो पृथ्वी की परतों को अलग करते हैं। [संदर्भ: पृथ्वी की आंतरिक संरचना]
  • क्रोड से भूपर्पटी को अलग करने वाले संदर्भ
    • भूपर्पटी और नीचे स्थित लेयरों के बीच विभाजन को सामान्यतः असांतत्य (discontinuity) कहा जाता है
    • इनमें मोहोरोविक असांतत्य (Moho) पर्पटी और मैंटल के बीच, और गुटेनबर्ग असांतत्य (Gutenberg discontinuity) क्रोड और मैंटल के बीच प्रसिद्ध हैं।
    • भूपर्पटी की जगह और नाम के बारे में सामान्य पाठ्यपुस्तकीय विवरण यही संकेत करते हैं
    • पृथ्वी की सतह की शीर्ष परत। [अध्ययन-संदर्भ]
  • दृश्य संक्षेप
    • भूपर्पटी = पृथ्वी की बाहरी ठोस परत (crust)
    • क्रोड = पृथ्वी के केंद्र के करीब भाग, भीतर/बाह्य क्रोड से मिलकर बना
    • असांतत्य = परतों के बीच की शारीरिक-भौतिक विभाजन रेखाएं

7. महाद्वीपीय संहति मुख्य रूप से ....... एवं ....... जैसे खनिजों से बनी है। [MTS (T-I) 08 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) सिलिका, एलुमिना
Solution:
  • महाद्वीपीय संहति मुख्य रूप से सिलिका और एलुमिना जैसे खनिजों से बनी है।
  • इस प्रकार इसे सियाल (SI-सिलिका और Al-एलुमिना) कहा जाता है।
  • क्या है महाद्वीपीय संहति
    •  यह सिलिकेट खनिजों से भरपूर होती है और समुद्री क्रस्ट से भिन्न होती है।
    • यह जानकारी व्यापक भू-विज्ञान स्रोतों में स्थिर रूप से मान्य है।​
  • प्रमुख खनिज घटक
    • सिलिका (SiO2) और ऐल्युमिना (Al2O3) महाद्वीपीय क्रस्ट के सबसे बड़े घटक हैं।
    • इन दोनों के मिलेजुले उपस्थिति के कारण महाद्वीपीय क्रस्ट को अक्सर के साथ पहचान किया जाता है, जिसे colloquially SIAL कहा जाता है।​
  • वैकल्पिक नाम और संदर्भ
    • SIAL शब्द का प्रयोग महाद्वीपीय द्रव्यमान के लिए किया जाता है
    • ताकि यह स्पष्ट हो कि इसकी संरचना सिलिकेट-आधारित है और ऐल्युमिनियम का उच्च अनुपात है।
    • यह स्थल-निजी भू-रचना पाठों में सामान्यतः स्वीकार्य है।​
    • कुछ पाठ्यपुस्तकों में “SIAL” के साथ “SIMa” (silicate + magnesium-rich felsic/mafic components) के भिन्न संकेत मिलते हैं
    • महाद्वीपीय संहति के लिए मानक और सामान्य रूप silicate minerals (silica) और alumina के समुच्चय पर है।​
  • संक्षेप में तुलना
    • महाद्वीपीय संहति: Silica (SiO2) + Alumina (Al2O3) प्रमुख घटक
    • महासागरीय क्रस्ट: अक्सर मैग्नेशियम-आधारित मिनरल्स जैसे olivine, pyroxene कम मात्रा में, पर silica/alumina की तुलना में भिन्न अनुपात में होता है
    • नामकरण: Si-Al या SIAL का प्रयोग

8. पृथ्वी का केंद्र-भाग (कोर) मुख्य रूप से ....... से निर्मित है। [MTS (T-I) 12 जुलाई, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) निकेल और लोहा
Solution:
  • पृथ्वी का केंद्र-भाग (कोर) मुख्य रूप से निकेल और लोहा से निर्मित है।
  • पृथ्वी की आंतरिक संरचना का संक्षेप
    • पृथ्वी चार प्रमुख परतों में बाँटी गई है: क्रस्ट (बाहरी पर्त), मेंटल (शीशीय द्रवय), बाहरी कोर (तरल पदार्थ), और आंतरिक कोर (ठोस केंद्र).​
    • कोर के अंदर आंतरिक कोर लगभग 1200 किमी व्यास का ठोस केंद्र है
    • जबकि बाहरी कोर लगभग 2200–2300 किमी मोटी तरल परत है.​
    • आंतरिक कोर की ठोस अवस्था में संरचना मुख्य रूप से निकल (Ni) और लोहा (Fe) के मिश्रण से बनती है
    • इस मिश्रण को अक्सर “NIFE” परत कहा जाता है
    • इसे एक मजबूत उच्च दाब-तापमान वातावरण में बना माना जाता है.​
  • बाहरी कोर और आंतरिक कोर के बीच विभाजन
    • बाहरी कोर तरल लोहे-निकल से बना होता है, जिसकी मोटाई लगभग 2300 किमी है
    • इस परत के तरल होने के कारण पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र बनता और बनाए रखा रहता है.​
    • आंतरिक कोर स्थिर ठोस है, जिसका व्यास लगभग 1200 किमी है, और यह अत्यधिक दाब के कारण ठोस रहता है.​
  • संरचना के संभावित पर्यवेक्षण
    • भूकंपीय तरंगों के विश्लेषण से कोर-मेंटल सीमाओं के बारे में जानकारी मिलती है; Moho Discontinuity (क्रस्ट-मेंटल), Gutenberg Discontinuity (प्रवार-कोर सीमा) आदि असंततियाँ पृथ्वी की संरचना की स्पष्ट तस्वीर देती हैं.​
    • कोर के पदार्थ के तत्वों के प्रतिशत और अवस्था पर विज्ञानिक मत कभी-कभी स्रोतों के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है
    • मुख्य संदेश वही रहता है कि कोर का मौलिक संघटक लोहा-निकेल है.​
  • क्या इससे आपकी जिज्ञासा पूरी हुई?
    • अगर चाहें, तो कोर के तत्वों के संख्यात्मक अनुपात, तापमान-दाब की चरम सीमाओं, और अलग-अलग अवयवों के भौतिक-उपयोगी गुणों के बारे में अधिक विस्तृत आंकड़े टेबल के रूप में दे सकता हूँ, या UPSC/शिक्षण स्रोतों के साथ तुलना कर सकता हूँ।​

9. पृथ्वी पर प्लेट प्रवाह (plate movements) को ....... प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है। [MTS (T-I) 12 जुलाई, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) तीन
Solution:
  • पृथ्वी पर प्लेट प्रवाह को तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है।
  • इन तीन प्रकारों में अपसारी सीमा, अभिसरण सीमा और रूपांतर सीमा शामिल हैं।
  • रचनात्मक (डाइवर्जेंट) सीमाएँ
    • दो प्लेटें एक दूसरे से दूर जाती हैं, जिससे समुद्री तल का फैलाव और नया पपड़ी बनना शुरू होता है।
    • इस प्रक्रिया के कारण समुद्री गहराई में नयी Crust बनती है और कभी-कभी प्रवाल-समूह या माउंटेन रेंजेज नहीं बल्कि समुद्री स्ट्रिप्स बनते हैं।
    • उदाहरण: मेनटल-वितरण वाले महासागरिक रिफ्ट्स और स्पreading centers.​
  • विनाशकारी (कन्वर्जेंट) सीमाएँ
    • दो प्लेटें एक-दूसरे की तरफ गतिशील होती हैं और टकराती हैं।
    • यह सबडक्शन ज़ोन, ओशियनिक-ओशियनिक, ओशियनिक-यूरेसियन या अन्य कॉन्फ़िगरेशन में भूकंप, चोटी-उत्पत्ति और पर्वत-निर्माण का कारण बनती हैं।
    • इस प्रकार की सीमाओं पर बड़े भूकंप और उच्च तीव्रता के भूकंपीय प्रभाव देखे जाते हैं.​
  • संरक्षक/रुझानी (ट्रांसफॉर्म) सीमाएँ
    • प्लेटें एक-दूसरे के समानांतर गुजरती हैं, घर्षण के कारण तनाव विकसित होता है
    • हल्के से मध्यम भूकंप होते हैं। यह प्रकार अक्सर ऐसी स्थलाकृति बनाता है
    • जहाँ पहाड़ नहीं बनते लेकिन ज़मीन के सतह पर फूट-फूटकर भूकंप आ सकते हैं
    • जैसे कभी-कभी लॉस-एंजेलिस क्षेत्र में प्रशासित ज़ोन सीमाओं पर होता है.​
  • अन्य मायने और उदाहरण
    • प्लेटों के आकार-प्रकार और उनके चालनों dictating विभिन्न भौगोलिक रचना बनाते हैं
    • जैसे महासागरीय प्लेटें और महाद्वीपीय प्लेटें, जिनके व्यवहार सीमाओं के प्रकार पर निर्भर करते हैं.​
    • NCERT-आधारित समझ के अनुसार प्लेटें एस्थेनोस्फीयर पर स्वतंत्र रूप से गतिशील होती हैं
    • इनके सीमाओं के प्रकार भू-आकृतिक घटनाओं के प्रमुख नियंत्रण हैं.​
  • समकक्ष तुलनात्मक सार
  • प्रकार vs सीमा गतिविधि:
    • डाइवर्जेंट: नया crust बनना, समुद्री फैलाव
    • कन्वर्जेंट: क्रस्ट का एक हिस्सा नीचे जाता है, ऊँचे पर्वत/भूकंप
    • ट्रांसफॉर्म: ऊर्ध्वाधर असंतुलन नहीं, समानांतर गति, भूकंपकार्य

10. निम्नलिखित में से कौन-सा संभाग ज्वालामुखी में शामिल है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) पिघली हुई चट्टानें
Solution:
  • ज्वालामुखीय चट्टानें वे चट्टानें हैं जो पृथ्वीतल पर ज्वालामुखी के उद्भदन द्वारा निकले लावा के ठंडे होकर चट्टान के रूप में जम जाने से बनी हैं।
  • अतः पिघली हुई चट्टानें ज्वालामुखी के अंतर्गत शामिल संभाग हैं।
  • संक्षिप्त उत्तर
    • भारत के संदर्भ में सबसे सामान्य उत्तर: बैरन द्वीप (Ban on) क्षेत्र अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का सक्रिय ज्वालामुखी है
    • जिसे भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी माना जाता है। हालांकि, आप जो “संभाग” के रूप में पूछ रहे हैं
    • वह स्पष्ट नहीं है क्योंकि ज्वालामुखी से जुड़े प्रमुख घटक क्षेत्रों में क्रेटर, कलड़ेरा, लावा पठार जैसी संरचनाएं आती हैं
    • इससे पहले कि किसी विशेष विकल्प की पुष्टि की जा सके, आपके दिए गए विकल्पों को देखना जरूरी होगा।
    • यदि आपका विकल्प भारत के संदर्भ में है, तो “बैरेन आइलैंड/बैरेन द्वीप” अक्सर सही उत्तर माना जाता है।
  • मुख्य भाग
  • ज्वालामुखी के प्रमुख भाग (संरचनात्मक तत्व)
    • क्रेटर: ज्वालामुखी का मुख या खार घाटी के ऊपर खुला श्वास-मार्ग।
    • कलडेरा (caldera): बड़े मुख का ढहना या विषम विस्फोट के बाद बना बड़ा खाली स्थान।
    • शंकु/ज्वालामुखी पहाड़: लावा और पथरीले पदार्थों के जमने से ढहावित शंकु बनना।
    • दरार उदार: लम्बी दरारों से लावा का निर्वाह और विस्तृत क्षेत्र में जमा होना।
    • लावा पठार/मैग्मा द्वीप: स्थानीय भूविज्ञान के अनुसार बिखरे हुए पत्थर और पत्थर-ऊपर-आधे फैलाव।
  • भारत में ज्वालामुखीय स्थिति
    • सक्रिय ज्वालामुखी: बैरन द्वीप (Baren Island) स्थित अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का ज्वालामुखी
    • जिसे अक्सर भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी कहा जाता है।
    • प्रसुप्त ज्वालामुखी: नारकोंडम ज्वालामुखी (Narkondam) भी इस समूह के भीतर है
    • लेकिन यह प्रसुप्त/सोया हुआ माना जाता है।
    • अन्य क्षेत्र: उच्चतम स्तर तक स्पष्ट “संभाग” के रूप में ज्वालामुखी-क्षेत्रों को परिभाषित करने के लिए आम तौर पर प्रशांत “रिंग ऑफ फायर” जैसी धारणा अधिक उपयोगी होती है।
  • आपके प्रश्न में “संभाग” के संभावित अर्थ
    • अगर आपका प्रश्न सामान्यतः “ज्वालामुखी के किस भाग को संभाग (section) कहा جاتا है?” से जुड़ा है
    • तो उपरोक्त संरचनात्मक भागों में से प्रत्येक एक अलग संभाग/खंड के रूप में माना जा सकता है।
    • अगर प्रश्न में किसी विशेष सूची या विकल्पों के साथ पूछा गया है
    • (जैसे उन्नत भूगोल के प्रश्नपत्रों में दिए गए चार-चार विकल्प), तो सही उत्तर उसी विकल्प पर निर्भर करेगा जिसे आपने अभी साझा नहीं किया है।
  • उदाहरण के तौर पर तुलना (संरचनात्मक भाग बनाम क्षेत्रीय भाग)
    • संरचनात्मक भाग: क्रेटर, कलडेरा, वेन्ट/वेन्शन्ट, लावा पठार आदि (ये भू-विज्ञान की दृष्टि से स्पष्टीकरण हैं)।
    • क्षेत्रीय/भू-भाग: प्रशांत रिंग ऑफ फायर, अंडमान-निकोबार जैसे क्षेत्रीय भू-भाग, जो ज्वालामुखी के वितरण को समझाते हैं।