Correct Answer: (c) पृथ्वी को सौर वायु और ब्रह्मांडीय विकिरण से बचाना
Solution:- पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उद्देश्य पृथ्वी को सौर वायु और ब्रह्मांडीय विकिरण से बचाना है।
- पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का अक्ष अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग होता है।
- पृथ्वी का सूर्य की कक्षा में चक्कर लगाना भू-परिक्रमण कहलाता है।
- मुख्य उद्देश्य
- भू-चुंबकीय क्षेत्र के कारण पृथ्वी के चारों ओर एक नैयिक (magnetosphere) संरचना बनती है
- जो खतरनाक उच्च-ऊर्जा कणों को पृथ्वी के वायुमंडল से दूर धकेलती है, जिससे जीवन सुरक्षित रहता है.
- कैसे काम करता है
- Earth's outer core में घटित डायनेमो प्रभाव से तरल लोहे के घूर्णन और प्रवाह विद्युत धारा बनाते हैं, जो चुंबकीय क्षेत्र का स्रोत है.
- यह क्षेत्र भूमध्य रेखा के चारों ओर फैली एक चुंबकीय संरचना बनाकर सौर विकिरण, कॉस्मिक किरणें, और सूर्य-उत्तेजित पदार्थों को पृथ्वी से दूर रखता है
- जिसके परिणामस्वरूप स्पेस मौसम कम नुकसानदायक होता है.
- रोजमर्रा और जैविक प्रभाव
- कंपास जैसे उपकरण इस क्षेत्र की उपस्थिति के कारण दिशा बताते हैं
- पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के बिना दिशा-निर्देशन संभव नहीं होगा.
- कुछ जीव बैठकें (जैसे कबूतर) और प्रजातियाँ इस क्षेत्र की मदद से बड़े दूरी तय कर पाती हैं
- जिससे आवागमन और जीवन चक्र क्रियाशील रहते हैं.
- हालाँकि, दैनिक जीवन में यह क्षेत्र प्रत्यक्ष स्वास्थ्य लाभों के रूप में सीमित प्रभाव डालता है
- परंतु सौर तूफानों के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और नेटवर्क पर प्रभाव डाल सकता है
- इसलिए स्पेस मौसम के पूर्वानुमान भी महत्वपूर्ण रहते हैं.
- ऐतिहासिक और भू-विज्ञानिक संदर्भ
- पृथ्वी के प्राचीन चुंबकीय क्षेत्र की जानकारी चट्टानों के नमूनों से मिलती है
- भू-गतिकीय विकास को समझने में मदद करती है; बाह्य कोर के जियो-dynamo से यह क्षेत्र बनना जारी रहता है.
- विस्तार से, डायनेमो प्रक्रिया और ऊर्जीय प्रवाह पृथ्वी के लंबे इतिहास में चुंबकीय ध्रुवों के परिवर्तन और क्षेत्र के विस्तार/चयन को समझाती है.
- सारांश
- पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र जीवन की सुरक्षा, दिशा-निर्णय (कम्पास), और छोटे-भारी विकिरण से बचाव का काम करता है।
- यह क्षेत्र बाह्य कोर में तरल लोहे के प्रवाह से बनता है
- सौर हवा के खतरों को पृथ्वी से दूर रखता है, जिससे जीवन सुरक्षित बने रहता है.