पृथ्वी (विश्व का भूगोल)

Total Questions: 23

11. पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उद्देश्य क्या है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) पृथ्वी को सौर वायु और ब्रह्मांडीय विकिरण से बचाना
Solution:
  • पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उद्देश्य पृथ्वी को सौर वायु और ब्रह्मांडीय विकिरण से बचाना है।
  • पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का अक्ष अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग होता है।
  • पृथ्वी का सूर्य की कक्षा में चक्कर लगाना भू-परिक्रमण कहलाता है।
  • मुख्य उद्देश्य
    • भू-चुंबकीय क्षेत्र के कारण पृथ्वी के चारों ओर एक नैयिक (magnetosphere) संरचना बनती है
    • जो खतरनाक उच्च-ऊर्जा कणों को पृथ्वी के वायुमंडল से दूर धकेलती है, जिससे जीवन सुरक्षित रहता है.​​
  • कैसे काम करता है
    • Earth's outer core में घटित डायनेमो प्रभाव से तरल लोहे के घूर्णन और प्रवाह विद्युत धारा बनाते हैं, जो चुंबकीय क्षेत्र का स्रोत है.​
    • यह क्षेत्र भूमध्य रेखा के चारों ओर फैली एक चुंबकीय संरचना बनाकर सौर विकिरण, कॉस्मिक किरणें, और सूर्य-उत्तेजित पदार्थों को पृथ्वी से दूर रखता है
    • जिसके परिणामस्वरूप स्पेस मौसम कम नुकसानदायक होता है.​
  • रोजमर्रा और जैविक प्रभाव
    • कंपास जैसे उपकरण इस क्षेत्र की उपस्थिति के कारण दिशा बताते हैं
    • पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के बिना दिशा-निर्देशन संभव नहीं होगा.​
    • कुछ जीव बैठकें (जैसे कबूतर) और प्रजातियाँ इस क्षेत्र की मदद से बड़े दूरी तय कर पाती हैं
    • जिससे आवागमन और जीवन चक्र क्रियाशील रहते हैं.​
    • हालाँकि, दैनिक जीवन में यह क्षेत्र प्रत्यक्ष स्वास्थ्य लाभों के रूप में सीमित प्रभाव डालता है
    • परंतु सौर तूफानों के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और नेटवर्क पर प्रभाव डाल सकता है
    • इसलिए स्पेस मौसम के पूर्वानुमान भी महत्वपूर्ण रहते हैं.​
  • ऐतिहासिक और भू-विज्ञानिक संदर्भ
    • पृथ्वी के प्राचीन चुंबकीय क्षेत्र की जानकारी चट्टानों के नमूनों से मिलती है
    • भू-गतिकीय विकास को समझने में मदद करती है; बाह्य कोर के जियो-dynamo से यह क्षेत्र बनना जारी रहता है.​
    • विस्तार से, डायनेमो प्रक्रिया और ऊर्जीय प्रवाह पृथ्वी के लंबे इतिहास में चुंबकीय ध्रुवों के परिवर्तन और क्षेत्र के विस्तार/चयन को समझाती है.​
  • सारांश
    • पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र जीवन की सुरक्षा, दिशा-निर्णय (कम्पास), और छोटे-भारी विकिरण से बचाव का काम करता है।
    • यह क्षेत्र बाह्य कोर में तरल लोहे के प्रवाह से बनता है
    • सौर हवा के खतरों को पृथ्वी से दूर रखता है, जिससे जीवन सुरक्षित बने रहता है.​​

12. वह कौन है, जिसने सबसे पहले पृथ्वी की परिधि को मापा था? [CHSL (T-I) 25 जनवरी, 2017 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) एरैटोस्थीनेस
Solution:
  • यूनानी खगोल विज्ञानी एरैटोस्थीनेस पहले व्यक्ति थे
  • जिन्होंने पृथ्वी की परिधि की सही माप की गणना की थी।
  • विस्तृत विवरण
    • परिचय: पृथ्वी की परिधि मापने की यह पहली ऐतिहासिक कोशिश यूनानी भूगोलविद इरेतोस्थनीज (Eratosthenes) की है
    • जिन्हें भूगोल के जन्मदाता के रूप में भी माना जाता है।
    • उन्होंने अपने काम में भूगोल और आकाशीय अवधारणाओं का उत्कृष्ट समन्वय प्रस्तुत किया।​
  • प्रमुख तर्क और उपाय:
    • दो स्थानों का चयन: सिकेन (आज का असवान, मिस्र) और अलेक्जेंड्रिया का क्षेत्र।
    • सिकेन में घनी noon के समय सूर्य सीधे भूमि पर होता था जबकि अलेक्जेंड्रिया में उसी समय सूर्य थोड़ा दक्षिण की ओर होता था
    • जिससे सूर्य-छाया का फर्क स्पष्ट होता था।
    • यह अंतर संभवतः अक्ष-उच्चता के अनुसार दो स्थानों के बीच दूरी और सूर्य की ऊँचाई के अंतर से जोड़ा गया।​
    • दूरी का निर्धारण: इरेतोस्थनीज ने मिस्र की कल्पित “सड़कों” या दूरी के मान पर निर्भर नहीं रहने, बल्कि दो शहरों के बीच भूगोलिक दूरी को मापा। उन्होंने अनुमानित त्रिज्या से परिधि निकाली और परिणाम 40,000 किमी (लगभग 25,000 मील) के आसपास निकल-आया।
    • आधुनिक मान के हिसाब से यह लगभग सटीक है।​
  • परिणाम और प्रभाव:
    • परिधि का अनुमान: इरेतोस्थनीज ने पृथ्वी की परिधि लगभग 40,000 किमी के आसपास बतलाई
    • जो आधुनिक मान 40,075 किमी के करीब है।
    • इसका मतलब यह हुआ कि वे एक बड़े भूगोलिक-सत्यापन के रास्ते पर चलकर पृथ्वी के आकार की पहली गणना कर बैठे।​
    • भूगोल का विकास: इरेतोस्थनीज ने Geography शब्द का प्रयोग पहली बार किया
    • भूगोलशास्त्र के अध्ययन को एक व्यवस्थित क्रम में प्रस्तुत किया, जिससे आगे के भूगोलविदों के लिए एक ठोस आधार बना।​
  • अन्य दृष्टिकोण और संदर्भ:
    • इतिहास में पहले टिप्पणीकारों ने पृथ्वी को गोल माना था
    • (जैसे अरस्तु), पर सचमुच परिधि मापने की पहली सफल और विस्तृत गणना इरेतोस्थनीज की है।
    • उनके सहयोगी एवं समकालीनों ने भी इस पद्धति पर चर्चा की, पर विकल्पतः उनका योगदान उल्लेखनीय नहीं है।​
    • आज के शिक्षण में यह मापन 1 डिग्री परिधि के अनुमान (111.3 किमी) आदि के साथ-साथ भूगोल के मूल सिद्धांतों को समझाने का एक  उदाहरण बन गया है।​
  • संक्षिप्त संदर्भ पन्नियाँ:
    • इरेतोस्थनीज और पृथ्वी की परिधि का पहला अनुमान: 40,000 किमी के आसपास​
    • भूगोल शब्द और उनके योगदान पर संदर्भ: इरेतोस्थनीज का भूगोल के जन्म में योगदान​

13. निम्नलिखित में से कौन-सा सूर्यग्रहण का एक प्रकार नहीं है? [CHSL (T-I) 15 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) खंडच्छायायुक्त
Solution:
  • खंडच्छायायुक्त सूर्यग्रहण का एक प्रकार नहीं है। सूर्यग्रहण चार प्रकार के होते हैं।
  • पूर्ण सूर्यग्रहण, वलयाकार सूर्यग्रहण, आंशिक सूर्यग्रहण तथा संकर (Hybrid) सूर्यग्रहण।
  • विस्तृत विवरण
    • सूर्यग्रहण क्या होता है: जब पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य एक सीधी रेखा के लगभग समानांतर पथ पर आ जाते हैं
    • चंद्रमा सूर्य की रोशनी को पृथ्वी पर अवरोधित करने लगता है
    • तब सूर्यग्रहण होता है. यह घटना केवल नई चंद्रमा के समय ही संभव है.​
  • प्रमुख प्रकार
    • पूर्ण सूर्यग्रहण (Total solar eclipse): चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढंक देता है; सूर्य की पूर्ण डिस्क नजर नहीं आती.​
    • आंशिक सूर्यग्रहण (Partial solar eclipse): चंद्रमा सूर्य के केवल भाग को ढक पाता है; सूर्य का कुछ भाग दिखाई देता है.​
    • वलयाकार सूर्यग्रहण (Annular solar eclipse): चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढंक पाता; सूर्य का मध्य भाग ढका रहता है
    • उसके चारों ओर सूर्य का “कंगन” सा प्रभामास दिखाई देता है.​
    • हाइब्रिड सूर्यग्रहण (Hybrid solar eclipse): पथ के कुछ हिस्सों में पूर्ण और कुछ हिस्सों में वलयाकार/आंशिक जैसी स्थिति दिखती है
    • यह दुर्लभ प्रकार है और एक ही यात्रा पथ पर दो प्रकारों का संयोजन हो सकता है.​
  • कौन-सा प्रकार नहीं है?
    • अगर दिए गए विकल्पों में केवल “पूर्ण, आंशिक, वलयाकार, हल्के-फुल्के/अन्य” के अलावा एक और असामान्य नाम आता है
    • जो सूर्यग्रहण की मानक चार प्रकारों में नहीं आता, तो वही प्रकार नहीं माना जाएगा
    • उदाहरण के लिए, अगर विकल्प में “किंग़न-आकार सूर्यग्रहण” या “धारणीय-सरोवर सूर्यग्रहण
    • जैसा नाम दिया हो जो वैज्ञानिक रूप से मानक प्रकारों (पूर्ण, आंशिक, वलयाकार, हाइब्रिड) में नहीं है, तो वह एक प्रकार नहीं होगा।

14. निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में वर्षभर दिन और रात लगभग बराबर होते हैं? [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) भूमध्यरेखीय क्षेत्र
Solution:
  • भूमध्यरेखीय क्षेत्र भूमध्य रेखा के निकट स्थित है। भूमध्यरेखीय क्षेत्र में वर्ष भर दिन और रात की लंबाई लगभग बराबर (12-12 घंटा) होती है।
  • क्यों दिन-रात बराबर रहते हैं
    • पृथ्वी भूमध्य रेखा के आस-पास अक्षांशीय विस्तार के कारण सूर्य की रोशनी लगभग समान आयाम से सतह पर पड़ती है।
    • इस क्षेत्र में सूर्य की सीधी प्रभा अधिकांश समय समान रहती है, जिससे दिन और रात की अवधि लगभग 12-12 घंटे रहती है।
    • यह स्थिति वर्ष भर में अधिक स्थिर रहती है जबकि अन्य अक्षांशों पर ऋतु परिवर्तन के साथ दिन-रात की अवधि में अंतर बढ़ जाता है.​
    • भूमध्य रेखा के ऊपर-नीचे के क्षेत्रों में सूर्य की ऊँचाई अलग-अलग होती है
    • जिससे गर्मियों में दिन लंबे और सर्दियों में छोटे हो सकते हैं, पर भूमध्य रेखा के ठीक साथ स्थिति पर यह अंतर न्यून रहता है।
    • इस कारण भूमध्य रेखा पर वर्षभर लगभग 12 घंटे दिन और 12 घंटे रात होते हैं.​
  • उत्तर के साथ कुछ सामान्य पूरक तथ्य
    • विषुवकाल ( Equinox ) के दिनों-दिन-रात बराबर होते हैं
    • आम तौर पर 21 मार्च और 23 सितंबर को, लेकिन भूमध्य रेखा केसी स्थिति में यह स्थिति सालभर लगभग बनी रहती है.​
    • ध्रुवीय क्षेत्रों में दो से छह महीने तक निरंतर दिन या रात हो सकती है
    • इसलिए उन क्षेत्रों में दिन-रात बराबर की स्थिति नहीं रहती; यह केवल भूमध्य रेखा के पास के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में स्थिर होती है.​
  • स्पष्ट निष्कर्ष
    • आधार क्षेत्र: भूमध्य रेखा (0° अक्षांश).​
    • कारण: अक्षांशीय विस्तार और सूर्य की सीधी रोशनी के कारण दिन-रात की लंबाई लगभग समान रहती है.​
    • सीमाएं: ध्रुवीय और उच्च अक्षांश वाले क्षेत्रां में यह समानता नहीं रहती; ऋतु के अनुसार दिन-रात का अंतर बढ़ सकता है.​

15. दिन का न्यूनतम तापमान सामान्यतः ....... होता है। [MTS (T-I) 07 जुलाई, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) प्रातःकाल (सुबह)
Solution:
  • दिन का न्यूनतम तापमान सामान्यतः प्रातःकाल (सुबह) होता है
  • जबकि दिन का अधिकतम तापमान सामान्यतः अपराह्न में (दोपहर बाद) होता है।
  • थोड़ा विस्तृत विवरण:
    • न्यूनतम तापमान वह तापमान होता है जो किसी स्थान पर एक दिन के दौरान सबसे कम दर्ज किया जाता है
    • अक्सर सूर्योदय के ठीक पहले या भोर के समय होता है। कारण: रात के दौरान पृथ्वी से ऊर्जा निकलकर वायुमंडल ठंडा होता है
    • सुबह की शुरूआत होते-होते तापमान नीचे रहता है ।​
    • सामान्यतः हल्की ठंडक भोर में कम होती है क्योंकि सूर्य अभी ऊगना शुरू ही करता है
    • सतह पर उष्मा अभी पहुंचना बाकी रहता है। इससे किसानों, यातायात और दैनिक गतिविधियों की योजना बनाने में मदद मिलती है ।​
    • तापमान के दैनिक चरम (max/min) में अंतर को दैनिक तापमान भिन्नता कहा जाता है।
    • यह भिन्नता मौसम-वैज्ञानिकों के लिए ऊर्जा balance और मौसम के पैटर्न समझने में अहम होता है ।​
    • अधिकतम तापमान अक्सर दोपहर के समय, especially after 12:00 बजे के आस-पास या अपराह्न में दर्ज होता है
    • क्योंकि सूर्य ऊर्जाएं सतह को तेजी से गरम करती हैं ।​
  • उपयोगी नोट्स:
    • कुछ स्थानों पर निर्भर करता है कि मिनिमम तापमान कब रिकॉर्ड किया जाता है
    • कई बार यह भोर के कुछ मिनट बाद का समय मान लिया जाता है
    • सूर्योदय के आसपास का समय निर्धारित किया जाता है।
    • मौसम विभाग और स्थानीय क्षेत्रों के अनुसार यह थोड़ा-बहुत भिन्न हो सकता है ।​
    • मौसम संबंधी अवधारणाओं के लिए “न्यूनतम तापमान” और “दिन का तापमान भिन्नता” जैसे शब्द अक्सर एक ही दिन के दो अलग-अलग मापन बिंदुओं को दर्शाते हैं ।​

16. पृथ्वी पर दिन तथा रात का चक्र किस कारण होता है? [MTS (T-I) 16 सितंबर, 2017 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) घूर्णन
Solution:
  • पृथ्वी सदैव अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की दिशा में घूमती रहती है
  • जिसे पृथ्वी का घूर्णन या परिभ्रमण (Rotation) कहते हैं। इसके कारण दिन व रात होते हैं।
  • मुख्य बिंदु
    • पृथ्वी लगभग 23.5 डिग्री झुकाव वाले अक्ष पर घूमती है और यह झुकाव पृथ्वी के वितरण में परिवर्तन करता है
    • सूर्य किन क्षेत्रों पर किस समय प्रभाव डाल रहा है। इससे ऋतु बदलाव भी होते हैं।
    • एक सौर दिन (दिन भर की एक सामान्य दिन) 24 घंटे का होता है
    • जिसमें सूर्य एक ही स्थान पर आकाश में दोबारा उसी तरीके से दिखाई देता है
    • लेकिन वास्तविक दिन लगभग 23 घंटे 56 मिनट का होता है क्योंकि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर भी घूमती है।
    • यह भ्रम का कारण बनता है कि दिनों के समय में थोड़ा बदलाव आता है।
    • पृथ्वी के जिस हिस्से पर सूर्य की सीधी रोशनी पड़ती है, वहाँ दिन है
    • जिस हिस्से पर नहीं पड़ती, वहाँ रात होती है। असे समय-समय पर जगह के अनुसार दिन और रात की लंबाई बदलती है
    • विशेषकर साल के किसी विशेष समय और स्थान के आधार पर।
  • गौर करने योग्य बातें
    • अक्ष के झुकाव से उत्तर-दक्षिण अक्ष पर दिन की लंबाई में बदलाव होता है
    • गर्मियों में दिन लंबे और रात छोटी होती है, जबकि सर्दियों में दिन छोटे और रात लंबे होते हैं।
    • पृथ्वी की परिक्रमा (सूर्य के चारों ओर) दिन-रात के चक्र को सीधे प्रभावित नहीं करती, बल्कि धुरी पर घूमना मुख्य कारक है
    • परिक्रमा मौसम और वर्ष के समय के अनुसार सूर्य के पथ में परिवर्तन लाती है
    • जिससे साल भर में दिन-रात की लंबाई में बदलाव आता है।
    • कारण: पृथ्वी का धुरी पर घूर्णन ( rotation ) बनाम अक्ष का झुकाव
    • प्रभाव: दिन-रात का चक्र, वर्ष के समय के अनुसार दिन-रात की लंबाई
    • वैश्विक प्रभाव: किसी स्थान पर दिन और रात कितने घंटे होते हैं, मौसमी बदलाव कैसे होते हैं
  • उद्धरण और संदर्भ
    • यह तथ्य सार्वभौमिक रूप से मान्य विज्ञानीय ज्ञान पर आधारित है
    • पृथ्वी लगभग 24 घंटे में एक बार धुरी पर पूर्ण घूर्णन करती है, जिससे दिन-रात का चक्र बनता है.​
    • अक्ष के झुकाव के परिणामस्वरूप दिन की लंबाई परिवर्तन और गर्मी/सर्दी के मौसमी परिवर्तन होते हैं.​
    • वास्तविक दिन-रात चक्र का तौर-तरीका और 24 घंटे के दिन के रूप में परिभाषा दोनों के बारे में विस्तृत व्याख्या भी सामान्य शिक्षण स्रोतों में मिलती है

17. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प, पृथ्वी के अंतरंग का कोई भाग है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) दुर्बलतामंडल
Solution:
  • दुर्बलतामंडल पृथ्वी के अंतरतम में स्थलमंडल के नीचे स्थित एक परत है। स्थलमंडल के ऊपरी भाग को भूपर्पटी कहते हैं।
  • उत्तर संक्षेप
    • सही विकल्प: स्थलमंडल (Asthenosphere) पृथ्वी के आंतरिक भाग का एक भाग है
    • यह ऊपरी प्रवाल/स्थलमंडल के नीचे स्थित है।
    • यह परत ग्रह के भीतर गतिशील प्लेट टेक्टोनिक्स के लिए महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।​
  • विस्तार और पृष्ठभूमि
    • पृथ्वी के आंतरिक विभाजन को सामान्यतः चार मुख्य परतों में समझा जाता है
    • क्रोड (आंतरिक कोर और बाहरी कोर), मात्रा-इत्यादि सतहों के भीतर स्थित स्थलमंडल, और पृथ्वी के बाहरी कवर—परतें भिन्न-भिन्न घनत्व और स्थितियों के अनुसार पहचानी जाती हैं।
    • स्थलमंडल के भीतर, upper mantle के कुछ भाग नीचे जाकर asthenosphere बनते हैं
    • जो कि चूँकि द्रव-स्तर नहीं बल्कि मंद प्रवाह वाले द्रव-न्यायिक विलय जैसे गुण दिखाते हैं
    • इसलिए यह पृथ्वी के आंतरिक गतिशीलता में प्रमुख भूमिका निभाता है।​
  • गुण और विशेषताएं (सार)
    • स्थिति: स्थलमंडल का यह हिस्सा upper mantle के नीचे स्थित होता है और बाहरी लिग्नमंडल से जुड़ा होता है।​
    • महत्व: प्लेटों की गतिशीलता और पृथ्वी के आंतरिक गर्मी प्रवाह में asthenosphere की भूमिका अहम है।​
    • अन्य रसायन/भौतिकीय संरचना: यह परत ठोस लेकिन गतिशील होती है
    • तापमान और दबाव के कारण कुछ हिस्से लगभग पिघले हुए जैसे व्यवहार करते हैं।​
  • नोट्स और स्पष्टिकरण
    • यदि आप उत्तर की पुष्टि किसी विशिष्ट स्रोत से चाहें, तो मैं हाल की अध्ययन-स्रोतों के लिए खोज कर सकता/सकती हूँ
    • हर दावे के साथ उद्धरण दे सकता/सकती हूँ।
    • इसके अलावा, पृथ्वी की आंतरिक संरचना के अन्य प्रमुख घटक जैसे आंतरिक कोर, बाहरी कोर, lithosphere आदि भी समझना उपयोगी है।​
  • संदर्भ
    • स्थलमंडल (Asthenosphere) पृथ्वी के आंतरिक भाग का एक हिस्सा है
    • यह upper mantle के नीचे रहता है और पृथ्वी की आंतरिक गतिशीलता में केंद्रीय भूमिका निभाता है.​

18. निम्नलिखित में से कौन-सी वितलीय चट्टानें आमतौर पर काले या गहरे हरे रंग की होती हैं और मुख्य रूप से प्लाजियोक्लेज और ऑगाइट खनिजों से बनी होती हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) गैब्रो
Solution:
  • गैब्रो वितलीय चट्टानें आमतौर पर काले या गहरे हरे रंग की होती हैं
  • मुख्य रूप से प्लाजियोक्लेज और ऑगाइट खनिजों से बनी होती हैं।
  • प्रकार और बनावट
    • वितलीय आग्नेय चट्टानें (intrusive or plutonic rocks) वे चट्टानें होती हैं
    • जो पृथ्वी की गहराई में ठंडी होने के कारण बड़े खनिज कणों के साथ बनती हैं।
    • इस कारण इनकी क्रिस्टल संरचना груਦ/बड़े दानेदार होती है।
    • गैब्रॉ इस वर्ग की क्लासिक उदहारण है, जिसकी संरचना भारी और गहरे रंग की होती है ।​
  • रंग और खनिज संरचना
    • गैब्रॉ का रंग गहरा आता है, आमतौर पर काला से गहरे हरे तक, क्योंकि इसमें प्लाजियियो클ेज़ (plagioclase) और ऑगाइट (augite) प्रमुख मात्रा में होते हैं।
    • यही खनिज संयोजन इस चट्टान को विशेष रूप से सघन और अंधेरे रंगों का बनावट देता है ।​
  • भू-विज्ञानिक संदर्भ
    • गैब्रॉ अक्सर डेकोन ट्रैप जैसी स्थानिक संरचनाओं में पाया जाता है
    • यह ब्रह्मांडीय/भू-आंतरिक प्रक्रियाओं के कारण गहराई में ठंडा होकर बनती है
    • इसलिए इसकी दानेदार बनावट और रंग सामान्यत: काले-हरे होते हैं ।​
  • अन्य अक्सर पूछे जाने वाले संदर्भ
    • अगर एक प्रश्न में “काली या गहरे हरे रंग की वितलीय चट्टानें” कहा जाए, तो गैब्रॉ का चयन सबसे सामान्य और मानक उत्तर होता है
    • क्योंकि यह इन विशेषताओं के साथ सबसे स्पष्ट और पहचानने योग्य वितलीय चट्टान है ।​
  • क्रमवार निष्कर्ष
    • प्राथमिक वितलीय आग्नेय चट्टान जिसमें रंग काला/गहरा हरा हो और खनिजों का प्रमुख संयोजन प्लाजियियो클ेज़ और ऑगाइट हो—गैब्रॉ (gabro) है।​
    • यह चट्टान वितरण के संदर्भ में वितलीय (plutonic) आग्नेय श्रेणी के अंतर्गत आती है
    • इसके कारण यह आमतौर पर चट्टानों की गाढ़ी और बड़े दानेदार विशेषता दिखाती है ।​
  • उद्धरण
    • गैब्रॉ की रचना और रंग पर जानकारी: गैब्रॉ आम तौर पर काला/गहरे हरे रंग का होता है
    • इसके मुख्य खनिज plagioclase और augite होते हैं.​
    • वितलीय/प्लूटोनिक चट्टानों के बारे में सामान्य विवरण: इन चट्टानों की ठंडक गहराई में होने से बड़े दाने बनते हैं, और गैब्रॉ इसी वर्ग में आता है.​
    • गैब्रॉ के भू-विज्ञानिक संदर्भ और स्थानीय दृश्य: गैब्रॉ अक्सर गहरे रंग की वितलीय चट्टान के रूप में बताई जाती है
    • यह डेक्कन ट्रैप जैसी संरचनाओं में पाया जाता है.​

19. 1° अक्षांश लगभग कितने किमी. के बराबर होता है? [CHSL (T-I) 16 अक्टूबर, 2020 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 111
Solution:
  • 1° अक्षांश लगभग 111 किमी. (69 मील) के बराबर होता है।
  • अक्षांश क्या है
    • अक्षांश पृथ्वी की सतह पर भूमध्यरेखा से उत्तर या दक्षिण की दिशा में मापी जाने वाली कोणीय दूरी है।
    • यह 0° से शुरू होकर ध्रुवों तक 90° तक जाता है.​
  • अक्षांश की स्थिरता
    • भूमध्यरेखा के आसपास की डिग्री के बीच की आर्द्र दूरी लगभग 111 किलोमीटर रहती है
    • इसलिए सामान्यतः कहा जाता है कि 1° अक्षांश roughly 111 km के बराबर होता है.​
  • भूगोलिक प्रभाव और विविधताएँ
    • पृथ्वी बिल्कुल गोल नहीं है; वह थोड़ा सा असमानाकार है
    • जिससे अक्षांश की डिग्री के भीतर दूरी सीमित रूप से भिन्न हो सकती है।
    • भूमध्यरेखा के पास दूरी लगभग 110.567 km है
    • जबकि ध्रुवों के पास लगभग 111.699 km तक पहुंच सकती है।
    • यह फर्क आमतौर पर मामूली होता है, इसलिए अभ्यास में 111 km का मान widely used रहता है.​
  • अन्य विचार-उदााहरण
    • अक्षांश की डिग्री समानांतर रेखाओं के समान समान दूरी देती हैं
    • जिससे दूरी के हिसाब से सरल गणना संभव होती है।
    • देशांतर (longitude) की डिग्री पर भी दूरी 1° के लिए लगभग 4 मिनट समय-मान (ग्रीनविच के अनुसार) होता है
    • यह दूरी ग्लोब के गोलार्ध और अक्षांश के अनुसार बदलती है
    • यह आप्शनल विवरण है जिसे गणना में ध्यान में रखना पड़ता है.​

20. पृथ्वी एक घंटे में अपने अक्ष पर कितने अंश घूमती है? [CGL (T-I) 6 मार्च, 2020 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) 15
Solution:
  • पृथ्वी लगभग 24 घंटे में अपने अक्ष पर 360° घूम जाती है। इसलिए पृथ्वी 1 घंटे में अपने अक्ष पर 15° घूमेगी।
  • एक पूर्ण चक्कर = 360 डिग्री
  • एक दिन में समय: 24 घंटे
  • घूमने की दर = 360 डिग्री / 24 घंटे = 15 डिग्री प्रति घंटे
  • हर मिनट में लगभग 0.25 डिग्री (15 डिग्री प्रति घंटे ÷ 60 मिनट)
  • विस्तार से समझाने के लिए
    • पृथ्वी की अपनी धुरी पर घूमने की गति सदैव उसी दर से होती है
    • इसलिए 1 घंटे में 15 डिग्री का चाप बनता है।
    • अक्ष पर यह घुमाव प्रत्यक्ष गति है
    • धरातल पर किसी स्थान का स्थानीय समय और दिन-रात्रि चक्र इस घूर्णन के साथ जुड़ कर बनता है।
  • आसान स्मृति aid
    • 24 घंटे में 360 डिग्री: 360 ÷ 24 = 15 डिग्री प्रति घंटा
    • 60 मिनट में 1 घंटा: 15 डिग्री ÷ 60 मिनट ≈ 0.25 डिग्री प्रति मिनट
  • नोट
    • यह आकलन पृथ्वी की धुरी के घूर्णन के लिए है
    • पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने के कारण स्थानीय समय में परिवर्तन अलग गति से होता है
    • (दिन Length, टाइम ज़ोन आदि), पर धुरी के प्रति-प्रतिलोम घूर्णन की रोशन दर स्थिर रहती है।