प्रकाश और प्रकाशिकी (भौतिक विज्ञान) (Part-I)

Total Questions: 50

41. निम्नलिखित में से कौन सी प्रकाशीय परिघटना सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य की चक्रिका के चपटी प्रतीत होने को परिभाषित कर सकती है? [RRC Group D 26/08/2022 (Afternoon)]

Correct Answer: (d) वायुमंडलीय अपवर्तन
Solution:
  • वायुमंडल से गुजरते समय प्रकाश या अन्य विद्युत चुम्बकीय तरंगों का एक सीधी रेखा से विचलन।
  • प्रकाश का विक्षेपण (Dispersion of light) एक कांच के प्रिज्म के माध्यम से सफेद प्रकाश का अपने रंगों के स्पेक्ट्रम में विभाजन (बैंगनी, इंडिगो, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल)।
  • पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total internal reflection) किसी माध्यम में प्रकाश की किरण का पूर्ण परावर्तन।
  • प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light) वातावरण में बड़ी संख्या में उपस्थित कणों के कारण प्रकाश के संचरण की दिशा में परिवर्तन।
  • वायुमंडलीय अपवर्तन।
    • सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य की चक्रिका चपटी प्रतीत होने का कारण वायुमंडलीय अपवर्तन है।
  • कारण
    • वायुमंडल में घनत्व का क्रमिक परिवर्तन होने से सूर्य की किरणें अपवर्तित होती हैं।
    • क्षितिज के पास ऊर्ध्वाधर किरणें कम अपवर्तित होती हैं
    • जबकि क्षैतिज किरणें अधिक मुड़ती हैं, जिससे सूर्य का ऊपरी भाग चपटा दिखता है।
  • अन्य प्रभाव
    • यह अपवर्तन सूर्य को वास्तविक समय से 2 मिनट पहले उदित और देर से अस्त भी दिखाता है।
    • प्रकाश प्रकीर्णन लाल रंग का कारण बनता है, लेकिन चपटापन अपवर्तन से होता है।

42. यह पाया गया है कि किसी कांच के प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश के वर्ण विक्षेपण के दौरान कोई रंग घटक जितना अधिक मुड़ता है, उस रंग घटक के लिए कांच का अपवर्तनांक उतना ही अधिक होता है। यदि µᵧ, µᵥ और µg क्रमशः पीले, बैंगनी और हरे प्रकाश के लिए अपवर्तनांक हैं, तो उनके बीच निम्न में से कौन सा संबंध सही है? [RRC Group D 26/08/2022 (Evening)]

Correct Answer: (c)
Solution:
  • जब प्रकाश की किरण एक कांच के प्रिज्म से गुजरती है
  • तो सफेद स्क्रीन पर सात रंगों का एक बैंड बनाने के लिए सफेद प्रकाश विभाजित हो जाता है।
  • स्पेक्ट्रम के सात रंग हैं- लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, इंडिगो और बैंगनी यानी VIBGYOR ।
  • µᵥ > µᵧ > µg
    • प्रिज्म में जितना अधिक अपवर्तनांक, उतना ही अधिक विक्षेपण होता है। बैंगनी प्रकाश सबसे अधिक मुड़ता है
    • पीला मध्यम और हरा कम, इसलिए अपवर्तनांक का क्रम बैंगनी > पीला > हरा है।
  • कारण
    • प्रकाश की तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती संबंध से अपवर्तनांक निर्भर करता है
    • बैंगनी (छोटी λ) का µ सबसे अधिक, फिर पीला, और हरा अधिक लंबी λ होने से सबसे कम।
  • विक्षेपण सूत्र
    • वर्ण-विक्षेपण क्षमता ω = (µᵥ - µᵣ)/(µᵧ - 1), जहाँ µᵥ > µᵧ > µᵣ सिद्ध होता है; हरे के लिए भी यही क्रम।

43. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: [RRC Group D 29/08/2022 (Evening)]

(A) बादलों में मौजूद कण, सूर्य से आने वाले श्वेत प्रकाश में मौजूद विभिन्न रंगों की तरंगदैर्ध्य की तुलना में बड़े होते हैं।

(B) श्वेत प्रकाश के सभी रंग लगभग समान मात्रा में प्रकीर्णित होते हैं।

उपरोक्त में से कौन सा कथन हमें धूप के दौरान बादलों के सफेद रंग को समझने में मदद करता है?

Correct Answer: (c) दोनों (A) और (B)
Solution:
  •  प्रकीर्णित प्रकाश का रंग प्रकीर्णन कणों के आकार पर निर्भर करता है।
  • महीन कण मुख्य रूप से कम तरंगदैर्ध्य के प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं
  • जैसे नीला प्रकाश, बड़े आकार के कण अधिक तरंगदैर्ध्य के प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं
  • जैसे लाल रंग और बहुत बड़े कण से प्रकीर्णित प्रकाश सफेद दिखाई देता है।
  • प्रकीर्णन के कुछ उदाहरण-आकाश का नीला रंग, बादलों का सफेद रंग आदि।
  • मुख्य कथन 1: विक्षेपण-अपवर्तनांक संबंध
    • कांच के प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश के वर्ण विक्षेपण के दौरान कोई रंग घटक जितना अधिक मुड़ता (विचलित होता) है
    • उस रंग के लिए कांच का अपवर्तनांक उतना ही अधिक होता है। यह कथन पूर्णतः सही है।
    • बैंगनी (V) सबसे अधिक मुड़ता है क्योंकि इसकी तरंगदैर्ध्य सबसे कम (~400 nm) होती है
    • जबकि लाल सबसे कम। अपवर्तनांक µ = c/v से व्युत्क्रमानुपाती तरंगदैर्ध्य पर निर्भर µ(λ) होता है, जिसे विक्षेपण कहते हैं।
  • मुख्य कथन 2: अपवर्तनांक क्रम
    • पीले (Y, ~550-580 nm), बैंगनी (V, ~400 nm) और हरे (G, ~500-550 nm) प्रकाश के लिए अपवर्तनांक का सही क्रम µᵥ > µᵧ > µg है। यह कथन सही है।
    • कांच (जैसे क्राउन ग्लास) में µᵥ ≈ 1.53, µᵧ ≈ 1.517 (D-लाइन), µg ≈ 1.52।
    • हरी तरंगदैर्ध्य पीली से थोड़ी कम होने से µ थोड़ा अधिक, लेकिन बैंगनी से कम। विक्षेपण स्पेक्ट्रम VIBGYOR क्रम में विचलन घटता जाता है।
  • वैज्ञानिक आधार
    • श्वेत प्रकाश प्रिज्म में प्रवेश पर अपवर्तित होता है: sin i / sin r = µ। न्यूनतम विचलन पर µ = sin((A+δ_m)/2) / sin(A/2), जहाँ A प्रिज्म कोण।
    • पतले प्रिज्म के लिए δ ≈ (µ-1)A। विभिन्न रंगों के µ अलग होने से δ अलग, V सबसे अधिक δ।
    • कैलो-मॉले सूत्र µ = A + B/λ² + ... से छोटी λ पर µ अधिक सिद्ध होता है। उदाहरण: फ्लिंट ग्लास में µᵥ=1.662, µᵧ=1.628, µᵣ=1.609।
  • अन्य संभावित कथन विश्लेषण
    • कथन: प्रिज्म में प्रवेश पर r < i: सही, हवा से कांच (µ>1) में r < i।
    • कथन: वर्ण-विक्षेपण कारण एकसमान µ नहीं: सही, µ(λ) भिन्न होने से।
    • गलत कथन उदाहरण: µᵧ > µᵥ (गलत, V अधिक मुड़ता है)। सभी सही कथन विकल्प (1) और (2) सही।

44. प्रकीर्णित प्रकाश का रंग, प्रकीर्णन कणों के आकार पर निर्भर करता है। अति सूक्ष्म कण मुख्यतः.............. प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं। [RRC Group D 29/08/2022 (Evening)]

Correct Answer: (d) नीला
Solution:
  • जब प्रकाश विभिन्न वस्तुओं पर पड़ता है तो प्रकीर्णित हो जाता है।
  • प्रकीर्णित प्रकाश का रंग प्रकीर्णन कणों के आकार पर निर्भर करता है।
  • प्रकीर्णन का मूल सिद्धांत
    • प्रकाश का प्रकीर्णन कणों के आकार पर निर्भर करता है।
    • जब कणों का व्यास प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (λ ≈ 400-700 nm) से बहुत छोटा (d << λ, जैसे 10-100 nm) होता है
    • तो रेले प्रकीर्णन (Rayleigh scattering) होता है। इसकी तीव्रता ∝ 1/λ⁴ होती है
    • अर्थात् कम λ (नीला ~450 nm, बैंगनी ~400 nm) का प्रकीर्णन लाल (~700 nm) से 10 गुना अधिक। इसलिए आकाश नीला दिखता है।
  • वैज्ञानिक व्याख्या
    • श्वेत सूर्यप्रकाश में सभी रंग समान होते हैं, किंतु प्रकीर्णन के बाद नीला अधिक दिखता है।
    • सूर्यास्त पर लंबी पथ लंबी λ (लाल) बचने देता है। कैपिलरी प्रयोग: मिल्की जल में अति सूक्ष्म फैट ग्लोब्यूल्स नीला प्रकाश बिखेरते हैं।
    • फॉर्मूला: I_scattered = I₀ (8π⁴ α² / (λ⁴ r²)), जहाँ α ध्रुवणीयता।
  • अनुप्रयोग
    • आकाश नीला: रेले प्रकीर्णन।
    • सूर्योदय/अस्त लाल: छोटी λ प्रकीर्णित हो चुकी।
    • धुआँ नीला: सूक्ष्म कण।
    • यह भौतिकी कक्षा 10/12 का मानक विषय है।

45. माध्यमों 1, 2 और 3 के अपवर्तनांक क्रमशः 1.46, 1.65 और 1.31 हैं। यदि माध्यमों में प्रकाश की चाल V₁, V₂ और V₃ है, तो उनके बीच निम्न में से कौन सा संबंध सही है ? [RRC Group D 30/08/2022 (Morning)]

Correct Answer: (a) V₃ > V₁ > V₂
Solution:
  • निर्वात में प्रकाश की चाल और माध्यम में चाल के बीच का अनुपात अपवर्तनांक है।
  • किसी माध्यम में प्रकाश की चाल माध्यम के गुणों पर निर्भर करती है।
  • विद्युत चुम्बकीय तरंगों में गति माध्यम के ऑप्टिकल घनत्व पर निर्भर करती है।
  • जितना अधिक वैकल्पिक रूप से सघन पदार्थ होता है, प्रकाश की चाल उतनी ही धीमी होती है।
  • किसी माध्यम के ऑप्टिकल घनत्व का ऐसा ही एक संकेतक अपवर्तनांक है।
  • अतः अपवर्तनांक जितना अधिक होगा, वेग उतना ही कम होगा। अतः, V₃ > V₁ > V₂ सही क्रम है।
  • V₁ > V₃ > V
    • माध्यमों के अपवर्तनांक µ₁=1.46, µ₂=1.65, µ₃=1.31 के अनुसार प्रकाश की चालें V₁ > V₃ > V₂ होंगी।
  • मूल सिद्धांत
    • अपवर्तनांक µ = c / V, जहाँ c निर्वात में प्रकाश की चाल (3×10⁸ m/s) स्थिर है।
    • अतः V = c / µ, अर्थात् चाल अपवर्तनांक के व्युत्क्रमानुपाती होती है। µ जितना अधिक, V उतना कम।
  • गणना
    • µ₁=1.46 → V₁ = c/1.46 ≈ 2.05×10⁸ m/s
    • µ₂=1.65 → V₂ = c/1.65 ≈ 1.82×10⁸ m/s (सबसे धीमी)
    • µ₃=1.31 → V₃ = c/1.31 ≈ 2.29×10⁸ m/s
    • क्रम: µ₂ > µ₁ > µ₃ → V₂ < V₁ < V₃।
  • भौतिक कारण
    • उच्च µ वाले माध्यम में प्रकाश की ऊर्जा अधिक परमाणुओं से टकराती है, चाल धीमी।
    • स्नेल नियम: sin i / sin r = µ₂/µ₁। परीक्षा टिप: हमेशा व्युत्क्रमानुपाती क्रम याद रखें।

46. रात के समय तारे _________ दिखते हैं। [RRC Group D 30/08/2022 (Afternoon)]

Correct Answer: (b) उनकी वास्तविक स्थिति से ऊपर
Solution:
  • उनकी वास्तविक स्थिति से ऊपर। रात में, तारे आकाश में वास्तविक से अधिक ऊँचे प्रतीत होते हैं।
  • यह वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण है। जब किसी तारे का प्रकाश पृथ्वी की सतह पर पहुँचता है
  • तो वह वायुमंडल की विभिन्न परतों से होकर गुजरता है।
  • लेकिन हमारी आँख तारे को उस स्थिति में देखती है
  • जहाँ से प्रकाश सीधी रेखा की दिशा में उसमें प्रवेश करता है।
  • रात के समय तारे टिमटिमाते हुए दिखते हैं।
  • कारण
    • इनका प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल की विभिन्न परतों (घनत्व, तापमान भिन्न) से होकर गुजरता है।
    • हवा की गर्म-ठंडी परतें लगातार बदलती रहती हैं, जिससे प्रकाश किरणें बार-बार अपवर्तित होकर कभी ऊपर, कभी नीचे मुड़ती हैं।
    • परिणामस्वरूप, प्रकाश की तीव्रता आँखों तक कभी अधिक, कभी कम पहुँचती है, जो टिमटिमाहट का भ्रम पैदा करती है।
  • भौतिक व्याख्या
    • अपवर्तन: प्रकाश विरल से सघन माध्यम में अभिलंब की ओर झुकता है। वायुमंडल की परतें dμ/dt से µ बदलती रहती हैं।
    • स्नेल नियम: sin i / sin r = µ₂/µ₁। क्षितिज के पास पथ लंबा होने से प्रभाव अधिक।
    • आवृत्ति: ~10-100 Hz, इसलिए टिमटिमाहट दिखती है।
  • तुलना: ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते
    • ग्रह निकट (मिलियन किमी) होने से डिस्क स्रोत (कोई बिंदु नहीं) दिखते हैं। उनका प्रकाश विविध दिशाओं से आता है
    • अपवर्तन का प्रभाव औसत हो जाता है, इसलिए स्थिर चमकते हैं।
    • सूर्य/चंद्रमा भी स्थिर। अंतरिक्ष से देखने पर तारे भी स्थिर दिखते हैं (हबल प्रमाणित)।
  • उदाहरण
    • क्षितिज तारे: अधिक टिमटिमाते (पथ लंबा)।
    • शीर्ष तारे: कम टिमटिमाते (पथ छोटा)।
    • प्रयोग: गरम पानी पर मोमबत्ती से टिमटिमाहट देखें।
  • अन्य प्रभाव
    • रेले प्रकीर्णन आकाश नीला बनाता है, लेकिन टिमटिमाहट अपवर्तन से।
    • प्रदूषण/धुंध से कम टिमटिमाहट।
    • यह कक्षा 10 भौतिकी (मानव नेत्र व रंगीन संसार) का मानक विषय है।

47. किसी वस्तु को एक अवतल दर्पण के सामने इसकी फोकस दूरी से तीन गुनी दूरी (3f) पर रखा गया है। प्रतिबिंब _________ बनेगा। [RRC Group D 30/08/2022 (Afternoon)]

Correct Answer: (b) F और C के बीच स्थित किसी बिंदु पर
Solution:
  • F और C के बीच स्थित किसी बिंदु पर। वक्रता केंद्र (C) 2f पर स्थित है। यहाँ वस्तु को 3f की दूरी पर रखा गया है।
  • इसका अर्थ है कि वस्तु C (वक्रता का केंद्र) से परे स्थित है।
  • इस स्थिति में, प्रतिबिंब वक्रता केंद्र (C) फोकस (F) के बीच बनती है। इस प्रकार बनी प्रतिबिंब छोटी, वास्तविक और उलटी होती है।
  • किसी वस्तु को अवतल दर्पण के सामने फोकस दूरी से तीन गुनी दूरी (3f) पर रखने पर प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा और आकार में वस्तु के समान बनेगा।
  • दर्पण सूत्र द्वारा गणना
    • अवतल दर्पण का सूत्र: , चिह्न परिपाटी: u = -3f (वस्तु बायें), f = -f (अवतल)।
    • ⇒  (दर्पण से 1.5f दूरी पर, वास्तविक)।
  • आवर्धन (m)
    • |m| = 0.5 < 1, इसलिए आकार में छोटा नहीं—u=3f पर |m| = 1/2? गलत। सही: C=2f पर |m|=2, 3f पर |m|=1।
    • सही गणना: , v = -3f/4? नहीं। मानक: 3f पर v=1.5f, |m| = (3f/2)/(3f) = 1/2।
    • सुधार: अवतल दर्पण में 3f पर प्रतिबिंब दर्पण के बीच F और C पर, वास्तविक, उल्टा, छोटा।
  • किरण आरेख
    • समानांतर किरण F से होकर।
    • C से गुजरने वाली वापस C पर।
    • प्रतिबिंब 1.5f पर, आकार आधा।
  • भौतिक व्याख्या
    • अभिसारी दर्पण: C (2f) से बाहर वस्तु → वास्तविक प्रतिबिंब।
    • 3f >2f, v=1.5f (C-F के बीच), |m|<1। प्रयोग: ऑप्टिकल बेंच।

48. किसी वस्तु को एक अवतल दर्पण के सामने इसकी फोकस दूरी से दोगुनी दूरी (2f) पर रखा गया है। प्रतिबिंब _________ दूरी पर बनेगा। [RRC Group D 30/08/2022 (Evening)]

Correct Answer: (c) 2f
Solution:
  • अवतल दर्पण में यदि वस्तु को दर्पण के वक्रता केंद्र पर रखा जाता है तो प्रतिबिम्ब भी वक्रता केंद्र पर समान दूरी पर बनता है।
  • बनने वाले प्रतिबिम्ब का आकार वस्तु के समान, वास्तविक तथा उल्टा होता है।
  • दर्पण सूत्र द्वारा गणना
    • अवतल दर्पण सूत्र: 1/f=1/v+1/u (कार्टेशियन चिह्न परिपाटी)।
    • यहाँ u = -2f (वस्तु बाईं ओर), f = -f।
    • 1/v=1/(-f)-1/(-2f)=-1/f+1/2f=-1/2f
    • ⇒ v = -2f (दर्पण से 2f दूरी पर, वास्तविक प्रतिबिंब)।
  • आवर्धन (m)
    • m=-v/u=-(-2f)/(-2f)=-1।
    • |m| = 1, इसलिए प्रतिबिंब वस्तु के समान आकार का, वास्तविक और उल्टा।
  • किरण आरेख
    • मुख्य अक्ष के समानांतर किरण → फोकस (F) से होकर गुजरती है।
    • वक्रता केंद्र (C=2f) से गुजरने वाली किरण → उसी पथ पर वापस।
    • प्रतिबिंब C (2f) पर बनता है।
  • भौतिक व्याख्या
    • 2f वक्रता केंद्र (C) है। C से आपतित किरण सामान्य पर पड़ती है (i=0°), वापस उसी मार्ग से लौटती है।
    • समानांतर किरण F पर केंद्रित होती है। परिणामस्वरूप प्रतिबिंब भी C पर। यह गुण दर्पण सूत्र से siddh: f = R/2।
  • प्रयोगिक सत्यापन
    • ऑप्टिकल बेंच: वस्तु को 2f पर रखें, स्क्रीन 2f पर प्रतिबिंब के लिए घुमाएँ—स्पष्ट, उल्टा, समान आकार। यह प्रतियोगी परीक्षाओं (NEET/SSC) का मानक प्रश्न है।

49. लाल रंग का प्रकाश, कोहरे या धुएं से.......... प्रकीर्णित होता है, क्योंकि इसकी तरंग दैर्ध्य श्वेत प्रकाश के अन्य रंग घटकों की तरंग दैर्ध्य की तुलना में _________ होती है। [RRC Group D 01/09/2022 (Morning)]

Correct Answer: (c) सबसे कम, अधिक
Solution:
  • प्रकाश का प्रकीर्णन- वह परिघटना जिसमें प्रकाश की किरणें धूल, गैस के अणुओं या जलवाष्प जैसी किसी बाधा से टकराकर अपने मूल पथ से विचलित हो जाती हैं।
  • रेले प्रकीर्णन विकिरण की तरंगदैर्ध्य जितनी लंबी होगी, उसका विक्षेपण उतना ही कम होगा।
  • लाल रंग का प्रकाश, कोहरे या धुएं से सबसे कम प्रकीर्णित होता है
  • क्योंकि इसकी तरंग दैर्ध्य श्वेत प्रकाश के अन्य रंग घटकों की तरंग दैर्ध्य की तुलना में अधिक होती है।
  • प्रकीर्णन का मूल सिद्धांत
    • प्रकाश का प्रकीर्णन कणों के आकार और प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (λ) पर निर्भर करता है।
    • कोहरे या धुएँ में कणों का व्यास λ के समान या बड़ा (~1 µm) होता है
    • जहाँ माइ प्रकीर्णन (Mie scattering) होता है। रेले प्रकीर्णन (d << λ) से भिन्न, यहाँ लंबी λ (लाल) का प्रकीर्णन कम होता है।
    • सूत्र: प्रकीर्णन तीव्रता I ∝ 1/λ (बड़े कणों के लिए), छोटी λ अधिक बिखरती है।
  • भौतिक व्याख्या
    • रेले क्षेत्र (आकाश नीला): I ∝ 1/λ⁴, नीला ~10 गुना लाल से अधिक।
    • माइ क्षेत्र (कोहरा): लंबी λ पारगमन, छोटी अवशोषित/प्रकीर्णित।
    • खतरे के संकेत लाल इसलिए—कोहरे में दिखता है। सूर्यास्त लाल भी इसी कारण।
  • अनुप्रयोग उदाहरण
    • रेल/ट्रैफिक सिग्नल: लाल दूर तक दिखता।
    • प्रयोग: लाल लेजर धुएँ में सीधी रेखा बनाता, नीला बिखर जाता।
    • सूर्यास्त: क्षितिज प्रकाश-पथ लंबा → छोटी λ प्रकीर्णित, लाल बचता।

50. एक प्रकाशिक उपकरण X की फोकस दूरी - 30cm है। X _________ हो सकता है। [RRC Group D 01/09/2022 (Morning)]

Correct Answer: (b) या तो अवतल लेंस या अवतल दर्पण
Solution:
  • चिन्ह परिपाटी के अनुसार, एक अवतल लेंस के साथ-साथ एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी हमेशा ऋणात्मक होती है।
  • अतः दी गई प्रकाशिक युक्ति या तो अवतल लेंस या अवतल दर्पण हो सकती है। तथा उत्तल दर्पण तथा उत्तल लेंस की फोकस दूरी + (धनात्मक) होती है।
  • चिह्न परिपाटी का आधार
    • कार्टेशियन चिह्न परिपाटी (New Cartesian Sign Convention) में:
    • अवतल दर्पण: f = ऋणात्मक (अभिसारी किरणें)।
    • अवतल लेंस: f = ऋणात्मक (प्रकाश अपसारी)।
    • उत्तल दर्पण/उत्तल लेंस: f = धनात्मक।
    • f = -30 cm ऋणात्मक → अभिसारी दर्पण या अपसारी लेंस।
  • सूत्र सत्यापन
    • दर्पण सूत्र: 1/f = 1/v + 1/u (f < 0 अवतल)।
    • लेंस सूत्र: 1/f = 1/v - 1/u (f < 0 अवतल)।
  • भौतिक कारण
    • अवतल दर्पण: गोलाकार सतह केंद्र की ओर, समानांतर किरणें F पर अभिसरित (f = -R/2)।
    • अवतल लेंस: बीच पतला, किनारे मोटे—प्रकाश किरणें बाहर की ओर अपसृत।
  • परीक्षा टिप्पणी
    • प्रतियोगी परीक्षाओं (RRB, SSC) में f = ऋणात्मक → अवतल लेंस/दर्पण मानक। दोनों संभव क्योंकि प्रश्न विकल्प नहीं देता।