Solution:हम जानते हैं कि समतल दर्पण में प्रतिबिंब दर्पण से उतनी ही दूरी पर स्थित होता है, जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने होती है अर्थातd₀ = वस्तु की दर्पण से दूरी
di = प्रतिबिंब की दर्पण से दूरी
गोलीय दर्पण के लिए फोकस दूरी (f), वक्रता त्रिज्या (r) तथा d₀ एवं di में निम्न संबंध होता है
1/d₀ + 1/di = 1/f = 2/r
(यहां r = दर्पण की वक्रता त्रिज्या है)
परंतु समतल दर्पण के लिए
d₀ = - di
अतः 2/r = 0
r = 2/0 या अपरिभाषित)
अथवा r = ∞

अतः दिए गए विकल्पों में समतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या को अनंत ही लेना उचित होगा।
अथवा
वक्रता-त्रिज्या (Radius of Curvature): यह उस गोले की त्रिज्या होती है जिसका दर्पण एक हिस्सा होता है।
समतल दर्पण: एक समतल दर्पण वास्तव में एक असीमित बड़े गोले का एक बहुत छोटा हिस्सा माना जा सकता है। जैसे-जैसे एक गोले की त्रिज्या बढ़ती जाती है, उसकी सतह अधिक से अधिक समतल होती जाती है।
जब एक गोले की त्रिज्या अनंत हो जाती है, तो उसकी सतह पूरी तरह से समतल हो जाती है। इसलिए, एक समतल दर्पण की वक्रता-त्रिज्या अनंत मानी जाती है।