प्रकाश (भौतिक विज्ञान)

Total Questions: 16

1. स्वच्छ आकाश का रंग किस फिनोमिना के कारण नीला दिखाई देता है? [MTS (T-I) 18 अक्टूबर, 2021 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) प्रकाश का प्रकीर्णन
Solution:
  • स्वच्छ आकाश में प्रकाश (सूर्य का श्वेत प्रकाश) की किरणें वायु में उपस्थित धूल के अति सूक्ष्म कणों के कारण प्रकीर्णन (Scattering) की प्रक्रिया से गुजरती है
  • जिसमें कम तरंगदैर्ध्य के नीले प्रकाश का प्रकीर्णन सर्वाधिक होने के कारण इस रंग का प्रकाश चारों ओर बिखर जाता है
  • जिससे आकाश हल्का नीला दिखाई देता है।
  • रैले प्रकीर्णन क्या है?
    • रैले प्रकीर्णन भौतिकी का एक मूल सिद्धांत है, जो लॉर्ड रैले द्वारा प्रतिपादित किया गया।
    • सूर्य का प्रकाश सफेद दिखता है क्योंकि इसमें सभी दृश्य रंग (वायलेट, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल) मिले होते हैं
    • जिनकी तरंगदैर्ध्य अलग-अलग होती है। नीले रंग की तरंगदैर्ध्य लगभग 450 नैनोमीटर है
    • जबकि लाल की 650 नैनोमीटर। प्रकीर्णन की तीव्रता तरंगदैर्ध्य के चतुर्थ घात के व्युत्क्रम के समानुपाती होती है
    • अर्थात I∝1λ4 । इससे छोटी तरंगदैर्ध्य (नीला-वायलेट) का प्रकीर्णन लंबी तरंगदैर्ध्य (लाल) से 10 गुना अधिक होता है।
    • वायुमंडल के नाइट्रोजन और ऑक्सीजन अणु (आकार 0.1-1 माइक्रोमीटर) इन छोटे तरंगों को चारों ओर बिखेर देते हैं।
  • क्यों नीला, बैंगनी नहीं?
    • बैंगनी रंग की तरंगदैर्ध्य नीली से भी छोटी (400 नैनोमीटर) है
    • इसलिए इसका प्रकीर्णन सबसे अधिक होना चाहिए। लेकिन सूर्य का प्रकाश में बैंगनी कम मात्रा में होता है
    • मानव आंखें नीले रंग के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं
    • (विज़न स्पेक्ट्रम में नीला प्रमुख)। इसलिए आकाश नीला दिखता है, न कि बैंगनी।
  • प्रक्रिया चरणबद्ध रूप से
    • चरण 1: सूर्य का प्रकाश वायुमंडल में प्रवेश करता है।
    • चरण 2: वायु अणुओं से टकराकर प्रकाश प्रकीर्णित होता है; नीला प्रकाश सभी दिशाओं में बिखरता है।
    • चरण 3: हम आकाश की ओर देखते हैं, तो बिखरा नीला प्रकाश हमारी आंखों तक पहुंचता है, जबकि सीधा सूर्य प्रकाश सफेद रहता है
    • चरण 4: सूर्यास्त/सूर्योदय पर लंबी दूरी तय करने पर नीला प्रकाश प्रकीर्णित हो जाता है, लाल-नारंगी बचता है।
  • अन्य प्रभाव
    • धूल या प्रदूषण वाले आकाश में बड़ा कण माइ प्रकीर्णन (Mie Scattering) होता है, जो सफेद/धुंधला बनाता है।
    • अंतरिक्ष में आकाश काला दिखता है क्योंकि कोई वायुमंडल नहीं।
    • यह फेनोमेना पृथ्वी के वायुमंडल की संरचना पर निर्भर करता है।

2. निम्नलिखित में से इंद्रधनुष के किस रंग का सबसे कम तरंगदैर्ध्य होता है? [JE सिविल परीक्षा 30 अक्टूबर, 2020 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) बैंगनी
Solution:
  • इंद्रधनुष प्रकाश के परावर्तन, पूर्ण आंतरिक परावर्तन, अपवर्तन और जल की बूंदों में प्रकाश के वर्ण विक्षेपण के कारण बनता है।
  • इंद्रधनुष सात रंगों (बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी एवं लाल) से बनता है
  • जिसमें प्रायः लाल और बैंगनी रंग किनारों पर होते हैं
  • जबकि अन्य रंग इनके मध्य में होता है।
  • इन रंगों में सबसे कम तरंगदैर्ध्य बैंगनी रंग का एवं सबसे अधिक तरंगदैर्ध्य लाल रंग का होता है।
  • लाल रंग के इसी गुण के कारण इसका प्रयोग ट्रैफिक सिग्नलों में किया जाता है।
  • इंद्रधनुष के रंग और क्रम
    • लाल सबसे ऊपर (लंबी तरंगदैर्ध्य) और वायलेट सबसे नीचे (छोटी तरंगदैर्ध्य)। तरंगदैर्ध्य बढ़ने के साथ रंग ऊपर चढ़ते जाते हैं
    • क्योंकि लाल प्रकाश कम अपवर्तित होता है।
  • तरंगदैर्ध्य की रेंज
    • दृश्य प्रकाश स्पेक्ट्रम 400 nm से 700 nm तक फैला होता है।
    • वायलेट: 400 nm (सबसे कम)
    • इंडिगो: 445 nm
    • नीला: 500 nm
    • हरा: मध्य रेंज (लगभग 550 nm)
    • पीला: 570-590 nm
    • नारंगी: 600 nm के आसपास
    • लाल: 700 nm (सबसे अधिक)
    • वायलेट प्रकाश की छोटी तरंगदैर्ध्य के कारण यह अधिक अपवर्तित होता है और इंद्रधनुष के आंतरिक भाग में दिखता है।
  • इंद्रधनुष निर्माण प्रक्रिया
    • सूर्य का सफेद प्रकाश जल की बूंदों में प्रवेश कर अपवर्तन, पूर्ण आंतरिक परावर्तन और पुनः अपवर्तन से अलग-अलग रंगों में विभाजित हो जाता है।
    • छोटी तरंगदैर्ध्य (वायलेट) अधिक मुड़ती है
    • जबकि लंबी (लाल) कम। यह न्यूटन के प्रिज्म प्रयोग से सिद्ध होता है।
  • वैज्ञानिक महत्व
    • तरंगदैर्ध्य ऊर्जा से उलटी संबद्ध होती है
    • वायलेट में अधिक ऊर्जा होती है। इंद्रधनुष प्राकृतिक स्पेक्ट्रम का उदाहरण है
    • जो प्रकाश की प्रकृति दर्शाता है। द्वितीयक इंद्रधनुष में रंग उल्टे होते हैं
    • लेकिन वायलेट की कम तरंगदैर्ध्य वही रहती है।

3. निम्नलिखित में से कौन-सा रंग प्राथमिक रंग नहीं है? [JE सिविल परीक्षा 30 अक्टूबर, 2020 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) नारंगी
Solution:
  • वे रंग जिन्हें दो या दो से अधिक रंगों के मिश्रण से प्राप्त नहीं किया जा सकता है
  • प्राथमिक रंग कहलाते हैं। विकल्पों में से दिए गए रंगों में से नारंगी रंग (Orange) प्राथमिक रंग नहीं है, बल्कि यह द्वितीयक रंग है।
  • चित्रकला मॉडल (RYB)
    • चित्रकला या पिगमेंट-आधारित रंग मॉडल (RYB) में प्राथमिक रंग लाल, पीला और नीला होते हैं।
    • इन तीनों को मिलाकर द्वितीयक रंग जैसे नारंगी (लाल+पीला), हरा (पीला+नीला) और बैंगनी (नीला+लाल) बनते हैं।
    • इस मॉडल में हरा या नारंगी जैसे रंग प्राथमिक नहीं माने जाते क्योंकि वे मिश्रण से प्राप्त होते हैं।
  • प्रकाश विज्ञान मॉडल (RGB)
    • प्रकाश या एडिटिव रंग मॉडल (RGB) में, जो टीवी, कंप्यूटर स्क्रीन आदि में उपयोग होता है
    • प्राथमिक रंग लाल (Red), हरा (Green) और नीला (Blue) होते हैं।
    • इनका मिश्रण सफेद प्रकाश बनाता है
    • द्वितीयक रंग जैसे पीला (लाल+हरा), सियान (हरा+नीला) तथा मैजेंटा (लाल+नीला) उत्पन्न होते हैं। यहां पीला प्राथमिक नहीं है।
  • प्रिंटिंग मॉडल (CMYK)
    • प्रिंटिंग या सब्ट्रैक्टिव मॉडल में प्राथमिक रंग सियान (Cyan), मैजेंटा (Magenta), पीला (Yellow) और काला (Key/Black) होते हैं।
    • यह मॉडल कागज पर रंग छापने के लिए डिज़ाइन किया गया है
    • जहां सफेद रंग कागज की पृष्ठभूमि से आता है।
  • सामान्य भ्रम और उदाहरण
    • प्रश्न अक्सर विकल्पों के बिना पूछा जाता है
    • लेकिन सामान्यतः नारंगी, हरा या काला जैसे रंग प्राथमिक नहीं होते।
    • उदाहरणस्वरूप, चित्रकला में नारंगी द्वितीयक है, जबकि RGB में पीला द्वितीयक।
    • रंग सिद्धांत न्यूटन के रंग चक्र से विकसित हुआ
    • जो सात रंगों पर आधारित है लेकिन आधुनिक मॉडल तीन प्राथमिक पर केंद्रित हैं।

4. 2.5 डायोप्टर क्षमता वाले उत्तल लेंस की फोकस दूरी क्या होगी ? [Phase-XI 28 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) 40 सेमी.
Solution:
  • .5 डायोप्टर क्षमता वाले उत्तल लेंस की फोकस दूरी 40 सेमी होती है।
  • यह मान लेंस की शक्ति (power) और फोकस दूरी के बीच के मानक संबंध से निकाला जाता है।
  • उत्तल लेंस के लिए फोकस दूरी धनात्मक होती है।
  • लेंस शक्ति का सूत्र
    • लेंस की शक्ति P को फोकस दूरी f (मीटर में) से इस सूत्र द्वारा परिभाषित किया जाता है:
    • P=1f
    • यहाँ f मीटर में होनी चाहिए। डायोप्टर (D) इकाई मीटर^{-1} की होती है।
    • उत्तल लेंस के लिए P धनात्मक (+) और f भी धनात्मक होता है।
  • गणना चरणबद्ध
    • दिया गया P=+2.5 D है।
    • सूत्र पुनर्व्यवस्थित करके f=1P प्राप्त होता है।
    • f=12.5=0.4 मीटर।
    • इसे सेंटीमीटर में बदलने पर 0.4×100=40 cm।
    • इस प्रकार, फोकस दूरी f=+40 cm है।
  • उत्तल लेंस की विशेषताएँ
    • उत्तल लेंस (convex lens) प्रकाश किरणों को अभिसरण (converge) करता है
    • इसका फोकस लेंस के दाईं ओर (प्रकाश दिशा में) बनता है।
    • लेंस सूत्र 1v−1u=1f में f धनात्मक लिया जाता है।
    • उच्च शक्ति (जैसे 2.5 D) का अर्थ छोटी फोकस दूरी है
    • जो निकट दृष्टि सुधार या माइक्रोस्कोप में उपयोगी होता है।
  • व्यावहारिक उपयोग
    • ऐसे लेंस चश्मे में हाइपरोपिया (दूरदृष्टि दोष) ठीक करने या कैमरा/प्रोजेक्टर में प्रयुक्त होते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि वस्तु अनंत पर हो तो प्रतिबिंब f=40 cm पर बनेगा।
    • शक्ति बढ़ाने से f घटती है, जो अपवर्तन क्षमता को दर्शाता है।

5. नेत्र लेंस किसी बिंब का रेटिना पर किस प्रकार का प्रतिबिंब बनाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) उल्टा वास्तविक प्रतिबिंब
Solution:
  • नेत्र लेंस किसी बिंब का रेटिना पर उल्टा एवं वास्तविक प्रतिबिंब का निर्माण करता है।
  • कॉर्निया पर लगातार अपवर्तन द्वारा रेटिना पर छवि (प्रतिबिंब) का निर्माण होता है।
  • मस्तिष्क इस उल्टे प्रतिबिंब को स्वचालित रूप से सीधा करके हमें सामान्य दृष्टि प्रदान करता है।
  • नेत्र की संरचना
    • मानव नेत्र एक जटिल प्रकाशीय उपकरण है
    • जिसमें कॉर्निया, आइरिस, पुतली, क्रिस्टलीय लेंस, विट्रियस हासर और रेटिना प्रमुख भाग हैं।
    • कॉर्निया नेत्रगोलक का सामने का पारदर्शी भाग है
    • जो प्रकाश को सबसे पहले अपवर्तित करता है
    • जबकि क्रिस्टलीय लेंस (eye lens) एक उत्तल लेंस है जो फोकस को समायोजित करता है।
    • रेटिना नेत्रगोलक के अंदरूनी भाग पर प्रकाश-संवेदी कोशिकाओं (रोड्स और कोन्स) की परत है
    • जहाँ प्रतिबिंब बनता है। प्रकाश किरणें कॉर्निया (लगभग 2/3 अपवर्तन) और लेंस (1/3 अपवर्तन) से होकर गुजरती हैं
    • रेटिना पर केंद्रित होती हैं।
  • प्रतिबिंब निर्माण प्रक्रिया
    • प्रकाश की किरणें जब नेत्र में प्रवेश करती हैं
    • तो वे पहले कॉर्निया द्वारा अपवर्तित होती हैं।
    • फिर पुतली (pupil) से होकर क्रिस्टलीय लेंस पहुँचती हैं
    • जो उत्तल लेंस होने के कारण किरणों को अभिसारी (converging) बनाता है।
    • लेंस की फोकस दूरी (लगभग 17-22 मिमी) ऐसी होती है
    • वस्तु (जो सामान्यतः अनंत से 25 सेमी तक दूरी पर होती है)
    • प्रतिबिंब रेटिना पर पड़ता है। उत्तल लेंस वास्तविक बिंब के लिए हमेशा वास्तविक, उल्टा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि वस्तु लेंस से 50 सेमी दूर है
    • तो प्रतिबिंब रेटिना (लेंस से लगभग 2 सेमी पीछे) पर उल्टा और बहुत छोटा बनेगा।
  • प्रतिबिंब के गुण
    • वास्तविक (Real): प्रतिबिंब रेटिना पर वास्तविक रूप से बनता है
    • अर्थात् किरणें वास्तव में उस स्थान पर मिलती हैं।
    • यह स्क्रीन पर दिखाया जा सकता है, जैसे कैमरे में फिल्म पर।
    • उल्टा (Inverted): प्रतिबिंब ऊपर-नीचे और बाएँ-दाएँ उल्टा होता है।
    • किरण आरेख से स्पष्ट है: मुख्य अक्ष के समानांतर किरण लेंस से गुजरकर फोकस बिंदु से होकर जाती है
    • जबकि फोकस बिंदु से आने वाली किरण समानांतर हो जाती है।
    • छोटा (Diminished): प्रतिबिंब वस्तु से छोटा होता है
    • क्योंकि वस्तु लेंस के 2F (दोगुना फोकस) से परे होती है।
    • सामान्य दृष्टि में प्रतिबिंब आकार लगभग 1/17वाँ वस्तु के आकार का होता है।

    • रेटिना की कोशिकाएँ इस प्रतिबिंब को विद्युत संकेतों में बदलती हैं
    • जो ऑप्टिक तंत्रिका द्वारा मस्तिष्क तक पहुँचते हैं।
    • मस्तिष्क इन संकेतों को व्याख्या करके उल्टे प्रतिबिंब को सीधा दिखाता है।
  • समायोजन की भूमिका
    • नेत्र लेंस की फोकस दूरी परिवर्तनीय होती है
    • (आवास क्षमता या accommodation), जो सिलियरी मांसपेशियों द्वारा नियंत्रित होती है।
    • निकट दृष्टि (25 सेमी) के लिए लेंस मोटा हो जाता है (f घटता है)
    • जबकि दूर की वस्तु के लिए पतला। इससे प्रतिबिंब हमेशा रेटिना पर स्पष्ट रहता है।
    • निकट दृष्टि दोष (myopia) में लेंस अधिक उत्तल हो जाता है
    • जबकि दूर दृष्टि दोष (hypermetropia) में कम।
  • किरण आरेख का वर्णन
    • एक किरण मुख्य अक्ष के समानांतर आती है और लेंस से गुजरकर पीछे के फोकस (F') से होकर जाती है।
    • दूसरी किरण लेंस के प्रकाशिक केंद्र (O) से गुजरती है बिना अपवर्तित हुए।
    • ये किरणें रेटिना पर मिलकर उल्टा प्रतिबिंब बनाती हैं।
    • यह आरेख नेत्र के उत्तल लेंस के गुणों को प्रमाणित करता है।

6. उस परिघटना का नाम क्या है, जिसके द्वारा प्रकाश, प्रिज्म से गुजरने पर अपने घटक वर्णों (component colours) में विभाजित हो जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) विक्षेपण
Solution:
  • एक श्वेत प्रकाश को प्रिज्म से गुजारे जाने पर अपने घटक वर्णों में विभाजित होने की प्रक्रिया विक्षेपण कहलाती है।
  • विक्षेपण द्वारा प्रकाश स्वयं के सात रंगों में विभाजित हो जाता है।
  • वर्ण विक्षेपण क्या है?
    • वर्ण विक्षेपण वह प्रकाशीय परिघटना है
    • जिसमें श्वेत प्रकाश (सूर्य प्रकाश सहित) प्रिज्म जैसे अपवर्तक माध्यम से गुजरते समय अपनी एकसमान संरचना खो देता है
    • विभिन्न रंगों में फैल जाता है। श्वेत प्रकाश वास्तव में सात मुख्य घटक वर्णों का मिश्रण होता है
    • जिनकी तरंगदैर्ध्य भिन्न होती है—लाल का λ ≈ 700 nm से वायलेट का λ ≈ 400 nm तक।
    • प्रिज्म के पहले पृष्ठ पर प्रकाश का अपवर्तन (घनीय माध्यम में झुकाव) और दूसरे पृष्ठ पर पुनः अपवर्तन के कारण कुल
    • विचलन कोण अलग-अलग रंगों के लिए भिन्न होता है
    • जिससे वे अलग हो जाते हैं। न्यूटन ने इसे "प्रकाश का विश्लेषण" कहा।
  • प्रक्रिया का विस्तृत वर्णन
    • प्रिज्म एक पारदर्शी त्रिकोणीय माध्यम होता है जिसका अपवर्तक कोण (A) सामान्यतः 60° होता है।
    • श्वेत प्रकाश जब प्रिज्म के पहले समतल पृष्ठ पर आपतित होता है:
    • प्रथम अपवर्तन: हवा (निम्न घनत्व) से काँच (उच्च अपवर्तनांक μ) में प्रवेश पर किरण अभिलंब की ओर झुकती है।
    • लाल प्रकाश का μ सबसे कम (≈1.51) और वायलेट का सबसे अधिक (≈1.54) होता है।
    • आंतरिक परावर्तन: प्रिज्म के अंदर किरण आधार की ओर जाती है।
    • द्वितीय अपवर्तन: दूसरे पृष्ठ पर काँच से हवा में निकलते समय पुनः झुकाव, लेकिन अब विपरीत दिशा में।
      कुल विचलन कोण δ = (μ - 1)A के लिए न्यूनतम विचलन पर। चूँकि μ रंगानुसार भिन्न है
    • (वायलेट > हरा > लाल), वायलेट अधिक विचलित (δ_v > δ_r) होता है
    • जिससे स्पेक्ट्रम बनता है: VIBGYOR क्रम में। समीकरण: sin i / sin r = μ(λ)।
  • कारण: अपवर्तनांक का तरंगदैर्ध्य निर्भरता
    • वर्ण विक्षेपण का मूल कारण माध्यम का विक्षेपणीय अपवर्तनांक (Dispersive refractive index) है।
    • कैली-स्नेल नियम के अनुसार, अपवर्तन r = sin⁻¹(sin i / μ)। सघन माध्यमों (काँच, पानी) में छोटी तरंगदैर्ध्य (वायलेट) का μ अधिक होता है
    • क्योंकि परमाणु इलेक्ट्रॉनों के साथ अधिक अंतर्क्रिया। हवा या निर्वात में यह प्रभाव नगण्य है।
    • कारण: प्रकाश विद्युतचुंबकीय तरंग है
    • माध्यम की परमिटिविटी ε(λ) तरंगदैर्ध्य पर निर्भर।
    • ऑटोमैटिक कारण सैद्धांतिक स्पष्टीकरण: लॉरेंट्ज़ इलेक्ट्रॉन मॉडल में, μ = √(1 + N e² / (ε₀ m (ω₀² - ω²))) जहाँ ω = 2πc/λ।

7. उस शब्द की पहचान कीजिए जिसका अर्थ वह न्यूनतम दूरी है जिस पर वस्तुओं को बिना परिश्रम (strain) के सबसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी
Solution:
  • स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी का अर्थ वह न्यूनतम दूरी है
  • जिस पर वस्तुओं को बिना परिश्रम के स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
  • स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी 25 सेमी. होती है।
  • स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी
    • जिसे सामान्यतः निकट बिंदु (Near Point) भी कहा जाता है।
    • यह वह न्यूनतम दूरी है
    • जहां सामान्य मानव आंख किसी वस्तु को बिना किसी परिश्रम या तनाव (strain) के सबसे स्पष्ट रूप से देख सकती है।
  • परिभाषा और महत्व
    • स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी वह निकटतम दूरी है
    • जहां आंख की मांसपेशियां पूरी तरह समायोजित (accommodated) होकर रेटिना पर स्पष्ट प्रतिबिंब बना पाती हैं
    • बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के। एक युवा वयस्क के लिए यह दूरी लगभग 25 सेंटीमीटर होती है
    • जो पढ़ने, लिखने या बारीक काम करने के लिए आदर्श है।
    • इस दूरी से कम पर फोकस करने से आंखों में तनाव होता है
    • जो सिरदर्द या थकान का कारण बन सकता है।
  • उम्र के अनुसार परिवर्तन
    • शिशुओं में: 5-8 सेंटीमीटर, क्योंकि उनकी आंखें अधिक लचीली होती हैं।
    • युवावस्था में: 25 सेंटीमीटर के आसपास, सामान्य स्वस्थ आंख के लिए मानक।
    • बुजुर्गों में: बढ़कर 50-100 सेंटीमीटर या अधिक हो जाती है
    • जिसे प्रेस्बायोपिया (Presbyopia) कहते हैं।
    • इससे चश्मा आवश्यक हो जाता है।
  • संबंधित अवधारणाए
    • दूर बिंदु (Far Point): आंख की अधिकतम स्पष्ट दृष्टि दूरी, सामान्य आंख के लिए अनंत (infinity)।
    • आंख का कार्य: आंख एक उतल लेंस प्रणाली है
    • जो वस्तु के उल्टे प्रतिबिंब को रेटिना पर बनाती है।
    • निकट बिंदु पर लेंस की फोकस शक्ति अधिकतम होती है।
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • पुस्तक पढ़ते समय यदि 25 सेमी से कम दूरी पर रखें तो धुंधला दिखता है।
    • इसी कारण स्कूल की किताबें इस दूरी पर डिजाइन की जाती हैं।
    • यह अवधारणा नेत्र दोष सुधार (जैसे मायोपिया) में महत्वपूर्ण है।

8. राहुल, सुबह-सुबह एक वन में टहलने का फैसला करता है। जब वह सघन वन के अंदर था, तो वह वृक्षों के बीच छोटे अंतराल के माध्यम से सुंदर सूर्य किरणों को देख सकता था और उन किरणों के पथ को स्पष्ट रूप से देख सकता था। यह किस प्रभाव का परिणाम था ? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) टिंडल प्रभाव
Solution:
  • प्रकाश के प्रकीर्णन द्वारा उसके मार्ग को दृश्यमान बनाने की घटना को टिंडल प्रभाव के रूप में परिभाषित किया जाता है। टिंडल प्रभाव का सामान्य उदाहरण सूर्योदय या सूर्यास्त के समय प्रकाश का रंगीन रूप है।
  • टिंडल प्रभाव क्या है?
    • टिंडल प्रभाव एक ऑप्टिकल घटना है
    • जिसमें प्रकाश किरण जब कोलाइड या सस्पेंशन (जैसे हवा में धूल, धुंध या वन में परागकण) से होकर गुजरती है
    • तो प्रकाश के कुछ कण फैल जाते हैं, जिससे किरण का पथ दृश्यमान हो जाता है।
    • 19वीं शताब्दी के ब्रिटिश भौतिकशास्त्री जॉन टिंडल ने सबसे पहले इसकी खोज की, इसलिए इसका नाम टिंडल प्रभाव पड़ा।
    • यह रेले प्रकीर्णन (Rayleigh scattering) से भिन्न है
    • क्योंकि टिंडल प्रभाव बड़े कणों (100-1000 नैनोमीटर) पर निर्भर करता है
    • जबकि रेले प्रकीर्णन छोटे अणुओं पर।
  • जंगल में इसका कारण
    • घने जंगल में वृक्षों के बीच छोटे अंतरालों से सूर्य की किरणें प्रवेश करती हैं।
    • इन किरणों के पथ पर हवा में तैरते सूक्ष्म कण जैसे धूल, पराग, कोहरे की बूंदें या वाष्प मौजूद होते हैं।
    • ये कण प्रकाश को सभी दिशाओं में प्रकीर्णित (scatter) कर देते हैं
    • जिससे किरणों का सफेद या सुनहरा पथ स्पष्ट दिखाई देता है।
    • सुबह के समय प्रकाश की तीव्रता कम और कोण कम होने से यह प्रभाव और अधिक सुंदर व प्रमुख होता है।
  • अन्य उदाहरण
    • दैनिक जीवन में: माइक्रोस्कोप की रोशनी का कणों पर पड़ना, या सिनेमा हॉल में प्रोजेक्टर की किरण।
    • प्रकृति में: पहाड़ी क्षेत्रों में धुंध में सर्चलाइट, या दूध का पतला घोल जो नीले रंग का प्रकीर्णन दिखाता है।
    • वैज्ञानिक उपयोग: कोलाइडल घोलों की पहचान, जैसे स्टार्च या जेलाटिन घोल।

9. जब आप तेज रोशनी वाले कमरे से आते हैं, तो आप मंद रोशनी वाले कमरे में वस्तुओं को क्यों नहीं देख पाते हैं? [CGL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) परितारिका सिकुड़ कर पुतली को छोटा बना देती है जिससे आंख में कम प्रकाश प्रवेश कर पाता है।
Solution:
  • जब आप तेज रोशनी वाले कमरे से आते हैं
  • तो आप मंद रोशनी वाले कमरे में वस्तुओं को नहीं देख पाते हैं
  • क्योंकि आंख में उपस्थित परितारिका सिकुड़ कर पुतली को छोटा बना देती है
  • जिससे आंख में कम प्रकाश प्रवेश कर पाता है।
  • पुतली का कार्य
    • आंख की पुतली (pupil) प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करने वाली परितारिका (iris) द्वारा संचालित होती है।
    • तेज रोशनी में पुतली सिकुड़ जाती है
    • ताकि आंख में अतिरिक्त प्रकाश न प्रवेश करे और रेटिना सुरक्षित रहे।
    • मंद रोशनी में इसे फैलना पड़ता है
    • अधिक प्रकाश ग्रहण करने के लिए
    • लेकिन यह प्रक्रिया कुछ सेकंड से 30-45 सेकंड तक लग सकती है।
  • प्रकाश अनुकूलन प्रक्रिया
    • रेटिना पर प्रकाश संवेदी कोशिकाएं रॉड्स (कम रोशनी में संवेदनशील) और कोन्स (तेज रोशनी में रंग दृष्टि के लिए) होती हैं।
    • तेज रोशनी से मंद में आने पर रॉड्स को सक्रिय होने में समय लगता है
    • क्योंकि सिकुड़ी पुतली से कम प्रकाश पहुंचता है।
    • यह "डार्क एडाप्टेशन" कहलाता है
    • जो लगभग 20-30 मिनट में पूर्ण होता है।
  • अन्य प्रभावित कारक
    • रेटिना की संवेदनशीलता: तेज रोशनी रेटिना को अस्थायी रूप से संतृप्त कर देती है
    • जिससे मंद प्रकाश में संकेत कमजोर पड़ते हैं।
    • उम्र और स्वास्थ्य: बुजुर्गों में यह समय अधिक लगता है
    • विटामिन ए की कमी या बीमारियां जैसे मोतियाबिंद इसे बढ़ा सकती हैं
    • उल्टा प्रभाव: मंद से तेज रोशनी में जाना आसान होता है
    • क्योंकि पुतली जल्दी सिकुड़ती है।

10. VIBGYOR के प्रकाश के किस रंग की तरंगदैर्ध्य न्यूनतम होती है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) बैंगनी
Solution:
  • VIBGYOR के प्रकाश के बैंगनी रंग की तरंगदैर्ध्य न्यूनतम होती है
  • जबकि लाल रंग की तरंगदैर्ध्य अधिकतम होती है। VIBGYOR एक संक्षिप्त शब्द है
  • जो दृश्य स्पेक्ट्रम के रंगों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • VIBGYOR क्या है?
    • VIBGYOR सफेद प्रकाश के दृश्य स्पेक्ट्रम के सात रंगों का संक्षिप्त रूप है
    • जो प्रिज्म से गुजरने पर अलग हो जाते हैं।
    • सफेद प्रकाश में विभिन्न तरंगदैर्ध्य वाले प्रकाश तरंगें होती हैं
    • जो अपवर्तन के कारण अलग-अलग कोण पर मुड़ती हैं।
    • बैंगनी रंग सबसे अधिक मुड़ता है क्योंकि इसकी तरंगदैर्ध्य सबसे छोटी होती है।
  • तरंगदैर्ध्य की सीमा
    • VIBGYOR रंगों की तरंगदैर्ध्य नैनोमीटर (nm) में इस प्रकार होती है:
    • बैंगनी (Violet): 380-450 nm (न्यूनतम)
    • नील (Indigo): 450-480 nm
    • नीला (Blue): 480-500 nm
    • हरा (Green): 500-570 nm
    • पीला (Yellow): 570-590 nm
    • नारंगी (Orange): 590-620 nm
    • लाल (Red): 620-750 nm (अधिकतम)
    • मानव आंख 380-700 nm तक के प्रकाश को देख सकती है।
  • वैज्ञानिक कारण
    • प्रकाश की तरंगदैर्ध्य जितनी कम होती है, उसकी आवृत्ति उतनी अधिक होती है
    • (f=cλ, जहां c प्रकाश की गति और λ तरंगदैर्ध्य है)।
    • छोटी तरंगदैर्ध्य उच्च ऊर्जा (E=hf) प्रदान करती है
    • इसलिए बैंगनी प्रकाश उच्च ऊर्जा वाला होता है।
    • प्रिज्म में अपवर्तनांक तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करता है, जिससे बैंगनी सबसे अधिक विक्षेपित होता है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • आइजैक न्यूटन ने 1660 के दशक में प्रिज्म प्रयोगों से सिद्ध किया
    • सफेद प्रकाश सात रंगों से बना होता है।
    • उनकी पुस्तक Opticks में फैलाव (dispersion) की व्याख्या की गई है।
    • इंद्रधनुष भी इसी सिद्धांत पर आधारित है।