Correct Answer: (a) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय
Solution:- भारत सरकार का केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम का संचालन करता है।
- गौरतलब है कि इस योजना का उद्देश्य स्वरोजगार से जुड़े नए उपक्रमों/सूक्ष्म उद्यमों/परियोजनाओं के विकास को बढ़ावा देकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उत्पन्न करना है।
- कार्यक्रम का उद्देश्य
- PMEGP का मुख्य लक्ष्य नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से रोजगार सृजन करना है।
- यह पारंपरिक कारीगरों, बेरोजगार युवाओं और ग्रामीण-शहरी निवासियों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करता है।
- योजना 2008 में प्रधानमंत्री रोजगार योजना (PMRY) और ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (REGP) के विलय से शुरू हुई थी।
- प्रशासनिक ढांचा
- यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका प्रशासन MoMSME द्वारा किया जाता है।
- राष्ट्रीय स्तर पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) नोडल एजेंसी है
- जबकि राज्य स्तर पर राज्य KVIC निदेशालय, राज्य खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड (KVIB), जिला उद्योग केंद्र (DIC) और बैंक इसे लागू करते हैं।
- KVIC आवेदनों की जांच और स्वीकृति के बाद बैंकों को ऋण के लिए अग्रेषित करता है।
- वित्तीय सहायता और सीमाएं
- योजना के तहत मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए अधिकतम परियोजना लागत ₹25 लाख और सर्विस सेक्टर के लिए ₹10 लाख है।
- लाभार्थी को 5-10% मार्जिन मनी देनी होती है, बैंक 90-95% ऋण प्रदान करता है
- सरकार 15-35% सब्सिडी (ग्रामीण/शहरी, सामान्य/विशेष श्रेणी के आधार पर) देती है।
- ब्याज दरें 11-12% हैं, और पुनर्भुगतान अवधि 3-7 वर्ष (प्रारंभिक मोरेटोरियम सहित) है।
- पात्रता और आवेदन प्रक्रिया
- कोई भी 18 वर्ष से अधिक आयु का भारतीय नागरिक आवेदन कर सकता है
- जिसमें न्यूनतम शैक्षिक योग्यता 8वीं पास (मैन्युफैक्चरिंग के लिए) या 10वीं पास (सर्विस के लिए) है।
- आवेदन ऑनलाइन pmegp.kviconline.gov.in पर दर्ज होते हैं, जिनकी जांच KVIC/DIC द्वारा होती है।
- स्वीकृति के बाद ऋण बैंक से मिलता है, और सब्सिडी सीधे लाभार्थी खाते में जाती है।
- हालिया अपडेट्स और विस्तार
- 2022 में योजना को वित्त वर्ष 2026 तक पांच वर्ष के लिए विस्तारित किया गया।
- कोविड-19 के दौरान स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाया गया
- जिसमें जिला स्तरीय कार्य दल समिति (DLTFC) की भूमिका समाप्त कर KVIC को सीधे अधिकार दिए गए।
- 2020-21 में परियोजनाओं की स्वीकृति में 44% वृद्धि दर्ज की गई।