प्रमुख योजनाएं (अर्थव्यवस्था) (भाग-III)

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21. 'अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना' के अंतर्गत बेरोजगारी के अधिकतम 90 दिनों तक देय औसत मजदूरी का कितना प्रतिशत भुगतान राहत के रूप में प्रदान किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) 25%
Solution:
  • 'अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना' के अंतर्गत बेरोजगारी के अधिकतम 90 दिनों तक प्रतिदिन औसत कमाई के तहत '25 प्रतिशत' की सीमा तक नकद मुआवजे के रूप में राहत का भुगतान किया जाता है।
  • योजना का उद्देश्य
    • यह योजना संगठित क्षेत्र के उन कर्मचारियों की मदद करती है जो अचानक बेरोजगार हो जाते हैं।
    • शुरूआत में 2018 में लॉन्च हुई यह योजना बेरोजगारी के दौरान नकद लाभ देकर लोगों को नई नौकरी ढूंढने का समय देती है।
    • समय के साथ इसमें सुधार हुए, जैसे 2021 में राहत राशि को 25% से बढ़ाकर 50% किया गया।
  • लाभ का प्रतिशत और अवधि
    • बेरोजगारी के दौरान औसत दैनिक मजदूरी का 50% राहत के रूप में प्रतिदिन मिलता है।
    • यह लाभ अधिकतम 90 दिनों तक सीमित है।
    • राशि सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित होती है।
  • पात्रता शर्तें
    • बीमित व्यक्ति को लाभ पाने के लिए ये मानदंड पूरे करने होते हैं:
    • बेरोजगारी से पहले कम से कम 78 दिनों का योगदान ESIC में जमा होना चाहिए।
    • नौकरी छूटने के 30 दिनों के भीतर दावा करना अनिवार्य है।
    • व्यक्ति ESIC अधिनियम की धारा 2(9) के तहत कवर होना चाहिए
    • यानी मासिक वेतन 21,000 रुपये तक का होना चाहिए।
    • योजना का लाभ दो साल की नौकरी के बाद ही मिलता है।
  • दावा प्रक्रिया
    • ESIC पोर्टल पर ऑनलाइन या नजदीकी शाखा में फॉर्म जमा करें।
    • आवश्यक दस्तावेज: आधार, बैंक पासबुक, रोजगार प्रमाण, बेरोजगारी का प्रमाण।
    • दावा सत्यापन के बाद 15 दिनों में भुगतान शुरू हो जाता है।
  • योजना का विस्तार और प्रभाव
    • योजना को पहले 2022-2024 तक बढ़ाया गया था, और अब 2026 तक भी इसका लाभ जारी है।
    • अब तक 43,000 से अधिक लोगों को फायदा पहुंचा, जिसमें 57 करोड़ रुपये से ज्यादा जारी हुए।
    • यह कोविड जैसी महामारी में खासतौर पर उपयोगी साबित हुई।

22. 'ई-शक्ति' कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) बैंकों के लिए स्वयं सहायता समूह के विवरणों का डिजिटलीकरण करना
Solution:
  • ई-शक्ति परियोजना का प्राथमिक लक्ष्य विभिन्न स्वयं सहायता समूहों के खातों को डिजिटल बनाना और समूहों के सदस्यों को वित्तीय समावेशन के दायरे में लाना है।
  • कार्यक्रम का पृष्ठभूमि और लॉन्च
    • नाबार्ड के सूक्ष्म ऋण और नवाचार विभाग ने इसे 100 जिलों में लागू किया
    • जहां स्वयं सहायता समूहों के खातों को डिजिटल रूप से एकीकृत किया गया।
    • यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर केंद्रित है, खासकर महिलाओं के लिए।
  • मुख्य उद्देश्य
    • स्वयं सहायता समूहों का डिजिटलीकरण: सभी SHG सदस्यों के खातों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना, जिससे लेन-देन पारदर्शी और तेज हो।
    • वित्तीय समावेशन: समूह सदस्यों को बैंकिंग, क्रेडिट, बीमा जैसी सेवाओं तक आसान पहुंच प्रदान करना।
    • क्षमता निर्माण: SHG सदस्यों को डिजिटल साक्षरता, वित्तीय प्रबंधन और क्रेडिट मूल्यांकन का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना।
    • बैंकों की सुविधा: क्रेडिट लिंकेज प्रक्रिया को सरल बनाना, जिससे ऋण वितरण तेज हो।
  • कार्यान्वयन और दायरा
    • कार्यक्रम देश के 100 जिलों में पायलट आधार पर चला, जहां लाखों SHG सदस्य जुड़े।
    • इसमें मोबाइल ऐप्स, डिजिटल वॉलेट और आधार-लिंक्ड भुगतान प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
    • नाबार्ड ने राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (SRLM) के साथ साझेदारी की।
    • 2026 तक यह विस्तारित रूप में जारी है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक है।
  • लाभ और प्रभाव
    • महिलाओं का सशक्तीकरण: ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल युग से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि हुई।
    • पारदर्शिता: डिजिटल रिकॉर्ड से धोखाधड़ी कम हुई और ट्रैकिंग आसान।
    • आर्थिक विकास: SHG के माध्यम से ऋण पहुंच बढ़ने से उद्यमिता को बढ़ावा।
    • उदाहरणस्वरूप, एक SHG सदस्य अब मोबाइल से ही ऋण आवेदन कर सकती है।

23. कौशल विकास के माध्यम से बेरोजगारी दूर करने हेतु दीन दयाल अंत्योदय योजना के अंतर्गत शहरी गरीबों के प्रशिक्षण पर प्रति व्यक्ति कितना व्यय अनुमेय है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) 15,000 रु.
Solution:
  • कौशल विकास के माध्यम से बेरोजगारी दूर करने हेतु दीन दयाल अंत्योदय योजना के अंतर्गत शहरी गरीबों के प्रशिक्षण पर प्रति व्यक्ति 15,000 रुपये का व्यय अनुमेय है।
  • दीन दयाल अंत्योदय योजना का परिचय
    • दीन दयाल अंत्योदय योजना (DAY-NULM) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है
    • जो शहरी गरीबों को कौशल विकास, स्वरोजगार और आजीविका के अवसर प्रदान करने पर केंद्रित है।
    • यह योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NULM) के तहत संचालित होती है
    • बेरोजगारी को कम करने के लिए प्रशिक्षण, ऋण तथा संस्थागत सहायता पर जोर देती है।
    • इसका मुख्य उद्देश्य शहरी गरीबों को बाजार-आधारित रोजगार या स्वरोजगार के योग्य बनाना है, विशेषकर एसएलजी (स्वयं सहायता समूह) के माध्यम से।
  • शहरी गरीबों के प्रशिक्षण पर प्रति व्यक्ति व्यय

    • योजना के तहत शहरी गरीबों के कौशल प्रशिक्षण पर प्रति व्यक्ति अधिकतम ₹15,000 का व्यय अनुमेय है।
    • यह राशि सामान्य राज्यों के लिए लागू होती है, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों और जम्मू-कश्मीर के लिए यह ₹18,000 तक बढ़ाई गई है।
    • यह धनराशि प्रशिक्षण संस्थानों को प्रदान की जाती है
    • लाभार्थियों को बाजारोन्मुख कौशल (जैसे सिलाई, इलेक्ट्रिशियन, ब्यूटीशियन आदि) सिखाया जा सके।
  • व्यय के घटक और उपयोग

    • प्रति व्यक्ति ₹15,000 का व्यय मुख्य रूप से प्रशिक्षण लागत, उपकरण, सामग्री और मूल्यांकन पर खर्च होता है। इसमें शामिल हैं:
    • प्रशिक्षण की अवधि (आमतौर पर 1-3 माह) के दौरान स्टाइपेंड या सहायता।
    • प्रमाणन और प्लेसमेंट सहायता।
    • विशेष क्षेत्रों (जैसे पूर्वोत्तर) में अतिरिक्त ₹3,000 का प्रावधान कठिनाई को ध्यान में रखते हुए।
    • यह व्यय केंद्र और राज्य सरकारों के बीच साझा किया जाता है
    • जिसमें केंद्र का हिस्सा 60-90% तक होता है।
    • योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, यह राशि केवल प्रमाणित प्रशिक्षण प्रदाताओं (TPs) को ही जारी की जाती है।
  • योजना के अन्य लाभ और सहायता
    • स्वरोजगार ऋण: प्रशिक्षण के बाद व्यक्तिगत उद्यम के लिए ₹2 लाख तक और समूह के लिए ₹10 लाख तक का ऋण, जिसमें 7% ब्याज सब्सिडी मिलती है।
    • संस्थागत सहायता: प्रत्येक एसएचजी को ₹10,000 और संघों को ₹50,000 की प्रारंभिक पूंजी।
    • लक्ष्य: शहरी क्षेत्रों में प्रतिवर्ष 5 लाख लोगों को प्रशिक्षित करना।
    • ये प्रावधान बेरोजगारी दूर करने में सहायक हैं
    • क्योंकि प्रशिक्षण के बाद 70-80% लाभार्थियों को रोजगार या स्वरोजगार मिलता है।
  • कार्यान्वयन प्रक्रिया
    • शहरी स्थानीय निकाय (ULBs), शहर आजीविका केंद्र (CLC) और प्रशिक्षण प्रदाता इसकी निगरानी करते हैं।
    • लाभार्थी पात्रता: शहरी गरीब (BPL सूची में), बेरोजगार युवा। आवेदन स्थानीय निगम या योजना पोर्टल (mohua.gov.in) के माध्यम से।
    • 2026 तक योजना का विस्तार जारी है, जिसमें डिजिटल कौशल पर भी फोकस बढ़ा है।
  • प्रभाव और उपलब्धियां

    • योजना ने लाखों शहरी गरीबों को सशक्त बनाया है, विशेषकर महिलाओं को।
    • उदाहरणस्वरूप, प्रशिक्षण के बाद माइक्रो-एंटरप्राइज शुरू करने वाले लाभार्थी आत्मनिर्भर बने। हालांकि, व्यय सीमा निश्चित रखी गई है
    • पारदर्शिता बनी रहे। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक साइट mohua.gov.in देखें।

24. प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना एक सरकारी योजना है, जो छोटे और सीमांत किसानों (SMF) के वृद्धावस्था संरक्षण और सामाजिक सुरक्षा के लिए है। यह योजना ....... की सुनिश्चित पेंशन प्रदान करती है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) 3,000 रु. महीना
Solution:
  • प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के तहत किसानों को 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद प्रति माह 3,000 रुपये की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन प्राप्त होगी।
  • यह योजना छोटे और सीमांत किसानों (SMF) के वृद्धावस्था संरक्षण और सामाजिक सुरक्षा के लिए है।
  • योजना का उद्देश्य
    • यह योजना लघु एवं सीमांत किसानों (SMF) को वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सहायता देती है, क्योंकि उनके पास अक्सर बचत की कमी होती है।
    • केंद्र सरकार द्वारा 12 सितंबर 2019 को शुरू की गई, यह किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है।
    • किसान मासिक योगदान देते हैं, और सरकार बराबर राशि जोड़ती है।
  • पात्रता मानदंड
    • आयु: 18 से 40 वर्ष के बीच।
    • श्रेणी: केवल लघु एवं सीमांत किसान (2 हेक्टेयर तक भूमि वाले)।
    • बहिष्करण: आयकर दाता, पेंशनभोगी, या PM किसान सम्मान निधि से बाहर वाले किसान अयोग्य। महिला और पुरुष दोनों पात्र।
  • योगदान और पेंशन राशि
    • किसान की प्रवेश आयु पर निर्भर मासिक योगदान ₹55 से ₹200 तक होता है।
    • सरकार समान योगदान जोड़ती है।
    • 60 वर्ष बाद ₹3,000 मासिक पेंशन मिलती है। उदाहरण: 18 वर्ष की आयु पर ₹55 योगदान से शुरू।
  • पंजीकरण प्रक्रिया
    • नजदीकी CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) पर जाएं।
    • आधार कार्ड, बैंक पासबुक, मोबाइल ले जाएं।
    • VLE (ग्राम उद्यमी) ऑनलाइन फॉर्म भरता है: नाम, पता, नामिनी विवरण।
    • PM-KMY पोर्टल या PM किसान ऐप से भी संभव। LIC पेंशन फंड प्रबंधित करता है।
  • लाभार्थियों के लिए विशेष प्रावधान
    • मृत्यु पर: पति/पत्नी को 50% पेंशन (₹1,500), यदि वे योजना में न हों।
    • दोनों की मृत्यु पर: जमा राशि नामिनी को।
    • डिफॉल्ट: ब्याज सहित बकाया चुकाकर पुनः सक्रिय।
    • PM किसान सम्मान निधि की किस्त से कटौती का विकल्प।
  • महत्वपूर्ण नियम
    • यदि योगदान समय पर न हो तो पेंशन रुक सकती है।
    • 60 वर्ष से पहले निकासी पर ब्याज सहित राशि लौटाई जाती है।
    • योजना स्वैच्छिक है, कोई बाध्यता नहीं। 2024 तक लाखों किसान जुड़े।

25. 'शिक्षा कर्मी' पहल और 'लोक जुंबिश' कार्यक्रम ऐसी योजनाएं हैं, जिन्होंने भारत में किस राज्य की साक्षरता दर बढ़ाने में सहायता की है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) राजस्थान
Solution:
  • 'शिक्षा कर्मी' पहल और 'लोक जुंबिश' कार्यक्रम ऐसी योजनाएं हैं, जिन्होंने भारत के 'राजस्थान' राज्य की साक्षरता दर बढ़ाने में मदद की हैं।
  • शिक्षा कर्मी पहल
    • इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षक अनुपस्थिति की समस्या को दूर करना और स्थानीय शिक्षित युवाओं को 'शिक्षाकर्मी' के रूप में नियुक्त कर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना था।
    • परियोजना ने नियमित प्रशिक्षण, सामुदायिक भागीदारी और नवीन शिक्षण विधियों पर जोर दिया
    • जिससे ग्रामीण स्कूलों में नामांकन और साक्षरता दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।​
    • यह मॉडल इतना प्रभावी साबित हुआ कि इसे अन्य राज्यों के लिए आदर्श के रूप में अपनाया गया
    • खासकर लड़कियों और हाशिए के समुदायों की शिक्षा में।​
  • लोक जुंबिश कार्यक्रम
    • 'लोक जुंबिश' (जन आंदोलन) को 1992 में राजस्थान सरकार ने प्राथमिक शिक्षा को सभी बच्चों के लिए सुलभ बनाने के लिए शुरू किया था।
    • यह विकेंद्रीकृत और सामुदायिक भागीदारी आधारित कार्यक्रम था
    • जिसमें स्थानीय समुदाय, गैर-सरकारी संगठन और सरकारी निकाय स्कूल मानचित्रण, सूक्ष्म-योजना और शिक्षण सामग्री विकास में शामिल हुए।
    • कार्यक्रम ने विशेष रूप से लड़कियों और वंचित वर्गों पर फोकस किया, जिससे लिंग असमानता कम हुई
    • सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा की दिशा में प्रगति हुई।
    • इसके परिणामस्वरूप राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों का बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ और साक्षरता दर में स्थायी सुधार देखा गया।​
  • इन योजनाओं का प्रभाव
    • ये दोनों पहलें राजस्थान की साक्षरता दर को राष्ट्रीय औसत से ऊपर ले जाने में सहायक रहीं
    • जहां 1980-90 के दशक में राज्य की साक्षरता दर काफी निम्न थी।​
    • शिक्षा कर्मी ने स्थानीय स्तर पर शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की, जबकि लोक जुंबिश ने सामुदायिक स्वामित्व विकसित किया
    • जिससे नामांकन दर 20-30% तक बढ़ी और ड्रॉपआउट दर घटी।
    • कुल मिलाकर, इनके संयुक्त प्रयासों से राजस्थान ने शिक्षा में लैंगिक समानता और गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में मील का पत्थर स्थापित किया।​

26. पूर्वी भारत में हरित क्रांति लाना (Bringing Green Revolution to Eastern India) नामक योजना कितने पूर्वी राज्यों में लागू की जा रही है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) सात
Solution:
  • हरित क्रांति को पूर्वी भारत में लाना (BGREI) राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की एक उप-योजना थी
  • जिसे चावल आधारित फसल की उत्पादकता को सीमित करने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित 'सात' राज्यों में वर्ष 2010-11 में लागू किया गया था।
  • योजना का परिचय
    • BGREI योजना 2010-11 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) की उप-योजना के रूप में शुरू हुई।
    • इसका मुख्य लक्ष्य पूर्वी भारत के कम उत्पादक चावल आधारित फसल प्रणालियों में चुनौतियों का समाधान करना है
    • जैसे खराब बीज, मिट्टी की उर्वरता की कमी और तकनीकी अभाव।
    • यह नई उच्च उपज वाली बीज किस्में, कृषि यंत्र, उर्वरक, कीटनाशक और किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करती है।
  • कवर किए गए राज्य
    • योजना निम्नलिखित सात पूर्वी राज्यों में सक्रिय है:
    • असम
    • बिहार
    • छत्तीसगढ़
    • झारखंड
    • ओडिशा
    • पूर्वी उत्तर प्रदेश
    • पश्चिम बंगाल
    • ये राज्य चावल उत्पादन में महत्वपूर्ण हैं, लेकिन पारंपरिक हरित क्रांति का लाभ कम मिला था।
    • योजना इन क्षेत्रों के कृषि-जलवायु के अनुरूप हस्तक्षेप करती है।​
  • उद्देश्य और गतिविधियां
    • योजना का फोकस चावल की उत्पादकता दोगुनी करने पर है। प्रमुख गतिविधियां включают:
    • उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का वितरण।
    • एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) और एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM)।
    • कृषि मशीनीकरण जैसे डायरेक्ट सीडिंग राइस (DSR) और लेजर लेवलर।
    • जल प्रबंधन और मिट्टी स्वास्थ्य सुधार।
    • किसान प्रशिक्षण और डेमो प्लॉट।​
  • पृष्ठभूमि और महत्व
    • भारत की मूल हरित क्रांति (1960s) मुख्यतः पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी UP तक सीमित रही, पूर्वी राज्यों में प्रभाव कम रहा।
    • BGREI इस असंतुलन को दूर करती है। RKVY के तहत शुरू होने से यह राज्य-विशिष्ट योजनाओं को लचीलापन देती है।
    • 2017 में RKVY को RAFTAAR में बदला गया, लेकिन BGREI जारी रही।
  • उपलब्धियां और चुनौतियां
    • योजना से इन राज्यों में चावल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
    • हालांकि, बाढ़, मिट्टी क्षरण और छोटे जोतें चुनौतियां बनी हुई हैं। केंद्र-राज्य अनुपात 60:40 है
    • उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए 90:10)। यह किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य से जुड़ी है।​

27. निम्नलिखित में से कौन-सी योजना वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) मेक इन इंडिया.
Solution:
  • 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम वर्ष 2014 में प्रारंभ किया गया।
  • इसका नेतृत्व उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है।
  • प्रश्न का संदर्भ
    • आमतौर पर इस प्रकार के प्रश्नों में विकल्प दिए जाते हैं
    • जैसे स्वच्छ भारत अभियान, राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन, राष्ट्रीय बाल स्वच्छता मिशन, और मेक इन इंडिया।
    • इनमें से मेक इन इंडिया ही वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Department for Promotion of Industry and Internal Trade - DPIIT) के अंतर्गत आती है।
    • अन्य योजनाएँ अलग-अलग मंत्रालयों से जुड़ी हैं।​
  • मेक इन इंडिया का विवरण
    • मेक इन इंडिया को सितंबर 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया था।
    • यह भारत को वैश्विक विनिर्माण हब बनाने वाली प्रमुख पहल है, जो 25 प्रमुख क्षेत्रों जैसे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स आदि पर केंद्रित है।
    • इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करना, रोजगार सृजन, व्यापार करने में आसानी बढ़ाना, और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को बढ़ावा देना है।
    • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के DPIIT द्वारा संचालित यह कार्यक्रम आर्थिक विकास का इंजन बन चुका है।
  • अन्य विकल्पों का विश्लेषण
    • स्वच्छ भारत अभियान: यह आवास और शहरी कार्य मंत्रालय तथा जल शक्ति मंत्रालय के अधीन है। 2014 में शुरू यह खुले में शौच मुक्त भारत का लक्ष्य रखता है।​
    • राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 2020 में लॉन्च, यह डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र बनाता है।​
    • राष्ट्रीय बाल स्वच्छता मिशन: स्वच्छ भारत का हिस्सा, शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित, स्कूलों में स्वच्छता पर फोकस।​
  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की अन्य प्रमुख योजनाएँ
    • इस मंत्रालय के अंतर्गत निर्यात संवर्धन मिशन (2025 में मंजूर, 25,060 करोड़ का बजट 2025-31 तक) लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के निर्यात को बढ़ावा देता है।
    • इसमें ब्याज सब्सिडी (2.75%) और ऋण गारंटी (85% तक सूक्ष्म उद्यमों के लिए) शामिल हैं।
    • राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडॉर विकास कार्यक्रम भी रोजगार सृजन के लिए इसी मंत्रालय का है।
    •  स्टार्ट-अप इंडिया और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भी DPIIT के प्रमुख कार्य हैं।
  • मंत्रालय की भूमिका
    • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय दो विभागों—वाणिज्य विभाग और DPIIT—से मिलकर बना है।
    • यह निर्यात प्रोत्साहन, औद्योगिक नीतियाँ, FDI, और बाजार विकास सहायता जैसी योजनाएँ चलाता है।
    • उदाहरणस्वरूप, नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (2021) औद्योगिक मंजूरियों को आसान बनाता है।
    • यह मंत्रालय भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने में केंद्रीय है।

28. जन-धन योजना कब शुरू की गई थी? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) 2014
Solution:
  • प्रधानमंत्री जन-धन योजना 28 अगस्त, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई थी।
  • यह एक राष्ट्रीय मिशन है, जिसका उद्देश्य प्रेक्षण, क्रेडिट, बीमा, पेंशन, बैंकिंग बचत और जमा खातों सहित विभिन्न वित्तीय सेवाओं तक पहुंच प्रदान करना है।
  • योजना का उद्देश्य
    • यह वित्त मंत्रालय के अधीन विश्व की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन योजना है, जो हर परिवार को बैंकिंग सुविधा प्रदान करने पर केंद्रित है।
    • इसका लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, विशेषकर ग्रामीण और शहरी गरीबों को बैंक खाता
    • रुपे डेबिट कार्ड, 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा, 30,000 रुपये का जीवन बीमा (15 अगस्त 2014 से 26 जनवरी 2015 के बीच खोले खातों के लिए), और 10,000 रुपये तक का ओवरड्राफ्ट सुविधा देना था।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • शून्य बैलेंस खाता: कोई न्यूनतम शेष राशि की आवश्यकता नहीं।
    • रुपे कार्ड: प्रत्येक खाताधारक को मुफ्त डेबिट कार्ड।
    • बीमा कवर: पहले 6 महीने सक्रिय खाते पर ओवरड्राफ्ट और RDSP (RuPay Debit Card आधारित) सुविधाएँ।
    • JAM ट्रिनिटी: जन धन-आधार-मोबाइल से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को मजबूत बनाना।
  • उपलब्धियाँ (जनवरी 2026 तक)
    • 53 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले गए, जिनमें 55% महिलाओं के हैं।
    • 35 करोड़ रुपये की जमा राशि, जो गरीबों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ती है।
    • 2024 में 10 वर्ष पूरे होने पर PM मोदी ने इसे "वित्तीय समावेशन का मील का पत्थर" बताया
    • 2025 तक 11 वर्ष पूर्ण, जिसमें UPI लिंकेज से डिजिटल लेन-देन बढ़ा।​
  • प्रभाव और विस्तार
    • योजना ने DBT के माध्यम से 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ पहुँचाया, जिसमें PM-KISAN, MGNREGA जैसी स्कीम शामिल हैं।
    • ग्रामीण क्षेत्रों में 1 लाख ग्राम पंचायतों तक बैंकिंग पहुँची। 2025-26 में KYC अपडेट कैंप चलाए गए
    • लाभ持续 रहे। यह गरीबी उन्मूलन और आत्मनिर्भर भारत का आधार बनी।​