प्रमुख व्यक्तित्व (परम्परागत सामान्य ज्ञान) भाग-I

Total Questions: 30

1. निम्नलिखित में से किसे व्यापक रूप से संगीत, नाट्य प्रदर्शन, भाषा और 'सत्रिया' नृत्य के नए रूपों को पेश करने का श्रेय दिया जाता है? [MTS (T-I) 19 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) श्रीमंत शंकरदेव
Solution:
  • श्रीमंत शंकरदेव को व्यापक रूप से संगीत, नाट्य प्रदर्शन, भाषा और 'सत्रिया' नृत्य के नए रूपों को पेश करने का श्रेय दिया जाता है।
  • श्रीमंत शंकर देव एक प्रसिद्ध संत-विद्वान, कवि, नाटककार, नर्तक, सामाजिक-धार्मिक सुधारक थे।
  • शंकरदेव का जीवन परिचय
    • श्रीमंत शंकरदेव का जन्म 1449 ईस्वी में असम के नौग्रांगा के बटद्रवा गांव में हुआ था। वे बचपन से ही विद्वान और धार्मिक प्रवृत्ति के थे
    • जिन्होंने वैष्णव भक्ति को असम में फैलाने के लिए नव-वैष्णव धर्म या एकाशरण धर्म की स्थापना की।
    • उन्होंने जाति-भेदभाव को नकारते हुए सभी को भक्ति मार्ग में शामिल करने पर जोर दिया और असम की संस्कृति को नई दिशा प्रदान की।
    • उनका निधन 1568 ईस्वी में हुआ, लेकिन उनकी रचनाएं आज भी असमिया साहित्य और कला का आधार हैं।
  • सत्रिया नृत्य का विकास
    • शंकरदेव ने 15वीं शताब्दी में सत्रिया नृत्य की रचना की, जो भारत के आठ शास्त्रीय नृत्य रूपों में सबसे नया है
    • 2000 में संगीत नाटक अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त हुआ। यह नृत्य असम के सत्रों (वैष्णव मठों) में विकसित हुआ
    • जहां इसे भगवान कृष्ण और राम की कथाओं के माध्यम से भक्ति व्यक्त करने के लिए इस्तेमाल किया गया।
    • सत्रिया में नृत्ता (शुद्ध नृत्य), नृत्य (अभिव्यंजक नृत्य) और नाट्य (नाटकीय अभिनय) के तत्व शामिल हैं
    • जो देवदासी नृत्य, असमी लोक नृत्यों जैसे बिहू और बोडो से प्रभावित हैं।
    • उन्होंने इसे 'अंकिया नाट' के साथ जोड़ा, जो एक प्रकार का एकांकी नाटक था, जिसमें नृत्य संगत के रूप में सत्रिया प्रस्तुत होता था।
  • संगीत और नाट्य में योगदान
    • शंकरदेव ने भक्ति प्रचार के लिए बोरगीत (भक्ति गीत) रचे, जो असमिया संगीत की नींव बने।
    • उन्होंने अंकिया नाट का आविष्कार किया, जो संगीत, नृत्य और नाट्य का संयोजन था
    • जिसमें स्थानीय भाषा में व्याख्या शामिल होती थी। ये नाटक सत्रों में मंचित होते थे
    • वैष्णव मूल्यों को सरलता से समझाने का माध्यम बने। उनके नाट्यशास्त्र ने असम में नाट्य परंपरा को नया आयाम दिया
    • जो नाट्यशास्त्र की परंपरा से प्रेरित था लेकिन स्थानीय तत्वों से भरपूर था।
  • भाषा और साहित्यिक नवाचार
    • शंकरदेव ने असमिया भाषा को समृद्ध किया और इसे धार्मिक-सांस्कृतिक माध्यम बनाया।
    • उन्होंने किर्तन घोसा, भक्ति रत्न जैसे ग्रंथ लिखे, जो भक्ति काव्य के नए रूप थे।
    • उनकी रचनाओं ने असमिया को एक साहित्यिक भाषा का दर्जा दिया
    • लोक भाषा में भक्ति को पहुंचाया, जो उस समय की संस्कृत-प्रधान परंपरा से अलग था।
  • आधुनिक प्रभाव और विरासत
    • आज सत्रिया नृत्य वैश्विक मंचों पर प्रदर्शित होता है, जिसमें समकालीन विषयों और अन्य शैलियों के साथ प्रयोग हो रहे हैं।
    • शंकरदेव की देन ने असम की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत किया, और उनके अनुयायी जैसे माधवदेव ने इसे आगे बढ़ाया।
    • सत्रिया अब पुरुषों (सत्रिया), महिलाओं (सत्रिया नृत्य) और मिश्रित रूपों में विकसित हो चुका है।

2. किसने भारत के पंजाब में भगवान के निरंकार (निराकार) रूप की पूजा को बढ़ावा दिया? [MTS (T-I) 17 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) बाबा दयाल सिंह
Solution:
  • बाबा दयाल सिंह को भारत के पंजाब में भगवान के निरंकार (निराकार) रूप की पूजा को बढ़ावा दिया।
  • बाबा दयाल एक गैर-खालसा, सहजधारी सिख सुधारक थे, जिनका मुख्य उद्देश्य सिखों को आदि ग्रंथ और सिमरन में वापस लाना था।
  • निरंकारी आंदोलन का उद्भव
    • उस समय पंजाब में मूर्ति पूजा, तीर्थयात्रा और बाहरी कर्मकांडों का प्रचलन बढ़ गया था
    • जिसके खिलाफ उन्होंने निराकार भगवान की शुद्ध भक्ति को पुनर्जीवित किया।
    • 1851 में उन्होंने निरंकारी आंदोलन की औपचारिक शुरुआत की, जिसका अर्थ है "निरंकार की प्राप्ति करने वाले"।
  • बाबा दयाल दास के योगदान
    • बाबा दयाल दास ने सिखों को मूर्तिपूजा और अवतारवाद से दूर कर निरंकार ईश्वर की एकाग्रचित उपासना सिखाई।
    • उनका मुख्य संदेश था: "निरंकार की भक्ति ही सच्ची भक्ति है, बिना रूप के भगवान का सिमरन करो"
    • उन्होंने सादगी, समानता और आध्यात्मिक शुद्धता पर बल दिया।
    • उनके अनुयायी रावलपिंडी से पंजाब के विभिन्न भागों में फैले, विशेषकर अमृतसर और लाहौर क्षेत्र में।
    • आंदोलन ने सामाजिक सुधारों को भी बढ़ावा दिया, जैसे जाति भेदभाव का अंत और महिलाओं की समानता।
  • आंदोलन का विकास और उत्तराधिकारी
    • बाबा दयाल दास के निधन (लगभग 1855) के बाद उनके पुत्र बाबा दरबार सिंह ने नेतृत्व संभाला।
    • फिर बाबा भाग सिंह ने आंदोलन को मजबूत किया। 20वीं शताब्दी में यह दो धाराओं में विभाजित हो गया:
    • निरंकारी मंडल: पारंपरिक निरंकारी समूह।
    • संत निरंकारी मिशन: 1929 में बाबा बूटा सिंह द्वारा स्थापित, जो अधिक व्यापक और आधुनिक रूप ले चुका।
    • इसमें बाद के नेताओं जैसे बाबा अवतार सिंह, बाबा गुरबचन सिंह और बाबा हरदेव सिंह ने निरंकार भक्ति को वैश्विक स्तर पर फैलाया।
    • आज यह मिशन मानवता सेवा और सार्वभौमिक भाईचारे पर केंद्रित है।
  • सिख धर्म से संबंध और विवाद
    • निरंकार पूजा सिख गुरुओं की मूल शिक्षा (जैसे गुरु नानक देव द्वारा प्रतिपादित निराकार वाहेगुरु) से प्रेरित है
    • लेकिन आंदोलन ने मूर्ति पूजा के खिलाफ कट्टर रुख अपनाया। इससे कुछ सिख समूहों के साथ विवाद हुए
    • विशेषकर 1970 के दशक में हिंसक घटनाएं। फिर भी, यह आंदोलन पंजाब में आध्यात्मिक जागरण का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
    • निरंकार शब्द संस्कृत से लिया गया है, अर्थात् "बिना रूप का", जो आंतरिक भक्ति पर जोर देता है।
  • वर्तमान स्थिति
    • आज पंजाब में निरंकारी अनुयायी लाखों में हैं। \
    • वे सत्संग, नाम चर्चा और सेवा कार्यों के माध्यम से निरंकार भक्ति फैलाते हैं।
    • संत निरंकारी मिशन के वर्तमान प्रमुख माता सुदीक्षा जी हैं।
    • यह आंदोलन सिख धर्म को शुद्ध बनाने का प्रयास था, जो आज भी प्रासंगिक है।

3. भारत में 'द मोजार्ट ऑफ मद्रास' (The Mozart of the Madras) के नाम से किसे जाना जाता है? [MTS (T-I) 11 मई, 2023 (II-पाली), MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) ए.आर. रहमान
Solution:
  • ए.आर. रहमान भारतीय फिल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार हैं।
  • इन्होंने मुख्य रूप से हिंदी और तमिल फिल्मों में संगीत दिया है। इन्हें 'द मोजार्ट ऑफ मद्रास' के नाम से भी जाना जाता है।
  • प्रारंभिक जीवन
    • उनके पिता आर.के. शेखर मलयालम फिल्मों के संगीतकार थे
    • जिनकी असमय मृत्यु के बाद परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
    • चार वर्ष की आयु से ही रहमान ने पियानो बजाना सीखा और 11 वर्ष की उम्र में ही वे प्रोफेशनल रूप से कीबोर्ड बजाने लगे।
    • 1988 में उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया और अपना नाम बदलकर अल्लाह रक्खा रहमान रख लिया।
  • संगीतमय यात्रा की शुरुआत
    • स्कूल छोड़ने के बाद रहमान ने लंदन के ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ म्यूजिक से वेस्टर्न क्लासिकल म्यूजिक में डिप्लोमा प्राप्त किया।
    • उन्होंने जिंगल्स और विज्ञापनों के लिए संगीत बनाना शुरू किया, जो उन्हें इलेक्ट्रॉनिक संगीत और सिंथेसाइजर की दुनिया से परिचित कराया।
    • 1992 में मणि रत्नम की तमिल फिल्म 'रोजा' से उनका फिल्म संगीत में डेब्यू हुआ, जिसने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
  • 'मोजार्ट ऑफ मद्रास' उपाधि का कारण
    • टाइम्स पत्रिका ने उन्हें 'मोजार्ट ऑफ मद्रास' कहा क्योंकि उनकी रचनाएँ वोल्फगैंग अमादेउस मोजार्ट की तरह जीनियस, बहुमुखी और भावपूर्ण हैं।
    • रहमान भारतीय शास्त्रीय संगीत को इलेक्ट्रॉनिक, वर्ल्ड म्यूजिक और ऑर्केस्ट्रल अरेंजमेंट्स के साथ मिश्रित करते हैं
    • जिससे फिल्म संगीत को नया आयाम मिला।
    • वे खुद को तमिल में 'इसाई पुइयल' (संगीत तूफान) कहना पसंद करते हैं।
  • प्रमुख उपलब्धियाँ
    • रहमान ने तमिल, हिंदी और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में 100 से अधिक साउंडट्रैक दिए।
    • 2008 की फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के लिए उन्हें दो ऑस्कर (बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग और बेस्ट ओरिजिनल स्कोर), गोल्डन ग्लोब, बाफ्टा और दो ग्रैमी अवॉर्ड मिले—ये पहले भारतीय थे
    • जिन्हें यह सम्मान मिला। अन्य पुरस्कारों में पद्म भूषण, पद्म श्री, 6 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और कई फिल्मफेयर शामिल हैं।
  • प्रमुख फिल्में और योगदान
    • तमिल हिट्स: 'रोजा', 'कझल', 'बॉम्बे', 'जोरू'।
    • हिंदी ब्लॉकबस्टर्स: 'रंगीला', 'दिल से', 'लगान', 'जोधा अकबर', 'रॉकेट सिंह'।
    • अंतरराष्ट्रीय: 'स्लमडॉग मिलियनेयर', '127 आवर्स', 'मिलियन डॉलर आर्म'।
    • उनकी धुनें करोड़ों दिलों को छूती हैं और भारतीय सिनेमा को वैश्विक पटल पर ले गईं।
  • व्यक्तिगत जीवन और विरासत
    • रहमान चेन्नई में रहते हैं, दो बेटियों और एक बेटे के पिता हैं।
    • वे कुष्ठ रोग उन्मूलन और शिक्षा के लिए सन म्यूजिक फाउंडेशन चलाते हैं।
    • 2026 तक उनकी विरासत बरकरार है, जो नई पीढ़ी को प्रेरित करती रहती है।

4. लता मंगेशकर ने एक ....... फिल्म के लिए अपना पहला पार्श्व गीत रिकॉर्ड किया। [MTS (T-I) 11 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) मराठी
Solution:
  • लता मंगेशकर ने एक मराठी फिल्म के लिए अपना पहला पार्श्व गीत रिकॉर्ड किया।
  • लता मंगेशकर भारत की सबसे लोकप्रिय गायिका थीं। भारत सरकार द्वारा उन्हें 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था।
  • फिल्म और गाने का विवरण
    • यह फिल्म 1942 में रिलीज़ हुई थी, जब लता मंगेशकर मात्र 13 वर्ष की थीं।
    • गाने के बोल थे "नाचू या गाडे, खेलू सारी मणी हौस भारी" (Naachu Yaa Gade, Khelu Saari Mani Haus Bhaari), जिसकी संगीत रचना सदाशिवराव नेवरेकर या मास्टर विनायक ने की थी
    • गीत डी.एन. मधोक ने लिखे थे। हालांकि, यह गाना फिल्म के अंतिम संस्करण में शामिल नहीं किया गया, इसलिए कभी सार्वजनिक रूप से रिलीज़ नहीं हुआ।​
  • लता के शुरुआती करियर की पृष्ठभूमि
    • लता का जन्म 28 सितंबर 1929 को मध्य प्रदेश के इंदौर में एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
    • उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर प्रसिद्ध थिएटर अभिनेता और शास्त्रीय गायक थे।
    • मात्र 5 वर्ष की उम्र से लता ने अपने पिता से संगीत प्रशिक्षण शुरू किया और बचपन में ही मराठी नाटकों व फिल्मों में अभिनय करने लगीं, जैसे मंगला गौर (1942) और गजभाऊ (1943)।
    • 1942 में मास्टर विनायक (जिन्हें लता गुरु मानती थीं) ने उन्हें यह पहला पार्श्व गायन का मौका दिया।
  • पहला रिलीज़ गाना और हिंदी में प्रवेश
    • हालांकि "किती हसाल" का गाना रिलीज़ नहीं हुआ, लता का पहला रिलीज़ पार्श्व गीत उसी दौर की एक अन्य मराठी फिल्म में माना जाता है।
    • 1943 में मराठी फिल्म गजभाऊ के लिए उनका पहला हिंदी गीत "माता एक सपूत की दुनिया बदल दे तू" रिकॉर्ड हुआ।
    • असल हिंदी फिल्मों में उनका ब्रेकआउट 1946-47 में आया, जैसे फिल्म "आपकी सेवा में" का गाना "पां लगूं कर जोरी"।
    • 1948 में "मजबूर" फिल्म का "दिल मेरा तोड़ा है" उनका पहला बड़ा हिट गाना बना, जिसकी धुन रेलवे स्टेशन पर गुलाम हैदर ने बनाई।
  • लता के योगदान का महत्व
    • लता ने 6 दशकों में 30,000 से अधिक गाने हिंदी, मराठी, बंगाली समेत कई भाषाओं में गाए
    • जिससे वे "नाइटिंगेल ऑफ इंडिया" बनीं। उन्हें 2001 में भारत रत्न मिला।
    • उनका पहला गीत न रिलीज़ होने के बावजूद उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है
    • जो बाद में भारतीय सिनेमा को हमेशा बदल गया।
    • यह शुरुआत महाराष्ट्र के सिनेमा जगत से हुई, जो उनकी मातृभाषा मराठी से जुड़ी थी।

5. निम्नलिखित भारतीय नर्तकियों में से कौन भारतीय इतिहास की पहली महिला थीं, जिन्हें राज्य सभा के सदस्य के रूप में नामित किया गया था? [MTS (T-I) 06 जुलाई, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) रुक्मिणी देवी अरुंडेल
Solution:
  • भारतीय नर्तकियों में से एक रुक्मिणी देवी अरुंडेल भारतीय इतिहास की पहली महिला थीं
  • जिन्हें राज्य सभा के सदस्य के रूप में नामित किया गया था। उनका कार्यकाल वर्ष 1952- 1962 तक था।
  • जीवन परिचय
    • रुक्मिणी देवी अरुंडेल का जन्म 29 फरवरी 1904 को तमिलनाडु के मदुरै में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
    • बचपन से ही संगीत और कला के प्रति आकर्षित, वे थियोसोफिकल सोसाइटी से जुड़ीं और एनी बेसेंट से प्रेरित हुईं।
    • 1920 के दशक में उन्होंने भरतनाट्यम सीखा, जब यह नृत्य देवदासियों से जुड़ा माना जाता था
    • समाज में कलंकित था। उन्होंने इसे शास्त्रीय रूप प्रदान कर पुनर्जीवित किया।
  • नृत्य में योगदान
    • रुक्मिणी देवी ने 1930 के दशक में भरतनाट्यम को मंचीय रूप दिया, जो पहले मंदिरों तक सीमित था।
    • 1933 में उन्होंने कलाक्षेत्र फाउंडेशन की स्थापना की, जो चेन्नई में नृत्य, संगीत और कला का प्रमुख केंद्र बना।
    • उन्होंने नृत्य में भक्ति भावना जोड़ी और इसे सम्मानजनक बनाया। उनके प्रयासों से भरतनाट्यम वैश्विक पहचान पाया।
  • राज्यसभा सदस्यता
    • 1952 में राज्यसभा की पहली बैठक के समय वे 216 सदस्यों में एकमात्र नामित महिला थीं।
    • उनका कार्यकाल 1952 से 1962 तक रहा, जिसमें 1956 में पुनर्नामांकन हुआ।
    • नामांकन नृत्य, पशु कल्याण और शिक्षा के क्षेत्रों में योगदान के लिए था। राज्यसभा में वे कला संरक्षण पर सक्रिय रहीं।​
  • सम्मान और विरासत
    • उन्हें 1956 में पद्म भूषण और 1967 में संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप मिली। वे पशु अधिकारों की प्रणेता भी थीं
    • जिन्होंने वन्यजीव संरक्षण में योगदान दिया। 24 फरवरी 1986 को उनका निधन हुआ, लेकिन कलाक्षेत्र आज भी उनकी विरासत जीवित रखता है।

6. निम्नलिखित में से 1952 में केरल कलालयम के संस्थापकों में से एक कौन थे? [CHSL (T-I) 08 जून, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा
Solution:
  • कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा वर्ष 1952 में केरल कलालयम के संस्थापकों में से एक थीं। वह मोहिनीअट्टम नृत्यांगना थीं।
  • संस्थापना का विवरण
    • केरल कलालयम, जिसे कल्याणी कृष्णा फाइन आर्ट्स अकादमी के नाम से भी जाना जाता है
    • स्थापना 1952 में इरिन्जालाकुड़ा, त्रिशूर (केरल) में हुई थी।
    • इसके मुख्य संस्थापक पद्मश्री कलामंडलम कृष्णन नायर (कथकली विशेषज्ञ) और कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा (मोहिनीअट्टम नृत्यांगना) थे।
    • यह संस्थान केरल की पारंपरिक कलाओं जैसे मोहिनीअट्टम, कथकली आदि को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था।
  • कल्याणीकुट्टी अम्मा का योगदान
    • कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा का जन्म केरल के मलप्पुरम जिले के थिरुनावाया में हुआ था।
    • उन्होंने मोहिनीअट्टम नृत्य को, जो लगभग लुप्त हो चुका था
    • पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसे भारतीय शास्त्रीय नृत्य के मुख्य धारे में ला दिया।
    • उन्होंने "मोहिनीअट्टम - हिस्टरी एंड डांस स्ट्रक्चर" नामक पुस्तक लिखी, जो इस नृत्य पर प्रामाणिक दस्तावेज है
    • 1997-98 में कालिदास सम्मान से सम्मानित हुईं।
    • इसके अलावा, उन्होंने मोहिनीअट्टम को भारत के बाहर भी लोकप्रिय बनाया।

7. प्रसिद्ध लोक संगीतकार भूपेन हजारिका निम्नलिखित में से किस राज्य से संबंधित हैं? [CHSL (T-I) 02 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) असम
Solution:
  • प्रसिद्ध लोक संगीतकार भूपेन हजारिका असम राज्य से संबंधित थे।
  • उन्हें वर्ष 2019 में मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • इनके अलावा वर्ष 2019 में नानाजी देशमुख (मरणोपरांत) और प्रणब मुखर्जी को भी भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • जन्म और प्रारंभिक जीवन
    • भूपेन हजारिका का जन्म 8 सितंबर 1926 को असम के तिनसुकिया जिले के सदिया गांव में हुआ था।
    • वे अपने माता-पिता नीलकंठ और शांतिप्रिया हजारिका के दस बच्चों में सबसे बड़े थे।
    • उनके पिता मूल रूप से शिवसागर जिले के नाजिरा शहर से थे
    • लेकिन परिवार 1929 में गुवाहाटी के भारलुमुख क्षेत्र में बस गया, जहां उनका बचपन बीता।
    • उनकी मां ने उन्हें असमिया पारंपरिक गीतों की शिक्षा दी, जो उनके संगीत सफर की नींव बनी।
    • बचपन से ही प्रतिभाशाली, वे 10 वर्ष की आयु में असमिया गीत गाते थे और बाद में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ाई की।​
  • संगीत और सांस्कृतिक योगदान
    • हजारिका को 'सुधा कोंथो' (अमृत गला) के नाम से जाना जाता है।
    • उन्होंने असम, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में सांप्रदायिक सौहार्द, न्याय और सहानुभूति पर आधारित गीत रचे, जो लोकप्रिय हुए।​
    • वे स्वयं गीत लिखते, संगीत देते और गाते थे। असमिया भाषा के पुरोधा के रूप में उन्होंने दर्जनों फिल्में बनाईं
    • जैसे 'একাঘরে একाघার'। उनके गीत ब्रह्मपुत्र नदी और पूर्वोत्तर की प्रकृति से प्रेरित थे।
    • उनके प्रसिद्ध गीतों में 'বিটা লৈ সেই চিন্তা পথাৰত', 'গৰঞ্চীয়া নৰীয়া' आदि शामिल हैं, जो असम की विविधता को दर्शाते हैं।​
  • पुरस्कार और सम्मान
    • भूपेन हजारिका को पद्मभूषण, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और 2019 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। यह पूर्वोत्तर के कलाकार को मिला पहला भारत रत्न था।
    • उनकी स्मृति में असम-अरुणाचल प्रदेश को जोड़ने वाले सबसे लंबे पुल का नाम 'भूपेन हजारिका सेतु' रखा गया, जो यात्रा समय को चार घंटे कम करता है।
    • 2025 में गुवाहाटी में उनकी 100वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई, जिसमें प्रधानमंत्री ने उनकी राष्ट्रभक्ति की सराहना की।​
  • निधन और विरासत
    • वे 5 नवंबर 2011 को मुंबई में निधन हो गया। उनकी विरासत पूर्वोत्तर की एकता और विकास से जुड़ी है।​
    • आज भी उनके गीत असम की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं, और वे भारत की कल्चरल कनेक्टिविटी के प्रतीक हैं।​

8. निम्नलिखित में से कौन एक प्राचीन भारतीय गणितज्ञ - खगोलविद थे? [CGL (T-I) 20 अप्रैल, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) वराहमिहिर
Solution:
  • वराहमिहिर एक प्राचीन भारतीय गणितज्ञ खगोलविद थे।
  • आर्यभट्ट का जीवन परिचय
    • आर्यभट्ट का जन्म 476 ईस्वी में अश्मक (आधुनिक महाराष्ट्र या आंध्र प्रदेश) में हुआ था
    • उनका निधन 550 ईस्वी के आसपास कुसुमपुर (आधुनिक पटना) में हुआ।
    • वे गुप्त काल के स्वर्णिम युग के प्रतिनिधि थे, जब भारतीय विज्ञान चरम पर था।
    • उनकी मुख्य कृति आर्यभटीय है, जिसमें गणित, त्रिकोणमिति और खगोल विज्ञान के सिद्धांत वर्णित हैं।
    • आर्यभट्ट की यह मूर्ति उनके वैज्ञानिक व्यक्तित्व को दर्शाती है।
  • गणितीय योगदान
    • आर्यभट्ट ने शून्य की अवधारणा को स्पष्ट किया और π (पाई) का मान 3.1416 के रूप में दिया
    • जो आधुनिक मान से बहुत सटीक था। उन्होंने दशमलव स्थानिक मान प्रणाली का उपयोग किया
    • साइन (jya) फलन की तालिका तैयार की, जो त्रिकोणमिति की नींव बनी। उनके सूत्र आज भी ग्रहण गणना और ज्योतिष में प्रासंगिक हैं।​
  • खगोलीय खोजें
    • आर्यभट्ट ने घोषणा की कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, जिससे दिन-रात होते हैं
    • यह विचार कोपरनिकस से 1000 वर्ष पूर्व का था।
    • उन्होंने सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के वैज्ञानिक कारण बताए, राहु-केतु जैसे अंधविश्वासों को चुनौती दी।
    • ग्रहों की गति, दूरी और कक्षाओं की सटीक गणना उनके ग्रंथों में मिलती है।​
  • अन्य प्रमुख गणितज्ञ-खगोलविद
    • वराहमिहिर (6ठी शताब्दी) भी एक प्रसिद्ध खगोलशास्त्री और गणितज्ञ थे
    • जिन्होंने पंचसिद्धांतिका में पांच सिद्धांतों का संकलन किया।
    • ब्रह्मगुप्त (598 ई.) ने शून्य और ऋणात्मक संख्याओं पर कार्य किया तथा ब्रह्मस्फुटसिद्धांत में खगोलीय गणनाएं दीं।
    • हालांकि, प्रश्न के संदर्भ में आर्यभट्ट सबसे प्रतिनिधि नाम हैं।
  • वैश्विक प्रभाव
    • आर्यभट्ट के विचार मध्य पूर्व और यूरोप पहुंचे, जहां अरब विद्वानों ने उन्हें अपनाया।
    • भारत में भास्कराचार्य, केरल गणित स्कूल और जयसिंह की वेधशालाओं ने उनके सिद्धांतों को आगे बढ़ाया।
    • उनके कार्य ने आधुनिक गणित-खगोल की नींव रखी।​

9. ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे स्वशासित उपनिवेशों के मॉडल पर ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर 'स्वराज्य' या स्वशासन के दावे को 1905 में उठाया था। [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) गोपाल कृष्ण गोखले
Solution:
  • वर्ष 1905 में कांग्रेस के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले ने ऑस्ट्रेलिया और कनाडा
  • जैसे स्वशासित उपनिवेशों के मॉडल पर ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर 'स्वराज्य' या स्वशासन के दावे को कांग्रेस के मंच से सामने रखा था।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • ब्रिटिश भारत में स्वशासन की अवधारणा का विकास धीरे-धीरे हुआ। 19वीं सदी के अंत तक कांग्रेस उदारवादी चरण में थी
    • जो प्रशासनिक सुधारों, विधायी परिषदों में भारतीय प्रतिनिधित्व और सिविल सेवा में समान अवसरों की मांग करती थी।
    • इस संदर्भ में स्वराज्य की मांग ब्रिटिश साम्राज्य के ढांचे में ही पूर्ण स्वतंत्रता से अलग, स्वशासित उपनिवेशों जैसी स्थिति की ओर इशारा करती थी।
    • ऑस्ट्रेलिया (1901 में फेडरेशन के बाद स्वशासित) और कनाडा (1867 के बाद डोमिनियन) ऐसे उदाहरण थे
    • जहां व्हाइट सेटलर उपनिवेशों को ब्रिटिश क्राउन के अधीन स्वशासन मिला था।
  • दावा किसने उठाया
    • दादाभाई नौरोजी, जिन्हें 'ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया' कहा जाता है, ने इस दावे को कांग्रेस के मंच से प्रमुखता से प्रस्तुत किया।
    • वे 1906 के कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन के अध्यक्ष बने, जहां स्वराज्य प्रस्ताव पारित हुआ। हालांकि प्रश्न 1905 का उल्लेख करता है
    • कई ऐतिहासिक संदर्भों में यह 1905-06 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान कांग्रेस सभाओं में उठा।
    • नौरोजी ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को यूनाइटेड किंगडम या उसके स्वशासित उपनिवेशों जैसा स्वशासन मिलना चाहिए।
    • कुछ स्रोत लाला लाजपत राय का भी नाम लेते हैं, लेकिन मुख्य स्रोत नौरोजी को श्रेय देते हैं।
    • यह मांग गरम दल (तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल) और उदारवादियों के बीच समझौते का प्रतीक बनी।
  • स्वराज्य प्रस्ताव का महत्व
    • कलकत्ता अधिवेशन (दिसंबर 1906) में स्वराज्य को कांग्रेस का औपचारिक लक्ष्य बनाया गया।
    • प्रस्ताव में कहा गया: "भारत को ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर स्वशासित उपनिवेशों जैसा स्वराज प्राप्त हो।
    • यह पहले की मांगों (जैसे मॉन्टफोर्ड सुधारों तक सीमित) से बड़ा बदलाव था।
    • स्वराज दो प्रकार का था- पूर्ण (गांधीजी द्वारा बाद में परिभाषित) और साम्राज्यिक (डोमिनियन स्टेटस)।
    • इसने कांग्रेस को जन-आंदोलन की ओर मोड़ा, स्वदेशी और बॉयकॉट को बढ़ावा दिया।
    • बंगाल विभाजन 1911 में रद्द हुआ, लेकिन स्वराज्य की मांग आगे बढ़ी।​
  • प्रभाव और विकास
    • राजनीतिक ध्रुवीकरण: इस दावे ने कांग्रेस में उदारवादी (गोखले) और उग्रवादी (तिलक) विभाजन को तेज किया। सूरत अधिवेशन (1907) में फूट पड़ी।
    • ब्रिटिश प्रतिक्रिया: ब्रिटिश सरकार ने इसे खारिज किया, क्योंकि भारत को 'उन्नत' उपनिवेशों जैसा नहीं माना। इससे मोर्ले-मिंटो सुधार (1909) आए, जो सीमित प्रतिनिधित्व देते थे।
    • दीर्घकालिक प्रभाव: यह लकीरूहुड समझौते (1916), होम रूल लीग (1916) और गांधीजी के असहयोग आंदोलन (1920) तक स्वराज की नींव बनी।
    • 1935 के भारत सरकार अधिनियम ने प्रांतीय स्वायत्तता दी, लेकिन पूर्ण डोमिनियन स्टेटस 1947 में मिला।​

10. निम्नलिखित में से किस गीत की रचना प्रसिद्ध भारतीय संगीतकार राहुल देव बर्मन ने की थी ? [MTS (T-I) 03 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे
Solution:
  • दिए गए विकल्पों में से प्रसिद्ध गीत 'ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे' के रचनाकार प्रसिद्ध भारतीय संगीतकार राहुल देव बर्मन (आर. डी. बर्मन) थे।
  • आर.डी. बर्मन का उपनाम 'पंचमदा' था। वे प्रसिद्ध संगीतकार सचिन देव बर्मन के बेटे थे।
  • आर.डी. बर्मन का प्रारंभिक सफर
    • आर.डी. बर्मन ने मात्र 9 साल की उम्र में अपना पहला गीत "ऐ मेरी टोपी पलट के आ" तैयार किया, जिसे उनके पिता ने 1956 की फिल्म 'फंटूश' में इस्तेमाल किया।
    • इसी तरह, "सर जो तेरा चकराए" (फिल्म 'प्यासा', 1957) की धुन भी उन्होंने बचपन में बनाई थी।
    • आधिकारिक रूप से उनका पहला संगीत निर्देशन 1959 की फिल्म 'राज' से हुआ
    • लेकिन 1960-70 के दशक में वे स्टार बने। उन्होंने कुल 331 फिल्मों में संगीत दिया
    • जिसमें हिंदी के अलावा बंगाली, तमिल आदि भाषाओं के गीत भी शामिल हैं।
  • प्रमुख हिट गीत और फिल्में
    • आर.डी. बर्मन के गीतों ने पश्चिमी, अफ्रीकी और भारतीय शास्त्रीय संगीत का मिश्रण किया, जो आज भी लोकप्रिय हैं। यहाँ कुछ चुनिंदा उदाहरण हैं:
    • पिया तू अब तो आजा (फिल्म 'कारवाँ', 1971): आशा भोंसले की आवाज में यह कैबरे गीत हेलन के लिए बना, जो बिनाका गीतमाला में टॉप पर रहा। इसने कैबरे को श्रवणीय बनाया।​
    • चिंगारी कोई भड़के और कुछ तो लोग कहेंगे (फिल्म 'अमर प्रेम', 1972): गुलजार के बोल और किशोर कुमार की गायकी ने इन्हें अमर बना दिया। ये गीत उनकी सफलता के प्रतीक बने।​
    • महबूबा महबूबा (फिल्म 'शोले', 1975): रेहाना की आवाज में यह गीत अफ्रीकी प्रभाव वाला था और डिस्को संस्कृति का प्रतीक बना।​
    • जिस गली में तेरा घर (फिल्म 'कटी पतंग', 1971): मुकेश और लता मंगेशकर की जोड़ी ने इसे अविस्मरणीय बनाया।​
    • आँखों में क्या जी (फिल्म 'फंटूश'): पिता के नाम से रिलीज हुआ, लेकिन उनकी रचना थी।​
  • गायकों के साथ सहयोग
    • आर.डी. ने आशा भोंसले (अपनी पत्नी) के साथ 200+ गीत बनाए, जिनमें कैबरे जैसे "आज की रात कोई आने को है
    • ('अनामिका', 1973) शामिल हैं। किशोर कुमार के साथ उनकी जोड़ी लीजेंड्री थी
    • "मेरे सैंया जी उतरेंगे गाड़ी में" ('पति पत्नी और वो')।
    • लता मंगेशकर के लिए "कहीं करती होगी वो मेरा इंतजार" ('फिर कब मिलोगी') जैसा स्पेनिश प्रभाव वाला गीत बनाया।
  • विरासत और प्रभाव
    • आर.डी. बर्मन का निधन 4 जनवरी 1994 को हुआ, लेकिन उनके गीत रीमिक्स के जरिए नई पीढ़ी तक पहुँचे।
    • उन्होंने गुलजार, जावेद अख्तर जैसे गीतकारों और जी.पी. सिप्पी, नासिर हुसैन जैसे निर्देशकों के साथ काम किया।
    • उनकी शैली ने बॉलीवुड को आधुनिक बनाया—माउथ ऑर्गन, कांगो बीट्स और वेस्टर्न बीट्स का प्रयोग आम किया।
    • आज फरवरी 2026 में भी उनके गीत जैसे "पिया तू..." स्पॉटिफाई पर करोड़ों बार बजते हैं।