प्रमुख व्यक्तित्व (परम्परागत सामान्य ज्ञान) भाग-II

Total Questions: 33

11. निम्नलिखित में से किसे ठुमरी की रानी (Queen of thumri) माना जाता था? [CHSL (T-I) 11 मार्च, 2023 (I-पाली), MTS (T-I) 02 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) गिरिजा देवी
Solution:
  • गिरिजा देवी को ठुमरी की रानी के नाम से भी जाना जाता है।
  • गिरिजा देवी सेनिया और बनारस घराने की एक प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय गायिका थीं।
  • ठुमरी गायन को लोकप्रिय बनाने में इनका बहुत बड़ा योगदान है।
  • जीवन परिचय
    • उन्होंने सेनिया और बनारस घरानों से प्रशिक्षण प्राप्त किया, विशेष रूप से पंडित सरजू प्रसाद मिश्र और श्रीचंद्र मिश्र जैसे गुरुओं से।
    • नौ वर्ष की आयु में ही उन्होंने संगीत की विभिन्न शैलियों को सीखना शुरू कर दिया और एक फिल्म 'याद रहे' में अभिनय भी किया।
    • उनकी खनकदार आवाज़ और बनारस के विशेष लहजे ने उनकी ठुमरी, कजरी, चैती तथा होली जैसी अर्द्ध-शास्त्रीय शैलियों को अनूठा बनाया।
    • समाज की बंदिशों के बावजूद, जहां उच्च वर्ग की महिलाओं को सार्वजनिक गायन की अनुमति नहीं थी, उन्होंने परिवार के विरोध का सामना किया और संगीत की राह चुनी।
  • ठुमरी से जुड़ाव
    • ठुमरी उत्तर भारत का लोकप्रिय हल्का शास्त्रीय गीत रूप है, जो 19वीं शताब्दी में लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह के दरबार में विकसित हुआ।
    • इसमें श्रृंगार रस की प्रधानता होती है, जहां राग की शुद्धता से अधिक भाव-सौंदर्य महत्वपूर्ण है।
    • गिरिजा देवी ने पूरबी अंग की ठुमरी शैली में अपनी प्रस्तुतियों से इस विधा को नई ऊंचाई दी और इसे शास्त्रीय मंचों पर स्थापित किया।
    • 1951 में बिहार के आरा में आयोजित संगीत सम्मेलन से उनका सार्वजनिक सफर शुरू हुआ।
    • इसके बाद पंडित रविशंकर, उस्ताद अली अकबर खान और उस्ताद विलायत खान जैसे दिग्गजों के समक्ष प्रदर्शन कर उन्होंने राष्ट्रीय पहचान बनाई।
    • 1952 में दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के सामने गायन ने उन्हें 'ठुमरी की रानी' का खिताब दिलाया।
    • यह तस्वीर गिरिजा देवी को भोपाल में तानपुरा वादक के साथ प्रदर्शन करते हुए दर्शाती है, जो उनकी मंचीय ऊर्जा को प्रतिबिंबित करती है।
  • उपलब्धियां और पुरस्कार
    • गिरिजा देवी ने न केवल प्रदर्शन किया बल्कि संगीत शिक्षा में भी योगदान दिया।
    • 1980 के दशक में कोलकाता के आईटीसी संगीत रिसर्च अकादमी में शिष्यों को प्रशिक्षित किया और काशी हिंदू विश्वविद्यालय से जुड़कर प्राचीन परंपराओं को संरक्षित किया।​

12. बिहार केसरी के नाम से किसे जाना जाता है? [CHSL (T-I) 09 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) श्री कृष्ण सिन्हा
Solution:
  • बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिंह को 'बिहार केसरी' के नाम से जाना जाता है।
  • अविभाजित बिहार के विकास में उनके अद्वितीय व अविस्मरणीय योगदान के लिए उन्हें आधुनिक बिहार के निर्माता के रूप में जाना जाता है।
  • प्रारंभिक जीवन
    • डॉ. श्रीकृष्ण सिंह का जन्म 21 अक्टूबर 1887 को बिहार के समस्तीपुर जिले के पितौंझिया गांव में एक भूस्वामी परिवार में हुआ था।
    • उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से विधि और कृषि विज्ञान में डिग्री प्राप्त की तथा डॉक्टरेट भी हासिल किया।
    • वे गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हुए।
  • स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
    • 1921 के असहयोग आंदोलन में भाग लेने पर उन्हें पहली बार गिरफ्तार किया गया, जब बिहारी नेताओं ने "बिहार केसरी" की उपाधि दी।​
    • 1930 में गढ़पुरा नमक सत्याग्रह के दौरान उन्होंने खौलते नमक के कढ़ाहे पर छाती रखकर अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।​
    • गांधीजी ने 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में उन्हें बिहार का पहला सत्याग्रही नियुक्त किया; कुल 7 बार जेल यात्राएं कीं।
  • राजनीतिक करियर
    • 1946 से 1961 तक (मृत्यु तक) वे बिहार के पहले मुख्यमंत्री रहे, साथ ही 1957-61 तक वित्त मंत्री भी।
    • वे डॉ. राजेंद्र प्रसाद और अनुग्रह नारायण सिन्हा के साथ आधुनिक बिहार के निर्माता माने जाते हैं।
    • श्री बाबू के नाम से भी प्रसिद्ध, उन्होंने विधान परिषद सदस्य से लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी महासचिव तक का पद संभाला।​
  • विकास कार्य
    • उनके शासन में जमींदारी प्रथा समाप्त हुई—भारत के पहले मुख्यमंत्री जिन्होंने यह कदम उठाया।
    • एशिया का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग उद्योग (HEC), बोकारो स्टील प्लांट, सिंदरी खाद कारखाना, बरौनी रिफाइनरी, मैथन हाइडेल आदि परियोजनाएं स्थापित हुईं।​
    • पहली पंचवर्षीय योजना में बिहार शीर्ष राज्य बना; बैद्यनाथ धाम में दलित प्रवेश सुनिश्चित किया।
  • सांस्कृतिक योगदान
    • राजेंद्र छात्र निवास (कलकत्ता), अनुग्रह नारायण सिन्हा इंस्टीट्यूट, बिहार संगीत नृत्य नाट्य परिषद, रविंद्र भवन, संस्कृत कॉलेज आदि संस्थान स्थापित करवाए।​
    • वे ईमानदारी के प्रतीक थे—मृत्यु पर साधारण कार्यकर्ता व नौकर के लिए धन छोड़ा।​
    • 31 जनवरी 1961 को पटना में उनका निधन हुआ।​

13. किसने 1998 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होने के बाद तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की और उसकी अध्यक्ष बन गईं? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) ममता बनर्जी
Solution:
  • ममता बनर्जी वर्ष 1998 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होने के पश्चात तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की और उसकी अध्यक्ष बन गईं।
  • वर्तमान समय में ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं।
  • स्थापना का पृष्ठभूमि
    • ममता बनर्जी लंबे समय से कांग्रेस की प्रमुख नेता थीं
    • लेकिन 1990 के दशक में पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) या सीपीआई(एम) के लाल राज के खिलाफ उनकी आक्रामक लड़ाई ने उन्हें अलग रास्ता चुनने के लिए मजबूर किया।
    • 1996-97 में उन्होंने कांग्रेस पर सीपीएम की कठपुतली होने का आरोप लगाया
    • जिसके बाद 1997 में वे पार्टी से अलग हो गईं। 1 जनवरी 1998 को दक्षिण कोलकाता के भवानी भवन में तृणमूल कांग्रेस की औपचारिक स्थापना हुई
    • जिसका नाम 'तृणमूल' (घास की जड़) जनता से जुड़ाव को दर्शाता है।
  • प्रारंभिक चुनौतियाँ और चुनावी सफर
    • पार्टी बनते ही 1998 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल ने 7 सीटें जीतीं, जबकि 1999 के चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन से यह संख्या 8 हो गई।
    • चुनाव आयोग ने पार्टी के प्रतीक 'जोरা घास फूल' (घास पर दो फूल) को मंजूरी दी
    • लेकिन शर्त रखी कि यदि वोट प्रतिशत 6% से कम रहा तो प्रतीक रद्द हो जाएगा—जिसे तृणमूल ने पार कर लिया।
    • 2000 में कोलकाता नगर निगम चुनाव जीतकर पार्टी ने मजबूती दिखाई
    • हालांकि 2001 विधानसभा चुनाव में हार मिली। ममता ने भूमि अधिग्रहण, नंदीग्राम और सिंगूर जैसे आंदोलनों से जनाधार बढ़ाया।
  • ममता बनर्जी की भूमिका
    • ममता बनर्जी, जिन्हें 'दीदी' कहा जाता है, पार्टी की संस्थापक, अध्यक्ष और रणनीतिकार रहीं।
    • 26 साल कांग्रेस में रहने के बाद उन्होंने तृणमूल को राष्ट्रीय स्तर का दल बनाया।
    • 2011 में वाम मोर्चा के 34 साल पुराने शासन को उखाड़ फेंककर पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।
    • 2009 से लोकसभा में चौथी सबसे बड़ी पार्टी (2024 में 29 सीटें) बन चुकी तृणमूल का श्रेय मुख्यतः उनकी अगुवाई को जाता है। 2016 में चुनाव आयोग ने इसे राष्ट्रीय दल का दर्जा दिया।
  • उपलब्धियाँ और विस्तार
    • तृणमूल ने 2011, 2016 और 2021 विधानसभा चुनाव जीते, साथ ही 2019 और 2024 लोकसभा में मजबूत प्रदर्शन किया।
    • पार्टी अब दिल्ली, झारखंड और असम में भी सक्रिय है।
    • ममता की छवि सादगी, जनसेवा और हिंदू-मुस्लिम एकता की प्रतीक 'जोरा घास फूल' से जुड़ी रही।

14. निम्नलिखित में से कौन भारत का एक प्रसिद्ध ट्रैक और फील्ड धावक था? [MTS (T-I) 19 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) मिल्खा सिंह
Solution:
  • मिल्खा सिंह भारत के एक प्रसिद्ध ट्रैक एवं फील्ड धावक थे। उन्हें 'द फ्लाइंग सिख' के नाम से भी जाना जाता था।
  • मिल्खा सिंह के खेल उपलब्धियों का सम्मान करते हुए भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।
  • प्रारंभिक जीवन
    • विभाजन के दौरान उन्होंने अपने पूरे परिवार को खो दिया और दिल्ली आकर अनाथ हो गए।
    • भारतीय सेना में भर्ती होने के बाद उनकी एथलेटिक्स यात्रा शुरू हुई
    • जहां उन्होंने क्रॉस कंट्री दौड़ में छठा स्थान हासिल कर प्रशिक्षण प्राप्त किया।​
  • प्रमुख उपलब्धियां
    • 1958 राष्ट्रमंडल खेलों (कार्डिफ) में 400 मीटर में स्वर्ण पदक जीता, जो ट्रैक एंड फील्ड में भारत का पहला स्वर्ण था; यह रिकॉर्ड 52 वर्ष तक कायम रहा।​
    • 1958 एशियाई खेलों (टोक्यो) में 200 मीटर और 400 मीटर में स्वर्ण, साथ ही एशियन रिकॉर्ड।​
    • 1962 एशियाई खेलों (जकार्ता) में 400 मीटर और 4x400 मीटर रिले में स्वर्ण पदक।​
    • 1956, 1960 और 1964 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व; 1960 रोम ओलंपिक में 400 मीटर फाइनल में चौथा स्थान।
    • यह फोटो 2016 में मिल्खा सिंह को उनके सम्मान समारोह में दर्शाती है।
  • उपनाम और विरासत
    • पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने 1962 में उन्हें "फ्लाइंग सिख" कहा
    • क्योंकि उन्होंने पाकिस्तानी धावक अब्दुल खालिक को हराया। 1964 में संन्यास लेने के बाद उन्हें पद्म श्री सम्मान मिला।
    • उनकी जीवनी पर बनी फिल्म "भाग मिल्खा भाग" ने उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाया।
  • अन्य धावक
    • हालांकि अनिमेष कुजूर ने हाल ही में 100 मीटर में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया, लेकिन मिल्खा सिंह की ऐतिहासिक प्रसिद्धि बेजोड़ है।
    • पीटी उषा और नीरज चोपड़ा जैसे अन्य नाम भी चमके, पर ट्रैक धावक के रूप में मिल्खा सबसे प्रतिष्ठित हैं।

15. प्रसिद्ध वैज्ञानिक, अल्बर्ट आइंस्टीन, निम्नलिखित में से किसके अहिंसा के विचार से प्रेरित थे? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) महात्मा गांधी
Solution:
  • प्रसिद्ध वैज्ञानिक, अल्बर्ट आइंस्टीन, महात्मा गांधी के "अहिंसा" की अवधारणा से बहुत प्रेरित थे।
  • अल्बर्ट आइंस्टीन एक विश्व प्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिकविद थे। अल्बर्ट आइंस्टीन को प्रकाश- विद्युत प्रभाव के नियम की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था।
  • पत्र-व्यवहार और प्रशंसा
    • 1931 में आइंस्टीन ने गांधीजी को पहला पत्र लिखा, जिसमें कहा: "आपने अपने कार्यों से सिद्ध किया है
    • अहिंसा से हिंसक लोगों पर भी विजय पाई जा सकती है। मुझे विश्वास है कि अहिंसा से विश्व शांति स्थापित होगी।"​
    • गांधीजी ने जवाब में आइंस्टीन को भारत आने का निमंत्रण दिया। 1935 में आइंस्टीन ने दूसरे पत्र में अहिंसा के आदर्शों की प्रशंसा की, हालांकि कार्यान्वयन की चुनौतियों पर चर्चा की।
    • गांधीजी की हत्या (1948) पर आइंस्टीन ने लिखा: "वे अपने अहिंसा सिद्धांत का शिकार हुए
    • क्योंकि उन्होंने अशांति के दौर में भी सशस्त्र सुरक्षा से इनकार कर दिया। बल-प्रयोग स्वयं बुराई है।"
  • आइंस्टीन के कमरे में गांधीजी की तस्वीर
    • आइंस्टीन के कमरे में शुरू में न्यूटन और मैक्सवेल की तस्वीरें लगीं, लेकिन गांधीजी के अहिंसा आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने इन्हें हटा दिया और गांधीजी की तस्वीर लगा ली।​
    • उन्होंने कहा: "सफलता की तस्वीर हटाकर आने वाले पीढ़ियों के लिए गांधीजी की तस्वीर लगाने का समय आ गया है।" यह उनके शांतिवादी विचारों का प्रतीक था।
  • आइंस्टीन के अन्य कथन
    • 1950 में आइंस्टीन ने कहा: "गांधीजी के विचार सभी राजनीतिक व्यक्तियों में सबसे प्रबुद्ध थे।"​
    • वे स्वयं परमाणु बम के विकास से जुड़े थे, लेकिन बाद में शांतिवाद की ओर मुड़े और गांधीजी की अहिंसा को वैज्ञानिक दृष्टि से श्रेष्ठ माने।​
    • आइंस्टीन ने गांधीजी के सत्याग्रह को तानाशाही और हिंसा के विरुद्ध प्रभावी बताया, जो विश्व भर के नागरिक अधिकार आंदोलनों को प्रेरित करता रहा।​
  • प्रभाव का व्यापक संदर्भ
    • आइंस्टीन और गांधीजी कभी व्यक्तिगत रूप से नहीं मिले, लेकिन रोमां रोलां के माध्यम से उनका संपर्क था।​
    • गांधीजी के विचारों ने आइंस्टीन को हिंसा-विरोधी बना दिया, जो प्रथम/द्वितीय विश्व युद्ध और परमाणु हथियारों के खिलाफ उनकी सक्रियता में दिखा।​
    • यह प्रेरणा विज्ञान और नैतिकता के संगम का उदाहरण है, जहां आइंस्टीन ने अहिंसा को भौतिकी के सिद्धांतों जितना अविनाशी माना।​

16. 2019 में, अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) द्वारा निम्नलिखित भारतीय संगीतकारों में से किसके नाम पर मंगल और बृहस्पति के बीच एक छोटे ग्रह का नाम रखा गया था? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) पंडित जसराज
Solution:
  • अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ ने मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच खोजे गए एक क्षुद्रग्रह का नाम भारतीय शास्त्रीय गायक पंडित जसराज के नाम पर रखा गया है।
  • अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) की स्थापना वर्ष 1919 में हुई थी।
  • इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से अनुसंधान, संचार, शिक्षा और विकास सहित खगोल विज्ञान के सभी पहलुओं को बढ़ावा देना है।
  • पंडित जसराज
    • 2019 में अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) ने प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय गायक पंडित जसराज के नाम पर मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित एक छोटे ग्रह (एस्टेरॉइड) का नामकरण किया था।
    • यह क्षुद्रग्रह पहले 2006 VP32 के नाम से जाना जाता था
    • जिसकी आधिकारिक संख्या 300128 है, और यह 11 नवंबर 2006 को खोजा गया था।
  • क्षुद्रग्रह की विशेषताएँ
    • यह क्षुद्रग्रह एस्टरॉइड बेल्ट में स्थित है, जो सौरमंडल के मंगल और बृहस्पति ग्रहों के बीच का क्षेत्र है।
    • IAU और NASA ने 23 सितंबर 2019 को इस नामकरण की औपचारिक घोषणा की, और मुंबई में पंडित जसराज के आवास पर प्रमाण-पत्र भेजा गया।
    • इसकी संख्या 300128 पंडित जसराज की जन्मतिथि (28 जनवरी 1930) को उल्टे क्रम में दर्शाती है
    • 280130 का उल्टा रूप। यह ग्रह सूर्य की परिक्रमा करता रहता है और न तो पूर्ण ग्रह है तथा न ही धूमकेतु।
  • पंडित जसराज का योगदान
    • पंडित जसराज मेवाती घराने के शास्त्रीय गायक थे, जिन्हें 'संगीत मार्तंड' कहा जाता था।
    • वे भारत के पहले संगीतकार हैं जिनके नाम पर ऐसा सम्मान मिला, और विश्व स्तर पर चौथे—मोजार्ट, बीथोवेन तथा लूसियानो पावारोट्टी के बाद।
    • IAU के प्रमाण-पत्र में लिखा है: "संगीत मार्तण्ड पंडित जसराज भारतीय शास्त्रीय गायन के पुरोधा हैं
    • जिन्होंने संगीत को जीवन समर्पित किया।" उनकी बेटी दुर्गा जसराज ने इसकी पुष्टि की।
    • पंडित जसराज ने इसे "ईश्वर की कृपा और भारतीय संगीत का आशीर्वाद" बताया।
  • ऐतिहासिक महत्व
    • यह नामकरण भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक खगोल विज्ञान से जोड़ने वाला दुर्लभ सम्मान था।
    • इससे पहले केवल पश्चिमी शास्त्रीय संगीतकारों को यह मान्यता मिली थी। पंडित जसराज को पद्म विभूषण जैसे कई पुरस्कार प्राप्त थे।
    • वेबसाइट minorplanetcenter.net पर इसे (300128) Jasraj के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।​

17. लोमस ऋषि गुफा, जो एक मानव निर्मित गुफा है, भारत के किस राज्य में स्थित है? [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) बिहार
Solution:
  • लोमस ऋषि गुफा, जो एक मानव निर्मित गुफा है, भारत के बिहार राज्य के जहांनाबाद जिले में बराबर पहाड़ी पर स्थित है।
  • इस गुफा का निर्माण मौर्य शासक अशोक के शासनकाल में किया गया था।
  • स्थान और पहुंच
    • यह गुफा बिहार के जहानाबाद जिले में बराबर और नागार्जुनी पहाड़ियों पर अवस्थित है, जो गया शहर से लगभग 24-30 किलोमीटर उत्तर की ओर है।
    • बोधगया से यह करीब 40 मील दूर है और फल्गु नदी के निकट बसी हुई है।
    • यह क्षेत्र प्राचीन शैलकृत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें सुदामा, करण चौपार, विश्वकर्मा जैसी अन्य गुफाएं भी शामिल हैं।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • लोमस ऋषि गुफा मौर्य काल (तीसरी-चौथी शताब्दी ईसा पूर्व) की है, जो सम्राट अशोक के समय से जुड़ी हुई मानी जाती है।
    • यह भारत की सबसे पुरानी रॉक-कट गुफाओं में से एक है और बराबर गुफा समूह का हिस्सा है।
    • मूल रूप से यह जैन या बौद्ध भिक्षुओं के लिए तपस्या स्थल के रूप में बनाई गई थी
    • हालांकि इसमें हिंदू देवताओं जैसे शिव, विष्णु और दुर्गा की नक्काशियां भी हैं।
    • गुफा का निर्माण एक ही ग्रेनाइट चट्टान को काटकर किया गया, जो प्राचीन इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है।​
  • वास्तुकला की विशेषताएं
    • गुफा का प्रवेश द्वार घोड़े की नाल के आकार का है, जो लकड़ी की झोपड़ी जैसा दिखता है
    • उसमें जटिल नक्काशीदार स्तंभों वाला बरामदा है। अंदर चौकोर गर्भगृह है, जिसमें चट्टान से कटा लिंगम मौजूद है।
    • बाहरी दीवारों पर हाथी, स्तूप और अन्य प्रतीकात्मक चित्र बने हैं, जो बौद्ध-जैन प्रभाव दर्शाते हैं।
    • यह गुफा अधूरी रही, लेकिन इसकी सजावट बाद की गुफा वास्तुकला (जैसे अजंता-एलोरा) को प्रभावित करने वाली मानी जाती है।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • यह गुफा बौद्ध और जैन धर्म के प्रचार का प्रतीक है तथा मगध साम्राज्य की समृद्धि को दर्शाती है।
    • आज यह पुरातात्विक सर्वेक्षण ऑफ इंडिया के संरक्षण में है और पर्यटकों व इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
    • आसपास की अन्य गुफाएं जैसे बाराबर, नागार्जुनी और गोपी बिगहा भी इसी क्षेत्र में हैं, जो बिहार को प्राचीन गुफा कला का केंद्र बनाती हैं।​

18. भरतनाट्यम की मशहूर शख्यिसत, मृणालिनी विक्रम साराभाई को निम्नलिखित में से किस नृत्य शैली के लिए भी जाना जाता था? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) कथकली
Solution:
  • प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना, कोरियोग्राफर और प्रशिक्षक मृणालिनी साराभाई भरतनाट्यम और कथकली नृत्य की नृत्यांगना थीं।
  • मृणालिनी साराभाई नृत्य, नाटक, संगीत तथा कठपुतली का प्रशिक्षण देने वाले प्रसिद्ध संस्थान दर्पण एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स की संस्थापक थीं।
  • प्रारंभिक जीवन
    • उन्होंने बचपन से ही नृत्य और संगीत में रुचि दिखाई तथा शांतिनिकेतन, अमेरिका और विभिन्न गुरुओं से प्रशिक्षण लिया।
    • मीनाक्षी सुंदरम पिल्लई और मुथुकुमार पिल्लई जैसे गुरुओं से भरतनाट्यम सीखा, जबकि कथकली और मोहिनीयाट्टम में भी महारत हासिल की।
  • नृत्य शैलियाँ
    • वे भरतनाट्यम की सबसे प्रसिद्ध नृत्यांगना थीं, लेकिन कथकली में भी उनकी प्रस्तुतियाँ उल्लेखनीय रहीं।
    • उन्होंने इन शैलियों के अलावा मोहिनीयाट्टम में भी प्रशिक्षण लिया और अपनी कोरियोग्राफी में इन्हें मिश्रित किया।
    • सामाजिक मुद्दों जैसे अस्पृश्यता को उठाने वाली उनकी रचनाएँ, जैसे 'चंडालिका' और 'ताशेर देश' (कथकली आधारित), ने उन्हें विशेष पहचान दी।
  • योगदान और संस्थान
    • 1949 में पति विक्रम साराभाई के साथ अहमदाबाद में डर्पणा एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स की स्थापना की
    • जो भरतनाट्यम, कथकली, मोहिनीयाट्टम सहित शास्त्रीय नृत्यों का केंद्र बनी।
    • इस अकादमी ने नृत्य, संगीत, थिएटर और लोककलाओं को बढ़ावा दिया। उनकी बेटी मल्लिका साराभाई ने इसे आगे बढ़ाया।
  • सम्मान
    • उन्हें 1965 में पद्म श्री, 1992 में पद्म भूषण और 1994 में संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप मिली।
    • 2018 में गूगल डूडल ने उनके 100वें जन्मदिन पर उन्हें याद किया। वे 21 जनवरी 2016 को 97 वर्ष की आयु में चल बसीं।
  • विरासत
    • मृणालिनी ने नृत्य को सामाजिक संदेशों का माध्यम बनाया, जिससे भारतीय शास्त्रीय नृत्य वैश्विक पटल पर चमका।
    • उनकी शैली ने पीढ़ियों को प्रेरित किया, विशेषकर भरतनाट्यम और कथकली के माध्यम से।

19. मई, 2022 में सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद आर्मी विमानन दल में लड़ाकू वायुयान चालक के रूप में शामिल होने वाली पहली महिला अधिकारी कौन हैं? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) कैप्टन अभिलाषा बराक
Solution:
  • कैप्टन अभिलाषा बराक मई, 2022 में सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद आर्मी विमानन दल में लड़ाकू वायुयान चालक के रूप में शामिल होने वाली प्रथम महिला अधिकारी हैं।
  • कैप्टन अभिलाषा बराक ने अपना एक वर्ष का प्रशिक्षण नासिक में सेना के कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल से पूरा किया था।
  • व्यक्तिगत पृष्ठभूमि
    • कैप्टन अभिलाषा बराक हरियाणा के पंचकूला की रहने वाली हैं। उनके पिता कर्नल एस. ओम सिंह (रिटायर्ड) हैं
    • जो 8 जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री में सेवा दे चुके हैं।
    • अभिलाषा ने सितंबर 2018 में आर्मी एयर डिफेंस कोर (Army Air Defence Corps) में कमीशन प्राप्त किया था।​
  • प्रशिक्षण और उपलब्धि
    • उन्होंने नासिक (महाराष्ट्र) स्थित कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल (Combat Army Aviation Training School) में छह महीने का कॉम्बैट आर्मी एविएशन कोर्स सफलतापूर्वक पूरा किया।
    • 25 मई 2022 को आयोजित विदाई समारोह में लेफ्टिनेंट जनरल एके सूरी (महानिदेशक और कर्नल कमांडेंट, आर्मी एविएशन) ने उन्हें 36 अन्य आर्मी पायलटों के साथ 'विंग्स' (पंख प्रमाण-पत्र) प्रदान किए।
    • इससे पहले आर्मी एविएशन में महिलाएं केवल एटीसी (Air Traffic Control) या ग्राउंड ड्यूटी पर तैनात होती थीं
    • यह पहला मौका था जब महिला अधिकारियों को लड़ाकू हेलिकॉप्टर पायलट बनने का अवसर मिला।​
  • चयन प्रक्रिया
    • आर्मी ने हेलिकॉप्टर पायलट ट्रेनिंग के लिए 15 महिला अधिकारियों के आवेदन लिए
    • जिनमें से केवल दो का चयन हुआ—इनमें कैप्टन अभिलाषा प्रमुख थीं।
    • यह उपलब्धि भारतीय सेना की महिलाओं को युद्धक भूमिकाओं में सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम थी।
  • आर्मी एविएशन कोर का संक्षिप्त इतिहास
    • आर्मी एविएशन कोर की स्थापना 1986 में हुई थी, जिसमें आर्टिलरी और अन्य आर्म्स के अधिकारी-जवान शामिल होते हैं।
    • इसने 1987 के ऑपरेशन पवन (श्रीलंका में तमिल टाइगर्स के खिलाफ) और 1999 के कारगिल युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • कैप्टन अभिलाषा की सफलता ने इस कोर को लैंगिक समावेशिता प्रदान की।

20. निम्नलिखित में से कौन संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिष्ठित लिंकन सेंटर हॉल में प्रदर्शन के लिए आमंत्रित होने वाले पहले भारतीय बने ? [CHSL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) बिस्मिल्लाह खान
Solution:
  • उस्ताद बिस्मिल्ला खां संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिष्ठित लिंकन सेंटर हॉल में प्रदर्शन के लिए आमंत्रित होने वाले पहले भारतीय बने थे।
  • उस्ताद बिस्मिल्ला खां को पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
  • वर्ष 2001 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
  • बिस्मिल्लाह खान का जीवन परिचय
    • उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जन्म 21 मार्च 1916 को उत्तर प्रदेश के दमोह जिले के बरेली में एक संगीतकार परिवार में हुआ था।
    • बचपन से ही उन्होंने वाराणसी के गुरुओं से शहनाई की तालीम ली और काशी विश्वनाथ मंदिर तथा ज्ञानवापी मस्जिद में नियमित प्रदर्शन शुरू किया।
    • 1930 के दशक में ऑल इंडिया रेडियो से प्रसारण ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
  • लिंकन सेंटर प्रदर्शन की ऐतिहासिकता
    • 1960 के दशक में बिस्मिल्लाह खान अमेरिका के लिंकन सेंटर के लिए आमंत्रित होने वाले पहले भारतीय कलाकार बने
    • जो न्यूयॉर्क का प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र है। इस प्रदर्शन ने शहनाई को पश्चिमी दुनिया में लोकप्रिय बनाया और भारतीय संगीत की स्वीकृति दिलाई।
    • उन्होंने मॉन्ट्रियल विश्व प्रदर्शनी, कांस आर्ट फेस्टिवल तथा ओसाका ट्रेड फेयर में भी भाग लिया।
  • उपलब्धियां और सम्मान
    • पद्मभूषण, पद्मविभूषण तथा 2001 में भारत रत्न से सम्मानित।
    • शहनाई को शास्त्रीय वाद्य का दर्जा दिलाया।
    • रविशंकर, जाकिर हुसैन जैसे कलाकारों के बाद भी वे इस विशिष्ट उपलब्धि के पहले रहे।​
    • उनकी मृत्यु 1 अगस्त 2006 को हुई, लेकिन उनकी विरासत भारतीय संगीत में अमर है।
    • बाद में वीर दास जैसे कलाकार कॉमेडी में इस मंच पर आए, पर पहले संगीतकार के रूप में बिस्मिल्लाह खान का स्थान अद्वितीय है।