प्रमुख व्यक्तित्व (परम्परागत सामान्य ज्ञान) भाग-II

Total Questions: 33

31. फ्लाइट लेफ्टिनेंट ....... ने मई, 2019 में फाइटर जेट पर लड़ाकू मिशन पर जाने वाली पहली महिला बनकर इतिहास रचा था। [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) भावना कंठ
Solution:
  • फ्लाइट लेफ्टिनेंट भावना कंठ ने मई, 2019 में फाइटर जेट पर लड़ाकू मिशन पर जाने वाली पहली महिला हैं।
  • भावना कंठ का जन्म बिहार (दरभंगा) में मैथिल कायस्थ परिवार में हुआ था। इनके पिता तेज नारायण कंठ पेशे से एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं।
  • भावना कंठ का परिचय
    • भावना कंठ भारतीय वायु सेना की पहली पीढ़ी की महिला फाइटर पायलटों में से एक हैं
    • जिन्होंने जून 2016 में कमीशन प्राप्त किया। वे अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह के साथ पहले बैच की महिला पायलट थीं
    • जिन्हें फाइटर स्ट्रीम में शामिल किया गया। तेलंगाना के डुंडीगल स्थित वायु सेना अकादमी से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने असाधारण कौशल दिखाया।
  • ऐतिहासिक उपलब्धि
    • मई 2019 में भावना कंठ ने फाइटर जेट पर युद्धक मिशन उड़ाने की योग्यता हासिल की
    • जो भारतीय वायुसेना में महिलाओं के लिए नया अध्याय खोला।
    • इससे पहले महिलाओं को मुख्य रूप से ट्रांसपोर्ट या हेलीकॉप्टर स्ट्रीम में ही सीमित रखा जाता था
    • लेकिन उनकी यह उपलब्धि ने लड़ाकू भूमिकाओं के द्वार खोले।
    • यह मील का पत्थर महिलाओं के सशस्त्र बलों में समान अवसरों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।
  • प्रशिक्षण और सफर
    • भावना ने हैदराबाद एयर फोर्स अकादमी में बेसिक ट्रेनिंग ली और फिर उन्नत फाइटर जेट प्रशिक्षण प्राप्त किया।
    • मिग-21 बाइसन जैसे चुनौतीपूर्ण विमानों पर महारत हासिल करने वाली वे देश की पहली महिला बनीं।
    • उनके समर्पण ने न केवल वायुसेना में बल्कि पूरे देश में महिलाओं को प्रेरित किया, खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली लड़कियों को।
  • अन्य संबंधित महिला पायलट
    • भावना के साथ अवनी चतुर्वेदी ने 2018 में मिग-21 को सोलो उड़ान भरकर पहली महिला फाइटर पायलट का रिकॉर्ड बनाया।
    • मोहना सिंह ने मई 2019 में हॉक एडवांस्ड जेट पर दिन के मिशन उड़ाने वाली पहली महिला बनीं। बाद में शिवांगी सिंह ने राफेल जेट उड़ाने का गौरव प्राप्त किया।
  • प्रभाव और विरासत
    • भावना की उपलब्धि ने भारतीय सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया और महिलाओं को युद्धक भूमिकाओं में आगे आने का मार्ग प्रशस्त किया।
    • आज वायुसेना में 10 से अधिक महिला फाइटर पायलट सक्रिय हैं
    • जिनकी ट्रेनिंग पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। उनकी कहानी साहस, दृढ़ता और सपनों को उड़ान देने की मिसाल है।

32. भारत के मिसाइल मैन के रूप में किसे जाना जाता है? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
Solution:
  • भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्म रामेश्वरम, तमिलनाडु में हुआ था।
  • इन्हें "मिसाइल मैन ऑफ इंडिया" भी कहा जाता है। डॉ. कलाम भारत के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में से एक थे
  • जिन्हें 30 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने का अनूठा सम्मान प्राप्त है।
  • प्रारंभिक जीवन
    • डॉ. अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक साधारण मुस्लिम परिवार में हुआ था।
    • उनके पिता नाविक थे और परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बचपन में वे अखबार बाँटने का काम करते थे।
    • फिर भी, उन्होंने कड़ी मेहनत से पढ़ाई की और मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की।​​
  • वैज्ञानिक करियर की शुरुआत
    • 1960 में DRDO में वैज्ञानिक के रूप में करियर शुरू किया, जहाँ उन्होंने हॉवरक्राफ्ट डिजाइन जैसे छोटे प्रोजेक्ट्स पर काम किया।
    • बाद में ISRO में स्थानांतरित हो गए और SLV-III प्रोजेक्ट के निदेशक बने
    • जिसने 1980 में रोहिणी सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह भारत का पहला सैटेलाइट लॉन्च था।
  • मिसाइल कार्यक्रम में योगदान
    • डॉ. कलाम को "मिसाइल मैन" इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने IGMDP (Integrated Guided Missile Development Programme) का नेतृत्व किया।
    • इस कार्यक्रम के तहत अग्नि, पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल और नाग जैसी मिसाइलें विकसित की गईं।
    • अग्नि मिसाइल की रेंज 700-5000 किमी तक है, जबकि पृथ्वी भारत की पहली बैलिस्टिक मिसाइल बनी।
    • उन्होंने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो भारत-रूस संयुक्त परियोजना है।​
  • पोखरण-II परमाणु परीक्षण
    • 1998 में पोखरण-II परमाणु परीक्षणों के मुख्य समन्वयक थे, जिससे भारत परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बना।
    • इस ऑपरेशन को गुप्त रखने के लिए उन्होंने खुद सैनिक का भेष धारण किया। यह परीक्षण CIA की निगरानी को चकमा देकर किया गया।​​
  • राष्ट्रपति पद और बाद का जीवन
    • 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे, जिन्हें "पीपुल्स प्रेसिडेंट" कहा गया।
    • राष्ट्रपति भवन को "पीपुल्स रूम" में बदल दिया और युवाओं को विज्ञान-तकनीक की प्रेरणा दी।
    • पद त्यागने के बाद वे शिक्षक बने और "विंग्स ऑफ फायर" जैसी किताबें लिखीं। 27 जुलाई 2015 को शिलांग में व्याख्यान देते हुए उनका निधन हो गया।
  • पुरस्कार और विरासत
    • उन्हें पद्म भूषण (1981), पद्म विभूषण (1990) और भारत रत्न (1997) से सम्मानित किया गया।
    • उनका स्मारक रामेश्वरम में है। आज भी युवा उन्हें "ड्रीम, ड्रीम, ड्रीम... ड्रीम्स को रियलिटी में बदलो" के मंत्र से प्रेरित होते हैं।​

33. निम्नलिखित शख्सियतों में से कौन एक प्रसिद्ध भारतीय पादप क्रियाविज्ञानी (plant physiologist) और भौतिक विज्ञानी है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) जे.सी. बोस
Solution:
  • जगदीश चंद्र बोस (जे.सी. बोस) एक प्रसिद्ध भारतीय पादप क्रियाविज्ञानी (Plant Physiologist) और भौतिक विज्ञानी थे।
  • जिन्होंने पौधों की वृद्धि को मापने के लिए एक उपकरण क्रेस्कोग्राफ का आविष्कार किया था। बोस को बंगाली साइंस फिक्शन का जनक माना जाता है।
  • प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
    • जगदीश चंद्र बोस का जन्म 30 नवंबर 1858 को ढाका (अब बांग्लादेश) के विक्रमपुर क्षेत्र में एक संपन्न बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
    • उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुरशिदाबाद के हिंदू स्कूल से प्राप्त की, उसके बाद बैराकपुर के क्राइस्ट चर्च स्कूल में पढ़ाई की।
    • 1879 में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री हासिल की, फिर इंग्लैंड जाकर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के क्राइस्ट कॉलेज और लंदन विश्वविद्यालय से प्राकृतिक विज्ञान में शिक्षा प्राप्त की।
    • वे 1884 में भारत लौटे और प्रेसिडेंसी कॉलेज, कोलकाता में प्रोफेसर बने।​​
  • भौतिक विज्ञान में योगदान
    • बोस को रेडियो विज्ञान का जनक कहा जाता है। उन्होंने 1894-95 में मिलीमीटर वेवलेंथ की विद्युत चुम्बकीय तरंगें उत्पन्न कीं, जो मार्कोनी के वायरलेस संचार से पहले की थीं।
    • उन्होंने रेडियो तरंगों से बारूद में विस्फोट कर दिखाया और माइक्रोवेव रेंज में संकेतों का उत्पादन किया।
    • इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स ने उन्हें रेडियो विज्ञान का जनक घोषित किया।
    • इसके अलावा, उन्होंने धातुओं की थकान (metal fatigue) पर कार्य किया।​​
  • पादप क्रियाविज्ञान में योगदान
    • बोस ने पौधों को निर्जीव मानने वाली परंपरागत धारणा को चुनौती दी। उन्होंने क्रेस्कोग्राफ नामक उपकरण का आविष्कार किया
    • जो पौधों की सूक्ष्म गतियों, वृद्धि और प्रतिक्रियाओं को 10,000 गुना बढ़ाकर मापता था।
    • इससे सिद्ध हुआ कि पौधे प्रकाश, ध्वनि, तापमान, रसायनों और यांत्रिक उत्तेजनाओं पर प्रतिक्रिया देते हैं
    • जैसे जंतु करते हैं। उन्होंने दिखाया कि पौधों में दर्द, खुशी जैसी भावनाएं होती हैं और वे विष पर मरते हुए चीख उठते हैं।
    • उनकी पुस्तकें "Response in the Living and Non-Living" (1902) और "The Nervous Mechanism of Plants" (1926) इस क्षेत्र की आधारशिला हैं।​
  • प्रमुख आविष्कार और संस्थान
    • क्रेस्कोग्राफ के अलावा, उन्होंने ऊस्कोग्राफ बनाया जो पौधों की प्रतिक्रियाओं को रिकॉर्ड करता था।
    • 1917 में उन्होंने कोलकाता में बोस रिसर्च इंस्टीट्यूट (अब बोस इंस्टीट्यूट) की स्थापना की
    • जो एशिया का पहला अंतःविषय अनुसंधान केंद्र है। बोस ने पेटेंट से इनकार कर दिया
    • क्योंकि वे विज्ञान को व्यापार नहीं बनाना चाहते थे। वे बंगाली विज्ञान कथा के जनक भी थे।​​
  • चुनौतियां और सम्मान
    • प्रेसिडेंसी कॉलेज में यूरोपीय प्रोफेसरों को दिए जाने वाले पूर्ण वेतन के मुकाबले उन्हें दो-तिहाई वेतन मिलता था।
    • विरोध में उन्होंने 3 वर्ष तक बिना वेतन के पढ़ाया। उन्हें 'सर' की उपाधि नहीं मिली, लेकिन विश्व स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ।
    • चंद्रमा पर उनके नाम का एक क्रेटर है। उनका निधन 23 नवंबर 1937 को गिरिडीह में हुआ।