Correct Answer: (a) ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
Solution:- भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्म रामेश्वरम, तमिलनाडु में हुआ था।
- इन्हें "मिसाइल मैन ऑफ इंडिया" भी कहा जाता है। डॉ. कलाम भारत के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में से एक थे
- जिन्हें 30 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने का अनूठा सम्मान प्राप्त है।
- प्रारंभिक जीवन
- डॉ. अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक साधारण मुस्लिम परिवार में हुआ था।
- उनके पिता नाविक थे और परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बचपन में वे अखबार बाँटने का काम करते थे।
- फिर भी, उन्होंने कड़ी मेहनत से पढ़ाई की और मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की।
- वैज्ञानिक करियर की शुरुआत
- 1960 में DRDO में वैज्ञानिक के रूप में करियर शुरू किया, जहाँ उन्होंने हॉवरक्राफ्ट डिजाइन जैसे छोटे प्रोजेक्ट्स पर काम किया।
- बाद में ISRO में स्थानांतरित हो गए और SLV-III प्रोजेक्ट के निदेशक बने
- जिसने 1980 में रोहिणी सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह भारत का पहला सैटेलाइट लॉन्च था।
- मिसाइल कार्यक्रम में योगदान
- डॉ. कलाम को "मिसाइल मैन" इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने IGMDP (Integrated Guided Missile Development Programme) का नेतृत्व किया।
- इस कार्यक्रम के तहत अग्नि, पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल और नाग जैसी मिसाइलें विकसित की गईं।
- अग्नि मिसाइल की रेंज 700-5000 किमी तक है, जबकि पृथ्वी भारत की पहली बैलिस्टिक मिसाइल बनी।
- उन्होंने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो भारत-रूस संयुक्त परियोजना है।
- पोखरण-II परमाणु परीक्षण
- 1998 में पोखरण-II परमाणु परीक्षणों के मुख्य समन्वयक थे, जिससे भारत परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बना।
- इस ऑपरेशन को गुप्त रखने के लिए उन्होंने खुद सैनिक का भेष धारण किया। यह परीक्षण CIA की निगरानी को चकमा देकर किया गया।
- राष्ट्रपति पद और बाद का जीवन
- 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे, जिन्हें "पीपुल्स प्रेसिडेंट" कहा गया।
- राष्ट्रपति भवन को "पीपुल्स रूम" में बदल दिया और युवाओं को विज्ञान-तकनीक की प्रेरणा दी।
- पद त्यागने के बाद वे शिक्षक बने और "विंग्स ऑफ फायर" जैसी किताबें लिखीं। 27 जुलाई 2015 को शिलांग में व्याख्यान देते हुए उनका निधन हो गया।
- पुरस्कार और विरासत
- उन्हें पद्म भूषण (1981), पद्म विभूषण (1990) और भारत रत्न (1997) से सम्मानित किया गया।
- उनका स्मारक रामेश्वरम में है। आज भी युवा उन्हें "ड्रीम, ड्रीम, ड्रीम... ड्रीम्स को रियलिटी में बदलो" के मंत्र से प्रेरित होते हैं।