Correct Answer: (a) फिल्म निर्माता और निर्देशक
Solution:- सत्यजीत रे एक प्रसिद्ध भारतीय गीतकार, फिल्म निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक थे।
- सत्यजीत रे को वर्ष 1992 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। इनका जन्म कलकत्ता में हुआ था। इनकी पहली फिल्म पाथेर पांचाली थी।
- प्रारंभिक जीवन
- सत्यजीत रे का जन्म 2 मई 1921 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में एक बंगाली ब्राह्मो परिवार में हुआ था।
- उनके पिता प्रसिद्ध लेखक सुखमय रे थे, जिनकी असामयिक मृत्यु के बाद परिवार ने आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया।
- रे ने अर्थशास्त्र की पढ़ाई की और रवींद्रनाथ टैगोर के शांतिनिकेतन में कला सीखी, जहां उनकी फिल्मों के प्रति रुचि जागृत हुई।
- विज्ञापन एजेंसी में काम करते हुए उन्होंने 1947 में कलकत्ता का पहला फिल्म सोसाइटी स्थापित किया।
- फिल्मी सफर की शुरुआत
- उनकी पहली फिल्म पथेर पांचाली (1955) ग्रामीण बंगाल के एक गरीब परिवार की कहानी पर आधारित थी
- जिसे बनाने के लिए उन्होंने अपनी सारी संपत्ति बेच दी।
- यह फिल्म कान्स फिल्म फेस्टिवल में ग्रैंड प्रिक्स जीतकर भारतीय सिनेमा को विश्व पटल पर लाई।
- इसके बाद अपराजितो (1956) और अपुर संसार (1959) के साथ अपु त्रयी पूरी हुई, जो एक बालक अपु के जीवन के विभिन्न चरणों को दर्शाती है।
- प्रमुख फिल्में और शैली
- रे ने कुल 36 फिल्में बनाईं, जिनमें डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्में भी शामिल हैं।
- उनकी अन्य प्रसिद्ध फिल्में चारुलता (1964, एकाकी पत्नी की भावनाओं पर), जलसाघर (1958, संगीत और पतन पर), अभिजान (1970), आगंतुक और नायक हैं।
- उनकी शैली यथार्थवादी, मानवीय भावनाओं से भरपूर और संगीत व छायांकन पर पूर्ण नियंत्रण वाली थी। वे स्वयं पटकथा, संगीत और डिजाइन करते थे।
- साहित्यिक योगदान
- रे एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने बंगाली साहित्य में जासूस फेलूदा और वैज्ञानिक प्रोफेसर शंकू जैसे लोकप्रिय पात्र रचे।
- उनकी कहानियां और उपन्यास बच्चों से लेकर वयस्कों तक लोकप्रिय रहे।
- पुरस्कार और सम्मान
- 1992 में भारत रत्न (मरणोपरांत, पहले फिल्मकार)।
- पद्म विभूषण, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार।
- 1992 में ऑस्कर के सम्मानजनक जीवनकालीन पुरस्कार।
- 32 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार।
- वे कान्स, वेनिस और बर्लिन जैसे फेस्टिवलों में सम्मानित एकमात्र भारतीय फिल्मकार थे।
- निधन और विरासत
- 23 अप्रैल 1992 को उनका निधन हो गया।
- रे ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दी और मानवीय मूल्यों, सामाजिक मुद्दों जैसे गरीबी, स्त्री अधिकारों को अपनी फिल्मों में उभारा।
- उनकी विरासत आज भी विश्व सिनेमा को प्रेरित करती है।