प्रमुख व्यक्तित्व (परम्परागत सामान्य ज्ञान) भाग-I

Total Questions: 30

11. संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किस पूर्व मिस इंडिया ने पश्चिम में भारतीय शास्त्रीय नृत्य को लोकप्रिय बनाया? [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) इंद्राणी रहमान
Solution:
  • संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित पूर्व मिस इंडिया इंद्राणी रहमान ने पश्चिम में भारतीय शास्त्रीय नृत्य को लोकप्रिय बनाया।
  • प्रारंभिक जीवन
    • इंद्राणी रहमान का जन्म 19 सितंबर 1930 को चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) में हुआ था।
    • उनके पिता एक प्रसिद्ध वकील थे, जबकि मां रागिनी देवी भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रचारक थीं।
    • बचपन से ही उन्होंने अपनी मां से भरतनाट्यम, कथकली और अन्य नृत्य रूपों की प्रेरणा ली।​
    • उन्होंने मैसूर की जेट्टी तायम्मा और चेन्नई की गौरी अम्मा से भरतनाट्यम सीखा।
    • गुरु देब प्रसाद दास से ओडिसी नृत्य का प्रशिक्षण लेकर वे इस शैली की पहली पेशेवर नृत्यांगना बनीं।
    • 1952 में उन्होंने फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता जीती और मिस यूनिवर्स 1952 में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
  • नृत्य करियर की शुरुआत
    • 1950 के दशक में इंद्राणी ने भारत और विदेशों में प्रदर्शन शुरू किए।
    • उन्होंने भरतनाट्यम, कूचिपूड़ी, कथकली और ओडिसी जैसे चार प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों में महारत हासिल की।
    • स्वतंत्रता के बाद न्यूयॉर्क जाकर उन्होंने पश्चिमी दर्शकों के सामने भारतीय नृत्य प्रस्तुत किया।
    • उनके प्रदर्शनों ने अमेरिका और यूरोप में भारतीय शास्त्रीय नृत्य को एक नई पहचान दी।
    • 1960-70 के दशक में वे अंतरराष्ट्रीय दौरों पर रहीं
    • जहां ओडिसी को विशेष रूप से लोकप्रिय बनाया। 1976 में वे न्यूयॉर्क में स्थायी रूप से बस गईं।​
  • पुरस्कार और सम्मान
    • इंद्राणी रहमान को 1969 में पद्मश्री पुरस्कार मिला।
    • प्रदर्शन कला के क्षेत्र में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और तारकनाथ दास पुरस्कार से नवाजा गया।
    • 1981 में संगीत नाटक अकादमी ने उन्हें विशेष सम्मान दिया।
    • ये पुरस्कार उनके योगदान को मान्यता देते हैं, खासकर पश्चिम में भारतीय नृत्य के प्रचार-प्रसार के लिए।
    • वे रुक्मिणी देवी अरुंडेल जैसी अन्य प्राप्तकर्ताओं से अलग थीं, क्योंकि वे पूर्व मिस इंडिया भी थीं।​
  • पश्चिम में योगदान
    • इंद्राणी ने पश्चिमी देशों में भारतीय शास्त्रीय नृत्य को ब्रिटिश राजकुमारों, अमेरिकी राष्ट्रपतियों और यूरोपीय अभिजात वर्ग के सामने प्रस्तुत कर लोकप्रिय बनाया।
    • उनके माध्यम से ओडिसी पहली बार वैश्विक मंच पर चमका।
    • उन्होंने नृत्य के साथ-साथ अभिनय भी किया, जैसे सत्यजीत राय की फिल्म 'आबेर चेना' में।
    • उनकी बेटी सुशीला रहमान भी नृत्यांगना बनीं। उनके प्रयासों से भारतीय नृत्य पश्चिमी कल्चर का हिस्सा बना।​
  • अंतिम वर्ष और विरासत
    • 5 फरवरी 1999 को न्यूयॉर्क में उनका निधन हो गया।
    • उनकी विरासत आज भी ओडिसी और अन्य नृत्यों के माध्यम से जीवित है।
    • उन्होंने न केवल भारत का गौरव बढ़ाया, बल्कि पूर्वी और पश्चिमी संस्कृतियों का पुल बनाया।

12. "जनजातीय गौरव दिवस" (Janjatiya Gaurav Diwas) ....... की जयंती पर मनाया जाता है। [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) बिरसा मुंडा
Solution:
  • 'जनजातीय गौरव दिवस' बिरसा मुंडा की जयंती पर मनाया जाता है।
  • बिरसा मुंडा एक भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और मुंडा जनजाति के लोक नायक थे।
  • घोषणा और महत्व
    • भारत सरकार ने 2021 में 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया
    • जो आदिवासी समुदायों के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को सम्मानित करता है।
    • यह दिन विशेष रूप से बिरसा मुंडा जैसे आदिवासी नायकों की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया।
    • सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में सांस्कृतिक प्रदर्शनियां, कार्यशालाएं और आदिवासी विरासत को प्रदर्शित करने वाले आयोजन शामिल होते हैं, जो एकता और गर्व को बढ़ावा देते हैं।
  • बिरसा मुंडा का जीवन
    • बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1874 को झारखंड के उलीहातू गांव में हुआ था।
    • वे मुंडा जनजाति के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्हें आदिवासी समुदाय 'धरती आबा' या भगवान के रूप में पूजते हैं।
    • उन्होंने 19वीं सदी के अंत में ब्रिटिश भूमि नीतियों, बेगार प्रथा और जमींदारों के शोषण के खिलाफ 'उलगुलान' (क्रांति) का नेतृत्व किया, जिसका उद्देश्य मुंडा राज की स्थापना था।
  • उलगुलान विद्रोह
    • 1899-1900 में खूंटी, तमाड़, सरवाड़ा और बंदगांव क्षेत्रों में केंद्रित यह विद्रोह ब्रिटिश वनों और भूमि अधिग्रहण के खिलाफ था।
    • बिरसा ने आदिवासियों को एकजुट कर 'अबुआ राज' (हमारा राज) का नारा दिया।​
    • विद्रोह को दबाने के बाद बिरसा को गिरफ्तार किया गया और 9 जून 1900 को रांची जेल में उनकी मृत्यु हो गई
    • लेकिन उनके प्रयासों से बाद में बेगार प्रथा समाप्त हुई और 1903 का टेनेंसी एक्ट लागू हुआ।​
  • राष्ट्रीय उत्सव
    • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 से इस दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की शुरुआत की
    • जिसमें 2023 में खूंटी के बिरसा कॉलेज में कार्यक्रम आयोजित हुआ।
    • 2024-2025 को बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर 'जनजातीय गौरव वर्ष' के रूप में मनाया जा रहा है।
    • राष्ट्रपति और अन्य नेता श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं
    • साथ ही पीएम-किसान जैसी योजनाओं का शुभारंभ होता है, जो आदिवासी कल्याण को दर्शाता है।

13. कौन-सी ओडिसी नृत्यांगना 2006 में पद्म श्री से सम्मानित होने वाली विदेशी मूल की पहली नर्तकी बनी थी? [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) इलियाना सितारिस्ती
Solution:
  • इलियाना सितारिस्ती (ओडिसी नृत्यांगना) वर्ष 2006 में पद्मश्री से सम्मानित होने वाली विदेशी मूल की पहली नर्तकी बनी थीं।
  • इलियाना इटली के बर्गमो की मूल निवासी हैं।
  • वह मयूरभंज छऊ की शिक्षिका हैं, जिसका अध्ययन उन्होंने गुरु हरिनायक के मार्गदर्शन में किया था।
  • जीवन परिचय
    • इलियाना सिटारिस्टी इटली में जन्मीं एक प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना और कोरियोग्राफर हैं
    • जो 1979 से भारत में रह रही हैं। उन्होंने गुरु केलुचरण महापात्र और संजुक्ता पाणिग्रही जैसे महान गुरुओं से ओडिसी नृत्य का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया।
    • वे भुवनेश्वर में स्थित हैं और ओडिसी के साथ-साथ मयूरभंज छऊ नृत्य में भी निपुण हैं, जिसका प्रशिक्षण उन्होंने गुरु हरि नायक से लिया।
  • उपलब्धियाँ और पुरस्कार
    • 2006 में ओडिसी नृत्य में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री प्रदान किया गया
    • जो किसी विदेशी मूल की नर्तकी को मिलने वाला पहला ऐसा सम्मान था।
    • इससे पहले, 1995 में उन्होंने फिल्म "युगांत" के लिए सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफी का 43वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता।
    • 1992 में उन्हें "नृत्य की कला के लिए लियोनाइड मासाइन" की मानद उपाधि मिली
    • जबकि 1996 में उन्होंने आर्ट विजन अकादमी की स्थापना की। सुर सिंगार संसद, मुंबई द्वारा उन्हें 'रसेश्वर पुरस्कार' भी प्रदान किया गया।
  • योगदान
    • उन्होंने 1994 में गुरु केलुचरण महापात्र के अधीन ओडिसी सीखने के बाद अपना नृत्य विद्यालय स्थापित किया और भुवनेश्वर के संगीत महाविद्यालय से छऊ में आचार्य पद प्राप्त किया।
    • इलियाना ने ओडिसी को मिश्रित नृत्य रूपों के साथ प्रयोग किया तथा विभिन्न संस्कृतियों के कलाकारों के साथ सहयोग कर इसे विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाया।
    • वे भारत और विदेशों में प्रदर्शन, शिक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य को बढ़ावा देती रहीं।
  • अन्य जानकारी
    • वे वर्तमान में भी ओडिसी और छऊ नृत्य को सिखाने व प्रदर्शित करने में सक्रिय हैं।
    • अन्य विकल्प जैसे मृणालिनी साराभाई (भारतीय मूल), सोफिया बुटेला (अभिनेत्री) या एरी नाकामुरा (बालेट नर्तकी) इस संदर्भ में फिट नहीं बैठते।
    • उनका कार्य भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर ले जाने का प्रतीक है।

14. सत्यजीत रे को वर्ष 1992 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। वह एक प्रसिद्ध ....... थे। [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) फिल्म निर्माता और निर्देशक
Solution:
  • सत्यजीत रे एक प्रसिद्ध भारतीय गीतकार, फिल्म निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक थे।
  • सत्यजीत रे को वर्ष 1992 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। इनका जन्म कलकत्ता में हुआ था। इनकी पहली फिल्म पाथेर पांचाली थी।
  • प्रारंभिक जीवन
    • सत्यजीत रे का जन्म 2 मई 1921 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में एक बंगाली ब्राह्मो परिवार में हुआ था।
    • उनके पिता प्रसिद्ध लेखक सुखमय रे थे, जिनकी असामयिक मृत्यु के बाद परिवार ने आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया।
    • रे ने अर्थशास्त्र की पढ़ाई की और रवींद्रनाथ टैगोर के शांतिनिकेतन में कला सीखी, जहां उनकी फिल्मों के प्रति रुचि जागृत हुई।
    • विज्ञापन एजेंसी में काम करते हुए उन्होंने 1947 में कलकत्ता का पहला फिल्म सोसाइटी स्थापित किया।
  • फिल्मी सफर की शुरुआत
    • उनकी पहली फिल्म पथेर पांचाली (1955) ग्रामीण बंगाल के एक गरीब परिवार की कहानी पर आधारित थी
    • जिसे बनाने के लिए उन्होंने अपनी सारी संपत्ति बेच दी।
    • यह फिल्म कान्स फिल्म फेस्टिवल में ग्रैंड प्रिक्स जीतकर भारतीय सिनेमा को विश्व पटल पर लाई।
    • इसके बाद अपराजितो (1956) और अपुर संसार (1959) के साथ अपु त्रयी पूरी हुई, जो एक बालक अपु के जीवन के विभिन्न चरणों को दर्शाती है।
  • प्रमुख फिल्में और शैली
    • रे ने कुल 36 फिल्में बनाईं, जिनमें डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्में भी शामिल हैं।
    • उनकी अन्य प्रसिद्ध फिल्में चारुलता (1964, एकाकी पत्नी की भावनाओं पर), जलसाघर (1958, संगीत और पतन पर), अभिजान (1970), आगंतुक और नायक हैं।
    • उनकी शैली यथार्थवादी, मानवीय भावनाओं से भरपूर और संगीत व छायांकन पर पूर्ण नियंत्रण वाली थी। वे स्वयं पटकथा, संगीत और डिजाइन करते थे।
  • साहित्यिक योगदान
    • रे एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने बंगाली साहित्य में जासूस फेलूदा और वैज्ञानिक प्रोफेसर शंकू जैसे लोकप्रिय पात्र रचे।
    • उनकी कहानियां और उपन्यास बच्चों से लेकर वयस्कों तक लोकप्रिय रहे।
  • पुरस्कार और सम्मान
    • 1992 में भारत रत्न (मरणोपरांत, पहले फिल्मकार)।
    • पद्म विभूषण, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार।​
    • 1992 में ऑस्कर के सम्मानजनक जीवनकालीन पुरस्कार।​
    • 32 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार।​
    • वे कान्स, वेनिस और बर्लिन जैसे फेस्टिवलों में सम्मानित एकमात्र भारतीय फिल्मकार थे।​
  • निधन और विरासत
    • 23 अप्रैल 1992 को उनका निधन हो गया।
    • रे ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दी और मानवीय मूल्यों, सामाजिक मुद्दों जैसे गरीबी, स्त्री अधिकारों को अपनी फिल्मों में उभारा।
    • उनकी विरासत आज भी विश्व सिनेमा को प्रेरित करती है।

15. वह 'घटम के देवता' (God of Ghatam) के नाम से भी जाने जाते हैं। पिछली पंक्ति में 'वह निम्न में से किसे संदर्भित करता है? [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) टी. एच. विनायकराम
Solution:
  • टी.एच. विनायकराम एक भारतीय तालवादक हैं। विनायकराम घटम पर अपनी महारत के लिए जाने जाते हैं।
  • घटम एक मिट्टी का बर्तन होता है। घटम का उपयोग दक्षिण भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक वाद्ययंत्र के रूप में किया जाता है।
  • जीवन परिचय
    •  जिनसे उन्हें बचपन से ही संगीत की प्रारंभिक शिक्षा मिली। उन्होंने घटम वादन में असाधारण प्रतिभा विकसित की
    • जो एक पारंपरिक मिट्टी का बर्तन है और दक्षिण भारतीय शास्त्रीय संगीत (कर्नाटक संगीत) में ताल वाद्य के रूप में प्रयोग होता है।
    • विनायकराम ने मात्र 14 वर्ष की आयु में ही अपने पहले संगीत समारोह में प्रदर्शन किया और जल्द ही वे इस क्षेत्र के शीर्ष कलाकारों में गिने जाने लगे।
  • घटम वादन में योगदान
    • घटम एक अनोखा वाद्ययंत्र है, जिसमें कलाकार विभिन्न भागों पर उंगलियों, हथेलियों और नाखूनों से विभिन्न तालें उत्पन्न करता है।
    • विनायकराम को 'घटम के देवता' इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने इस वाद्य को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
    • उन्होंने न केवल शास्त्रीय संगीत में बल्कि फ्यूजन संगीत और अंतरराष्ट्रीय सहयोगों में भी घटम को प्रमुखता दी।
    • उदाहरणस्वरूप, उन्होंने प्रसिद्ध सितार वादक पंडित रविशंकर और तबला नवाज़ जाकिर हुसैन के साथ कई प्रदर्शन किए।
    • उनके वादन की गति, जटिलता और मौलिकता ने उन्हें यह उपाधि दिलाई।
  • प्रमुख उपलब्धियां
    • विनायकराम को संगीत के क्षेत्र में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं।
    • इनमें पद्मभूषण (2009), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और ग्रैमी अवार्ड नामांकन शामिल हैं।
    • उन्होंने अमेरिकी बैंड 'ग्रेटफुल डेड' और जॉर्ज हैरिसन जैसे पाश्चात्य कलाकारों के साथ सहयोग किया
    • जिससे भारतीय ताल वाद्यों को वैश्विक पहचान मिली। वे आज भी सक्रिय हैं और युवा कलाकारों को प्रशिक्षित करते रहते हैं।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • 'घटम के देवता' की उपाधि उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे एसएससी, आरआरबी आदि के प्रश्नों में भी चर्चित बनाती है
    • जहां यह सामान्य ज्ञान का हिस्सा होता है।
    • यह उपाधि उनकी कला के प्रति समर्पण और नवाचार को दर्शाती है, जो शास्त्रीय संगीत की परंपरा को जीवंत रखती है।

16. 1921 में किसने विश्व भारती नामक प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थान की स्थापना की ? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) रबींद्रनाथ टैगोर
Solution:
  • विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारत के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता रबींद्रनाथ टैगोर ने वर्ष 1921 में विश्व भारती नामक प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थान की स्थापना की थी।
  • रबींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध रचना गीतांजलि है।
  • संस्थापक का परिचय
    • रवींद्रनाथ टैगोर (1861-1941) एक महान कवि, लेखक, दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार विजेता थे।
    • उन्होंने 1901 में शांतिनिकेतन में एक छोटे से विद्यालय की शुरुआत की
    • जो बाद में विकसित होकर विश्व भारती बना। टैगोर का दर्शन था
    • शिक्षा प्रकृति के साथ सामंजस्य में होनी चाहिए
    • इसलिए उन्होंने पारंपरिक कक्षाओं के बजाय खुली हवा में पढ़ाई पर जोर दिया।
  • स्थापना का इतिहास
    • विश्व भारती की औपचारिक स्थापना 23 दिसंबर 1921 को हुई
    • जब टैगोर ने अपने 1913 के नोबेल पुरस्कार की राशि से इसकी शुरुआत की।
    • इसका नाम "विश्व भारती" रखा गया, जिसका अर्थ है "विश्व का भारत के साथ मेल"।
    • इससे पहले शांतिनिकेतन एक आश्रम-स्कूल था
    • लेकिन टैगोर ने इसे वैश्विक संस्कृतियों के अध्ययन का केंद्र बनाया। 1951 में भारत सरकार ने इसे पूर्ण विश्वविद्यालय का दर्जा दिया।
  • उद्देश्य और विशेषताएं
    • टैगोर का सपना था कि यह संस्थान पूर्व और पश्चिम की संस्कृतियों का पुल बने।
    • यहां वेदांत, बौद्ध, जैन, इस्लाम, ईसाई आदि का समन्वयपूर्ण अध्ययन होता है।
    • शिक्षा का माध्यम प्रकृति, कला, संगीत और दर्शन है, न कि रटंत।
    • आज यह स्नातक, स्नातकोत्तर और अनुसंधान कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • स्थान: शांतिनिकेतन और श्रीनिकेतन, पश्चिम बंगाल।​
    • विशेषता: खुली कक्षाएं, वैश्विक छात्र-शिक्षक अनुपात, टैगोर की रचनाओं का प्रभाव।

17. किस भारतीय संगीतकार हस्ती का जन्मस्थान पश्चिम बंगाल है? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) बप्पी लहरी
Solution:
  • प्रसिद्ध भारतीय संगीतकार बप्पी लहरी का जन्म पश्चिम बंगाल में हुआ।
  • बप्पी लहरी ने भारतीय संगीत जगत में संश्लेषित डिस्को संगीत के उपयोग को लोकप्रिय बनाया।
  • एक वर्ष में 180 से अधिक गाने रिकॉर्ड करने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा मान्यता दी गई थी।
  • रवींद्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore)
    • रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल (तत्कालीन ब्रिटिश भारत) में हुआ था।
    • वे नोबेल पुरस्कार विजेता कवि, लेखक और संगीतकार थे, जिन्होंने रवींद्र संगीत की स्थापना की।
    • उन्होंने लगभग 2,000 से अधिक गीत रचे, जो बांग्ला भाषा के 'रबिंद्र संगीत' के रूप में प्रसिद्ध हैं
    • आज भी बंगाल की सांस्कृतिक पहचान हैं। उनका जन्मशताब्दी वर्ष 1961 में विशेष रूप से मनाया गया
    • उनके गीतों में प्रकृति, प्रेम, आध्यात्मिकता जैसे विषय प्रमुख हैं। टैगोर ने शांतिनिकेतन में वसंतोत्सव जैसे संगीत उत्सवों की शुरुआत भी की।
  • पंडित रविशंकर (Pandit Ravi Shankar)
    • पंडित रविशंकर का जन्म 7 अप्रैल 1920 को वाराणसी में हुआ था
    • लेकिन उनका बचपन का अधिकांश समय बनारस से कोलकाता, पश्चिम बंगाल में बीता, जहां उनकी संगीत शिक्षा हुई।
    • वे सितार के विश्वविख्यात वादक थे और भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक मंच पर ले गए।
    • उन्होंने बिली जीन किंग, जॉर्ज हarrison जैसे पश्चिमी कलाकारों के साथ सहयोग किया।
    • 2012 में उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी विरासत पश्चिम बंगाल के संगीत परंपरा से जुड़ी रही। वे 1962 के पद्म भूषण और अन्य सम्मानों से नवाजे गए।
  • अरिजीत सिंह (Arijit Singh)
    • आधुनिक बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय पार्श्व गायक अरिजीत सिंह का जन्म 25 अप्रैल 1987 को मुरशिदाबाद जिले, पश्चिम बंगाल में हुआ।
    • उन्होंने 'तुम ही हो' (अजनबी 2), 'चन्ना मेरेया' जैसे सुपरहिट गाने गाए हैं।
    • बचपन से ही संगीत की शिक्षा ली, जिसमें तबला और शास्त्रीय संगीत शामिल है।
    • उन्होंने फिल्मफेयर अवॉर्ड सहित कई पुरस्कार जीते हैं
    • पश्चिम बंगाल से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि पाई। 2025 में उन्हें पद्मश्री सम्मान मिला।
  • लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) - संबंध
    • हालांकि लता मंगेशकर का जन्म मध्य प्रदेश में हुआ, लेकिन उन्होंने पश्चिम बंगाल के संगीत दृश्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया
    • खासकर बंगाली गीतों में। लेकिन जन्मस्थान के संदर्भ में वे फिट नहीं होतीं।
  • अन्य उल्लेखनीय नाम
    • पंडित हरिप्रसाद चौरसिया: बांसुरी वादक, जिनका जन्म इलाहाबाद में हुआ लेकिन पश्चिम बंगाल से गहरा नाता।
    • गौहर जान: प्रारंभिक रिकॉर्डिंग कलाकार, कोलकाता से जुड़ीं।​
    • पंडित तेजेंद्र नारायण मजूमदार: सरोद वादक, पश्चिम बंगाल से, जिन्हें हाल ही में पद्मश्री मिला।​
    • अबीर हुसैन: सारोद वादक, बर्धमान, पश्चिम बंगाल से।

18. ....... ग्रैमी जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) तन्वी शाह
Solution:
  • तन्वी शाह ग्रैमी पुरस्कार जीतने वाली प्रथम भारतीय महिला हैं।
  • तन्वी शाह को 'जय हो' गीत के लिए 52वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में ए.आर. रहमान और गुलजार के साथ मोशन पिक्चर, टेलीविजन या अन्य विजुअल मीडिया के लिए लिखे गए सर्वश्रेष्ठ गीत का ग्रैमी अवॉर्ड साझा किया गया।
  • ग्रैमी जीत का विवरण
    • 52वें ग्रैमी अवॉर्ड्स (2010) में लॉस एंजिल्स के स्टेपल्स सेंटर में 'जय हो' को 'बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग रिटन फॉर मोशन पिक्चर ऑर अदर विजुअल मीडिया' श्रेणी में सम्मानित किया गया।
    • तन्वी ने इस गाने के स्पेनिश हिस्से के लिरिक्स लिखे थे, जिसके लिए उन्हें संगीतकार ए.आर. रहमान और हिंदी लिरिसिस्ट गुलजार के साथ यह पुरस्कार साझा करना पड़ा।
    • यह उपलब्धि उन्हें मात्र 25 साल की उम्र में हासिल हुई, जो भारतीय संगीत जगत के लिए ऐतिहासिक था।
  • करियर की शुरुआत और उपलब्धियां
    • तन्वी ने बचपन से ही संगीत की ट्रेनिंग ली और जल्द ही प्लेबैक सिंगिंग में कदम रखा।
    • उन्होंने स्नूप डॉग जैसे अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ भी काम किया है। ग्रैमी के अलावा, वे 'टंशा स्टूडियोज' नामक स्किनकेयर ब्रांड की मालकिन भी हैं
    • जो बॉडी ओडर से लड़ने वाले प्रोडक्ट्स बनाती है। उनका करियर दक्षिण भारतीय सिनेमा से बॉलीवुड और अब ग्लोबल स्टेज तक फैला हुआ है।​
  • भारतीय संदर्भ में महत्व
    • ए.आर. रहमान के बाद तन्वी शाह दूसरी भारतीय थीं जिन्होंने ग्रैमी जीता, लेकिन पहली महिला के रूप में उनका नाम इतिहास में दर्ज है।
    • बाद में रिकी केज, शंकर महादेवन जैसे कलाकारों ने भी यह पुरस्कार जीता, लेकिन तन्वी की उपलब्धि प्रेरणादायक बनी हुई है।
    • ग्रैमी, जो रिकॉर्डिंग एकेडमी द्वारा दिया जाता है, संगीत उद्योग की सर्वोच्च मान्यता है।
  • अन्य तथ्य
    • तन्वी ने 20 से अधिक वर्षों में कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों के लिए गाया।
    • वे चेन्नई बेस्ड हैं और आज भी संगीत इंडस्ट्री में सक्रिय हैं।
    • उनकी जीत ने भारतीय महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर साबित किया कि वे वैश्विक स्तर पर टक्कर ले सकती हैं।

19. डॉ. तीजन बाई, जिन्हें पद्म विभूषण (2019) से सम्मानित किया गया था, ....... राज्य की एक प्रसिद्ध भारतीय लोक गायिका और कलाकार हैं। [MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) छत्तीसगढ़
Solution:
  • डॉ. तीजन बाई, जिन्हें पद्म विभूषण, 2019 से सम्मानित किया गया था, वे छत्तीसगढ़ राज्य की एक प्रसिद्ध भारतीय लोक गायिका और कलाकार हैं।
  • देश-विदेश में अपनी कला का प्रदर्शन करने वाली तीजनबाई को बिलासपुर विश्वविद्यालय द्वारा डीलिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है।
  • प्रारंभिक जीवन
    • जब उस समय महिलाओं के लिए खुले मंच पर खड़े होकर गाना सामाजिक रूप से चुनौतीपूर्ण था।
    • पारंपरिक रूप से महिलाएं वेदमती शैली में बैठकर पंडवानी गाती थीं
    • लेकिन तीजन बाई ने पुरुषों की कापालिक शैली (खड़े होकर अभिनयपूर्ण गायन) अपनाई, जो उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
  • कलात्मक यात्रा
    • उनकी प्रतिभा को प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने पहचाना, जिन्होंने उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिलाया।
    • इसके बाद तीजन बाई ने फ्रांस, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन जैसे देशों में अपनी पंडवानी कला का प्रदर्शन किया।
    • 1988 में दूरदर्शन के 'भारत एक भोज' कार्यक्रम में भी उनकी प्रस्तुति प्रसारित हुई।
    • पंडवानी महाभारत के पांडवों की कथाओं पर आधारित लोक गीत-नाट्य है, जिसे तीजन बाई ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाया।
  • पुरस्कार और सम्मान
    • भारत सरकार ने उनकी कला के लिए 1988 में पद्मश्री (कुछ स्रोतों में 1987 उल्लेखित), 2003 में पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया।
    • अन्य पुरस्कारों में 1995 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2007 का नृत्य शिरोमणि, बिलासपुर विश्वविद्यालय से डी.लिट. की मानद उपाधि और छत्तीसगढ़ राज्य से इंदिरा कला सम्मान शामिल हैं।
    • 2019 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में उन्हें पद्म विभूषण प्रदान किया
    • जिससे वे छत्तीसगढ़ की पहली महिला बनीं जो इस सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने वाली लोक कलाकार बनीं।​
  • स्वास्थ्य और विरासत
    • तीजन बाई ने आर्थिक तंगी, सामाजिक पूर्वाग्रहों और स्वास्थ्य समस्याओं (जैसे कोरोनरी आर्टरी डिसीज, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, स्ट्रोक) का सामना किया, फिर भी अपनी कला को समर्पित रहीं।
    • वे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को विश्व पटल पर ले गईं और कई शिष्यों को प्रेरित किया।
    • उनकी जीवनी पर आधारित फिल्म या डॉक्यूमेंट्री की चर्चा भी होती रही है।​

20. निम्नलिखित में से किस भारतीय शास्त्रीय नर्तक/नर्तकी को भरतनाट्यम और ओडिसी दोनों नृत्य शैली में निपुणता हासिल है? [MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) सोनल मानसिंह
Solution:
  • सोनल मानसिंह एक भारतीय शास्त्रीय नर्तकी और भरतनाट्यम तथा ओडिसी दोनों नृत्य शैली में निपुणता हासिल की हैं।
  • वर्ष 2003 में इन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। सोनल मानसिंह का जन्म मुंबई में हुआ था।
  • प्राप्त पुरस्कार
    • उन्हें पद्म भूषण (1992) और पद्म विभूषण (2003) जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं
    • जो उनकी सबसे कम उम्र में प्राप्त उपलब्धियों को दर्शाते हैं।
    • ये पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से हैं, जो कला और सार्वजनिक सेवा के लिए दिए जाते हैं।
  • भरतनाट्यम की विशेषताएँ
    • भरतनाट्यम तमिलनाडु से उत्पन्न भारत का सबसे पुराना शास्त्रीय नृत्य रूप है।
    • इसमें स्थिर ऊपरी धड़, मुड़े पैर, जटिल पैरकर्म, अभिव्यंजक हस्तमुद्राएँ और चेहरे के भाव प्रमुख हैं।
    • यह पारंपरिक रूप से मंदिरों में देवदासियों द्वारा किया जाता था।
  • ओडिसी की विशेषताएँ
    • ओडिसी ओडिशा राज्य से निकला शास्त्रीय नृत्य है
    • जो तरल आंदोलनों, अनुग्रACE और मंदिर मूर्तियों से प्रेरित पोज़ के लिए प्रसिद्ध है।
    • इसके प्रदर्शन आध्यात्मिकता, पौराणिक कथाओं और प्राचीन संस्कृत ग्रंथों पर आधारित होते हैं।​
  • अन्य उल्लेखनीय नर्तक
    • शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में रुक्मिणी देवी अरुंडेल (भरतनाट्यम), केलुचरण महापात्रा (ओडिसी) और बिरजू महाराज (कथक) जैसे कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
    • हालांकि, सोनल मानसिंह विशेष रूप से इन दोनों शैलियों में पारंगत हैं।
  • भारतीय शास्त्रीय नृत्य संक्षेप में
    • भारत में आठ मान्यता प्राप्त शास्त्रीय नृत्य हैं
    • भरतनाट्यम, कथक, कथकली, कुचिपुड़ी, ओडिसी, मोहिनीअट्टम, मणिपुरी और सत्रीया। ये नृत्य तांडव (शिव) और लास्य (पार्वती) भावों पर आधारित हैं।