Solution:लोथल गुजरात में खंभात की खाड़ी के पास भोगवा और साबरमती नदियों के बीच स्थित है।
• लोथल में आयताकार बेसिन पाया गया है जिसे गोदी कहा जाता था।
• यह 218 मीटर लंबा और 37 मीटर चौड़ा है और चारों तरफ पकी हुई ईंटों से बंधा है।
• धौलावीरा (Dholavira) गुजरात के कच्छ जिले में स्थित सिंधु घाटी सभ्यता का एक महत्वपूर्ण और बड़ा पुरातात्विक स्थल है, जो अपनी अनूठी शहरी योजना, जल प्रबंधन प्रणालियों और पत्थरों की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है और 2021 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना, जो लगभग 4500 साल पुराना है और तीन भागों (गढ़, मध्य नगर और निचला नगर) में बंटा हुआ था।
• कालीबंगा (Kalibanga) भारत के राजस्थान राज्य के हनुमानगढ़ जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) का स्थल है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'काले रंग की चूड़ियाँ' है और यह घग्गर नदी (प्राचीन सरस्वती नदी) के तट पर विकसित हुई थी। यह अपने जुते हुए खेतों (ploughed fields) और हड़प्पा-पूर्व (pre-Harappan) व हड़प्पाकालीन (Harappan) दोनों चरणों के प्रमाणों के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ घरों के लिए कच्ची ईंटों और पक्की नालियों का उपयोग किया गया था।
• बनावली (Banawali) हरियाणा के फतेहाबाद जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण सिंधु घाटी सभ्यता का पुरातात्विक स्थल है, जो प्राचीन सरस्वती नदी (अब सूखी हुई) के तट पर बसा था और जहाँ प्री-हड़प्पा, हड़प्पा और उत्तर-हड़प्पा काल के साक्ष्य मिले हैं, जिसमें मिट्टी का हल, मनके, सीलें, तांबे के औजार और उन्नत नगर नियोजन के प्रमाण मिलते हैं, हालांकि यहाँ जल निकासी व्यवस्था उतनी विकसित नहीं थी।