प्राचीन साहित्य एवं साहित्यकार (UPPCS) Part-1

Total Questions: 50

31. 'मिलिंदपन्हो' राजा मिलिन्द तथा एक बौद्ध भिक्षु के मध्य संवाद रूप में है। वह भिक्षु थे - [U.P. P.C.S. (Pre) 2023]

Correct Answer: (b) नागसेन
Solution:पालि ग्रंथ 'मिलिंदपन्हो' में बौद्ध भिक्षु नागसेन तथा हिंद-यवन शासक मिनांडर (मिलिंद) के मध्य संवाद है।

32. भारतीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित मूलग्रंथों पर विचार कीजिए - [I.A.S. (Pre) 2022]

1. नेत्तिपकरण

2. परिशिष्टपर्वन

3. अवदानशतक

4. त्रिशष्टिलक्षण महापुराण

उपर्युक्त में कौन-से जैन ग्रंथ हैं?

Correct Answer: (b) केवल 2 और 4
Solution:परिशिष्टपर्वन (लेखक हेमचंद्र) तथा त्रिशष्टिलक्षण महापुराण (लेखक चाबुंद राय या चामुंड राय) जैन धर्म से संबंधित ग्रंथ हैं, जबकि नेत्तिपकरण तथा अवदानशतक बौद्ध ग्रंथ हैं।

33. वह धार्मिक पुस्तक, जिसमें कृषि कर्म की आठ विभिन्न अवस्थाओं का वर्णन मिलता है- [Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2021]

Correct Answer: (c) मिलिन्दपन्हो
Solution:मिलिन्दपन्हो नामक धार्मिक पुस्तक में कृषि कर्म की आठ (8) विभिन्न अवस्थाओं का वर्णन मिलता है। यह पुस्तक बौद्ध भिक्षु नागसेन द्वारा पालि भाषा में लिखी गई है। इस पुस्तक में नागसेन एवं हिंद-यवन शासक मिनांडर के बीच हुए वार्तालाप का वर्णन है।

34. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए- [U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002]

सूची-I (दरबारी कवी)सूची-II (राजा )
A. अमीर खुसरो1. चंद्रगुप्त द्वितीय
B. कालिदास2. समुद्रगुप्त
C. हरिषेण3. हर्षवर्धन
D. बाणभट्ट4. अलाउद्दीन खिलजी

कूट :

ABCD
(a)1234
(b)4123
(c)4321
(d)2413
Correct Answer: (b)
Solution:
Column 1 (सूची-I)Column 2 (सूची-II)
अमीर खुसरोअलाउद्दीन खिलजी
कालिदासचंद्रगुप्त द्वितीय
हरिषेणसमुद्रगुप्त
बाणभट्टहर्षवर्धन

35. 'राजतरंगिणी' के लेखक कल्हण के समय शासक था- [U.P.P.S.C. (GIC) 2010]

Correct Answer: (a) जयसिंह
Solution:'राजतरंगिणी' के लेखक कल्हण के समय कश्मीर का शासक जयसिंह (1128-1149 ई.) था। उसी के शासनकाल के दौरान 1148-1149 ई. में कल्हण ने अपनी महान कृति 'राजतरंगिणी' को पूरा किया। राजतरंगिणी में कुल 8 तरंग तथा 7826 श्लोक हैं। प्रथम तीन तरंगों में अत्यंत प्राचीन काल का कश्मीर का परंपरागत इतिहास है। चौथे से छठे तरंगों में कार्कोट तथा उत्पल वंशों का इतिहास है। सातवें और आठवें तरंगों में लोहार वंश का इतिहास दिया गया है।

36. कल्हण कृत राजतरंगिणी में कुल कितने तरंग हैं? [U.P.P.C.S. (Mains) 2015]

Correct Answer: (a) आठ
Solution:'राजतरंगिणी' के लेखक कल्हण के समय कश्मीर का शासक जयसिंह (1128-1149 ई.) था। उसी के शासनकाल के दौरान 1148-1149 ई. में कल्हण ने अपनी महान कृति 'राजतरंगिणी' को पूरा किया। राजतरंगिणी में कुल 8 तरंग तथा 7826 श्लोक हैं। प्रथम तीन तरंगों में अत्यंत प्राचीन काल का कश्मीर का परंपरागत इतिहास है। चौथे से छठे तरंगों में कार्कोट तथा उत्पल वंशों का इतिहास है। सातवें और आठवें तरंगों में लोहार वंश का इतिहास दिया गया है।

37. कल्हण की राजतरंगिणी को किसने आगे बढ़ाया ? [U.P.P.C.S. (Pre) 2000]

Correct Answer: (d) जोनराज एवं श्रीवर
Solution:कश्मीर के हिंदू राज्य का इतिहास हमें कल्हण की राजतरंगिणी से ज्ञात होता है। इस ग्रंथ की रचना कल्हण ने राजा जयसिंह (1128-1149 ई.) के शासनकाल में की थी। कश्मीर के शासक जैनुल आबदीन द्वारा संरक्षित दो विद्वानों जोनराज एवं उनके शिष्य श्रीवर ने कल्हण की राजतरंगिणी का आगे विस्तार किया।

38. 'सौंदरानंद' किसकी रचना है? [M.P.P.C.S. (Pre) 1991]

Correct Answer: (a) अश्वघोष
Solution:अश्वघोष कुषाण शासक कनिष्क के राजकवि थे। उनकी रचनाओं में तीन प्रमुख हैं- (1) बुद्धचरितम, (2) सौंदरानंद, (3) सारिपुत्रप्रकरण।

39. 'नागानंद', 'रत्नावली' एवं 'प्रियदर्शिका' के लेखक थे- [R.A.S./R.T.S. (Pre) 1999]

Correct Answer: (d) हर्षवर्धन
Solution:हर्षवर्धन को संस्कृत के तीन नाटक ग्रंथों का रचयिता माना जाता है-प्रियदर्शिका, रत्नावली तथा नागानंद।

40. हर्ष ने निम्नलिखित में से किन रचनाओं का लेखन किया था? [U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2014]

1. प्रियदर्शिका

2. नागानंद

3. हर्षचरित

4. रत्नावली

नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर अपना उत्तर दीजिए।

कूट :

Correct Answer: (b) 1, 2 और 4
Solution:हर्षवर्धन को संस्कृत के तीन नाटक ग्रंथों का रचयिता माना जाता है-प्रियदर्शिका, रत्नावली तथा नागानंद।