बौद्ध धर्म (UPPCS) Part-3

Total Questions: 38

21. 'नव नालंदा महाविहार' किसके लिए विख्यात है? [48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008]

Correct Answer: (c) पाली अनुसंधान संस्थान
Solution:'नव नालंदा महाविहार' बौद्ध अध्ययन का आधुनिक केंद्र है। 20 नवंबर, 1951 को इसकी आधारशिला रखी गई थी। इस केंद्र में बौद्ध एवं पाली अनुसंधान संस्थान हैं। यहां बड़ी संख्या में श्रीलंका, जापान, कोरिया, तिब्बत, भूटान आदि देशों से पाली एवं बौद्ध अध्ययन पर अनुसंधान हेतु विद्यार्थी आते हैं।

22. निम्नलिखित में से कौन-से बौद्ध धर्म और जैन धर्म दोनों में समान रूप से विद्यमान थे? [I.A.S. (Pre) 1996]

 

1. तप और भोग की अति का परिहार

2. वेद प्रामाण्य के प्रति अनास्था

3. कर्मकांडों की फलवत्ता का निषेध

4. प्राणियों की हिंसा का निषेध (अहिंसा)

नीचे दिए हुए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर का चयन कीजिए-

कूट :

Correct Answer: (b) 2, 3 और 4
Solution:तप (आत्मदमन) और भोग की अति का परिहार एवं मध्यम मार्ग का अनुसरण केवल बौद्ध धर्म में किया गया था, जैन धर्म में नहीं। जबकि वेदों की प्रामाण्यता के प्रति अनास्था, कर्मकांडों की फलवत्ता का निषेध एवं प्राणियों की हिंसा का निषेध दोनों धर्मों में किया गया है।

23. प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से बौद्ध धर्म और जैन धर्म दोनों में समान रूप से विद्यमान था/थे? [I.A.S. (Pre) 2012]

1. तप और भोग की अति का परिहार

2. वेद-प्रामाण्य के प्रति अनास्था

3. कर्मकांडों की फलवत्ता का निषेध

निम्नलिखित कूटों के आधार पर सही उत्तर चुनिए :

 

Correct Answer: (b) केवल 2 और 3
Solution:तप (आत्मदमन) और भोग की अति का परिहार एवं मध्यम मार्ग का अनुसरण केवल बौद्ध धर्म में किया गया था, जैन धर्म में नहीं। जबकि वेदों की प्रामाण्यता के प्रति अनास्था, कर्मकांडों की फलवत्ता का निषेध एवं प्राणियों की हिंसा का निषेध दोनों धर्मों में किया गया है।

24. निम्नलिखित में से कौन-सी बात बौद्ध धर्म तथा जैन धर्म में समान नहीं है? [44th B.P.S.C. (Pre) 2000]

Correct Answer: (c) आत्म दमन
Solution:तप (आत्मदमन) और भोग की अति का परिहार एवं मध्यम मार्ग का अनुसरण केवल बौद्ध धर्म में किया गया था, जैन धर्म में नहीं। जबकि वेदों की प्रामाण्यता के प्रति अनास्था, कर्मकांडों की फलवत्ता का निषेध एवं प्राणियों की हिंसा का निषेध दोनों धर्मों में किया गया है।

25. भगवान बुद्ध ने निम्नलिखित चार आर्य सत्यों का प्रतिपादन किया। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके उन्हें सही क्रम में रखिए: [U.P.P.C.S. (Pre) 2006]

A. दुःख है।

B. दुःख का निरोध है।

C. दुःख निरोध का मार्ग है।

D. दुःख का कारण है।

कूट :

Correct Answer: (a) ADBC
Solution:भगवान बुद्ध ने जिन चार आर्य सत्यों का उपदेश दिया, वे इस प्रकार हैं- दुःख- संसार में सर्वत्र दुःख है। जीवन दुःखों एवं कष्टों से पूर्ण है।

दुःख समुदय प्रत्येक वस्तु का कोई-न-कोई कारण अवश्य होता है।

अतः दुःख का भी कारण है।

दुःख निरोध दुःख का अंत संभव है।

दुःख निरोधगामिनी प्रतिपदा उपाय अष्टांगिक मार्ग है। दुःख के मूल अविद्या के विनाश का

26. बौद्ध तथा जैन दोनों ही धर्म विश्वास करते हैं कि- [U.P.P.C.S. (Pre) 1996]

Correct Answer: (a) कर्म तथा पुनर्जन्म के सिद्धांत सही हैं।
Solution:बुद्ध तथा महावीर दोनों ही छठी शताब्दी ई.पू. की धार्मिक क्रांति के अग्रदूत थे। इन दोनों ने वैदिक कर्मकांडों तथा वेदों की अपौरुषेयता का समान रूप से विरोध किया। अहिंसा तथा सदाचार पर दोनों ने बल दिया तथा दोनों ही कर्मवाद, पुनर्जन्म में विश्वास रखते थे।

27. बौद्ध दर्शन के अनुसार विचार कीजिए- [U.P.P.C.S. (Pre) 2006]

कथन (A) : पुनर्जन्म नहीं होता है।

कारण (R) : आत्मा की सत्ता नहीं है।

निम्नलिखित कूट से अपना उत्तर चुनिए :

कूट :

Correct Answer: (d) (A) गलत है; किंतु (R) सही है।
Solution:प्रतीत्यसमुत्पाद ही बुद्ध के उपदेशों का सार है। ब्राह्मण ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित वेदों की अपौरुषेयता एवं आत्मा की अमरता के सिद्धांत को उन्होंने स्वीकार नहीं किया; परंतु आत्मा के अस्तित्व को अस्वीकार करने के बावजूद वे पुनर्जन्म तथा कर्म के सिद्धांत को मानते थे। उनके अनुसार जीवन विभिन्न अवस्थाओं की संतति है, जो एक-दूसरे पर निर्भर करती है। किसी अवस्था की उत्पत्ति उसकी पूर्ववर्ती अवस्था से होती है। स्पष्ट है कि कथन (A) गलत है; किंतु (R) सही है।

28. बौद्ध धर्म के विषय में कौन-सा कथन सही है? [U.P.P.C.S. (Pre) 1998]

(1) उसने वर्ण एवं जाति को अस्वीकार नहीं किया।

(2) उसने ब्राह्मण वर्ग की सर्वोच्च सामाजिक कोटि को चुनौती दी।

(3) उसने कुछेक शिल्पों को निम्न माना।

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-

कूट :

Correct Answer: (c) 1, 2 तथा 3
Solution:बौद्ध धर्म में वर्णव्यवस्था को स्वीकार तो किया गया, लेकिन उसने ब्राह्मण वर्ण की सर्वोच्च सामाजिक स्थिति को स्वीकार नहीं किया। बौद्ध धर्म में कुछ शिल्पों को निम्न माना गया है।

29. बौद्ध धर्म के विस्तार के कारणों में सम्मिलित थे- [U.P.P.C.S. (Pre) 2009]

1. धर्म की सादगी

2. दलितों के लिए विशेष अपील

3. धर्म की मिशनरी भावना

4. स्थानीय भाषा का प्रयोग

5. दार्शनिकों द्वारा वैदिक भावना की सुदृढ़ता

नीचे दिए कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

कूट :

 

Correct Answer: (c) 1,2,3 और 4
Solution:बौद्ध धर्म की सादगी, दलितों के लिए विशेष अपील, मिशनरी भावना तथा स्थानीय भाषा का प्रयोग बौद्ध धर्म के विस्तार के प्रमुख कारणों में सम्मिलित थे, जबकि दार्शनिकों द्वारा वैदिक भावना की सुदृढ़ता इसमें शामिल नहीं थी।

30. आरंभिक मध्ययुगीन समय में बौद्ध धर्म का पतन किस/किन कारण/ कारणों से शुरू हुआ? [I.A.S. (Pre) 2010]

1. उस समय तक बुद्ध, विष्णु के अवतार समझे जाने लगे और वैष्णव धर्म का हिस्सा बन गए।

2. अंतिम गुप्त राजा के समय तक आक्रमण करने वाली मध्य एशिया की जनजातियों ने हिंदू धर्म को अपनाया और बौद्धों को सताया।

3. गुप्त वंश के राजाओं ने बौद्ध धर्म का पुरजोर विरोध किया।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Correct Answer: (a) केवल 1
Solution:आरंभिक मध्ययुगीन समय में भारत में बौद्ध धर्म का पतन इसलिए हुआ कि उस समय बुद्ध, विष्णु के अवतार समझे जाने लगे और वैष्णव धर्म का हिस्सा बन गए। कथन 2 और 3 सही नहीं हैं। अतः अभीष्ट उत्तर विकल्प (a) होगा।