ब्रह्मांड (विश्व का भूगोल)

Total Questions: 29

11. 1796 में किस वैज्ञानिक ने नीहारिका-परिकल्पना (nebular hypothesis) को संशोधित किया ? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) पियरे लाप्लास
Solution:
  • जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट ने 1755 ई. में ग्रहों की उत्पत्ति से संबंधित वायव्य राशि परिकल्पना का प्रतिपादन किया
  • जिसे 1796 ई. में गणितज्ञ पियरे लाप्लास ने संशोधित किया। यह सिद्धांत नीहारिका परिकल्पना के नाम से जाना जाता है।
  • नीहारिका परिकल्पना का सार
    • मूल विचार: सूर्य और सौर मंडल के ग्रह एक बड़े हटते धूल-गैस के बादल से संघनित होकर बने, जिसे नेबुलर डिस्क में चपटा होकर सौर व्यवस्था बन गई।
    • कांट के विचार से प्रारम्भ हुआ यह मॉडल, लेकिन समय के साथ कुछ समीकरण और धारणाएँ बदलकर और स्पष्ट की गईं।
  • 1796 में क्या हुआ
    • फ्रांसीसी गणितज्ञ-खगोलशास्त्री पियरे-साइमों लाप्लास ने इस सिद्धांत को एक स्पष्ट, संशोधित फ्रेम में प्रस्तुत किया।
    • उनका मुख्य योगदान यह था कि नेबुलर डाइड (नेबुलर बादल) के भीतर उपस्थित धूल-गैस के संकुचन और गिरावट से गैस-धूल का डिस्क बनती है
    • जिससे प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क विकसित होती है
    • अंततः सूर्य तथा ग्रह निर्माण होता।
    • इस संशोधन ने Kant के शुरुआती विचारों को मजबूत किया पर कुछ बिंदुओं को सुधारा भी, जिससे यह विचार और व्यापक रूप से स्वीकार्य हुआ ।​
  • संशोधन का महत्व
    • लाप्लास ने यह स्पष्ट किया कि डिस्क-आधारित संरचना क्यों चपटी बनती है
    • ग्रह-उत्पत्ति की प्रक्रिया कैसे क्रमबद्ध होती है, जिससे सूर्य-ग्रहों की सामान्य संरचना की समझ बढ़ी ।​
    • यह संशोधन नेबुलर परिकल्पना को आधुनिक ग्रह-उत्पत्ति सिद्धांतों की दिशा में अग्रसर करता है
    • भले ही बाद के जीरो-या-रोशन मॉडलों में उसकी धारणाओं में परिवर्तन आते रहे ।​
  • संछेप में
    • 1796 में नेबुलर परिकल्पना को सुधारने और उसे व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत करने वाले प्रमुख व्यक्तित्व पियरे लाप्लास थे
    • जिन्होंने नेबुलर ढहने से प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क बनने, और उससे सूर्य-ग्रहों के निर्माण की प्रक्रिया को स्पष्ट किया ।​
  • उल्लेखित स्रोत
    • नेबुलर परिकल्पना के इतिहास और लाप्लास के संशोधन के बारे में शिक्षाप्रद सारों के साथ स्पष्ट विवरण मौजूद हैं ।​

12. ब्रह्मांड की स्थिर अवस्था की संकल्पना के बारे में किस वैज्ञानिक ने विचार किया था? [CGL (T-I) 14 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) फ्रेड हॉयल
Solution:
  • ब्रह्मांड की स्थिर अवस्था की संकल्पना के बारे में फ्रेड हॉयल ने विचार किया था।
  • ब्रह्मांड की उत्पत्ति का सबसे आधुनिक सिद्धांत विस्तारवादी या महाविस्फोट सिद्धांत है।
  • इस सिद्धांत का प्रतिपादन जॉर्ज लेमेंतेयर ने वर्ष 1927 में किया था, जिसे वर्ष 1949 में फ्रेड हॉयल द्वारा 'बिग बैंग' नाम दिया गया।
  • स्थिर अवस्था सिद्धांत की उत्पत्ति और प्रमुख विचार
    • फ्रेड हर्रे (Fred Hoyle) ने 1948 के आसपास स्थिर अवस्था सिद्धांत के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई।
    • उनके साथ Hermann Bondi और Thomas Gold ने मिलकर यह मॉडल प्रस्तुत किया
    • जिसका उद्देश्य ब्रह्मांड के निरंतर विस्तार के बीच भी समग्र घनत्व और यथार्थतः संरचना स्थिर रहने का कथन देना था।
    • यह तीनों वैज्ञानिक इसे स्थिर अवस्था ब्रह्माण्ड विज्ञान (Steady State Cosmology) के नाम से प्रस्तुत करते हैं ।​
  • प्रमुख विचार:
    • ब्रह्मांड का घनत्व लगातार स्थिर रहता है, भले ही फ्रेम-आउट (Hubble-type) विस्तार हो रहा हो
    • नए पदार्थ का निरंतर सृजन होता रहता है ताकि विस्तार के कारण घटता घनत्व पुनः स्थिर बना रहे—यह ब्रह्मांड की स्थिर अवस्था को बनाए रखता है ​
    • बिग बैंग सिद्धांत के विकल्प के रूप में स्थिर अवस्था को प्रस्तुत किया गया था, जो शुरूआत/अंत के अस्तित्व को प्रश्नचिह्न लगाता है
  • प्रमुख योगदान और संवाद
    • फ्रेड Hoyle के अतिरिक्त Bondi और Gold इस सिद्धांत के सह-प्रस्तावक रहे, और उनकी संयुक्त प्रस्तुति ने स्थिर अवस्था की एक संगठित रूपरेखा दी ​
    • इस विचार को आकाशगंगाओं के वितरण, ब्रह्मांडीय विस्तार के साथ स्थिर घनत्व का तर्क और नई सृजन प्रक्रियाओं के परिकल्पनाओं के साथ जोड़ा गया
    • हालांकि समय के साथ observational evidence ने इसे चुनौती दी ।​
  • स्थिर अवस्था बनाम बिग बैंग के प्रमाण
    • बिग बैंग सिद्धांत के पक्ष में बहुआयामी observational प्रमाण सामने आए:
    • Hubble के विस्तार निष्कर्षों से ब्रह्मांड का विस्तार स्पष्ट हुआ ।​
    • CMB की खोज और उसकी अत्यंत ठंडी, एकीकृत पृष्ठभूमि ने ब्रह्मांड के अत्यंत प्रारम्भिक अवस्था की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत की, जो स्थिर अवस्था के अनुरूप नहीं था
    • लघु-विस्फोट (quasi-steady state) जैसी वैकल्पिक सुधार-स्थापना भी प्रस्तावित हुई, परंतु वे भी observational data से समर्थित नहीं दिखीं ।
  • समकालीन स्थिति और प्रभाव
    • आज का मानक ढांचा बिग बैंग सिद्धांत है और स्थिर अवस्था सिद्धांत का व्यापक रूप से कम स्वीकार किया जाता है
    • किन्तु Hoyle, Bondi और Gold के विचार ने ब्रह्मांड विज्ञान के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण क्रिया-कलाप के रूप में भूमिका निभाई और वैज्ञानिक बहसों को प्रेरित किया ।​
    • इसके cited इतिहास से यह भी स्पष्ट होता है कि विज्ञान में वैकल्पिक मॉडल्स और उनकी आलोचनात्मक परीक्षण से सत्यापन/अपव्याख्या कैसे होते हैं
    • जो वर्तमान सिद्धांतों के मजबूत आधार बनाते हैं ।​
  • स्पष्टीकरण और संदर्भ
    • फ्रेड Hoyle, Bondi, और Gold द्वारा स्थिर अवस्था सिद्धांत की स्थापना के बारे में समीक्षा
    • इस सिद्धांत के बिंदुवार सार को एक सारग्रहण article में देखा जा सकता है ।​
    • स्थिर अवस्था सिद्धांत के हिंदी-स्तर पर संक्षेप में वर्णन के लिए भी कई शिक्षक-स्तर के पन्ने उपलब्ध हैं
    • जो Hoyle और उनके सहयोगियों के योगदान को रेखांकित करते हैं ।​

13. किस ग्रह पर 300 वर्षों से भी अधिक समय से पृथ्वी से दोगुना चौड़े घूमते हुए अंडाकार बादल, जिनको 'ग्रेट रेड स्पॉट' कहा जाता है, देखे गए हैं? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) बृहस्पति
Solution:
  • बृहस्पति ग्रह पर 300 वर्षों से भी अधिक समय से पृथ्वी से दोगुना चौड़े घूमते हुए अंडाकार बादल, जिनको 'ग्रेट रेड स्पॉट' कहा जाता है, देखे गए हैं।
  • बृहस्पति अपने अक्ष पर सौरमंडल का सर्वाधिक तेज गति से घूर्णन करने वाला ग्रह है।
  • पूर्ण विवरण और विश्लेषण
    • कौन सा ग्रह: ग्रेट रेड स्पॉट बृहस्पति (Jupiter) ग्रह पर स्थित एक स्थिर दाब-घटक अंडाकार तूफान है. यह ग्रह के दक्षिणी गोलार्ध में फैला हुआ है.​
    • आकार और प्रदर्शन: इसका आकार व्यापक रूप से पृथ्वी के दायरे से बड़ा माना गया है
    • ऐतिहासिक नज़रिए से पहली शुरुआती मापों में डायामीटर पृथ्वी से बड़े-से-बड़े बताए गए, और आधुनिक अवलोकनों के अनुसार यह लगभग 16,000 किलोमीटर चौड़ा है
    • जो पृथ्वी की चौड़ाई से लगभग 1.3 गुना अधिक है
    • जबकि समय के साथ आकार थोड़ा सिकुड़ रहा है. शुरुआती अनुमान 1800 के दशक के अंत में बहुत बड़ा माना गया था
    • 2017 की पुष्टि में यह 16,000 किमी चौड़ा पाया गया.​
    • अवधि और धारणा: यह तूफान लगभग 350 वर्षों से चल रहा है
    • कुछ स्रोत इसे "400 वर्ष" तक भी बताते हैं, जो इसकी दीर्घायु का संकेत है
    • यह एक एंटीसाइक्लोन प्रकार का तूफान है, जहाँ उच्च दबाव केंद्र के चारों ओर हवाएँ घूमती हैं.​
    • गहराई और संरचना: जैनो (Juno) स्पेसक्राफ्ट के डेटा के आधार पर तूफान की गहराई ग्रह के बादलों के नीचे लगभग 200–300 किमी (लगभग 0.2–0.3 हजार किमी) तक डूबती है
    • जिससे यह पदार्थ-स्तर पर गहरा अंश बनाता है
    • ग्रेट रेड स्पॉट बाहरी पोस्ट-घटकों के भीतर फैला एक अत्यंत गहरा और विशाल तूफान है
    • जिसका रंग लाल रहने के पीछे की वजह अभी भी स्पष्ट नहीं है; रंग विज्ञान के अनुसार यह बादलों के प्रकारों और रसायनों के मिश्रण से बनता है.​
    • क्यों बना रहता है: बृहस्पति lacks a solid surface, जिससे तूफानों को बिना ठोस जमीन के स्थिर रहने और ऊर्जा स्रोत से चले रहने में मदद मिलती है
    • ग्रेट रेड स्पॉट की हवाएँ 400 मील प्रति घंटे (약 640 किमी/घंटा) तक पहुँचती हैं
    • जो पृथ्वी के सबसे तेज़ तूफानों से कहीं अधिक है
    • वहाँ के वातावरण में बारंबार रासायनिक और ऊर्जीय प्रक्रियाओं के कारण ऐसी विशाल स्थिर संरचना लंबे समय तक टिक जाती है.​
    • आधुनिक स्थिति और नवीनताएँ: नवीन नेविगेशन और तस्वीरों के अनुसार ग्रेट रेड स्पॉट आकार में धीरे-धीरे सिकुड़ रहा है
    • अभी भी पृथ्वी से दोगुना चौड़ा है; नासा के जuno मिशन के डेटा के अनुसार यह तूफान अभी भी सक्रिय है
    • ग्रह के बादलों के नीचे गहराई तक फैला हुआ है.​

14. क्षुद्रग्रह पट्टी (Asteroid belt) किन दो ग्रहों के बीच स्थित है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (III-पाली), कांस्टेबिल GD 3 मार्च, 2019 (II-पाली]

Correct Answer: (a) मंगल और बृहस्पति
Solution:
  • क्षुद्रग्रह पथरीले और धातुओं के ऐसे पिंड हैं, जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
  • अधिकांश क्षुद्रग्रह बृहस्पति और मंगल के बीच की एक पट्टी में स्थित हैं।
  • व्यापक विवरण
    • स्थान और आकार: क्षुद्रग्रह पट्टी सूर्य के चारों ओर एक टोरेस (torus) आकार का क्षेत्र है
    • जो मुख्यता मंगल और बृहस्पति की कक्षाओं के बीच फैला है। यह क्षेत्र कई लाख से अरबों पिंडों को समेटे रहता है
    • जो ठोस चट्टानी और धातु-युक्त अवयवों से बने होते हैं, और इनमें विविध आकार के पिंड शामिल होते हैं
    • कभी-कभी छोटे चट्टान के टुकड़े भी मिलते हैं, तो कभी सेरेस जैसी बड़ी वस्तुएँ भी मिलती हैं।​
    • क्यों स्थापित है: प्रारम्भिक सौर मंडल के अवशेष होने के कारण यह पट्टी कभी ग्रह बनने में असफल रहे पिंडों का समूह माना जाता है।
    • इनमें से कई पिंड असमान गुरुत्वीय प्रेरकों के कारण एक-दूसरे से टकराते-छिटकते रहे, जिससे पूरे क्षेत्र का संरचनात्मक गठन बना रहा।​
    • प्रमुख पिंड और संरचना: क्षुद्रग्रह पट्टी के भीतर सेरेस, वेस्टा, पलास आदि प्रमुख पिंड बताए जाते है
    • इनमें से सेरेस एक बौना ग्रह के रूप में वर्गीकृत हो चुका है, जबकि अन्य पिंड भी वैज्ञानिक अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
    • यह पिंड समूह मंगल और बृहस्पति की कक्षाओं के बीच स्थित है और ग्रहों के बीच गैस-डायन-आवास से दूरी पर है।​
    • बाहरी बनाम आंतरिक भाग: आंतरिक भाग आम तौर पर मंगल के पास शुरू होकर मध्य भाग तक फैला है
    • जबकि बाहरी भाग में बृहस्पति की gravitational resonances प्रभावी भूमिका निभाते हैं
    • शोध में यह भी पाया गया है कि ग्रहीय गुरुत्वाकर्षण resonances के कारण पिंडों की वेग-धारा समय-समय पर बदलती रहती है।​​
    • संदर्भित तथ्य और गलत धारणाएं: क्षुद्रग्रह पट्टी मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित है
    • केवल उनके बीच के खाली स्थान में नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में है
    • बृहस्पति का ग्रेट रेड स्पॉट और अन्य ग्रह-विशिष्ट विशेषताएं इस क्षेत्र के पिंडों के अध्ययन में सहायक नहीं बल्कि एक अतिरिक्त पृष्ठभूमि बनाते हैं।

15. अंतरिक्ष में प्रवेश करने पर उल्कापिंड वायुमंडल की किस परत में जल जाते हैं? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) मध्यमंडल
Solution:
  • अंतरिक्ष में प्रवेश करने पर उल्कापिंड वायुमंडल की मध्यमंडल परत में जल जाते हैं।
  • उल्का आकाश में (पृथ्वी के वायुमंडल में) प्रकाश की चमकती हुई चमकीली लकीर सदृश होते हैं, जिन्हें टूटने वाला तारा भी कहा जाता है।
  • विस्तार:
    • मध्यमंडल वह परत है जो समतापमंडर के ऊपर और बाह्य वायुमण्डल के नीचे स्थित है
    • सामान्यतः लगभग 50 से 85 किलोमीटर ऊँचाई तक फैली होती है.​
    • जब उल्कापिंड इस परत में प्रवेश करता है, तो वायुरोध, घर्षण और तेज ताप से तेजी से गर्म होकर जलने लगता है।
    • यह वही दीर्घविधि है जहाँ अधिकतर उल्काएं पृथ्वी की सतह तक पहुँचने से पहले समाप्त हो जाती हैं.​
    • मध्यमंडल का तापमान आम तौर पर काफी ठंडा रहता है
    • (-90°C के आसपास ऊँचाई के अनुसार), फिर भी घर्षण से निकलने वाली गर्मी उसे जलाने के लिए पर्याप्त हो जाती है.​
    • इस प्रक्रिया के कारण अक्सर आग उगलती चिंगारी (meteor/शेष) दिखते हैं जिन्हें हम ‘टेक्स्चरिंग पूँछ’ के साथ देखते हैं
    • वही क्षण उल्काओं का जला जाना होता है.​

16. निम्नलिखित में से कौन-सा हमारे सौरमंडल का बौना ग्रह (ड्वार्फ प्लैनेट) है? [MTS (T-I) 12 अक्टूबर, 2021 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) मेकमेक
Solution:
  • मेकमेक हमारे सौरमंडल का बौना ग्रह (ड्वार्फ प्लैनेट) है, जबकि गैनिमीड, कैलिस्टो एवं यूरोपा बृहस्पति ग्रह के उपग्रह हैं।
  • बौने ग्रहों की परिभाषा
    • बौना ग्रह एक खगोलीय पिंड होता है जो सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाता है, पर्याप्त द्रव्यमान वाला होता है
    • जो गोलाकार आकार ग्रहण करने के लिए पर्याप्त गुरुत्वाकर्षण उत्पन्न करता है
    • लेकिन अपने कक्षापथ के आसपास अन्य पिंडों को साफ नहीं कर पाता। वर्तमान में पांच आधिकारिक बौने ग्रह हैं
    • प्लूटो, एरिस, हौमेया, माकेमाके और सीरेस। ये काइपर बेल्ट, क्षुद्रग्रह घेरे या उसके आगे स्थित हैं ।​
  • प्रमुख बौने ग्रहों की सूची
    • प्लूटो (यम): पहले नौवां ग्रह माना जाता था, व्यास लगभग 2370 किमी, चार चंद्रमा (चारन, निक्स, हाइड्रा, केरबेरस)। काइपर बेल्ट में स्थित ।​
    • एरिस: प्लूटो से बड़ा, व्यास 2326 किमी, एक चंद्रमा डिस्नोमीआ। सबसे दूर स्थित ।​​
    • हौमेया: अंडाकार आकार, तेज घूर्णन के कारण, व्यास 1600x1000 किमी, दो चंद्रमा। काइपर बेल्ट ।​
    • माकेमाके: लाल रंग का, व्यास 1430 किमी, एक चंद्रमा। काइपर बेल्ट ।​
    • सीरेस: क्षुद्रग्रह घेरे में सबसे बड़ा, व्यास 946 किमी, बर्फीला सतह। डावन मिशन ने इसका अध्ययन किया ।​
  • खोज और महत्व
    • प्लूटो की खोज 1930 में हुई, लेकिन 2006 में बौना ग्रह घोषित। एरिस की खोज ने विवाद बढ़ाया।
    • ये ग्रह सौरमंडल के बाहरी भागों की संरचना समझने में मदद करते हैं
    • जैसे काइपर बेल्ट जो प्राचीन पदार्थों से भरा है।
    • भविष्य में और बौने ग्रह मिल सकते हैं।​​

17. निम्नलिखित में से कौन-सा हमारे सौरमंडल का भीतरी ग्रह नहीं है? [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) बृहस्पति
Solution:
  • बृहस्पति हमारे सौरमंडल का भीतरी ग्रह नहीं है। सूर्य, आठ ग्रह एवं इनके अनेक उपग्रह एक पूरे सौर परिवार की रचना करते हैं
  • जिसे हम सौरमंडल कहते हैं। बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल ग्रह को आतंरिक या भीतरी ग्रह की श्रेणी में रखा जाता है।
  • भीतरी ग्रहों की परिभाषा
    • भीतरी ग्रह वे ग्रह होते हैं जो सूर्य के सबसे नजदीकी छह से दूरी के भीतर आते हैं
    • जिन्हें अक्सर ग्रह-आयाम के हिसाब से चट्टानी (टेरिस्ट्रीय) संरचना वाले माना जाता है
    • बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल। इनके अलावा कभी-कभी ज्वीयन (गैसीय) गुणधर्म कम होते हैं, पर वे सूर्य के पास हैं
    • उनके पास ठोस पिंड होते हैं. Pluto इन मानदंडों में नहीं आता क्योंकि यह कुइपर बेल्ट में स्थित एक बड़ा पिंड है
    • इसकी आयतन/गठन थोड़ा भिन्न है; 2006 में IAU ने Pluto को बौना ग्रह घोषित किया.​​
  • Pluto का दर्जा
    • Pluto का पुनर्मूल्यांकन IAU के तीन मानदंडों के comparison में किया गया था; Pluto केवल दो मानदंडों को पूर्ण करता है
    • तीसरे को पूरा नहीं करता, इस कारण उसे बौना ग्रह घोषित किया गया. यह उसे भीतरी ग्रहों की परिभाषा से बाहर कर देता है।​
  • संपूर्ण संदर्भ
    • बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल को अक्सर भीतर के ग्रह कहा जाता है क्योंकि ये सूर्य के सबसे नजदीकी भाग में स्थित चट्टानी पिंड हैं
    • Pluto, जो Kuiper Belt region में स्थित है, यह वर्गीकरण IAU के अनुसार अलग है.​​
    • अन्य संदर्भों में भी Pluto को कभी-कभी “हाई-डायनेमीक” या Kuiper Belt Object (KBO) के रूप में वर्णित किया जाता है
    • आधिकारिक ग्रह-संरचना के मानदंड के अनुसार Pluto बौना ग्रह है, ग्रह नहीं.​
  • यदि चाहें, नीचे एक संक्षिप्त तालिका भी दे सकता/सकती हूँ ताकि स्पष्टता बढ़े:
    • भीतरी ग्रह: बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल (टेरिस्ट्रीय, ठोस पिंड)

18. पृथ्वी को कई टाइम जोन में विभाजित किया गया है। हर एक टाइम जोन कितने डिग्री तय करता है? [CHSL (T-I) 16 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 15°
Solution:
  • प्रत्येक टाइम जोन 15° देशांतर को आच्छादित करता है। दुनिया में 24 टाइम जोन हैं
  • इसलिए पृथ्वी को 360°/24 = 15 डिग्री देशांतर प्रति टाइम जोन में विभाजित किया गया है।
  • पृथ्वी के टाइम ज़ोन (time zones) क्या हैं
    • टाइम ज़ोन एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें सभी जगहों पर एक ही मानक समय लागू होता है।
    • यह स्थानीय दिन-रात्रि के चक्र को स्थिर रखने और वैश्विक गतिविधियों को सुव्यवस्थित बनाने के लिए किया गया है।
    • सामान्यतः हर एक घंटे का फ़ेरबदल एक अलग टाइम ज़ोन के भीतर समझा जाता है
    • ताकि दिन-रात के आवेषण (sunrise/sunset) दर्शाने वाले समय में बदलाव कम से कम हो।
  • डिजिटल मानक के पीछे विचार
    • पृथ्वी circumference: लगभग 360° (कुल डिग्री)।
    • मानक ऐसा है कि एक घंटे में 360° को 24 भागों में बाँटा जाए, ताकि हर टाइम ज़ोन में घंटे के हिसाब से समय बदले।
    • इसे 360 ÷ 24 = 15° प्रति टाइम ज़ोन के रूप में निर्धारित किया गया है।
  • क्लियर स्टेप्स और प्रमुख निष्कर्ष
    • प्रत्येक टाइम ज़ोन का डिग्री कवरेज: लगभग 15° देशांतर।
    • कुल टाइम ज़ोन: परंपरागत रूप से 24 प्रमुख टाइम ज़ोन माने जाते हैं, जिनमें पूर्व और पश्चिम गोलार्ध के बड़े हिस्से शामिल हैं।
    • वास्तविक दुनिया में थोड़ा विचित्रता भी मिलती है: कुछ देश या क्षेत्र समय zones के बीच में या आधे घंटे/पौने घंटे के अंतराल पर चलते हैं
    • (जैसे भारत (+5:30), ईस्टर्न यूएस आदि) ताकि स्थानीय जीवनशैली और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार समय स्थानीय मानक के साथ बेहतर मेल खाए।
    • लेकिन 15° प्रति टाइम ज़ोन का आधार वही रहता है।
  • टिप्पणियाँ और कुछ व्यावहारिक उदाहरण
    • समय बदले जाने का सामान्य तरीका: जब पूर्वी देश पहले, पश्चिमी देश बाद में जागते हैं
    • तो उनका स्थानीय सूर्य-घड़ी (solar time) और मानक घड़ी में अंतर बनता है। यह अंतर 15° के निर्देश के अनुसार बैठता है।
    • कुछ बड़े देश अनेक टाइम ज़ोन में बंटे होते हैं (जैसे रूस, कनाडा, चीन) या कुछ एक ही देश में एक से अधिक समय क्षेत्र होते हैं
    • ताकि कार्य-स्थितियाँ और मौसम-जनित गतिविधियाँ स्थानीय समय के अनुरूप हों।
    • यह 15° नियम के साथ आंशिक रूप सेलंबित होता है
    • कई बार राजनीतिक निर्णय भी टाइम ज़ोन निर्धारित करते हैं।
  • अगर चाह वहां पर आप अपने सवाल का और गहरा विश्लेषण चाहें
    • 24 प्रमुख टाइम ज़ोन बनाम कुछ क्षेत्रों में बंटे हुए वास्तविक टाइम ज़ोन के उदाहरण
    • भारत जैसे देश में आधे घंटे का अंतर कैसे काम करता है (IST: UTC+5:30)
    • कुछ प्रमुख देशों के भीतर कितने टाइम ज़ोन हैं और वे कैसे निर्धारित होते हैं
  • उद्धरण
    • टाइम ज़ोन की परिकल्पना और 15° प्रति टाइम ज़ोन का मूल सिद्धांत सामान्य शैक्षणिक संदर्भों में हिट होता है
    • जैसे सामान्य GK संसाधनों में 24 टाइम ज़ोन और 15° मानक के उल्लेख मिलते हैं​

19. मंगल ग्रह अपने अक्ष पर एक चक्कर लगभग कितने समय में पूरा करता है? [CHSL (T-I) 15 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) 1 दिन
Solution:
  • मंगल अपनी धुरी पर घूमता है और हर 24.7 घंटे (लगभग 1 दिन) में एक चक्कर पूरा करता है।
  • मंगल की धुरी सूर्य के चारों ओर उसके कक्षीय तल के सापेक्ष झुकी हुई है।
  • मंगल ग्रह सूर्य के चारों तरफ लगभग 687 दिन में अपनी एक परिक्रमा पूर्ण करता है।
  • संक्षिप्त उत्तर
    • मंगल की धुरीوں पर घूर्णन (rotational period): लगभग 24 घंटे 37 मिनट के आस-पास
    • इसे घंटों में बदले तो करीब 24.6 घंटे होते हैं
    • पृथ्वी के समान, मंगल पर एक दिन को सामान्यतः “मंगल दिन” या “सोल” कहा जाता है
  • विस्तृत विश्लेषण
  • धुरी पर घूर्णन क्या है
    • किसी ग्रह के धुरी के चारों ओर एक पूर्ण 360° घूर्णन को rotational period या sidereal rotation कहा जाता है।
    • मंगल के लिए यह लगभग 24.6 घंटे है, यानी हर लगभग 24 घंटे 36–37 मिनट में धुरी एक बार पूरी घूमती है
    • [उद्धरण उपलब्ध एवं सामान्य भू-वैज्ञानिक ज्ञान]।
  • अन्य संबंधित समय माप
    • मंगल का एक स्थानीय दिन (solar day) पृथ्वी के तुलनात्मक दिनों की तरह है
    • जिसमें सूर्य आकाश में एक ही स्थान पर स्थिर रहता नहीं—यह लगभग 24.62 घंटे के बराबर होता है।
    • इसका कारण है मंगल की धुरी का अक्ष-झुकाव और सूर्य के साथ ग्रह की حرکت का संयुक्त प्रभाव।
    • इस solar day की अवधि थोड़ा-थोड़ा बदलती रहती है क्योंकि सूर्य-आधारित दिन में मंगल की orbital motion समाहित रहता है।
  • ग्रहणीय और मौसम प्रभाव
    • मंगल का दिन Earth के दिन से लगभग थोड़ा लंबा है
    • इसलिए रोबोटिक missions और सतही प्रक्रियाओं के समय-निर्धारण में मंगल दिन की यह मात्रा लक्षित रखना जरूरी रहता है।
    • अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान समुदाय ने मंगल पर “दैनिक” टाइम-निशान के लिए एक मानक दिन माना है
    • जिसे mission planning में इस्तेमाल किया जाता है।
  • संदर्भित तुलनाएँ
    • पृथ्वी के लिए धुरी पर घूर्णन लगभग 23 घंटे 56 मिनट (sidereal day) होता है
    • जबकि सूर्य के चारों ओर एक पूर्ण परिक्रमा एक साल में होती है। मंगल पर धुरी पर घूर्णन थोड़ा सा अलग है
    • दिन-रात्रि दोनों की संरचना पृथ्वी के समान है—यानी सतह पर तापमान परिवर्तन और मौसम के चक्र बनते हैं।
  • नोट और सावधानियाँ
    • जब लोग “24 घंटे” कहते हैं, तो यह पृथ्वी के solar day के एक मानक दिन का सामान्य संदर्भ है।
    • मंगल पर वास्तविक rotational period लगभग 24.6 घंटे है, जो सटीक गिनती है।
    • मंगल के सतह पर 1 मंगल दिन (sol) में समय-निर्धारण के लिए कई रोबोटिक मिशनों ने इसे अपनाया है
    • ताकि ऑपरेशन शेड्यूलिंग सुव्यवस्थित रहे।

20. निम्नलिखित में से किस कक्षा में उपग्रह भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं? [CHSL (T-I) 15 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) भू-स्थिर कक्षा
Solution:
  • भू-स्थिर कक्षा अथवा भूस्थैतिक कक्षा में, उपग्रह भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं।
  • एक उपग्रह दो कारकों को संतुलित करके अपनी कक्षा बनाए रखता है; इसका वेग और पृथ्वी द्वारा उस पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल।
  • मुख्य विवरण
    • भूस्थैतिक कक्षा की ऊँचाई लगभग 35,786 किलोमीटर (22,236 मील) है
    • जिसका मतलब है कि पृथ्वी की सतह से यह दूरी है.​
    • इस कक्षा में स्थित उपग्रह पृथ्वी के घूर्णन के समान घूर्णन काल (sidereal day) के साथ एक समान घूर्णी चाल बनाते हैं
    • इसलिए वे सतह पर एक ही स्थान पर ऊपर रहते हैं और सूर्य की दिशा से भी स्थिर रहते हैं.​
    • भूस्थैतिक कक्षा पृथ्वी के भूमध्यरेखा के ठीक ऊपर रहती है
    • जिसका कारण यह तालमेल है कि यह कक्षा पृथ्वी के त्वरित रोटेशन के अनुरूप है.​
  • अन्य संबंधित कक्षाओं के संदर्भ
    • निम्न पृथ्वी-आधारित कक्षाएं भूमध्य रेखा के ऊपर स्थिर नहीं रहतीं और सतह के ऊपर कहीं-न-कहीं घूमती रहती हैं
    • जैसे LEO (लो अर्थ ऑर्बिट) या मध्यम पृथ्वी कक्षा—इनमें उपग्रह सतह के साथ एक ही अक्ष पर नहीं रहते.​
  • व्यावहारिक उपयोग
    • भूस्थैतिक कक्षाओं का प्रमुख उपयोग कम्युनिकेशन (सैटेलाइट टेलीविज़न और इंटरनेट), मौसम अवलोकन, और निगरानी के लिए होता है
    • क्योंकि इनकी कक्षा से पृथ्वी के एक क्षेत्र की निरंतर दृश्यता मिलती है.​
  • साथ ही, एक दृष्टांत
    • अगर चित्रण किया जाए, तो भूस्थैतिक उपग्रह पृथ्वी के खिलाफ पीछे नहीं बैठता, बल्कि पृथ्वी के साथ एक ही angular velocity पर घूमता है
    • जिससे वह ऊपर बैठे दर्शक के लिए एक ही स्थान पर वापस आ जाता है—यही कारण है कि यह कक्षा “स्थिर” लगती है.​
  • संदर्भ
    • भूस्थैतिक कक्षा और इसके गुणों के बारे में विस्तृत जानकारी Testbook पन्ने पर उपलब्ध है
    • जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भूमध्यरेखा के ठीक ऊपर पृथ्वी का चक्कर लगाने वाले उपग्रह भूस्थैतिक कक्षा में होते हैं.​