ब्रह्मांड (विश्व का भूगोल)

Total Questions: 29

21. 1877 में अमेरिकी खगोलशास्त्री आसफ हॉल (Asaph Hall) द्वारा खोजे गए मंगल की परिक्रमा करने वाले दो छोटे चंद्रमाओं का नाम क्या है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) फोबोस और डीमोस
Solution:
  • मंगल के दो चंद्रमा हैं, फोबोस और डीमोस।
  • फोबोस मंगल के दो चंद्रमाओं में से बड़ा है। अतः उत्तर विकल्प (b) होगा।
  • पूरा विवरण:
    • खोज का वर्ष और उद्देश्य: 1877 में मंगल ग्रह के चौथे-पूर्व opposition के दौरान Asaph Hall ने मंगल की परिक्रमा करने वाले दो छोटे चंद्रमाओं की खोज की थी
    • ताकि मंगल ग्रह के उपग्रहों की उपलब्धि के बारे में पुष्टि हो सके. के अनुसार Hall ने Deimos को 12 अगस्त 1877 को और Phobos को 18 अगस्त 1877 को खोजा, US Naval Observatory (Old Naval Observatory, Foggy Bottom, वाशिंगटन D.C.) में, उस समय के अवलोकन उपकरणों से।.​
    • Deimos और Phobos के नाम और उनका क्रमिक क्रम: Deimos मंगल का छोटा चंद्रमा है
    • Phobos उसका बड़ा उपग्रह है, जिन्हें Hall ने क्रमशः 12 और 18 अगस्त 1877 को पहचान लिया था.​
    • खोज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मंगल-श्रेणी पर Jupiter के साथ विरोध (opposition) के दौरान आकाशगामी स्थिति अधिक स्पष्ट होती है
    • जिससे इन चंद्रमाओं की खोज संभव हो सकी
    • The Linda Hall Library के लेख के अनुसार Hall ने मंगल की घनत्वपूर्ण स्थिति के बीच अपने विश्वविद्यालय-आलोकन उपकरण के साथ यह खोज की, और उनकी पत्नी का सहयोग उसे प्रेरित करने में मददगार रहा.​

22. 1950 में, किस रूसी खगोलशास्त्री ने 'नीहारिका परिकल्पना' को संशोधित किया, यह प्रस्तावित करते हुए कि सूर्य मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम के साथ-साथ धूल से युक्त एक सौर नीहारिका से घिरा है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) ऑटो श्मिड
Solution:
  • सन् 1950 में रूस के वैज्ञानिक ऑटो श्मिड व जर्मनी के कार्ल वाइजास्कर ने नीहारिका परिकल्पना में कुछ संशोधन किए।
  • उनके मत के अनुसार, सूर्य एक सौर नीहारिका से घिरा हुआ था, जो मुख्य रूप से हाइड्रोजन, हीलियम और धूल के कणों से बनी हुई थी।
  • नीहारिका परिकल्पना क्या है
    • नेबुलर परिकल्पना (Nebular Hypothesis) यह बताती है कि सौर मंडल एक बड़ी अंतरतारकीय धूल-गैस क्लाउड (नेबुला) से बना है
    • जो सिकुड़कर एक प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क में तब्दील हुआ, फिर पदार्थों के टकराने और संकेन्द्रण (accretion) के कारण ग्रह बनने शुरू हो गए.​
    • 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी के प्रारंभ में यह विचार था कि यह नेबुला सूर्य के आसपास एक डिस्क के रूप में घुमती रहने वाले घटकों से बना था
    • जिसमें सूर्य का निर्माण केंद्रित था और बर्ताव से बर्तनों जैसी संरचना बनती गई.​
    • 1950 के संशोधन में Schmidt और Weizsäcker ने यह साफ किया कि सूर्य के चारों ओर का वातावरण धूल-कण और गैस से भरा था
    • यह घर्षण/टकराव से घनीकृत हुआ था
    • यही प्रक्रिया अंततः सूर्य के आकार-गठन और ग्रहों के निर्माण की ओर ले गई.​
  • 1950 के संशोधन के मुख्य बिंदु
    • सूर्य को एक सौर नेबुला के भीतर बनते हुए माना गया, जिसमें प्रमुख घटक हाइड्रोजन, हीलियम और धूल के कण थे.​
    • नेबुला के घूर्णन और विखंडन के कारण यह एक चपटी डिस्क में संकुचित हुआ
    • जिससे प्रोटोप्लेनेटरी डिज़्क बना और अंततः ग्रह-उत्पत्ति शुरू हुई.​
    • इस संशोधन ने यह स्पष्ट किया कि सूर्य-ग्रहों का पूरा तंत्र एक बड़े द्रव-गैस बादल के कस्बे से बना है
    • जिसमें धूलिकण और गैस के संघनन-घर्षण से पृथ्वी समेत अन्य ग्रह बने.​
  • संभावित स्रोतों की पुष्टि (उद्धरण के नोट)
    • 1950 में रूसी संदर्भ में यह संशोधन वर्णित किया गया है कि सूरज एक नेबुला के भीतर बना और धूल-कण सहित हाइड्रोजन-हीलियम से बना था
    • नेबुलर परिकल्पना के मूल ढांचे और पृथ्वी-ग्रहों के निर्माण की प्रक्रिया के लिए सामान्य संदर्भ, जो उसी दिशा में Schmidt तथा Weizsäcker के विचारों से मिलते हैं, को भी वही स्रोत स्पष्ट करते हैं.​
    • बहुविध स्रोतों में यह भी उल्लेख पाया गया है कि इस संशोधन ने सौर मंडल की उत्पत्ति समझाने की दिशा में वैकल्पिक फॉर्मेशन मार्ग बताने का प्रयास किया.​
  • महत्वपूर्ण संक्षेप
    • 1950 में Otto Schmidt और Carl Weizsäcker ने नेबुलर परिकल्पना को संशोधित करके सूर्य की घेराबंदी के पीछे धूल-कणों और गैस के एक घोड़े-सी घनीभूत नेबुला को माना, जिससे सूर्य और ग्रहों की संरचना बना—यही उनका योगदान था।
    • यह संशोधन सौर मंडल के गठन के मानक क्रम को गति देता है
    • नेबुला → डिस्क/प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क → ग्रह-उत्पत्ति और अंततः सूर्य का निर्माण.​
    • नेबुलर परिकल्पना के मूल सिद्धांत और आधुनिक ग्रह-गठन विज्ञान का आधार इन विचारों से विकसित हुआ है.​

23. अक्टूबर-नवंबर के दौरान, सूर्य की आभासी गति ....... की तरफ होती है। [MTS (T-I) 17 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) दक्षिण
Solution:
  • अक्टूबर-नवंबर के दौरान, सूर्य के दक्षिण की ओर आभासी गति के साथ, मानसून गर्त कमजोर हो जाता है।
  • यह धीरे-धीरे एक उच्च दाब प्रणाली द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।
  • इसके फलस्वरूप दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और धीरे-धीरे पीछे हटने लगती हैं।
  • कारण और परिप्रेक्ष्य
    • पृथ्वी अपनी धुरी पर घूर्णन करती है और सूर्य के चारों ओर वार्षिक कक्षा पूरी करती है।
    • अक्टूबर-नवंबर के महीनों में उत्तरी गोलार्ध tilted posture की वजह से सूर्य विमान के दक्षिणी हिस्से की ओर झुककर उभरा लगता है।
    • यह दृश्यगत प्रभाव सूर्य की आभासी गति को दक्षिण की ओर दिखाता है।
    • कुछ संदर्भों में इसे冬至 के आसपास के मौसमी परिवर्तन से जोड़ा जाता है: जैसे कि उत्तरी गोलार्ध में दिन छोटे होना शुरू होते हैं
    • दक्षिणी गोलार्ध में दिन बढ़ते हैं, जिससे सूर्य का नज़र आता है कि वह दक्षिण की ओर बढ़ रहा है।
    • शिक्षण-संदर्भ: शिक्षण सामग्री में इस समय लेखों में यही दृश्य वर्णित है].​
  • भूमंडलीय दायित्व और प्रभाव
    • पृथ्वी-धुरी के अक्ष झुकाव के कारण सूर्य की ऊष्मा और प्रकाश का वितरण भीNB बदलता है
    • जिससे अक्टूबर-नवंबर में उत्तरी गोलार्ध में दिन छोटे और ठंड अधिक महसूस होती है
    • जबकि दक्षिणी गोलार्ध में अधिक दिन और गर्म पानी से परे रहने की स्थिति बनती है।
    • इस प्रकार सूर्य की आभासी गति के साथ मौसम-चक्र का संबंध देखा जाता है.​
  • तुलना और अन्य महीनों के संदर्भ
    • गर्मियों में सूर्य की आभासी गति उत्तरी गोलार्ध की ओर अधिक स्पष्ट हो सकती है
    • (ग्रीष्मकालीन अंश) जबकि दिसंबर के आसपास यह गति दक्षिण की ओर मजबूत दिखती है
    • अक्टूबर-नवंबर में दक्षिण की ओर स्पष्ट प्रवृत्ति रहती है.​
    • यह दृश्याता सामान्यतः पृथ्वी के धुरी-टिप और सूर्य के ग्रहण-चक्र के संयोजन से निर्धारित होती है
    • इसलिए स्थानीय जगह के अक्षांश के अनुसार अनुभव थोड़ा भिन्न हो सकता है.​
  • नोट
    • अगर किसी विशेष पाठ या अध्ययन नोट पर निर्भर जानकारी चाहिए, तो उसकी सटीक पंक्तियाँ/उद्धरण उपलब्ध कर सकता हूँ।
    • उपरोक्त सारांश मौजूदा सामान्य शिक्षण स्रोतों के आधार पर है
    • क्षेत्रीय भिन्नताओं को ध्यान में रखकर संक्षेप में समझाने के उद्देश्य से दिया गया है.​
    • अगर चाहें, तो भारत, अमेरिका या अन्य स्थानों के अनुसार अक्टूबर-नवंबर के सूर्य की आभासी गति का स्थान-वार विश्लेषण भी दूँ।
    • कृपया क्षेत्र/स्थान बताएं।
  • उद्धरण
    • सामग्री में अक्टूबर-नवंबर के दौरान सूर्य की आभासी गति दक्षिण की ओर बताई गई है
    • जो SSC/MTS प्रकार के अभ्यास प्रश्नों में भी उल्लेखित है.​

24. निम्नलिखित में से कौन-सा सौरमंडल का सबसे ठंडा ग्रह है? [MTS (T-I) 16 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) नेप्च्यून
Solution:
  • वरुण (नेप्च्यून) के सूर्य से सर्वाधिक दूर होने के कारण इसे सबसे ठंडा ग्रह कहा जाता है।
  • यहां पर सतह का तापमान लगभग - 200° सेल्सियस है।
  • वरुण का वायुमंडल हाइड्रोजन, हीलियम, मीथेन, हाइड्रोजन ड्यूटेराइड और इथेन से बना है।
  • विस्तार से जानकारी:
    • कौन सा ग्रह सबसे ठंडा है: यूरेनस, जिसे हिंदी में अरुण ग्रह भी कहा जाता है, सौरमंडल का सातवाँ ग्रह है
    • इसका वातावरण अत्यधिक ठंडा रहता है।​
    • तापमान का प्रतिनिधित्व: ऊपरी वायुमंडल का औसत तापमान लगभग -224°C के आसपास होता है
    • जो इसे मौसमी और आंतरिक गर्मी के अभाव के कारण सबसे ठंडा बनाता है।​
    • दूरी और भौतिक विशेषताएं: सूर्य से इसकी दूरी बहुत अधिक है, जिसका परिणाम यह है
    • इसे प्राप्त ऊष्मा पर्याप्त नहीं मिल पाती; यह गेस-ग्लोबल (हाइड्रोजन/हीलियम) से बना गैस विशाल ग्रह है
    • इसके अक्षीय झुकाव के कारण मौसम में भी बड़ी विविधताएं देखी जाती हैं।​
    • अन्य ठंडे गैसीय ग्रह: नेपच्यून भी बेहद ठंडा है
    • लेकिन कुछ आंतरिक गर्मी कारणों से यूरेनस से थोड़ा ऊष्मा प्राप्त करता है
    • इसलिए सामान्यतः यूरेनस को सबसे ठंडा माना जाता है।​
  • मुख्य बिंदु (क्यों प्रभावी रूप से उत्तर यूरेनस है):
    • सामान्य तापमान तुलना: के कारण -224°C तक जा सकने वाला तापमान निश्चित रूप से सौरमंडल के अन्य ग्रहों की तुलना में सबसे कम है।​
    • तापमान निर्धारक कारक: सूर्य से दूरी, आंतरिक गर्मी का अभाव और गैसीय संरचना—all contribute to its extreme cold.​
  • यदि चाहें, तब मैं इसे निम्नलिखित तरीके से और भी विस्तार से समझा सकता/सकती हूँ:
    • वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तापमान मापक पद्धतियाँ
    • यूरेनस के पर्यवेक्षण में आहत/चालक प्रमुख चक्र (क्लाउडस, मॉड्यूलर धाराएं)
    • अन्य ग्रहों से तुलना (नेपच्यून, नेप्च्यून बनाम यूरेनस के तापमान भिन्नता)

25. जमी हुई गैसों, चट्टान और धूल के ब्रह्मांडीय हिमगोले (Cosmic snowballs), जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं ....... कहलाते हैं। [MTS (T-I) 16 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) धूमकेतु
Solution:
  • धूमकेतु या पुच्छल तारे आकाशीय धूल, बर्फ और हिमानी गैसों के पिंड हैं
  • जो सूर्य से दूर ठंडे व अंधेरे क्षेत्र में रहते हैं।
  • सूर्य के चारों ओर ये लंबी किंतु अनियमित कक्षा में घूमते हैं।
  • इनकी विशेषताएं और विवरण:
    • जमी हुई गैसों, बर्फ, धूल और चट्टानों का संयुक्त पिंड होते हैं जिन्हें सूर्य की परिक्रमा करनी होती है।
    • जब सूर्य के समीप आते हैं, उनकी बर्फ वाष्पित होकर नाभिक से गैसों के साथ एक चमकदार पूंछ खोल देती है
    • यही पूंछ देखने में आकर्षक होती है।​
    • धूमकेतुओं की कक्षा आमतौर पर लंबी और घूर्णी होती है, इसलिए कुछ धूमकेतु पृथ्वी के पास से भी गुजरते हैं
    • कभी-कभी वर्षों या दशकों में वापस आते हैं (जैसे हैली की धूमकेतु, जिसकी पुनरावृत्ति ~75-76 वर्षों में मानी जाती है).​
    • धूमकेतुओं के मुख्य भाग को नाभिक कहा जाता है
    • सूर्य के पास पहुँचते ही कोर से गैस और धूल बाहर आकर पूंछ बनाती है
    • जो सौर पवन द्वारा पीछे की ओर खिंचती हैं.​
    • धूमकेतु सौर मंडल के बाहरी भागों से आते हैं, जैसे क्लिपर बेल्ट या कुयपर बेल्ट से, और कुछ “केंटौर” पिंड भी इनमें शामिल हैं
    • जो बाहरी सौर मंडल के क्षेत्र से आते हैं.​
  • श्रृंखला और प्रकार (संक्षेप में):
    • प्राकृतिक पिंड (Moon-like) नहीं; बल्कि बर्फीली आइस-कणों, गैस और धूल का मिश्रण।
    • उनके अंडरलाइन संरचना में नाभिक, पूंछ और गैस-आउटगासिंग क्षेत्र शामिल होते हैं।
    • सूर्य के नजदीक पहुँचने पर बर्फ गैस में बदल जाती है, जिससे पूंछ बनती है
    • यह पूंछ काफी दूर तक फैल सकती है और पंखों जैसे दायरे में दिख सकती है.​
  • क्यों महत्वपूर्ण हैं:
    • धूमकेतु सौर मंडल के अधिक प्राचीन पिंडों का भाग हैं
    • जो ब्रह्मांडीय पदार्थ के प्रारम्भिक परिस्थितियों को दर्शाते हैं।
    • इनके अध्ययन से पथ-निर्धारण, सूर्य-परिक्रमा की गतियाँ और अटके हुए न्यूक्लियस के गुण जानने को मिलते हैं.​

26. ओजोन परत वायुमंडल की निम्नलिखित में से किस परत में पाई जाती है? [MTS (T-I) 12 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) समतापमंडल
Solution:
  • ओजोन परत वायुमंडल के समतापमंडल में पाई जाती है।
  • ओजोन पृथ्वी पर जीवन को सूर्य की पराबैंगनी (यूवी) विकिरण से बचाता है।
  • विस्तारित विवरण
    • प्रमुख पूछे गए प्रश्न का الإجابة: ओजोन परत समतापमंडल की उन ऊपरी सतहों में स्थित है
    • जो क्षोभमंडल के ऊपर और मध्यमंडल के नीचे स्थित होती हैं
    • सामान्यतः लगभग 15 से 30 किमी ऊँचाई तक फैली होती है, और कभी-कभी 30–50 किमी तक के क्षेत्र को भी शामिल कर लिया जाता है।
    • क्यों यह परत महत्वपूर्ण है: ओजोन (O3) गैस सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी यूवी-बी और यूवी-सी विकिरण को अवशोषित करती है
    • जिससे पृथ्वी के जीवन को यूवी विकिरण से बचाव मिलता है। इस कारण इसे पृथ्वी का प्राकृतिक सुरक्षा कवच कहा जाता है।
  • ओजोन परत के प्रमुख तथ्य:
    • यह वायुमंडल की दूसरी परत है: क्षोभमंडल (नीचे) के ऊपर और मध्यमंडल (मिड-हाई लेयर्स) के नीचे स्थित है।
    • [उत्पत्ति स्रोत एक मानक विज्ञान पाठ्यपुस्तक/वेबसाइटों में यही विवरण दिखता है, जैसे Testbook/BYJU’s आदि]​
    • ओजोन परत नीचाई में लगभग 15–30 किलोमीटर ऊँचाई पर सबसे अधिक घनी रहती है
    • 32–60 किमी के दायरे में भी इसका वितरण नज़र आता है
    • यह निर्भर करता है स्थानीय मौसम और मौसम-फोटोग्राफी पर।​
    • ओजोन परत का नुकसान क्लोरीन-आधारित क्लोरीन-सम्पन्न गैसों (जैसे CFCs) के कारण होता रहा है
    • जिसके कारण मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौते बनें और स्थिति में सुधर हुआ है।​
  • अन्य परतों के बारे में संक्षेप:
    • क्षोभमंडल (Troposphere): पृथ्वी की सतह के अत्यंत निकटतम परत; मौसम यहाँ बनते हैं।​
    • मेसोपॉज़/Mesosphere: समतापमंडल के ऊपर है और आयनमंडल से पहले की परत है।​
    • आयनमंडल (Ionosphere): मेसोपॉज के ऊपर 80–400 किमी तक, रेडियो तरंगें यहाँ से परावर्तित होती हैं।​

27. निम्नलिखित में से किस ग्रह को 'भोर का तारा' (morning star) भी कहा जाता है? [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) शुक्र
Solution:
  • शुक्र ग्रह को 'भोर का तारा' भी कहा जाता है।
  • आकाश में शुक्र ग्रह को आसानी से देखा जा सकता है। इसे संध्या और भोर का तारा भी कहते हैं।
  • विस्तार विवरण:
    • Morning Star का मतलब है ऐसा ग्रह जो सूर्योदय से पहले पूर्वी आकाश में दिखाई देता है।
    • अधिकतर यह शुक्र ही होता है क्योंकि वह सूर्य के नजदीकी ग्रह है
    • उसका घना वातावरण भ्रमण की वजह से उसे अत्यंत उज्ज्वल बनाता है.​
    • यह बात स्पष्ट करती है कि शुक्र को भोर के समय पूर्व दिशा में दिखने वाला सबसे प्रसिद्ध तारा माना जाता है
    • जबकि वही ग्रह सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में दिखाई दे तो इसे शाम का तारा भी कहा जाता है, दोनों नाम एक ही ग्रह के लिए प्रयुक्त होते हैं.​
    • कुछ स्रोतों में इसे “सूर्य का सबसे नजदीकी ग्रह” या “नज़दीकी ग्रह” के रूप में भी वर्णित किया गया है
    • भोर/संध्या के समय इसकी रोशनी और पूर्व/पश्चिम दिशा के अनुसार ही पहचाना जाता है.​
    • बुध ग्रह भी आकाश में जल्दी दिख सकता है, लेकिन भोर के तारे के रूप में स्थाई और व्यापक रूप से स्वीकार्य उत्तर शुक्र है
    • क्योंकि शुक्र रात के आकाश में भी बार-बार सबसे चमकीला वस्तु रहता है
    • सूर्योदय से पूर्व या सूर्यास्त के बाद आसानी से देखा जा सकता है.​
  • अगर चाहें, इस विषय के बारे में और गहराई से:
    • Morning Star बनाम Evening Star के बारे में भिन्न-भिन्न ग्रहों के संदर्भों को तुलना सूची के रूप में दे सकता हूँ।
    • शुक्र के सतह पर तापमान, घना वातावरण, और उसकी रोशनी को भोर/शाम के समय कैसे प्रभावित करती है, यह भी समझा सकता हूँ।
    • इतिहासिक/संस्कृति-आधारित दृष्टिकोण से भोर का तारा कैसे विभिन्न सभ्यताओं में वर्णित रहा, इस पर संक्षिप्त पन्ने दे सकता हूँ।
  • उद्धरण (मुख्य बिंदु संदर्भ):
    • Morning Star अक्सर शुक्र ग्रह ही होता है क्योंकि यह सूर्योदय से पहले पूर्व में दिखाई देता है
    • सूर्योदय के बाद पश्चिम में भी दिखाई दे सकता है.​
    • शुक्र को शाम के तारे के रूप में भी जाना जाता है
    • जब सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी आकाश में दिखाई देता है.​

28. निम्नलिखित में से किस ग्रह का कोई उपग्रह नहीं है? [MTS (T-I) 04 मई, 2023 (II-पाली), MTS (T-I) 22 अक्टूबर, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) शुक्र
Solution:
  • बुध और शुक्र ग्रह का अपना कोई उपग्रह नहीं है। बुध सौरमंडल का सबसे छोटा तथा सूर्य से निकटतम ग्रह है।
  • यह लगभग 88 पृथ्वी दिवसों में सूर्य की परिक्रमा पूर्ण कर लेता है। वायुमंडल के अभाव के कारण बुध पर जीवन संभव नहीं है।
  • मुख्य भाग
    • सार-तत्व: हमारे सौर मंडल में बुध और शुक्र के अलावा अन्य सभी ग्रहों के कम से कम एक प्राकृतिक उपग्रह (चंद्रमा) पाया गया है।
    • बुध और शुक्र के पास प्राकृतिक उपग्रह नहीं होते.​
    • कारण объяснение: सूर्य के बेहद समीप होने के कारण इन दोनों ग्रहों के चारों ओर स्थिर उपग्रह बनाए रखना कठिन रहता है
    • क्योंकि सूर्य के गुरुत्वाकर्षण और तेज़ विक्षेपण forces के कारण छोटे पिंडों को पकड़ना मुश्किल होता है
    • बुध छोटा ग्रह है और शुक्र भी आकार में थोड़ा बड़ा है
    • परंतु उनके गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र इतने मजबूत नहीं होते कि कोई स्थिर उपग्रह बना रहे, जिन्हें ग्रह के चारों ओर स्थिर रखा जा सके.​
  • ठीक-ठीक तुलना: नीचे दिए गए बिंदुओं से यह स्पष्ट होता है:
    • बुध: सूर्य के सबसे निकट ग्रह, छोटा आकार; उपग्रह नहीं मिलते.​
    • शुक्र: सूर्य के निकटतम ग्रहों में से एक, प्रति-परिक्रमा अवधि लंबी होने के बावजूद उपग्रह नहीं पाए जाते.​
    • अन्य ग्रह (यथा पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, आदि): सभी के पास एक या अधिक प्राकृतिक उपग्रह हैं; पृथ्वी का चंद्रमा सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है.​
  • समय-तत्व और अतिरिक्त तथ्य
    • उपग्रह की परिभाषा: सामान्य रूप से उपग्रह वह पिंड होता है जो किसी बड़े पिंड की परिक्रमा करता है
    • प्राकृतिक उपग्रहों के कारण ग्रहों के चारों ओर चंद्रमाओं का समूह बनता है.​
    • पृथ्वी के علاوہ मंगल, बुध, शुक्र आदि की स्थिति में भिन्नताएं हो सकती हैं
    • बुध और शुक्र के अलावा सभी ग्रहों के पास कम-से-कम एक प्राकृतिक उपग्रह जरूर है.​
  • संदिग्ध या बहसपूर्ण बिंदु
    • मानव-निर्मित उपग्रह: ऊपर का चर्चा प्राकृतिक उपग्रह पर केंद्रित है
    • भू-परिक्रमा करने वाले कृत्रिम उपग्रहों को अलग से गिनती में नहीं लिया जाता.​
    • यदि पूछताछ में “सबसे अधिक उपग्रह” या “उपग्रहों की संख्या” जैसी स्पेसिफिक(sharply different) स्थितियां हों, तो परिणाम अलग हो सकता है
    • अभी के प्रश्न के अनुसार उत्तर बुध और शुक्र ही उपग्रह-रहित planets हैं.​
  • उद्धृत स्रोत
    • बुध और शुक्र के बारे में उपग्रह-रहित जानकारी: Testbook/अन्य स्रोतों के सार को सारग्रहण.​
    • सामान्य उपग्रह परिभाषा और ग्रह-परिक्रमा: Testbook पाठ सामग्री.

29. निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रह अन्य ग्रहों की तुलना विपरीत दिशा में घूर्णन (Rotate) करता है? [MTS (T-I) 13 जून, 2023 (III-पाल)]

Correct Answer: (a) शुक्र
Solution:
  • शुक्र ग्रह अन्य ग्रहों की तुलना में विपरीत दिशा में घूर्णन करता है।
  • शुक्र ग्रह को पृथ्वी की जुड़वां बहन के नाम से भी जाना जाता है।
  • शुक्र ग्रह सौरमंडल का सर्वाधिक चमकीला ग्रह है।
  • विस्तार विवरण
    • घूर्णन दिशा क्या है: अधिकांश ग्रह अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व (clockwiseവृत्तधुरी) दिशा में नहीं बल्कि पूर्व से पश्चिम की दिशा में घूमते हैं
    • जब हम नीचे से देखेंगे; इसे सीधे तौर पर कहा जाए तो वे दक्षिण-उत्तर के बजाय पश्चिम-पूर्व दिशा में घूमते हैं।
    • शुक्र ग्रह अकेला ऐसा ग्रह है जो विपरीत दिशा में—यानी पूर्व से पश्चिम की दिशा में—घूमता है
    • इसे प्रतिगामी (retrograde) घूर्णन कहा जाता है ।​
    • परिक्रमा बनाम घूर्णन: शुक्र की परिक्रमा गति Sun के चारों ओर सूर्य के चारों ओर एक सामान्य दिशा में होती है
    • शुक्र की अपनी धुरी की घूर्णन दिशा उल्टी है, जिससे सूर्य पश्चिम में उगता है और पश्चिम से उगना जैसी दृश्यताएं बनती हैं ।​
    • अन्य कारण/मान्यताएं: वैज्ञानिकों के विभिन्न सिद्धांत हैं
    • शुक्र का उल्टा घूर्णन कैसे बना, जैसे बड़े टकराव का परिणाम, गहरे वायुमंडलीय प्रभाव आदि—पर यह तथ्य वही है
    • शुक्र ही ऐसा ग्रह है जिसकी धुरी घूर्णन दिशा बाकी ग्रहों से विपरीत है ।​
  • क्यों यह महत्वपूर्ण है
    • घूर्णन दिशा प्रभावित करती है कि शुक्र पर सूर्य कितनी बार उगता-डूबता है
    • दिन-राते की अनुभूति कैसी होती है (शुक्र का दिन आकार में वर्ष से लंबा होता है क्योंकि उसकी rotation period ~243 पृथ्वी दिनों के बराबर है
    • जबकि उसकी year ~225 पृथ्वी दिन हैं) ।​
    • यूरेनस भी अपनी धुरी के कारण विशेष गैर-सामान्य घूर्णन दिखाता है
    • वह एकदम नहीं बल्कि धुरी की असामान्य tilt के कारण कुछ हिस्सों में उल्टा चलता है
    • शुक्र के विपरीत, यूरेनस की पूरी धुरी घुमाव में उल्टी नहीं बल्कि उसकी axis tilt के कारण प्रत्यक्ष दृश्य प्रभाव होते हैं ।​