भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप (अर्थव्यवस्था)

Total Questions: 28

11. निम्न में से कौन-सा कथन सही है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) किसी देश की आर्थिक संपन्नता उस देश के पास केवल संसाधन होने भर से निर्भर नहीं करती है।
Solution:
  • उपर्युक्त प्रश्न का कथन (b) सही है। अन्य कथन असत्य हैं।
  • सामान्य स्पष्टीकरण
    • इस फॉर्मेट के प्रश्नों में चार या पांच कथन दिए जाते हैं
    • उम्मीदवार को सही वाले की पहचान करनी होती है।
    • उदाहरण के लिए, गणित विषय में एक लोकप्रिय प्रश्न यह है:
    • कथन 1: दो अपरिमेय संख्याओं का गुणनफल हमेशा अपरिमेय होता है
    • (गलत, क्योंकि √2 × √2 = 2, जो परिमेय है) ।​
    • कथन 2: दो परिमेय संख्याओं का गुणनफल हमेशा परिमेय होता है (सही) ।​
  • अन्य उदाहरण
    • तर्कशक्ति प्रश्नों में: व्यवस्था (puzzle) पर आधारित कथन, जैसे "S अंतिम छोर से तीसरे स्थान पर है
    • यह सही या गलत स्थिति के आधार पर निर्भर करता है ।​
    • जीवविज्ञान में: गर्भावस्था या रोगों से संबंधित कथन, जैसे "सिफिलिस STD है" (सही) ।​
    • विकल्प प्रदान करें तो पूर्ण हिंदी में विस्तृत समाधान दूंगा।

12. अर्थव्यवस्था के संरचनात्मक ढांचे से क्या तात्पर्य है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) GDP में विभिन्न क्षेत्रों का योगदान
Solution:
  • अर्थव्यवस्था के संरचनात्मक ढांचे से तात्पर्य, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में विभिन्न क्षेत्रों जैसे-प्राथमिक क्षेत्र (कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, खनन एवं उत्खनन), द्वितीयक क्षेत्र (निर्माण, विद्युत, गैस एवं विनिर्माण आदि) और तृतीयक क्षेत्र (व्यापार, सेवा) के योगदान से है।
  • संरचना के प्रमुख घटक
    •  प्राथमिक क्षेत्र में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, खनन और वन आधारित गतिविधियां शामिल हैं
    • जो प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर होती हैं। द्वितीयक क्षेत्र उद्योग, विनिर्माण, निर्माण और प्रसंस्करण से संबंधित है
    • जबकि तृतीयक क्षेत्र सेवाओं जैसे व्यापार, परिवहन, बैंकिंग, संचार और पर्यटन को कवर करता है।
    • कभी-कभी चतुर्थ क्षेत्र (जानकारी प्रौद्योगिकी) और पंचम क्षेत्र (अनौपचारिक अर्थव्यवस्था) को भी जोड़ा जाता है।​​
  • महत्वपूर्ण भूमिका
    • यह ढांचा आर्थिक विकास की दिशा निर्धारित करता है
    • क्योंकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में तृतीयक क्षेत्र का योगदान अधिक होता है
    • जबकि विकासशील देशों में प्राथमिक क्षेत्र प्रमुख रहता है।
    • संरचनात्मक परिवर्तन, जैसे कृषि से उद्योग की ओर स्थानांतरण, उत्पादकता बढ़ाता है
    • रोजगार सृजित करता है। इसके अलावा, आधारभूत संरचना (सड़कें, बिजली, बंदरगाह) इस ढांचे की रीढ़ है
    • जो उत्पादन लागत घटाती है और निवेश आकर्षित करती है।​
  • प्रकार और उदाहरण
    • आर्थिक आधारभूत संरचना: परिवहन, ऊर्जा और वित्तीय प्रणाली, जो प्रत्यक्ष उत्पादन बढ़ाती हैं।
    • सामाजिक आधारभूत संरचना: शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास, जो अप्रत्यक्ष रूप से मानव पूंजी विकसित करते हैं।​
    • भारत जैसे देश में, जहां प्राथमिक क्षेत्र का GDP में योगदान घटकर 15% रह गया है
    • तृतीयक क्षेत्र 55% से अधिक का है, जो संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाता है।​
  • संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता
    • संरचनात्मक ढांचे में सुधार निवेशकों का विश्वास बढ़ाते हैं, मांग पैदा करते हैं
    • दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करते हैं। हालांकि, असंतुलन (जैसे अत्यधिक निर्भरता एक क्षेत्र पर) बाधाएं पैदा करता है।
    • भारत में स्मार्ट सिटी और लॉजिस्टिक्स सुधार ऐसे प्रयास हैं।
    • मजबूत ढांचा जीवन स्तर सुधारता, निर्यात बढ़ाता और क्षेत्रीय असमानताएं कम करता है।​

13. मांग वक्र और पूर्ति वक्र दोनों का एक साथ विस्थापन निम्नलिखित में से किस तरीके से हो सकता है? [CHSL (T-I) 16 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Ⅰ. पूर्ति वक्र बायीं ओर शिफ्ट होता है और मांग चक्र दायीं और शिफ्ट होता है।

II. पूर्ति और मांग दोनों वक्र बायीं ओर शिफ्ट होते हैं।

III. पूर्ति वक्र दायीं ओर शिफ्ट होता है और मांग वक्र बायीं ओर शिफ्ट होता है।

Correct Answer: (a) I, II और III
Solution:
  • जब मांग पूर्ति वक्रों में एक साथ शिफ्ट होता है, या विस्थापित होता है, तो एक साथ शिफ्ट चार संभावित प्रकार से हो सकते हैं
  • (1) मांग तथा पूर्ति वक्र दोनों का दाईं ओर शिफ्ट, (2) मांग तथा पूर्ति वक्र दोनों का बाईं ओर शिफ्ट, (3) पूर्ति वक्र का बाईं ओर तथा मांग वक्र का दाईं ओर शिफ्ट तथा (4) पूर्ति वक्र का दाईं ओर तथा मांग वक्र का बाईं ओर शिफ्ट।
  • संभावित विस्थापन तरीके
    • मांग वक्र और पूर्ति वक्र दोनों का एक साथ शिफ्ट होने के तीन मुख्य तरीके हैं:
    • पूर्ति वक्र बाईं ओर (कमी) शिफ्ट हो और मांग वक्र दाईं ओर (वृद्धि) शिफ्ट हो।
    • इससे संतुलन कीमत बढ़ती है, लेकिन मात्रा अस्पष्ट रह सकती है।​
    • दोनों वक्र बाईं ओर शिफ्ट हों। इससे संतुलन कीमत और मात्रा दोनों घटती हैं।​
    • पूर्ति वक्र दाईं ओर (वृद्धि) शिफ्ट हो और मांग वक्र बाईं ओर (कमी) शिफ्ट हो।
    • इससे मात्रा घटती है, जबकि कीमत पर अस्पष्ट प्रभाव पड़ता है।​
  • प्रत्येक तरीके का प्रभाव
    • पहले तरीके में, जैसे प्राकृतिक आपदा से पूर्ति घटे और आय वृद्धि से मांग बढ़े, तो कीमतें ऊंची चढ़ जाती हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, कृषि आपदा और लोगों की क्रय शक्ति बढ़ने से भोजन महंगा हो जाता है।
    • दूसरे तरीके में, हड़ताल से पूर्ति और मंदी से मांग दोनों घटें
    • तो कारों जैसी वस्तुओं की कीमत व मात्रा दोनों कम हो जाती हैं।
    • तीसरे तरीके में, तकनीकी प्रगति से पूर्ति बढ़े लेकिन फैशन बदलने से मांग घटे
    • तो कुल बिक्री कम होती है। इन शिफ्ट्स का शुद्ध प्रभाव वक्रों के सापेक्षिक आकार पर निर्भर करता है।​
  • वास्तविक उदाहरण
    • कल्पना कीजिए ऑटो उद्योग में श्रमिक हड़ताल (पूर्ति बाईं ओर) और उपभोक्ता आय में कमी (मांग बाईं ओर)।
    • संतुलन बिंदु बदल जाता है, जिससे बाजार में मंदी आती है।
    • इसी तरह, तकनीकी सुधार (पूर्ति दाईं ओर) के साथ स्वास्थ्य चेतना से मांग घटने (बाईं ओर) पर उत्पादन बढ़ने के बावजूद बिक्री प्रभावित होती है।
    • ये शिफ्ट बाजार की गतिशीलता को दर्शाते हैं।

14. मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था ....... का एक महत्वपूर्ण पहलू है। [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (II-पाली]

Correct Answer: (c) पूंजीवाद
Solution:
  • मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था पूंजीवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
  • इसमें उत्पादन के साधन सरकारी नियंत्रण से पूर्णतः मुक्त होते हैं
  • अर्थात सरकार का कोई नियंत्रण या हस्तक्षेप नहीं होता है
  • जिससे प्रत्येक वस्तु की कीमत का निर्धारण मांग और पूर्ति की शक्तियों द्वारा होता है।
  • मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था की परिभाषा
    • जो नवाचार को बढ़ावा देती है। उपभोक्ता की संप्रभुता इसकी प्रमुख विशेषता है
    • जहां खरीदारों की पसंद उत्पादन को निर्देशित करती है।​
  • पूंजीवाद से संबंध
    • पूंजीवाद में मुक्त बाजार मूलभूत तत्व है, क्योंकि यह निजी संपत्ति के स्वामित्व और लाभ के उद्देश्य को सशक्त बनाता है।
    • समाजवाद के विपरीत, यहां कोई केंद्रीय नियोजन नहीं होता; बाजार स्वयं संतुलित होता है।
    • उदाहरणस्वरूप, अमेरिका, सिंगापुर और ताइवान जैसी अर्थव्यवस्थाएं मुक्त बाजार पर आधारित हैं।​
  • प्रमुख विशेषताएं
    • स्वैच्छिक विनिमय: व्यक्ति और व्यवसाय बिना दबाव के व्यापार करते हैं।​
    • प्रतिस्पर्धा: कंपनियां बेहतर उत्पाद और कम कीमत के लिए संघर्ष करती हैं, जो गुणवत्ता बढ़ाती है।​
    • मूल्य तंत्र: कीमतें संसाधनों का आवंटन करती हैं; अधिक मांग से कीमतें बढ़ती हैं, उत्पादन को प्रोत्साहित करती हैं।​
    • निजी स्वामित्व: कारखाने, भूमि आदि निजी हाथों में रहते हैं।​
  • लाभ
    • यह व्यवस्था दक्षता लाती है, क्योंकि प्रतिस्पर्धा बेकारियों को समाप्त करती है।
    • उपभोक्ताओं को विकल्प मिलते हैं, और आर्थिक विकास तेज होता है।
    • वित्तीय बाजारों का विकास नवाचार को बढ़ावा देता है। हालांकि, पूर्ण मुक्त बाजार दुर्लभ है
    • अधिकांश देश मिश्रित मॉडल अपनाते हैं।​
  • चुनौतियां और सीमाएं
    • असमानता बढ़ सकती है, क्योंकि अमीर अधिक लाभ कमाते हैं। एकाधिकार का खतरा रहता है
    • जो प्रतिस्पर्धा को नष्ट कर सकता है। सामाजिक कल्याण (जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा) की उपेक्षा हो सकती है
    • इसलिए न्यूनतम सरकारी नियमन आवश्यक होता है।​

15. उत्पादन फलन को ....... से व्यक्त किया जा सकता है। (जहां L श्रम है और C पूंजी है और Q वह अधिकतम उत्पादन है, जो उत्पन्न किया जा सकता है।) [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) Q = f (L, C)
Solution:
  • उत्पादन फलन हमें आगतों (जैसे-श्रम और पूंजी) एवं निर्गतों के मध्य सही संबंध को बतलाता है।
  • उत्पादन फलन आमतौर पर Q = f (L, C) के रूप में व्यक्त किया जाता है।
  • जहां L श्रम है, C पूंजी और Q वह अधिकतम उत्पादन है, जो उत्पन्न किया जा सकता है।
  • उत्पादन फलन की परिभाषा
    •  यह बताता है कि दिए गए तकनीक के तहत इन आगतों के विभिन्न संयोजनों से अधिकतम कितना उत्पादन प्राप्त हो सकता है।​​
  • सामान्य रूप और व्याख्या
    • सामान्यतः उत्पादन फलन को Q = f(L, C) या Q = f(L, K) के रूप में लिखा जाता है
    • जहां f एक फलन है जो इनपुट्स के बीच विशिष्ट संबंध को परिभाषित करता है।
    • यह सूक्ष्म अर्थशास्त्र में मौलिक अवधारणा है, जो उत्पादन तकनीक को प्रतिबिंबित करती है।
    • वास्तविक दुनिया में यह अनुभवजन्य रूप से निर्धारित होता है।​
  • प्रमुख उदाहरण: कॉब-डगलस फलन
    • कॉब-डगलस उत्पादन फलन एक लोकप्रिय रूप है: Q = A L^α K^β, जहां A प्रबंधकीय दक्षता दर्शाता है
    • α और β श्रम व पूंजी के लोच गुणांक हैं। यदि α + β = 1, तो पैमाने के सतत प्रतिफल प्राप्त होते हैं
    • α + β > 1 होने पर वर्धमान प्रतिफल।​
  • गुण और महत्व
    • सीमांत उत्पाद: श्रम का सीमांत उत्पाद (MPL) = ∂Q/∂L, पूंजी का (MPK) = ∂Q/∂K।
    • तकनीकी प्रतिस्थापन की सीमांत दर (MRTS): L और C के बीच प्रतिस्थापन की दर, जैसे कॉब-डगलस में (αK / βL)।
    • यह फलन लागत विश्लेषण, उत्पादन निर्णय और आर्थिक वृद्धि मॉडल्स में उपयोगी है।​
  • व्यावहारिक अनुप्रयोग
    • फर्में इस फलन से इष्टतम इनपुट संयोजन चुनती हैं
    • जैसे न्यूनतम लागत पर अधिकतम उत्पादन।
    • उदाहरणस्वरूप, Q = 10 L^{0.8} K^{0.2} में MPL = 8 L^{-0.2} (10 K^{0.2}) होता है।​

16. किसी भी अर्थव्यवस्था में, जनता द्वारा संचित धन (निष्क्रिय) का आय वेग ....... के बराबर होता है। [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) शून्य से अधिक
Solution:
  • किसी भी अर्थव्यवस्था में जनता द्वारा संचित धन या जमा धन (निष्क्रिय) का आय वेग शून्य से अधिक होता है
  • क्योंकि संचित धन का अर्थव्यवस्था में किसी न किसी स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में उपयोग होता रहता है।
  • ध्यातव्य है कि आय वेग का तात्पर्य एक निश्चित समय में मुद्रा की एक इकाई को खर्च करने से है।
  • निष्क्रिय धन का अर्थ
    • निष्क्रिय धन वह धन होता है जो जनता द्वारा बचत के रूप में घरों, तिजोरियों या बैंकों में जमा रखा जाता है
    • लेकिन व्यय या लेन-देन में उपयोग नहीं किया जाता। यह मुद्रा आपूर्ति का हिस्सा है
    • किंतु सक्रिय लेन-देन से बाहर रहता है। क्लासिकल और कीन्सियन अर्थशास्त्र में इसे "होअर्डिंग" कहा जाता है
    • जो अर्थव्यवस्था की गतिशीलता को प्रभावित करता है।
  • आय वेग (Income Velocity) की अवधारणा
    • आय वेग (velocity of money) वह दर है
    • जिस पर मुद्रा की एक इकाई एक निश्चित अवधि (जैसे एक वर्ष) में राष्ट्रीय आय के उत्पादन में योगदान देती है।
    • फिशर का लेन-देन समीकरण  या आय रूप में  (जहां M मुद्रा आपूर्ति, V वेग, Y राष्ट्रीय आय) इसकी व्याख्या करता है।
    • सक्रिय धन का वेग सकारात्मक होता है, लेकिन निष्क्रिय धन लेन-देन में न होने से इसका वेग शून्य होता है।
  • क्यों होता है वेग शून्य?
    • निष्क्रिय धन चक्रीय प्रवाह (circular flow of income) में प्रवेश नहीं करता
    • अतः यह आय सृजन प्रक्रिया में योगदान नहीं देता।
    • यदि कुल धन आपूर्ति M = सक्रिय धन (Ma) + निष्क्रिय धन (Mh), तो कुल वेग , जहां Vh = 0
    • इसलिए निष्क्रिय भाग का प्रभाव शून्य रहता है।
    • उदाहरण: यदि 100 रुपये में 80 रुपये सक्रिय हैं (वेग 4) और 20 रुपये निष्क्रिय, तो कुल वेग
    • जो निष्क्रिय धन के शून्य वेग को दर्शाता है।
  • अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
    • निष्क्रिय धन बढ़ने से कुल मुद्रा वेग घटता है, जो मंदी या अपर्याप्त मांग का कारण बन सकता है।
    • कीन्स ने इसे तरलता जाल (liquidity trap) से जोड़ा, जहां लोग धन संचय करते हैं।
    • केंद्रीय बैंक ब्याज दरें कम कर या मात्रात्मक सरलीकरण से इसे सक्रिय करने का प्रयास करते हैं।
    • भारत जैसे विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में डिजिटल भुगतान (UPI) ने निष्क्रिय धन को कम किया है।

17. 2011-12 में भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी रेखा से नीचे के व्यक्तियों का प्रतिशत लगभग कितना था? [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 25.7%
Solution:
  • 2011-12 में भारत में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले व्यक्तियों का प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में 25.7 प्रतिशत, शहरी क्षेत्रों में 13.7 प्रतिशत और पूरे देश में 21.9 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया था।
  • तेंदुलकर पद्धति की व्याख्या
    • तेंदुलकर समिति ने 2009 में गरीबी रेखा को मिश्रित संदर्भ अवधि उपभोग इकाई (MPCE) के आधार पर परिभाषित किया
    • जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रति व्यक्ति प्रति माह ₹816 और शहरी क्षेत्रों के लिए ₹1000 की गरीबी रेखा निर्धारित की गई।
  • राज्यवार विविधता
    • 2011-12 में ग्रामीण गरीबी के मामले में बिहार (39.1%), झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य सबसे ऊपर थे
    • जबकि जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय जैसे राज्यों में यह 10-20% के बीच थी।
    • सबसे कम गरीबी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में पंजाब, केरल और हिमाचल प्रदेश शामिल थे।
    • ये आंकड़े विभिन्न राज्यों में मूल्य अंतर को ध्यान में रखते हुए गणना किए गए थे।​
  • वैकल्पिक अनुमान: रंगराजन समिति
    • रंगराजन समिति (2014) ने तेंदुलकर पद्धति की आलोचना करते हुए गरीबी रेखा को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ₹972 और शहरी के लिए ₹1407 प्रति व्यक्ति प्रति माह बढ़ाया
    • जिससे समग्र गरीबी अनुपात लगभग 29.5% हो गया।
    • हालांकि, सरकार ने आधिकारिक रूप से तेंदुलकर के 25.7% ग्रामीण आंकड़े को ही अपनाया।
    • इस समिति ने खाद्य और गैर-खाद्य दोनों व्ययों को विस्तार से शामिल किया।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • यह 25.7% का आंकड़ा 2004-05 के 37.2% ग्रामीण गरीबी से काफी कमी दर्शाता है
    • जो आर्थिक सुधारों, मनरेगा और अन्य कल्याण योजनाओं का परिणाम था।
    • बाद के वर्षों में, जैसे 2022-23 तक, ग्रामीण अत्यधिक गरीबी घटकर 2.8% रह गई।
    • कुल मिलाकर, लगभग 27 करोड़ लोग इस अवधि में गरीबी से बाहर आए।​

18. सीएमआईई (CMIE) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में (मार्च, 2022 की स्थिति के अनुसार) बेरोजगारी का प्रतिशत कितना है? [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 7.60%
Solution:
  • सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च, 2022 में भारत की बेरोजगारी दर में गिरावट देखने को मिली।
  • देश में बेरोजगारी की दर फरवरी में 8.10% थी
  • जो मार्च में घटकर 7.57% (लगभग 7.60%) रह गई।
  • फरवरी, 2023 में भारत की बेरोजगारी दर 7.45% आकलित की गई है।
  • CMIE क्या है?
    • CMIE एक स्वतंत्र निजी आर्थिक थिंक टैंक है
    • जो भारत में रोजगार और बेरोजगारी जैसे आर्थिक संकेतकों पर नियमित डेटा जारी करता है।
    • यह संगठन मुंबई स्थित है
    • अपनी के माध्यम से घर-घर सर्वेक्षण करके साप्ताहिक व मासिक बेरोजगारी दर की गणना करता है।
    • CMIE के आंकड़े सरकारी स्रोतों से अलग हटकर वास्तविक श्रम बाजार की तस्वीर पेश करते हैं।​
  • मार्च 2022 के प्रमुख आंकड़े
    • राष्ट्रीय बेरोजगारी दर: 7.6%, जो पिछले महीने से 0.5% की कमी दर्शाती है।
    • राज्यों में स्थिति: हरियाणा में सबसे अधिक 26.7%, उसके बाद राजस्थान (25%) और जम्मू-कश्मीर (25%)।
    • छत्तीसगढ़ में न्यूनतम 0.6% दर्ज किया गया।
    • शहरी बेरोजगारी: लगभग 8.28%, जो ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक थी।​
    • CMIE के अनुसार, यह कमी अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने का प्रमाण थी
    • हालांकि गरीब देश के लिए यह दर अभी भी चिंताजनक मानी गई।
  • पृष्ठभूमि और महत्व
    • CMIE के आंकड़े सरकारी PLFS (Periodic Labour Force Survey) से भिन्न होते हैं
    • क्योंकि CMIE दैनिक श्रम भागीदारी पर जोर देता है।
    • मार्च 2022 में, कोविड प्रतिबंध हटने से नौकरियां बढ़ीं, लेकिन राज्य-स्तरीय असमानताएं बनी रहीं।
    • यह दर उन सक्रिय श्रम बल पर आधारित है जो काम तलाश रहे थे लेकिन उपलब्ध नहीं पा रहे थे।​

19. ....... बेरोजगारी उस न्यूनतम बेरोजगारी स्तर को कहते हैं, जिसे एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था, मुद्रास्फीति पैदा किए बिना बनाए रख सकती है। [MTS (T-I) 12 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) प्राकृतिक
Solution:
  • प्राकृतिक बेरोजगारी दर वास्तविक या स्वैच्छिक आर्थिक शक्तियों के परिणामस्वरूप होने वाली न्यूनतम बेरोजगारी दर है।
  • इसे बेरोजगारी की गैर-त्वरित मुद्रास्फीति दर के रूप में भी जाना जाता है।
  • यह बेरोजगारी का वह स्तर है, जिसके नीचे श्रम लागत बढ़ने के कारण मुद्रास्फीति बढ़ने लगती है।
  • परिभाषा और महत्व
    • लेकिन कुछ बेरोजगारी हमेशा बनी रहती है।
    • यह घर्षण बेरोजगारी जैसे नौकरी बदलने वाले श्रमिक) और संरचनात्मक बेरोजगारी जैसे कौशल असंगति) का योग है।
    • एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था में यह स्तर 4-6% के आसपास रहता है, जो मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखता है।​
  • घटक
    • घर्षण बेरोजगारी: श्रमिक नई नौकरी खोजने में लगने वाला सामान्य समय, जैसे स्नातक या स्थानांतरण।
    • यह अर्थव्यवस्था की गतिशीलता का संकेत है।
    • संरचनात्मक बेरोजगारी: उद्योगों में बदलाव से श्रमिकों के कौशल और मांग के बीच असंगति
    • जैसे स्वचालन या तकनीकी प्रगति।
    • ये दोनों चक्रीय बेरोजगारी (मंदी से) से अलग हैं और लंबी अवधि में मौजूद रहते हैं।​
  • फिलिप्स वक्र से संबंध
    • फिलिप्स वक्र बताता है कि कम बेरोजगारी (प्राकृतिक स्तर से नीचे) अल्पकालिक मुद्रास्फीति बढ़ा सकती है
    • क्योंकि अधिक मांग मजदूरी और कीमतें बढ़ाती है। लंबे समय में, प्राकृतिक स्तर पर बेरोजगारी स्थिर रहती है
    • मुद्रास्फीति अपेक्षाओं पर निर्भर करती है। नीति निर्माताओं का लक्ष्य यही स्तर बनाए रखना है।​​
  • मापन और प्रभाव
    • यह स्तर फेडरल रिजर्व या अन्य केंद्रीय बैंक द्वारा आर्थिक डेटा से अनुमानित होता है।
    • यदि बेरोजगारी इससे नीचे दबाई जाती है, तो मुद्रास्फीति तेज हो जाती है
    • भारत जैसे विकासशील देशों में यह उच्च हो सकता है जनसांख्यिकीय दबाव से।​

20. किस प्रकार की बेरोजगारी में व्यक्ति अपनी क्षमता से कम योगदान देता है? [MTS (T-I) 11 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) प्रच्छन्न बेरोजगारी
Solution:
  • प्रच्छन्न बेरोजगारी तब होती है, जब श्रम शक्ति का एक हिस्सा या तो बिना काम के रह जाता है
  • इस तरह से काम करता है कि श्रमिक उत्पादकता अनिवार्य के रूप में शून्य हो जाती है।
  • यह बेरोजगारी कुल उत्पादन को प्रभावित नहीं करती है
  • अर्थात बेरोजगारी में व्यक्ति अपनी क्षमता से कम योगदान देता है। ऐसी बेरोजगारी कृषि या अनौपचारिक क्षेत्रों में होती है।
  • परिभाषा
    •  जहां एक व्यक्ति के स्थान पर कई लोग कार्य करते हैं, लेकिन कुल उत्पादन में कोई वृद्धि नहीं होती।
    • उदाहरणस्वरूप, एक खेत में चार श्रमिक काम कर रहे हों, लेकिन तीन के हटने से भी उत्पादन अपरिवर्तित रहे।​
  • कारण
    • यह बेरोजगारी अति-जनसंख्या, कृषि पर अत्यधिक निर्भरता और सीमित गैर-कृषि रोजगारों के कारण उत्पन्न होती है।
    • ग्रामीण क्षेत्रों में पारिवारिक खेती में अतिरिक्त सदस्य शामिल हो जाते हैं
    • जिनकी सीमांत उत्पादकता शून्य होती है।
    • इसके अलावा, कौशल असंगति और औद्योगिक विकास की कमी भी इसे बढ़ावा देती है।​​
  • विशेषताएं
    • निम्न उत्पादकता: व्यक्ति कार्यरत होते हैं, लेकिन उनकी क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं होता।
    • अल्प-रोजगारी से भिन्न: अल्प-रोजगारी में व्यक्ति अपनी योग्यता से कम कार्य करता है
    • जैसे स्नातक छोटे काम में), जबकि प्रच्छन्न में उत्पादन प्रभाव शून्य होता है।​
    • ग्रामीण प्रभावित: मुख्यतः भारत जैसे विकासशील देशों में कृषि क्षेत्र में पाई जाती है।
  • उदाहरण
    • भारत के ग्रामीण खेतों में एक परिवार के सभी सदस्य खेती में लगे रहते हैं
    • लेकिन यदि आधे हट जाएं तो फसल उत्पादन वही रहता है।
    • इसी प्रकार, असंगठित शहरी क्षेत्रों में भी अतिरिक्त श्रमिक बिना प्रभाव के कार्य करते हैं।​
  • आर्थिक प्रभाव
    • यह बेरोजगारी संसाधनों के अकुशल उपयोग को दर्शाती है, जिससे आर्थिक विकास रुकता है।
    • इससे गरीबी बढ़ती है और श्रमिकों की आय न्यून रहती है।
    • सरकारें कौशल प्रशिक्षण और रोजगार विविधीकरण से इसे कम करने का प्रयास करती हैं।​