Correct Answer: (a) राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ)
Solution:- राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) भारत में गरीबी रेखा का अनुमान लगाने के लिए घरेलू उपभोग व्यय पर एक सर्वेक्षण आयोजित करता है।
- गरीबी रेखा को किसी व्यक्ति की मौलिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक आय के न्यूनतम स्तर के रूप में परिभाषित किया जाता है।
- NSSO की भूमिका
- यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नमूना सर्वेक्षण आयोजित करता है
- जिसमें परिवारों के व्यय, आय और उपभोग पैटर्न का आकलन शामिल होता है ।
- NSSO के 68वें राउंड (2011-12) जैसे सर्वेक्षणों से प्राप्त डेटा पर तेंदुलकर समिति ने गरीबी रेखा को ग्रामीण क्षेत्रों में ₹816
- शहरी में ₹1000 प्रति व्यक्ति मासिक निर्धारित किया था ।
- रंगराजन समिति (2014) ने इसे संशोधित कर ग्रामीण के लिए ₹972 और शहरी के लिए ₹1407 किया
- जो NSSO डेटा पर ही निर्भर था ।
- निर्धारण प्रक्रिया
- गरीबी रेखा का अनुमान निम्न चरणों में होता है:
- डेटा संग्रह: NSSO बड़े पैमाने पर घरेलू सर्वेक्षण करता है
- जैसे PLFS (आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण) और उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण ।
- मानक निर्धारण: योजना आयोग/नीति आयोग समितियों (अलघ, लकड़ावाला, तेंदुलकर, रंगराजन) के माध्यम से कैलोरी-आधारित (2400 ग्रामीण, 2100 शहरी) से बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) तक विस्तार ।
- आधिकारिक अनुमान: नीति आयोग अब MPI जारी करता है
- लेकिन आधार NSSO सर्वेक्षण ही रहता है; 2023 MPI रिपोर्ट में 135 करोड़ भारतीय बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले ।
- अन्य संस्थाएँ और सीमाएँ
- नीति आयोग: MPI (स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवनस्तर) जारी करता है, लेकिन डेटा NSSO/NFHS से ।
- सीमाएँ: कैलोरी-आधारित मॉडल स्वास्थ्य/शिक्षा को नजरअंदाज करता है
- COVID-19 के बाद PLFS 2024-25 में कमी दर्ज ।
- वैश्विक तुलना: विश्व बैंक $2.15/दिन (PPP) मानक अपनाता है, लेकिन भारत NSSO-केंद्रित रहता है ।
- हालिया अपडेट (2026 तक)
- नीति आयोग की 2023 MPI रिपोर्ट के अनुसार
- भारत ने 24.82 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला, NFHS-5 डेटा पर आधारित।
- PLFS 2024-25 (जनवरी 2026 तक) से नई गरीबी रेखा अपडेट की प्रक्रिया चल रही है
- जो NSSO सर्वेक्षणों पर निर्भर है ।
- यह अनुमान कल्याण योजनाओं (PMGKAY, PMAY) की प्रभावशीलता मापने में सहायक होता है।