भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप (अर्थव्यवस्था)

Total Questions: 28

21. निम्नलिखित में से कौन-सी बेरोजगारी किसी अर्थव्यवस्था में मंदी का परिणाम है? [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) चक्रीय बेरोजगारी
Solution:
  • चक्रीय बेरोजगारी समग्र बेरोजगारी का वह घटक है
  • जो सीधे आर्थिक उत्थान और मंदी के चक्रों से उत्पन्न होती है।
  • यह आमतौर पर मंदी के दौरान बढ़ती है तथा आर्थिक विस्तार के दौरान घटती है।
  • अर्थात यह किसी अर्थव्यवस्था में मंदी का परिणाम है।
  • चक्रीय बेरोजगारी की परिभाषा
    • इससे व्यवसाय अपनी उत्पादन क्षमता घटाते हैं
    • जिसके फलस्वरूप श्रमिकों की मांग कम हो जाती है और बेरोजगारी बढ़ जाती है।
    • उदाहरणस्वरूप, महामंदी या हालिया आर्थिक मंदियों में यह स्पष्ट दिखाई देती है।​
  • मंदी में प्रभाव
    • मंदी के दौरान वस्तुओं-सेवाओं की मांग घटने से कंपनियां कारखाने बंद कर देती हैं
    • कर्मचारियों को निकाल देती हैं, जिससे बेरोजगारी तेजी से बढ़ती है।
    • यह न केवल आय में कमी लाती है बल्कि उपभोक्ता विश्वास को भी कमजोर करती है
    • जो मंदी को गहरा बनाती है। ऐतिहासिक रूप से, 2008 की वैश्विक मंदी में अमेरिका में बेरोजगारी 10% तक पहुंच गई थी।​
  • समाधान के उपाय
    • सरकारें चक्रीय बेरोजगारी कम करने के लिए मौद्रिक नीति (ब्याज दरें घटाना) और राजकोषीय नीति (व्यय बढ़ाना) अपनाती हैं
    • ताकि मांग को प्रोत्साहित किया जा सके। कीन्सियन अर्थशास्त्र इसकी वकालत करता है
    • मंदी में सार्वजनिक निवेश से रोजगार बहाल होता है।
    • भारत जैसे विकासशील देशों में भी बजट घोषणाएं इसी दिशा में कार्य करती हैं।​

22. रंगराजन समिति संबंधित है- [MTS (T-I) 09 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) गरीबी का आकलन
Solution:
  • रंगराजन समिति का गठन वर्ष 2012 में गरीबी आकलन के लिए किया गया
  • इसने अपनी रिपोर्ट वर्ष 2014 में प्रस्तुत की।
  • इसने गरीबी आकलन करने के लिए अखिल भारतीय ग्रामीण और शहरी वस्तुओं की अलग-अलग टोकरियां रखने की प्रथा को पुनः अपनाया।
  • गठन और उद्देश्य
    • जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और पूर्व RBI गवर्नर डॉ. सी. रंगराजन ने की।
    • इसका मुख्य उद्देश्य देश में गरीबी के आकलन के लिए नई और अधिक समावेशी पद्धति विकसित करना था
    • जो तेंदुलकर समिति की पुरानी विधि की कमियों को दूर करे। समिति ने 2014 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत
    • जिसमें गरीबी रेखा निर्धारण के लिए न्यूनतम उपभोग व्यय पर आधारित बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया गया।​​
  • प्रमुख सिफारिशें
    • समिति ने गरीबी को केवल खाद्य और गैर-खाद्य व्यय तक सीमित न रखते हुए शिक्षा
    • स्वास्थ्य, संपत्ति, आवास और सामाजिक जरूरतों जैसे कारकों को शामिल किया।
    • ग्रामीण क्षेत्रों के लिए दैनिक गरीबी रेखा 32 रुपये और शहरी क्षेत्रों के लिए 47 रुपये निर्धारित की गई।
    • इसके अलावा, समिति ने सुझाव दिया कि गरीबी अनुमान में क्षेत्रीय भिन्नताओं और मुद्रास्फीति को ध्यान में रखा जाए
    • वंचना के व्यापक मापदंड अपनाए जाएं।​
  • प्रभाव और आलोचना
    • रंगराजन समिति की रिपोर्ट ने गरीबी दर को तेंदुलकर समिति (2009) से अधिक दिखाया—2011-12 में ग्रामीण क्षेत्रों में 30.9% और शहरी में 26.4%।
    • हालांकि, सरकार ने इसे पूरी तरह लागू नहीं किया, और तेंदुलकर पद्धति ही प्रचलित रही।
    • आलोचकों ने कहा कि यह व्यय-आधारित दृष्टिकोण अभी भी बहुआयामी वंचना को पूरी तरह कवर नहीं करता।​
  • अन्य संदर्भ
    • सी. रंगराजन की अध्यक्षता में अन्य समितियां भी गठित हुईं
    • जैसे 1993 की विनिवेश समिति (जिसने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में विनिवेश के लिए पारदर्शी प्रक्रिया सुझाई) और 2008 की वित्तीय समावेशन समिति।
    • लेकिन "रंगराजन समिति" से आमतौर पर 2012 वाली गरीबी मापन समिति ही अभिप्रेत होती है।​

23. किस संस्था का संबंध भारत में गरीबी रेखा के आकलन से है? [MTS (T-I) 08 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन
Solution:
  • भारत में गरीबी रेखा का आकलन नीति आयोग के टास्क फोर्स द्वारा सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर किया जाता है।
  • वर्तमान में यह राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा किया जाता है।
  • NSSO की भूमिका
    • NSSO, जो अब सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) का हिस्सा है
    • भारत का सबसे बड़ा नमूना सर्वेक्षण संगठन है।
    • यह ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण आयोजित करता है
    • जो गरीबी रेखा गणना का आधार बनते हैं।
    • इन सर्वेक्षणों से प्राप्त आंकड़ों पर कैलोरी सेवन, न्यूनतम आवश्यकताएं और खर्च
    • जैसे मानदंड लागू होकर गरीबी का आकलन होता है।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • भारत में गरीबी रेखा का आकलन 1960 के दशक से NSSO सर्वेक्षणों पर निर्भर रहा है।
    • योजना आयोग (अब नीति आयोग) ने NSSO डेटा का उपयोग विभिन्न समितियों के माध्यम से किया
    • जैसे 1993 की लकड़ावाला समिति ने 2400 कैलोरी (ग्रामीण) और 2100 कैलोरी (शहरी) आधारित रेखा सुझाई।
    • बाद में तेंदुलकर समिति (2009) ने मासिक प्रति व्यक्ति व्यय ₹816 (ग्रामीण) और ₹1000 (शहरी) अनुमानित किया।​
  • प्रमुख समितियां और NSSO कनेक्शन
    • लकड़ावाला समिति (1993): NSSO के 43वें और 48वें दौर के सर्वेक्षणों पर आधारित, कैलोरी-आधारित मॉडल अपनाया।​
    • तेंदुलकर समिति (2009): NSSO के 61वें दौर (2004-05) के डेटा से गरीबी दर 37.2% से घटाकर 21.9% आंकी।​
    • रंगराजन समिति (2014): NSSO 68वें दौर (2011-12) पर आधारित, ग्रामीण ₹972 और शहरी ₹1407 प्रति माह सुझाया।​
    • ये सभी NSSO के उपभोग डेटा पर निर्भर रहीं
    • जो गरीबी उन्मूलन योजनाओं जैसे मनरेगा और पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के लिए नींव प्रदान करते हैं।​
  • वर्तमान स्थिति और नीति आयोग
    • 2015 में योजना आयोग के विघटन के बाद नीति आयोग ने बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) अपनाया
    • जो NSSO/NSO डेटा के साथ NFHS (National Family Health Survey) पर आधारित है।
    • MPI स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर जैसे 12 संकेतकों पर गरीबी मापता है
    • लेकिन मौद्रिक गरीबी रेखा अभी भी NSSO-आधारित सर्वेक्षणों से प्रभावित है।
    • 2023 के आंकड़ों में बहुआयामी गरीबी 11.28% तक घटी।​​

24. 2008-2010 की मंदी के कारण हुई बेरोजगारी निम्न में से किस प्रकार की बेरोजगारी का उदाहरण है? [MTS (T-I) 03 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) चक्रीय
Solution:
  • चक्रीय बेरोजगारी समग्र बेरोजगारी का वह घटक है, जो सीधे आर्थिक उत्थान और मंदी के चक्रों से उत्पन्न होती है।
  • वर्ष 2008-2010 की मंदी के कारण आयी बेरोजगारी चक्रीय बेरोजगारी का उदाहरण है।
  • चक्रीय बेरोजगारी क्या है?
    • इससे कंपनियां कम सामान बेच पाती हैं, उत्पादन घटता है और श्रमिकों की आवश्यकता कम पड़ती है
    • जिसके फलस्वरूप नौकरियां खत्म हो जाती हैं।​
    • उदाहरणस्वरूप, 2008 की मंदी में अमेरिका के सबप्राइम मॉर्गेज संकट ने वैश्विक वित्तीय प्रणाली को हिला दिया
    • जिससे क्रेडिट संकुचन (credit crunch) हुआ और उपभोक्ता खर्च गिर गया।​
    • यह बेरोजगारी अस्थायी होती है और आर्थिक सुधार के साथ ठीक हो जाती है, जैसे 2010 के बाद धीरे-धीरे रोजगार बढ़ा।​
  • 2008-2010 मंदी के प्रमुख कारण
    • मंदी की शुरुआत अमेरिकी हाउसिंग बबल फूटने से हुई, जहां सबप्राइम ऋणों पर आधारित जटिल वित्तीय उत्पाद (जैसे CDO और CDS) विफल हो गए।​
    • बैंकों के बीच विश्वास टूटने से उधार रुक गया, व्यवसाय प्रभावित हुए और बेरोजगारी दर अमेरिका में 10% तक पहुंच गई।​
    • यह चक्रीय प्रभाव था क्योंकि मांग की कमी ने गुणक प्रभाव उत्पन्न किया—उपभोक्ता खर्च घटा तो खुदरा
    • विनिर्माण और परिवहन क्षेत्र सब प्रभावित हुए।​
  • प्रभाव और सबक
    • इस मंदी ने अमेरिका-यूरोप में करोड़ों नौकरियां छीनीं, भारत जैसे देशों में भी निर्यात प्रभावित हुआ।​
    • सरकारों ने Quantitative Easing जैसी नीतियां अपनाईं, जो चक्रीय बेरोजगारी को कम करने में सहायक रहीं।​

25. निम्नलिखित में से किस प्रकार की बेरोजगारी को वास्तविक मजदूरी बेरोजगारी के रूप में भी जाना जाता है? [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) चिरसम्मत
Solution:
  • चिरसम्मत बेरोजगारी को वास्तविक मजदूरी बेरोजगारी के रूप में भी जाना जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है
  • जिसमें मजदूरी संतुलन स्तर से ऊपर निर्धारित की जाती है, जिसके परिणामस्वरूप श्रम की अधिक आपूर्ति या बेरोजगारी होती है।
  • यह तब होता है, जब न्यूनतम वेतन या वेतन विनियमन के अन्य रूप जैसे सामूहिक सौदेबाजी समझौते
  • आपूर्ति और मांग की बाजार शक्तियों द्वारा निर्धारित मजदूरी से अधिक हो जाते हैं।
  • वास्तविक मजदूरी बेरोजगारी की परिभाषा
    • वास्तविक मजदूरी बेरोजगारी शास्त्रीय आर्थिक सिद्धांत से जुड़ी है, जहां संतुलन वास्तविक मजदूरी वह स्तर है
    • जो पूर्ण रोजगार सुनिश्चित करता है।
    • यदि न्यूनतम मजदूरी कानून, यूनियन की सौदेबाजी या दक्षता मजदूरी के कारण मजदूरी इससे ऊपर चली जाती है
    • तो नियोक्ता कम श्रमिकों को नियुक्त करते हैं, जिससे बेरोजगारी बढ़ती है।
    • यह श्रम बाजार में अतिपूर्ति (surplus labour) का परिणाम है
    • जहां श्रमिक प्रचलित मजदूरी पर काम करने को तैयार हैं लेकिन नौकरियां उपलब्ध नहीं हैं।​
  • कारण और उदाहरण
    • न्यूनतम वेतन कानून: यदि न्यूनतम मजदूरी संतुलन स्तर से अधिक हो
    • तो नियोक्ता कम लोगों को हायर करते हैं, जैसे कई विकासशील देशों में देखा जाता है।
    • सामूहिक सौदेबाजी: मजदूर यूनियनें ऊंची मजदूरी पर जोर देती हैं
    • जो बाजार संतुलन से ऊपर होती है, परिणामस्वरूप बेरोजगारी।​
    • दक्षता मजदूरी: कंपनियां उत्पादकता बढ़ाने के लिए ऊंची मजदूरी देती हैं
    • लेकिन व्यापक स्तर पर यह बेरोजगारी पैदा कर सकती है।
    • यह मुख्य रूप से शास्त्रीय बेरोजगारी का हिस्सा है, जो प्राकृतिक बेरोजगारी से अलग है।

26. बेरोजगारी दर ज्ञात करने का सूत्र ....... है। [MTS (T-I) 13 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) (बेरोजगार श्रमिक/कुल श्रम बल) × 100
Solution:
  • बेरोजगारी की वास्तविक दर का सूत्र बेरोजगार व्यक्तियों की संख्या कुल श्रम बल (रोजगार व्यक्तियों की संख्या + बेरोजगार व्यक्तियों की संख्या)
  • U = (बेरोजगार श्रमिक/ कुल श्रम बल) × 100
  • मुख्य सूत्र
    • यहाँ कुल श्रम बल में कार्यरत (रोजगार प्राप्त) और बेरोजगार दोनों व्यक्ति शामिल होते हैं
    • जो सक्रिय रूप से नौकरी की तलाश कर रहे हैं ।​
    • उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में कुल श्रम बल 10,000 व्यक्ति हैं और 500 बेरोजगार हैं, तो बेरोजगारी दर =  होगी ।​
  • प्रमुख अवधारणाएँ
    • श्रम बल (Labour Force): कामकाजी उम्र (आमतौर पर 15-16 वर्ष से अधिक) के वे व्यक्ति जो या तो नौकरी कर रहे हैं
    • सक्रिय रूप से नौकरी तलाश रहे हैं। इसमें सेवानिवृत्त व्यक्ति, छात्र या गृहिणियाँ शामिल नहीं होते ।​
    • बेरोजगार (Unemployed): वे व्यक्ति जो बिना काम के हैं
    • नौकरी की सक्रिय तलाश कर रहे हैं और तुरंत काम करने को उपलब्ध हैं ।​
    • यह दर प्रतिशत में व्यक्त की जाती है, जो अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य का आकलन करने में सहायक होती है ।​
  • मापन की विधियाँ (भारत संदर्भ)
    • भारत में राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) और आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) द्वारा बेरोजगारी का आकलन तीन मुख्य विधियों से किया जाता है:​
    • सामान्य स्थिति (Usual Status): वर्ष के अधिकांश समय बेरोजगारी को मापती है
    • यह सबसे संकीर्ण अनुमान देती है।
    • वर्तमान साप्ताहिक स्थिति : पिछले सप्ताह में एक भी घंटे काम न करने वाले को बेरोजगार मानती है।
    • वर्तमान दैनिक स्थिति (Current Daily Status): सप्ताह में किसी दिन काम न मिलने पर बेरोजगार गिनती है
    • यह सबसे व्यापक माप है ।​
  • महत्व और सीमाएँ
    • बेरोजगारी दर चक्रीय (आर्थिक मंदी से), संरचनात्मक (कौशल असंगति से), घर्षण (नौकरी बदलने से) या मौसमी बेरोजगारी को दर्शाती है ।​
    • यह श्रम बाजार की कमजोरी को उजागर करती है
    • लेकिन अल्प-रोजगार (कम घंटे या निम्न कौशल वाली नौकरी) या हतोत्साहित कार्यबल (नौकरी तलाश छोड़ देने वाले) को शामिल नहीं करती ।​
    • वैश्विक रूप से आईएलओ (ILO) मानकों पर आधारित यह सूत्र अमेरिका
    • यूरोप और भारत जैसे देशों में समान रूप से उपयोग होता है ।​

27. भारत में गरीबी रेखा का अनुमान निम्नलिखित में से किसके द्वारा किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ)
Solution:
  • राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) भारत में गरीबी रेखा का अनुमान लगाने के लिए घरेलू उपभोग व्यय पर एक सर्वेक्षण आयोजित करता है।
  • गरीबी रेखा को किसी व्यक्ति की मौलिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक आय के न्यूनतम स्तर के रूप में परिभाषित किया जाता है।
  • NSSO की भूमिका
    • यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नमूना सर्वेक्षण आयोजित करता है
    • जिसमें परिवारों के व्यय, आय और उपभोग पैटर्न का आकलन शामिल होता है ।​
    • NSSO के 68वें राउंड (2011-12) जैसे सर्वेक्षणों से प्राप्त डेटा पर तेंदुलकर समिति ने गरीबी रेखा को ग्रामीण क्षेत्रों में ₹816
    • शहरी में ₹1000 प्रति व्यक्ति मासिक निर्धारित किया था ।​
    • रंगराजन समिति (2014) ने इसे संशोधित कर ग्रामीण के लिए ₹972 और शहरी के लिए ₹1407 किया
    • जो NSSO डेटा पर ही निर्भर था ।​
  • निर्धारण प्रक्रिया
    • गरीबी रेखा का अनुमान निम्न चरणों में होता है:
    • डेटा संग्रह: NSSO बड़े पैमाने पर घरेलू सर्वेक्षण करता है
    • जैसे PLFS (आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण) और उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण ।​
    • मानक निर्धारण: योजना आयोग/नीति आयोग समितियों (अलघ, लकड़ावाला, तेंदुलकर, रंगराजन) के माध्यम से कैलोरी-आधारित (2400 ग्रामीण, 2100 शहरी) से बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) तक विस्तार ।​
    • आधिकारिक अनुमान: नीति आयोग अब MPI जारी करता है
    • लेकिन आधार NSSO सर्वेक्षण ही रहता है; 2023 MPI रिपोर्ट में 135 करोड़ भारतीय बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले ।​
  • अन्य संस्थाएँ और सीमाएँ
    • नीति आयोग: MPI (स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवनस्तर) जारी करता है, लेकिन डेटा NSSO/NFHS से ।​
    • सीमाएँ: कैलोरी-आधारित मॉडल स्वास्थ्य/शिक्षा को नजरअंदाज करता है
    • COVID-19 के बाद PLFS 2024-25 में कमी दर्ज ।​
    • वैश्विक तुलना: विश्व बैंक $2.15/दिन (PPP) मानक अपनाता है, लेकिन भारत NSSO-केंद्रित रहता है ।​
  • हालिया अपडेट (2026 तक)
    • नीति आयोग की 2023 MPI रिपोर्ट के अनुसार
    • भारत ने 24.82 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला, NFHS-5 डेटा पर आधारित।
    • PLFS 2024-25 (जनवरी 2026 तक) से नई गरीबी रेखा अपडेट की प्रक्रिया चल रही है
    • जो NSSO सर्वेक्षणों पर निर्भर है ।
    • यह अनुमान कल्याण योजनाओं (PMGKAY, PMAY) की प्रभावशीलता मापने में सहायक होता है।​

28. 2011-12 में भारत की कितने प्रतिशत जनसंख्या के गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने का आकलन किया गया था? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) 21.9%
Solution:
  • गरीबी का तात्पर्य आधारभूत आवश्यकताओं तक पहुंच की असमर्थता से है
  • अर्थात जब व्यक्ति अपनी मौलिक जरूरतों को भी पूरा न कर सके तो वह गरीब है।
  • गरीबी रेखा से तात्पर्य उस न्यूनतम आय से है
  • जो बुनियादी मानवीय आवश्यकताओं (वस्तुओं और सेवाओं) को पूरा कर सकने में सक्षम न हो।
  • वर्ष 2011-12 में भारत की 21.9 प्रतिशत जनसंख्या के गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने का आकलन किया गया था।
  • यह आंकड़ा राष्ट्रीय सैंपल सर्वे कार्यालय (NSSO) के 68वें दौर के उपभोग व्यय सर्वेक्षण पर आधारित था।
  • योजना आयोग ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति मासिक व्यय 816 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 1000 रुपये को गरीबी रेखा माना।​
  • पद्धति विवरण
    • तेंदुलकर समिति (2009) ने गरीबी का आकलन मिश्रित संदर्भ अवधि (MRP) विधि से किया
    • जिसमें भोजन और गैर-भोजन दोनों व्यय शामिल थे।
    • ग्रामीण क्षेत्रों में BPL अनुपात 25.7% और शहरी क्षेत्रों में 13.7% रहा।
    • इससे कुल 27 करोड़ लोग (लगभग 21.9%) प्रभावित हुए, जो 2004-05 के 37.2% से काफी कम था।​
  • राज्यवार भिन्नताएं
    • राज्यों में गरीबी दर असमान रही:
    • बिहार: 33.74%
    • असम: 31.98%
    • गुजरात: 16.63%
    • गोवा: 5.09% (सबसे कम, उसके बाद केरल 7.05%)।​
  • बाद के आकलन
    • रंगराजन समिति (2014) ने इसे 29.5% अनुमानित किया
    • जिसमें ग्रामीण के लिए 972 रुपये और शहरी के लिए 1407 रुपये की सीमा रखी।
    • फिर भी, तेंदुलकर का 21.9% आधिकारिक सरकारी आंकड़ा बना।
    • विश्व बैंक के अंतरराष्ट्रीय मानक ($2.15/दिन) पर 2011-12 में यह करीब 16-27% के बीच रहा।​