Solution:44वां संविधान संशोधन (1978) जनता पार्टी सरकार द्वारा लाया गया एक ऐतिहासिक सुधार था, जिसका मुख्य उद्देश्य आपातकाल (1975-77) के दौरान 42वें संशोधन द्वारा सीमित किए गए नागरिक अधिकारों और न्यायिक शक्तियों को बहाल करना था। इस संशोधन ने 'आंतरिक अशांति' की जगह 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द रखा, संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से हटाकर कानूनी अधिकार बनाया और आपातकाल की घोषणा की प्रक्रिया को कठिन बनाया।
• संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से बाहर कर दिया गया।
• संविधान में एक नया अनुच्छेद 300-A जोड़ा गया, जिसमें यह प्रावधान था कि विधि के अधिकार के बिना किसी भी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा।
• 40वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 आपातकाल के दौरान पारित किया गया था। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य संघ की संपत्ति और क्षेत्रीय जल (Territorial Waters), महाद्वीपीय शेल्फ, विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) आदि को संविधान में स्पष्ट रूप से केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में लाना था। इसके तहत संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन कर कुछ द्वीपों और समुद्री क्षेत्रों को भारत के क्षेत्र में शामिल किया गया।
• 42वां संविधान संशोधन: 1976 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा आपातकाल के दौरान पारित 42वां संविधान संशोधन (42nd Amendment Act), सबसे व्यापक और विवादास्पद संशोधन है। इसे "'लघु-संविधान'" (Mini-Constitution) भी कहा जाता है, जिसने संविधान की प्रस्तावना, मौलिक कर्तव्यों और केंद्र-राज्य संबंधों में भारी बदलाव किए।
• 37वां संविधान संशोधन (1975) मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में मान्यता देने और उसकी विधानसभा के गठन से संबंधित था, जिसने अनुच्छेद 239A और 240 में संशोधन करके इसे पॉन्डिचेरी और मिजोरम के साथ जोड़ा और राष्ट्रपति की शक्तियों को संशोधित किया, जिससे अरुणाचल प्रदेश के लिए नियम बनाने का प्रावधान हुआ जब उसकी विधानसभा निलंबित या भंग हो