भारतीय राज्यव्यवस्था एवं शासन (Part-IV)

Total Questions: 40

21. राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्यों की नियुक्ति हेतु गठित समिति की अध्यक्षता कौन करता है? [M.P.P.C.S. (Pre) 2022]

Correct Answer: (b) मुख्यमंत्री
Solution:मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 22 के तहत राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्य पाल द्वारा की जिती है राज्यपाल द्वारा यह नियुक्तियां एकसमिति की सिफारिशों के आधार पर की जाती है, जिसमें मुख्यमंत्री अध्यक्ष होते हैं तथा सदस्यों के रूप में विधानसभा अध्यक्ष, राज्य गृह मंत्री और विधानसभा में विपक्ष का नेता शामिल होते हैं। परंतु जहां उस परिषद का सभापति और उस परिषद में विपक्ष का नेता भी समिति के सदस्य होते हैं। इस दृष्टि से इस प्रश्न का अभीष्ट उत्तर विकल्प (a) एवं (c) होंगे।

22. राज्य मानव अधिकार आयोग में सदस्य के रूप में उच्च न्यायालय का कोई आसीन न्यायाधीश या कोई आसीन जिला न्यायाधीश किसके परामर्श के पश्चात नियुक्त किया जा सकता है? [M.P. P.C.S. (Pre), 2018]

Correct Answer: (b) संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
Solution:मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 22(1) के तृतीय परंतुक के अनुसार, राज्य मानव अधिकार आयोग में सदस्य के रूप में उच्च न्यायालय का कोई आसीन न्यायाधीश या कोई आसीन जिला न्यायाधीश संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति से परामर्श करने के पश्चात ही नियुक्त किया जाएगा अन्यथा नहीं।

23. राज्य आयोग के अध्यक्ष के पद पर हुई रिक्ति की दशा में, किसी एक सदस्य को अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए प्राधिकृत करने की शक्ति किसे है? [M.P. P.C.S. (Pre), 2018]

Correct Answer: (d) राज्यपाल
Solution:मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 25 के अनुसार, राज्य आयोग (राज्य मानव अधिकार आयोग) के अध्यक्ष की मृत्यु, पदत्याग या अन्य कारण से उसके पद में हुई रिक्ति की दशा में, राज्यपाल, अधिसूचना द्वारा, सदस्यों में से किसी एक सदस्य को अध्यक्ष के रूप में तब तक कार्य करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा, जब तक ऐसी रिक्ति को भरने के लिए अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो जाती।

24. राज्य आयोग अपना वार्षिक प्रतिवेदन किसके समक्ष प्रस्तुत करता है? [M.P. P.C.S. (Pre), 2018]

Correct Answer: (b) राज्य सरकार
Solution:मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अनुसार 'राज्य आयोग' (State Commission) से तात्पर्य राज्य मानव अधिकार आयोग से है। यह आयोग, राज्य सरकार को वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है। राज्य सरकार इस प्रतिवेदन को विधानमंडल के सदन सदनों के समक्ष रखवाता है।

25. आयोग, राज्य आयोग का प्रत्येक सदस्य एवं मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम के अधीन कृत्यों का प्रयोग करने के लिए आयोग या राज्य आयोग द्वारा नियुक्त या प्राधिकृत प्रत्येक अधिकारी समझा जाता है? [M.P. P.C.S. (Pre), 2018]

Correct Answer: (b) लोक सेवक
Solution:मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 39 के तहत राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, राज्य आयोग का प्रत्येक सदस्य एवं मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम के अधीन कृत्यों का प्रयोग करने के लिए आयोग या राज्य आयोग द्वारा नियुक्त या प्राधिकृत प्रत्येक अधिकारी भारतीय दंड संहिता की धारा 21 के अर्थ में 'लोक सेवक' समझा जाता है। ज्ञातव्य है कि भारतीय दंड संहिता को 'भारतीय न्याय संहिता' से प्रतिस्थापित किया गया है, जो 1 जुलाई, 2024 से प्रभावी होगी।

26. मानव अधिकार न्यायालयों में मामलों के संचालन के प्रयोजनार्थ राज्य सरकार एक अधिवक्ता को विशिष्ट लोक अभियोजक के रूप में विनिर्दिष्ट कर सकती है, जो कम-से-कम वर्षों ................. तक प्रैक्टिस में रहा है। [M.P. P.C.S. (Pre), 2019]

Correct Answer: (d) सात
Solution:मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 31 के अनुसार, राज्य सरकार, प्रत्येक मानव अधिकार न्यायालय के लिए, अधिसूच-ना द्वारा एक लोक अभियोजक विनिर्दिष्ट करेगी या किसी ऐसे अधिवक्ता को, जिसने कम-से-कम सात वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में विधि-व्यवसाय किया हो, उस न्यायालय में मामलों के संचालन के प्रयोजन के लिए, विशेष लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त करेगी। ज्ञातव्य है कि भारतीय दंड संहिता को 'भारतीय न्याय संहिता' से तथा दंड प्रक्रिया संहिता को 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' से प्रतिस्थापित किया गया है, जो 1 जुलाई, 2024 से प्रभावी होंगी।

27. भारतीय दंड संहिता की धारा 175, धारा 178, धारा 179, धारा 180 या धारा 228 में वर्णित अपराध के संदर्भ में मानव अधिकार आयोग को समझा जाता है- [M.P. P.C.S. (Pre), 2018]

Correct Answer: (b) सिविल न्यायालय
Solution:मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13(4) के अंतर्गत भारतीय दंड संहिता की धारा 175, धारा 178, धारा 179, धारा 180 या धारा 228 में वर्णित अपराध के संदर्भ में मानव अधिकार आयोग को सिविल न्यायालय समझा जाता है। साथ ही 1993 के अधिनियम की धारा 13(5) के तहत मानव अधिकार आयोग के समक्ष प्रत्येक कार्यवाही को भारतीय दंड संहिता की धारा 193 और धारा 228 के अर्थ में तथा धारा 196 के प्रयोजनों के लिए न्यायिक कार्यवाही समझा जाता है और आयोग को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 195 और अध्याय 26 के सभी प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाता है। ज्ञातव्य है कि भारतीय दंड संहिता को भारतीय न्याय संहिता से तथा दण्ड प्रक्रिया संहिता को 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' से प्रतिस्थापित किया गया है, जो 1 जुलाई, 2004 से प्रभावी होगा।

28. सशस्त्र बलों के सदस्यों द्वारा मानव अधिकारों के अतिक्रमण की शिकायतों के बारे में आयोग स्वप्रेरणा से या किसी अर्जी की प्राप्ति पर- [M.P. P.C.S. (Pre), 2018]

Correct Answer: (c) केंद्रीय सरकार से रिपोर्ट मांग सकेगा
Solution:मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 19 के अनुसार,  आयोग, सशस्त्र बलों के सदस्यों द्वारा मानव अधिकारों के अतिक्रमण  की शिकायतों के बारे में कार्रवाई करते समय निम्नलिखित प्रक्रिया  अपनाएगा, अर्थात (क) आयोग स्वप्रेरणा से या किसी अर्जी की प्राप्ति  पर केंद्रीय सरकार से रिपोर्ट मांग सकेगा (ख) रिपोर्ट की प्राप्ति के  पश्चात आयोग, यथास्थिति, शिकायत के बारे में कोई कार्रवाई नहीं  करेगा या उस सरकार को अपनी सिफारिशें कर सकेगा।

29. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अध्यक्ष कौन है? [M.P. P.C.S. (Pre), 2015]

Correct Answer: (d) पर्यावरण मंत्री
Solution:जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रावधानों के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का गठन सितंबर, 1974 में किया गया। इस अधिनियम के अनुसार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक पूर्णकालिक अध्यक्ष होगा तथा केंद्र सरकार द्वारा पर्यावरण से संबंधित मामलों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव वाले व्यक्ति को अथवा पर्यावरण से संबंधित संस्थानों के प्रशासन के ज्ञान और अनुभव वाले व्यक्ति को इसका अध्यक्ष नामित किया जाएगा।

30. वर्ष 1990 में अनुसूचित जाति एवं जनजाति राष्ट्रीय आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के अत्याचार का कारण नहीं है? [M.P. P.C.S. (Pre), 2015]

Correct Answer: (d) धार्मिक कारण
Solution:वर्ष 1990 में अनुसूचित जाति एवं जनजाति राष्ट्रीय आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के अत्याचार के कारणों में शामिल हैं- भूमि निर्वसन, बंधुआ मजदूरी और ऋणग्रस्तता, जबकि धार्मिक कारण इसमें शामिल नहीं है।