भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आधुनिक भारतीय इतिहास)

Total Questions: 20

1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष कौन थीं? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) एनी बेसेंट
Solution:
  • एनी बेसेंट आयरिश मूल की एक थियोसोफिस्ट और समाज सुधारक थीं। उन्होंने 1917 में कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्षता की और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनीं।
  • वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में और होम रूल लीग आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका के लिए जानी जाती हैं।
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष ब्रिटिश मूल की एनी बेसेंट थीं
  • उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और होमरूल आंदोलन की स्थापना में भी योगदान दिया।
  • एनी बेसेंट आयरिश थे, और वे महिला अधिकारों की समर्थक तथा एक शिक्षाविद् थीं।
  • इसके बाद, पहली भारतीय महिला अध्यक्ष सरोजिनी नायडू थीं, जिन्हें "भारत की कोकिला" कहा जाता है।
  • उन्होंने 1925 में कांग्रेस का अध्यक्ष पद संभाला। सरोजिनी नायडू भारत के पहले गवर्नर भी बनीं और वे स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख नेता थीं। वे एक कवयित्री और राजनीतिक कार्यकर्ता थीं
  • जिन्होंने भारत की राजनीति और सांस्कृतिक जगत में गहरा प्रभाव डाला।
  • स्वतंत्र भारत में पहली महिला अध्यक्ष इंदिरा गांधी थीं, जिन्होंने 1959 में पहली बार कांग्रेस की अध्यक्षता की और बाद में 1978 में दोबारा उस पद पर रहीं।
  • इंदिरा गांधी न केवल कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं, बल्कि वे भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री भी थीं।
  • एनी बेसेंट: पहली महिला अध्यक्ष (1917, कलकत्ता), ब्रिटिश-पृष्ठभूमि, महिला अधिकार समर्थक
  • सरोजिनी नायडू: पहली भारतीय महिला अध्यक्ष (1925), स्वतंत्रता सेनानी, कवयित्री
  • इंदिरा गांधी: स्वतंत्र भारत की पहली महिला अध्यक्ष, पहली महिला प्रधानमंत्री
  • यह तथ्य इतिहास की विभिन्न पुस्तकों और विश्वसनीय स्रोतों से समर्थित हैं.​

2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के निम्नलिखित अधिवेशनों में से किस अधिवेशन की अध्यक्षता पहली बार एक महिला ने की थी ? [MTS (T-I) 02 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) कलकत्ता - 1917
Solution:
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन, 1917 की अध्यक्षता एनी बेसेंट ने की थी, जिससे यह अधिवेशन कांग्रेस के इतिहास में पहली बार किसी महिला द्वारा अध्यक्ष बनने के लिए जाना जाता है।
  • पहली भारतीय महिला अध्यक्ष बनने का गौरव सरोजिनी नायडू को 1925 के कानपुर अधिवेशन में मिला था।
  •  जब श्रीमती एनी बेसेंट ने कलकत्ता में आयोजित 32वें अधिवेशन की अध्यक्षता की।
  • एनी बेसेंट पहली महिला अध्यक्ष थीं और पहली विदेशी महिला थीं जिन्होंने कांग्रेस की अध्यक्षता की।
  • हालांकि, वे भारतीय नहीं थीं, बल्कि आयरलैंड की थियोसॉफिस्ट महिला थीं, जो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय थीं।
  • इसके बाद, पहली भारतीय महिला जो कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं, वह सरोजिनी नायडू थीं जिन्होंने 1925 में कानपुर में हुए अधिवेशन की अध्यक्षता की।
  • सरोजिनी नायडू को 'भारत कोकिला' कहा जाता है और वे कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष थीं।
  • उनके अधिवेशन में हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रयोग करने का निर्णय भी लिया गया था।
  • इस प्रकार, यदि प्रश्न में पूछा जाए कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किस अधिवेशन की अध्यक्षता पहली बार एक महिला ने की थी
  • तो उत्तर 1917 में कलकत्ता के 32वें अधिवेशन में एनी बेसेंट होगी, जबकि पहली भारतीय महिला अध्यक्ष सरोजिनी नायडू थीं जो 1925 के कानपुर अधिवेशन की अध्यक्ष थीं।
  • Other information
  • 1917 का 32वां अधिवेशन, कलकत्ता: अध्यक्ष एनी बेसेंट (पहली महिला अध्यक्ष, विदेशी)।
  • 1925 का 40वां अधिवेशन, कानपुर: अध्यक्ष सरोजिनी नायडू (पहली भारतीय महिला अध्यक्ष)।
  • सरोजिनी नायडू ने हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित किया।
  • एनी बेसेंट ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से योगदान दिया और थियोसोफिकल सोसायटी से जुड़ी थीं.

3. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के निम्नलिखित में से किस अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी अध्यक्ष थे? [Phase-XI 30 जून, 2023 (IV-पाली), GGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) कलकत्ता अधिवेशन, 1886
Solution:
  • दादाभाई नौरोजी INC के तीन बार (1886, 1893, 1906) अध्यक्ष रहे थे। 1886 में कलकत्ता में हुए
  • अधिवेशन में उन्हें पहली बार अध्यक्ष चुना गया था। उन्हें 'ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया' के रूप में जाना जाता है
  • वह भारत के प्रति ब्रिटिश आर्थिक नीतियों की आलोचना करने वाले अग्रणी राष्ट्रवादी थे।
  • दूसरा अधिवेशन, 1886, कलकत्ता (कोलकाता) — इस अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी अध्यक्ष थे। यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दूसरा सत्र था जिसमें उन्होंने अध्यक्ष की भूमिका निभाई।
  • दादाभाई नौरोजी को "ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया" के नाम से जाना जाता है और वे ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमन्स के पहले भारतीय सदस्य भी थे।
  • इस अधिवेशन में उन्होंने कांग्रेस की अध्यक्षता कर महत्वपूर्ण भाषण दिये और कांग्रेस की नीतियों को आकार दिया गया था।
  • लाहौर अधिवेशन, 1893 — दादाभाई नौरोजी ने यहां भी अध्यक्ष पद संभाला था।
  • कलकत्ता अधिवेशन, 1906 — इस अधिवेशन में उन्होंने अध्यक्ष के रूप में ‘स्वराज’ (स्वशासन) को कांग्रेस का प्रमुख लक्ष्य घोषित किया था। इस सत्र में स्वराज, स्वदेशी और राष्ट्रीय शिक्षा जैसे आन्दोलनों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया।
  • इस सत्र का आयोजन बंगाल विभाजन के विरोध में भी हुआ था और यह सत्र कांग्रेस के इतिहास में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • इन तीन अधिवेशनों में दादाभाई नौरोजी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, विशेषकर 1886 के कलकत्ता अधिवेशन में उनकी अध्यक्षता ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक वर्षों को दिशा दी।
  • उन्होंने कांग्रेस में आर्थिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाई और ‘ड्रेन थ्योरी’ के जरिए ब्रिटिश शासन के आर्थिक नुकसान को उजागर किया था।
  • संक्षेप में, दादाभाई नौरोजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष 1886 के कलकत्ता अधिवेशन, 1893 के लाहौर अधिवेशन
  • 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में रहे, जिसमें 1906 के अधिवेशन में उन्होंने स्वराज को कांग्रेस का लक्ष्य घोषित किया था.

4. निम्नलिखित में से किस महिला नेता ने 1890 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन को संबोधित किया था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) कादंबिनी गांगुली
Solution:
  • कादंबिनी गांगुली भारत की पहली महिला स्नातक और चिकित्सक थीं। उन्होंने 1890 के कलकत्ता अधिवेशन को संबोधित किया था
  • कांग्रेस अधिवेशन को संबोधित करने वाली पहली महिला का गौरव प्राप्त किया। यह घटना भारतीय महिलाओं की सार्वजनिक जीवन में बढ़ती भागीदारी का एक महत्वपूर्ण प्रतीक थी।
  • कादम्बिनी गांगुली भारत की पहली महिला डॉक्टरों में से एक थीं और महिला शिक्षा तथा चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी रही हैं।
  • उन्होंने कई सामाजिक बाधाओं के बावजूद महिलाओं के अधिकार और शिक्षा के लिए सक्रिय रूप से काम किया था।
  • कादम्बिनी गांगुली ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1890 के अधिवेशन को संबोधित किया था, जो महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
  • यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष एनी बेसेंट थीं, जिन्होंने 1917 में कलकत्ता के अधिवेशन की अध्यक्षता की थी।
  • हालांकि, 1890 के अधिवेशन को संबोधित करने वाली महिला कादम्बिनी गांगुली ही थीं।
  • वे महिला चिकित्सा एवं शिक्षा में मील का पत्थर थीं और समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए काम करती रहीं।
  • कादम्बिनी गांगुली के योगदान के अतिरिक्त, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में महिलाओं की भूमिका निरंतर बढ़ती रही, जिसमें वर्षों बाद सरोजिनी नायडू जैसे नेताओं ने प्रमुख योगदान दिया।
  • इस प्रकार, कादम्बिनी गांगुली ने 1890 के अधिवेशन में महिलाओं की आवाज़ को मजबूती से प्रस्तुत करने का कार्य किया था।
  • इस प्रश्न का सटीक और विस्तृत जवाब यही है कि 1890 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन को कादम्बिनी गांगुली ने महिला नेता के रूप में संबोधित किया था, जो सामाजिक सुधार और महिला शिक्षा की प्रबल समर्थक थीं

5. निम्नलिखित में से किस अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने साइमन कमीशन का बहिष्कार करने का निर्णय लिया था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) मद्रास अधिवेशन
Solution:
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1927 के मद्रास अधिवेशन में साइमन कमीशन के पूर्ण बहिष्कार का निर्णय लिया था
  • जिसकी अध्यक्षता डॉ. एम.ए. अंसारी ने की थी। कमीशन का बहिष्कार इसलिए किया गया क्योंकि इसमें कोई भी भारतीय सदस्य नहीं था, जिससे भारतीय संवैधानिक भविष्य पर निर्णय लेने की उसकी क्षमता पर सवाल उठाया गया।
  • 1890 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन को संबोधित करने वाली महिला नेता कादम्बिनी गांगुली थीं।
  • कादम्बिनी गांगुली भारत की पहली महिला डॉक्टरों में से एक थीं और महिला शिक्षा तथा चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी रही हैं।
  • उन्होंने कई सामाजिक बाधाओं के बावजूद महिलाओं के अधिकार और शिक्षा के लिए सक्रिय रूप से काम किया था।
  • कादम्बिनी गांगुली ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1890 के अधिवेशन को संबोधित किया था, जो महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
  • यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष एनी बेसेंट थीं, जिन्होंने 1917 में कलकत्ता के अधिवेशन की अध्यक्षता की थी।
  • हालांकि, 1890 के अधिवेशन को संबोधित करने वाली महिला कादम्बिनी गांगुली ही थीं। वे महिला चिकित्सा एवं शिक्षा में मील का पत्थर थीं और समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए काम करती रहीं।
  • कादम्बिनी गांगुली के योगदान के अतिरिक्त, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में महिलाओं की भूमिका निरंतर बढ़ती रही, जिसमें वर्षों बाद सरोजिनी नायडू जैसे नेताओं ने प्रमुख योगदान दिया।
  • इस प्रकार, कादम्बिनी गांगुली ने 1890 के अधिवेशन में महिलाओं की आवाज़ को मजबूती से प्रस्तुत करने का कार्य किया था।
  • इस प्रश्न का सटीक और विस्तृत जवाब यही है कि 1890 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन को कादम्बिनी गांगुली ने महिला नेता के रूप में संबोधित किया था, जो सामाजिक सुधार और महिला शिक्षा की प्रबल समर्थक थीं.
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने साइमन कमीशन के बहिष्कार का निर्णय मद्रास अधिवेशन 1927 में लिया था।
  • यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि साइमन कमीशन में एक भी भारतीय सदस्य शामिल नहीं था, जिससे भारतीय जनता और कांग्रेस का मानना था
  • आयोग भारत की जरूरतों और आकांक्षाओं को सही ढंग से समझने में असमर्थ होगा। इस बहिष्कार ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को और बल दिया।
  • मद्रास अधिवेशन (1927) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 42वां सत्र था, जहां कांग्रेस ने पहली बार पूर्ण स्वराज (पूर्ण स्वतंत्रता) की मांग को सार्वजनिक रूप से उठाया।
  • इस अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्रता प्रस्ताव पेश किया। इसके अलावा, इस अधिवेशन में वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • कांग्रेस ने इस अधिवेशन में स्पष्ट तौर पर साइमन आयोग का हर चरण और हर रूप में बहिष्कार करने का संकल्प लिया।
  • साइमन कमीशन, जिसे भारतीय सांविधिक आयोग भी कहा जाता है, को ब्रिटिश सरकार ने नवंबर 1927 में नियुक्त किया था।
  • इस कमीशन का उद्देश्य भारत के लिए नया संविधान तैयार करना था, लेकिन इसमें भारतीय प्रतिनिधियों को शामिल न करने के कारण पूरे भारत में व्यापक विरोध शुरू हो गया।
  • कांग्रेस के साथ-साथ अन्य राजनीतिक दलों ने भी इस कमीशन का कड़ा विरोध किया और इसे अस्वीकृति का संदेश दिया।
  • इस बहिष्कार के कारण पूरे देश में कई विरोध प्रदर्शन और आंदोलन हुए, जिससे ब्रिटिश सरकार की नीतियों को सीधे चुनौती मिली।
  • मद्रास अधिवेशन और इसके बहिष्कार ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा प्रदान की, जो बाद में असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलनों की नींव बनीं।
  • इस प्रकार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1927 के मद्रास अधिवेशन में साइमन कमीशन के बहिष्कार का निर्णय लिया, जिसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक महत्वपूर्ण मोड़ प्रदान किया.​

6. अखिल भारतीय मजदूर संघ कांग्रेस (All India Trade Union Congress) ने श्रमिकों के काम करने और रहने की स्थिति में सुधार के लिए काम किया। इसके प्रमुख नेताओं में से एक ....... थे। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) एन.एम. जोशी
Solution:
  • एन.एम. जोशी (नारायण मल्हार जोशी)। वह भारत में ट्रेड यूनियन आंदोलन के संस्थापकों में से एक थे और उन्होंने 1920 में स्थापित AITUC के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • उन्होंने सामाजिक सेवा मजदूरों के अधिकारों के लिए भी व्यापक रूप से कार्य किया।
  • अखिल भारतीय मजदूर संघ कांग्रेस  भारत का पहला केंद्रीय ट्रेड यूनियन संगठन है, जिसकी स्थापना 1920 में हुई थी।
  • इसका उद्देश्य भारत के श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके कामकाज और जीवन की स्थिति में सुधार लाना है।
  • इसकी स्थापना के समय और बाद में इसके कई प्रमुख नेता रहे, जिनमें सबसे मशहूर लाला लाजपत राय थे
  • जिन्होंने श्रमिकों के हितों के लिए काम किया। इनमें से कुछ नेताओं में गोपाल रामानुजम, पी. एस. अंबेडकर, और गी. संजीव रेड्डी शामिल हैं।
  • ये नेता श्रमिकों की बेहतर कार्य स्थितियों, वेतन समानता (विशेषकर महिलाओं के लिए पुरुषों के बराबर वेतन), और श्रमिकों के सामाजिक-आर्थिक अधिकारों के लिए सक्रिय रहे।
  • श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने, उनके काम करने की घड़ी कम करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संगठित संघर्ष किए।
  • भारत में औद्योगिक विकास के साथ बढ़ती श्रमिक समस्याओं जैसे कम वेतन, लंबी कार्य घंटे, और खराब कार्य वातावरण के खिलाफ आवाज उठाई।
  • यह संगठन श्रमिकों के लिए विभिन्न आंदोलनों और जन आंदोलन का नेतृत्व करता रहा है जिसमें श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा और बेहतर मौलिक सुविधाएँ उपलब्ध कराना शामिल है।
  • संक्षेप में, अखिल भारतीय मजदूर संघ कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में लाला लाजपत राय प्रमुख थे, जिनके नेतृत्व में यह संगठन भारतीय श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा में अग्रणी रहा है
  • आज भी श्रमिकों के काम करने और रहने की स्थिति में सुधार के लिए काम कर रहा है। इसके अन्य नेता भी संगठन को मजबूत बनाने और श्रमिक हित में नीति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
  • इस प्रकार अखिल भारतीय मजदूर संघ कांग्रेस श्रमिक आंदोलन का एक प्रमुख संस्थान रहा है जिसने कार्यस्थल की स्थितियों में सुधार के लिए प्रेरित किया और भारतीय श्रमिक वर्ग के लिए आवाज़ उठाई है.​

7. अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (All-India Trade Union Congress) के प्रथम अध्यक्ष कौन थे ? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) लाला लाजपत राय
Solution:
  • लाला लाजपत रायAITUC की स्थापना 1920 में बॉम्बे में हुई थी और इसके पहले अधिवेशन की अध्यक्षता प्रमुख राष्ट्रवादी नेता लाला लाजपत राय ने की थी। यह भारत में संगठित मजदूर आंदोलन की शुरुआत थी।
  • Other Information
  • अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) भारत में सबसे पुराना ट्रेड यूनियन संघ है।
  • यह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ा हुआ है।
  • इसकी स्थापना 31 अक्टूबर 1920 को प्रथम अध्यक्ष के रूप में लाला लाजपत राय के साथ हुई थी।
  • बॉम्बे, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत में स्थापित AITUC का गठन 1920 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा राष्ट्र संघ के अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया गया था।
  • 1920 के दशक के दौरान, ब्रिटिश कम्युनिस्टों ने ट्रेड यूनियनों को संगठित करने की कोशिश में संघ के अधिकांश हिस्से पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया, लेकिन कई विरोधी गुट बाद में अलग हो गए।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कम्युनिस्टों ने पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लिया, लेकिन सोवियत संघ के युद्ध में प्रवेश करने के बाद ब्रिटेन के साथ युद्ध के प्रयासों का समर्थन करने के लिए इसने कुछ लोकप्रिय समर्थन खो दिया।
  • तब से, AITUC नेताओं को सुधारवादी और क्रांतिकारी गुटों में विभाजित कर दिया गया है।
  • लाला लाजपत राय के साथ-साथ इस संगठन के अन्य संस्थापक सदस्यों में जोसेफ बैपटिस्टा और दीवान चमनलाल भी शामिल थे
  • जो क्रमशः उपाध्यक्ष और महासचिव चुने गए थे। AITUC का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों को सामूहिक सौदेबाजी के माध्यम से बेहतर कामकाजी स्थितियां और अधिकार प्रदान करना है।
  • यह संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ा हुआ है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान श्रमिकों के हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

8. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की घोषणा करने वाला प्रस्ताव पारित किया गया था? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (I-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (I-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) लाहौर
Solution:
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ऐतिहासिक 1929 के लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में 'पूर्ण स्वराज' (पूर्ण स्वतंत्रता) का प्रस्ताव पारित किया गया था।
  • इस प्रस्ताव के बाद 26 जनवरी 1930 को पहला 'स्वतंत्रता दिवस' मनाने का निर्णय लिया गया।
  • यह अधिवेशन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है
  • क्योंकि इसी में स्वतंत्रता की मांग को एक नई दिशा दी गई। अधिवेशन के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू चुने गए थे
  • जिनका इस आंदोलन में प्रमुख योगदान था।
  • पूर्ण स्वराज का मतलब था "संपूर्ण स्वशासन" या "पूर्ण स्वतंत्रता"। इससे पहले कांग्रेस ने सीमित स्वायत्तता की मांग की थी
  • लेकिन इस अधिवेशन में इसे छोड़कर पूर्ण स्वतंत्रता को ही अंतिम लक्ष्य घोषित किया गया।
  • साथ ही लाहौर अधिवेशन में गोलमेज सम्मेलन का बहिष्कार भी घोषित किया गया, जो इंग्लैंड के साथ भारत की राजनीतिक स्थिति पर वार्ता करने के लिए बुलाया गया था।
  • अधिवेशन ने कांग्रेस कार्यसमिति को सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ करने का पूर्ण जिम्मा सौंपा, जिसमें करों का भुगतान रोकना, सरकारी सेवाओं का बहिष्कार करना शामिल था।
  • इस आंदोलन का उद्देश्य भारतीय जनता को ब्रिटिश शासन के खिलाफ संगठित रूप से खड़ा करना था
  • भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा प्रदान करना था। उक्त लाहौर अधिवेशन ने भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष को राजनीतिक
  • सामाजिक दोनों स्तरों पर व्यापक जन समर्थन दिलाने में अहम भूमिका निभाई.​

9. 26 जनवरी को संविधान के उद्घाटन की तारीख के रूप में चुना गया था, क्योंकि 1930 में इसी तारीख को, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ....... का खुलासा किया था। [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) पूर्ण स्वराज आंदोलन
Solution:
  • पूर्ण स्वराज आंदोलन। 1929 के लाहौर संकल्प के बाद, 26 जनवरी 1930 को देश भर में 'पूर्ण स्वराज दिवस' मनाया गया था।
  • इसी दिन की ऐतिहासिक महत्ता को बनाए रखने के लिए भारतीय गणराज्य के संविधान को 26 जनवरी 1950 को लागू किया   गया।
  •  इस अधिवेशन में यह घोषणा हुई तो भारत स्वयंसिद्ध रूप से पूर्ण स्वतंत्र घोषित कर दिया जाएगा।
  • जिसे बाद में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाने का निर्णय हुआ था। भारतीय संविधान को 26 जनवरी 1950 को लागू करने का उद्देश्य इस ऐतिहासिक दिन को यादगार बनाना था, जो भारतीय स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में माना गया.​
  • लाहौर अधिवेशन 1929-1930
    • दिसंबर 1929 में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन हुआ, जिसमें पंडित जवाहरलाल नेहरू अध्यक्ष थे।
    • इस अधिवेशन में "पूर्ण स्वराज" का प्रस्ताव पारित कर स्वतंत्रता की मांग को जोरदार रूप में उठाया गया।
    • 26 जनवरी 1930 को इसे देशभर में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया गया, और पहली बार इस दिन को ऐसे महत्व के साथ मनाया गया।
  • संविधान का 26 जनवरी को लागू होना
    • भारतीय संविधान सभा द्वारा संविधान 26 नवंबर 1949 को पारित किया गया, लेकिन इसे 26 जनवरी 1950 से लागू किया गया।
    • यह तिथि इसलिए चुनी गई ताकि संविधान के लागू होने वाला दिन कांग्रेस के पहले घोषित पूर्ण स्वराज दिवस से जुड़ा रहे।
    • इस प्रकार 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो भारत के लोकतंत्र और संप्रभुता का प्रतीक है।
  • महत्व
    • 26 जनवरी 1930 का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था।
    • इस दिन की ऐतिहासिक भूमिका को सम्मान देते हुए संविधान लागू करने की तारीख इस दिन को चुनी गई।
    • यह दिन आज भी देश में राष्ट्रीय गर्व और लोकतांत्रिक अधिकारों के जश्न के रूप में मनाया जाता है।
    • इस प्रकार 26 जनवरी को संविधान का उद्घाटन करने का चुनाव भारतीय स्वतंत्रता के प्रति कांग्रेस के 1930 के "पूर्ण स्वराज" की घोषणा के कारण किया गया था, जो एक प्रेरणादायक और प्रतीकात्मक दिन है।​

10. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के किस अधिवेशन में भारत छोड़ो प्रस्ताव स्वीकार किया गया था ? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) बंबई
Solution:
  • भारत छोड़ो प्रस्ताव को 8 अगस्त 1942 को बंबई के गोवालिया टैंक मैदान में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के अधिवेशन में स्वीकार किया गया था।
  • इस प्रस्ताव ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' की शुरुआत की और महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' का नारा दिया था।
  • भारत छोड़ो आंदोलन:
    • 8 अगस्त 1942 को, महात्मा गांधी ने मुंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सत्र में ब्रिटिश शासन को समाप्त करने का स्पष्ट आह्वान किया और भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया।
    • जवाहरलाल नेहरू द्वारा वर्ष 1942 में कांग्रेस के बॉम्बे सत्र में 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पेश किया गया था।
    • गांधीजी ने गोवालिया टैंक मैदान, जिसे अब अगस्त क्रांति मैदान के नाम से जाना जाता है, में दिए अपने भाषण में 'करो या मरो" का नारा दिया था।
    • स्वतंत्रता आंदोलन की 'ग्रेड ओल्ड लेडी' के नाम से मशहूर अरुणा आसफ अली को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान में भारतीय ध्वज फहराने के लिए जाना जाता है।
    • भारत छोड़ो' का नारा यूसुफ मेहर अली द्वारा दिया गया था, जो एक समाजवादी और ट्रेड यूनियनवादी थे, जिन्होंने मुंबई के मेयर के रूप में भी काम किया था।
    • मेहरअली हार्बर ने "'साइमन गो बैक" का नारा भी दिया।
      Other Information
  • कलकत्ता: 1928 में कलकत्ता में आयोजित सत्र नेहरू रिपोर्ट को अपनाने के लिए महत्वपूर्ण था, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर भारत के लिए एक प्रभुत्व का दर्जा प्रस्तावित किया था।
  • दिल्ली: 1918 में दिल्ली में आयोजित सत्र मोटागु-चेम्सफोर्ड सुधारों को अपनाने के लिए महत्वपूर्ण था, जिसने भारत में सीमित स्वशासन की शुरुआत की।
  • मद्रास: 1927 में मद्रास में आयोजित सत्र मौलिक अधिकारों और आर्थिक नीति पर प्रस्ताव को अपनाने के लिए महत्वपूर्ण था, जिसमें नागरिक स्वतंत्रता की सुरक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया था।
  • बॉम्बे: 1942 में बॉम्बे में आयोजित सत्र भारत छोड़ो प्रस्ताव को अपनाने के लिए महत्वपूर्ण था, जिसमें भारत से ब्रिटिश शासन की तत्काल वापसी का आह्वान किया गया था।