Correct Answer: (a) कलकत्ता अधिवेशन, 1886
Solution:- दादाभाई नौरोजी INC के तीन बार (1886, 1893, 1906) अध्यक्ष रहे थे। 1886 में कलकत्ता में हुए
- अधिवेशन में उन्हें पहली बार अध्यक्ष चुना गया था। उन्हें 'ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया' के रूप में जाना जाता है
- वह भारत के प्रति ब्रिटिश आर्थिक नीतियों की आलोचना करने वाले अग्रणी राष्ट्रवादी थे।
- दूसरा अधिवेशन, 1886, कलकत्ता (कोलकाता) — इस अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी अध्यक्ष थे। यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दूसरा सत्र था जिसमें उन्होंने अध्यक्ष की भूमिका निभाई।
- दादाभाई नौरोजी को "ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया" के नाम से जाना जाता है और वे ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमन्स के पहले भारतीय सदस्य भी थे।
- इस अधिवेशन में उन्होंने कांग्रेस की अध्यक्षता कर महत्वपूर्ण भाषण दिये और कांग्रेस की नीतियों को आकार दिया गया था।
- लाहौर अधिवेशन, 1893 — दादाभाई नौरोजी ने यहां भी अध्यक्ष पद संभाला था।
- कलकत्ता अधिवेशन, 1906 — इस अधिवेशन में उन्होंने अध्यक्ष के रूप में ‘स्वराज’ (स्वशासन) को कांग्रेस का प्रमुख लक्ष्य घोषित किया था। इस सत्र में स्वराज, स्वदेशी और राष्ट्रीय शिक्षा जैसे आन्दोलनों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया।
- इस सत्र का आयोजन बंगाल विभाजन के विरोध में भी हुआ था और यह सत्र कांग्रेस के इतिहास में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
- इन तीन अधिवेशनों में दादाभाई नौरोजी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, विशेषकर 1886 के कलकत्ता अधिवेशन में उनकी अध्यक्षता ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक वर्षों को दिशा दी।
- उन्होंने कांग्रेस में आर्थिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाई और ‘ड्रेन थ्योरी’ के जरिए ब्रिटिश शासन के आर्थिक नुकसान को उजागर किया था।
- संक्षेप में, दादाभाई नौरोजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष 1886 के कलकत्ता अधिवेशन, 1893 के लाहौर अधिवेशन
- 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में रहे, जिसमें 1906 के अधिवेशन में उन्होंने स्वराज को कांग्रेस का लक्ष्य घोषित किया था.